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samvad 3rd

Published by KV2 NAUSENABAUGH, 2021-11-24 06:40:41

Description: samvad 3rd

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सरंक्षण और मार्दग र्नग श्री के . र्र्ीनद्रन उपायकु ्त जे एस वी लक्ष्मी, सहायक आयकु ्त वी र्ौरी , सहायक आयकु ्त प्रभुदास , सहायक आयकु ्त अलका श्रीननवास, सहायक आयकु ्त















कु ल पषृ ्ठ - 48

कें द्रीय ववद्यालय सरं ्ठन : पररचय स्कू लों को पणू तग ा प्रदान करने हेतु कंे द्रीय विद्यालय संगठन का गठन ककया। कंे द्रीय विद्यालय संगठन भारतीय इनका पाठ्यक्रम कंे द्रीय माध्यशमक सरकार के मानि ससं ाधन विकास शशक्षा बोड़ग CBSE के अतं गतग स्थावपत मतं ्रालय (MHRD) के अतं गतग आने िाला ककया गया। विद्यालयों मंे भारत के राष्ट्रीय एक स्िायत्तशासी सगं ठन हंै। । जो कक शजै क्षक अनसु धं ान और प्रशशक्षण पररषद भारत की सबसे बड़ी स्कू लों की के पाठ्यक्रम का अनसु रण होता है। सभी श्खंर लाओं में से एक है।जजसकी स्थापना के न्द्रीय विद्यालयों का सचं ालन के न्द्रीय भारतीय शशक्षा प्रणाली को प्रभािशाली विद्यालय सगं ठन नाम की ससं ्था करती बनाने एिं शशक्षा के क्षेत्र मंे व्यापकता है। लाने के शलए की गयी थी। कंे द्रीय ववद्यालय संर्ठन की संरचना--- इस संगठन के शनमाणग का सबसे बड़ा कंे द्र ने इस सगं ठन के क्षेत्र को तीन िगों उद्देश्य स्थानांतररत पदों में कायरग त मंे विभाजजत ककया- कें द्रीय स्तर क्षते ्रीय कमचग ाररयों के बच्चों को समान स्तर एिं स्तर और स्थानीय स्तर। इन सभी स्तरों समान पाठ्यक्रम की शशक्षा देने हेतु के अंतगतग विशभन्न सशमशतयों एिं ककया गया था। इस प्रकार की शशक्षा हेतु शनकायों की भी स्थापना की गई जो इस सिपग ्रथम “रेजीमंेट स्कू लों” की स्थापना प्रकार हंै – की गई। 1963 मंे इन स्कू लों की सखं ्या 1) कंे द्रीय स्तर – कें द्रीय स्तर के अतं गतग लगभग 20 थी। दो शनकायों की व्यिस्था की गई हंै- 1965 में कंे द्रीय सरकार ने ऐसे कमचग ाररयों के बच्चो को शशक्षा प्रदान करने हेतु ऐसे कई विद्यालयों की स्थापना करनी शरु ू की जजनका सबं ंध सीधंे कें द्र से था। भारतीय सरकार ने सिपग ्रथम 20 रेजीमंटे स्कू लों को शशक्षा विभाग के अंतगतग सजममशलत ककया। इन्हंे ही कंे द्रीय विद्यालयों का दजाग कदया गया। ऐसे

सामान्य शनकाय और प्रशासशनक सशमशत का शनमाणग ककया जाता हैं। शनकाय। जजसमे मजु खया के तौर पर जजलाशधकारी भशू मका शनभाता है। सामान्य शनकाय – सामान्य शनकाय के अंतगतग उच्च अशधकारी आते हैं। इसके कंे द्रीय ववद्यालय संर्ठन के कायग चये रमनै मानि ससं ाधन विकास मंत्रालय का मंत्री होता हंै और उसके कें द्रीय विद्यालय संगठन कंे द्रीय राज्यमतं ्री किप्टी चये रमनै पद पर विद्यालयों के नीशत-शनमाणग एिं कायो के आसीन होते हंै। इनके सदस्यों मंे अनके ो उत्तम कक्रयान्ियन हेतु शनरंतर प्रयासरत क्षते ्र के मतं ्री भी सजममशलत होते हंै। रहता हैं। यह कंे द्रीय विद्यालयों को उनकी आिश्यकतानसु ार अनदु ान प्रदान करने प्रशासशनक शनकाय – इसके अंतगतग 11 का भी कायग करता है। निीन कें द्रीय सदस्य आते हैं। जजसमें 1 कशमश्नर , 5 विद्यालयों की स्थापना हेतु अपनी मजं ूरी उप-कशमश्नर , 2 जॉइंट कशमश्नर एिं 3 देना एिं मानदंिों का शनमाणग करना, अन्य सदस्य होते हंै। इसके अंतगतग तीन शनरीक्षण करना आकद। सशमशतया कायग करती हंै – वित्त सशमशत,शनमाणग सशमशत और सलाहकार यह सह-पाठ्यक्रम सामग्री की योजना सशमशत। बनाने एिं कें द्रीय विद्यालयों के अध्यापकों एिं प्रधानाचायो की शनयवु ि 2) क्षेत्रीय स्तर – क्षेत्रीय स्तर पर उच्च एिं उनके स्थानांतरण में भी अपनी अशधकारी तीन शजै क्षक अशधकारी एिं भशू मका शनभाता हंै। अन्य कमचग ारी कायग करते हंै। क्षते ्रीय स्तर पर गकठत होने िाली CBSE की के न्द्द्रीय ववद्यालय का नमर्न परीक्षाओं का सफल शनमाणग एिं कक्रयान्ियन का उत्तरदाशयत्ि इन के न्द्रीय विद्यालयों के प्रमखु चार शमशन अशधकाररयों पर ही होता हंै। इस प्रकार है- 1. रक्षा तथा अधसग शै नक बलों के काशमकग ों सकहत के न्द्रीय सरकार 3) स्थानीय स्तर – स्थानीय स्तर के के स्थानांतरणीय कमचग ाररयों के बच्चों शशक्षा की व्यिस्था हेतु कें द्रीय विद्यालय को शशक्षा के एक समान पाठ्यक्रम के सगं ठन (KVS) द्वारा विद्यालय प्रबधं न तहत शशक्षा प्रदान कर उनकी शजै क्षक आिश्यकताओं को परू ा करना ।

2.विद्यालयी शशक्षा को उत्कर ष्टता के विदेश में तीन के न्द्रीय विद्यालय शशखर पर पहँुचाना । काठमांिू , मास्को ि तेहरान में जस्थत हंै।जजनमें भारतीय दतू ािासों के 3.के न्द्रीय माध्यशमक शशक्षा बोिग कमचग ाररयों तथा अन्य प्रिासी भारतीयों (सी.बी.एस.सी.) राष्ट्रीय शजै क्षक के बच्चे पढ़ते हंै। अनसु धं ान एिं प्रशशक्षण पररषद् (एन.सी.ई.आर.टी.) इत्याकद जसै े अन्य सभी कें द्रीय विद्यालय 25 क्षेत्रों मंे शनकायों के सहयोग से शशक्षा के क्षते ्र मंे विभाजजत हैं। हर क्षते ्र के सभी कंे द्रीय नए-नए प्रयोग तथा निाचार को विद्यालय एक किप्टी कशमश्नर के अधीन सजममशलत करना। होते हंै।.. 4. बच्चों में राष्ट्रीय एकता और कें द्रीय विद्यालय सगं ठन का ध्येय िाक्य ’भारतीयता’ की भािना का विकास 'तत ्त्िं पषू न ्अपािणर ु' भी कहंदू ज्ञान- करना। परंपरा के िाहक ग्रंथ ईशािस्योपशनषद् से शलया गया है, जजसका अथग है- हे सयू ग ितमग ान मंे भारत मंे कु ल 1,248 कें द्रीय ज्ञान पर छाए आिरण को हटाएं। विद्यालय है। जजनमें करीब 1393668 विद्याथी पढ़ रहे हैं। 48314 कमचग ारी उपयोनर्ता कायरग त हंै। 11 अक्टू बर 2019 को 21 नए कंे द्रीय विद्यालय देश के कु ल 13 राज्यों ि स्थानांतररत कमचग ाररयों के बच्चों के कें द्रशाशसत प्रदेशों में खोले गए। कंे द्रीय भविष्य को सरु जक्षत रखता हंै, साथ ही विद्यालय संगठन के अनसु ार इतनी बड़ी शशक्षा के अशधकार की पशू तग करता हंै। सखं ्या में पहली बार कंे द्रीय विद्यालयों के नए भिनों का एक साथ उद्घाटन हुआ है। यह एक राष्ट्र एक पाठ्यक्रम की नीनत के इन नए स्कू ल खलु ने से 22 हजार से अनरु ूप कायग करता है। यह कक्षा 6 से 8 ज्यादा विद्याशथयग ों को फायदा शमला। ये तक के छात्रों हेतु ससं ्कृ त की अननवायतग ा भिन करीब 398 करोड़ रुपये की लागत पर बल देता हैं। जजससे छात्रों का से तयै ार ककए गए।. सांस्कृ नतक ववकास ककया जा सकंे एवं भारतीय ससं ्कृ नत को सरु जक्षत रखा जा सकंे ।

कें द्रीय ववद्यालय संर्ठन की ववर्ेषताएं ज्यादा अनािश्यक पाठ्य सहगामी कक्रयाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जो काफी सभी कंे द्रीय विद्यालयों के शलए सामान्य हद तक पढ़ाई की गणु ित्ता को नकु सान पाठ्य पसु ्तकें और कद्वभाषी माध्यम। पहुंचा रही है, अध्यापकों में अशत कायग दबाि से किप्रशे न, आम बात है, यही सभी के न्द्रीय विद्यालय कें द्रीय िजह है कक लगातार नई शनयवु ि के माध्यशमक शशक्षा बोिग से सबं द्ध हंै। बािजदू के वि छोड़कर जाने िाले अध्यापकों की एक बहुत बड़ी तादाद है। सभी कें द्रीय विद्यालय सह-शजै क्षक, समग्र जजसे रोकने की शायद ही कभी कोशशश विद्यालय हंै। की गई हो। छठी से आठिीं कक्षा तक संस्कर त ननष्कषग – अशनिायग रूप से पढ़ाई जाती है। यह भारतीय शशक्षा प्रणाली को मजबतू ी एक उपयिु शशक्षक-शशष्य अनपु ात द्वारा एिं कदशा प्रदान करने िाली एक शशक्षण की गणु ित्ता को यथोशचत रूप से स्िायत्तशासी संस्था हंै। जो सभी को उच्च रखा जाता है। शशक्षा के समान अिसर प्रदान करने हेतु शनरंतर कायग करता हैं। यह कक्षा 8 तक सराहना सभी छात्रों को शनशलु ्क शशक्षा प्रदान करता है और साथ भी मेधािी एिं गरीब के न्द्रीय विद्यालयों की छात्रों के चहुमखुग ी िगग के बच्चों हेतु छात्रिशर त की भी विकास करने के शलए सराहना की जाती व्यिस्था करता हैं। है। शशक्षा के स्तर को भी अच्छा माना जाता है। इन विद्यालयों मंे विशभन्न सतं ोष देवी आशथकग जस्थशतयों ि देश के विशभन्न भागों के लोगों के बच्चे एक साथ पढ़ते प्रनर्जक्षत स्नातक नर्जक्षका कहंदी हैं। जजससे की छात्रों के व्यवित्ि का संतुशलत विकास होता है। ****************** आलोचना के न्द्रीय विद्यालयों में शशक्षा का स्तर सभी जगह समान न होना उनकी शनदं ा का कारण बनता है।आजकल पढ़ाई से

