सच्चाई की कीमि नाएमा और अस्र एक रेचगस्तान के पास खड़े थे। रेचगस्तान मंे जहाँू पानी का कु आ होता है वह ुं हरयाल , पेड़, पररदुं े और इंुसान सब आबाद हो जाते हंै, यहाँू भी यह हाल था। इस कु एुं पर चरवाहों की भीड़ जमा थी, वो आपस में बातें करते जाते और अपने जानवरों के मलए कु एंु से पानी ननकाल कर उन्हंे वपलाते जाते। कु छ दरू ह दो लड़ककयाुं अपने जानवरों को मलये हुए खड़ी थीुं, जानवर प्यास से बबल बबला रहे थे मगर वो दोनों लड़ककयांु उन्हें आगे बढने से रोक रह थी।ुं वजह साफ़ थी ना वो मदों की तरह ताक़त वर थीुं ना उनकी शमक उन्हंे इस बात की इजाज़त देती थी कक मदों के इस हुजमू में घुस कर अपनी बकररयों को पानी वपलाए,ुं और मदों में इतनी शराफत नह ंु थी कक वो लड़ककयों को पहले पानी लेने दंे। ''देखा तमु न?े '' अस्र ने नाएमा से कहा। ''ताक़तवर हर दौर मंे एक जैसे ह होते हंै।'' अस्र ने एक तरफ इशारा ककया तो नाएमा ने देखा कक उधर से एक आदमी चला आ रहा है। उसके सर और दाढ के बाल धलू से अटे हुए थे, चहरे पर सफर की थकान पूर तरह हदख रह थी, वो हल्का हल्का लगुं ड़ा कर भी चल रहा था। कर ब आने पर नाएमा ने देखा कक इसकी वजह पाओंु में पड़ने वाले छाले हंै। ''यह मूसा (अ) हंै।'' अस्र ने कहा तो नाएमा ने गौर से उनके चहरे को देखा, मसू ा (अ) को जजस तरह नाएमा ने थोड़ी देर पहले देखा था उसके मुकाबले मंे इस समय वे बहुत नौजवान लग रहे थे। नाएमा ने उन्हंे इस हाल में देखा कर कहा: ''यह इस हाल में कै से पहुंच,े यह तो शरु ू में ममस्र के शहजादे थे।'' Page 201 ''हाँू मगर थोड़ा इंुतजार करो इनकी कहानी अभी सनु ाता हूँ।'' क़सम उस वक़्त की
हज़रत मूसा (अ) सीधा चलते हुए कु एंु के पास आए। कु एंु पर एक बहुत बड़ा ढोल लटका हुआ था जजसे परू ा भर कर बाहर ननकालने के मलए दो तीन आदममयों को ज़ोर लगाना पड़ता था। हज़रत मसू ा (अ) को पास आता देख कर यह लोग रुक गए, हज़रत मूसा (अ) ने आराम से ढोल सुभं ाला और अके ले ह परू ा ढोल पानी से भर कर बाहर ननकाल मलया। कफर ढोल का पानी उस होज़ मंे डाला जजससे जानवर पानी पी रहे थ,े थोड़ा पानी बचा कर उससे मुह हाथ धोया, पेट भर कर पानी वपया और वापस लोगों के बीच से ननकल कर अलग हो गए। यह लोग उन्हें कु छ हैरानी से देख रहे थे। पहले तो उन्होंने जजस तरह अके ले ह पानी का ढोल भर मलया वो भी कम अजीब बात नह ंु थी, कफर मुह हाथ धोंने से उनका चहरा ननखर कर सामने आया तो उससे भी और उनके कपड़ों से भी लोग समझ गए यह कोई ममस्री हंै। ममस्र उस ज़माने मंे सपू र पावर हुआ करता था, इस मलए लोगों पर उनका कु छ रॉब बैठ गया था। हज़रत मूसा (अ) भीड़ से ननकले तो उन्होंने उन लड़ककयों और उनके जानवरों को देखा जो बहुत प्यासे थे, वह सीधा उसके पास गए और जा कर उनसे पूछा: ''आप इन मासमू जानवरों को पानी क्यों नह ुं वपला रह हंै?'' उनमे से एक लड़की ने जो दसू र से ज़रा बड़ी थी कु छ अफ़सोस के साथ कहा: ''जब तक यह चरवाहे ना चले जाएुं हम अपने जानवरों को पानी नह ंु वपला सकते।'' ''आप के घर मंे कोई मदक नह ?ंु '' मूसा (अ) ने चरवाहों की भीड़ की तरफ देखते हुए पूछा तो इस बार छोट लड़की ने जवाब हदया: ''हमारे अब्बा जान बहुत बूढे हंै और हमारा कोई भाई भी नह ंु है।'' हज़रत मसू ा (अ) ने उनकी बात सुनकर अपने सफ़र की थकान से ननढाल होने के बावजदू ख़ामोशी से उनके जानवर साथ मलए और कु ए की तरफ चल हदए। उन्हें देख कर सारे चरवाहे पीछे हट गए। उन्होंने बड़े आराम से जानवरों को पानी वपलाया और वापस लाकर लड़ककयों के हवाले कर हदया। लड़ककयांु ख़शु ी ख़शु ी घर लौट गईं जबकक हज़रत मसू ा एक पडे ़ की छाया में बैठ गए। नाएमा ने देखा कक उनकी आखूँ ें बंुद थी और वह होंठो से कु छ बड़बड़ा रहे थे। नाएमा ने अस्र से पछू ा: Page 202 क़सम उस वक़्त की
''यह क्या कह रहे हैं?'' ''यह अल्लाह से दआु कर रहे हंै कक ऐ मेरे रब इस वक़्त जो भी भलाई तू मझु पर भजे े मंै उसका ज़रूरत मुंद हूँ।'' कफर वह हूँसते हुए एक तरफ इशारा करते हुए बोला: ''आक़ा ने बन्दे की दआु ककतनी जल्द सुन ल , देखो वो सार भलाई यानन सफू राह इनके पास खदु चलती हुई आ रह है।'' नाएमा ने देखा कक लड़ककयों में से बड़ी लड़की खझजकती शमातक ी हुई उनकी तरफ आ रह है। नाएमा को अस्र की बात से मालूम हुआ कक उसका नाम सफू राह है, लेककन वह उसके बारे मंे और ज़्यादा जानना चाहती थी इसमलए उसने अस्र से सवाल ककया। ''यह सफू राह 'सार भलाई' कै से हो गई?'' ''खाना, पीना, रहने की जगह और प्यार करने वाल बीवी, अल्लाह तआला यह सार ज़रूर नमे तंे सफू राह के रूप में मूसा (अ) को देने का फै सला कर चकु े हंै।'' ''तो क्या इन की शाद हो जाएगी?'' नाएमा ने बड़ी हदलचस्पी से पूछा, उसके अन्दर की लड़की जाग गई थी, उसे अब सफू राह की जगह हज़रत मूसा (अ) की दलु ्हन नज़र आ रह थी। ''हाँू यह शमील लड़की अपने ज़माने के महान रसूल और उनकी उम्मत के सरदार की बीवी बनगे ी।'' सफू राह हज़रत मूसा (अ) के पास आकर खड़ी हो गई। उनके क़दमों की आहट ने हज़रत मसू ा की आँूखंे खोल द थी, सफू राह को देख कर उन्होंने नज़रंे झुका ल ।ंु सफू राह ने खझजकते हुए उनसे कहा: ''वो मरे े अब्बा जान आप को बलु ा रहे हंै ताकक आप ने जो हमारे जानवरों को पानी वपलाया है उसका बदला दे सकंे ।'' हज़रत मसू ा (अ) ने एक पल को सोचा, वह चाहते तो उन लड़ककयों से उसी वक़्त मदद की अपील कर सकते थे जब उन्होंने उनकी मदद की थी और वो उनकी मदद ज़रूर करती,ंु लेककन क़सम उस वक़्त की Page 203
उनकी शराफत ने गवारा नह ुं ककया कक अहसान कर के बदला माुगं े, उन्होंने इुंसानों के बजाए उनके रब से मागँू ा था। मगर अब वह यह बात अच्छी तरह जानते थे कक इस लड़की के ज़ररये अल्लाह तआला उनकी कु छ मदद करना चाहते हंै, इस वक़्त इसे मना करना ना शकु ्री होगी, इस मलए वह ख़ामोशी से उठ कर खड़े हो गए। ................................. वो दोनों वहाुं से चले गए, नाएमा वहांु अस्र के साथ खड़ी रह गई, उसने अस्र से पूछा: ''हज़रत मसू ा (अ) यहाँू इस हाल में कै से पहुंच?े '' ''यह तो तमु जानती हो कक हज़रत मसू ा पदै ा हुए तो उस ज़माने के कफरोन ने हुक्म जार कर हदया था कक कौम बनी-इसराइल (यहूद ) मंे पदै ा होने वाले बच्चों में हर लड़के को क़त्ल कर हदया जाए। जब हज़रत मूसा (अ) पैदा हुए तो उनकी माूँ बहुत परेशान थीुं मगर अल्लाह तआला ने उनका मागक दशनक ककया, जजसके बाद उनकी माँू ने उन्हंे एक टोकर में रख कर नील नद मंे बहा हदया। अल्लाह की क़ु दरत से यह टोकर कफरोन की रानी हज़रत आमसया तक जा पहुूँची, उन्होंने इन्हंे नद से ननकाल कर अपना बेटा बना मलया।'' ''यह तो अल्लाह ने अजीब तर के से उनकी जान बचाई।'' नाएमा ने हैरत (आकचय)क से कहा। ''उनकी जज़न्दगी ह नह ुं बचाई बजल्क उनको उनकी माूँ के पास भी लौटा हदया।'' ''वो कै से?'' ''वो ऐसे कक हज़रत मसू ा ने ककसी दधू वपलाने वाल दाई से दधू नह ंु वपया। हज़रत मसू ा (अ) की बड़ी बहन जो टोकर पर दरू से नज़र रखे हुए थी और वह जानती थी कक उनका भाई रानी के पास है, उन्होंने महल में जाकर रानी से अपनी माँू के बारे में बताया कक वो भी दधू वपलाने का काम करती हंै। इसमलए जब मूसा (अ) को उनकी माँू के पास लाया गया तो उन्होंने बड़े आराम से दधू पी मलया, इस मलए रानी ने मूसा (अ) को पालने के मलए उनकी माूँ ह के हवाले कर हदया।'' ''कफर उन्होंने ममस्र क्यों छोड़ा?'' नाएमा ने पूछा तो अस्र ने पूर बात बताई। क़सम उस वक़्त की Page 204
''हज़रत मूसा (अ) एक ह समय मंे ममसर शाहज़ादे भी थे और अपनी माूँ के हवाले से कौम बनी-इसराइल (यहूद ) के भी एक हहस्सा थे, और क्यों कक कफरोन की कौम बनी-इसराइल पर बहुत ज़ुल्म करती थी इस मलए वह कौम बनी-इसराइल की मदद करते रहते थे। उनके जवान होने के बाद एक हदन कौम बनी-इसराइल का एक आदमी यानन यहूद का एक ममसर से झगड़ा हो गया। वह ममसर उसे पीटने लगा, तभी हज़रत मूसा वहाुं से गुज़र रहे थे, उस यहूद ने हज़रत मसू ा (अ) को मदद के मलए पकु ारा, हज़रत मसू ा उसे बचाने आगे आए तो ममसर ने उनपर भी हमला कर हदया। हज़रत मसू ा ने उसे एक घूसा मारा जजससे वो ममसर मर ह गया।'' ''अच्छा तो इस मलए ममसर उनके दकु मन हो गए।'' नाएमा ने कहा। ''हाूँ मगर उस हदन यह बात छु पी रह और ककसी को पता नह ंु चला कक इस को ककसने मारा है। दसू र तरफ हज़रत मसू ा ने अल्लाह तआला से अपनी गलती की बहुत माफ़ी मागुं ी। अगले हदन वह उसी जगह से गुज़रे तो देखा कक वह यहूद एक दसु रे ममसर ले लड़ रहा था, उन्हें देख कर उसने कफर उन्हें मदद के मलए पुकारा। इस बार हज़रत मसू ा समझ चकु े थे कक यह खदु ह शरारती आदमी है जो हर हदन ककसी ना ककसी से लड़ता रहता है, मगर क्यों कक वह आज भी वपट रहा था इस मलए हज़रत मूसा यह कहते हुए उसे बचाने आगे बढे कक 'तू बड़ा गमु राह आदमी है'। यह सुन कर वह यह समझा की आज मसू ा मुझे बचाने नह ंु बजल्क और मझु े ह पीटने आ रहे हैं। शरारती तो वह था ह , इसमलए चचल्ला कर बोला कक मसू ा जैसा तुमने कल एक ममसर को मारा था आज तमु मुझे भी मारना चाहते हो। इस मलए क़त्ल का राज़ फाश हो गया और ममस्र के दरबार में उनके खखलाफ कदम उठाने के मशवरे होने लगे। महल मंे उनके एक हमददक ने उन्हंे इसकी खबर द और फ़ौरन ममस्र छोड़ देने का मशवरा हदया, जजसके बाद वह अके ले सीना के रेचगस्तान को पार करते हुए मद्यन आ पहुुंच।े '' ''अब मंै समझी इतना लम्बा सफ़र उन्होंने अके ले क्यों तय ककया था।'' ''हाूँ, और नाएमा अब यह समझलो कक मैं तमु ्हे यह सब कु छ क्यों बता रहा हूँ, याद रखना अल्लाह तआला अपने नेक बन्दों को कभी अके ला नह ुं छोड़ते। तमु ने हज़रत मसू ा (अ) की सीरत (चररत्र) को तो देखा कक ककस तरह उन्होंने थकान के बाद भी अजनबी लड़ककयों की मदद क़सम उस वक़्त की Page 205
की, और उन लड़ककयों से ना ज़्यादा फ्री होने की कोमशश की और ना लाख मजबूर के बावजूद उनसे मदद मागुं ी। हालांकु क उन्हंे खाने और आराम वगरै ह की बहुत ज़रूरत थी। इसी इंुसानी हमददी के उसूल पर उन्होंने उस यहूद की जान बचाई थी जजसने उनका राज़ खोल कर उन्हें इतनी मुजककल में डाल हदया, मगर उससे बदला लेने की बजाए वह यहाँू आ गए।'' ''ककतने अच्छे इुंसान हंै।'' ''नाएमा इंुसान की इन्ह अच्छाइयों को सवारने, ननखारने और उनको बढाने वाले इुंसानों को तलाश करने के मलए ह खदु ा ने यह दनु नया और इसका का पूरा ननज़ाम (System) बनाया है। उसने इुंसान को अच्छा बरु ा करने की आज़ाद और समझ दे कर पदै ा ककया, कफर खदु इुंसान से पदे मंे हो गया। अब एक तरफ इंुसान के अपने नीजी फाएदे और ख्वाहहशंे (इच्छाएँू) हंै और दसू र तरफ उसकी अपनी कफतरत और ज़मीर की आवाज़ है। कु छ लोग तो इन चरवाहों की तरह हो जाते हैं जो शराफत के जज़्बे से खाल हो जाते हैं। कु छ कफरोन और उसके साचथयों की तरह ज़लु ्म करने ह को अपनी आदत बना लेते हंै। ऐसे ह कु छ सफू राह की तरह हया और शमक को बचा कर रखने वाले होते हैं, और कु छ मसू ा (अ) की तरह बरु े से बुरे हालात मंे भी इुंसाननयत को अपने हाथ से नह ंु जाने देते। यह लोग अल्लाह को पसदंु हंै जजन्हंे वह जन्नत में हमेशा के मलए अपने कर ब जगह देगा, जबकक कफरोन जैसों को जहन्नम के कै द खाने मंे फे क हदया जाएगा।'' अब नाएमा बोल : ''लेककन क्या अल्लाह की इस स्कीम मंे जज़न्दगी मजु ककल नह ुं हो जाती।'' ''मगर इसके बगैर अच्छे इंुसानों को छांुटा भी तो नह ुं जा सकता, और ना लोग इसके बबना अपनी अच्छाइयों को बढा सकते हंै। और अगर अल्लाह तआला अपने इल्म (ज्ञान) की बनु ्याद पर फै सला करते तो हर जहन्नम मंे जाने वाला कहता कक मुझे ना हक़ सज़ा द जा रह है। मगर अब जब क़यामत होगी तो हर जन्नती और हर जहन्नमी मेररट (योग्यता) पर अपने अपने अजंु ाम को पहुंचंेगे।'' ''मगर अस्र! अल्लाह के इस प्लान का बहुत से लोगों को पता ह नह ।ंु '' क़सम उस वक़्त की Page 206
