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इंड पाटलिपुत्र, अंक-5, अक्टूबर, 2022-मार्च 2023

Published by Anjani Prakashan, 2023-05-17 11:32:20

Description: इंड पाटलिपुत्र, अंक-5, अक्टूबर, 2022-मार्च 2023

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आपका अपना बैंैक, हर कदम आपके साथ YOUR OWN BANK, ALWAYS WITH YOU सं तों की धरोहर 5अंक इडं पाटलिपुत्र पटना अचं ल की अर्व्ध ार््षिषक हिन्दी गहृ पत्रिका, अक्टू बर 2022 - मार््च 2023 इंडियन बैैंक, अंचल कार्यालय पटना राजभाषा विभाग, प्रथम तल, इंडियन बैैंक परिसर, बुद्ध मार्ग्, पटना - 800001 दरू भाष : 0612-2219480, ई-मेल : [email protected]

कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व के अतं र्ग्त इंडियन बैकंै द्वारा इंदिरा गाधं ी इंस्टिट्टूय ऑफ मेडिकल साइंस पटना को 100 स्रै्टचर भेेटं करते हुए श्री शांति लाल जैन (प्रबं ध निदेशक एवं मखु ्य कार््यकारी अधिकारी), इंडियन बैंैक। इस आयोजन मेंे श्री इमरान अमीन सिद्दीकी (कार््यपालक निदेशक), श्री महेश कु मार बजाज (कार््यपालक निदेशक), श्री अश्वनी कु मार (कार््यपालक निदेशक), कॉर्पोरेट कार््ययालय के साथ-साथ पटना अंचल के वरिष्ठ कार््यपालक भी उपस्थित रहे।

इडं पाटलिपुत्र अचं ल कार्यालय पटना की अर्वध् ार््षिषक हिन्दी गृह पत्रिका वर््ष : 2022-23, अंक-5, अक्टूबर 2022 - मार््च 2023 çca/kdh; eaMy अनुक्रमणिका क्र शीर््कष पृष्ठ 1 श्री अमरेन्द्र कु मार शाही, क्तेष ्र महाप्रबं धक, पटना अंचल 4 2 श्री ओम प्रकाश कालरा, अंचल प्रमखु एवं उप महाप्रबं धक 5 सं ेदश 3 श्री नवीन कु मार, उप अचं ल प्रबं धक 6 4 सम्पादकीय - श्री विजने ्द्र कु मार चौधरी, प्रबं धक (राजभाषा) 7 5 बैकैं िं ग उत्पादों के विपणन मेंे हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका 8 6 अनोखा शहर 10 7 महिला सशक्तिकरण मेें बैकंै ों की भूमिकाआ ेलख एवं अन्य लेख 11 8 हिंदी मीडिया का समाज पर प्रभाव 12 मखु ्य सरं क्षक सरं क्षक 7 बिहार के प्रसिद्ध कवियों का परिचय 14 श्री अमरेन्द्र कु मार शाही श्री ओम प्रकाश कालरा 9 भारत के वीर 15 10 शिलांग की यात्रा 16 क्तषे ्र महाप्रबंधक अचं ल प्रमखु एवं उप महाप्रबंधक 11 सेेंट््रल बैैंक डिजिटल करेेंसी (CBDC) 17 12 सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ 18 13 चीटं ियों की कै न्डी 20 14 आधनु िकता और बचपन : कै से करेें हैप्पी पैरेंेटिगं 22 मुख्य सपं ादक एवं मार्गद् र््शक सपं ादक 15 विधाताकाव््यांजलि 09 श्री नवीन कु मार श्री विजेन्द्र कु मार चौधरी 16 पेड़ लगाओ 21 उप अंचल प्रबधं क 17 पवित्तर बैैंकिं ग 23 प्रबंधक (राजभाषा) 16 फिर कु छ ढूँढता रह गया 24 19 का कहीं ए मन 24 20 हिंदी भाषा 25 21 उसकी याद 25 22 दिखावटी (D) पन (P) = DP 26 23 दःु साहस 27 24 काश कि...!! 28 25 जियो बिंदास 28 26 इंडियन बैंकै के 116वेें स्थापना दिवस समारोह पर आयोजित टगवार प्रतियोगिता 29 सहयोग 27 अखबार के सुर््खखियों मेंे पटना अचं ल 30 28 पटना मुख्य शाखा द्वारा विशाल प्रदर््शनी का आयोजन 32 श्री अभिनंदन कु मार श्री प्रलयंकर सिं ह 29 116वेंे स्थापना दिवस समारोह पर आयोजित कार््यक्रमों की झलकियाँअन्य 33 मुख्य प्रबधं क 30 विविध कार््यक्रमों की झलकियाँ 34 मुख्य प्रबंधक 31 माननीय मखु ्यमं त्री एवं उपमुख्यमं त्री के साथ शिष्टाचार भेटें 38 32 विज्ञापन 40 श्री रुचिर कु मार सिन्हा श्री सुमन कु मार मखु ्य प्रबंधक मखु ्य प्रबधं क श्री जितेेदं ्र झा श्री सजं य कु मार चौधरी सम्पर््क सूत्र इं डियन बैंैक, अचं ल कार््ययालय, पटना मुख्य प्रबधं क मुख्य प्रबंधक राजभाषा विभाग, प्रथम तल, इं डियन बैैंक परिसर, बदु ्ध मार््ग, पटना - 800 001 दरू भाष : 0612-2219480, ई-मेल : [email protected] यह गहृ पत्रिका के वल आंतरिक परिचालन हेतु है। ‘इं ड पाटलिपुत्र’ पत्रिका मेें प्रकाशित कोई भी सामग्री जैसे लेख, कविता प्रेषक की स्वयं की है, इसमेें सपं ादक अथवा बैैंक का कोई उत्तरदायित्व नहीीं है। मदु ्रण एवं पत्रिका डिजाइन : अजं नी प्रकाशन, कोलकाता, पश्चिम बगं ाल, मो. 8820127806, ई-मले : [email protected]

आपका अपना बैकंै , हर कदम आपके साथ संदेश YOUR OWN BANK, ALWAYS WITH YOU श्री अमरने ्द्र कु मार शाही क्ेषत्र महाप्रबंधक पटना अंचल प्रिय सहकर््ममियो,ं करता हूँू की आनेवाले दिनों मेें ये अपनी गरिमामयी स्थिति बनाए रखेगंे े एवं नयी तकनीकी का प्रयोग इंड पाटलिपतु ्र के पाचं वेंे अकं के माध्यम से करके दिन पर दिन सफलता की नयी बलु दियों को आप सभी को सं बोधित करते हुए मझु े अपार हर््ष छुएं ग।े की अनुभूति हो रही है। अचं ल कार््ययालय पटना द्वारा इंड पाटलिपुत्र का प्रकाशन लगातार किया जा रहा है पटना अचं ल इंड पाटलिपुत्र पत्रिका का पाँ चवा और इस पत्रिका के अभी तक 4 अकं प्रकाशित हो सं स्करण जल्द ही आप सभी के समक्ष प्रस्तुत करने चुके हैंै। जा रहा है मैैं उन सभी को बधाई देना चाहता हूूं जिन््होोंने इसमेंे योगदान दिया है। यह सं पादकीय टीम, मैैं एक ऐसे बैंकै का हिस्सा होने के लिए योगदानकर््तताओं और इसकी प्रस्तुति मेंे शामिल सभी सम्मानित महसूस कर रहा हूंू जो उच्चतम स्तर की लोगों की कड़़ी महे नत और समर््णप का प्रमाण है। गुणवत्ता सवे ा के साथ आपकी सभी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहा है। इंडियन मैंै इंडियन बैंकै की 39 वर्षषों की सवे ा के बाद बैैंक ने हमने हमशे ा अपने ग्राहकों को सर्वोत्तम सं भव 31 मार््च 2023 को सवे ानिवतृ ि होने जा रहा हूँू। आप सेवा प्रदान करने का प्रयास किया है। हम अपने सभी के सहयोग के लिए पनु ः धन्यवाद। ग्राहकों की जरूरतों को समझते हैंै और उन्हंहे उनकी सभी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आप सभी को वर््तमान वित्तीय वर््ष मेें नए आवश्यक मार््दग र््शन और सहायता प्रदान करते हैंै। उत्साह के साथ नई उपलब्धियों के लिए हार््ददिक हम न के वल ग्राहकों की वित्तीय जरूरतों को पूरा शुभकामनाएँ ! करने मेंे सक्षम हैंै, बल्कि हम समाज के विभिन्न हिस््सों मेें विभिन्न सामाजिक कल्याण गतिविधियों मेें शभु चे ्छु, भी सक्रिय भूमिका निभाते हैैं। (अमरेन्द्र कु मार शाही) पटना अचं ल ने व्यवसाय के सभी मापदंडो को पूरा करने का पूरा प्रयास किया है एवं उसमे काफ़़ी हद तक सफलता भी पायी है और मैैं यह आशा 4 \"राष्ट्रीय व्यवहार मेें हिन्दी को काम मेें लाना देश की एकता और उन्नति के लिए आवश्यक है।\" – महात्मा गाधं ी इं ड पाटलिपतु ्र, अंक-5, अक्टू बर 2022 - मार्च् 2023

आपका अपना बैंैक, हर कदम आपके साथ सदं ेश YOUR OWN BANK, ALWAYS WITH YOU श्री ओम प्रकाश कालरा अंचल प्रबंधक अंचल कार््यलया य, पटना प्रिय साथियो,ं डिजिटल लने देन मेंे भारत पूरी दनु िया मेें अव्वल रहा है। हमारा कॉर्पोरेट कार््ययालय भी समय-समय पर ग्राहकों की पटना अंचल की गहृ पत्रिका इंड पाटलिपतु ्र के पाचं वेंे आवश्यकता के अनसु ार डिजिटाइजेशन को बढ़़ावा दे रहा अकं के माध्यम से पुनः आप सभी को सं बोधित करते हुए है, नए-नए डिजिटल उत्पाद ला रहा हैंै और आवश्यकता मुझे हर््ष की अनुभूति हो रही है। वित्तीय वर््ष 2022-23 अनसु ार डिजिटल प्टेल फार््म मेें बदलाव भी किया जा रहा हैंै। हमारे बैैंक एवं पटना अंचल के व्यावसायिक पैमाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर््म पर अधिक से अधिक ग्राहकों को जोड़ने बहुत ही उत्तम रहा है। से परिचालन लागत कम होता है एवं लाभ प्रदता मेंे सधु ार होता है, साथ ही बैंकै की छवि भी बहे तर होती है। मैैं पटना शदु ्ध ब्याज मार््जजिन (NIM), अर््जजित ब्याज आय अचं ल के सभी शाखाओं से अनरु ोध करता हूूं कि शाखा के और भगु तान की गई ब्याज की राशि के बीच का अंतर सभी ग्राहकों को डिजिटली पं जीकृ त किया जाए, जिससे हम है। यह लाभप्रदता का एक प्रमखु मापदंड है। शुद्ध ब्याज अपने कॉर्पोरेट उद्देश््योों को सफलतापूर््वक प्राप्त कर सकेें । मार््जजिन (NIM) को बढ़़ाने के कई विकल््पों मेंे से एक है डिपॉजिट पर ROI को कम कर CASA डिपॉजिट को किसी भी देश की पहचान उसकी भाषा और उसके बढ़़ाना। कासा के लिए सभी बैैकं कड़़ी प्रतिस्पर््धधा के दौड़ साहित्य से होती है। भारत के नागरिक होने के नाते हम सभी मेें शामिल है। हमारे बैंकै ने CASA को सदु ृढ़ करने के के लिए राजभाषा हिन्दी का कार््ययान्वयन करना हमारा दायित्व लिए विभिन्न प्रकार की पहल की है; कई नए प्रकार के ही नहीं है, बल्कि देश के प्रति अपना प्रेम दिखाने का एक प्रोडक्टस की शुरुआत की है। ज्यादा से ज्यादा अच्छे ग्राहकों माध्यम भी है। अतं मेंे मैैं सभी साथियो से आग्रह करूंगा कि को बैंकै के साथ जोड़ना, परु ाने सं बं धों को पनु र्जीवित करना आप सभी इस पत्रिका के अगले अकं को और उत्तम बनाने के व परु ाने खातों को ऑपरेटिव करना और डिजिटाइजेशन व लिए अपने विचार एवं रचनाएँ हमारे कार््ययालय के राजभाषा ग्राहकों के लिए डिजिटल ऑनबोर््डििंग अत्ंय त आवश्यक है। विभाग को भेजते रहेें। ग्राहकों को दरु ्घ्टना/स्वास्थ्य बीमा और अन्य सुविधाओं मेंे रियायतों सहित विभिन्न आकर््षक लाभों की पशे कश की गई मुझे आशा है कि चालू वित्तीय वर््ष मेंे हम अपने है। हम सभी को विशेष रूप से इन उत्पादो/ं सवु िधाओं पर निर््धधारित लक्षष्यों को प्राप्त तो करेंेगे ही, बल्कि उससे आगे भी ध्यान देकर अधिकाधिक CASA मोबलाइज करने का प्रयास जाने का प्रयास करेंेग।े करना चाहिए। शुभकामनाओं सहित। आप सभी को विदित है कि भारत सरकार एवं बैकंै ों के निरंतर प्रयासों से डिजिटल बैंैकिं ग सफलता के नए (ओम प्रकाश कालरा) आयामों को प्राप्त कर रहा है। हाल के आं कड़़ोों के अनुसार \"भाषा की सरलता, सहजता और शालीनता अभिव्यक्ति को सार््थकता प्रदान करती है। हिन्दी ने इन पहलओु ं को खूबसरू ती से समाहित किया है।\" – नरेंेद्र मोदी (प्रधान मतं ्री) 5 इं डियन बैंकै , अचं ल कार््ययालय, पटना की छमाही हिं दी गृह पत्रिका