कहंदी साकहत्य की ववधाएँ आधाररत होती है। इसे एक अकं का नाटक भी कहा जा सकता कहंदी साकहत्य की विधाएुँ से हमारा है। एकांकीकार अपनी रचना तात्पयग यह है कक कक्षा मंे साकहत्य द्वारा एक ही उद्देश्य को प्रदशशतग के विशभन्न विधाओं का इस्तेमाल करता है। यह जजज्ञासापणू ग ि करके साकहत्य को रुशचकर बनाया जा कु तहू लमय नाटक शलै ी होती सकता जजससे पाठ्य सामग्री के रुप है। में विशभन्न प्रकार के कौशलों का प्रशसद्ध एकांकीकार:- विकास ककया जा सकता है। 1. जयशकं र प्रसाद कहंदी साकहत्य की विधाएँु:- 2. िॉ. राम कु मार िमाग 3. उपदें ्रनाथ अश्क • नाटक :- इसका प्रदशनग 4. उदय शकं र भट्ट रंगमंच पर होता है। जो ककसी * उपन्यास:- उपन्यास का विशषे घटनाओं का अनकु रण शाजददक अथग है – सामने रखना। कर पात्रों के माध्यम से ि उपन्यास िह कर शत है जजसे पढ़कर अपने हाि-भाि से उस घटना पाठकको लगने लगता है कक यह का अनकु रण करते हुए दशकग ों उसके जीिन की कथा है। उपन्यास को घटनाओं से रुबरु कराते है। मानि जीिन की काल्पशनक कथा अपने अशभनय से नाटक को होती है। उपन्यास का उद्देश्य मानि सजीि कर देते हैं। इसमंे चररत्र पर प्रकाश िालना होता है। अशभनय करने िालों को अशभनेता – अशभनवे त्र कहते हंै। प्रशसद्ध उपन्यासकार:- प्रशसद्ध नाटक कार :- 1. मशंु ी प्रेमचदं 1. जयशकं र प्रसाद 2. हजारीप्रसाद कद्विेदी 2. जगदीश चंद्र माथरु 3. जनै ेदं ्र कु मार 3. उपंदे ्र्नाथ माथरु 4. जयशकं र प्रसाद 4. उदय शकं र भट्ट ‘मशंु ी प्रेमचदं को ‘उपन्यास सम्राट’ ‘ जयशकं र प्रसाद ‘ को ‘नाटक कहा जाता है। सम्राट’ कहते हंै। • शनबंध :- शनबंध उस विधा को कहते हंै जमाँु ककसी एक विषय • एकांकी :- यह एक ऐसी दृश्य का िणनग सीशमत आकारके विधा है जो एक अंक पर

भीतर ककया जाता है। इसमें शलखते हंै। इसमंे अपने अतीत एक-एक िाक्य को सवु ्यिजस्थत का विश्लषे ण करता है। एिं सोच-विचारकर शलखना प्रशसद्ध आत्मकथाकार :- पड़ता है। शनबंध हमेशा 1. दयानंद सरस्िती सरु ुशचपणू ग ,आकषकग एिं 2. राहुल सांकर त्यायन व््िजस्थत होना चाकहए। 3. यशपाल प्रशसद्ध शनबधं कार:- 4.सशु मत्रानदं न पतं 1. भारतेंदु हररश्चंद्र • जीिनी :- लेखक जब ककसी अन्य व्यवि के जीिन के बारे 2. बाबू गुलाब राय में शलखता है तो उसे जीिनी 3. हजारी प्रसाद कद्विदे ी कहते हैं। ककसी व्यवि के 4. महािीर प्रसाद कद्विेकद जीिन की महत्िपणू ग घटनाओं * कहानी:- कहानी िह रचना है को रुशचपिू कग प्रस्ततु करना ही जजसमंे जीिन की ककसी जस्थशत का जीिनी कहलाता है। सजीि िणनग होता है। कहानी सच्ची प्रशसद्ध जीिनीकार:- ि काल्पशनक भी हो सकती है। कहानी 1. विष्णु प्रभाकर छोटी-सी होते हुए भी ससु ंगकठत होती 2.जनै ेंद्रकु मार है।कहानी मे6 मनोभािों को प्रदशशतग 3.रामिकर ्ष बेनीपरु ी ककया जाता है। 4.संपणू ानग ंद प्रशसद्ध कहानीकार :- • यात्रा ितर ांत :- लखे क जब 1. मंशु ी प्रेमचंद अपने जीिन में की गई यात्रा 2. जयशकं र प्रसाद का या देखे हुए स्थलों का िणनग 3. जैनदें ्र कु मार करता है तब उसे यात्रा ितर ांत 4. ककशोरी लाल गोस्िामी कहते हैं। इसमे लखे क ‘मशंु ी प्रमे चदं ’ को ‘कहानी सम्राट’ भी आत्मीयता ि शनजता के साथ कहा जाता है। िणनग करता है। इसमें स्थान, • आत्मकथा :- आत्मकथा मंे दृश्य,घटनाएँु तथा व्यकशत से स्ियं लखे क अपने जीिन के संबशं धत स्मशर तयों को शचत्रण बारे मंे बके हचक शलखते हंै। िह ककया जाता है। अपने बीते समय के बारे मंे प्रशसद्ध लेखक:-

1. काका कालेलकर • कविता :- कविता मिु छं द मंे 2. राहुला सांकर त्यायन शलखी जाती है। कविता कम- 3. सजच्चदानंद हीरानदं से-कम शददों मे अशधक गहरी िात्स्यायन ‘अज्ञेय’ बात को कहने की विधा है। 4. फणीश्वरनाथ रेणु कविता काल्पशनक होने पर भी • रेखाशचत्र:- जब ककसी व्यवि, ऐसे प्रशतत होते हैं जसै े आँुखों िस्तु , स्थान , घटना , दृश्य , के सामने घकटत हो।कविता का िणनग इस तरह ककया जाता का अनिु ाद ककठन होते हुए है कक पाठक के मन में अंककत भी सरस होता है। हो जाते हंै। प्रशसद्ध कवि:- प्रशसद्ध रेखशचत्र:- 1. सभु द्रा कु मारी चौहान 1. महादेिी िमाग 2. हररिशं राय बच्चन 2. रामिकर ्ष बेनीपरु ी 3. सिशे ्वर दयाल सक्सने ा 3. शशिपजू न सहाय 4. रामधारी शसंह कदनकर 4. कर ष्णा सोबती • संस्मरण:- जब लखे क ककसी साकहत्य की व्यवि के जीिन में घटी घटना इन विधाओं से पररचय कराने को , दृश्य को याद करके उसका का मात्र उद्देश्य यह है कक िणनग करता है तो उसे संस्मरण आप इन विधाओं के माध्यम कहते हंै।जब लेखक का उस से अपने पाठ्यक्रम को रोचक व्यवि के साथ व्यविगत संबंध बना कर साकहत्य को सरस हो तभी शलखा सिे हैं , इसमंे बना सकते है। लखे क अपने मन से या कल्पना के माध्यम से कु छ भी नहीं श्रीमती टी.मालती शलखा सकता है। टी.जी.टी कहंदी प्रशसद्ध ससं ्मरण :- 1. रामनरेश वत्रपाठी 2. माखंलाल चतुिदे ी 3. विष्णु प्रभाकर 4. महादेिी िमाग

राजभाषा प्रश्नोत्तरी (घ) पररप्रके ्ष्य, पररशशष्ट, पयटग न, पािती प्रश्न 1.) प्रशतिषग 10 जनिरी को विश्व प्रश्न 4) भारतीय सवं िधान के अनचु ्छे द कहंदी कदिस मनाया जाता है। विश्व कहंदी 343 से 351 तक राजभाषा नीशत सबं ंधी कदिस ककस िषग से मनाना आरंभ ककया प्रािधान है । उपरोि अनचु ्छे द भारतीय ? संविधान के ककस भाग से हंै ? (क) 1949 (क) 5 (ख) 1953 (ख) 6 (ग) 2006 (ग) 17 (घ) 1950 (घ) 12 प्रश्न 2) राजभाषा शनयम 1976 के प्रश्न 5) 'दयरू ो' कदए गए कहंदी शदद का अनसु ार भारत में राज्य ि कें द्र शाशसत सही अंग्रेजी अथग चशु नए- प्रदेशों को भाषा की दृवष्ट से तीन भागों (क,ख,ग) मंे बांट कदया गया। 'क' क्षते ्र मंे (क) Organisation आने िाले राज्य का चयन कीजजए। (ख) Institution (क) गजु रात (ग) Area (ख) छत्तीसगढ़ (घ) Bureau (ग) पजं ाब प्रश्न 6) राजभाषा शनयम 1976 के (घ) आंध्र प्रदेश अनसु ार 'क' क्षेत्र मंे 11 राज्य ि कंे द्र शाशसत प्रदेश आते हंै, 'ख' क्षते ्र में 6 राज्य प्रश्न 3) शददकोश के अनसु ार शददों का ि कंे द्र शाशसत प्रदेश आते हैं, शषे राज्य ि सही क्रम छांकटए। कंे द्र शाशसत प्रदेश 'ग' क्षते ्र मंे आते हैं। शनमनशलजखत मंे से कौन-सा राज्य या (क) पािती, पररशशष्ट, पररप्रेक्ष्य, पयटग न कंे द्र शाशसत प्रदेश 'ग' क्षेत्र मंे नहीं आता ? (ख) पररप्रके ्ष्य, पयटग न, पािती, पररशशष्ट (ग) पयटग न, पािती, पररशशष्ट, पररप्रके ्ष्य