''देखो यह प्लान लोगों को साफ़ पता चल जाए तो बहुत अच्छी बात है इससे बात बबलकु ल साफ़ साफ़ समझ में आ जाती है, और मसु लमानों का यह बनु याद फ़ज़क है कक वो हर एक इुंसान को मुहब्बत और हमददी के साथ अल्लाह का यह प्लान बतादंे। लेककन अगर ककसी को ना भी पता चले तो भी उसके इजम्तहान मंे कोई फकक नह ंु आता क्यों कक अल्लाह ने हर इंुसान के अन्दर इस प्लान का बुन्याद ढांुचा पहले ह रखा है। हर इंुसान के अमल (कमक) इस बुन्याद पर ह होते हंै कक अच्छे का बदला अच्छा है और बुरे का बदला बरु ा है, यह बात हर इंुसान की कफतरत मंे मलखी है।'' अस्र एक पल को रुका और कफर बोला: ''यह बात बहुत अहम (महत्वपणू )क है इसे अच्छी तरह समझ लो, हर इुंसान को अल्लाह तआला ने बुयाद रहनुमाई (मागदक शनक ) के साथ पैदा ककया है। इंुसान अच्छे और बरु े को अच्छी तरह जानता है, ममसाल के तौर पर हर इुंसान जानता है की झूट बरु और सच अच्छी बात है। इसी तरह सब जानते हंै कक दसु रे की जान माल और इज्ज़त हम पर हराम है, इसी तरह इुंसान जानते हैं कक अच्छे और बरु े पर इनाम और सज़ा होनी ज़रूर है। इसी उसूल पर इुंसानों ने जुम,क अदालत, कानून, मुक़दमे तरह तरह के कम्पट शन, स्कू ल कॉलेज के एग्जाम का मसस्टम और इसी की बुन्याद पर लोगों को सज़ा या इनाम सम्मान देने का परू ा मसस्टम बना रखा है। इंुसान अपना पूरा मसस्टम इसी उसूल पर चलाता है, ठीक इसी उसलू पर अल्लाह भी क़यामत के हदन अपनी सज़ा या इनाम कायम कर दंेगे।'' ''बात तो सह है, लेककन मुझे यह गलत फहमी हो रह थी कक हर इुंसान के पास ककसी पैगम्बर का पहुँूचाना ज़रूर है।'' ''नह ुं यह बबलकु ल ज़रूर नह ंु कक हर इुंसान के पास पैगम्बर खदु जाए और उसे यकीन हदलाए कक अच्छाई और बुराई का नतीजा यह कु छ होने वाला है, नह ुं यह रहनुमाई (मागदक शनक ) खदु उनके अन्दर पहले से ह है, अब जो लोग इस रहनमु ाई की कदर करते हुए इसे अपनाते हंै और इसके अनसु ार अपने आमाल (कम)क करते हंै तो उनके अन्दर की अच्छाई और ज़्यादा बढती जाती हैं जजससे जन्नत मंे उनके दजे बढते जाते हैं। और जो इस रहनमु ाई को ठु करा कर इसे दबा कर इसके खखलाफ अमल करते हंै उनके हदल सख्त होते जाते हंै।'' क़सम उस वक़्त की Page 207
यह कह कर अस्र ने नाएमा का हाथ पकड़ा और बोला: ''अब आओ मैं तमु ्हे हदखाता हूँ कक ककस तरह के लोग सच्चाई को फ़ौरन क़ु बूल कर लेते हैं और हर कु बाकनी दे कर उस पर जम जाते हंै और ककस तरह के लोग हर ननशानी देखने के बाद भी अपनी गुमराह पर जमे रहते हंै।'' ............................................ हर तरफ जकन का माहोल था, बहुत सारे लोग एक मदै ान मंे जमा थे। सुबह का समय था और सूरज चमक रहा था लेककन उसकी धपू अभी इतनी गमक नह ुं हुए थी जजससे मैदान में मौजदू लोगों को कोई परेशानी महसूस होती। मैदान के एक कोने में कफरोन का दरबार सजा था, कफरोन के दरबार और लककर अपनी जगह पर मौजदू थे, जबकक आस पास भार सखंु ्या में ममसर लोग जमा हुए थ।े मैदान के दसू र तरफ कौम बनी-इसराइल के लोग खड़े थे, यह चगनती में बहुत ज्यादा थे लेककन सहदयों की गुलामी और कफरोनो के ज़ुल्म सहते हुए इनकी हालात बहुत ख़राब हो चकु ी थी। अस्र के साथ खड़ी हुई नाएमा ख़ामोशी से पूरे माहोल का जाएज़ा ले रह थी। तभी बनी-इसराइल (यहूद ) की भीड़ में कु छ हल चल सी महससू हुई। एक तरफ से लोगों की भीड़ को चीरते हुए दो आदमी सामने आकर खड़े हो गए, उनमे से एक को पहचानने मंे नाएमा को कोई परेशानी नह ुं हुई, यह हज़रत मसू ा (अ) थ।े उन्होंने दाहहने हाथ में एक असा (डडुं ा) पकड़ा हुआ था, जबकक उनके बराबर में खड़े दसु रे आदमी का पररचय खुद अस्र ने नाएमा को बताया। ''हज़रत मूसा के बराबर में मौजदू आदमी हज़रत हारुन (अ) हैं, जब अल्लाह ने हज़रत मूसा (अ) को रसलू बनाया तो उन्होंने हारुन को अपना मददगार बनाने की अपील की, इसमलए अल्लाह ने उन्हें भी नबी बना हदया।'' ''इनको रसूल कब बनाया गया था?'' नाएमा ने सवाल ककया। ''हज़रत मूसा (अ) दस साल मद्यन मंे रहे, कफर अपनी बीवी सफू राह के साथ वापस ममस्र आ रहे थे कक रास्ते में पड़ने वाले पहाड़ जजसे कोहे तरू कहा जाता है, उसके नीचे अल्लाह तआला ने उनसे बात की और उन्हें रसूल बनाया।'' क़सम उस वक़्त की Page 208
''कफर क्या हुआ?'' ''इन दोनों ने कफरोन के दरबार मंे जा कर उसे अल्लाह का पगै ाम (सदंु ेश) पहुूँचाया, मगर भला वह कहाूँ उनकी बात सनु ने वाला था। जजसके बाद हज़रत मूसा (अ) ने इस बात के सुबतू मंे कक वह एक सच्चे पैगम्बर हंै अपने वो मोजज़े (चमत्कार) हदखाए जो ननशानी के मलए अल्लाह ने उन्हें हदए थ।े '' ''उनके असा (डडुं )े का सांुप बनजाने वाला मोजज़ा?'' ''हाूँ असा (डडंु )े का सापुं बनजाने वाला भी और उनके हाथ मंे से रौशनी ननकलने वाला भी। कफरोन उन मोजज़ों को देख कर डर तो गया था मगर उनकी सच्चाई नह ुं मानी, बजल्क यह दावा कर हदया कक यह मसफक एक जादू है और ऐसा जादू तो उसके देश मंे बहुत से जादगू र हदखा सकते हंै, इसमलए उसने उनको चलै ंेज हदया कक आज के हदन यानन जब ममसररयों के जकन का हदन होता है वह परू े देश से जादू गारों को बुला कर हज़रत मूसा (अ) के मोजज़े (चमत्कार) का मुकाबला करेगा।'' अभी अस्र की बात पूर ह हुई थी कक ममसररयों में शोर मच गया, नील नद की तरफ से कफरोन अपने महल से ननकला और अपनी शान के नारों के बीच अपने लककर सहहत दरबार की तरफ बढने लगा। कफरोन अपने चहरे ह से एक ज़ामलम आदमी लगता था, उसकी गदकन तनी हुई थी और आँखू ों में घमंुड था, वह बहुत शान के साथ चलता हुआ एक ऊंु ची जगह पर शाह तख़्त पर आकर बठै गया। अपनी शाह कु सी पर बठै कर उसने कु छ इशारा ककया तो पूरे देश से आए हुए बड़े बड़े जादगू रों का एक परू ा चगरोह उसके सामने पशे हुआ। कफरोन ने उनसे कहा: ''तमु जानते हो हमार कौम ककतनी अज़ीम (महान) है, हम ककतने ताक़तवर लोग हैं। यह बनी- इसराइल (यहूद ) हमारे गुलाम हैं, इनकी जज़न्दगी और मौत हमारे हाथ में है, मगर अब उनके बीच एक ह रो पैदा हुआ है जो हमारे देश पर कब्ज़ा करना चाहता है, इसके मलए उसने जादू का सहारा मलया है, मगर जजस तरह यह लोग हमसे ताक़त मंे नह ुं जीत सकते इसी तरह जादू की ताक़त में भी हम इनको हराना चाहते हंै। क्या तमु हमारे मलए यह काम करोगे?'' क़सम उस वक़्त की Page 209
जादगू रों को अपने जीतने का इतना यकीन था कक उनका ध्यान इस बात में था कक इस मोके पर जब कफरोन की इज्ज़त का सवाल है तो इससे ज़्यादा से ज़्यादा इनाम का वादा ले लंे, इसमलए उन्होंने कहा: ''हुजरु हमंे इसका क्या इनाम ममलेगा?'' कफरोन ने जादगू रों की बात सुनकर बहुत ख़शु ी के साथ कहा: ''हम तुम्हे अपने दरबार के खास लोगों में शाममल कर लेंगे। शाह दरबार की इज्ज़त, बहुत दौलत और खबू सूरत लड़ककयाुं तुम्हे इनाम में द जाएुंगींु।'' यह सुन कर जादगू रों के चगरोह मंे ख़शु ी की लहर दौड़ गई और ममसर लोग कफरोन की जय जय कार करने लगे। दसू र तरफ बनी-इसराइल अपनी जगह सहमे हुए खड़े थ।े नाएमा समझ रह थी कक अब मकु ाबला शुरू होगा मगर वहाुं एक दसू रा तमाशा शुरू हो गया, कफरोन ने जादगू रों को अपने कर ब बठै ने का हुक्म हदया। उसने उन्हें अपने इनाम की झलक हदखाने का पहले ह इजन्तज़ाम कर रखा था, उसके इशारे पर जादगू रों के सामने ममस्र की खबू सूरत लड़ककयों का एक ग्रुप उतरा और मैदान में बज रहे संगु ीत पर नाचना शुरू कर हदया। वह लड़ककयांु अपने हुस्न और डासंु से जादगू रों को अपनी तरफ आकवर्तक कर रह थी। नाएमा को इस मंे कोई हदलचस्पी नह ंु थी, इसमलए वह अस्र से बोल : ''समझ में नह ुं आता कक कफरोन ने हज़रत मूसा (अ) से मुकाबले की क्यों ठानी, क्या यह उनके खखलाफ सीधे कोई कदम नह ंु उठा सकता था।'' ''तमु इस बात को नह ंु जानती कक हज़रत मूसा (अ) कौन हंै, मैं तमु ्हे बता चकु ा हूँ कक हज़रत मसू ा की पैदाइश के वक़्त बनी-इसराइल (यहूद ) के हर पैदा होने वाले लड़के को क़त्ल करने का हुक्म था, लेककन अल्लाह की शान देखो कक उसने इनको बचा मलया और इनकी परवररश शाह महल में शहजादों की तरह हुई। शाह घराने की वजह से ममसर कौम के सब लोग इन्हें अच्छी तरह जानते हंै कक यह बहुत बहादरु बहुत नेक और सच्चे इुंसान हैं, यह झूट नह ंु बोल सकते, इस मलए कफरोन यह चाहता है कक उनको मुकाबले मंे हरा दे ताकक वह झूटे साबबत हो जाएुं और लोगों के हदले मंे उनकी इज्ज़त ख़त्म हो जाए उसके बाद उनके खखलाफ कोई कदम उठाए। क़सम उस वक़्त की Page 210
वरना एक तरफ तो बनी-इसराइल की बगावत का खतरा है और दसू र तरफ दरबार और महल मंे हज़रत मसू ा को पसदंु करने वाले लोगों की भी कमी नह ुं जो बबना वजह के उनके खखलाफ उठाए ककसी भी कदम का ववरोध भी कर सकते हंै। लेककन कफरोन को हज़रत मसू ा (अ) के खखलाफ कदम उठाने से रोक देने वाल सबसे बड़ी चीज़ अल्लाह तआला की खास नमे त है जो इनके साथ है यानन अल्लाह ने इन्हें ऐसा मोजज़ा (चमत्कार) हदया है कक जो उसे देखता उसके हदल में इनका डर बैठ जाता है।'' अस्र की बात सनु ते हुए नाएमा ने कफरोन की तरफ देखा, उसके सामने वह नाचने वाल लड़ककयांु नाच रह थी। डाुंस अपने आखर पड़ाव पर था और तज़े से तज़े होता जा रहा था, लड़ककयों का जादू लोगों पर चढ चकु ा था, उनकी ख्वाहहशें (इच्छाएँू) उबल उबल बाहर आ रह थी। लडककयों ने लोगों को अपने जजस्म की तरफ आकवर्तक करने के मलए कु छ कमी नह ंु छोड़ी थी, अब उन्होंने तज़े ी से घमू ना शुरू कर हदया वो तेजी से घूमती हुई राजा के सामने पहुँूची, कफर अचानक उनके कदम ठहर गए संुगीत की आवाज़ बुंद हो गई हर तरफ ख़ामोशी छा गई, लड़ककयों ने सर झुका कर राजा को सलामी द उसके साथ ह दरबार मंे उनकी वह वाह की आवाज़े तेज़ हो गई। नाएमा ने इस सब पर दसु रे अदुं ाज़ में रौशनी डाल , उसे साइकोलॉजी में महारत हामसल थी वह अस्र से बोल : ''यह राजाओुं की क्लास ककतनी चालाक होती है, इन्हंे पता होता है कक इुंसानों की कमज़ोर क्या क्या होती हंै।'' ''हर दौर में यह हुआ है, जनता को असल हकीक़त से अधँू रे े में रखने और बड़े लोगों को खशु करने के मलए नाचने वाल लड़ककयाुं, डांुस, म्यूजजक, शराब, और जजस्म फरोशी एक बहुत बड़ा हचथयार बना है, यह तुम्हारे ज़माने में हो रहा है। लेककन यह लोग इन चीज़ों से ऊपर उठ कर कु छ सोच ह नह ुं सकते।'' ''सच कहा तमु ने।'' नाएमा ने अस्र की बात को आगे बढाया। ''काश हमारे पास भी कोई असा होता जो इस जादू को तोड़ देता।'' अस्र ने उसे होंसला देते हुए कहा: क़सम उस वक़्त की Page 211
''तुम्हारे पास सबसे बड़ा असा है, बहुत जल्द उसके बारे में हज़रत मूसा की बातों से तुम समझ जाओगी, अब उनके वो शब्द ध्यान से सनु ना जो वो जादगू रों से कहेंगे।'' ................................. मुकाबला शरु ू होने वाला था, एक तरफ जादगू र खड़े थे और दसू र तरह हज़रत मसू ा और हज़रत हारुन (अ)। जादगू रों के हाथ में रजस्सयाूँ और लाहठयाुं थी,ंु तभी हज़रत मसू ा आगे बढे और बोले: ''तमु ने कफरोन के बारे में सुन मलया, अब मैं तुम्हें रह म और कर म अल्लाह के बारे मंे बताता हूँ। मंै तमु ्हे एक अल्लाह की बुदं गी की दावत देता हूँ, वह आसमान और ज़मीन और उसके बीच की हर चीज़ का मामलक है। उस पर ईमान ले आओ तो वो तुम्हंे अपनी जन्नत की बादशाह में जगह देगा, हर वो चीज़ जजसका वादा कफरोन कर रहा है इससे कह बढ कर तुम्हंे खदु ा की जन्नत में ममलेगा। उन नमे तों में तुम हमशे ा जजयोगे, वहांु मौत का अदंु ेशा भी तुम्हंे कभी नह ुं होगा, और अगर तुम अल्लाह की तरफ से कोई झूठ बाूधँ ोगे तो याद रखो जहन्नम के अज़ाब से बचने का कोई रास्ता तमु नह ुं पाओगे।'' नाएमा ने यह शब्द सुने और उसके हदल मंे उतरते चले गए, उसे अहसास हो गया कक आखखरत का यकीन ह वो असा है जो ऐसे हर सापंु के ज़हर से इन्सान को बचा सकता है। हज़रत मसू ा (अ) की जजस बात ने नाएमा के हदल पर असर डाला था उसकी इतनी तासीर थी कक वहाुं मौजूद हर आदमी ने उनकी बात अपने हदल मंे उतरती हुई महससू की। जादगू रों का हौंसला पस्त हो गया, उनमे कानाफू सी शरु ू हो गई, कु छ कहने लगे कक हमंे मूसा की बात नाम लेनी चाहहए, कु छ की राए यह थी कक उन्हें मकु ाबला नह ंु करना चाहहए, क्यों कक मसू ा सच्चा है तो हम कभी नह ंु जीत सकते। दरबार कर ब बैठे यह सब देख रहे थे, उन्हंे शक हो गया कक कह ंु यह जादगू र मुकाबले से पीछे न हट जाए।ंु क्यों कक उन्ह दरबाररयों ने जादगू रों को जमा ककया था, इसमलए वो जादगू रों से बोले: ''यह पगै म्बर नह ुं जादगू र है, अपने जादू के ज़ोर से तुम्हे ननकाल कर ममस्र पर कब्ज़ा करना चाहता है। यह तुम्हार पुरखों की सुंस्कृ नत को ममटा कर नई ससंु ्कृ नत लाना चाहता है। तुम्हे क़सम उस वक़्त की Page 212