अप्‍प दीपो भव दिलीप कु मार की प्रेरक कृ ति श्री नवीन कु मार उप अंचल प्रबंधक अंचल कार््यलाय य, पटना जमाने से इस धरती पर लोग आते रहे हैैं जाते रहे हैंै। कु छ के मेें अभिधा प्रकाशन से आई पुस्‍तक अप्‍प दीपो भव इसी तरह की रम्‍य नाम इतिहास मेंे हम दहु राते रहे हैंै। ऐसे मनषु ््‍योों की सं ख््‍यया कम नहीं रचनाओं का सं ग्रह है जो मनुष्‍य को सच््‍चची सफलता के लिए अग्रसर जो के वल अपने लिए जीते हैैं, पैसों के पीछे-पीछे भागते हैंै। एक करती है। अपने भीतर की ताकत, लौ और उजाले से परिचित कराती दिन पैसा तो बहुत होता है पर सं बं धों का खालीपन उन्‍हंे टीसता है। है, बाकी काम तो मनषु ्‍य खदु ही कर लते ा है। क््‍योोंकि पूं जी से हम प््‍ययार नहीं खरीद सकत।े वह ममता नहीं खरीद सकते जो मां या प्रकृ ति हम पर खलु े आम लुटाती है। वह इंसानियत अप्‍प दीपो भव- हमारी आर््षवाणी का सारतत्‍व है जिसे अपने नहीं खरीद सकते जो सदियों की तपस््‍यया के बाद कहीं हाथ आती लेखो-ं उठ जाग मसु ाफिर भोर भई, पटे सफा तो रोग दफा, तन है। गाधं ी, बुद्ध, कबीर, तलु सी, नानक, रैदास के भीतर की वह क््‍यया सं दु र तो मन सं ुदर, डर के आगे जीत है, बदलाव से बदलगे ी तकदीर, ताकत है जो आज भी उन्‍हंे हमारी स््‍ममृतियों मेें जीवित रखे हुए हैंै। वह मीठी वाणी बोलिए, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, इतनी मनषु ्‍यता है जो कवियो,ं सं तो,ं ऋषियो,ं बदु ््धोों ने अपने जीवनानुभवों शक््‍तति हमेंे देना दाता, अपनी खुशी है अपने हाथ, सं गत से गुण होत से पाई है। है, सकारात्‍मक सोच की शक््‍तति। इस रचनानुक्रम से ही इस पसु ्‍तक की पूरी सं रचना समझ मेें आ जाती है। ये सदगणु हमारी मिट्टी मेंे आज कै रियर के पथ पर अग्रसर करने वाली परीक्षाएं तो बहुत जन्‍मजात हैंै, बस उन्‍हें अपनाने की जरूरत है। हम सबके भीतर होती हैंै, खूब सारी तैयारियां कराई जाती हैैं पर अच््‍छछा इंसान कै से बना ईश्‍वर अशं है। वह अविनाशी है। फिर भी एक दीन हीन नजर आता जाए कै से जीवन को एक ध््‍ययेय मेें ढाला जाए कै से अपने ही भीतर की है दसू रा वैभव सं पन्‍न। इसके पीछे क््‍यया रहस्‍य है। यही कि जिसने लौ से मनषु ्‍यता का वह उजाला हासिल हो जो न के वल खदु के लिए अपने भीतर के ईश्‍वर को पहचान लिया, अपने भीतर जलते दीपक बल््‍ककि पूरी मानवता के लिए लाभकारी हो, ऐसी सीख तो कोई गरु ु ही को पहचान लिया वह प्रलोभनों ओर सतही बातों की ओर नहीं दे सकता है। गरु ु वह नहीं तो के वल रटन्‍त विद्या से एक बं धी बं धाई भागता। जिसने सदियों से चली आ रही जीवन पद्धति के अच््‍छछे गणु ों तालीम की शिक्षा देता है। गुरु वह जो किसी भी मोड़ पर हमारे भीतर को अपना लिया उसकी ही जीत है। कहा है मन के हारे हार है मन का होना जगा दे, हमारे भीतर एक कबीर, एक बुद्ध एक नानक जगा के जीते जीत। दिलीप कु मार हारे हुए मनषु ्‍य को भी जीत की राह पर दे। जो हमारे भीतर जल रही लौ की रोशनी के वैभव को जगा दे। यह अग्रसर कर देते हैैं। काम कु छ लखे क ही करते हैंै जो अनभु व अनुभूति और अभिव्‍यक््‍तति के प्रणते ा होते हैंै। ऐसे ही लेखक हैंै दिलीप कु मार जिनकी हाल ही \"ये दनु िया जैसी भी हो इससे बहे तर चाहिए, इसे साफ करने के लिए एक महे तर चाहिए\" - कभी मुक््‍ततिबोध ने कहा था। दिलीप 6 \"समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है।\" – जस्टिस कृ ष्णस्वामी अय्यर इं ड पाटलिपुत्र, अंक-5, अक्टू बर 2022 - मार््च 2023

कु मार ऐसी ही तकनीक अपनाते हैंै कि सदं ेश यह दनु िया तभी बहे तर बनगे ी जब इस पर रहने वाले बेहतर इंसान होगं े। अपने श्री विजने ्द्र कु मार चौधरी भीतर मनषु ्‍यता की जलती लौ, ज्ञान की प्रबंधक (राजभाषा) जलती लौ को पहचानेगंे े तथा खुद के साथ-साथ पूरी मनुष्‍यता को अधं कार के अंचल कार््यलया य, पटना बड़़े वृत्‍त से निकालने का जतन करेेंग।े प्रिय पाठकगण, हर मनषु ्‍य चाहे वह बच््‍चचा हो, बूढा नमस्कार! पटना अचं ल की गहृ -पत्रिका “इंड पाटलिपतु ्र” का नवीनतम हो, छात्र हो, गृहस्‍थ हो, सं न््‍ययासी हो, उसके दिन की शुरुआत सुबह से होती अंक आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है। गहृ पत्रिका के इस अकं के माध्यम से है, जो सबु ह जग गया उसने समझो पुनः अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए मुझे अपार हर््ष की अनुभूति हो रही है। सुबह का सोना पा लिया। जो सोता रहा देर तक उसने प्रकृ ति का वैभव गं वा हमारे अचं ल की हिंदी गहृ -पत्रिका का प्रकाशन राजभाषा कार््ययान्वयन दिया। वह सनु हली किरणो,ं चिड़़ियों की का एक प्रमुख बिन्दु है। अतः उन सभी साथियो और सदस््यों का बहुत-बहुत चहचह, प्रकृ ति के सौदं र््य को देखने से धन्यवाद, जिनके सहयोग से हमारी गहृ पत्रिका का प्रकाशन सं भव हो सका वं चित रहा। सबु ह के साथ ही दिन भर है। आप सभी के मार््दग र््शन एं व सहयोग से हमने पत्रिका के इस अंक को जिसने समय का सम्‍यक समायोजन कर सूचनात्मक और रचनात्मक बनाने की पूरी कोशिश की है। इसमेंे बैकैं िं ग लिया वह सफलता कीर््तति की पायदान विषय, हमारे बैकंै के उत्पाद तथा सदस््यों के रचनाओं आदि को शामिल किया पर पहुुंच ही जाएगा। जिसने हर पल गया है। इसके साथ ही हमेंे पूरी आशा है कि हमारी पत्रिका को और अधिक की कीमत नहीं जानी उसके लिए कहा रोचक, सूचनात्मक तथा रचनात्मक बनाने मेें आप सभी आगे भी ऐसे ही ही गया है : सहयोग देते रहेंेगे। पत्रिका मेें प्रकाशन हेतु आप अपने लखे , कविता, कहानी, सं स्मरण, पर््यटन लेख, सलाह, व्यंजन विधि, कार्टून फिलर आदि भेज सकते \"कालो न यात:वयमेव यात:।\" है। अतः आप सभी से आग्रह है कि पत्रिका के आगामी अकं हेतु अपनी रचनाएँ जरूर प्रेषित करेंे। समय नहीं बीत रहा हम ही बीत रहे। इसलिए हर पल को मुट्ठियों मेें भीचं शभु कामनाओं सहित ! कर चलो। उसे सार््थक बनाओ, निरर््थक न जाने दो। यही इस पुस्‍तक का सार (विजने ्द्र कु मार चौधरी) है। दिलीप जी ने बरसों के अनुभव के मोती इस पुस्‍तक मेें बिखेरे हैंै। जो पढ़ ले उसका जीवन सं वर जाए। इस बहे तरीन प्रेरक पुस्‍तक के लिए दिलीप कु मार जी को बहुत-बहुत बधाई। वे भारतीय रेल यातायात सेवा के वरिष्‍ठ अधिकारी हैंै। 1999 मेें सिविल सर््वविस परीक्षा से निकले ऐसे इंसान जो उच्‍च पद पर होते हुए भी मनुष्‍यता की एक- एक सीख को किसी भी स्रोत से हासिल करने और अपने अनभु व का ज्ञान लुटाने को उद्यत रहते हैंै। ऐसे वरेण्‍य रचनाकार को नमन। \"वही भाषा जीवित और जागतृ रह सकती है जो जनता का ठीक-ठाक प्रतिनिधित्व कर सके और हिन्दी इसमेें समर््थ है।\" – पीर महु म्मद मुनिस 7 इं डियन बैंकै , अचं ल कार््यलाय य, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

बैैकं िं ग उत्पादोों के बैैं किं ग से जडु ़़े विपणन का अर््थ विभिन्न प्रकार के विपणन मेें हिं दी एवं उत्पादों और सवे ाओं के माध्यम से ग्राहक को एक क्षेत्रीय भाषाओं की उपयुक्त वादे की व्याख्या करना और सं तषु ्टि के माध्यम से परिचालन और वितरण की पुष्टि करना है। ग्राहक को भमू िका दिया गया वास्तविक सं तोष इस बात पर निर््भर करता है कि ग्राहक को कै से सहयोग किया जाता है। प्रसनू कु मार त्रिपाठी बैकंै उत्पादों का विपणन सं गठनात्मक उद्देश््योों को वरिष्ठ प्रबधं ््क ध्यान मेंे रखते हुए प्रतिद्वंद्विता से अधिक, ग्राहक की अचं ल कार््ययालय पटना मौद्रिक आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा करने के लिए सुविधा प्रदान करने मेंे अवशोषित समग्र कार््य है। बैैंकिं ग एक व्यक्तिगत सेवा उन्मुख उद्योग है और इसलिए ग्राहकों को उनकी ही भाषा मेंे उनकी जरूरतों को पूरा करने वाली सवे ाएं प्रदान करनी चाहिए। भारत की 90% जनसं ख्या या तो अपने मातृ भाषा मेंे बात करते है या फिर हिंदी मेें बात करते हैैं। अतः बैंैक के ग्राहक को समझाना उनकी मातृभाषा मेें कहीं ज्यादा आसान है। विपणन रणनीति मेें ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करना, वर्गीकृ त करना, प्रतिक्रिया देना और सं तषु ्ट करना शामिल है और यही लोग प्रभावी, पशे वे र और लाभकारी रूप से चाहते हैंै। इन सभी चीजों के लिए आवश्यक है कि हम ऐसी भाषा मेें बात करेें जो उनकी बोलचाल की भाषा हो। बैंकै के उच्चतम कार््यकारी से लेकर सबसे कनिष्ठ कर््मचारी तक प्रत्कये कर््मचारी को विपणन /मार्ेक टिगं से सं बं धित बातेंे अधिकाधिक हिंदी या ग्राहकों की मातृभाषा मेंे ही समझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। बैंकै सर््वथा एक ऐसी जगह है जहां सारी पैसे से सं बं धित जानकारी और जरूरतेें पूरी की जाती है। एक व्यक्ति के जीवन काल मेंे विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता की जरूरत होती है। जो उनके नजदीक का बैकंै ही पूरा करता है। अगर वित्तीय उत्पाद को कोई अगं ्रेजी मेंे समझायेगा तो बहुत सारे लोग को बहुत कु छ समझने मेंे कठिनाइयां आएं गी और हो सकता है कि वह समझ ना पाएं । आज के भागते-दौड़ते जीवन मेें वित्तीय उत्पाद के बारे मेंे लोगों को समझाना हिंदी मेें कहीं ज्यादा सरल है। बोलचाल की भाषा मेंे लोगों को सही निवशे का फै सला लने े मेें आसानी होती है, इसके अलावा किसी भी प्रकार का कं फ्यूजन / विभ्रान्ति नहीं रहता है। ग्राहक को वही मिलता है जो वह समझता है और इस प्रकार करनी और 8 \"देवनागरी ध्वनिशास्त्र की दृष्टि से अत्ंतय वजै ्ञानिक लिपि है।\" – रवीशकं र शकु ्ल इं ड पाटलिपुत्र, अकं -5, अक्ूट बर 2022 - मार्च् 2023