(क) चंिीगढ़ (ग) कायसग चू ी, कायागलय, कालांश, (ख) नागालिंै क्रमानसु ार (ग) के रल (घ) तशमलनािु (घ) कालांश, कायसग चू ी, क्रमानसु ार, प्रश्न 7) 'संदभ'ग कदए गए कहंदी शदद का कायागलय सही अंग्रेजी अथग चशु नए- (क) Account प्रश्न 10) भारतीय संविधान के भाग 5, 6 (ख) Content और 17 मंे राजभाषा का उल्लेख है। (ग) Count ससं द मंे प्रयोग की जाने िाली भाषा का (घ) Context उल्लखे ककस भाग मंे है ? प्रश्न 8) ितनग ी की दृवष्ट से शदु ्ध शदद का चयन कीजजए- (क) 5 (क) विभाशगय (ख) विभागीय (ख) 6 (ग) िीभाशगय (घ) विभाजयय (ग) 17 प्रश्न 9) शददकोश के अनसु ार शददों का सही क्रम छांकटए। (घ) उपरोि सभी (क) क्रमानसु ार, कायालग य, कालांश, कायसग चू ी प्रश्न 11) राजभाषा अशधशनयम में कु ल (ख) कायालग य, कालांश, कायसग चू ी, ककतनी धारा हैं ? क्रमानसु ार (क) 12 (ख) 22 (ग) 8 (घ) 9 प्रश्न 12) राजभाषा शनयम 5 क्या है ? (क) कंे द्रीय कायागलयों से संबशं धत मनै अु ल, नामपट्ट, सचू नापट्ट, फामग आकद अंग्रजे ी और कहंदी में होंगे।

(ख) कहंदी मंे प्राप्त पत्राकद का उत्तर कंे द्रीय प्रश्न 15) शनमनशलजखत मंे से सही सरकार के कायालग य से कहंदी में कदया विकल्प चशु नए। जाएगा। (क) मलू ्यांकन, अदयतन (ख) अद्यतन, मलु ्यांकन (ग) उपरोि दोनों (ग) मलू ्याकं न, अद्यतन (घ) मलू ्यांकन, अद्यतन (घ) उपरोि में से कोई नहीं प्रश्न 16) शनमनशलजखत मंे से सही विकल्प चशु नए। प्रश्न 13) कें द्रीय सरकार के कायागलय मंे (क) वििरजणका ककतने प्रशतशत पसु ्तक कहंदी भाषा मंे (ख) िीिरजणका अशनिायग है ? (ग) वििरणीका (घ) उपरोि सभी (क) कु ल अनदु ान का 100% प्रश्न 17) शददकोश के अनसु ार व्यजं नों के सही अनकु ्रम का चयन कीजजए। (ख) कु ल अनदु ान का 60% (क) क, ज, क्ष, ज्ञ (ख) क्ष, क, ज, ज्ञ (ग) कु ल अनदु ान का 50% (ग) क, ज्ञ, ज, क्ष (घ) क, क्ष, ज, ज्ञ (घ) कु ल अनदु ान का 70% प्रश्न 18) शनमनशलजखत मंे से गलत प्रश्न 14) सिे ा पजु स्तका मंे 'क' और 'ख' विकल्प चशु नए। क्षते ्र के कायागलय मंे कायरग त कमचग ाररयों (क) विशषे शधकार को प्रविवष्टयां 100% कहंदी में करनी होती (ख) उद्धरण है। 'ग' क्षेत्र मंे कायरग त कमचग ाररयों को सेिा पजु स्तका मंे प्रविवष्टयां ककतने प्रशतशत कहंदी मंे करनी होती है? (क) शत प्रशतशत (ख) यथासभं ि (ग) पचास प्रशतशत (घ) वबल्कु ल भी नहीं

(ग) स्िजै च्छक कभी एहसासों की अश्ु बनकर ननै ो से (घ) अग्रदाय बह जाती है प्रश्न 19) 'Unauthorised' का कहंदी रूपांतरण बताइए। कभी मोहक मसु ्कान बन अधरों पर वबछ (क) अनाशधकर त जाती है। (ख) अनशधकर त (ग) अशधकर त कभी शददों के तफू ानों से एक नया बिंिर (घ) उपरोि में से कोई नहीं लाती है, प्रश्न 20) 'Personnel' शदद के कहंदी रूपांतरण का चयन कीजजए। कभी मौन शनशदद होकर भी सब कु छ ये (क) शनजी कह जाती है। (ख) स्ियं का (ग) क्रशमक कभी तुमहारे साथ चलकर मंजजल तक (घ) काशमकग पहंुचाती है, सतं ोष देवी कभी तमु हारा मागग रोककर सही कदशा प्रनर्जक्षत स्नातक नर्जक्षका (कहंदी) कदखलाती है। *************************** कभी शददों के कटु प्रहार से तुमहारा गरु ुर दोस्ती एक अनभव्यवक्त शगराती है, दोस्ती एक अशभव्यवि है ये कभी सरल है कभी सहज और कभी कभी हौसला बन तमु मे एक नई उममीद उग्र बन जाती है। जगाती है। कभी तमु हारी हुँसी उड़ाकर तमु हारे अिगणु शगनिाती है, कभी तुमहारे मान की खाशतर दशु नया से लड़ जाती है। ये दोस्ती है जो कभी सरल है कभी सहज और कभी उग्र बन जाती है। सोनी राज प्रनर्जक्षत स्नातक नर्जक्षका (अंग्रेजी)

राजभाषा प्रश्नोत्तरी (उत्तर कंु जी) प्रश्न 18) विशेषशधकार प्रश्न 1) 1953 प्रश्न 19) अनशधकर त प्रश्न 2) छत्तीसगढ़ प्रश्न 20) काशमकग प्रश्न 3) पररप्रके ्ष्य, पररशशष्ट, पयटग न, पािती प्रश्न 4) 17 प्रश्न 5) Bureau प्रश्न 6) चिं ीगढ़ प्रश्न 7) Context प्रश्न 8) विभागीय प्रश्न 9) कायसग चू ी, कायालग य, कालांश, क्रमानसु ार प्रश्न 10) भाग-5 प्रश्न 11) 9 प्रश्न 12) कहंदी में प्राप्त पत्राकद का उत्तर कें द्रीय सरकार के कायालग य से कहंदी में कदया जाएगा। प्रश्न 13) कु ल अनदु ान का 50% प्रश्न 14) यथासभं ि प्रश्न 15) मलू ्यांकन, अद्यतन प्रश्न 16) वििरजणका प्रश्न 17) क, क्ष, ज, ज्ञ

मां की याद िो भी तो जीते हैं, जजनको पदै ा करते ही दशु नया से चली गई। मां की याद , बहुत आती है। उन्होंने क्या पाया ? रह - रह कर, रह - रह कर मां की याद न मां, न मां का प्यार। आती है। िो भी तो जीते हंै, जजनको छःसात िषग मां को इस दशु नया से गए, एक अरसा का कर दशु नया से चली गई। बीत गया। उन्होंने क्या पाया ? कफर भी याद आती है, बहुत याद आती है, मां का प्यार तो पाया, लेककन अधरू ा ही बहुत याद आती है। पाया। पाला - पोसा, पढ़ाया शलखाया। हाथ पीले कर, अपनी सारी जजममदे ारी िो भी तो जीते हैं, जजनको बारह तेरह िषग की मझधार मंे छोड़ दशु नया से चली गई। शनभा गई। अरे ! हमारी तो सब जजममेदाररयां शनभा लेककन गई। कफर भी याद आती है, बहुत याद आती कफर भी याद आती है, बहुत याद आती है, बहुत याद आती है। आएगी क्यों नहीं ? है। मां जो थी। बहुत याद आती है, मां की बहुत याद मन के भाि जो सब सनु ती। आती है। समझाने के समय समझाती, ढांढस रह - रह कर, रह - रह कर मां की याद बधं ाने के समय ढांढस बधं ाती। आती है। िांटने के समय िांटती भी थी। बहुत याद आती है। मां जो थी। रचनयता- संतोषदेवी सब कु छ है, लके कन मां नहीं है। अब तो स्ियं ही स्ियं को तसल्ली देनी पड़ती है।

सुनामी बनाम ट्ांसफर कु छ समय के साथ की ये खट्टी मीठी यादंे भलू न पाएंगे। अक्टू बर 2021 में, जरा िि लगगे ा मन को समझाएंगे। के . वि. एस. मंे एक ट्ांसफर रूपी सनु ामी अक्टू बर 2021 मं,े आई । के . वि. एस. में एक ट्ांसफर रूपी सनु ामी सालों - साल साथ काम करने िाले आई। वबखर गए दसों कदशाओं म।ें यह सनु ामी बहुत कु छ याद कदलाती कोई कदल्ली तो कोई मबंु ई, कोई आसाम रहेगी। तो कोई राजस्थान, िो होली के रंग, िो कदिाली के पटाखे, कोई यपू ी तो कोई वबहार, लाए सभी लोहड़ी की मगंू फली रेिड़ी भी याद आती कदशाओं में बहार। रहेगी। अक्टू बर 2021 में, िो समदु ्र ककनारे वपकशनक पर जाना, शॉवपगं मॉल में शॉवपंग करना याद के . वि. एस. मंे एक ट्ांसफर रूपी सनु ामी आई। कदलाती रहेगी। गोपी की चाय के साथ बातों का चस्का के . वि. मंे सनु ामी ने हलचल खूब मचाई। याद कदलाती रहेगी। कु छ खुशी, कु छ गम अपने साथ लके र मौका शमलते ही सेल्फी की आदत याद आई। कदलाती रहेगी। अपनों के पास जाने की खशु ी तो साशथयों से वबछु ड़ने का गम साथ लाई। ट्ांसफर जाने िाले साशथयों को समवपतग रचनयता- सतं ोष देवी अक्टू बर 2021 में, के . वि. एस. मंे एक ट्ांसफर रूपी सनु ामी आई। कु छ को अपनों के पास पहंुचाया, तो कु छ को पहले से भी दरू भगाया।

