आपका अपना बैंैक, हर कदम आपके साथ YOUR OWN BANK, ALWAYS WITH YOU वर्ष-् 2022-23, अंक-2, जुलाई-दिसम्बर, 2022 इं डियन बैकैं , अचं ल कार््ययालय गवु ाहाटी की छमाही गृह पत्रिका पूर्वोत्तर भारत विशषे ाकं 2अकं
दिनांक 15/09/2022 को श्री इमरान अमीन सिद्दीकी, कार्य्पालक निदेशक महोदय की अध्यक्षता मेंे शाखा प्रबधं कोों के साथ समीक्षा बैठक एव मगे ा स्वयं सहायता समहू ऋण वितरण शिविर का आयोजन 22 अक्टूबर, 2022 को प्रधानमतं ्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने के लिए रोजगार मेला का शुभारम्भ और प्रथम चरण मेंे चयनित 75 हजार युवाओं को नियकु ्ति पत्र का वितरण
सम्पादक मंडल सरं क्षक इं डियन बैकंै , अचं ल कार््ययालय गवु ाहाटी की छमाही गहृ पत्रिका श्री राजशे कुमार सिं ह वर्-ष् 2022-23, अकं -2, जुलाई-दिसम्बर, 2022 क्षेत्र महाप्रबंधक पूर्वोत्तर भारत विशषे ांक क्ेतष ्र महाप्रबंधक कार््यलाय य, गुवाहाटी अनकु ्रमणिकाकहानी, आलेख, यात्रा वृत््तांत ए ंव अन्य ेलख सं ेदशपषृ ्ठ अध्यक्ष 4 क्र शीर्क्षकाव््यांजलि 5 श्री चन्दनशे ्वर गोस्वामी 6 1 श्री राजेश कु मार सिंह, क्षेत्र महाप्रबं धकअन्य 7 अंचल प्रबधं क 2 श्री चन्दनेश्वर गोस्वामी, अचं ल प्रबं धक 8 अचं ल कार््यलाय य, गुवाहाटी 3 श्री विकास कु मार जायवाल, उप अंचल प्रबं धक 11 4 सम्पादकीय - श्रीमती कमलेश कँ वर, प्रबं धक (राजभाषा) 14 मार््गदर््शक मण्डल 5 अहोम योद्धा - लाचित बोरफु कन : चं द्रमा कलिता 18 6 पूर्वोत्तर भारत मेंे हिन्दी : अंजनी कु मार श्रीवास्तव 21 श्री विकास कुमार जायसवाल 7 हमारा असम : बीणा हजारिका 24 8 सूरज का घर अरूणाचल : विकाश कु मार 25 उप अंचल प्रबंधक 9 स्वतं त्रता सं ग्राम मेें पूर्वोत्तर भारत : मौसमी शर््ममा 28 अंचल कार््यलाय य, गुवाहाटी 10 हॉर््नबिल फे स्टिवल : इमना नं दा 31 11 मणिपरु की झलक : कमलशे कँ वर 34 श्री रजत सिन्हा 12 मावलीननॉन्ग गाँ व : रजत सिन्हा 35 13 पारम्परिक कला एवं सं स्कृ ति से समृद्ध मिजोरम : मन्ूट दास 38 मखु ्य प्रबंधक 14 परू ्वोत्तर भारत की औषधियाँ : गायत्री शर््ममा 38 अंचल कार््यलया य, गवु ाहाटी 15 त्रिपरु ा पर््यटन : असीम ज्योति शर््माम 39 16 औरत हूूँ… : चते ना गोगोई 39 श्री नीरज कुमार 17 मायके मेंे बेटी : नीना हजारिका 40 18 आज का मानव : अमित चतै ्री 40 मखु ्य प्रबंधक 19 तुमने अपना हाथ दिया : इंद्रनील दास 41 अचं ल कार््ययला य, गवु ाहाटी 20 जिंदगी : चं द्रमा कलिता 41 21 जीवन यं ू जिए मिसाल बन जाएं : नीरमला साह 42 श्री ো�अनिल प्रसाद 22 इंड सैलरी सुरक्षा खाता 23 स्टाफ एवं उनके परिवार के सदस््यों के द्वारा बनाई गई चित्रकारी मुख्य प्रबंधक 24 चित्र दीर््घघा अंचल