कथनी मेें फर््क मिट जाता है और बैैंकों की साख बढ़ जाती है। विधाता इसके अलावा बैैंक की मुख्य भूमिका न के वल अधिक से देखा है मैैनं े इंसान के रूप मेंे विधाता अपनी ख्वाइशेें अधिक ग्राहकों को अपने उत्पादों के उपभोग के लिए आकृ ष्ट भुलाकर, जो मेरी पहचान है बनाता करना है, बल्कि बहे तर ग्राहक सुविधा के माध्यम से बैैकं के हितों को सं रक्षित करना भी है। जो निश्चित ही सर््व साधारण की भाषा मेरी हर ज़़िद के आगे जो हर बार है झुक जाता है मेंे अच्छे तरीके से हो सकती है। मेरा पिता, मेरे लिए मेरा अन्नदाता अगर हिंदी या क्षेत्रीय भाषा मेंे ग्राहकों को वित्तीय उत्पादों तकलीफेंे अपनी हर किसी से है वो छुपाता के बारे मेें शिक्षित की जाती है तो बहुत सारे वित्तीय उत्पाद की मेरे सपने की किश्तं,ेत वो अपने पसीने से है चकु ाता खूबिओं ग्राहकों को बहुत जल्दी-जल्दी से और बहुत सरलता से समझ मेें आ जाती है। मैंै भूखा ना रहूँू, इसलिए पानी से अपनी भूख है मिटाता सामान्यतः ग्राहक अपना पैसा निवेश करने के लिए चिंतन और धैर््य से नए वित्तीय उत्पादों को समय देकर समझते है, क््योोंकि खुद धूप मेंे सुलगता रहता, और मझु े छाव मेंे बिठाता यह निर््णय लं बे समय के लिए की जाती है। ग्राहक हर एक बारीकी देखा है मैैनं े इंसान के रूप मेें विधाता समझने की कोशिश करता है। अच्छा विपणन अधिकारी वही होता है जो स्थानीय भाषा मेंे ग्राहक की हर जिज्ञासा को शांत कर सारी मुश्किलों से वो अके ला ही लड़ जाता सके और उनकी जरूरतों को पूरा करेें। वास्तव मेें विपणन का मलू फिर भी मरे े सामने यूँ फीका पड़ जाता मं त्र भी यही है। राहों मेंे मरे ी वो रोशनी बन जाता हमारे देश मेें कई सारे ऐसे लोग हैंै जिन्हेंह सही से अगं ्रेजी मं ज़़िल तक मरे ी, वही तो मेरा साथ निभाता नहीं आती है मगर वह काम हिंदी मेंे सरलता पूर््वक करते हैंै। अगर देखा है मैनैं े इंसान के रूप मेंे विधाता उनका काम हिंदी भाषा मेंे हो जाए तो उनका समय और साधन दर््द मेंे भी जो हर दम है मसु ्कु राता दोनों की ही बचत होगी। आज बैैंकों पर जोर है कि वह विभिन्न मेरे लिए मरे ी हर खुशियां जो हैंै मनाता प्रकार की वित्तीय उत्पादों का विपणन हमारी भारतीय भाषाओं मेें ही करेें जैसे बीमा प्रोडक््टोों को हिंदी मेंे समझना कहीं ज्यादा सरल देख तरे ी मजबूरिया,ं मरे ा भी मन भर आता है, इसी प्रकार म्ूचय ्अयू ल फं ड, गोल्ड बॉन्ड, पीपीएफ अकाउं ट, मैंै भी अंदर से बिखर बिखर जाता क्रेडिट कार््ड, डिजिटल मार्के टिगं प्रोडक्ट, मोबाइल बैैकं िं ग इत्यादि ग्राहकों को उनकी बोलचाल की भाषा मेें समझाना कहीं ज्यादा देखा है मैनंै े इंसान के रूप मेें विधाता आसान पड़ता है। इस देश की जनसं ख्या बड़़े पैमाने पे छोटे शहरों और गांवों मेें रहती है। उनकी जरूरतों को ध्यान मेें रखकर अगर प्रलयंकर सिं ह हम ज्यादा से ज्यादा जानकारियां भारतीय भाषाओं मेंे देंे तो बैंैकिं ग व्यापार मेंे कई गनु ा वदृ ्धि हो जाएगी। इसका एक सं ुदर उदाहरण मुख्य प्रबंधक गोल्ड फाइनेेसं कं पनिया/ं वित्तीय सं स्थान है जो भारत के स्थानीय अचं ल कार््ययालय पटना बाजार को समझ कर वित्त पोषण कर रही है। निश्चित ही यह कहा जा सकता है कि ग्राहकों के बिना बैकंै की अस्तित्व कु छ भी नहीं और बैैंकों का अस्तित्व तभी सं भव है, जब हम अपने ग्राहकों को सही तरीके से पहचाने और उन््हीीं की स्थानीय भाषा मेंे विभिन्न प्रकार की वित्तीय मदद और वित्तीय उत्पाद सही तरीके से उन तक पहुँुचाय।े जो के वल स्थानीय भाषा या हिंदी मेें ही सं भव है। \"हिन्दी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीीं किया।\" – डॉ. राजेन्द्र प्रसाद 9 इं डियन बैैकं , अंचल कार््ययला य, पटना की छमाही हिं दी गृह पत्रिका

अनोखा शहर शिखा वरिष्ठ प्रबधं ््क अचं ल कार््ययालय पटना आ फिस के बाद रचित थके हारे एवं सहमे हुए कदमों से घर लोगो के भोजन की व्यवस्था की हुई थी और यह इस अपात स्थिति की ओर चल पड़ा था। खाक छानती और धलू फाकती मेें एक नियम बना दिया गया था। सड़केंे ये रास्ता जो गाड़ियों की रेलम-रेल मेें घिरा होता था, ट््ररेफिक जाम के सं कट को झले ता रहता। आज वीरान, सुनसान सा खुद राह रचित के भावों को शब्द नहीं मिल रहे थे। एक ओर जहाँ बड़़े- देख रहा कोविड जैसी महामारी और लॉकडाउन के खत्म होने का। बड़़े शहरों मेें एक दसू रे को पूछने वाला कोई नहीं था। लोग गावों की तरफ पलायन कर रहे थ।े पड़ोसी तक हाल नहीं पूछते थे। वही रचित चं द माह पहले ही इस शहर मेंे आया था। यह शहर, जो ये शहर उनकी चिंता कर रहा था जो आम जीवन मेें भी उपके ्षित थ।े उसका जन्म स्थान तो नहीं था, लेकिन उसका शहर ही था। उसकी रचित के मन मेंे एक बार फिर एक अलग सा जुड़ाव उत्पन्न हो गया कर््म नगरी, प्रदेश की राजधानी, जहाँ रहने व बसने का सपना इस इस अनोखे शहर स.े .... ना॥ ना ... उसके अपने अनोहे शहर स.े ... प्रदेश के हर यवु ा वर्ग् की चाह थी। मानवता की जीती जागती मिसाल उसका अनोखा शहर पटना \"। रचित यूं तो परिक्षाओं के सं दर््भ मेंे कई बार यहाँ आया और गया पर इस जगह से रूबरू होने की चाहत रह गयी थी और इस बार तबादले पर उसने यही सोचा की बस अब मरे ा शहर मुझसे दरू नही।ं किं तु दरु ््भभाग्य! आते ही ये लॉकडाउन, पने डेमिक इसी उधरे बून मेंे गाड़़ी दौड़़ाते उसे सड़क पर लं बी कतार नज़र आई। एक दसू रे से फासले बनाकर ही सही पर कई जरूरतमन्द, कई लोग जो रोजाना कमाकर दो जून की रोटी जुटाते थे वो लं बी कतार का हिस्सा थे, आगे उसे शहर का वो प्रसिद्ध मं दिर दिखा जो इस शहर को गौरव था– महावीर मं दिर। जहाँ लोग हर भेद भाव भूल कर, अपनी दवु िधा लिए भगवान की शरण मेें चले आते थे और यह कतार उसी मं दिर से शरु ू हो रही थी। मं दिर ट््रस्ट ने ऐसी अपात स्थिति मेें भी भूखे, जरूरतमं द 10 \"आप जिस तरह बोलते हैैं, बातचीत करते हैंै, उसी तरह लिखा भी कीजिए। भाषा बनावटी नहीीं होनी चाहिए।\" – महावीर प्रसाद द्विवेदी इं ड पाटलिपुत्र, अकं -5, अक्ूट बर 2022 - मार्च् 2023

महिला सशक्तिकरण मेंे बैंैकोों की भमू िका आकाश कु मार प्रबधं ््क लोहिया नगर शाखा आ ज के इस बदलते दौर मेें जहाँ एक एक सफल एवं सरल योजना है। बैंकै ों द्वारा चलाए गए कु छ महत्वपूर््ण ओर भारत विकास की ओर प्रगतिशील योजनाएँ जिसका उद्ेदश्य के वल महिलाओं को है वहीं इस विकास को और गति प्रदान करने इस योजना के तहत महिलाएँ आसान सशक्त और सक्षम बनाना है। ये योजनाएँ इस के लिए महिलाओं को भी सशक्त होने की किस््तोों मेंे बैंैक से ऋण लेकर अपनी सवु िधा प्रकार है : - आवश्यकता है। जिसे महिला सशक्तिकरण के अनसु ार घरेलू उद्योग धं धा शुरू कर खदु को रूप मेें हम स्पष्ट समझ सकते है। आत्मनिर््भर बना रही हैंै। महिलाओं करने के लिए • महिला उद्यम निधि योजना सशक्त करने के लिए सरकार ने साल 2013 मेंे • महिला समदृ ्धि योजना महिलाओं के सशक्तिकरण से न सिर््फ \"भारतीय महिला बैैकं \" की भी स्थापना बैैंक की • कल्याणी कार््ड योजना एक महिला सशक्त होती है, बल्कि एक परिवार, थी को बैकंै कि ओर से महिलाओं के लिए एक • बैंकै उद्योगिनी योजना समाज और एक देश भी कहीं न कहीं किसी न और सफल प्रयास था। • महिला उद्यमी के लिए शक्ति योजना किसी रूप से सशक्त महिलाओं को सशक्त होने के लिए उन्हेंह आत्मनिर््भर होना बहुत जरूरी है। बैैंक हमशे ा से लोगों के लिए एक उपरोक्त योजना के तहत आज ग्रामीण प्राथमिक स्तम्भ के रूप मेंे काम कर रही है। क्षेत्रों मेें भी बैैंको द्वारा जागरूकता अभियान महिलाओं को सशक्त होने के लिए उन्हंेह चाहे वह भारतीय अर््थव्यवस्था को मजबूत चलाया जा रह हैंै, जिससे ग्रामीण महिलाएँ भी आत्मनिर््भर होना बहुत जरूरी है। महिलाओं को करना हो या महिलाओं को वित्तीय सहायता अपनी वित्तीय आवश्यकता की पूर््तति कर छोटे- आत्मनिर््भर तभी समझा जाता है जब वह वित्तीय प्रदान कराना हो। बैैंकों ने अपनी हर सेवाओं को बड़़े घरेलू उद्योग धं धों मेंे खदु को सशक्त बना रूप से मजबूत हों इन वित्तीय आवश्यकताओं गांव-गाँ व पहुंुचाने का काम किया है। देश का रही है। इन सभी सशक्त कारगर उपायों से को पूरा करने के लिए महिलाएँ हर क्षेत्र मेें हर वह क्तेष ्र जहां जाने मेंे महिलाएँ सक्षम नहीं महिलाएँ शहर की भागदौड़ से दरू अपनी हर कार््यकु शल हो रही हैंै। होती वहाँ भी बैंैकों ने अपनी सवे ाएं उपलब्ध वित्तीय आवश्यकताओं को पूरी कर रही है। यह करवायी है। बैंकै ों का एक बहुत ही बड़़ा योगदान है। यद्यपि कई ऐसी सं स्थाएँ भी है जो महिलाओं को उनकी आत्मनिर््भरता मेें वित्तीय बैैंकों के इस सफल प्रयास से महिलाओं बैंैकों का यह मानना है सशक्त महिला, सशक्त सहायता प्रदान करने मेें कहीं न कहीं सशक्त की सामाजिक आर््थथिक समानता प्राप्त हुई है। देश “बिजली चमकती है तो आकाश बदल देती बनाने मेें कारगर साबित हुए हैैं। इनमेंे सबसे आज महिलाएँ अपने हर अधिकार का बखूबी है, आँ धी उठती है तो दिन-रात बदल देती है श्रेष्ठ स्थान सार््वजनिक क्षेत्रों के बैकैं ो का है बेंके ों आनं द उठा रही हैंै, क््योोंकि बैंैकों ने उन्हंहे समाज ने महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं मेें वित्तीय सहायता प्रदान एक नई पहचान जब सशक्त होती हैंै नारी, तो इतिहास बदल भी चलाई है, जिसमेंे \"स्वयं सहायता समहू ” दिलायी है। देती हैैं। \"राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बके ार है।\" – अवनीींद्रकु मार विद्यालंकार 11 इं डियन बैंैक, अचं ल कार््यालय य, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