\"आत्मननभरग भारत हेतु कौर्ल शमलना चाकहए । यह बात उद्वेशलत को सम्मान\" करने िाली है कक महे नती अन्नदाता ककसान कागजी किग्री धारी के सामने लािग मकै ाले की शशक्षा पद्धशत ने हाथ जोड़ता है । बनु कर अपने बच्चों भारतीय शशक्षा की गरु ुकु ल व्यिस्था को अपनी अनमोल कारीगरी नहीं को मलू रूप से उखाड़ फंे का, जहां पर शसखाना चाहते, इंजीशनयरों के कागज विद्याथी ज्ञान के साथ अपने रोजमराग और कं प्यटू र पर बने सपनों को से जड़ु े कायों ि आिश्यकताओं को आकार देने िाले कारीगरों का कोई स्ियं परू ा करते थे । जहां कौशल को सममान नहीं । बड़े-बड़े भिनों, पणू ग सममान शमलता था, आज का अट्टाशलकाओं को बनाने िाले विद्याथी कई किशग्रयां प्राप्त करके भी शशजल्पयों को सममान के रूप मंे एक अपने खाने का अनाज नहीं उगा शदद 'धन्यिाद' नहीं बोला जाता । सकता, पहनने के िस्त्र, रहने को घर नहीं बना सकता लके कन इन कायों को फै शन के नामी-शगरामी ब्ांि क्या करने िालों को अपनी कागजी किशग्रयों अपने दक्ष कारीगरों ि कशमयग ों के बगैर के कारण स्ियं से हेय समझता है । चमक सकते हंै ? यकद नहीं, तो हमंे हमारे देश का यिु ा विदेशों में कोई भी अपने बच्चों को ऐसी शशक्षा देनी होगी कायग करने को तयै ार है ककं तु अपने \"जो अच्छे कायग हम नहीं कर पाते देश में कदावप नहीं । इस बात की नर्ल्पी, कारीर्र, बनु कर और ककसान परम आिश्यकता है कक समाज मंे कर देते हैं। उन्द्हंे हमसे कमतर आंकना कौशल और शारीररक पररश्म को पणू ग बंद कर दे ।\" तभी हमारे बच्चे सममान शमलें िरना िह कदन दरू नहीं पररश्म और कौशल से जुड़ंेगे ि उन्हें जब ककसान, बनु कर, कारीगर, शशल्पी सममान दंेगे । नहीं रहेंगे । ितमग ान मंे भारत की लगभग 2.3 जीिन को सचु ारु रुप से चलाने के प्रशतशत आबादी विशभन्न कौशलों में शलए ज्ञान, कौशल, प्रबंधन तीनों प्रशशजक्षत है जो कक अन्य देशों के आिश्यक है, तो सममान भी बराबर मकु ाबले काफी कम है । शशक्षा एिं प्रशशक्षण खचग में बढ़ोतरी के साथ

प्रशशक्षण संस्थानों का मलू ्यांकन, लेख : प्रकृ ति और तिज्ञान कौशल का सिके ्षण आिश्यक है । धरती ,जमी,ंी आसम ंी, मेर सुरम्य जीवन उद्योगों को भी आगे आकर महत्िपणू ग यह ाँ । भशू मका शनभानी होगी । बहुत खूबसूरती है वह ाँ, तीन ंी क ममलन है जह ँा ॥ जब समाज मंे इन कायों को सममान शमलेगा तो विद्याथी स्ियं ही आगे 21वींी सदी मवज्ञ न की सदी मंे क र न आएंगे और सीखेगं े । सममानजनक व यरस ने पूरे मवश्व क मन दैमहक भूकंी प आजीविका की चाह में अफसरशाही, से दहल मदय । कह मनय ंी मंे पढ़ते रहे हैं बाबशू गरी के शलए भटकते यिु ाओं को मक एक ब र एक मह म री आई और पूरे कदशा शमलगे ी । 2020 की नई शशक्षा ग ँाव क स फ कर मदय जैसे कह नी नीशत विज्ञान के साथ व्यिसाशयक ‘पहलव न की ढ लक ‘ (1944) फणीश्वर शशक्षा को शाशमल करने की सरकार न थ रे णु । उस समय हैजे और मलेररय की सोच समय की मांग होने के कारण जैसी मह म री ने ग ँाव के ग ँाव ख ली कर प्रशसं नीय है । मदये,वही ह लत आज म र्च ,2020 से पूरे मवश्व में ह रही है । कौशल ि पररश्म से जुड़े कायों के प्रशत सममान का भाि एक विद्याथी को खैर प्रकृ मत ने मनुष्य क मदम गी प्रेरणा देता है कक िह उस कायग को त कत दी है और उसके दम पर मवज्ञ न आजीविका के साधन के रूप मंे सहषग इसकी ख ज कर लेग मक आखखर अपनाएं । क र न है मकसकी उत्पमि ? मफर भी ये क र न एक सव ल मेरे जहन में लग त र मझु े विश्वास है कक आत्मशनभरग भारत उद्वेमलत कर रह है मक अगर यही के सपनों को ऐसे बदलाि अिश्य परू ा व यरस हव में ह त त ! हम री स ींसंे करंेगे । भावना अब्राहम प्रनर्जक्षत स्नातक नर्जक्षका (कला)

मकतनी देर र्ल प ती ? आक्सीजन गैस मतलब न क पर , इसी न क के दम पर के मसलंेडर मकतन ीं के प स ह ते! ब की त इंीस न हमेस अपन प्रभुत्व जम त है ल ग इस दुमनय में मजंीद कै से रह प ते ? । और मजस ह थ से इींस न ये सब कमच मतलब यह बस र्ींद अमीर ंी की दुमनय क ंीड करत है , उसी ह थ मंे जकडकर रह ज ती ! इस दृश्य क भी देखने क ये उसकी न क ऐसे पकडत है जैसे अवसर इसी त ल बंीदी ने दे मदय 7 मर्मटे से मर्मनी पकड ली ह ।.........अब मई,2020 क मवश ख पट्नम मंे आरएस रख जन ब अपनी न क ऊँा र्ी ! वेंकटपुरम ग ींव मंे एलजी प मलमर इंीडस्ट्र ी प् ंीट मंे से स्ट्ीररन गैस क ररस व ज र त इंीस न ने अपने आस –प स ज 2-3 बजे शुरू हुआ। उस इींडस्ट्र ी के र् र ीं ज ल बुन रख है ,समझद र त समझ ओर द से तीन मकमी. के द यरे में दृश्य गय ह ग क्य मीं क बस यही जीवन की देखकर इंीस मनयत के भी र गंी टे खडे ह लक्ष्मण रे ख है । लक्ष्मन रे ख क भी गये । इींस न क त नौसेन और स्थ नीय अपन इमतह स है एक लक्ष्मन रे ख पुमलस सींभ लने में जुट गई परंी तु उन इमतह स में ल ींघी गई थी मजस क रण पूरी ज नवर ंी ने त तडप – तडप के दम त ड लंीक उजड गयी। अगर इंीस न ने अब ज बंीधे थे। इस त्र सदी की र्पेट में ज और लक्ष्मन रे ख ल ींघी त .........! एक भी आय , वही जीवन के मलए तडप उठ छ टे – से व यरस ने मदग्गज ह मथय ीं क । मदव मलय कर मदय है । न क से प नी ऐसे ररस रह है जैसे पर कच्ची मभंीडी ीं क प नी आज प्रकृ मत अपने द्व र मदये उन ,पर ब ज़ नहीीं आ रहे अपनी नीर् हरकत ंी अनम ल रत् ीं क मूल्य बत रही है, मजसे से । प श्च त्य सभ्यत के न म पर मनुष्य धन की ल लस में भूल ही गय । अनुकरण करने व ले अब घर ीं मंे बैठकर हव , प नी ,जमीन ,आक श ,सूरज ,र् ँाद अनुल म – मवल म कर रहे हैं । ब हर ,र शनी त दी ही है लेमकन भ जन,कपड उनकी शौहरत क न क ई देखने व ल मक न के मलए कच्ची स मग्री भी दी है । है न ही क ई मदख ने व ल । ब वजूद इसके भ जन, कपड और मक न क मसफच कच्चे से पक्क बन ने मंे स त जन् ंी क स थ देने की कसम ख ने ही इंीस न पगल गय है,म र – क ट मर् व ल ंी से भी ज़र ह ल-र् ल पूछ ही मलय रखी है । ज़र गौर फरम इए अगर हव , त पत र्ल मक वह ँा भी अब स त फु ट प नी, जमीन,र शनी और अन्य र्ीज ंी के क फ सल है । कमच की कम ई पर त मलए कच्च स म न भी खुद इंीस न क पूर हक है, बींधन ज स त जन् ंी क है, ईज द करन पड़े त क्य ह ग मनुष्य क इस मह ममहम मींमडत परजीवी ररस्ते की ! प्रकृ मत ज मुफ्त मंे हमें दे रही है , मजसे प टली की ग ींठे भी खुल गई जब कह मक आज क मनुष्य भूल गय है , उसी पर ज़न ब -“ स थ रहने की कसमंे ख ई थी क र न ने आक्रमण मकय है –स ींस ंी पर ,मरने की नहीीं ।“ प्रेम की आड मंे मर्क । –मर्क कर जीन हर म करने व ल ीं और