कार््यलया य, गुवाहाटी नोट : इंड ईशान पत्रिका मेें प्रकाशित विचार लखे कोों के अपने हैंै। इससे संपादक मंडल अथवा हमारे बैंैक का सहमत होना अनिवार््य सम्पादक नहीीं है। रचनाओं की मौलिकता और उनमेंे प्रस्ततु तथ्ययों, आंकड़ों आदि की यथार््थता के लिए भी सबं ंधित लेखक ही जिम्मेदार है। श्रीमती कमलेश कँ वर निःशलु ्क व आंतरिक वितरण हेतु मुद्रित व प्रकाशित। प्रबधं क (राजभाषा) मदु ्रण एवं पत्रिका डिजाइन : अजं नी प्रकाशन, कोलकाता, पश्चिम बगं ाल, मो. 8820127806, ई-मले : [email protected] अंचल कार््यलाय य, गुवाहाटी प्रकाशन सम्पर््क सतू ्र इंडियन बैकैं , अचं ल कार््यालय गुवाहाटी शर््ममा एंड शर््ममा मार्ेक ट, द्वितीय तल, आर.जी.बी. रोड, गवु ाहाटी - 781003 ई-मेल : [email protected], दूरभाष : 7877039326
के लिए प्रसिद्ध होने की वजह से, मानस असम और यहां तक कि परू े मदिर के जसै े आकार बनाते हैैं जिसे आसमी भाषा मेंे 'मजे ी' कहते भारत मेंे सबसे अच्ेछ राष्ट्रीय उद्यानों मेंे से एक है। इन सबके अलावा हैैं। सूर्योदय से पहले सभी परिवार के लोग स्नान करते हैंै। इस दिन अपने जं गली पहाड़, जलोढ़ घास के मदै ानों और सदाबहार जं गलों लोग मजे ी को जलाते हैैं। सभी अपने घरों मेंे स्वादिष्ट भोजन बनाते है से लेकर प्राकृतिक दृश््योों की वजह से असम के सबसे अच्छे पर््यटक और अपने परिवार सं ग मिलकर खाते है। कोगं ाली बिहू या कटी बिहू आकर््षणों मेें से एक है। कार््ततिक माह मेें मनाया जाता है। इस त्यौहार के दिन लोग बांस के त्यौहार : असम मेंे कई त्यौहार डंडों के ऊपर दियेें जलाते हैैं और तलु सी के पौधों के नीचे दीप जला मनाए जाते है, जिनमेें से कर चारों ओर रौशनी करते हैंै। कोगं ाली बिहू के दिन किसी भी प्रकार अधिकांशतः त्यौहार कृषि पर के पकवान नहीं बनाये जाते हैंै और आनं द भी नहीं मनाया जाता है ही निर््भर होते है। यहां मनाए इसलिए इस दिन को कोगं ाली बिहू कहते हैंै। जाने वाले प्रमुख त्यौहार बिहू, अम्बुबाची मले ा - यहां अम्बुबाची मले ा एक वार््षषिक मले ा होता है जो बशै ागु, अली-ऐ-लिगं ग, बखै ो, रोगं कर, रजनी गबरा हरनी गबरा, प्रत्येक वर््ष जून महीने के मध्य मेें असम के कामाख्या मं दिर मेंे मनाया बोहागियो बिश,ु अबं बु ाशी मेला और जोनबिल मेला आदि हैैं। जाता है। इस त्यौहार का सम्बम््ध देवी कामाख्या से है, जो कि माता बिहू : बिहू त्यौहार व बिहू नृत्य असम की पहचान है। असम राज्य मेें बिहू सबसे प्रतीक्षित त्योहार है। बिहू, वर््ष के 3 अलग-अलग समयों सती के शक्तिपीठ के रूप मेें पूजी जाती है, जिनके योनि रूप की पूजा मेंे 3 अलग-अलग रूपों मेंे मनाया जाता है, अप्रैल मेें बिज़ बोहाग बिहू यहाँ की जाती है। अम्बुबाची