सजं ीव कु मार सिं ह वरिष्ठ प्रबंध््क सिमरी शाखा हिन्दी मीडिया का समाज पर प्रभाव मीडिया का सरल अर््थ है- 'सं चार माध्यम’। प्राय: सं चार का टीवी, इंटरनटे यहाँ तक कि फोन भी शामिल हैंै। एक तरफ अखबार, अर््थ सचू नाओं का विस्तारीकरण कहा जाता है, जिसमेें किसी भी रेडियो टीवी एवं सिनमे ा जैसे सं चार माध्यमों मेें हिन्दी की पकड़ बढ़ी सचू ना, विचार, भाव, चित्र तथा विडियो को दसू रों तक पहुँुचाना ही है वहीं दसू री ओर दनु िया की भाषाओं मेंे इंटरनटे की वजह से हिन्दी सं चार है। एक साथ लाखों तथा करोड़ों लोगों तक जानकारी, सूचना, ने अपनी एक अलग पहचान व जगह बना ली है। सं चार ने कबीले सं देश तथा समाचार का पहुुँचाना ही 'मास कम्यनू िके शन' कहा जाता वाले का नगाड़ा बजाकर या तुरही बजाकर सचू नाएं देना और परिन््दों है जिसे प्राय: मीडिया का नाम दिया गया है। के जरिये चिठ्ठी भजे कर सूचनाओं का आदान-प्रदान करना आदि से आज फे सबकु , इंस्टाग्राम, ट्वीटर, कै मस्कै नर, तथा व्हाट्सएप तक का भारत मेें सदियों से हिन्दी एक 'सं प्रेषण' का प्रभावी माध्यम सफर तय कर लिया है जिसमेें हिन्दी की भूमिका सर्वोपरि है। जैस-े रहा है तथा भारतीय समाज मेें अपना बहुमूल्य स्थान बरकरार रखा जैसे तकनीकी विकास हो रहा है हमारी हिन्दी की महत्ता बढ़ती ही है। हमारे राष्टट्रपिता महात्मा गाधं ी ने कहा था कि - \"राष््टरीय व्यवहार जा रही है। आज हिन्दी मीडिया के बलबूते हमारा समाज ज्यादा मेंे हिन्दी को काम मेें लाना देश की एकता और उन्नति के लिए जागरूक हो गया है। समाज बदल रहा है जिसके साथ-साथ हमारी आवश्यक है। \"भारतीय समाज मेंे प्राचीन काल से ही सूचनाएं आदान- प्रदान किये जाने का माध्यम हिन्दी ही रही है। दरअसल यह हिन्दी ही है, जिसमेें इतनी दरियादिली है कि दसू री भारतीय भाषाओं के शब््दोों को ही नही,ं विदेशी भाषाओं के शब््दोों को भी खुद मेंे समाहित कर लते ी है। इसका परिणाम यह है कि नाम अंग्रेजी मेें होते हैैं और उत्पाद हिन्दी मे।ंे वर््तमान समय मेें 'मीडिया' शब्द का प्रयोग खूब हो रहा है। यहाँ मीडिया का अर््थ कई लोग टी. बी. समाचार (टेलीविजन) से लते े हैंै जबकि मीडिया का आयाम काफी विस्तृत है इसमेें रेडियो, 12 \"हिं दी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्रनिर््ममाण का प्रश्न है।\" – बाबरू ाम सक्ेसना इं ड पाटलिपतु ्र, अकं -5, अक्टू बर 2022 - मार््च 2023

सामाजिक मान्यताएं भी बदल रही है। परम्पराएं भाषाएँ एवं सं स्कृति और एफएम का जन्म हुआ हालाँ कि एफएम के ने एक अद्तभु निरंतर बदलने वाली सभ्यता विकसित कर लिया है आने के बाद रेडियो पर मनोरंजन के आयाम जिसमेें मीडिया की मीडिया की भूमिका ही मुख्य है। “मीडिया विस्तृत होते चले गए। अब सं चार सवे ाएं लोगों ही मेसेज\" के प्रतिपादक सं चार शास्त्री मार््शल मैकलुहान ने अपनी तक चौबीसों घं टे पहुुँचने लगे। प्रत्कये आयु पुस्तक 'अडं रस्टैण््डििंग मीडिया द एक्सट्ेशन ऑफ मनै ' मेें घोषणा की वर््ग के लोगों के लिए विभिन्न कार््यक्रम प्रसारित थी कि आने वाले समय मेंे सं चार माध्यम पूरी दनु िया के साथ-साथ किये जाने लग,े यहाँ तक कि रेलवे तथा मानवीय चेतना को पूरी तरह बदल देंेगे। उन््होोंने यह कहा था कि यातायात सं बं धी सूचनाएं भी घर बैठे लोगों को अख़बार, रेडियो, टीवी, सिनेमा आदि ही नहीं हम स्वयं भी मीडियम मिलने लगे। अब तो इंटरनटे की धूम ने दनु िया हैैं। हमारा मन-मस्तिष्क, हमारी चते ना लगातार अपने को सं प्रेषित की तमाम जानकारियां लोगों की उं गलियों मेंे करती रहती है। मीडिया हमारी चते ना का विस्तार है। मोबाइल फोन के जरिये थमा दी है। अब हिन्दी व अन्य प्रिन्ट मीडिया ई-अखबार का रूप ले वास्तव मेंे हिन्दी मीडिया की स्मृति, परम्परायेें इतनी अधिक लिया है। पहले लोग अखबार का इंतजार सुबह मजबूत है कि वह बिना किसी रुकावट और बदलाव के जरिये अपने या शाम के प्रकाशन का किया करते थे परन्तु अब प्रत्कये क्षण घटने पाठकों श्रोताओं और दर््शकों मेंे आत्मीय नातदे ारी निभाते आ रहा वाली घटनाएँ गूगल के माध्यम से लोगों तक पहुँुच पा रही है। है। मीडिया के क्षेत्र मेें हिन्दी का वर््चस्व का अदं ाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब सं चार माध्यम का क्षेत्र सं कु चित था भारतीय समाज पर हिन्दी मीडिया का प्रभाव जानने के तब सुदरू गाँ व के लोग रेडियो के माध्यम से सचू नाएं प्राप्त करते थे। लिए ज्यादा शोध की आवश्यकता नहीं है। इसे टीवी द्वारा प्रसारित यह एक मनोरंजन का साधन भी था। पहले लोग रेडियो के जरिये धारावाहिक 'रामायण' तथा 'महाभारत' की लोकप्रियता के बारे मेें आकाशवाणी ही नहीं 'रेडियो सीलोन' तथा बी.बी.सी भी सनु ा करते जान कर ही समझा जा सकता है। क्रमशः श्री रामानन्द सागर तथा थ।े गाँ व मेंे रेडियो की ही रौनक थी तथा यही एकमात्र माध्यम था श्री बी आर चोपड़ा ने अपने निर्देशन से भारत के महान धर््म ग्रं थों जिससे ग्रामवासी इकट्ठे होकर चौपाल कार््यक्रम का आनं द लेते थ।े को धारावाहिक के रूप मेें परोसकर भारतीय जनमानस को अपनी यह किसान भाइयों के लिए बहुत ही ज्ञानोपयोगी तथा मनोरंजक धर््म सं स्कृति और अध्यात्म से सीधा जोड़ने का काम किया था। कार््यक्रम था। आकाशवाणी द्वारा प्रसारित विविध भारती, भूले- जनमानस पर इन विद्वानद्वय ने धारावाहिक के माध्यम से सं स्कृति बिसरे गीत, हवामहल, महिलाओं के लिए 'सखी - सहेली' जैसे तथा अध्यात्म की अमिट छाप छोड़ी है। तत्पश्चात् हिन्दी माध्यम मेें इन्फोटेनमेंेट कार््यक्रम ने तो हिन्दी मीडिया मेंे जीवं तता प्रदान की थी। कई ऐसे धरवाहिक प्रसारित किये गए जो भारतीय समाज मेंे भारत हम उन दिनों को याद करेें तो यह पता चलता है कि 'अमीन सयानी' के आदर्शशों तथा मलू ््यों से लोगों को रूबरू कराया है जिसमेें मुख्य हैंै: जैसे सख्श ने तो अपनी प्रस्तुति प्रतिभा के बल पर हिन्दी सं चार धारावाहिक शिवाजी, महाराणा प्रताप, चन्द्रगपु ्त मौर््य आदि। इसके मीडिया मेें क््राांति ला दी थी तथा सं चार क्षेत्र को विकसित होने का अलावा मीडिया मेें सिनमे ा की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया द्वार खोल दिया था। उसके बाद रेडियो मेें श्रोताओं की सं ख्या बढ़ी जा सकता है। हिन्दी सिनेमा ने \"राजा हरिश्चंद\" जैसी महान फिल्म प्रस्तुत कर भारतीय सं स्कृति तथा आदर्शशों से लोगों को रूबरू कराया। जनसं चार माध्यमों मेंे हिन्दी मीडिया ने हमारी सं स्कृति, समाज की चनु ौतियो,ं सं घर््ष, सपने व चाहतों को विश्व फलक पर पहुँुचाया है। हिन्दी मीडिया ने देश दनु िया मेें भारत की समृद्ध परम्पराओं व सं स्कृति को जीवं त करने मेें कोई कसर नहीं छोड़ी है। आज हिन्दी मीडिया साहित्य और सं स्कृति का लोकदतू बनकर इसे पूरे जगत मेंे प्रतिष्ठित करने की दिशा मेें निरंतर अग्रसर है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि जन.माध्यम किसी भी समाज और उसकी भाषा की जीवं तता का पर््ययाय है और वह है 'हिन्दी मीडिया'। \"राष्ट्रीय एकता की कड़़ी हिं दी ही जोड़ सकती है।\" – बालकृ ष्ण शर््ममा नवीन 13 इं डियन बैकैं , अचं ल कार््यायलय, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