अपनी भूख ममट ने व ल ीं की भी कलई स ध रण जीवन , उच्च खुल गई । कलई खुल गई धमच के प खींड मवर् र । यही मेरे जीवन क आध र ॥ की, सींस्क र ंी की मजनके न म पर न ज ने मकतन ंी क अपने प्रेम से पररपूणणच जीवन आज पत र्ल गय ह ग 21 वीीं सदी के से ह थ ध न पड । जीवन जीने के हज र ंी ल ग ीं क मक खुशी के मलए सबसे जरूरी आवरण ज मनुष्य ने परत दर परत ओढ क्य है “खुद भी सुखी रह और दू सर ीं क रखे थे ,मजनमें उसक व स्तमवक स्वरूप भी सुखी रहने द । इस सींस र में अपनी मदख ही नहींी रह थ , सब एक –एक कर क्षमत ओंी क अच्छे क प्र प्त करने मंे उधेड मदये जैसे प्य ज से परत उत री ह लग ए मजससे हम रे ब द भी यह ँा जीवन । ज मत, ख नद न, ग ाँव –शहर , अमीर – सुींदर,स्वस्थ बन सके ।“ इस संीस र मंे गरीब , धमच –सींस्क र , मींमदर – मखिद हरे क क प्रकृ मत ने एक मवशेष क्षमत के सब की प ल खुल गई । शमन की वक्री स थ पैद मकय है । इस संीस र रूपी दृमि व ले भी ग यब ह मलए । अमीर और बगीर्े के म ली हम ही हंै , हमें अपनी – गरीब की बढती ख ई भुरभुरी रे त से प ट अपनी मजम्मेद री क एक सवचश्रेष्ठ न यक मदय । र्ररत थच कर मदय उन मह न के रूप में मनभ न र् महए जैसे म ँा –मपत शब् ंी क ज थे हम रे बुजुगच हमंे ल ररय ंी अपने बच्चे क सवचश्रेष्ठ बन ने के मलए में सुन ते थे - ।हम री क्षमत ओंी से ही ये संीस र रूपी बगीर् फलेग – फू लेग मजसकी खुशुबू पहल सुख मनर गी क य , सुबह उठकर से ये महके ग । यह सींस र हम र बड़ नह ध ले भ य । घर है मजसमें आनेव ले समय मंे हम रे बच्चे ही जीवन मजयंेगे । आज भ वी पीढ़ी पुष्ठ पुट्ठे ज तू मदखल य ,मेर सपूत तू मंे व गुण मवकमसत करने की कहल य ॥ आवश्यकत है ज मह मूमतच कल म मंे स्वभ वत: रही है । तम म तरह की भौमतक सुमवध ओंी ने हम रे शरीर की आंीतररक त कत क जय महंीद –जय भ रत | कमज र कर मदय है । एक तरफ यह एक मह म री है त दू सरी तरफ ऐस लग धरती की सरु क्षा और जीिन की रक्षा रह है मक प्रकृ मत ने मनुष्य से कह रही है सुश्री मालिी अंतिरा , –“ अपनी हद मंे रह , ये मेर आींर्ल सब के मलए है, न के वल तुम इंीस न ीं के मलए ( स्नािकोत्तर तितिका त ंदी ) ।“ सवोच्चत की र् हत रखने व ली य नक र त्मक शखिय ँा भमवष्य में और के . ति. भा.नौ.पोस्ट , कतलंि, खतरन क रूप में प्रय ग कर सकती हंै । भीमुतनपट्नम, तििाखापट्नम द न ंी ही तरह से मनुष्य क समझ लेन र् महए मक मह न वैज्ञ मनक ड . अब्ु ल कल म मकतने मह न थे -

सफर सोने की नचक़िया मेरा भारत सफर बाकी है अभी... सोने की शचकड़या मेरा भारत शनू ्य से अनंत का मरे े पिू जग कहते थ।े व्यवि से व्यवित्ि का दधू की नदी से धरा शसशं चत है। समस्याओं से सभं ािनाओं का ऐसा िे सब कहते थ।े विकास से उन्नशत का आंख खलु ी जब मरे ी अपनी विचार से अशभव्यवि का मझु को ऐसा कु छ न लगा । संयोग से स्िीकर शत का पास मंे रहता था जो पड़ोसी शमलन वियोग की प्रिवर त्त का भखू से उसको मरना पड़ा । प्यास से व्याकु ल और प्रताकड़त अदृश्य से दृश्य का शलू ों से पषु ्पों का मनंै े एक मां देखी है। मनोरम विहंगम दृश्य का आंखों मंे आंसू की धारा पीड़ादायक वियोग से अद्भतु संयोग का बाट बेटे की जोहती है । गुमनामी को पहचान कदलाने का कल फटा था बम जो शहर में ककठन को सरल बनाने का मां को बटे ा खोना पड़ा । जमीं को विश्व पटल पर लाने का, स्िगग धरा पर कहीं है उतरा पनु ः विश्व गुरु बनाने का। भारत मंे है िह कश्मीर जहां प्रकर शत ने िेरा िाला कल्याणी भारत में है िह कश्मीर । प्रनर्जक्षत स्नातक नर्जक्षका एक पड़ोसी देश की खाशतर (सामाजजक अध्ययन)

कश्मीर को जलना पड़ा । और अपने फ्लटै में अपनी पत्नी के साथ शनिास कर रहे हैं। उनको कोई सन ्अट्ठारह सौ सत्तािन मझु को याद शचंता नहीं है। दोनों बच्चे अमेररका मंे कदलाता है। कायरग त हैं, ररटायरमटंे का पसै ा बकैं खाते में भरा पड़ा है। उनकी कार का आजादी की नई उमंगे ड्राइिर घर का रसोईया दसू रे कामों के शलए नौकरानी भी लंबे समय से उनकी हर कदल में भर जाती हैं। सेिा कर रहे हैं। उधम शसहं , आजाद भगत शसहं मोहन राि प्रातः काल से ही परेशान हैं क्योंकक बगल िाले अपाटगमंेट से जोर ये भी मां के बटे े थे । जोर से खांसने की आिाज आ रही है।उस अपाटगमटें में एक मध्यमिगीय पर आज के कु छ बटे ों के कारण पररिार ककराए पर उतरा है। सत्यनारायण अपनी पत्नी ि किग्री चीरहरण मां का होना पड़ा । करने िाले दो बच्चों के साथ अपने घर की समस्याओं से जझू रहे हैं । पास में रहता था जो पिू जग मोहनराि झझंु लाहट से भरे हुए हैं यहां भखू से उसको मरना पड़ा । 1 सप्ताह से अशधक हो गया है बगल िाले अपाटगमटंे से कोई भी नजर नहीं वदं ना आ रहा है हां एक व्यवि कु छ सामान प्रनर्जक्षत स्नातक नर्जक्षका(र्जणत) लके र उनके देहली के पास छोड़ जाता है। घर के अंदर से खांसी की आिाज पश्चाताप बाहर सबको चौंका दे रही थी। शहर का सबसे प्रशसद्ध अपाटगमंेट है। यह पवु ष्ट करने के बाद कक उस प्रत्यके मंजजल मंे के िल एक कट्पल पररिार को करोना था मोहन राम ने बिै रूम और दसू रा िबल बिै रूम है। माशलक को बलु िाया और यह एक विशाल पाककंि ग क्षते ्र के साथ एक महंगे कें द्र में बनाया गया है। कदखने मंे बहुत शांत और अच्छे माहौल मंे बसा है। इसमंे मोहनराि ने कट्पल बेिरूम का फ्लटै खरीदा है। िे राजस्ि विभाग मंे कायरग त थे, अभी कु छ ही कदन हुए हैं सिे ाशनितर ्त हुए

सत्यनारायण को फ्लटै को तत्काल की घटं ी बजी। फोन को ररसीि करते खाली करने को कहा गया। ही उन्हंे एक भयानक खबर ने कं पा कदया। उसमें शाम को अपाटगमटें कमेटी की बठै क बलु ाई और अगली तारीख तक िॉक्टर ने खबर दी कक आप दोनों पशत खाली करने को कहा कफर भी मोहन पत्नी को करोना है आप दोनों परू ी राि का गसु ्सा थोड़ा भी कम नहीं तरह से आराम करें, और 15 कदन के हुआ। इस तरह कदन बीतते गए। शलए क्िॉरेंटाइन होना है। आपके शलए मैं मके िकल ककट भजे रहा हंू दिाई आज मोहन राि कु छ परेशान हैं उनको समय पर लेते रहे कहकर िॉक्टर ने जरूरी काम से शहर जाना था ड्राइिर फोन रख कदया। ने कठठु रते हुए फोन करके बता कदया कक िह कु छ कदनों के शलए उनकी सेिा मोहन राि के करोना की खबर आग नहीं कर पाएंगे । कारण जानने पर की तरह परू े अपाटगमंटे एिं घर के पता चला कक ड्राइिर और उनकी पत्नी नौकर -चाकर में फै ल गई। अपाटगमंटे को करोना हो गया है। के माशलक एिं चौकीदार ने शनणयग शलया कक कु छ कदन तक मोहन राि यह सनु कर मोहनराि कांप गए के अपाटगमंेट की तरह कोई ना जाए। क्योंकक कल ही िे मोहन राि के साथ हैदराबाद से लौटे थे। मोहन राि सभी को फोन लगा लगा कर परेशान हो गए ,लके कन कोई भी शाम होते होते मोहन राि और उनकी उनकी सेिा करने के शलए आगे नहीं पत्नी को शसर ददग ,बखु ार ,खांसी शरु ू आया। अब तक जजन ररश्तेदारों को हो गया। मोहन राि जरूरत पड़ने पर रुपयों की बाररश करते थे आज िही उनके घर मोहन राि ने तुरंत फै शमली िॉक्टर को की ओर मड़ु ने को भी तयै ार ना हुए। फोन लगाया। एक लड़का करोना टेस्ट परेशान मोहन राि शसर पकड़कर ककट लेकर आया और सपंै ल लेकर सोफा पर बठै े थे, कक तभी घंटी बजती चला गया। मोहन राि के कदल की है और उनके बगल के सत्यनारायण धड़कन बढ़ गई िॉक्टर के फोन कॉल का इंतजार करते रहे कक तभी फोन

दरिाजा खोल कर अंदर प्रिेश करते दोनों पशत-पत्नी ने मौत को बहुत हुए कहते हैं ,\"कोई नहीं साहब मझु े करीब से देखा था। अंदर आने दीजजए मैं अब करोना से लड़ सकता हूं और आपकी सिे ा भी तभी उन्हें लगा ककतनी भी सपं वत्त हो कर सकता हंू, यह रही आपकी दिाइयां ककतने भी ररश्तेदार हो ककतनी भी बड़ी एिं गरमा गरम भोजन पदाथ\"ग , मंै अब नौकरी क्यों ना हो उन्हें आजखरकार आपके पररिार की सिे ा कर सकता हंू यह समझ मंे आ गया कक मौत से और कोई जरूरत हो तो मझु े बताइए लड़ने के शलए यह सब बके ार है। \"कहकर चले गए। आज मोहन राि ने अपने जीिन में मोहन राि सत्यनारायण की सेिा की पहली बार सत्यनारायण के घर का भािना को देखकर दंग रह गए। शाम दरिाजा खटखटाया यह सोच कर कक, को कफर दरिाजे की घटं ी बजी गरमा उन्हंे धन्यिाद देंगे कक तभी उन्हें पता गरम खाना टेबल पर रखा गया साथ चला कक उनके कहने पर िे तो रात में दिाइयां भी रखी गई। पशत -पत्नी को ही घर खाली कर दसू रे शहर चले के खाना खत्म होने तक सत्यनारायण गए हैं। िहीं खड़े होकर उनकी सेिा करते रहे। इस तरह 15 कदन बीत गए। खाली घर को देखकर मोहन राि की आंखंे नम हो गई। पछतािे से उनकी उस शाम पररिार के िॉक्टर द्वारा भजे ा शनगाहें जमीन की तरफ झकु गई कक गया लड़का आया और नमनू ा लके र तभी मंकदर की घकं टयां बजी और उनके गया। अंतमनग से पछतािे की भािना फू ट फू ट कर बाहर शनकलने लगी। अगली सबु ह कदल की धड़कन तेजी से चल रही थी कक तभी िॉक्टर ने फोन श्री टी वी पॉल कर करोना के नगे ेकटि आने पर बधाई एच ओ डी दी और कहा कक अब कोई िर नहीं है पॉलीटेजननक कॉलजे बाहर आ सकते हैं ।मोहन राि एिं उनकी पत्नी ने लबं ी सांस ली।