कफरोन की दोस्ती और इनाम का ऐसा मौका कफर कभी नह ंु ममल सकता, जो आज जीत गया समझो वह जज़न्दगी भर के मलए बाज़ी मार गया।'' डर लालच और तास्सबु (पवू ागक ्रह) का जो जाल मसयासी लोग हमेशा बुनते आए हैं वह इस वक़्त उन दरबाररयों ने इजस्तमाल ककया। जादगू र इस जाल में आगए, उन्होंने मुकाबले के मलए कमर कस ल और पूरे ववकवास के साथ एक लाइन मंे खड़े हो कर बोले: ''ऐ मसू ा! यह बातें छोड़ो, असल बात की तरफ आओ, यह बताओ कक पहले हम अपना जादू हदखाएँू या पहल तमु करोगे।'' जवाब आया: ''तमु ्ह पहल करो।'' जादगू रों ने कु छ पढना शुरू ककया और कफर ज़ोर से नारा लगाया। ''कफरोन की इज्ज़त की कसम हम ह हावी रहेंगे।'' इसके बाद जो हुआ वह देख कर नाएमा दंुग रह गई, उसने जज़न्दगी में कभी ऐसा कु छ नह ुं देखा था। जादगू रों की लाहठयाुं और रजस्सयाँू ज़मीन पर चगर ंु और एक पल मंे ह बड़े बड़े साँूपों मंे बदल गईं, कफर रंेगती हुई तज़े ी से हज़रत मसू ा (अ) की तरफ बढने लगीुं, नाएमा भी वह ंु खड़ी थी। एक तो सापंु कफर वो भी इतने सारे, नाएमा डर गई और उसने अस्र का बाज़ू ज़ोर से पकड़ मलया, नाएमा ने अस्र के चहरे पर नज़र डाल वह इजत्मनान ने खड़ा हुआ था, कफर नाएमा ने हज़रत मसू ा (अ) के चहरे को ध्यान से देखा वहांु कु छ परेशानी के साए नज़र आ रहे थे। साफ ज़ाहहर (स्पष्ट) था कक जो मोजज़ा (चमत्कार) हज़रत मूसा ने हदखाया था उसका जवाब आचकु ा था, साबबत हो चकु ा था कक अगर हज़रत मूसा लाठी को साुंप मंे बदल सकते हैं तो यह काम जादगू र भी कर सकते हंै, लोगों के मलए फै सला हो चकु ा था.....दोनों तरफ जादगू र ह थ,े यह बात दसु रे लोगों ने भी समझी और हज़रत मसू ा को भी अहसास हो गया था कक अब मामला क्या बन चकु ा है। क़सम उस वक़्त की Page 213
हर तरफ शोर मच गया, ममसर ज़ोर ज़ोर से नारा लगाने लग,े दरबार अपनी कु मसयक ों पर से खड़े हो चकु े थे, जबकक कफरोन परू े ववकवास के साथ ववजयी अदुं ाज़ से मुस्कु रा रहा था, उसे मालूम था कक अब हज़रत मूसा अपने असे को सांुप बना डालंेगे तब भी ककसी को कोई फकक नह ंु पड़ता, कफरोन ने बड़ी चालाकी से अपना मकसद हामसल कर मलया था। कौम बनी-इसराइल पर ख़ामोशी छाई हुई थी, उन्हंे भी अदंु ाज़ा था कक क्या हो रहा है, लेककन यह देख कर नाएमा को हैरत हुई कक जादगू र खशु तो हो रहे थे, लेककन वो परू गभंु ीरता के साथ अपने सापँू ों को देख रहे थे जो अब धीरे धीरे हज़रत मूसा (अ) की तरफ बढ रहे थे। बनी- इसराइल के लोग भी डर के मारे पीछे हटने लगे थ,े लेककन हज़रत मसू ा और हज़रत हारुन (अ) अपनी जगह ह खड़े हुए थे। जब साुपं उनके बबलकु ल पास पहुूँच गए तो हज़रत मूसा (अ) ने अपनी लाठी ज़मीन पर फें कते हुए कहा: ''ऐ जादगू रों! तुम्हारा काम मसफक जादू है और यह असा अल्लाह का हुक्म है, अल्लाह का हुक्म तमु ्हारे जादू को बबलकु ल ममटा देगा।'' अचानक नाएमा ने देखा कक हज़रत मूसा की लाठी जो मजु ककल से डढे मीटर की होगी, कई गुना लम्बे और बहुत खौफनाक सापंु मंे बदल चकु ी है। यह साुंप जजतना ज़्यादा बड़ा था उससे कह ंु ज़्यादा तज़े था, यह बबजल की तरह आगे बढा और सामने से आने वाले सापँू ों को तज़े ी से ननगलने लगा, एक एक करके उसने सारे सापँू ों को हड़प कर डाला, जादगू रों के सापुं ख़त्म हो गए। कौम बनी-इसराइल (यहूद ) मंे ख़शु ी की लहर दौड़ गई जबकक ममसर और कफरोन के चहरे मरु झा गए, ऐसी हार का तो उन्होंने सोचा भी नह ंु था। जादगू र थोड़ी देर तक खामोश खड़े रहे, वो अपनी कला के माहहर थे, अच्छी तरह समझते थे कक जादू क्या होता है और क्या नह ंु होता। वो यह भी जानते थे कक उन्होंने रजस्सयों और लाहठयों को सापूँ ों में नह ुं बदला था बजल्क लोगों की आँखू ों पर जादू ककया था जजससे उन्हंे यह सापूँ ों जैसे द खते, उन्हंे यह भी मालमू था कक इस वक़्त जो सांपु उनके सामने मौजूद है वो हकीक़त मंे एक लाठी से हकीक़त का सांुप बन चकु ा है। वो ज़ोर की आवाज़ से बोल उठे : क़सम उस वक़्त की Page 214
''हम सार काएनात के रब पर, मूसा और हारुन के रब पर ईमान लाते हंै।'' यह कहते हुए वो अपनी गलती के अहसास के साथ अल्लाह के हुज़रू सज्दे मंे चगर गए। कफरोन के मलए जादगू रों की हार ह कम नह ुं थी कक अब यह जादगू र ईमान भी ले आए, वह बहुत गुस्से में खड़ा हुआ और बोला: ''तमु मेर इजाज़त के बगरै ईमान ले आए....'' लेककन वह था एक पक्का शानतर और मसयासी आदमी, इसमंे कोई शक नह ंु कक अगल बात जो उसने कह वो कोई आम आदमी सोच भी नह ुं सकता था, उसने अपनी रुसवाई का इलज़ाम जादगू रों पर लगाते हुए कहा: ''मैं समझ गया हूँ कक असल बात क्या है, यह मूसा तुम्हारा सरदार है, इसी ने तुम सब को जादू मसखाया है, और आज के हदन के मलए तमु ने यह ममल भगत कर ल कक तुम मूसा के सामने हार जाओगे, इस तरह तमु मसू ा को सच्चा साबबत कर दोगे।'' कफर वह दरबाररयों और अपने लोगों की तरफ देखते हुए बोला: ''इन सब का असल प्लान यह है कक इस साज़ बाज़ से यह गद्दी पर कब्ज़ा कर लंे और इस शहर के असल लोगों को यहाँू से ननकाल कर खदु राजा बन जाएुं।'' दरबाररयों ने कफरोन की हाँू में हाूँ ममलाई, वह बोलता रहा: ''मगर अब तमु ्हे पता चलेगा कक तुम्हारा अजुं ाम क्या होगा, मैं तमु सब का एक तरफ का हाथ और दसू र तरफ का पैर काट कर तुम्हंे पडे ़ पर सूल लटकाऊंु गा, कफर तुम देख लोगे कक ककसका अज़ाब ज़्यादा सख्त और बड़ा है।'' मगर जादगू र जो थोड़ी देर पहले कफरोन के कर बी बनना चाहते थे और उसकी इज्ज़त की कसमें खा रहे थे, वो अब ईमान वाले हो चकु े थे, ईमान भी इस सतह का कक जजसके आगे और कोई दजाक नह ुं हो सकता, वो बड़े हौंसले से बोले: ''ऐ कफरोन जो साफ़ दल ल हमारे सामने आ गई है और जजस रब ने हमें पैदा ककया है जो हमारा असल मामलक है, उससे मुह मोड़ कर हम तुझे तरजीह (प्राथममकता) कै से दे सकते हंै। क़सम उस वक़्त की Page 215
तुझे जो करना है कर ले, तरे े हाथ मंे तो बस दनु नया ह की जज़न्दगी हो सकती है। हम अपने रब पर ईमान ले आए हंै कक वो हमारे गनु ाह माफ़ करदे और मूसा के मकु ाबले के हमारे इस जमु क को माफ़ करदे जजस पर तूने हमंे उभारा है। तू हमंे मारना चाहता है तो मार दे कोई हजक नह ,ुं हम मर कर अल्लाह के हुज़ूर ह में पहुंचगे े, हम ममस्र की क़ब्ती कौम के वो पहले लोग होने का सम्मान ज़रूर पा लंेगे जो मसू ा के रब पर ईमान लाए हंै और उसके मलए ककसी से नह ंु डरे। अब हम मसफक अपने रब से उसके रहम और करम को चाहते हंै।'' कफरोन के इशारे पर मसपाह आगे बढे और उन ईमान वालों को चगरफ्तार कर मलया, अस्र ने नाएमा का हाथ पकड़ा और आगे बढ गया। .............................................. जगह वह थी, वह मैदान.....वह नील नद का बहता हुआ पानी, नद के साथ दरू तक खड़ी फसलंे, आज हर चीज वह थी, मसफक मैदान खाल था। इस मैदान के बीच में थोड़ी थोड़ी दरू पर खजूर के पेड़ के तने गड़े हुए थे, उन तनों पर खदु ा के उन नके बन्दों की लाशंे लटक रह थींु जो एक हदन पहले तक जादगू र थे मगर अब शह द की मौत पा कर खदु ा के प्यारे हो चकु े थे, जजन्होंने जान देना गवारा ककया मगर सच्चाई को नह ुं छोड़ा। नाएमा ने यह मुंज़र (दृकय) देखा और तड़प उठी, उन सार लाशों के दाहहने हाथ और बाएुं परै काट हदये गए थे। यह बात उसे अस्र बता चकु ा था कक उनके यह हाथ परै जजन्दा होते हुए काटे गए थ,े कफर उनके बाकक तड़पते हुए जजस्मों को बड़ी बड़ी कीलों से खजरू के तनों मंे ठोक कर उन तनों को ज़मीन पर गाड़ कर सीधा खड़ा कर हदया गया, कीलें भी तभी ठोकी गईं थीुं जब यह जजन्दा थे। नाएमा इस सफर मंे बहुत से लोगों की मौत देख चकु ी थी मगर इतनी ददक नाक़ मौत उसने पहल बार देखी थी, वो भी इस जमु क में कक कु छ लोगों ने यह कहा कक अल्लाह हमारा रब है। नाएमा वह ुं ज़मीन पर बे दम हो कर बैठ गई, उसने हदल मंे सोचा, कल तक ये लोग उसके सामने जजन्दा खड़े थे, और आज? क़सम उस वक़्त की Page 216
उसमे कोई सवाल पछू ने की ताक़त भी नह ंु रह थी, अस्र उसकी हालत समझ रहा था, वह उसके बराबर मंे बैठते हुए बोला: ''मुझे मालूम है तुम क्या सोच रह हो, तुम सोच रहो हो कक अल्लाह ने उन्हंे क्यों नह ुं बचाया?'' ''नह ंु तमु मुझे यहाूँ लाने से पहले हज़रत मूसा और हज़रत खखज्र के वक़्त मंे यह सब समझा चकु े हो, अब मंै जान चकु ी हूँ कक अल्लाह के हर काम में बहुत बड़ी हहकमत (Wisdom) और वजह होती हंै। तमु मझु े यह भी समझा चकु े हो कक कफरोन जैसे जामलमों का अजुं ाम जहन्नम है और इन बे गुनाहों का बदला जन्नत है जजन्हें मसफक ईमान लाने के जमु क में सूल द गई। मगर बात यह है कक जन्नत भववष्य की बात है, एक आम आदमी तो यह सोचगे ा कक भववष्य ककसने देखा है, हम इुंसान तो मसफक आज में जीते हैं, हमारा आज यह दनु नया है और दनु नया में तो इन सूल पाने वालों का नकु ्सान हो ह चकु ा है ना, इसकी भरपाई तो ममु ककन नह ।ुं '' अस्र मुस्कु राया, वह नाएमा का मसला समझ चुका था, यह उसी का नह ुं हर इंुसान का मसला था, इसमलए उसने तफसील (ववस्तार) से जवाब देने का फै सला ककया। तमु इंुसानों के मलए यह दनु नया बहुत कीमती है, मगर यह दनु नया अल्लाह की नज़र मंे कु छ भी नह ंु है। तुमने खदु इस सफ़र मंे देखा कक ककस तरह एक के बाद दसू र नस्ल इस दनु नया को आबाद करती है और जब नई नस्ल आती है तो वपछल नस्लों का नामों ननशान भी नह ुं रहता। खदु को ज़मीन का खदु ा समझने वाले कु छ बरसों और कु छ सहदयों में बे नामो ननशान हो जाते हैं, तो इसमलए दनु नया मंे फायदा और नुक्सान की अल्लाह की नज़र मंे कोई हेस्यत नह ।ंु '' ''दनू नया की बे कीमत होने की बातंे क्या इुंसान को अमल (कमक) करने से नह ुं रोकती?ुं '' नाएमा ने वह ऐतराज़ उठाया जो आखखरत के जज़क्र पर दनु नया परस्त लोगों की तरफ से ककया जाता है। ''नह ु!ं अल्लाह तआला की बात समझलो तो यह ऐतराज़ नह ुं हो सकता।'' अस्र ने नाएमा को समझाते हुए कहा: ''दरअसल दनु नया को सब कु छ समझ कर आखखरत को भूल जाने वाले लोगों के सामने ह दनु नया को बे कीमत ज़ाहहर ककया जाता है, वरना यह दनु नया 'एक से दसु रे को' के जजस उसलू क़सम उस वक़्त की Page 217
पर बनाई गई है उसका ध्यान रखना तो बहुत ज़रूर है, यहाूँ जो अमल (कम)क नह ंु करेगा वो फ़ौरन नुक्सान उठाएगा। रह आखखरत की बात तो आखखरत की सोच तो इंुसान को सबसे ज़्यादा अमल (कमक) करने पर उभारती है।'' ''वो कै से?'' ''अच्छा यह बताओ कक एक स्टू डंेट सब से ज़्यादा महनत ककस वक़्त करता है?'' नाएमा कु छ देर सोचती रह कफर मसु ्कु रा कर बोल : ''एग्ज़ाम के टाइम मंे।'' ''बस यह बात है, आखखरत की सोच दनु नया मंे इंुसान को ननकम्मा नह ंु करती बजल्क यह बताती है कक दनु नया इजम्तहान का टाइम है इसमें कोई मोममन हाथ पर हाथ धरे नह ुं बैठ सकता। कफर द न (धमक) यह बताता है कक यहाँू इजम्तहान इस बात का नह ुं कक दनु नया से अलग हो कर बैठ जाए बजल्क इजम्तहान इस बात का है कक दनु नया के सब मामलों को अपनाओ मगर उन मंे ककसी तरह का ज़लु ्म, ना इंुसाफी, झूट, चोर , ररकवत वगरै ह जसै े कोई गुनाह के काम मत करो, इस मलए एक मोममन दनु नया के काम तो करता ह है लेककन उन्ह कामों के ज़ररये (द्वारा) जन्नत भी कमाता है, वह जन्नत जो हमेशा रहेगी, जजसकी नेमते कभी कम नह ुं होंगी, इुंसान वहांु से ना ननकलना चाहंेगे ना कोई उन्हें ननकालेगा।'' ''मगर लोगों के मलए जन्नत बस एक नाम है, उनकी नज़र में ज़रूर दनु नया की जज़न्दगी और उसका नफा नकु ्सान है।'' नाएमा ने अपना असल सवाल कफर दोहराया। ''हाँू ऐसा ह है, मगर यह इस मलए है कक वो लोग यह बात भूल जाते हैं कक वे इजम्तहान मंे बठै े हैं। इस इजम्तहान मंे अल्लाह तआला गैब के परदे मंे हंै, मगर हर तरफ उन्होंने अपनी ननशाननयाँू बबखरे रखी हंै। एक तरफ तो इुंसान की अपनी कफतरत मंे एक खदु ा के होने और अच्छाई बुराई की तमीज़ मौजूद है दसू र तरफ काएनात में खदु ा की कु दरत की अनचगनत ननशाननयाूँ हंै और रसूलों की रहनमु ाई (मागदक शनक ) है।'' ''मगर इसके साथ तरह तरह के कफरोन भी तो हैं।'' यह कहते हुए नाएमा की ननगाहें सूल पर लटकी लाशों की तरफ थी। Page 218 क़सम उस वक़्त की