हिं दी के प्रसिद्ध ऐ तिहासिक और सांस्कृतिक समदृ ्धि की रचनाएँ आज भी दर््शकों को प्रेरित कवियोों का की भूमि बिहार ने कई प्रसिद्ध करती हैंै और उनका मनोरंजन करती हैैं। परिचय कवियों को जन्म दिया है जिन््होोंने हिंदी और उर्दू साहित्य के विकास मेंे महत्वपूर््ण शमशेर बहादरु सिंह- शमशेर बिजने ्द्र कु मार चौधरी योगदान दिया है। इन कवियों ने न बहादरु सिंह एक प्रसिद्ध उर्दू कवि थे के वल कालातीत बल्कि सार््थक कृ तियों जो 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी प्रबंधक (राजभाषा) का निर््ममाण करने के लिए अपने अद्वितीय की शुरुआत मेें रहते थे। वह अपनी अंचल कार््ययालय पटना दृष्टिकोण और दृष्टि को सामने लाया है। गीतात्मक कविता के लिए जाने जाते बिहार के प्रसिद्ध कवियों का परिचय इस थे जो प्रकृ ति और प्रेम की सं दु रता का प्रकार है :- जश्न मनाती थी। उनकी रचनाएँ , जिनमेें \"फ़सना-ए-अजनबी\" और \"सर-ए- रामधारी सिंह दिनकर- उन्हंहे 20वीं आशोब\" शामिल हैैं, उर्दू कविता के कु छ सदी के महानतम हिंदी कवियों मेें से एक बहे तरीन उदाहरण माने जाते हैैं। माना जाता है। उनकी महाकाव्य कविता \"रश्मिरथी\" जिसका अर््थ \"सूर््यकिरण बाबा नागार््जजुन- बाबा नागार््जजुन 20 रूपी रथ का सवार\" है, हिन्दी के महान वीं शताब्दी के प्रसिद्ध हिन्दी कवि थे। कवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित उन्हंेह उनकी अभिनव लेखन शलै ी और प्रसिद्ध खण्डकाव्य है। यह 1952 मेें जीवन और समाज पर उनके अपरंपरागत प्रकाशित हुआ था। इसमेें 7 सर्ग् हैंै। विचारों के लिए जाना जाता था। उन््होोंने इसमेें कर््ण के चरित्र के सभी पक््षों का \"अमरकं टक\" और \"गिरगिट\" सहित सजीव चित्रण किया गया है।। दिनकर सामाजिक और राजनीतिक मुद््दों से की कविताओं की विशषे ता उनकी सं बं धित कई रचनाएँ लिखेंे। उनकी शक्तिशाली भाषा, विशद कल्पना और कविताएँ आज भी पाठकों को प्रेरित और भावुक देशभक्ति है। चनु ौती देती हैैं। मैथिली शरण गपु ्त - मैथिली शरण महावीर प्रसाद द्विवेदी - महावीर गुप्त एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और नाटककार प्रसाद द्विवदे ी एक प्रसिद्ध हिंदी कवि, थे जो 19वीं सदी के अंत और 20वीं नाटककार और पत्रकार थे, जो 19वीं सदी की शुरुआत मेंे रहते थ।े वह एक सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत बहुमखु ी लखे क थे जिन््होोंने देशभक्ति, मेंे रहे। उन्हंहे उनके आलोचनात्मक और मानवीय मूल््यों और आदर््श जीवन जैसे व्यं ग्य लेखन के लिए जाना जाता था विभिन्न विषयों पर लिखा। उनकी सबसे जो सामाजिक और राजनीतिक मदु ््दों प्रसिद्ध रचनाओं मेें \"कर््मभूमि,\" \"भारत- से निपटता था। उन््होोंने \"नया दौर,\" भक्ति,\" और \"महाकाव्य-चिंतामणि\" \"रामराज्य,\" और \"नवीन भारत\" सहित शामिल हैैं। कई रचनाएँ लिखी,ं जिन्हंहे आज भी व्यापक रूप से पढ़़ा और सराहा जाता शलै चतुर्वेदी- शैल चतरु ्वेदी 20वीं है। शताब्दी के प्रसिद्ध हिंदी कवि और नाटककार थे। वे अपने आलोचनात्मक, इन सभी कवियों ने हिंदी और व्यं ग्यपूर््ण और विनोदी लखे न के लिए उर्दू साहित्य मेें महत्वपूर््ण योगदान दिया जाने जाते थ।े उन््होोंने कई नाटक लिखे है। उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों को जो सामाजिक और राजनीतिक मदु ््दों से प्रेरित करती हैंै और उनका मनोरंजन सं बं धित थे, जिनमेें \"अंधा यगु \" और करती हैंै एवं उनकी विरासतेें आने वाली \"आखिरी कविता\" शामिल हैंै। चतुर्वेदी पीढ़़ियों तक जीवित रहेंेगी। 14 \"देश को एक सूत्र मेंे बाँधे रखने के लिए एक भाषा की आवश्यकता है।\" – सठे गोविं ददास इं ड पाटलिपुत्र, अंक-5, अक्ूट बर 2022 - मार््च 2023

भ ा रत के वीर, जिसे भारत के को मशहूर हस्तियो,ं सार््वजनिक हस्तियों बहादरु ों के रूप मेें भी जाना और यहां तक कि आम नागरिकों से भी जाता है। यह बहादरु भारतीय सैनिकों समर््थन मिला है। इस फं ड को अतं रराष््टरीय के परिवारों का समर््थन करने के लिए मान्यता भी मिली है और शहीद सैनिकों स्थापित एक फं ड है, जिन््होोंने कर््तव्य के के परिवारों का समर््थन करने के प्रयासों दौरान अपने जीवन को न्यौछावर कर के लिए इसकी प्रशं सा की गई है। दिया है। इस कोष की स्थापना 2016 मेंे कश्मीर मेें भारतीय सने ा के ठिकाने पर भारत के वीर टीम सैनिकों की हुए हमले के बाद की गयी थी, जिसमेें बहादरु ी को उजागर करने और शहीद हुए 19 सैनिक शहीद हुए थ।े भारत के वीर सैनिकों के परिवारों का समर््थन करने के के पीछे का विचार सभी क्षेत्रों के लोगों लिए अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने को शहीद सैनिकों के परिवारों मेंे योगदान के लिए नियमित रूप से कार््यक्रमों और करने और उनके बलिदान के लिए समर््थन पहलों का आयोजन करती है। इससे और प्रशं सा दिखाने की अनमु ति देना था। एकत्रित फ़ं ड का उपयोग चिकित्सा, उपचार और पनु र््ववास मेें किया जाता है। यह फं ड भारत के वीर टीम के सहयोग से गहृ मं त्रालय द्वारा बनाया भारत के वीर शहीद सैनिकों के गया था, जिसमेें प्रसिद्ध और सार््वजनिक परिवारों के लिए आशा और समर््थन का हस्तियां भी शामिल हैंै। इसका लक्ष्य प्रतीक बन गया है, और इसने देश भर शहीद सैनिकों के परिवारों को धन दान के लाखों लोगों को सैनिकों द्वारा किए करने के लिए लोगों के लिए एक मं च गए बलिदानों के लिए आभार और प्रशं सा तैयार करना था, साथ ही लोगों को सैनिकों दिखाने के लिए एक साथ आने के लिए द्वारा किए गए बलिदानों के लिए अपना प्रेरित किया है। कोष शहीद सैनिकों के समर््थन और आभार व्यक्त करने का एक परिवारों के लिए आशा की किरण बनकर तरीका प्रदान करना था। यह फं ड गृह आया है। मं त्रालय के मार््गदर््शन मेंे सं चालित होता है और इसका प्रबं धन समर््पपित पेशेवरों की अंत मेे,ं भारत के वीर मतृ भारतीय एक टीम द्वारा किया जाता है। सैनिकों के परिवारों का समर््थन करने और उनके बलिदान के लिए प्रशं सा दिखाने के फं ड मेंे दान आधिकारिक भारत लिए स्थापित एक कोष है। फं ड को देश के वीर वेबसाइट या मोबाइल ऐप और भर के लोगों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली ऑनलाइन पोर््टल सहित विभिन्न अन्य है और यह शहीद सैनिकों के परिवारों के प्ेटल फार्ममों के माध्यम से किया जा सकता लिए आशा और समर््थन का प्रतीक बन है। दान का उपयोग शहीद सैनिकों के गया है। भारत के वीर सामूहिक कार्रवाई परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की शक्ति और उस प्रभाव का एक ज्वलं त के लिए किया जाता है, जिसमेंे उनके उदाहरण है जो आम लोगों पर हो सकता बच््चोों की शिक्षा और उनकी दैनिक है जब वे एक महान कारण का समर््थन जरूरतों के लिए सहायता शामिल है। करने के लिए एक साथ आते हैंै। भारत के वीर को देश भर के लोगों से शेलेन्द्र कु मार झा जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, हजारों लोग हर दिन फं ड मेंे योगदान दे रहे हैैं। फं ड प्रबधं क पत्रकार नगर शाखा \"इस विशाल प्रदेश के हर भाग मेें शिक्षित-अशिक्षित, नागरिक और ग्रामीण सभी हिं दी को समझते हैंै।\" – राहुल सांकृ त्यायन 15 इं डियन बैैकं , अचं ल कार््ययालय, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

मैैं और मरे ा परिवार लं बे समय से शिलागं जाने की योजना शिलांग बना रहे थे और आखिरकार वह दिन आ ही गया। हम सबु ह की शिलांग पहुंुचे और जैसे ही हमने हवाईअड्ेड से बाहर कदम रखा, यात्रा हमारा स्वागत ताज़़ी पहाड़़ी हवाओं ने किया जिसने हम सभी ने स्फूर््ततिवान महसूस कराया। हमारा पहला पड़़ाव खूबसूरत उमियम चंदन कु मार झील थी, जो हरी-भरी पहाड़़ियों और साफ नीले आसमान से घिरी हुई थी। उस जगह की शांति लभु ावनी थी और हम बस परिदृश्य सहायक प्रबधं क की सं ुदरता को निहारते हुए घं टों बिताते रहे। न्यू पाटलिपुत्र शाखा इसके बाद, हम प्रसिद्ध शिलांग शिखर की ओर बढ़़े, जिसने पूरे शहर के मनोरम दृश्य प्रस्तुत किए। चढ़़ाई थोड़़ी चुनौतीपूर््ण थी, लके िन ऊपर से लुभावने दृश््योों ने हर कदम को इसके लायक बना दिया। हमने उस पल को यादगार बनाने के लिए कई तस्वीरेंे लीं और एक परिवार के रूप मेंे एक साथ कु छ अच्छा समय बिताया। उसके बाद, हम डॉन बॉस्को सं ग्रहालय गए, जिसने शहर की समदृ ्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर््शशित किया। हम पारंपरिक परिधानों को देखकर आश्चर््य चकित रह गए। सं ग्रहालय मेें मेघालय की प्रसिद्ध गुफाओं को समर््पपित एक खं ड भी था, जिसे देखकर हम काफी उत्साहित हो गए। लभु ावनी सं दु र स्टैलके ्टाइट्स के साथ मेघालय की गफु ाएं देखने लायक थी।ं हमने गुफाओं का दौरा किया और इन प्राकृ तिक अजूबों के इतिहास और गठन के बारे मेंे जाना। दिन भर की खोजबीन के बाद, हम कु छ पारंपरिक मेघालयन व्यंजनों के लिए एक स्थानीय होटल मेें गए जिसके जायके अनोखे थे और हमने इसका आनं द लिया। हमेंे कु छ स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करने और उनकी सं स्कृति और जीवन के तरीके के बारे मेें जानने का अवसर भी मिला। अगले दिन, हम एलिफेें ट फॉल््स की ओर बढ़े़, जो हरे-भरे जं गलों के बीच झरने वाले झरनों की एक श्ंृर्खला थी। पानी के नीचे गिरने की आवाज सखु दायक थी और हमने उस जगह की सं ुदरता मेंे डूबने मेें घं टों बिताए। अंत में,े शिलागं की हमारी यात्रा समाप्त हो गई, और हम भारी मन और जीवन भर की यादों के साथ घर वापस आ गए। हमारी यात्रा रोमाचं , सं स्कृति और विश्राम का एक आदर््श मिश्रण था। शिलांग अपने आश्चर््यजनक परिदृश्य, समदृ ्ध सासं ्कृतिक विरासत और मैत्रीपूर््ण स्थानीय लोगों के साथ वास्तव मेें एक जादईु जगह है। मैैं और मेरा परिवार इस खूबसरू त शहर का भ्रमण करके अविश्वसनीय रूप से भाग्यशाली महसूस कर रहे थे एवं इसी के साथ हमारी शिलोगं की यात्रा समाप्त हुई। 16 \"समस्त आर््ययावर््त या ठेठ हिं दुस्तान की राष्ट्र तथा शिष्ट भाषा हिं दी या हिं दुस्तानी है।\" – सर जार््ज ग्रियर््स इं ड पाटलिपुत्र, अकं -5, अक्ूट बर 2022 - मार््च 2023