राजभाषा सिं ाद करने मंे मदद करती है, भले ही िे देश के विशभन्न कहस्सों से हों, यह उन भारत की राजभाषा कहन्दी है । 14 लोगों की मदद करती है जो बहुत यात्रा शसतंबर 1949 को कहंदी को भारत के करते हंै। एक बार महात्मा गांधी जी ने संविधान के द्वारा राजभाषा घोवषत ककया कहा था कक \" हृदय की कोई भाषा नहीं है गया था , और इसकी स्मशर त को ताजा , हृदय–हृदय से बातचीत करता हैं और रखने के शलए 14 शसतंबर को हर िषग कहंदी हृदय की भाषा है ।” और यह सच है कहंदी कदिस के रूप मंे मनाया जाता है । । मंै अंत में यह कहना चाहता हंू कक कहंदी भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने िाली भारत के लोगों को जोड़ती है, हमंे करीब भाषा कहंदी है । भारत के 77 % लोग कहंदी लाती है, हमें एक बनाती है और इसके बोलते और समझते हंै । कहंदी भाषा को अलािा, सबसे महत्िपणू ग बात यह है कक अनचु ्छे द 343 के अतं गतग देिनागरी हम सब के रगों में कहंदी दौड़ रही हंै । शलवप में राजभाषा का दजाग कदया गया । कहंदी भाषा के बारे में एक रोचक तथ्य है डी. वषै ्णव, कक कहंदी मलू तः फारसी भाषा का शदद है । भाषाओं के रूप से कहंदी और उदगू एक ही कक्षा:– दसवीं स भाषाएं है , अंतर यह है कक कहंदी देिनागरी शलवप में शलखी जाती है और पुस्तक समीक्षा कहंदी में ससं ्कर त के अशधक शदद शमलते हैं और उदगू को पशशयग न शलवप मंे शलखते है पसु ्तक का नाम - तीन हजार टlके और इसमंे पशशयग न शदद अशधक शमलते लखे क - सधु ा मशू तग है । परू े विश्व मंे 32.4 करोड़ लोग कहंदी मलू ्य – 108 रुपये बोलते हैं, जो एक बहुत ही अहम चीज है प्रकाशक - महे ता पजदलशशंग हाउस । कहंदी एक बहुत ही अद्भतु भाषा है और पषर ्ठ - 162 कहंदी हमारी भारतीय ससं ्कर शत की एक प्रकाशशत िषग - 1 मई 2019 महत्िपणू ग संपशत है । जसै ा कक हम सभी आईएसबीएन -9387319938 जानते हैं कहंदी लाखों लोगों द्वारा बोली समीक्षा: जाती है, यह लोगों को अन्य लोगों के अक्सर, यह साहस का सबसे सरल कायग साथ है जो दसू रों के जीिन को छू ता है। सधु ा मशू त-ग इन्फोशसस फाउं िेशन के असाधारण काम के साथ-साथ अपनी यिु ािस्था,

पाररिाररक जीिन और यात्राओं के कहंदी है हमारी राजभाषा माध्यम से-ऐसी कई कहाशनयों का सामना करती हैं... और िह उन्हें यहां कहंदी है हमारी राजभाषा अपने चररत्र-साक्ष्य मंे बताती हैं। िह जन जन की है अशभलाषा, देिदासी समदु ाय मंे अपने काम के साथकग सबकी है मीठी भाषा प्रभाि, अपने परीक्षण और क्लशे ों के बारे सरलीकर त है मधरु भाषा में अपने कॉलजे की इंजीशनयररंग में लोगों को एक दसू रे से शमलाती एकमात्र मकहला छात्र और अप्रत्याशशत सबको अपने बांहों में जखलाती और प्रेरक पररणामों के बारे में खुलकर मेल जोल से रहना शसखलाती बात करती हंै। भारतीय शसनेमा की पहुंच तरह तरह के विधाओं में शलखिाती और भारतीय सजदजयों की उत्पवत्त की कविता, नाटक या शनबंध खोज की शांत खशु ी से लेकर कदखािे के ससं ्मरण, आलेख या कहानी आधार पर दसू रों को आंकने की नीचता सब कहते अपने मन की बानी तक, ये हर कदन सघं षग और जीत, छोटे हंै। पिू ग पजश्चम उत्तर दजक्षण मानि प्रकर शत की संदु रता और कु रूपता कहन्दू मजु स्लम शसख इसाई दोनों का पदाफग ाश करते हुए, इस सगं ्रह मंे सब को एक सतू ्र मंे बांधती प्रत्येक िास्तविक जीिन की कहाशनयां अनके भाषाएं और बोशलयों का सगं म अनगु ्रह के साथ जीने िाले जीिन को स्िर ,व्यजं न और मात्राओं का दशागती हैं। मथं न है यह एक बहुत ही रोचक और प्ररे क जन -जन की भािनाओं को समटे े है पसु ्तक है और मंै इस पसु ्तक को पढ़ने कहंदी की अत्यशधक अनशु सं ा करता हंू सभी के कदल की आिाज है कहंदी कहंदी भारत देश की धड़कन है मानव कु मार राउत हम सब की मान शान आन है कहंदी तभी तो कहंदी जन जन की कक्षा:– दसवीं अ अशभलाषा है कहंदी ही हमारी राजभाषा है । कननष्का श्रीवास कक्षा - दसवीं अ

कबीर नीमा नामक जुलाहा दंपत्ती ने ककया था। माटी कहे कु म्हार स,े तू नया रौंदे मोय। सतं कबीर दास का जन्म - जनश्शु त के अनसु ार कबीरदास का जन्म 1398 एक कदन ऐसा आएर्ा, मैं रौंदरू ्ी ई में काशी मंे एक विधिा ब्ाह्मणी के तोय॥ घर में हुआ था| इस देश मे एक से एक बढ़कर कवि कबीर दास की प्रारजमभक शशक्षा - हुए है। देश के अग्रणी कवियों मे से कबीर दास की पररजस्थशत ऐसी थी कक एक कबीर दास जजन्हें भारत के िे अपनी प्रारजमभक शशक्षा भी ग्रहण कवियों के इशतहास में सबसे सफल नहीं कर पाये। ये बचपन से ही साधू- तथा प्रभािशाली कवियों मंे कबीर दास संतो की सगं त मंे पड़ गये थे। जी को सबसे प्रमखु माना जाता है। उन्होंने अपनी शशक्षा अपने गुरु स्िामी कबीर दास जी का जीिन - कबीर रामानंद से ही प्राप्त की थी। इनके दास का जीिन संघषपग णू ग रहा था। एक जीिन मंे सबसे ज्यादा प्रभाि उनके विधिा ब्ाह्मणी के घर मे जन्म लने े गरु ु रामानन्द जी का नजर आता था। पर उस ने लोक-लाज के भय से कबीर कबीरदास गुरु को भगिान से भी बड़ा दास को तालाब के पास एक टोकरी मानते थ।े मंे छोड़ आई। कु छ समय बाद िहाँु से एक जलु ाहे नामक मजु स्लम दंपशत ने र्ुरु र्ोववदं दोऊ ख़िे, काके लार्ू एक छोटी उम्र के शशशु को देखकर पांव । उसे अपने घर ले गए और अपनी संतान की तरह पाला और बड़ा ककया बनलहारी र्ुरु आपने जजन र्ोववंद था। कदयो बताए ।। कबीर दास का पालन-पोषण - कबीर कबीर दास जी बचपन से ही सबसे दास का पालन-पोषण मजु स्लम पररिार अलग सोच रखते थे। इन्होंने समाज मंे हुआ था। कबीर का पालन-पोषण मंे प्रचशलत पाखंिों, कु रीशतयों, नीरू- अंधविश्वास, धमग के नाम पर होने िाले अत्याचार का विरोध ककया था।

माला फे रत जुर् र्या, र्या न मन कबीर दास लखे न का कायग नहीं कर का फे र । पाते थ।े ये कायग अपने शशष्यों द्वारा करिाते थे। इनके शशष्य भी बहुत कर का मन का डारर दे, मन का गुणिान थ।े जजनमंे से धमदग ास ने मनका फे र॥ बीजक नामक ग्रन्थ का शनमागण ककया था। कबीर दास जी शशक्षा ग्रहण करने ककसी भी गरु ुकु ल मे नहीं जा पाये। दुु ःख में सनु मरन सब करें सखु में इसशलए उन्होंने अपनी शशक्षा अपने करै न कोय। गरु ु से ही प्राप्त की थी। कबीर दास जी ने अपने गुरु से अच्छा ज्ञान प्राप्त जो सखु में सनु मरन करे तो दुु ःख ककया था। िे वबना गुरुकु ल जाते हुए काहे होय॥ भी उनके बाकी सभी दोस्तों से िे सबसे श्षे ्ठ थ।े िे रामानन्द के सभी कबीर दास की प्रमखु रचनाएं - कबीर शशष्यों में श्षे ्ठ थ।े िे सबसे ज्ञानी थे। दास की रचनाओं को ''कबीर उनका ज्ञान बहुत ही प्रभािशाली था। ग्रंथािली'' नामक सगं ्रह में सगं हर ीत ये अिधी, ब्ज, और भोजपरु ी ि कहंदी ककया गया है। अन्य रचनाओं को एक जैसी भाषाओं का ज्ञान था । िे और ग्रंथ '' गरु ु ग्रंथ साहब'' मंे रखा राजस्थानी तथा हररयाणिी, खड़ी बोली गया है। इनकी रचनाओं में बीजक ही के महारथी थ।े कबीर दास जी की प्रमाजणत माना जाता है। प्रत्यके रचना मंे सभी भाषाओं का शमश्ण देखने को शमलता है। इसशलए सतं कबीर दास की मतर ्यु - कबीर इनके लेखन की भाषा ‘सधकु ्कड़ी’ ि दास का जन्म-मतर ्यु दोनों रहस्यमय ‘जखचड़ी’ ( खड़ी बोली, हररयाणिी, तरीके से हुए। 1398 मंे जन्मे कबीर ब्ज भाषा, अिधी, भोजपरु ी, मारिाड़ी दास जी का जीिनकाल (1398-1518 और पजं ाबी भाषा के शमश्ण जखचड़ी तक) 120 साल था। ये सबसे लबं ी या सधकु ्कड़ी कहते है। )को माना उम्र जीने िाले कवि भी थे। जाता है। माना जाता है कक इनकी मतर ्यु होते ही ये सीधे मोक्ष (जन्ममरण के बधं न से छू ट जाने का ही नाम मोक्ष है।