''सच्चाई से रोकने वाले कफरोन भी हंै, इसके साथ यहाूँ बरु ाई की तरफ बलु ाने वाले भी हैं। कु छ अपनी ख्वाहहशंे (इच्छाएँू) हैं, ईगो है, अपने नीजी फायदे और तास्सुब (पूवाकग्रह) हैं, शतै ानी ताकतंे और उनके मकवरे हंै। मगर यह तो वह रुकावटें हंै जजन्हंे अगर कोई पार करले तो अल्लाह तआला उसे अपने कर ब करके ख़त्म ना होने वाल दनु नया मंे ख़शु ी और सुकू न के साथ बसा देंगे। जबकक हर बेपरवाह, हटधमक और ज़ामलम का हठकाना जहन्नम है। लेककन इतनी बड़ी सज़ा और इनाम के मलए ज़रूर है कक इजम्तहान भी परफे क्ट हो, यह परफे क्ट इजम्तहान हो नह ंु सकता अगर इुंसान को पूर आज़ाद ना द जाए, और इसी आजाद के नतीजे में कु छ लोग कफरोन बनते हंै और इसी बबना पर कु छ ईमान वालों को इसी तरह सलू पर लटकना पड़ता है।'' ''मगर कफर भी यह आज़माइश बहुत सख्त (कहठन) है।'' नाएमा ने सूल पर लटके हुए लोगों को देख कर कहा, कफर अपनी बात जार रखते हुए बोल : ''अल्लाह तआला की ननशाननयाँू चारों तरफ सह मगर वे खदु नज़र नह ंु आत,े हर चीज़ र ज़न के पदे मंे होती है, जन्नत जहन्नम फ़ररकते सब आँखू ों से ओझल हंै। ऐसे मंे बबना देखे मानने की आज़माइश बहुत बड़ी है, सज़ा और इनाम भी बहुत बड़े हंै, अगर मरे े वश मंे होता तो मंै ऐसे इजम्तहान में कभी ना बठै ती।'' अस्र ने मसु ्कु रा कर कहा: ''नाएमा यह तमु ्हार गलत फहमी है, अल्लाह तआला ने तुम्हें या ककसी इंुसान को ज़बरदस्ती इस इजम्तहान मंे नह ुं भेजा, हर इंुसान को उसकी मज़ी के साथ और उससे पूछ कर इस इजम्तहान में भजे ा है।'' ''यह कब हुआ?'' नाएमा तफसील (ववस्तार) से जानना चाहती थी। अस्र ने आसमान की तरफ देखते हुए जवाब देना शरु ू ककया: ''यह बहुत पहले हुआ था, अल्लाह तआला ने सारे इुंसानों की रूहों (आत्मा) को एक साथ पैदा करके उनके सामने अपना परू ा प्लान रखा था, जन्नत, जहन्नम, सज़ा, इनाम, क्या करना है, क्या नह ंु करना है, हालात कै से होंगे हर चीज़ समझा द थी। तुम इंुसानों ने उन सार शतों को क़ु बूल कर मलया। क़सम उस वक़्त की Page 219
''मगर क्यों?'' ''जन्नत.....नाएमा.....जन्नत।'' अस्र ने एक शब्द मंे जवाब हदया और कफर खदु ह उसकी तफसील करते हुए बोला: ''जन्नत बहुत खबू सरू त जगह है नाएमा, तुम सोच भी नह ुं सकती वह ककतनी ऊँू ची पोस्ट है, कै से सम्मान का पद है। इंुसानों को इस इजम्तहान में उतरने से पहले जन्नत के बारे में समझा हदया गया था। इसके बाद यह ममु ककन नह ुं था कक ज़्यादातर इंुसान इस इजम्तहान मंे बैठने को तयै ार ना होत,े क्यों कक तमु हो ह ऐसे।'' कफर और ज़्यादा आसानी से समझाते हुए कहा: ''तमु ्हे याद होगा जादगू रों ने कफरोन से ककस तरह इनाम की बात की थी, और कफरोन के इनाम की घोर्णा के बाद जादगू रों को ककतनी ख़शु ी हुई थी। दनु नया की यह नमे तंे आखखरत मंे हजारों लाखों गुना बढा कर द जाएुंगी। यह मामला आखखरत की सज़ा का है, इस दनु नया मंे तो मसफक एक बार सलू द जा सकती है मगर आखखरत मंे तो हर तरह का अज़ाब होगा और इुंसान नह ंु मरेगा। अल्लाह तआला ने उस वक़्त इंुसानों को जन्नत जहन्नम की झलक हदखा द थी, इसमलए उस वक्त हर आदमी तैयार था कक उसे जन्नत मंे जाना है और जहन्नम से बचना है।'' ''मगर यह जो घटना है यह तो ककसी इुंसान को याद नह ।ुं '' ''याद ना रहना ह तो इजम्तहान है, लेककन सारे सुबतू यह बताते हंै कक इंुसान कफतर तौर पर सब कु छ जानता है। वो आज भी जन्नत इसी दनु नया मंे बनाना चाहता है और इसके मलए रात हदन महनत करता है, वो अमर होना चाहता, नए नए स्वाद चाहता है, हमशे ा रहने वाल जवानी की तलाश में रहता है। वो आने वाले कल की कफ़क्र मंे रखता है और उसके मलए पूर तयै ार करता है, वो पहले इन्वेस्टमेंट और कफर वापस ज़्यादा लेने के काननू को जानता है। वो फायदे के मलए खतरा मोल लेने के उसलू को जनता है।'' ''No risk No gain''नाएमा ने आहहस्ता से कहा तो अस्र ने भी उसकी बात को आगे बढाया: ''जो सौदा उस वक़्त इंुसानों ने अपने रब से ककया था आज भी वह सौदा इंुसान सुबह शाम करते हंै। जज़न्दगी के सारे मामले इसी उसूल पर चल रहे हंै, बस होता यह है कक यह सौदा करने क़सम उस वक़्त की Page 220
के बाद इंुसान नफा नकु सान को हकीक़त मान कर उसी के मुताबबक (अनुसार) आगे के फै सले करते हैं, जबकक आखखरत का नफा नकु ्सान क्यों कक हदखाई नह ंु देता बजल्क अपनी अक्ल से समझना पड़ता है इसमलए वो भलू का मशकार हो जाते हंै।'' ''तमु सच कहते हो अस्र! इन्सान कहते ह उसे हैं जो अक्ल की आखों से उन चीज़ों को पहचाने जो सामने नह ुं हदख रह होती, मसफक देख कर ह फै सला करना तो जानवरों का काम है।'' ''इन्सान को लापरवाह में डालने वाल एक और चीज़ भी है।'' अस्र ने इस इजम्तहान के एक और गभंु ीर पहलु को बताते हुए कहा: ''इंुसान इस दनु नया में भी अकल उसलू ों पर ह सारे मामले करते हंै क्यों कक नफा नुकसान उन्हें सामने नज़र आ रहा होता है। लेककन अल्लाह के इजम्तहान में असल चीज़ यह है कक यहाूँ लोगों की सज़ा और इनाम फ़ौरन नह ंु ममलता, जबकक इुंसान का मामला ऐसा है कक वो नफा नकु ्सान ना देख कर सरकश हो जाते हैं। इसी मसले को हल करने के मलए अल्लाह ने रसूल भेजे हंै जजनके ज़ररये से दनु नया ह मंे उनकी कौमों का नफा और नुकसान करके अल्लाह तआला अपने होने और अपने प्लान का साफ सुबतू दे देते हंै। इस सज़ा और इनाम को देख कर भी कोई मानने से इन्कार करदे तो वह इसी के लायक है कक उसे जन्नत से महरूम कर के जहन्नम के कै दखाने में हमेशा के मलए बुंद कर हदया जाए।'' यह कह कर अस्र खड़ा हुआ और नाएमा से बोला: ''आओ अब मैं तुम्हंे इस सज़ा और इनाम का एक और नमूना हदखाऊुं ।'' ................................. नाएमा और अस्र समनु ्द्र के ककनारे खड़े थे, वहाुं से वह देख रहे थे कक हज़रत मूसा (अ) अपनी कौम यानन बनी-इसराइल (यहूद ) के साथ इसी तरफ बढे आ रहे थ।े नाएमा ने देखा कक लोगों कक बहुत बड़ी तादाद उनके पीछे पीछे चल रह है। यह कोई फ़ौज नह ंु थी बजल्क काकफला था जजसमे औरतें बढू े बच्चे अपने सामन के साथ थ।े अस्र नाएमा को हज़रत मसू ा की दावत और उनके यहाँू से जाने के बारे में बता रहा था: क़सम उस वक़्त की Page 221
''अल्लाह तआला ने हज़रत मसू ा (अ) को कफरोन के पास डबल ममशन पर भजे ा था। एक यह कक वे कफरोन और उसके साचथयों को एक अल्लाह की तरफ पलट ने की दावत दंे। दसू रा यह कक वे कफरोन से मागुं करंे कक वह बनी-इसराइल (यहूद ) को अपनी गुलामी से आज़ाद करदे ताकक वे उनको कफमलस्तीन मंे ले जाकर बसा दंे।'' ''एक ममनट एक ममनट, तुम्हार बात से ऐसा लग रहा है कक हज़रत मूसा वपछले रसलू ों की तरह पूर ममसर कौम की तरफ नह ंु भजे े गए थ,े बजल्क मसफक कफरोन और उसके साचथयों के मलए भेजे गए थ।े '' ''तुमने बबलकु ल ठीक समझा है, कु रआन ने इसका जज़क्र ककया है कक अल्लाह ने हज़रत मूसा को कफरोन और उसकी आल यानन उसके दरबार और उसके हहमायनतयों की तरफ रसूल बना कर भजे ा था, परू ममसर कौम का उसमे जज़क्र नह ंु है। इसी मलए तुम अभी देख लोगी कक अज़ाब मसफक कफरोन और उसकी फ़ौज, उसके दरबार और साचथयों पर ह आएगा, ममसर कौम अपनी जगह बाकक रहेगी।'' नाएमा की समझ में यह बात आगई, उसने दसू रा सवाल ककया: ''अच्छा दसू र बात जो तमु ्हार बात से ननकल है वो यह कक हज़रत मूसा (अ) का शुरू हदन से ह यह इरादा नह ंु था कक बनी-इसराइल ममस्र में रहें, तो सवाल यह है कक कफरोन और उसके दरबार बार बार यह क्यों कह रहे थे कक यह लोग ममस्र पर कब्ज़ा करना चाहते हैं?'' ''यह मसयासत है नाएमा, दरअसल बनी-इसराइल (यहूद ) हज़रत यसू फु (अ) के ज़माने मंे यहाूँ के ल डरों में शाममल थे। बाद के ज़माने मंे यहाूँ के ककजब्तयों ने यहाँू की मसयासयत पर अपना कब्ज़ा कर मलया, और बनी इसराइल को अपनी गलु ाम कौम बना मलया। हालांकु क उन्होंने बनी- इसराइल को पूर तरह दबा रखा था लेककन उनकी सखुं ्या ज़्यादा होने कक वजह से ककजब्तयों को यह भी खतरा रहता था कक कह ुं बनी-इसराइल बगावत ना करदें और ममस्र की हुकू मत पर कब्ज़ा न करलें। कफरोन इसी डर का इजस्तमाल कर के ममसररयों को हज़रत मूसा (अ) के खखलाफ कर रहा था।'' नाएमा ने एक और सवाल ककया: क़सम उस वक़्त की Page 222
''मगर कफरोन तो जानता था कक हज़रत मसू ा बनी-इसराइल को ले जाना चाहते हैं, उसने उन्हें जाने की इजाज़त क्यों नह ंु द ताकक इस डर से ममसररयों की जान छू ट जाती?'' ''वह ऐसा करता तो कफर उन्हें मुफ्त के इतने सारे गलु ाम कहाूँ से ममलते, पुराने ज़माने मंे कौम की पूर इकॉनमी गलु ामों पर हटकी होती थी। आज तो तुम इस के बारे में सोच भी नह ुं सकती।'' ''लेककन हज़रत मसू ा (अ) इनको कफमलस्तीन क्यों लेजाना चाहते हैं?'' नाएमा के सवाल ख़त्म नह ुं हो रहे थ।े ''दरअसल ममस्र मंे रह कर इन में ममस्र के मशु ररकों (बहुदेववाद) की सी आदतंे आ चकु ी थीुं, और दसू र तरफ सहदयों से उनके गुलाम रहने पर इनके अन्दर गलु ामी घर कर गई थी। इस दो तरफा कुं डीशननगुं से छु टकारा हदलाने का एक ह तर का था कक बनी-इसराइल को ममस्र और ममसर से अलग रख कर नए इलाके में एक नए ननज़ाम (प्रणाल ) के तहत रख कर उनकी सह तरबबयत (प्रमशक्षण) की जाती, ताकक यह कौम दनु नया को एक अल्लाह की तरफ आने की दावत देने का काम कर सके ।'' ''तो क्या यह तरबबयत ममस्र में नह ंु हो सकती थी?'' ''नह ुं, इस मलए कक तमु कफतने के दौर में खड़ी हो।'' ''मतलब?'' ''मतलब यह कक बनी-इसराइल अगर सबके सामने एक रब की इबादत करते तो उन पर बहुत ज़लु ्म ककया जाता, इसमलए उन्हें अपने घरों मंे इबादत करने का हुक्म था। तुम इस बात से हालात का अदुं ाज़ा कर सकती हो कक कफरोन ने ककतनी आसानी से उनके बच्चों को क़त्ल करवा हदया।'' ''अच्छा कफरोन को लगाम देने के मलए अल्लाह ने कु छ नह ुं ककया?'' ''क्यों नह ंु ककया, कफरोन और ममसररयों पर समय समय पर हल्के अज़ाब आते रहे।'' ''कै से अज़ाब?'' क़सम उस वक़्त की Page 223
''उनपर बाररश बंुद कर द गए, तूफान आए, उनकी फसलें ख़राब हुईं, कभी जएु ँू आई और कभी मंेडक इतने ज्यादा हुए कक उनका जीना दभू र हो गया। हटड्डी दल का हमला हुआ, कफर एक बार ऐसा हुआ कक उनका सारा पानी खनू बन गया।'' ''तो क्या ककसी अज़ाब के बाद उन्होंने तौबा नह ंु की?'' ''कफरोन बहुत धोके बाज़ था, वह हर बार हज़रत मसू ा से कहता कक अपने रब से दआु करो कक यह अज़ाब टाल दे तो मैं बनी-इसराइल (यहूद ) को जाने की इजाज़त दे दंुगू ा, मगर अज़ाब ख़तम होने पर हर बार वह अपने वादे से मुकर जाता था।'' ''यह तो बेवक़ू फ़ बनाने वाल बात हुई।'' ''उन्होंने बेवक़ू फ़ बनाया नह ुं बजल्क खदु बने हंै, अल्लाह का यह काननू है कक इुंसान अगर हहदायत (मागदक शनक ) के मलए सीयसक है तो सच्चाई के दरवाज़े उस पर खुलते चले जाते हंै, और इस राह पर आने वाल मजु ककलों के मलए उसे हौंसला भी हदया जाता है। मगर जो लोग हहदायत को देख कर भी आूँखंे बुंद कर लेते हंै उनके हदल सख्त होते चले जाते हंै, और कफर उन्हंे ढ ल द जाती है ताकक वो जो करना चाहें करलंे और उसमे खबू तरक्की करलंे। लेककन इसका मतलब यह नह ुं होता की वह अल्लाह की पकड़ से बच गया है बजल्क इसका सीधा मतलब यह है कक उसकी पकड़ बहुर सख्त होने वाल है, जसै ी अब कफरोन की होने वाल है। तो उन्होंने बेवक़ू फ़ नह ंु बनाया बजल्क खदु बेवकू फ बने हंै।'' यह कहते हुए अस्र ने दरू से आते हुए कफरोन के लककर की तरफ इशारा ककया। उसके ध्यान हदलाने पर नाएमा ने देखा कक बनी-इसराइल तो ककनारे पर आकर रुक गए हंै और कफरोन अपने लककर के साथ उनके पीछे आ रहा था। अस्र ने नाएमा को सारे हालात समझाते हुए कहा: ''कल रात अल्लाह तआला ने हज़रत मसू ा (अ) को हुक्म हदया कक बनी-इसराइल को ले कर यहाूँ से ननकल जाएुं। यह लोग ममसररयों से अलग एक जगह जजसका नाम 'जशन' है मंे आबाद थे। इन्हंे कफमलस्तीन जाना है लेककन अल्लाह तआला ने इन्हंे शॉट कट रस्ते की बजाए यहाूँ इस रस्ते से जाने को कहा जहाँू बीच मंे समनु ्द्र की एक पट्टी पड़ती है।'' क़सम उस वक़्त की Page 224