रोहित रंजन वरिष्ठ प्रबधं क अचं ल कार््ययालय पटना सेटंे ्रल बैैंक डिजिटल करेसंे ी (CBDC) भ ा रतीय रिजर््व बैंैक (RBI) ने हाल ही मेंे डिजिटल मुद्राओं की वर््तमान मेंे बिना बैकैं या कम बैैंक वाले हैंै। बढ़ती मांग और वित्तीय क्तेष ्र मेें तकनीकी प्रगति की तीव्र गति के जवाब मेंे भारत मेें एक सेटंे ््रल बैकंै डिजिटल करेंेसी (CBDC) लॉन्च सीबीडीसी से भी डिजिटल लेन-देन और भुगतान के लिए की है। CBDC को पारंपरिक भौतिक मुद्राओं के लिए एक सरु क्षित और एक सरु क्षित और सुविधाजनक मं च प्रदान करके भारतीय डिजिटल सवु िधाजनक विकल्प प्रदान करने और भारत मेंे कै शलेस और डिजिटल अर््थव्यवस्था के विकास का समर््थन करने की उम्मीद है। यह छोटे और अर््थव्यवस्था के विकास का समर््थन करने के लिए डिज़़ाइन किया गया है। मध्यम आकार के उद्यमों के लिए डिजिटल वॉलेट और डिजिटल वित्तीय सवे ाओं जैसे नए डिजिटल वित्तीय उत्पादों और सवे ाओं के विकास के लिए RBI का CBDC ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है, जो मुद्रा एक आधार प्रदान करेगा। के डिजिटल विनिमय के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी मं च प्रदान करता है। CBDC को अन्य डिजिटल मदु ्राओं और वित्तीय प्रणालियों के साथ इसके लॉन्च से जडु ़़ी कु छ चनु ौतियाँ भी हैंै। मुख्य चनु ौतियों मेंे से पूरी तरह से इंटरऑपरेबल होने के लिए भी डिज़़ाइन किया गया है, जो एक यह सुनिश्चित करना है कि CBDC को बड़़ी सं ख्या मेंे लोगों द्वारा विभिन्न प्टेल फार्ममों पर सहज और कु शल लेनदेन की अनुमति देता है। अपनाया और उपयोग किया जाता है, जिनमेें वे लोग भी शामिल हैैं जो आरबीआई के सीबीडीसी के प्रमखु लाभों मेें से एक यह है कि यह भौतिक वर््तमान मेें बिना बैकंै या कम बैंकै वाले हैंै। इस चनु ौती से उबरने के लिए, मुद्राओं के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प प्रदान करता है, जो आरबीआई को सीबीडीसी के लाभों और इसका उपयोग करने के तरीके जालसाजी और अन्य प्रकार की धोखाधड़़ी के लिए प्रवण हैंै। सीबीडीसी के बारे मेें लोगों को शिक्षित करने के लिए एक व्यापक जागरूकता और मदु ्रा विनिमय मेें बैकैं ों और अन्य वित्तीय सं स्थानों की आवश्यकता को शिक्षा अभियान शुरू करने की आवश्यकता होगी। सीबीडीसी की शरु ुआत भी समाप्त करता है, इस प्रकार धोखाधड़़ी के जोखिम को कम करता है भारत मेें कै शलसे और डिजिटल अर््थव्यवस्था के विकास की दिशा मेें एक और लने देन की गति और दक्षता मेंे वृद्धि करता है। सीबीडीसी को सभी बड़़ा कदम है। इसे वित्तीय समावेशन और वित्तीय सेवाओं तक पहुुंच को नागरिकों के लिए वित्तीय समावेशन और वित्तीय सवे ाओं तक पहुंुच को बढ़़ावा देने और डिजिटल अर््थव्यवस्था के विकास का समर््थन करने के बढ़़ावा देने के लिए भी डिज़़ाइन किया गया है, भले ही उनका स्थान या लिए भौतिक मदु ्राओं के लिए एक सरु क्षित और सुविधाजनक विकल्प वित्तीय स्थिति कु छ भी हो सीबीडीसी उन लोगों को पारंपरिक वित्तीय प्रदान करने के लिए डिज़़ाइन किया गया है जो भविष्य मेंे लोगो के लिए सं स्थानों पर भरोसा किए बिना बनु ियादी बैैंकिं ग सवे ाओं और डिजिटल बहुत ही उपयोगी रहेगा। भगु तान सहित वित्तीय सेवाओं का उपयोग करने की अनमु ति देगा जो \"भारत की परंपरागत राष्ट्रभाषा हिं दी है।\" – नलिनविलोचन शर््माम 17 इं डियन बैैकं , अंचल कार््यलाययालय, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

नितीश कु मार प्रबधं क अंचल कार््ययालय पटना सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ स ा माजिक सुरक्षा एक ऐसी प्रणाली है जिसमेें सरकार अपने नागरिकों को जरूरत पड़ने पर वित्तीय और अन्य सहायता प्रदान करती है। भारत सरकार ने अपने नागरिको,ं विशेष रूप से समाज के गरीब और कमजोर वर्गगों को वित्तीय सरु क्षा प्रदान करने के उद्ेदश्य से विभिन्न सामाजिक सरु क्षा योजनाओं को लागू किया है। इस निबं ध मेें, मैंै भारत सरकार द्वारा लागू की गई कु छ सामाजिक सरु क्षा योजनाओं और उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभों से अवगत कराना चाहूूंगा। भारत मेंे सबसे लोकप्रिय सामाजिक सरु क्षा योजनाओं मेंे से है। यह योजना बीमारी, चोट या मतृ ्ुय के मामले मेें कर््मचारियों और एक कर््मचारी भविष्य निधि सं गठन (ईपीएफओ) है। यह सं गठित उनके परिवारों को चिकित्सा लाभ, नकद लाभ और विकलागं ता क्षेत्र के सभी कर््मचारियों के लिए एक अनिवार््य बचत योजना है, लाभ प्रदान करती है। इस योजना को कर््मचारियों और नियोक्ताओं जहां कर््मचारी के वते न का एक हिस्सा काटकर उनके ईपीएफओ दोनों के योगदान से वित्तपोषित किया जाता है। खाते मेंे जमा किया जाता है। नियोक्ता द्वारा किया गया योगदान भी कर््मचारी द्वारा किए गए योगदान के बराबर है। सं चित राशि का किसानों के लिए सरकार ने प्रधानमं त्री फसल बीमा योजना उपयोग कर््मचारी द्वारा सेवानिवतृ ्ति के बाद, मृत्यु के मामले मेंे, या (पीएमएफबीवाई) लागू की है। यह योजना सूखा, बाढ़ और बरे ोजगारी के दौरान किया जा सकता है। ओलावृष्टि जैसी प्राकृ तिक आपदाओं के कारण फसलों के नकु सान के लिए किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करती है। इस योजना मेंे खाद्य और तिलहन दोनों फसलेें शामिल हैैं, और बीमा के लिए प्रीमियम किसान और सरकार के बीच साझा किया जाता है। सं गठित क्तेष ्र मेंे श्रमिकों को वित्तीय सरु क्षा प्रदान करने के उद्ेदश्य से एक अन्य योजना कर््मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना 18 \"भारतीय सभ्यता की अविरल धारा प्रमुख रूप से हिन्दी भाषा से ही जीवतं तथा सरु क्षित रह पाई है।\" – अमित शाह (गहृ मंत्री) इं ड पाटलिपतु ्र, अकं -5, अक्ूट बर 2022 - मार््च 2023

सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के महिलाओं के लिए सरकार ने प्रधानमं त्री मातृ वं दना योजना उद्देश्य से पेंेशन योजनाओं को भी लागू किया है। राष््टरीय पेेशं न (पीएमएमवीवाई) लागू की है। यह योजना गर््भवती और स्तनपान प्रणाली (एनपीएस) एक परिभाषित अंशदान पेेंशन योजना है जिसका कराने वाली महिलाओं को गर््भभावस्था और प्रसव के दौरान होने वाले उद्ेदश्य सेवानिवृत्ति के बाद नागरिकों को नियमित आय प्रदान करना खर्चचों को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह है। यह योजना सभी नागरिकों के लिए खलु ी है। भारत सरकार के योजना सभी गर््भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं नए दिशानिर्देश के अनुसार इसमे सरकारी विभाग के कर््मचारियों का के लिए खलु ी है, इसमे वित्तीय सहायता सिर््फ नकद लाभ के रूप मेंे योगदान 10% एवं भारत सरकार का योगदान 14% है। प्रदान की जाती है। सरकार ने विधवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्ेदश्य से योजनाओं को भी लागू किया है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेेशं न योजना गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली विधवाओं को मासिक पेंशे न प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य विधवाओं को वित्तीय सरु क्षा प्रदान करना और उन्हहंे एक सम्मानित जीवन जीने मेें सक्षम बनाना है। अलग-अलग विकलांग व्यक्तियों के लिए सरकार एक अन्य पेशें न योजना अटल पेंशे न योजना (APY) है, ने राष्ट्रीय विकलांग वित्त और विकास निगम (एनएचएफडीसी) लागू जिसका उद्देश्य असं गठित क्तषे ्र को पेशंे न लाभ प्रदान करना है। यह किया है। यह योजना विकलांग व्यक्तियों को सहायक उपकरणों को योजना 18 से 40 वर््ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए खलु ी है, प्राप्त करने और कौशल विकास के लिए किए गए खर्चचों को पूरा करने और सरकार इस योजना मेंे सह-योगदान प्रदान करती है। के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। अतं तः भारत सरकार ने अपने नागरिकों को वित्तीय सरु क्षा प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक सरु क्षा योजनाओं को लागू किया है। ये योजनाएँ कर््मचारियो,ं किसानो,ं वरिष्ठ नागरिको,ं महिलाओ,ं विधवाओं और अलग-अलग विकलांग व्यक्तियों सहित समाज के विभिन्न वर्गगों को भिन्न-भिन्न लाभ प्रदान करती हैंै। ये योजनाएं पेंेशन, बीमा कवरेज, नकद लाभ और कौशल विकास के लिए वित्तीय सहायता के रूप मेंे वित्तीय सहायता प्रदान करती हैैं। इन योजनाओं के कार््ययान्वयन ने नागरिकों की वित्तीय सरु क्षा मेें सधु ार करने मेें मदद की है और उन्हहंे एक सम्मानित जीवन जीने मेें सक्षम बनाया है। \"हिन्दी भाषा एक ऐसी सार््वजनिक भाषा है, जिसे बिना भदे -भाव प्रत्ेकय भारतीय ग्रहण कर सकता है।\" – मदन मोहन मालवीय 19 इं डियन बैंैक, अचं ल कार््ययालय, पटना की छमाही हिं दी गृह पत्रिका

बाल कलम से चीींटीयोों की कै न्डी शौर््य सुमन ए क समय की बात है, लखनऊ मेंे 7 साल का स्कू ल का गार्गी है। हा हा हा हा मैैं सबको बता गार्गी रहता था। एक दिन, वह स्कू ल गया दंगू ा। फिर सब तमु पर हसेेगं े। कैैं डी ने चिल्लाकर पुत्र : सुमन कु मार, मखु ्य प्रबधं क, जब वह लौटा, यह क्या उसके माता-पिता बाजार कहा कि तुम यहाँ से निकलो। अगले दिन जब कैैं डी अचं ल कार््ययालय पटना से एक तोता लाए थ।े वह बहुत खशू हुआ था। स्कू ल गया तो कोको ने खबर फै लायी कि गार्गी का अगले दिन स्कू ल मे,ंे वह अपने दोस््तोों को अपने घर नाम कैैं डी है। धीरे-धीरे यह खबर सारे बच््चोों तक बुलाया। जब वह घर लौटा, उसने अपने दोस्त का पहुच गई। ईधर उधर चलती चिटीयों को भी यह इंतज़ार करने के बाद, वह खले ने चल गया। जब बात पता चल गई। ये क्या चिटीयों के कान खड़े कोको आया, गार्गी की मम्मी ने दरवाजा खोला। हो गए आखिर कैंै डी है कहाँ ? मझु े भी खानी है कोको कहा, मैंै गार्गी का दोस्त कोको हूँू। गार्गी तो कैैं डी, फिर सारी चिटीयां कैंै डी कि खोज मेंे निकाल अभी खले ने गया है। तमु इंतज़ार करो अभी माँ ने पड़ी। कैंै डी ढूंढते ढूंढते छुट्टी का समय हो गया परंतु कहा। क्या मैैं तोते से खेल सकता हूूँ ? हाँ बिल्कु ल। चिटीयों को कैंै डी नहीं मिली। तभी घं टी बजी और माँ गार्गी को आवाज लगाती हुई चली गई।तुम्हारा ममै ने सारे बच््चोों को लाइन मेंे खड़े होकर चलने नाम क्या है? मेरा नाम मिट्ठू है। तुम्हारा नाम क्या के लिए बोलने लगी। बच्चे लाइन बनाकर क्लास है? तोता पूछा। मेरा नाम कोको है। से बाहर जाने लगे। केें डी के लालच मेें चिटीयां भी लाइन मेें चलने लगी। देखो कै न्डी कै न्डी कै न्डी कै न्डी कै न्डी ओह ! कोको तमु आ गए। तुम्हहें तोता कै सा लगा ? अच्छा तो कैम्पस मेंे पहुुँचने पर चिटीयों को सच मेंे एक कैैं डी लगा पर जब तमु आए, तब तुम्हारा तोता कै न्डी मिली। सारी चिटीयां उस पर टूट पड़ी और फिर कै न्डी क््यों बोल रहा था ? सबने बड़े मजे से कै न्डी खाई तभी से चीटं िया लाइन मेंे चलने लगी। (पूरे घर मेें सन्नाटा छा गया कु छ देर बाद कै न्डी ने कहा की) असल मेंे मेरा घर का नाम कै न्डी है और 20 \"अपनी सरलता के कारण हिं दी प्रवासी भाइयोों की स्वत: राष्ट्रभाषा हो गई।\" – भवानीदयाल सनं ्यासी इं ड पाटलिपतु ्र, अकं -5, अक्ूट बर 2022 - मार््च 2023