जजसका अथग मवु ि होता है।) को हुए। मरंु ्ी प्रेमचदं कबीर दास ने समपणू ग जीिन काशी मंे रहे। परंतु उनकी जब मतर ्यु हुई। उस धनपत राय श्ीिास्ति समय मगहर नामक जगह पर चले जो प्रेमचदं नाम से जाने जाते गए। कई लोगों कक मान्यता के हंै, उनका जन्म 31 जुलाई 1880 अनसु ार कबीर दास का अंशतम लमही िाराणसी उत्तर प्रदेश मंे हुआ ससं ्कार करने के शलए कबीर के कहन्दू । उनकी मतर ्यु 8 अक्टू बर 1936 शशष्यों तथा मजु स्लम शशष्यों के बीच िाराणसी उत्तर प्रदेश में हुई । में वििाद बन गया। दोनों धमग के लोग अपने-अपने रीशत-रिाज से कबीर का िो कहन्दी और उदगू के सिागशधक अंशतम ससं ्कार करना चाहते थ।े कहा लोकवप्रय उपन्यासकार, कहानीकार जाता है कक जब इनके कफन को एिं विचारक थ।े उन्होंने सेिासदन, हटाया तो िहां पर शि नहीं बजल्क प्रेमाश्म, रंगभशू म, शनमलग ा, गबन, फू ल शमले थे। जजसमें से आधे फू लों कमभग शू म, गोदान आकद लगभग िेढ़ को कहन्दओु ं ने अपनी रीशत से जलाया दजनग उपन्यास तथा कफन, पसू की तथा आधे फू लों को मजु स्लमों ने दफना रात, पचं परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, कदया था। बढू ़ी काकी, दो बलै ों की कथा आकद तीन सौ से अशधक कहाशनयाुँ शलखीं। साईं इतना दीजजए, जा मे कु टु म उनमंे से अशधकांश कहन्दी तथा उदगू समाय। दोनों भाषाओं मंे प्रकाशशत हुईं। उन्होंने अपने दौर की सभी प्रमखु मैं भी भखू ा न रहंू, साधु ना भखू ा उदगू और कहन्दी पवत्रकाओं जमाना, जाय॥ सरस्िती, माधरु ी, मयादग ा, चाँुद, सधु ा आकद मंे शलखा। उन्होंने कहन्दी अनभराम समाचार पत्र जागरण तथा साकहजत्यक पवत्रका हंस का सपं ादन कक्षा दसवीं स और प्रकाशन भी ककया।

इसके शलए उन्होंने सरस्िती प्रेस मंे 1918 से 1936 तक के कालखण्ि खरीदा जो बाद में घाटे मंे रहा और को 'प्रमे चदं यगु ' कहा जाता है। बन्द करना पड़ा। प्रेमचंद कफल्मों की पटकथा शलखने मबंु ई आए और सौतेली माँु का व्यिहार, बचपन में लगभग तीन िषग तक रहे। जीिन के शादी, पण्िे-परु ोकहत का कमकग ाण्ि, अंशतम कदनों तक िे साकहत्य सजर न ककसानों और क्लकों का दःु खी जीिन मंे लगे रहे। महाजनी सभ्यता उनका यह सब प्रेमचंद ने सोलह साल की अंशतम शनबन्ध, साकहत्य का उद्देश्य उम्र मंे ही देख शलया था। इसशलए अजन्तम व्याख्यान, कफन अजन्तम उनके ये अनभु ि एक जबदगस्त सच्चाई कहानी, गोदान अजन्तम पणू ग उपन्यास शलए हुए उनके कथा-साकहत्य मंे तथा मगं लसतू ्र अजन्तम अपणू ग झलक उठे थ।े उनकी बचपन से ही उपन्यास माना जाता है। पढ़ने में बहुत रुशच थी। 13 िषग की उम्र मंे ही उन्होंने शतशलस्म-ए- 1906 से 1936 के बीच शलखा गया होशरुबा पढ़ शलया और उन्होंने उदगू के प्रमे चदं का साकहत्य इन तीस िषों का मशहूर रचनाकार रतननाथ 'शरसार', सामाजजक सांस्कर शतक दस्तािजे है। शमजाग हादी रुस्िा और मौलाना शरर इसमंे उस दौर के समाज सधु ार के उपन्यासों से पररचय प्राप्त कर आन्दोलनों, स्िाधीनता संग्राम तथा शलया । उनका पहला वििाह पंद्रह साल प्रगशतिादी आन्दोलनों के सामाजजक की उम्र में हुआ। 1906 मंे उनका प्रभािों का स्पष्ट शचत्रण है। उनमें दसू रा वििाह शशिरानी देिी से हुआ दहेज, अनमेल वििाह, पराधीनता, जो बाल-विधिा थीं। िे सशु शजक्षत लगान, छू आछू त, जाशत भदे , विधिा मकहला थीं जजन्होंने कु छ कहाशनयाुँ वििाह, आधशु नकता, स्त्री-परु ुष और \"प्रमे चदं घर मं\"े शीषकग पसु ्तक समानता, आकद उस दौर की सभी भी शलखी। उनकी तीन सन्तान हुईं - प्रमखु समस्याओं का शचत्रण शमलता श्ीपत राय, अमतर राय और कमला है। आदशोन्मखु यथाथिग ाद उनके देिी श्ीिास्ति। 1898 में मकै ट्क की साकहत्य की मखु ्य विशेषता है। कहन्दी परीक्षा उत्तीणग करने के बाद िे एक कहानी तथा उपन्यास के क्षेत्र

स्थानीय विद्यालय मंे शशक्षक शनयिु कहानी लखे क के रूप में काम करने हो गए। नौकरी के साथ ही उन्होंने का प्रस्ताि स्िीकार कर शलया। कफल्म पढ़ाई जारी रखी। उनकी शशक्षा के नगरी प्रेमचदं को रास नहीं आई। िे सन्दभग मंे रामविलास शमाग शलखते हंै एक िषग का अनबु न्ध भी परू ा नहीं कर कक- सके और दो महीने का िते न छोड़कर बनारस लौट आए। उनका स्िास्थ्य “1910 मंे अगं ्रेजी, दर्नग , फारसी और शनरन्तर वबगड़ता गया। लमबी बीमारी इनतहास लके र इण्टर ककया के बाद 8 अक्टू बर 1936 को उनका शनधन हो गया। और 1919 मंे अगं ्रजे ी, फारसी और इनतहास लके र बी. ए. ककया। अंर् नसहं पटवाल बी.ए. पास करने के बाद वे नर्क्षा ववभार् के इंस्पने टर पद पर ननयकु ्त कक्षा :दसवीं स हुए। 1921 ई. में असहयोग आन्दोलन के दौरान महात्मा गाँुधी के सरकारी नौकरी छोड़ने के आह्वान पर स्कू ल इंस्पके ्टर पद से 23 जनू को त्यागपत्र दे कदया। इसके बाद उन्होंने लेखन को अपना व्यिसाय बना शलया। मयागदा, माधरु ी आकद पवत्रकाओं में िे सपं ादक पद पर कायरग त रहे। इसी दौरान उन्होंने प्रिासीलाल के साथ शमलकर सरस्िती प्रसे भी खरीदा तथा हंस और जागरण शनकाला। प्रसे उनके शलए व्यािसाशयक रूप से लाभप्रद शसद्ध नहीं हुआ। 1933 ई. में अपने ऋण को पटाने के शलए उन्होंने मोहनलाल भिनानी के शसनेटोन कमपनी मंे

मेला ओ मेला क्योंकक इन सब चीज मंे लगता है पसै ा । मले ा ओ मेला,िो जखलौनों का ठे ला । यहाुँ खुशशयों का खजाना है । मले े मंे बच्चे मजा करते हैं, सोच रहे है कहाुँ जाना है ? और बड़े उनको देखकर हंसते है । मेला ओ मले ा,िो जखलौनों का ठे ला इधर या उधर या कफर ककधर ? एक तरफ है खाने का खजाना नामुः रजनीर् तो कदल बोले घर नहीं जाना । यहाँु पर है हर तरह का इन्तजाम । कक्षाुः सातवीं (अ) इसशलए मममी पापा हो जाते हैं भ्रष्टाचार परेशान । बच्चे बोले घर नहीं जाना, एक दो, एक दो पापा - मममी बोले घर जाके करना भ्रष्टाचार को फे क दो। है आराम । इस लड़ाई में हो जाती है सबु ह से जब से आया यह दशु नया मंै भ्रष्टाचार, तब से लोग कर रहे है खबू द्वारचार। शाम । मेले में खाने में है पाॅपकोन,ग चाट इसकी छाया बन रहीं है सिवग ्यापी, और के ला, पर परमात्मा के प्रशत यह है पापी। मममी पापा बोले और ककतना िेला । है नते ा भ्रष्टाचारी, तो है दशु नया दरु ाचारी, मले ा है बच्चों के शलए खजाना, है भगिान! पकिो इन बयै ो और पार करो मममी पापा बोले कफर नहीं आना । नयै ा। मेले में होता है ऐसा कक कु छ भी लोगों! भ्रष्टाचार को मारो ऐसे गोले, नहीं चलता है वबन पसै ा । मेले में होता है झलू ों का भिं ार, ताकक हर बच्चा शसफग यही बोले, कक जैसे खदु काम करने आई हो सरकार बच्चों के शलए यह है जन्नत, एक दो एक दो, भ्रष्टाचार को फें क दो। मममी पापा मांगते हंै मन्नत । कक बच्चे न खरीदे ऐसा - िसै ा, ममता रानी महानलक (अनभभावक)