मेले के समय माँ कामाख्या मं दिर मेें माँ या रोगं ाली बिहू, जनवरी मेंे माघ बिहू या भोगली बिहू और अक्टूबर के दर््शन हेतु परू े भारत से लाखों की सं ख्या मेंे श्रद्धालु पहुुँचते हैंै। इन और नवं बर मेंे के ला बिहू या कोगं ाली बिहू। बिहु एक धर््मनिरपके ्ष श्रद्धालुओं मेंे साधु, सं त, तांत्रिक सहित अन्य लोग भी शामिल होते त्योहार हैैं जो भिन्न जाति और धर््म के बीच मानवता, शातं ि और हैैं। अम्बुबाची मेला के दौरान यह मं दिर तीन दिनों तक बं द रहता है भाईचारा लाता हैंै। इसलिए बिहू को राजकीय त्यौहार का भी दर््जजा तथा तीन दिन बाद जब मं दिर का द्वार खलु ता है तब ही सभी श्रद्धालु दिया गया है। रोगं ाली बिहू या बोहाग बिहू असम का एक महत्वपरू ््ण माता के दर््शन कर पाते हैंै। इस मले े के दौरान श्रद्धालओु ं को लाल त्योहार है। रोगं ाली के पहले दिन लोग प्रार््थना, पूजा और दान करते कपड़ा प्रसाद के रूप मेें दिया जाता है। माजुली फेस्टिवल : हैंै। लोग इस दिन नदियों और तालाबों मेंे पवित्र स्नान करते हैैं। सभी माजुली द्वीप पर प्रत्येक बच्ेच और बड़े इस दिन नए कपडे पहनते हैैं। रोगं ाली बिहू या बोहाग वर््ष नवं बर माह मेंे 21 बिहू त्यौहार पुरे एक हफ्ेत तक धूम-धाम से मनाया जाता है। इस तारीख से 24 तारीख के दिन गाये और नाचे जाने वाले पारंपरिक नृत्य और गीत को 'हुचारी' बीच माजलु ी फे स्टिवल कहते हैैं। ड््रम और बाजों के ध्वनि के साथ इन समाराहो को देखना का आयोजन किया जाता बहुत ही आनं दमय होता है। इस त्यौहार मेें बलै ों की लड़़ाई, मरु ्गगों की है। यह एक सासं ्ृक तिक लड़़ाई और अण््डों का खले जैसे अद्तभु प्रतियोगिता खेले जाते है। पौष उत्सव है माजुली फे स्टिवल मेंे विभिन्न प्रकार के क्षेत्रीय उत्पादों को सं क््राांति के दिन असम मेें भोगाली बिहू के रूप मेें मनाया जाता है। भी बिक्री के लिए रखा जाता है। यहाँ हड़प्पन यगु मेंे बनाए जाने इस दिन को माघ बिहू भी कहा जाता है। इस त्यौहार के आरंभ मेंे वाले बर््तनों के सामान माजुली फे स्टिवल मेें विशेष आकर््षण होता है। सभी लोग अग्नि देवता की पजू ा करते हैैं। इस दिन वे बम्बुओं से एक 16 \"विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्ृक तिक दासता है।\" – वाल्टर चेनिं ग। इं ड-ईशान, अंक-2, सितम्बर-दिसम्बर, 2022