''ऐसा क्यों कहा गया?'' नाएमा ने पूछा। ''ताकक यह लोग कफरोन और उसके लककर की तबाह का नज़ारा अपनी आँूखों से देख सकंे ।'' अस्र ने जवाब हदया और कफर बनी-इसराइल के बारे मंे कहने लगा: ''इस समय इनके पास नाव तो हंै नह ुं कक उसपर बठै कर पानी का रास्ता पार करलें, इसमलए अब यह डरे हुए हैं और कह रहे हैं कक हम कफरोन के लककर के हाथों मारे जाएुंगे। मगर अब अल्लाह तआला ने मूसा (अ) से कहा है कक पानी पर अपना असा (डडुं ा) मारें, अब तुम देखो कक क्या होता है।'' नाएमा ने देखा कक हज़रत मसू ा आगे बढे और पानी पर अपना असा मारा, तो पानी फटने लगा और बीच मंे सखू ा रास्ता नज़र आने लगा। एक ककनारे से दसु रे ककनारे तक साफ रास्ता बन गया जो काफी बड़ा था। रास्ते के दोनों ककनारों पर पानी बबलकु ल दो पहाड़ों की तरह खड़ा हो गया। नाएमा को अपनी आखँू ों पर यकीन ह नह ंु हो रहा था, ऐसा लग रहा था जसै े यह दो पहाड़ों के बीच का रास्ता है। बनी-इसराइल बड़े इजत्मनान से हज़रत मूसा की देख रेख में इस रास्ते पर चलने लगे। दसू र तरफ कफरोन का लककर भी अब काफी कर ब आने लगा था लेककन जब तक वो लोग ककनारे तक आए बनी-इसराइल इस रास्ते पर काफी आगे जा चकु े थे। कफरोन भी उनके पीछे इस रास्ते में उतर गया, उसे साफ़ नज़र आ रहा था कक बनी-इसराइल (यहूद ) ने अभी यह रास्ता पूरा पार नह ंु ककया था। अब हालात ऐसे थे कक पानी के बीच बने रास्ते के एक मसरे पर बनी-इसराइल थे जो इस मसरे से बाहर ककनारे पर ननकल रहे थे और दसू र तरफ दसु रे मसरे पर कफरोन का लककर इस रास्ते मंे दाखखल (प्रवशे ) हो रहा था, धीरे धीरे कफरोन का सारा लककर इस रस्ते में उतर गया। जब तक सब बनी-इसराइल इस रास्ते से बाहर आए तब तक कफरोन का पूरा लककर इस रास्ते के बीच में आ गया था, तभी दोनों तरफ पहाड़ की तरह खड़ा हुआ पानी तज़े ी से आपस मंे ममला और कफरोन का पूरा लककर बहुत ताकतवर और बड़ी लहरों की चपेट में आ गया। अस्र ने जल्द से नाएमा का हाथ पकड़ा और एक तरफ इशारा ककया। यहाँू कफरोन डू ब रहा था, नाएमा ने उसकी आवाज़ सनु ी वह कह रहा था: क़सम उस वक़्त की Page 225
''मैं बनी-इसराइल के रब पर ईमान ले आया उसके मसवा कोई रब नह ,ंु और अब मंे उसी का वफादार रहूँगा।'' अस्र ने आहहस्ता से कहा। ''अब लाया है तू ईमान, इससे पहले तो नाफ़रमानी ह करता रहा, तू बड़ा फसाद था।'' नाएमा ने उसकी हाूँ में हाूँ ममलाते हुए कहा: ''तुमने बबलकु ल ठीक कहा।'' ''यह मनंै े नह ंु कहा, यह अल्लाह का कलाम है, और मझु े यकीन है ज़माने की यह गवाह पूर दनु नया तक पहुंचगे ी कक यह लोग नुक्सान मंे पड़ कर रहे, मसवाए उनके जो ईमान लाए, नेक काम (कम)क करते रहे और एक दसू रे को सच्चाई पर जम जाने और उसमे सब्र करने की नसीहत करते रहे।'' ************************* क़सम उस वक़्त की Page 226
(आखखरी चमत्कार) कफरोन और उसके लककर के डू बने का मज़ंु र (दृकय) बहुत कु छ मसखाने वाला था। नाएमा ने कफरोन के लककर को डू बते और बनी-इसराइल को बच कर ननकल जाते हुए अपनी आखँू ों से देख मलया था, उसका ईमान यकीन की उचाइुंयों को छू रहा था, वह अस्र से बोल : ''मेरे हदमाग की हर चगरह खलु चकु ी है, मुझे यकीन हो गया है कक जब क़यामत आएगी तो ऐसे ह अल्लाह तआला अपने वफादारों को बचा लेंगे, और उनका हर मुजररम अपने जमु क की सज़ा भुगतेगा.....लेककन एक मजु ककल है।'' कफर नाएमा महु ह महु में बड़ बड़ाई: ''यह ज़्यादा जानना भी बहुत बरु चीज़ होती है।'' अस्र मुस्कु राया और बोला: ''ज़्यादा जानना बुरा नह ंु अच्छी चीज़ है, ज़्यादा इल्म (ज्ञान) वाले लोग ह अल्लाह से डरते हंै, मगर इल्म तभी फायदा देता है जब उससे हहकमत (Wisdom) को देखने की नज़र पैदा हो, बताओ क्या मजु ककल है?'' ''बात यह है अस्र कक मनैं े ममस्र का इनतहास पढा है, उसमे इस परू घटना का मसरे से कोई जज़क्र ह नह ुं है। मनंै े तो यह घटना खदु देख ल है, बनी-इसराइल (यहूद ) के इनतहास में यह घटना मलखी है, लेककन इस ज़माने के ममस्र के इनतहास मंे इस को इस तरह ररकोडक ह नह ुं ककया गया, यहाूँ तक कक इनतहास की बुन्याद पर आज तक लोग इस पर ह एक मत नह ुं हुए कक मसू ा (अ) के ज़माने के कफरोन का असल नाम क्या था। हालाकुं क ममस्र के सारे कफरोनों और उनके ज़माने का इनतहास मौजूद है, तो बाकक सज़ा और इनाम वगरै ह की तो बात ह क्या है।'' ''तमु ठीक कहती हो, बजल्क मंै तमु ्हारे इल्म (ज्ञान) को थोड़ा और बढा दंुू कक खदु बनी-इसराइल ने इस घटना को सज़ा और इनाम के कानून के तौर पर इस तरह याद नह ुं रखा जजस तरह यह हुई है।'' क़सम उस वक़्त की Page 227
''तुमने तो मेर बात की ह हहमायत कर द , इसका मतलब यह हुआ कक एक आम आदमी इस घटना की सच्चाई तक इतनी आसानी से नह ुं पहुंच सकता जब तक वह मरे तरह इसे खदु ना देखले या कफर वह मुसलमानों की तरह कु रआन को अल्लाह की ककताब मानता हो जजसमे यह घटनाएंु सह सह मलखी हैं।'' अस्र ने हाूँ मंे सर हहलाते हुए कहा: ''इसी मलए हम इस सफर की आखर मजुं जल में ऐसे दौर मंे जाएंुगे जब अल्लाह तआला ने अपनी सच्चाई के सारे सुबतू साफ तौर पर जमा कर हदए हंै। सज़ा और इनाम भी हुआ, सज़ा और इनाम वाल सार जगह आज भी आबाद हंै, वह ककताब भी मौजूद है जजस में यह सज़ा और इनाम की दास्तान बयान हुई है, वह कौम भी मौजूद है जजस पर यह हालात गुज़रे हंै, और सब से बढ कर इस सज़ा और इनाम की घटना को उस समय के इनतहास ने परू तफसील के साथ ररकॉडक भी कर मलया है, यह दौर आखर रसलू हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहह वसल्लम) का दौर है।'' ''अच्छा तो हम हज़रत महु म्मद ( )ﷺके ज़माने में जाएगंु े?'' नाएमा ने खशु होते हुए कहा। ''हाूँ! हम उन्ह ुं के दौर मंे जाएंगु े। सच्चा तो हर रसूल था, मगर आखर रसलू ( )ﷺकी सच्चाई को दनु नया पर साबबत करने के मलए अल्लाह तआला ने सारे इजन्तज़ाम कर हदए थे ताकक अब जब तक दनु नया रहे कोई सच्चाई को चाहने वाला आदमी खदु ा के होने का इन्कार ना कर सके । उसके ज़ररये (द्वारा) से सच्चाई इस तरह खोल कर रख द गई है कक अब जजसे भी सच्चाई में कोई हदलचस्पी हो उसे तकु ्के मरने की कोई ज़रूरत नह ,ुं क्यों कक आखर रसलू ( )ﷺएक ऐसे पैगम्बर हैं जजनके बारे में मसफक उनकी कौम का अकीदा ह नह ुं या मसफक कु रआन ह नह ंु बजल्क इनतहास भी पूर तरह उनके बारे में बता देता है। ये दनु नया मंे मसफक एक ह हस्ती हंै जजनको इनतहास ने नबी या रसूल के रूप में मलख रखा है और उनके ज़ररये होने वाल सज़ा और इनाम जो क़यामत और खदु ा के होने का सबसे बड़ा सुबूत है इनतहास ने परू तरह से ररकॉडक कर रखा है। उनकी सच्चाई इुंसाननयत पर इतनी कतई है कक इसके बाद अल्लाह तआला ने रसलू ों को भेजने का मसलमसला ह ख़त्म कर हदया, अब इनका होना ह क़यामत की सज़ा और इनाम और खदु ा के होने का सूरज की तरह चमकता हुआ सुबतू है।'' क़सम उस वक़्त की Page 228
अस्र बोल रहा था और नाएमा पूरे ध्यान से उसकी बात सनु रह थी। ''अब हम मक्का जाएगूँ े, उस ज़मीन पर जहाँू इुंसानी इनतहास का आखर और सबसे बड़ा मोजज़ा (चमत्कार) हुआ, और इस मोजज़े को क़यामत तक के मलए हहफाज़त से सबके सामने रख हदया गया ताकक कोई खदु ा और क़यामत के होने का इन्कार ना कर सके , कोई सच्चाई की तलाश करने वाला इंुसान सच्चाई से महरूम (वुंचचत) ना रह सके , आओ मंै तुम्हंे सच्चाई हदखाता हूँ।'' ................................. नाएमा और अस्र ख़ामोशी से खड़े यह मुंज़र (दृकय) को देख रहे थ।े यह दोनों इस समय सातवी सद ईसवी मंे मक्का दारुल नदवा (काबा के पास सरदारों की मीहटगंु के मलए बनाया हुआ एक घर) में खड़े थे, उनके सामने मक्का से सारे रईस और सरदार एक साथ बैठे थे। आज कल इन्हें एक मजु ककल का सामना करना पड़ रहा था उसी मुजककल ने आज इन्हंे एक जगह हो कर एक फै सला कर लेने पर मजबरू ककया था। इनका धमक मशकक (बहुदेववाद), इनकी सरदार , इनका कल्चर, हरम काबा मंे रखे बुतों से जुड़ी इनकी इकॉनमी और अरब के मुशररकों (बहुदेववाद ) की नज़र मंे इनकी इज्ज़त सब खतरे मंे थ।े इस मसले का कोई आसान हल इनके सामने नह ंु था, एक खदु ा के वफादार हो कर जन्नत में उसका कु बक (नज़द की) हामसल करने की दावत (पुकार) इतनी कफतर थी कक हर कोई उसे अपने हदल की आवाज़ समझ कर उसकी तरफ खखचंु रहा था। यह हाल रहता तो थोड़े ह अरसे मंे इन हटधमक सरदारों से मसवा सब लोग अल्लाह के बन्दे बन जाते। इस मसले ने इन सब को यहाँू जमा होने पर मजबरू ककया था, मगर ककसी की समझ में कोई आसान हल नह ंु आरहा था। इसी हल की तलाश मंे सब सोच ववचार में गुम थे और एक घहर ख़ामोशी छाई हुई थी, जजसे अबू जहल की आवाज़ ने तोड़ा: ''यह सब तमु ्हारे भतीजे का ककया धरा है अबू लहब, तुम उसे समझाते क्यों नह ंु।'' ''मंै कु छ नह ंु कर सकता। खानदान बनू हामशम का करता धरता मंै नह ुं हूँ, बजल्क अबू तामलब है। वह पूर तरह अब्दलु ्लाह के बटे े का बचाव कर रहा है, तमु मंे से ककसी ने मरे े भतीजे के खखलाफ कोई कदम उठाया तो बनू हामशम और तमु ्हारे बीच जगुं नछड़ जाएगी।'' उमय्या बबन खल्फ़ ने कहा: क़सम उस वक़्त की Page 229
''तो क्या करंे? लड़ाई के डर से बठै े रहंे और अधमक को फै लते हुए देखते रहंे, अपने बतु ों के बजाए एक अल्लाह की इबादत होती देखते रहें।'' ''नह ुं, मरे ा मतलब यह नह ुं था, मंै तुम्हें मामले की गंभु ीरता बता रहा था।'' ''मगर क्या इस मसले का कोई हल नह ुं है, सोचो अबू लहब तुम्हारा हदमाग तो बहुत तज़े है।'' अकबा बबन अबी मइु त नामी सरदार ने उम्मीद भर नज़रों से अबू लहब की तरफ देखते हुए कहा तो अबू लहब सोच मंे डू बे हुए लहज़े मंे बोला: ''हाूँ एक हल है.... महु म्मद ( )ﷺपर ईमान लाने वालों पर सख्ती शुरू कर दो। हम मंे से हर एक का जजस जजस ईमान वाले पर वश चलता है वो उसको मार पीट कर इस दावत पर ईमान लाने से रोके । इस दावत पर अभी तक ज़्यादातर नौजवान और गुलाम ईमान ला रहे हैं, बाकक लोग तो बहुत कम हंै। हम सब ममल कर उन नौजवानों और गुलामों पर सख्ती करते हंै, यह लोग वपटंेगे और मरंेगे तो खदु ह इस नए धमक को छोड़ दंेगे, या कम से कम कोई और आदमी हमारे बतु ों को छोड़ कर इस नए धमक को अपनाने की हहम्मत नह ुं करेगा और धीरे धीरे उनका ज़ोर टू ट जाएगा।'' यह सनु कर सब लोगों की आंुखंे ख़शु ी से चमक उठी, अबू जहल उठा और अबू लहब को गले लगा कर बोला: ''लात और मनात (यह उनके दो बुतों के नाम थे) की कसम अबू लहब.....तुमने तो इस मसले को हल कर हदया।'' ''चलो साचथयों इस नए धमक को हमेशा के मलए दफन करदंे।'' सभा खत्म हुई और वो एक एक करके अपने घरों की तरफ चल हदए। उनके जाने के बाद नाएमा ने अस्र की तरफ देख कर पछू ा: ''अब क्या होगा?'' ''यह अल्लाह के आखर रसूल ( )ﷺकी दावत (पुकार) का शुरू का समय है, अभी उनकी दावत पर कम ह लोग ईमान लाए हैं, ऐसे में यह लोग अब उनपर ज़लु ्म की हदे पार कर देंगे। क़सम उस वक़्त की Page 230
बरबररयत की नई दस्ताने मलखी जाएुंगी, मगर आसमान यह मुंज़र अब आखर बार देखेगा, इसके बाद ऐसा नह ंु होगा। आओ इस मसतम के दौर को अपनी आँखू ों से देखलो, तमु ्हे मालूम हो जाएगा कक आज तुम्हारे मलए अल्लाह का नाम लेना ककतना आसान है और एक दौर मंे यह ककतना मजु ककल था।'' ................................. मक्का शहर जो हमेशा से इुंसानों को अमन देने का प्रतीक था आज ईमान वालों को वहाुं जीना मुजककल होने लगा था। बेददी और ज़लु ्म के मंुज़र (दृकय) हर जगह नज़र आने लगे थे, कह ुं सुहेब (र) को अगंु ारों पर मलटाया जा रहा था जजससे उनकी खाल जल जाती। कह ंु बबलाल (र) को तपती धपंुू में गमक रेत पर मलटा कर ऊपर पत्थर रख हदए जाते, कफर उनके गले में रस्सी डाल कर शहर की गमलयों में घसीटा जाता, वह इस हाल में भी एक अल्लाह को पुकारते रहे। यह तो मजबूर बेबस गलु ामों का हाल था, लेककन कु रैश कबीले से ईमान लाने वाले भी सुकू न से नह ंु थ।े कु रैश के नौजवान अपने बड़ों से वपट रहे थे और ईमान लाने वाल औरतंे अपने खानदान वालों के ज़ुल्म का ननशाना थी।ंु एक एक ईमान वाले को ननशाना बनाया जा रहा था, और उन्हंे इस्लाम से हटाने की परू कोमशश की जा रह थी। काफी लम्बा अरसा युंू ह गज़ु र रहा था, कु रैश के सरदारों के बहुत ज़्यादा ज़ुल्म के बाद अभी तक ककसी एक ईमान वाले ने भी इस्लाम नह ंु छोड़ा था। इस नाकामी से अबू जहल झुंझलाया हुआ था, उसके अपने गलु ाम हज़रत यामसर (र) उनकी बीवी सुमय्या (र) और उनके बटे े अम्मार (र) भी उसके ज़ुल्म और मसतम के बावजदू इस्लाम पर परू बहादरु से डटे हुए थ।े आज अबू जहल ने सोच मलया था कक वह अपनी इस नाकामी को खत्म कर के ह दम लेगा। आज या तो यामसर (अ) इस्लाम को छोड़ेंगे या कफर वह उनको ख़त्म करके दम लेगा। यह वह समय था जब अस्र नाएमा को यहाँू ले आया, वो दोनों हज़रत यामसर (र) के घर के पास खड़े अबू जहल को पास आता देख रहे थे। उसके हाथ मंे एक भाला था, तभी यामसर (र) ने भी उसे देख मलया था और उन्हंे अदुं ाज़ा हो चकु ा था कक आज अबू जहल के इरादे ठीक नह ,ुं मगर उन्होंने भागने की कोमशश नह ुं की। अबू जहल ने पास पहुँूच कर उनसे कहा: ''तू एक अल्लाह की इबादत नह ुं छोड़गे ा?'' क़सम उस वक़्त की Page 231