मकहला सर्वक्तकरण में नारी भले ही जागरूक हो गई है और उसने अपनी शवि को पहचाना नारी समाज का एक महत्िपणू ग अंग है लेककन िह आज भी सरु जक्षत नहीं है जजसके वबना समाज की कल्पना है। आज भी नारी को कमजोर और भी नहीं की जा सकती है। नारी के शनस्सहाय ही समझा जाता है। परु ूषों अंदर सहनशीलता, धयै ,ग प्रेम, ममता को नारी का सममान करना चाकहए और मधरु िाणी जसै े बहुत से गणु और उन पर इतना भी अत्याचार मत विद्यमान है जो कक नारी की असली करो की उनकी सहनशीलता खत्म हो शवि है। यकद कोई नारी कु छ करने जाए और िो शवि का रूप ले ले का शनश्यचय कर ले तो िह उस कायग क्योंकक जब जब नारी का सब् टू टा है को करे वबना पीछे नहीं हटती है और तब तब प्रलय आई है। नारी देिीय िह बहुत से क्षते ्रों मंे परु ूषों से बेहतरीन रूप है इसशलए नारी शवि सब पर कर अपनी शवि का पररचय देती भारी है। नारी से ही यह दशु नया सारी है।प्राचीन काल से ही हमारे समाज मंे हम सब को नारी शवि को प्रणाम झाँुसी की रानी, कल्पना चािला और करना चाकहए और आगे मंे उनकी इंकदरा गाँुधी जसै ी बहुत सी मकहलाएँु मदद करनी चाकहए क्योंकक यकद देश रही है जजन्होंने समय समय पर नारी की नारी विकशसत होगी तो हर घर, शवि का पररचय कदया है और समाज हर गली और परू ा देश विकशसत होगा। को बताया है कक नारी अबला नहीं सबला है। आधशु नक यगु मंे भी कनर्र् मकहलाओं ने अपने अशधकारों के बारे मंे जाना है और अपने जीिन से जड़ु े कक्षा: दसवीं अ शनणयग स्ियं लने े लगी है। आज भी मकहला कोमल और मधरु ही है लके कन उसने अपने अंदर की नारी शवि को जागतर ककया है और अन्याय का विरोध करना शरु ू ककया है।आज के यगु

र्रं ्ा की सफाई देर् की भलाई महत्त्िपणू ग योगदान देते हंै। गंगा–जल उनका पोषण करता है। गंगा का जल िषों तक बोतलों, किदबों में बन्द रहने के बाद भी खराब नहीं होता है, गंगा नदी के ककनारे बसे कई प्रमखु शहरों लेककन भारत की मातिर त ् पजू ्या गगं ा को एिं उद्योगों को जल की आपशू तग इसी आज पयापग ्त सीमा तक प्रदवू षत हो चकु ी के जल से होती है। है। अनके स्थानों पर तो इसका जल अब स्नान करने योयय भी नहीं रह गया है। इसशलए आज हम सबका कत्तवग ्य है कक गंगा नदी की अविरलता और पवित्रता बनाए रखंे; क्योंकक गगं ा की सफाई और उसके अजस्तत्ि मंे ही देश की भलाई शनकहत है। गंगा की उपयोशगता–गंगा नदी का अविरल–शनमलग प्रिाह हमारे देश के जीिन के शलए बहूपयोगी है- गंगा लगभग 2071 ककमी की लमबी यात्रा करते हुए भारत के विशाल भ–ू भाग को सींचती है। यह देश के पाँुच महत्त्िपणू ग राज्यों–उत्तराखण्ि, उत्तर प्रदेश, वबहार, झारखण्ि और पजश्चम बगं ाल को हरा– भरा बनाती हुई देश के लगभग 26% भ–ू भाग को लाभाजन्ित करती है। गंगा के शनमलग जल मंे अनेक जलीय जीि–जन्तु पाए जाते हैं, जो पयागिरण को सन्तशु लत बनाए रखने में अपना

गंगा नदी पर बने बाँुधों और इससे कायग योजना’ (GAP) का शभु ारमभ शनकाली गई अनके बड़ी नहरों पर ककया गया, जजसका उद्देश्य गगं ा को वबजलीघरों की स्थापना करके प्रचरु शीघ्राशतशीघ्र स्िच्छ और पररष्कर त मात्रा मंे वबजली का उत्पादन ककया जाता बनाना था। इस महत्त्िपणू ग पररयोजना मंे है। विश्व बकंै ने भी सहयोग ककया था, लके कन 15 िषों में करोड़ों रुपये व्यय गंगा नदी के जल में ‘बकै ्टीररयोफे ज’ करके भी गंगा की जस्थशत में सधु ार नहीं नामक विषाणु पाया जाता है, जो हुआ। हाशनकारक जीिाणओु ं और सकू ्ष्म जीिों को जीवित नहीं रहने देता है। 31 माच,ग 2000 ई० में इस कायकग ्रम को बन्द कर कदया गया। इसके पश्चात ्राष्ट्रीय गंगा नदी के जल में पयागप्त घलु नशील नदी संरक्षण प्राशधकरण की पररचालन ऑक्सीजन होती है, जो जलीय जीिन के सशमशत द्वारा ‘गंगा कायग योजना–2 शलए अत्यािश्यक होती है। (GAP–2) के अन्तगतग गंगा को स्िच्छ करने का अशभयान चलाया गया। इस योजना के अन्तगतग गंगा मंे शगरनेिाले दस लाख लीटर मल–जल को रोकन,े हटाने और उपचाररत करने का लक्ष्य था। गंगा को स्िच्छ करने के शलए सरकार सूरज पाकटल द्वारा कई पररयोजनाएँु चलाई गई हंै, जो कक्षा - दसवीं अ अपने उद्देश्य में पणू रग ूपणे सफलता प्राप्त नहीं कर पाईं। सन ् 1985 ई० में ‘गगं ा

*इरादा आत्मननभरग भारत का* राष्ट्र का ननमागण : ववज्ञान स्िप्न देखा जो कभी आज हर धड़कन चल पड़ा हंू राष्ट्र के शनमाणग को, मंे है। चाहता हूं कक करूं नया शनमाणग । बना दं ू इसे राष्ट्र का विज्ञान, एक आत्मशनभरग भारत बनाने का धमशग ास्त्र मन का विज्ञान कराऊं गा । इरादा मन मंे है। जो भगिान पर सब लागू हो, तेरे हर आविष्कार और महे नत को एक आत्मशनभरग भारत जजसमें नया और आगे बढ़ाऊं गा । शनखर हो। मंगल पर गया, उससे आगे और भी जाएगा । जजसकी आंखों मंे चमक हो एक नि यह राष्ट्र विश्व गरु ु बन कर उल्लास हो। कदखलाएगा । माना विज्ञान में हमने ककया है जन - जन को वप्रय हो िह लक्ष्य विशेष, जजसके पास हो। कफर भी अभी बहुत कु छ करना है अिशेष । बढ़ रहें हंै हम प्रगशत की ओर, जजस रफ्तार से, द्रवु ी सहाय कक्षा - सातवीं अ कर रहा है हमको नमन यह विश्व उस पार से , एक आत्मशनभरग अशभयान अपने देश के जन -जन मंे है। एक आत्मशनभरग भारत बनाने का इरादा मन मंे है। अननक पांडा 9-अ

अज्ञेय क्षण भर, विपथगा, परमपरा, कोठरी की बात, शरणाथी, जयदोल। 1930 से लखे क पररचय 1936 तक विशभन्न जेलों में कटे। 1936-37 मंे सशै नक और विशाल भारत सजच्चदानंद हीरानंद िात्स्यायन 'अज्ञेय' नामक पवत्रकाओं का सपं ादन ककया। 1943 से 1946 तक वब्कटश सने ा में रहे; को कवि, शलै ीकार, कथा-साकहत्य को इसके बाद इलाहाबाद से प्रतीक नामक पवत्रका शनकाली और ऑल इंकिया रेकियो एक महत्त्िपणू ग मोड़ देने िाले कथाकार, की नौकरी स्िीकार की। देश-विदेश की यात्राएं कीं। लशलत-शनबन्धकार, समपादक और जजसमंे उन्होंने कै शलफोशनयग ा अध्यापक के रूप में जाना जाता है।इनका विश्वविद्यालय से लके र जोधपरु विश्वविद्यालय तक में अध्यापन का काम जन्म 7 माचग 1911 को उत्तर प्रदेश के ककया। कदल्ली लौटे और कदनमान साप्ताकहक, निभारत टाइमस, अगं ्रेजी पत्र कसया, परु ातत्ि-खुदाई शशविर मंे िाक् और एिरीमसंै जैसी प्रशसद्ध पत्र- पवत्रकाओं का सपं ादन ककया। 1980 में हुआ।बचपन लखनऊ, कश्मीर, वबहार उन्होंने ित्सलशनशध नामक एक न्यास की स्थापना की जजसका उद्देश्य साकहत्य और मद्रास में बीबी.एससी. करके अंग्रेजी और संस्कर शत के क्षेत्र मंे कायग करना था। कदल्ली में ही 4 अप्रलै 1987 को उनकी मंे एम.ए. करते समय क्रांशतकारी मतर ्यु हुई। आन्दोलन से जड़ु कर बम बनाते हुए समीर कु मार महानलक पकड़े गये और िहाँु से फरार भी हो गए। कक्षा: - दसवीं- \"अ\" सन ् 1930 ई. के अन्त मंे पकड़ शलये गये। अज्ञेय प्रयोगिाद एिं नई कविता को साकहत्य जगत में प्रशतवष्ठत करने िाले कवि हैं। अनके जापानी हाइकु कविताओं को अज्ञेय ने अनकू दत ककया। बहुआयामी व्यवित्ि के एकान्तमखु ी प्रखर कवि होने के साथ-साथ िे एक अच्छे फोटोग्राफर और सत्यान्िषे ी पयटग क भी थ।े उन्हें साकहत्य अकादमी और भारतीय ज्ञानपीठ परु स्कार से सममान ककया गया। उनकी प्रमखु कर शतयों के नाम भयनद,ू शचन्ता ,इत्यलम,् हरी घास पर

मेरी मां मरे ी तकलीफ मंे मझु से ज्यादा मरे ी मां ही रोयी है। जखला वपला कर मझु को मां मरे ी, कभी भखू े पेट भी सोई है। कभी जखलौनों से जखलाया है, कभी आंचल में छु पाया है। गलशतयां करने पर भी मां ने मझु े हमेशा प्यार से समझाया है। मां के चरणों में मझु को जन्नत नजर आती है। लेककन मां मरे ी मझु को हमशे ा अपने सीने से लगाती है। तनु श्रये ा सातवीं अ



कें द्रीय विद्यालय क्रमांक 2 नौसेना बाग विशाखापत्तनम के प्राचायग शनशशकांत अग्रिाल को गहर मतं ्रालय के राज भाषा विभाग के अशत प्रशतवष्ठत \"राजभाषा गौरि परु स्कार 2021\" से सममाशनत ककया गया है।


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