पेड़ लगाओ, पड़े लगाओ, पेड़ जन जीवन को बचाओ। पड़े लगाओ, पेड़ लगाओ, लगाओ जीवन को सरु क्षित बनाओ। हमने है बहुत बिगाड़ा, स्नहे ा सुमन पर न है कभी सुधारा। सोच भी न पाए उस सोच को, पतु ्री – सुमन कु मार, मुख्य प्रबंधक जो सोच पाए की पड़े भी था लगाना। अंचल कार््ययालय पटना जं गल थे गये कटत,े साल है जा रहे घटते। राते थी सुहावनी, अब वही बन जा रही डरावनी। जहाँ था हर ओर सखु , वहां भी है अब सिर््फ दःु ख। सभी पेड़ो की खुशहाली, अब है कटने वाली। पड़े लगाओ, पड़े लगाओ, धरती पर हरियाली लाओ, पड़े लगाओ, पड़े लगाओ, सबको प्रदषु ण से मकु ्त कराओ। आयषु ी सिं ह पुत्री - कु मारी निशा, प्रबंधक अंचल कार््ययालय पटना \"भारतीय एकता के लक्ष्य का साधन हिं दी भाषा का प्रचार है।\" – टी. माधवराव 21 इं डियन बैंकै , अचं ल कार््यायलय, पटना की छमाही हिं दी गृह पत्रिका

स्नेहा आधुनिकता और बचपन : कै से करेंे हैप्पी पैरेंेटिं ग प्रबधं क (ऋण) अचं ल कार््ययालय पटना 21वी शताब्दी के आधुनिक युग मेंे जहां ऐसी ने ले ली है। तकनीकी विकास मेें खो जाने नहीं काबिल होने के लिए पढ़़ो कामयाबी हर तरफ तकनीक और डिजिटाइजेशन की बात के कारण बचपन की स्वाभाविकता कम होती चलकर आएगी। हो रही है। हर दिन तकनीक के क्षेत्र मेें नई- जा रही है। माता-पिता अपने व्यस्तता के कारण नई उपलब्धियां और विज्ञान के नए नए स्वरूप बच््चोों को समय देने मेें असमर््थ है जिसके कारण 4. आउटडोर एक्सस्ट्रा करिकु लर एक्टिविटी निखर कर सामने आ रहे हैंै। रोबोटिक प्रोसेस बच्चे अधिक रूप से इलके ््टरॉनिक गैजेट पर निर््भर मेें इंगजे कराएं : हमारा सतत प्रयास ऑटोमशे न, वर््चचुअल रियलिटी, आर््टटिफिशियल हो गए हैंै जिसका अत्याधिक उपयोग न के वल रहना चाहिए कि हम बच््चोों को स्कू ल के इंटेलिजेेसं और ऑगमेंटे ेड रियलिटी के इस युग उनके लिए शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप अलावा स्पोर्टट्स एक्टिविटी जैसे बास्के टबॉल, मेंे आज जहां माता-पिता दोनों ही वर््किंिग हैैं और से भी हानिकारक है। बैडमिंटन, फु टबॉल, लॉन टेनिस, क्रिके ट तकनीक मेंे इतनी आश्रित हैैं कि राइम सनु ने और पिट्ूट इत्यादि मेंे रुचि अनुसार सं गीत, डासं , टीवी चलाने के लिए भी हम अलके ्सा को पकु ारते आइए इस समस्या से निकलने के लिए प््रििंटिगं , इंस्टर्ुमेंेटल म्यजू िक इत्यादि जैसे हैंै। जन्म लेते ही जहां आज के बच्चे मोबाइल और और अपने नौनिहालों को हंसता हुआ स्वस्थ एक्टिविटी मेें भी व्यस्त कराएं । टेबलटे के स्क्रीन स्वीपिंग मेंे एक्सपरे ््ट हो चलेें हैंै बचपन देने के लिए कु छ बिंदओु ं को अपनाते हैंै :- ऐसे यगु मेें हमेंे अपने बच््चोों को वास्तविक दनु िया 5. ग्ररैंडपरे ेेंट्स का साथ : जहां आज दोनों माता- की सैर कै से कराएं यह शायद मेरे जैसे असं ख्य 1. बच््चोों को समय देें: घर और ऑफिस पिता कामकाजी है वहां अगर दादा-दादी या माता-पिता के लिए चिंता का विषय बन गया है। दोनों की अपनी-अपनी प्राथमिकता है। नाना-नानी का साथ मिल जाए तो इससे कामकाजी माता-पिता कोशिश करेें कि छुट्टी बड़़ा उपहार हम अपने बच््चोों को नहीं दे मझु े याद आता है अपना वह बचपन, जहां के दिन अपने बच््चोों के लिए रखेें और आम सकते, परिवार के साथ रहने का प्रयास करेंे माँ की लोरियां और दादी नानी की कहानियां होती दिनों मेंे भी समय निकालकर सुनिश्चित करेें और यदि किसी परिस्थितियों मेें यह सं भव थी, वो गर्मी की छुट्टियों मेंे नानी दादी के घर पर कि अपने बच््चोों से हेल्दी कन्वर्सेशन करेंे और नहीं हो तो प्रयास करेें कि उन्हेंह छुट्टियों मेें जाकर आम के बगीचों मेंे हमारा खेलना, शाम बातो-ं बातों मेंे ही नैतिक शिक्षा और ज्ञान की अवश्यक उनके साथ रहने का अवसर मिले। होते ही पिट्ूट, क्रिके ट, पकड़म पकड़़ाई और पतं ग बातेें सिखाए। उड़़ाना होता था। जब बिजली चली जाती थी 6. सकारात्मक सोच : किसी भी परिस्थिति मेें तो आं खों मेें चमक होती थी और घर के बरामदे 2. तकनीकी उपकरण से दरू ी : यह सुनिश्चित सदैव सकारात्मक सोच सोचें।े हम जो हैंै मेें और छतों पर प्रकृ ति की शदु ्ध हवा का आनं द करेें कि आप स्वयं कम से कम इलेक्ट्रॉनिक उससे कई गुना बेहतर हमेें अपने बच््चोों को होता था। गैजटे का इस्तेमाल करेें और बच््चोों को भी बनाना है इस सोच के साथ ही हमेंे अपने के वल ज्ञानवर््धन हेतु सीमित समय अवधि हर कदम बढ़़ाना चाहिए। हैप्पी पैरंट्स मके ्स परिवर््तन सं सार का नियम है और समय के के लिए ही उपयोग करने देें। हैप्पी चाइल्ड सोच के साथ हर दिन अपने साथ बदलाव आवश्यक भी है। तकनीकी विकास बच््चोों मेंे अच्ेछ सं स्कार के बीज बोएँ और के बढ़ते हुए कदम और स्मार््टफोन के जमाने मेंे 3. अपेक्षा कम रखेें : कड़ी प्रतिस्पर््धधा के इस युग उन्हेंह फलता फू लता हुआ देखेंे। हमारे बच््चोों को हाईटेक बना दिया है किं तु इन मेें अत्यधिक अपके ्षा और अपनी महत्वाकांक्षा हाईटेक बच््चोों के जीवन मेें खेल खिलौने गडु ्ेड अपने बच््चोों पर ना डालेंे। हर बच्चा अपने मुझे आशा है कि मेरे सहकर्मी जो मुझसे गुड़़िया, कै रम, चसे , लूडो और आम के बगीचों आप मेें विशेष गणु ों के साथ जन्म लेता किसी बिंदु पर रीलटे कर पा रहे हैैं उनके लिए यह की जगह मोबाइल, कं प्ूयटर, वीडियो गमे और है उनके गुणों को कौशल को समझेंे और लखे सहायक साबित होगा। निखारने का प्रयत्न करेंे। 3 इडियट फिल्म की बात याद रखेें कि कामयाब होने के लिए 22 \"हिन्दी राष्ट्रीयता के मलू को सीींचती है और उसे दृढ़ करती है।\" – पुरुषोत्तम दास टंडन इं ड पाटलिपतु ्र, अंक-5, अक्टू बर 2022 - मार्च् 2023

पवित्तर बैकंै िं ग पता नहीं साहेब हमसे कै से ख़फ़ा हो गये वसूली का दौर था, पहले दर-दर भटका देखते ही देखते हम मं डलीय कार््ययालय से जदु ा हो गये कोई समझने को तैयार नहीं तो कोई देने को तैयार नहीं कु छ हो न हो खुद को खुदा मानने का दौर है मामला वहीं जा कर अटका बड़े दफ़्तर का आनन्द ही कु छ और है। एक को तो गरीब समझ कर हड़काया किसी ने समझाया किसी ने रुलाया उसने टूटपूं जिये नेता से मिल कर मेरी औकात दिखलाया अगले ही पल नयी ब््रांच के दफ्तरी का फ़ोन आया सोचा बिना अभिवादन उत्साहित उसने बताया क््यों अपना दिल जलाऊँ रोज दो सौ ग्राम खून भी सखु ाऊँ सुना है साहेब आप हमरे यहाँ आने वाले हैैं जैसे वहाँ से हुक्म देता है अरे हम परमेश्वर हैैं आज कल वही अपनाता हूँू हम ही तो आपका साथ निभाने वाले हैंै। O/L है न बड़ी मशु ्किल पहला दिन काट पाया उसी से बैंैक को थोड़ा चनु ा रोज ब रोज लगाता हूँू। अगले ही दिन मं डलीय कार््ययालय का पत्र पाया जैसे-जैसे दिन गजु र जाने लगे गाँ वों मेंे हम थे ये क्या कम था बच्चे तो क्या नाना दादी भी याद आने लगे जिस बात पर चिट्ठी मिली अब तो एक ही सहारा है उस पर मेरे हस्ताक्षर थे इसी बात का गम था। शाखा के अंदर और बाहर परमेश्वर के नाम से ही गुजारा है। अगले दिन सुबह-सबु ह किसी ने दरवाज़ा खड़खड़ाया पूछने पर अपना नाम पवित्तर बतलाया बोला साहेब हम फलाने गाँ व से आते है काम जो भी हो बड़ी ईमानदारी से निभाते हैंै कई दफ़ा सं कट से शाखा को बचाया है तभी तो शाखा का हनुमान कहलाया है। ओम प्रकाश सिं ह शाखा प्रबंधक पाटलिपतु ्र कॉलोनी शाखा \"हिन्दी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्त्रोत है।\" – समु ित्रानदं न पंत 23 इं डियन बैैंक, अचं ल कार््ययला य, पटना की छमाही हिं दी गृह पत्रिका

फिर कु छ ढूँढ़ता रह गया नितीश कु मार एक इजाजत लेनी थी भूलने की सोचता रह गया अपने हर मकु ाम पर तझु को ढूँढ़ता चला गया। प्रबधं क अचं ल कार््ययालय पटना कठिन होता है हर सवाल गजु रे वक़्त के साथ जवाब अपने साथ हमेशा शनू ्य समटे ता चला गया। हम मचलते रहे अपनी हर जिद पर बच््चोों की तरह नीदं मेंे मसु ्कु राते बच्चे की तरह ख्वाब देखता चला गया। हर चाहत कठिन से लगे जब-जब वक़्त ने दरू किया खुशबुओं के असर देखो वक़्त करीब लाता चला गया। वक़्त के वक्र दिल से बहे तर कौन सम्हाल सकता है ये दिल तमु ्हारी आस मेंे बहलता चला गया। मोह ने जब-जब छल किये वक़्त ने भी मजे लिये रौशनी से दरू जगु नओु ं से राह माँ गता चला गया। का कहीं ए मन कोई सुनत नइखे कु छुवो कह के हू स कोई बुझत नइखे दोसरा दिन का बात मत पूछ ऐ मन का कहीीं बुझाता जिंदगी मेंे कौनो सामत आइल बा फील्ड के मामला रहे, आपन आ बैैकं के एक्ेक साथ निपटइनी ए मन बानी जब बैैकं मेें त गिनजन लिखाईल बा। जिये के रहे त कु छ खाना हमरो नाम से बनके आइल बा विवके नारायण बहुत कु छ सोच के जूता चमकइनी बानी बैंकै मेंे त गिनजन लिखाईल बा। सहायक प्रबधं क सी ए पी सी पटना हाथ गोड जोड के भगवान के मनइनी का कही,ं एहिजा के मौसम बड़ा खुशगवार बा चलनी बन ठन के बड़का दफ्तर काम कु छ कम रहे आउ आज दिन एतवार बा सोचह तानी जिंदगी कु छ अँजरु ी मेें भीच लीं त हुआँ से हजार कोस दरू ब््रांच मेंे फेें कइनी। गइनी ब््रांच खोजे त एगो मड़ई भटे ाईल सप्ताह भर के कपड़वा आजेह फीच ली।ं कहे लागल लोग आई साहेब आई बियाहे के बा बेटी त उनको एक चकर भजे द सोचे लगनी कि रहेम कहाँ बरतुहारी के चकर मेें हम दरू जाईब त ले कौनो मीरतुनजय नजर आइल। लईकी के बाबू आपन आँ खेें देखइहेंे त उनको कु छ बझु ाई कहले मीरतुनजय अब त हिएँ रहे के बा हमर त गिनजन लिखले बा कु छ उनको लिखाई। दू चार गो फाईल छोड के गइल बाडे़ पिछलका साहेब एगो देहि मेंे एक्ेक गो इनजन समाइल बा उहे धीरे-धीरे निपटाइं, मरे के त बड़ले बा कहे के तू कु छवो कह ससरु लॉगिन डे भी अब शरमाईल बा काल्ह से कु छ काम करेम चलीं कु छ खाईं। आन्हर भइले कु ल बड़का साहिब, मीरतुनजय हो बानी बैकैं मेंे त गिनजन लिखाईल बा। 24 \"अपनी सरलता के कारण हिं दी प्रवासी भाइयोों की स्वत: राष्ट्रभाषा हो गई।\" – भवानीदयाल संन्यासी इं ड पाटलिपुत्र, अकं -5, अक्टू बर 2022 - मार्च् 2023