हज़रत यामसर (र) ने बबना डरे जवाब हदया: ''अगर मैं एक अल्लाह को छोड़ दंुगू ा तो उसकी पकड़ से मुझे कोई नह ुं छु ड़ा सके गा।'' यह जवाब सनु कर अबू जहल आग बबलू ा हो गया, उसने उन्हंे बड़ी बेरहमी से मारना शरु ू कर हदया। उनकी चींुखे सनु कर उनकी बीवी हज़रत सुमय्या भी बाहर आ गईं, उन्होंने अपने पनत को बचाने की कोमशश की, इस पर अबू जहल ने यामसर (र) के साथ उन्हें भी पीटना शुरू कर हदया। हज़रत यामसर जो अभी तक वपट रहे थे, मासमू बीवी को मार खाता देख कर तड़प उठे । वह अपने आका का कु छ नह ंु बबगाड़ सकते थे, क्यों कक इस ज़माने में गलु ामों की आका के सामने कोई हेस्यत नह ंु थी, उन्होंने बीवी को हौंसला देने के मलए ज़ोर से कहा: ''ला इलाहा इल्लल्लाह। (अल्लाह के मसवा कोई रब नह ुं)'' हज़रत सुमय्या ने भी यह एक खदु ा के होने का ऐलान दोहराया, मगर यह ऐलान एक खज़ुं र बन कर बुतों को खदु ा मानने वाले अबू जहल के सीने मंे चभु गया। उसने गुस्से में आकर अपना भाला उठाया और हज़रत सुमय्या (अ) के पेट मंे घोंप हदया, उनके महु से एक आह ननकल , और वे यह कहते हुए ज़मीन पर चगर गईं: ''काबा के रब की कसम मैं कामयाब हो गई....'' बीवी के पेट से खनू का फु वारा फू टता देख कर हज़रत यामसर (र) बबलबबला कर आगे बढे और अबू जहल को धक्का दे कर हज़रत सुमय्या (र) से दरू ककया। दम तोड़ती हुई अपनी समु य्या को उन्होंने अपनी बाुहं ों मंे भर मलया। एक कमज़ोर गलु ाम इसके मसवा क्या कर सकता था, उनके खनू से सने चहरे पर आुंसू बहने लगे, मगर होंठों पर मशकायत का कोई शब्द नह ुं था। गलु ामी और गमों की जुंजीरों से जकड़ी उनकी जजंुदगी मंे सुमय्या एक अके ल ख़शु ी थी, यह ख़शु ी भी आज तौह द (एके कवरवाद) पर कु बानक हो गई। तभी अबू जहल सभुं ल गया, वो गुस्से मंे ककसी सांुप की तरह फुं कारता आगे बढा और मयान से अपनी तलवार ननकाल कर हज़रत यामसर (र) की कमर मंे घोंप द , यामसर (र) सुमय्या (र) को मलये हुए ज़मीन पर चगर गए। उनकी खलु हुई आँखू ें आसमान को तक रह थी। Page 232 क़सम उस वक़्त की
नाएमा ख़ामोशी से खड़ी यह सब देख रह थी, उसकी आँूखों से आसुं ू बह रहे थे, उसने बहती हुई आँखू ों के साथ कहा: ''मसफक ला इलाहा इल्लल्लाह कहने की यह सज़ा।'' अस्र बड़बड़ाया: ''नह ंु अब नह ुं, यह अब और नह ंु होगा, कम से कम एक अल्लाह का नाम लेने की वजह से नह ंु होगा। आसमान वाले ने फै सला कर मलया है, खदु ा का नाम लेने वाले चाहे खदु ा को भलू जाएूँ, मगर इस्लाम की बुन्याद पर ककसी को उनपर ज़लु ्म की इजाज़त नह ंु द जाएगी। यह खदु ा का फै सला है मज़हब की बुन्याद पर ज़लु ्म की इजाज़त नह ंु द जाएगी, इसमलए अब यह इजम्तहान भी खत्म हो रहा है, यह इजम्तहान अब ऐसे नह ुं मलया जाएगा। अब आखर दौर शरु ू हो रहा है, इंुसाननयत की सबसे बड़ी सखुं ्या इसी आखर दौर में पैदा होगी, उन्हें अल्लाह का नाम लेने की आज़ाद होगी वो चाहे तो खदु ा को माने या उसका इन्कार करें, अब यह ज़रूर नह ुं होगा कक जो सरदारों का धमक है आम लोगों का भी वह धमक हो।'' ''लेककन यह चमत्कार कै से होगा? हज़ारों साल का यह ररवाज कै से बदल जाएगा?'' नाएमा के चहरे पर सवामलया ननशान था। ''चलो मेरे साथ मैं बताता हूँ यह ररवाज कै से बदलेगा।'' एक बार कफर वक़्त में उनका सफर शरु ू हो गया था। ................................. काबा की बनावट तो वह थे जैसी नाएमा ने अपने दौर मंे देखी थी, लेककन उसके आस पास का नक्शा बबकु ल बदला हुआ था। चारों तरफ पहाड़ों से नघर जगह के बीच काबा था, आस पास बहुत सारे घर बने हुए थे। नाएमा ने कु छ अरसा पहले ह अपने नाना के साथ उमरा ककया था, मगर आज उसके सामने मौजूद हरम मक्का और नई मजस्ज़द हरम मंे मसवाए काबा के कु छ भी समे नह ंु था। क़सम उस वक़्त की Page 233
अस्र और नाएमा हरम के पास खड़े हुए थ,े अस्र नाएमा को अलग अलग घरों के बारे में बता रहा था कक कौन सा घर ककस का है। उसने नाएमा को एक हदलचस्प बात बताई: ''तुम देखो कक इन लोगों मंे बजल्क आखर रसलू ( )ﷺके शरु ू के ज़माने के सब लोगों मंे से मसफक अबू लहब और रसूल ( )ﷺके साचथयों में हज़रत जदै (र) के अलावा ककसी का नाम कु रआन मंे नह ुं आया। लेककन इनतहास मंे इनमे से हर एक आदमी का नाम और उसकी जज़न्दगी के हालात सब मौजूद हैं। यह है इस आखर सज़ा और इनाम की ख़ास बात कक इसका पूरा ररकॉडक इनतहास में मौजदू है।'' ''और कु रआन में?'' नाएमा ने पछू ा। ''कु रआन में तो यह इनतहास है ह लेककन उसमे इस दास्तान के अलावा वपछले रसलू ों की दास्तानें और सज़ा और इनाम के काननू की एप्ल के शन भी है, सच्चाई की दावत भी है और उसकी दल लंे (तकक ) भी हैं, साथ मंे नए ईमान लाने वालों के मलए कु छ कानून भी हंै। मगर बदककस्मती से उसके इस मोजज़े (चमत्कार) पर लोगों का पूरा ध्यान नह ुं है जजसने उसे हमेशा के मलए एक चमत्कार बना हदया है।'' ''वह मोजज़ा क्या है?'' ''यह कक कु रआन मजीद इस आखर सज़ा और इनाम के होने का मसफक पूरा ररकॉडक ह नह ंु है बजल्क इस सज़ा और इनाम के होने से पहले ह उसने बता हदया था कक यह कब और कै से होगा।'' अस्र यहाँू तक पहुुंचा ह था कक नाएमा को एक बहुत खबू सूरत आवाज़ आना शुरू हुई, नाएमा को मालूम था यह कु रआन पढे जाने की आवाज़ थी, मगर इसमंे जो अदुं ाज़ और आवाज़ थी वह उसने पहले कभी नह ंु सुनी थी। ''आज तमु कु रआन को खदु उनकी ज़ुबान से सनु लो जजन पर यह नाजज़ल (अवतररत) हुआ है, और यह भी सनु लो कक सज़ा और इनाम होने से पहले उसकी भववष्यवाणी ककस शान से की गई थी।'' क़सम उस वक़्त की Page 234
नाएमा ने देखा कक अल्लाह के आखर रसलू ( )ﷺनमाज़ में ऊुं ची आवाज़ से कु रआन मजीद पढ रहे हैं। उनकी आवाज़ ने वहांु मौजूद हर आदमी पर मानो एक जादू सा कर हदया है, लगता था कक सब अपने हदल के हाथों बबना हहले कु रआन सनु ने को मजबूर हंै। नाएमा को अस्र ने बताया: ''अल्लाह के रसूल ( )ﷺकु रआन की सरू ेह क़मर पढ रहे हंै।'' सरू ेह क़मर में एक एक करके उन सब कौमों की दास्तान शोटक में बयान हो रह थी जजन को नाएमा अपनी आूखँ ों से देख चकु ी थी। नूह की कौम, आद की कौम, समदू की कौम, लतू की कौम और कफरोन और उसके साथी। कु रआन पढा जा रहा था और नाएमा की नज़रों के सामने सारे मज़ंु र (दृकय) घमू रहे थे। ककस तरह रसूलों ने अपनी कौम को दावत (पकु ार) द , ककस तरह उनकी दावत को ठु कराया गया और कफर कै से अल्लाह का अज़ाब आया। शायद ककसी और ने कु रआन को जज़न्दगी में इस तरह नह ंु समझा होगा जैसे इस समय नाएमा को समझ मंे आ रहा था। कफर पढा गया: ''क्या तमु ्हार कौम के काकफ़र उन कौमों के काकफ़र से अच्छे हंै या इनके मलए आसमानी ककताबों मंे कोई माफ़ी नामा मलखा हुआ है? या इनका गमु ान है कक यह बहुत ताकतवर चगरोह है ? याद रखो कक इनका चगरोह बहुत जल्द हार खाएगा और यह पीठ फे र कर भागंेगे, बजल्क इनसे जो वादा है उसके परू ा होने का असल समय तो क़यामत का हदन है, और क़यामत का हदन बड़ा ह सख्त और बड़ा ह कड़वा है।''(सरू ेह क़मर 43 से 46) यह शब्द जसै े ह परू े हुए अस्र ने नाएमा का हाथ पकड़ा और समय मंे आगे सफर करते हुए वो एक खलु े मैदान में पहुूँच गए। यह एक जंुग का मदै ान था, ऐसा लगता था की जगुं अभी अभी ख़त्म हुई है, कु छ लोग भागे जा रहे थ,े कु छ को रजस्सयों से बांधु कर चगरफ्तार ककया जा रहा था और कु छ लाशंे ज़मीन पर इधर उधर बबखर पड़ी थींु। अस्र ने यहाूँ की तफसील बताते हुए कहा: ''हम सन दो हहजर मंे खड़े हैं, यह बदर का मैदान है। बदर की जुंग जो सच और झूट को अलग अलग कर देने वाल जुंग थी अभी अभी ख़त्म हुई है। तमु देख सकती हो कक मक्का के काकफ़र ककस तरह गाज़र मलू की तरह काट हदए गए हैं, उनका ताक़तवर चगरोह हार खा कर भाग गया। क़सम उस वक़्त की Page 235
सत्तर सरदार मारे गए, इतने ह चगरफ्तार हुए हैं। यह जुगं इुंसानी इनतहास की अके ल जगंु है जजसमे ककसी कौम के सारे बड़े सरदार मारे गए, यह सब के सब काकफ़र और अल्लाह के रसूल ( )ﷺके दकु मन थे। तुमने जो आयतें सनु ी थी वह दस साल पहले मक्का में नाजजल हुई थींु और उनमे इस घटना कक भववष्यवाणी की गई थी।'' नाएमा बड़ी बड़ी आखूँ ों से यह मंज़ु र देख रह थी, अस्र बोल रहा था: ''नाएमा तमु ने एक झलक देखा था कक अरब के सरदारों को अपने चगरोह पर अपनी ताक़त पर ककतना नाज़ था, और तमु ने एक झलक इसकी भी देखी थी कक मसु लमान कै से ज़लु ्मों का मशकार थे और कोई उम्मीद ह नह ुं थी कक वो कभी इस ज़लु ्म से छु टकारा पाएुगं े। अल्लाह ने अपने पगै म्बर को उसी समय बता हदया था कक इन मजु ररमों के साथ क्या होगा, सरू ेह कमर मंे इस भववकयवाणी से उन्होंने यह बताया था वपछल कौमों के साथ हमने क्या ककया, कफर ठीक ठीक यह बताया कक इन मजु ररमों का भी यह अुंजाम होगा बजल्क यह पीठ फे र कर भागेंगे। इसके बाद यह बता हदया कक जगुं मंे हार की यह भववकयवाणी पहल कक़स्त है, इनसे असल वादा आखखरत की सज़ा और अज़ाब का है। मतलब यह हुआ की भूतकाल की घटनाएूँ सुना कर भववष्य की बात बबलकु ल सह बताई जा रह है तो आगे क़यामत की भववकयवाणी भी बबलकु ल ठीक साबबत होगी, और अब तमु अपनी आँूखों से देख लो कक कु छ सालों के अन्दर ह इन काकफरों की इस हालत की भववकयवाणी कै से सच्ची साबबत हुई।'' नाएमा जो अस्र की बातें बहुत ध्यान से सुन रह थी अब सोच रह थी कक ककसी एक आदमी की जज़न्दगी के बारे मंे की गई कोई भववकयवाणी तो कभी कभार ठीक हो जाती है लेककन इतने सारे सरदारों के बारे में एक साथ की जाने वाल सह भववकयवाणी अल्लाह के मसवा कोई नह ंु कर सकता। अस्र ने उसका चहरा पढते हुए कह: ''यह भववकयवाणी मसफक एक कौम के बारे मंे ह नह ंु थी बजल्क अल्लाह ताआला ने अपनी ककताब मंे यह ककया कक इस घटना से दसू र बड़ी घटना को ममला कर उसकी भी सह भववकयवाणी कर द थी।'' ''वो कौन सी घटना है ?'' क़सम उस वक़्त की Page 236
''अरब के पड़ोस में दो सूपर पावर मंे एक जुंग जार थी, इस जंगु में एक तरफ रूम की सल्तनत के इसाई थे और दसू र तरफ ईरान के आग को पूजने वाले जजन्हंे मजसू ी कहा जाता है वो थ।े ठीक उस समय जब इसाई यह जगुं में परू तरह हार चकु े थे अल्लाह ने यह भववकयवाणी करद थी कक इसाई जो आज हार गए हैं जल्द ह इस जुंग मंे जीतंेगे और उसी वक़्त मसु लमानों को भी अल्लाह की मदद हामसल होगी और वो खमु शयाूँ मनाएँगू े।'' यह कह कर अस्र ने नाएमा को अपने साथ मलया और एक बार कफर वो पीछे समय में जा कर काबा के पास खड़े हुए थे, जहाँू एक जगह और अल्लाह के आखर रसलू ( )ﷺकु रआन पढ रहे थ,े अस्र ने नाएमा का ध्यान इस ओर हदलाते हुए कहा: ''खदु अपने कानों से सनु लो कक इस घटना के होने से नौ साल पहले ककस तरह उसकी भववकयवाणी की जा रह है।'' कु रआन मंे पढा गया: ''रूमी पास के इलाके में हार गए और वो अपनी हार के बाद कफर कु छ सालों में जीत जाएँूगे, अल्लाह ह की इजाज़त से हुआ जो पहले हुआ और क्यों कक इससे पहले और बाद में भी यानन हर ज़माने में हुक्म का हक़ अल्लाह ह को है। और उसी वक़्त ईमान वाले खशु हो रहे होंगे अल्लाह की मदद से, वो (अल्लाह अपने कानून के अनसु ार) जजस की चाहता है मदद करता है और वह सब पर गामलब रहम करने वाला है। यह अल्लाह का वादा है और अल्लाह अपने वादे को नह ंु तोड़ता, लेककन ज़्यादा तर लोग नह ंु जानते वो इस दनु नया की जज़न्दगी के मसफक ज़ाहहर को जानते हैं और आखखरत से वो बबलकु ल ह बेपरवाह हंै।''(सूरेह रूम 1 से 7) यह शब्द पूरे हुए तो अस्र ने नाएमा से कहा: ''सनु मलया तमु न,े अल्लाह के रसलू ( )ﷺकु रआन की यह खबर उस समय दे रहे हैं जब इस तरह की बात सोचना भी मुमककन नह ंु था।'' ''हाूँ मनैं े इनतहास मंे यह घटना पढ है, शुरू में इरानी बादशाह खसु रो ने लगभग पूर रूमी सल्तनत पर कब्ज़ा कर मलया था, इसका कोई चाुसं नह ुं था कक वो अब जंुग में कभी ईराननयों को पछाड़ सकते हैं।'' क़सम उस वक़्त की Page 237
''बबलकु ल सह , लेककन गौर करो यह एक नह ुं बजल्क दो भववकयवाणी हैं, रूममयों की जीत और मुसलमानों के मलए अल्लाह की मदद। इसमलए जजस समय रूममयों को जीत नसीब हुई उसी के कर ब के समय में बदर की जुगं की घटना हुई जजसमे मसु लमानों ने अल्लाह की मदद से अपने से तीन गनु ा बड़े लककर को जो मसफक सखुं ्या में ह तीन गनु ा नह ंु था बजल्क हचथयारों मंे भी मुसलमानों से कई गनु ा आगे था उन को एक तरफा हरा कर एक ऐनतहामसक जीत दजक की।'' नाएमा खामोश रह उसे अपने आप ह अब्दलु ्लाह याद आ गया, उसने भी इस भववकयवाणी के बारे मंे बताया था, वो आहहस्ता से बोल : ''मझु े ककसी ने यह बात बताई थी मगर उस समय मैं यह बात समझ नह ुं सकी थी।'' ''इंुसान जब तक खदु कु छ समझना ना चाहे कोई उसे कु छ नह ंु समझा सकता, दकु मनी और नफरत से नघरा हुआ आदमी कभी सच्चाई नह ंु समझ सकता, चाहे हकीक़त ककतनी ह खोल कर बयान कर द जाए। देखो उसी नफरत का मशकार यह मक्का के सरदार हंै, और अब देखो ककस तरह इस सर ज़मीन से उन्होंने ननकाले जाने का ऐलान हो रहा है।'' अस्र ने नाएमा को साथ मलया, इस बार भी अल्लाह के रसूल ( )ﷺमक्का में यह आयतें पढ रहे थ:े ''और बेशक यह काकफ़र इस ज़मीन से तमु ्हारे कदम उखाड़ देने की कोमशश मंे हैं ताकक यह तुमको यहाँू से ननकाल दंे, और अगर ऐसा हुआ तो तमु ्हारे बाद यह भी यहाँू हटकने ना पाएंुगे। हमने तमु से पहले जो भी रसलू भजे े उनके बारे में हमारा तर का याद रखो, और तमु हमारे तर के मंे कोई बदलाव नह ुं पाओगे.....और दआु करो कक ऐ मेरे रब मझु े जहाूँ दाखखल (प्रवेश) कर इज्ज़त के साथ कर और जहाँू से मुझे ननकाल इज्ज़त के साथ ननकाल, और मुझे ख़ास अपने पास से मदद करने वाल ताक़त नसीब कर! और ऐलान कर दो कक हक़ (सच) आ गया और बानतल (झठू ) ममट गया और बानतल ममटने वाल ह चीज़ है!''(सूरेह बनी-इसराइल 76 से 81) कु रआन पढना ख़त्म हुआ तो अस्र ने इस पर अपनी बात रखी: क़सम उस वक़्त की Page 238
''तमु ने सनु मलया कक क्या कहा जा रहा है? यह मक्का है जहाूँ मसु लमान बहुत बरु े हालात में नघरे हुए हैं, उनके मलए जान बचाना ह मजु ककल हो चकु ा है। काकफ़र उनको यहाूँ से ननकालने और उन्हंे क़त्ल कर देने पर आमादा हैं। कोई इंुसान ज़्यादा से ज़्यादा हौंसला कर के यह अदंु ाज़ा कर सकता है कक ककसी तरह यह मुसलमान बस जान बचा कर यहाूँ से ननकल जाएगंु े, लेककन इतने यकीन के साथ यह बात कहना कक रसलू के ननकलने के बाद यह लोग इस ज़मीन मंे नह ुं रह पाएगूँ े और इस बात को रसलू ों के बारे में अपने एक तर के (सनु ्नत) के तौर पर पशे करना मसफक और मसफक अल्लाह के मलए ह मुमककन है, और इससे बढ कर यह कक इस हालत मंे हक़ (सच) के आने और बानतल (झठू ) के ममटाए जाने की भववकयवाणी तो कोई इंुसान कर ह नह ुं सकता। आओ अब देखो कक अल्लाह के रसलू ( )ﷺके यहाँू से मद ना जाने के आठ साल के अन्दर ककस शान से मक्का और परू े अरब में अल्लाह के रसलू ( )ﷺकी हुकू मत हो गई और मशु ररकों (बहुदेववाहदयों) से यह ज़मीन खाल हो गई।'' यह कहते हुए अस्र ने नाएमा को साथ मलया, एक बार कफर हदन तज़े ी से बदले, इस बार वो दोनों मक्का से बाहर एक ऊँू चे पहाड़ पर खड़े थ।े इस पहाड़ से एक तरफ मक्का शहर के अन्दर का मज़ंु र नज़र आ रहा था और दसू र तरफ शहर से बाहर का। नाएमा ने देखा कक हज़ारों की तादाद में अल्लाह के रसलू ( )ﷺके साथी मक्का के अन्दर दाखखल हो रहे हैं। मक्का के रहने वाले जो कल तक मक्का के बजल्क पूरे अरब के सरदार थे आज डर के मारे अपने घरों मंे नछपे हुए थे। ज़ुल्म सहने और मार खाने वाले मसु लमान आज अपने ऊँू टों और घोड़ों पर सवार होकर मक्का में दाखखल हो रहे थे। काकफ़र जगुं के मैदान में ह नह ंु बजल्क अकीदे (आस्था) के मैदान में भी हमेशा के मलए हार चकु े थ।े अस्र ने एक तरफ इशारा करते हुए कहा: ''देखो दनु नया का सरदार आ रहा है, मगर उनकी शान तो देखो आज भी जीतने वाले राजा की तरह सर फख्र से ऊूँ चा नह ंु है बजल्क झकु ा हुआ है।'' नाएमा ने उस तरफ देखा, अल्लाह के आखर रसलू ( )ﷺआ रहे थे उनका सर अल्लाह के शकु ्र और आजज़ज़ी (ववनम्रता) के अहसास से इतना झुका हुआ था कक उनका माथा ऊंु टनी की गदकन को छू रहा था। क़सम उस वक़्त की Page 239
''इनकी अज़मत (महानता) देखो कक आज इन्होने अपने हर दकु मन को माफ़ कर हदया, ककसी से बदला नह ंु मलया।'' आज कफर से एक अल्लाह के प्रतीक इस घर को मशकक से पाक ककया जा रहा था, अल्लाह के रसूल ( )ﷺकाबा को बुतों से पाक कर रहे थे, उन बतु ों से जजन्होंने लोगों को गमु राह कर हदया था, उन बतु ों से जजन्होंने लोगों को आखखरत भुला द थी। यह फजी कहाननयों के फजी बुत थे कु छ परु ाने पगै म्बरों के बतु थे जजनकी ताल म (मशक्षा) को भुला कर लोगों ने उन्हंे ह खदु ा बना हदया था, और कु छ फररकतों के फजी बतु थे। आप ( )ﷺएक एक बुत चगराते जाते और कहते जाते: ''हक़ (सच) आ गया और बानतल (झूठ) ममट गया और बानतल तो था ह ममट जाने वाला।'' नाएमा ने भी मन ह मन दोहराया: ''बेशक बानतल (झूठ) ममटने के मलए ह है।'' ................................. नाएमा कु छ याद करते हुए बोल : ''मनैं े इस दौर का मद ना नह ंु देखा, मुझे वो तो हदखादो।'' ''हाूँ वहांु भी चलना है, वहांु की खास दो भववकयवाणी भी तुम्हे हदखानी हंै।'' यह कहते हुए अस्र ने नाएमा का हाथ पकड़ा और वो दोनों कु छ कदम चले। अब नाएमा के सामने खजूर के तने और ममट्टी गारे से बनी छोट सी मजस्ज़द थी, यह मजस्ज़द नबवी मद ना थी, नाएमा ने उमरा करते वक़्त जजस मजस्ज़द नबवी को देखा था उस के मुकाबले देखने मंे इसकी शान कु छ भी नह ंु थी लेककन मजस्ज़द नबवी की असल शान उन लोगों से थी जो मजस्ज़द में मौजदू सुबह की नमाज़ सब ममल कर पढ रहे थ।े जब नाएमा अस्र के साथ मजस्ज़द मंे आई तो नमाजज़यों के इमाम अल्लाह के रसूल ( )ﷺकी ज़ुबान पर सूरेह फतह के यह अल्फाज़ थे: क़सम उस वक़्त की Page 240
''वह अल्लाह हैं जजसने भेजा है अपने रसूल को हहदायत और सच्चे द न (धम)क के साथ ताकक उसको गामलब करदे सारे द नों पर और अल्लाह की गवाह काफी है, महु म्मद अल्लाह के रसलू और जो इनके साथ हैं वो आपस में बहुत नमक हदल हंै लेककन इन काकफरों पर सख्त हैं, तमु इनको अल्लाह के फज़ल और चाहत मंे रुकू सज्दों मंे झकु ा हुआ पाओगे, इनकी पहचान इनके माथों पर सज्दों के ननशान से है, इनकी यह ममसाल तौरेत (यहूहदयों के गरंुथ) मंे हंै, और इुंजील (ईसाइयों के गरंुथ) मंे इनकी ममसाल यँू है कक जैसे नई खेती के मोल हों कफर उसको सहारा हदया कफर वो मज़बूत हो गई, कफर वो अपने तने पर खड़ी हो गई इंुसानों के हदलों को मोहती हुई ताकक इन काकफरों के हदल इनसे जल जाए,ूँ अल्लाह ने इनमे से जो ईमान लाए और जजन्होंने नेक अमल (कमक) ककये मजग्फरत और एक बहुत बड़े इनाम का वादा ककया है।'' (सूरेह फतह 28 से 29) कु रआन पढना पूरा हुआ, अल्लाहुअकबर की आवाज़ आई, सब लोग रुकू मंे झकु गए, अस्र ने उन लोगों को देखते हुए कहा: ''देखा तमु ने नाएमा! जब यह आयतें नाजज़ल हुईं थी तो परू े अरब के मुशररक मसु लमानों के दकु मन थ।े मुसलमानों को दस साल के मलए जंगु बदुं के मलए एक ऐसी सुंचध पर मजबरू होना पड़ा जजसमे सार शतें मुसलमानों के खखलाफ थी, ताकक अमन हामसल कर सकें ।'' ''तुम हुदेबया सचुं ध की बात कर रहे हो?'' ''हाँू ! मगर उसके बाद यह सरू ेह फतह नाजज़ल हुई जजस में खलु जीत की खशु खबर ममल , और यह भववकयवाणी कक इस्लाम यहाूँ के हर द न (धम)क पर छा जाएगा।'' ''और यह बात मक्का की जीत के वक़्त पूर हो गई जजसे हम ने अभी देखा।'' ''बबलकु ल, और जजन साचथयों का इन आयातों मंे जज़क्र आया था अब तमु उनके बारे मंे बहुत बड़ी और ऐसी भववकयवाणी सनु ोगी जजस पर इन हालात मंे यकीन नह ुं ककया जा सकता था। यह बड़ी भववकयवाणी मद ना मंे उस समय नाजज़ल हुई थी जब पूरा अरब भूके भडे ड़यों की तरह गर ब और बेसहारा मद ना शहर पर टु टा हुआ था।'' यह कह कर अस्र नाएमा को समय में थोड़ा पीछे ले गया। यह बहुत तेज़ सदी का मौसम था अल्लाह के रसलू ( )ﷺके साथी इशा (रात) की नमाज़ के मलए ठन्डे पानी से वुजू कर के क़सम उस वक़्त की Page 241
मजस्जद नबवी में आ रहे थे। नाएमा ने देखा कक इन लोगों में ज़्यादातर के चहरे गर बी और भकू से मरु झाए हुए थे, बहुत से लोगों के पास सदी से बचने के मलए गरम कपड़ा भी नह ुं था। कु छ देर में नमाज़ शुरू हुई, अल्लाह के रसलू ( )ﷺने सरू ेह नूर का एक हहस्सा पढना शरु ू ककया, इस हहस्से मंे इुंसानी लड़ाइयों के इनतहास की सब से बड़ी भववकयवाणी थी: ''तमु मंे से जो लोग ईमान लाए और जजन्होंने नेक आमाल (कमक) ककये उन से अल्लाह का वादा है कक उनको इस देश में सत्ता सोंपगे ा, जसै ा कक उन लोगों को सरदार बनाया था जो इनसे पहले मसु लमान (फमाबक रदार) गज़ु रे हैं। और उनके मलए उनके इस द न (धमक) को जमा देगा जजसको इनके मलए पसंदु ककया है, और इन के इस डर के माहोल को अमन के माहोल मंे बदल देगा, यह मेर ह इबादत करेंगे और ककसी को मरे ा साझी नह ुं ठहराएगँू े, और जो कफर इस सब को देख लेने के बाद भी ना माने तो वह तो असल नाफरमान हंै।'' (सूरेह नूर 55) यह शब्द परू े होने के बाद अस्र ने नाएमा से कहा: ''सुना तुमन,े इन लोगों से जजनके पास ईमान और नेकी के मसवा कु छ नह ुं, क्या वादा ककया जा रहा है ? मगर तुम देखोगी की आने वाले कु छ समय मंे इंुसानी इनतहास की सबसे चमत्कार घटना होगी।'' इसके साथ ह अस्र ने नाएमा को साथ मलया और आगे बढा समय में वो कु छ साल आगे आ गए। वो दोनों मद ना ह में थे, लेककन मद ना कु छ बदल चकु ा था, वो दोनों चलते हुए मजस्जद नबवी के अन्दर आए जो अब थोड़ी बड़ी हो चकु ी थी। उसके सहन मंे सोने चाुदं और दसू र कीमती चीज़ों के ढेर लगे हुए थ,े कु छ लोग आस पास बठै े हुए थ।े अस्र ने उनका पररचय कराते हुए कहा: ''यह जो सामने पवे ुदं लगे हुए कपड़े पहने हुए हैं, यह हज़रत उमर (र) हैं, उनके साथ ह उस्मान, अल , तलहा, ज़बु रै और दसु रे साथी (र) बैठे हैं।'' ''और हज़रत अबू बकर (र) कहाूँ हंै?'' नाएमा ने सवाल ककया। क़सम उस वक़्त की Page 242
''उनका इजन्तकाल हो चुका है, और अल्लाह के आखर रसलू ( )ﷺभी इस दनु नया से जा चकु े हंै।'' अस्र ने इशारा करते हुए बताया: ''यह हज़रत उमर (र) की खखलाफत का दौर है, वह उमर जो एक ज़माने मंे बकररयाुं चराया करते थ,े और यह उनके साथी जो मक्का में लोगों के ज़ुल्म का मशकार थ।े यह सब इसी मजस्ज़द में अल्लाह के रसलू ( )ﷺसे कु रआन सुन रहे थे जजसमे इनसे वादा ककया गया था कक इन्हें इस सर ज़मीन मंे सत्ता द जाएगी, तो देखलो आज दनु नया में यह सूपर पावर हैं, ईरान, ममस्र, रूम, अफ्रीका सब बड़ी ताकतें इनके सामने घुटने टेक चकु ी हंै।'' ''कफरोन का ममस्र भी?'' नाएमा ने हैरत से कहा तो अस्र बोला: ''ममस्र तो इनकी सल्तनत का बस एक छोटा सा हहस्सा है। तमु सोच नह ंु सकती कक ककतने कम समय में ज़मीन की सत्ता अल्लाह ने अपने इन बन्दों के क़दमों मंे डाल द है, यह बन्दे जजन्हंे मक्का में मारा पीटा जा रहा था और मद ने मंे जजन्हें हर समय हमलों का डर रहता था।'' ''यकीन नह ुं होता, लेककन इन्कार भी नह ंु ककया जा सकता।'' नाएमा ने कहा तो अस्र बोला: ''शायद इससे अच्छी बात इस सब पर नह ंु कह जा सकती नाएमा जो तमु ने कह है, कक यकीन नह ुं होता लेककन सब जानते हैं कक हकीक़त है इस मलए इन्कार भी नह ंु ककया जा सकता..... लेककन एक ज़रूर बात यह है कक अल्लाह के आखर रसूल ( )ﷺके मुखात्बीन (श्रोताओुं) की यह सज़ा और इनाम खदु ा के मौजूद होने का सबसे बड़ा सबु ूत ह नह ुं बजल्क क़यामत को होने वाले सज़ा और इनाम का जीता जागता नमूना भी है। यह दनु नया में क़यामत की सबको नज़र आने वाल ररहसलक है, यह इंुसानों पर सब कु छ साफ़ खोल कर बयान करदेने वाल चीज़ है, जजसके बाद इुंसाननयत ख्याल फलसफों (दशनक ) की बहसों से ननकल कर सच्चाई की दल ल के दौर में पहुूँच चकु ी है, अब यह मुसलमानों का काम है वो इस दल ल को दनु नया तक पहूँचाएूँ।'' क़सम उस वक़्त की Page 243