हिं दी भाषा कु मारी निशा हिंदी भाषा नहीं भावों की, अभिव्यक्ति है। प्रबधं क जनमानस के सं वाद वाहन की शक्ति है। अंचल कार््ययालय पटना यह कर््ण प्रिय है, श्रवण मे,ें और सरल है, वाचन मेंे हिंदी भाषा नहीं भावों की, अभिव्यक्ति है। बाकी भाषा को रखा, मैंैने महज किताबों मे।ंे के वल हिंदी को रखा हर जगह अपनी भावों मेें। हिंदी भाषा नहीं भावों की, अभिव्यक्ति है। उत्तर को दक्षिण से पूरब को पश्चिम से सच कहूँू तो एक गाँ ठ मेें पिरोने की यकु ्ति है। यह मातृभूमि पर मर मिटने की भक्ति है। हिंदी भाषा नहीं भावों की, अभिव्यक्ति है। शशि चंद्र भूषण उसकी याद प्रबंधक उसकी याद सुहानी पूर््व जैसी भोर कि पहली किरण कि तरह बुद्ध मार््ग तरै ती हुई आती है खिड़की के पार मरे े कमरे मेें मेरी निस्तेज अलसाई आखों पर देती है अपने रेशमी स्पर््श कि स्ेहन ील थपकी भर देती है मुझ मेें ऊर््जजा, तेज और ओझ उठ जाता हूूँ मैंै पूरे दिन के सं कटों से सं घर््ष करने के लिए तत्पर भोर कि पहली किरण, किरण नहीं मेरे लिए मरे े लिए है मरे ा,आस्तित्व मय जीवन। \"मैैं दुनिया की सभी भाषाओं की इज्जत करता हूंू पर मेरे देश मेें हिं दी की इज्जत न हो, यह मैैं सह नहीीं सकता।\" – आचार््य विनोबा भावे 25 इं डियन बैंकै , अंचल कार््यायलय, पटना की छमाही हिं दी गृह पत्रिका

दिखावटी (D) पन (P) = DP चलो DP सजाते है प्रसनू कु मार त्रिपाठी फिर से अपनी हक़ीक़त छुपाते है वरिष्ठ प्रबंधक नकली मसु ्कान के साथ अंचल कार््ययालय पटना अपनी खूबसरू त profile बनाते है चलो छोड़ो DP के लायक चहे रा नहीं तो status ही update करते है अपनी खोख््लली ज्ञान लोगों को पिलाते है भगवान का दिया हर अक्स खबु सूरत है चलो चेहरे के सारे natural ऐब photo app से छुपाते है अलग-अलग pose मेंे अपना selfie खिं चवाते है क्योकि हम अब social media मेें हर रोज Like के लिये अपना DP सजाते है लोगों से sentimantal touch छूट गया तो क्या हुआ Social media मेंे ही हम अपना पूरा रिश्ता, दोस्ती, त्यौहार और समाज निभाते है Happy Birthday से ले कर अपना मरण दिवस तक celebrate करते है हम अपनी life mobile पर चिपक कर पूरी कर लते े है अब रिश््तोों और दोस्ती मेंे चाय वाली गरमाहट नहीं बची तो क्या हुआ Social site वाला हर रोज अब जाने अनजाने, अपने पराय का सारा important समय याद दिलाते है इस कम्बख्त mobile पर ही आँ ख पत्थर हो चूकी है सारी भावना emoji हो चकू ी है चलो फिर से नया चहे रा ढूंढ कर लाते है फिर से अपना नया DP बनाते है 26 \"जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य का गौरव का अनुभव नहीीं है, वह उन्नत नहीीं हो सकता।\" – डॉ. राजेंेद्र प्रसाद इं ड पाटलिपतु ्र, अकं -5, अक्टू बर 2022 - मार््च 2023

दुःसाहस चलो जिंदगी इक बार फिर से जिया जाए कोई नयी मं जिल तलासी जाए। प्रवीण कु मार प्रेम गीत की आलसपन को त्याग के प्रबधं क नयी यदु ्ध भदे ी नागड़ा बजाया जाए।, अंचल कार््ययालय पटना बहुत हुआ, बिना लक्ष्य यूँ ही जिन्दगी जीते-जीते अब नया कोई बहाना तलासा जाए अब नयी-नयी यदु ्ध नीति बनाई जाए अपना नया लक्ष्य भेदने की तैयारी की जाए अपनी उम्मीदों को फिर से जगाया जाए दिन-रात महे नत की फसल फिर से बोई जाए आसान नहीं है अर््जजुन बनना पर फिर भी लक्ष्य साधने के लिए खुद को एकाग्रचित किया जाए गीता उपदेश को आत्मसात कर कर््म की राह पर चला जाए पर फल की चिन्ता भी जरूर की जाए आसान नहीं है हर रोज खदु को समझाना मगर नित नए आयाम जिंदगी मेें बनाई जाए और खुद को नया पहचान दिया जाए जिन्दगी मेें समय पानी की तरह बहते जा रहा है पर आप भी मं जिलों पर भी अपना निशान छोड़ते जा रहे है चलो जिंदगी फिर से जिया जाए नयी मं जिलों को फिर से अपनी जिंदगी मेंे आने का मौका दिया जाए। \"हमारी नागरी लिपी दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपी है।\" – राहुल साकं ृ् त्यायन 27 इं डियन बैकैं , अचं ल कार््यालय य, पटना की छमाही हिं दी गृह पत्रिका

थोड़़ी सी मौज कर ले काश कि ... !! बदल दे अपने अदं ाज़ जियो छोड़ कर सारी फिकरेें काश कि तमु लौट आते दिल से हो जा बिंदास। बिं दास अपने सारे शहर को समटे कर अपने आप को कर के चिंता फिकर बस ले आते अपनों के बीच कु छ नहीं तू पाएगा अपने गाँ व की गलियों मेें अपने आम के बग़़ीचे मेंे इस तरह से जीकर अपने क्रिके ट वाले मदै ान मेंे अपने नाना के बाग़ान मेें जीते जी मर जाएगा। बस कर लेते कोई बहाना कमाने की फिकर मेंे निकल आते भागता ही जाएगा उस धँ ुधली रोशनी से दरू खाली हाथ आया था अपने गाँ व जहां सूरज की पहली किरण खाली ही जाएगा। तुम्हहें जगा कर कु छ नहीं रहता सदा यहां प्रकाशित कर देता सब नष्ट हो जाएगा तरे ा अपना वजूद भी यहां तब शायद तुम एक दिन खो जाएगा। और प्रकाशित हों जाते समय रहते जी ले जीवन पल न वापस आएगा आज को न जी सका तो कल तू बहुत पछताएगा। रवि राज सहायक प्रबधं क पटना विश्वविद्यालय शाखा मधु श्रीवास्तव प्रबंधक अंचल कार््ययालय पटना 28 \"हिं दी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्त्रोता है।\" – समित्रानदं न पंत इं ड पाटलिपतु ्र, अंक-5, अक्ूट बर 2022 - मार््च 2023

इडं ियन बैकैं के 116वेंे स्थापना दिवस समारोह पर आयोजित टगवार प्रतियोगिता की झलकियाँ \"सभी भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपी आवश्यक है तो वो देवनागरी ही हो सकती है।\" – जस्टिस कृ ष्णस्वामी अय्यर 2299 इं डियन बैंकै , अंचल कार््यायलय, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

अखबार के सरु ््खखि योों मेंे पटना अंचल 30 इं ड पाटलिपुत्र, अकं -5, अक्ूट बर 2022 - मार््च 2023

3131 इं डियन बैंकै , अंचल कार््यालय य, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

अंचल कार््ययालय पटना के अतं र्गत् आने वाली पटना मखु ्य शाखा द्वारा विशाल प्रदर््शनी का आयोजन किया गया। 32 इं ड पाटलिपुत्र, अकं -5, अक्टू बर 2022 - मार्च् 2023

इंडियन बैैकं के 116वेंे स्थापना दिवस समारोह पर आयोजित विविध कार््यक्रमोों की झलकियाँ 333 इं डियन बैैंक, अचं ल कार््ययालय, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

विविध कार्कय् ्रमोों की झलकियाँ हिन्दी पखवाड़ा 2022 के दौरान आयोजित प्रतियोगिता मेें भाग लेते प्रतिभागी एवं उनके बच्चचें सं विधान दिवस के अवसर पर सपथ ग्रहण समारोह की झलकियाँ 3344 अचं ल कार््ययालय पटना की गहृ पत्रिका इंड पाटलिपुत्र के चौथे अंक की अनावरण की तस्वीरेें इं ड पाटलिपतु ्र, अंक-5, अक्ूट बर 2022 - मार््च 2023

इंडियन बैकंै की ओर से विशाल डिजिटल एवं एमएसएमई ऋण शिविर आयोजन की झलकियाँ लवे र सेस के ऑनलाइन पोर््टल लॉन्च के कार््यक्रम मेंे भाग लेते हुये श्री अमरेन्द्र कु मार शाही, क्षते ्र महाप्रबं धक पटना इंडियन बैकैं (पटना अंचल) एवं बिहार सरकार के बीच सेस कलके ्शन से सं बन्धित MOU हस्ताक्षरीत किया गया। इस मौके पर श्री अमरेन्द्र कु मार शाही (क्ेतष ्र महाप्रबं धक पटना), श्री नवीन कु मार (सहायक महाप्रबं धक), श्री कौश्ेनल ्द्र (सहायक महाप्रबं धक), श्री दीपक कु मार, सहायक महाप्रबं धक, (क्तषे ्र 35 महाप्रबं धक कार््ययालय पटना) एवं बिहार सरकार के श्रम विभाग के सचिव उपस्थित रहे। इं डियन बैकैं , अचं ल कार््यलाय य, पटना की छमाही हिं दी गहृ पत्रिका

इंडियन बैकैं के 116वेें स्थापना दिवस समारोह पर श्री ओम प्रकाश कालरा, अंचल प्रबधं क पटना अचं ल द्वारा स्कू ल के बच्चचों को कॉपी कलम एवं ज्यामिति बॉक्स का वितरण किया गया।  इंडियन बैकंै पटना अंचल द्वारा प्रधानमतं ्री स्वनिधि योजना महोत्सव के आयोजन की  झलकियां

सतर््कता दिवस के अवसर पर इंडियन बैंकै अचं ल कार््ययालय पटना द्वारा आयोजित नकु ्कड़ नाटक सभा मेें भाग लते े हुए श्री नवीन कु मार, उप अचं ल प्रबधं क एवम अचं ल कार््ययालय, पटना  के  स्टाफ़ सदस्य ग्राहक आउटरीच कार््यक्रम मेें भाग लते े हुए श्री ओम प्रकाश कालरा, अंचल प्रबधं क (पटना अचं ल) 37 श्री नवीन कु मार, उप अचं ल प्रबधं क, पटना अचं ल एवं अन्य स्टाफ़ सदस्य।

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माननीय मुख्यमं त्री श्री नीतीश कु मार, उपमुख्यमं त्री श्री तेजस्वी यादव, श्री आमिर सुबहानी, मुख्य सचिव (बिहार सरकार) से शिष्टाचार भेटें करते हुए हमारे बैैंक के कार््यपालक गण श्री अमरेेंद्र कु मार शाही, क्तषे ्र महाप्रबं धक पटना एवं श्री ओम प्रकाश कालरा, अचं ल प्रबं धक (पटना अंचल)

आपका अपना बैंैक, हर कदम आपके साथ YOUR OWN BANK, ALWAYS WITH YOU इंडियन बैंैक, अचं ल कार््ययालय, पटना प्रथम तल, इंडियन बैंकै परिसर, बुद्ध मार्ग,् पटना - 800 001 ई-मले : [email protected], दूरभाष : 0612 2219480 मदु ्रण एवं पत्रिका डिजाइन : अजं नी प्रकाशन, कोलकाता, पश्चिम बगं ाल, मो. 8820127806, ई-मले : anjan।prakashan19@gma।l.com


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