तभी अज़ान की मधरु आवाज़ आने लगी, नाएमा को लगा हर शब्द उसके कानों से होते हुए हदल में उतरता चला जा रहा है। अल्लाह सबसे बड़ा (महान) है, अल्लाह सबसे बड़ा (महान) है, अल्लाह सबसे बड़ा (महान) है, अल्लाह सबसे बड़ा (महान) है। मैं गवाह देता हूँ कोई और रब नह ंु मसवाय अल्लाह के , मंै गवाह देता हूँ कोई और रब नह ंु मसवाय अल्लाह के । मंै गवाह देता हूँ महु म्मद ( )ﷺअल्लाह के रसूल हैं, मैं गवाह देता हूँ महु म्मद ( )ﷺअल्लाह के रसूल हंै। आओ नमाज़ की तरफ़, आओ नमाज़ की तरफ़। आओ कामयाबी की ओर, आओ कामयाबी की ओर। अल्लाह सबसे बड़ा (महान) है, अल्लाह सबसे बड़ा (महान) है। कोई और रब नह ुं मसवाय अल्लाह के । यह शब्द सुन कर नाएमा की अजीब हालात हो गई, मगररब (शाम) की नमाज़ का वक़्त हो चकु ा था, हदन ख़तम हो चकु ा था, नाएमा को मालूम था कक उसका सफर भी ख़त्म हो रहा है, वो मजस्जद के सहन में ह बैठ गई। थोड़ी ह देर में नमाजज़यों से मजस्ज़द भर गई और नमाज़ शुरू हो गई। इमाम हज़रत उमर (र) थे, उन्होंने सूरेह फानतहा पढ और उसके बाद सूरेह अस्र पढना शुरू की। ''ज़माना गवाह है, बेशक इंुसान घाटे मंे पड़ कर रहेंगे, मसवाए उन लोगों के जो ईमान लाए और नके अमल (कमक) करते रहे, और एक दसू रे को सच्चाई पर जम जाने और उसमे आने वाल मसु ीबतों पर सब्र करने की नसीहत करते रहे।'' अल्लाहुअकबर कहते हुए सब एक साथ अल्लाह की बड़ाई (महानता) को मानते हुए उसके सामने झकु गए। अस्र नाएमा का हाथ पकड़ते हुए ख़ामोशी से मजस्ज़द नबवी के बाहर आ गया। सरू ज डू ब चकु ा था और अपनी ननशानी के तौर पर अपने पीछे लाल छोड़ गया था, यह सहदकयों का क़सम उस वक़्त की Page 244
मौसम था। नाएमा की हालत अभी भी नह ंु सभंु ल थी, उसने सच्चाई जानना चाह थी, सच्चाई आज खलु कर उसके सामने आ चकु ी थी इतने बड़े सबु तू ों के साथ जजनका इन्कार ममु ककन नह ुं था। उसे एक तरफ सच्चाई तक पहुँूचने की ख़शु ी थी तो दसू र तरफ जजम्मदे ार के अहसास से उसका हदल ननढाल हो रहा था, वह भार क़दमों के साथ अस्र के साथ आगे बढती रह , वो दोनों खामोश थ।े अस्र उसे मजस्ज़द के कर ब कबब्रस्तान (बक़ी) की तरफ ले आया, यह पहल बार था जब नाएमा अस्र के साथ इतनी दरू ज़मीन पर बबना वक़्त के बदले चल थी। उसने बक़ी की तरफ देखा अभी इतनी रौशनी बाकक थी कक नाएमा वहाुं मौजूद कब्रों को आसानी से देख सकती थी। नाएमा उमरे पर यहाूँ आई थी इसमलए वह जानती थी कक यह जन्नतलु बक़ी के कबब्रस्तान हंै। उसने कहा: ''हम जन्नतलु बक़ी के कबब्रस्तान मंे आ चकु े हैं।'' अस्र ने हाँू मंे सर हहलाया और बोला: ''नाएमा तमु सच्चाई जानना चाहती थी, तमु जानना चाहती थी कक क्यों अल्लाह सच्चाई को खलु कर बयान नह ुं करता, तमु ्हारे इस सवाल और हर सवाल का जवाब बबलकु ल खोल कर तुम्हे हदखा हदया गया है। तुम मेरे बारे में जानना चाहती थी यानन अस्र के बारे में, अब तुम्हे मरे ा मतलब भी समझ आ चकु ा होगा, मैं रसूलों का ज़माना हूँ, हज़ारों सालों से इनतहास में यह गवाह देता आ रहा हूँ कक इुंसान बड़े घाटे मंे पड़ कर रहेंगे।'' ''अबू जहल कक तरह, कफरोन की तरह, कौम आद की तरह कौम समूद की तरह।'' नाएमा ने अस्र की बात को आगे बढाया। ''हाूँ मसवाए उनके .....'' यह कहते हुए अस्र ने अपने दोनों हाथ फै लाए, उसके एक हाथ का इशारा मजस्ज़द नबवी मंे नमाज़ पढ रहे अल्लाह के रसूल ( )ﷺके साचथयों की तरफ था और दसू रा जन्नतलु बक़ी के कबब्रस्तान मंे सो रहे सहाबा की तरफ। क़सम उस वक़्त की Page 245
''जो ईमान लाए जो नके अमल (कमक) करते रहे, और सच्चाई पर जम जाने और उसमे सब्र करने की नसीहत करते रहे।'' नाएमा ने बड़े जज़्बात से कहा: ''बेशक।'' अस्र बोलता रहा: ''मरे गवाह नहू (अ) और कौम आद (अ) की दास्तानों में है, कौम समूद और कौम लूत (अ) के ननशानों मंे है, कफरोन और बनी-इसराइल की घटनाओंु में है, और सबसे बढ कर यह आखर रसूल ( )ﷺऔर उनके साचथयों को ममले इनाम और उनके दकु मनों को ममल सज़ा मंे है, जजसके सबु तू अब सबके सामने हैं और जजन्हें ममटाया नह ुं जा सकता, इनतहास भी खदु इसका गवाह है।'' अस्र की बातंे नाएमा की रूह के अन्दर तक उतरती चल जा रह थी। ''यह इनाम और सज़ा चीुंख चीुंख कर बता रह है कक इस दनु नया का एक जजन्दा खदु ा है जो परदे मंे ज़रूर है लेककन बे खबर नह ंु.... जजसने क़यामत की सज़ा और इनाम को साबबत करने के मलए दनु नया मंे छोटे पमै ाने पर रसूलों के ज़माने में यह सज़ा और इनाम करके हदखा हदया। वो सब कु छ देखने वाला और इंुसाफ करने वाला रब आने वाल दनु नया मंे भी यकीनन मुजररमों को पकड़गे ा और नके लोगों को बहे तर न नमे तें देगा और उन्हें अपना कर बी बना लेगा.... क्यों कक दनु नया इजम्तहान है.... असल जज़न्दगी आखखरत की जज़न्दगी है।'' यह कह कर अस्र ने अपने हाथ नीचे ककये और कब्रों को गौर से देखने लगा, कफर नाएमा से बोला: ''नाएमा! अब क्या तमु दनु नया के सामने खदु ा और आखखरत की गवाह दोगी, क्या तुम रसलू ों के ममशन को आगे बढाओगी?'' ''मैं ज़रूर यह गवाह दँूगू ी।'' क़सम उस वक़्त की Page 246
नाएमा ने परू े इरादे से कहा। कफर एक ख़ामोशी छा गई, ना जाने ककतनी देर वो ऐसे ह रहे, कफर अचानक अस्र की आवाज़ आई: ''नाएमा अब मंै तमु से जाने की इजाज़त चाहूँगा।'' अस्र की बात पर नाएमा चौंकी, उसके चहरे पर उदासी आ गई। उसने दसू र बार इस अदभुत अस्र को गौर से देखा, पहल बार उसने अस्र को गौर से उस वक़्त देखा था जब वह हयलू े से इुंसान बन कर सामने आया था। अस्र का वुजदू (अजस्तत्व) इतना ज़्यादा अजीब और खबू सूरत था कक नाएमा को कभी दोबारा उसे नज़र भर कर देखने की हहम्मत नह ंु हुई थी, मगर उस के जाने का सनु कर उससे रहा नह ुं गया, उसने उसे नज़र भर कर देखा। उसे महससू हो रहा था कक वह उसकी आहद हो चकु ी है। ''क्या हम.... कभी दोबारा ममल सकंे गे?'' नाएमा ने अटकते हुए सवाल ककया, उसका हदल बुर तरह धड़क रहा था। ''तमु ने अगर जन्नत की कामयाबी हामसल करल तो मझु से ममल सकोगी, इसमलए की जन्नती की हर मांगु अल्लाह तआला परू करेंगे, मगर.....'' ''मगर क्या.....'' ''मगर यह कक उस वक़्त मंै इस रूप मंे दोबारा नह ंु आऊंु गा।'' ''क्यों? यह कै से हो सकता है, अल्लाह तआला इतना खबू सूरत रूप ख़त्म करने के मलए नह ुं बना सकते।'' ''यह तुम से ककसने कहा कक यह रूप अल्लाह ने ख़त्म करने के मलए बनाया है, लेककन यह मेरा रूप नह ंु है, मेरा कोई भी शर र नह ुं है, शर र तमु इंुसानों का होता है।'' ''तो कफर यह रूप ककसका है, कौन खशु नसीब है जजसे अल्लाह ने इतना खबू सरू त और बे ममसाल बनाया है?'' अस्र एक पल सोचने के बाद बोला: क़सम उस वक़्त की Page 247
''मझु े नह ुं मालमू , मुझे मसफक इतना बताया गया है कक यह रूप खदु ा के एक प्यारे बन्दे का है, वह खदु ा का सच्चा वफादार है, वह अपने रब का एक छोटा सा बुंदा है लेककन अल्लाह की ननगाह में अपने ज़माने का ल डर है।'' ''क्या मैं खदु ा के इस प्यारे बन्दे से ममल सकती हूँ?'' नाएमा के अदंु ाज़ मंे बहुत फरयाद थी, वह ना नह ुं सुन सकती थी। ''तुम उस से ममलोगी, यह मरे े पास तुम्हारे मलए आखर पैगाम है।'' ''मगर मैं उसको कै से पहचानंुू गी ? क्या वह ऐसा ह होगा जसै ा तुम मुझे इस वक़्त नज़र आ रहे हो?'' नाएमा बहुत परेशान थी। ''नह ंु, उसका यह रूप तो जन्नत के मलए बनाया गया है, ऐसे रूप अगर दनु नया में बना हदए जाएुं तो लोग उनकी पजू ा शरु ू कर दंे।'' यह कहते हुए अस्र ने अपना हाथ आगे बढाया और नाएमा के हाथों में उसका अपना लॉके ट रख हदया, यह वह लॉके ट था जजसे बचे कर नाएमा ने उस गर ब औरत की मदद की थी। उसे देख कर नाएमा हैरान रह गई, वह सवामलया नज़रों से अस्र को देखने लगी। ''जजस समय यह लॉके ट तुम्हे ममलेगा, उसी समय तमु ्हार मलु ाकात उससे हो जाएगी, तुम बगैर ककसी शक के उसे पहचान लोगी। मगर नाएमा! इस समय एक दसू र बात को समझना तुम्हारे मलए ज़रूर है, वह यह है कक जो सच्चाई को इस सतह पर आ कर देखते हंै जजस पर तमु आ चकु ी हो, उनकी आज़माइश बहुत सख्त होती है। तुमने सच्चाई को आखर सतह पर जा कर देखा है, इसमलए तुम्हारा रास्ता अब इतना ह मजु ककल हो चकु ा है।'' ''मंै बहुत कमज़ोर हूँ।'' नाएमा ने रोने की सी आवाज़ मंे कहा। इससे पहले कक अस्र कोई जवाब देता मजस्ज़द नबवी से ईशा (रात) की अज़ान की आवाज़ आने लगी, नाएमा आूँखंे बंदु करके अज़ान सनु ने लगी। अज़ान पूर हुई तो नाएमा यह देख कर हैरान थी कक अस्र का वजूद (अजस्तत्व) कफर से हयलू े मंे बदल चकु ा था। यह कमज़ोर होती नाएमा के क़सम उस वक़्त की Page 248
मलए एक और सदमा था, वह जहाूँ खड़ी थी वह ंु बठै गई। अब उसका हदल डर से धड़क रहा था, उसे अदुं ाज़ा था कक आने वाल जज़न्दगी में उसके मलए क्या क्या मजु ककलें आ सकती हैं। अस्र जो उसकी परेशानी को समझता था उससे बोला: ''मेरे साथ वापस मजस्जद नबवी में चलो।'' नाएमा हहम्मत करके उठी और कु छ कहे बगैर मजस्ज़द की तरफ चलद । अधँू रे ा पूर तरह फै ल चकु ा था, लेककन परू े आसमान में जगमग करते तारे खझलममला रहे थे, वो दोनों मजस्ज़द के अन्दर गए तो नमाज़ शरु ू हो चकु ी थी और हज़रत उमर (र) नमाज़ में सरू ेह बक्राह की यह आखर आयतें पढ रहे थे: ''रसलू ईमान लाया उस चीज़ पर जो उस पर उसके रब की तरफ से उतार गई और अल्लाह के नेक बन्दे ईमान लाए। यह सब ईमान लाए अल्लाह पर, उसके फररकतों पर, उसकी ककताबों पर, और उसके रसलू ों पर, वे इकरार करते हैं कक हम खदु ा के रसूलों मंे से ककसी के बीच फकक नह ंु करते, और कहते हंै कक हमने माना और इताअत (आज्ञाकाररता) की। ऐ हमारे रब हम तुझ से माफ़ी चाहते हंै और हम सबको तेर ह तरफ लौटना है। अल्लाह ककसी पर उसकी ताक़त से ज्यादा बोझ नह ुं डालता, हर एक इुंसान पाएगा जो कमाएगा और भरेगा जो करेगा। ऐ हमारे रब अगर हमसे कु छ भूल हो जाए या हम गलती कर बठै ंे तो हमें माफ़ कीजजयो, और ऐ हमारे रब हम पर इस तरह का कोई बार ना डालना जैसा हमसे पहले लोगों पर पड़ा, ऐ हमारे रब हम पर कोई ऐसी जजम्मेदार भी ना डाल जजसको हम उठा ना सकें और हमंे माफ़ कर, हमें बख्श दे और हम पर रहम फरमा, तू ह हमारा मौला है, अपने नाफरमान लोगों के मुकाबले में हमार मदद कर!'' नाएमा यह सुनती रह और उन ईमान वालों को नमाज़ पढते देखती रह जो पैगम्बरों के बाद इंुसानों मंे सबसे अच्छे लोग थ।े नमाज़ पूर हुई तो अस्र ने नाएमा से कहा: ''तमु ने सनु ा कक कु रआन में अभी क्या पढा गया?'' ''हाँू ईमान लाने का जज़क्र था।'' ''मगर ईमान के साथ एक दआु भी की गई है, वह यह है कक अल्लाह तआला हम पर वह बोझ ना डालें जो हम से पहलों पर डाला गया जो हमार हहम्मत से ज़्यादा हो, इसका मतलब यह है क़सम उस वक़्त की Page 249
कक जो बोझ वपछल उम्मतों पर डाले गए वो इन रसूल ( )ﷺके साचथयों पर नह ंु डाले गए और जो कु बाकननयांु इन सहाबा (साचथयों) ने द ुं अगल नस्लों से वो कु बाकननयांु भी नह ंु ल जाएंगु ी। यह तुम्हारे मलए खशु खबर है कक तमु पर और तमु ्हारे ज़माने में अल्लाह का सच्चा द न बबना ममलावट के पहुँूचाने वालों पर अल्लाह तआला ऐसी मसु ीबतें नह ंु आने दंेगे जसै ी पहलों पर आईं, यह अल्लाह का फै सला है, तमु ्हारा वास्ता ककसी कफरोन, ककसी अबू जहल से नह ुं पड़गे ा, तमु ्हे मसफक अपने हालात, अपनी गलत इच्छाओुं और शैतान के मशवरों से लड़ना होगा।'' ''मगर इजम्तहान तो कफर भी होंगे ना?'' नाएमा को न जाने क्या अदंु ेशे थे। ''हाूँ! इजम्तहान तो ज़रूर होगा, लेककन याद रखना कक अल्लाह तआला ने यह दनु नया इजम्तहान के मलए बनाई तो ज़रूर है, मगर ज़्यादातर वो मसफक हौंसले का इजम्तहान लेते हैं, इंुसान का नह ।ंु '' नाएमा कु छ देर सोचती रह , उसके सामने सज़ा और इनाम के सारे मुंज़र (दृकय) घूम रहे थे। कफर उसने पूर हहम्मत और इरादे के साथ जवाब हदया: ''मनंै े हर इजम्तहान में उतरने का फै सला कर मलया है, अब मझु े फकक नह ंु पड़ता कक इजम्तहान हौंसले का हो या जज़न्दगी का।'' ''अल्लाह तुम्हार मदद और हहफाज़त करे, मरे दआु एंु तुम्हारे साथ हैं, उम्मीद है कक तमु से अब जन्नत में मलु ाकात होगी।'' इसके साथ ह अस्र का वजदू (अजस्तत्व) हवा में बबखर कर गायब हो गया, नाएमा ने अपने आस पास देखा, उसके चारों तरफ अधँू ेरा छाया हुआ था, मगर नाएमा के अन्दर कोई डर नह ुं था, उसने पूरे हौंसले से अपने कदम आगे बढाना शरु ू कर हदया। ************************* क़सम उस वक़्त की Page 250
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