दिहिं ग पटकाई फे स्टिवल ‘करम नाचीज’ कहा जाता दिहिंग पटकाई फे स्टिवल है। तीन दिन बीतने के असम राज्य के तिनसकु िया उपरातं जं गल मेंे ढोल-बाजे जिले के लखे ापानी टाउन के साथ झमू र नामक नृत्य मेें मनाया जाता है। यह किया जाता है। वापसी फे स्टिवल प्रत्येक वर््ष जनवरी मेें ये लोग जं गल से करम माह के 16 तारीख से 19 तारीख के बीच बड़े जोर-शोर से मनाया नामक पड़े के कु छ टहनियों को घर लाते हैंै तथा घर के आँ गन मेें उसे जाता है। इस फे स्टवियल मेंे असम राज्य की सासं ्ृक तिक विरासत को लगा देते हैंै। सभी लोग उसके चारो ओर बठै कर अपने सासं ्कृ तिक प्रदर््शनियों के माध्यम से पर््यटकों को दिखाया जाता है।इस फे स्टिवल गीतों को गाते हैंै तथा सभी पारम्परिक क्रियाकलापों का पालन करते मेंे आने वाले पर््यटकों को चाय-बागान के साथ-साथ डिगबोई अॉयल हैैं। पूजा सं पन्न होने के उपरांत सभी लोग विभिन्न प्रकार के भोजन रिफाइनरी का भी टूर करवाया जाता है। यह फे स्टिवल लोगों को हाथियों के सं रक्षण के बारे मेें जागरूक करता है। लोग हाथियों पर का आनं द लेते हैंै तथा ‘हरिया’ नामक पये पदार््थ का भी सवे न बठै कर यहाँ की सं ुदरता का लुत््फ़ उठाते हैैं। यहाँ द्वितीय विश्व युद्ध के करते हैंै। दौरान की कब्रंेर भी हैंै जहाँ टूरिस्ट जाना पसं द करते हैंै। रास लीला : असम राज्य के बशै ागु अथवा ब्वीसागु उत्सव : यह उत्सव असम राज्य के बोडो माजलु ी द्वीप के निवासियों जनजातीय समहू द्वारा मनाया जाता है। इसे बशै ागु अथवा ब्वीसागु मेंे भगवान् श्री कृष्ण के प्रति उत्सव के नाम से जाना जाता है। यह उत्सव प्रत्येक वर््ष अप्रैल माह अपार श्रद्धाभाव है और उसी के बीच मनाया जाता है। दरअसल अप्रैल माह के मध्य से असामी श्रद्धाभाव के कारण यहाँ नववर््ष शुरू होता है और नववर््ष के अवसर पर ही बशै ागु फे स्टिवल प्रत्येक वर््ष रास लीला का मनाया जाता है। इस त्योहार मेंे बोडो जनजातीय समहू के लोग अपने आयोजन किया जाता है जिसे माजलु ी के रास लीला के नाम से जाना इष्टदेव भगवान् शिव की पूजा अर््चना करते हैंै। बैशागु फे स्टिवल मेंे जाता है। इस दिन यहाँ के सत््रोों मेंे रहने वाले वैष्णव लोग भगवान् श्री कृष्ण के जीवन से जड़ु े कथाओं का मं चन करते हैैं जिसे देखने के लिए माजुली के साथ-साथ पुरे असम राज्य से लोग पहुँुचते हैैं। बगुरुम्बा नामक सांस्ृक तिक नृत्य भी आयोजित किया जाता है। इस चोमांगकन और रोोंगकर उत्सव : नृत्य के द्वारा बोडो जनजातीय समहू के लोग अपने इष्टदेव भगवान् यह भी असम राज्य के त्योहारों मेंे शिव जिन्हे बथाऊ के नाम से जाना जाता है को प्रसन्न करने का प्रयास से एक है, जिसमेें उत्सव फसलों करते हैैं। बोडो जनजाति की लड़कियां तितली नृत्य करती हैंै तथा युवा से जड़ु ा त्योहार है। इस त्योहार लड़के सरजा, सिफंु ग, ठरका नामक वाद्ययं त्र बजाते हैंै। मेंे कु छ क्षेत्रीय देवी-देवताओं की पूजा अर््चना की जाती है। इस करम पजू ा : असम मेें मनाए जाने वाले त्योहारों मेें करम पजू ा का त्योहारों मेें कु ल 12 देवताओं की पूजा की जाती है तथा उनके पूजा भी एक विशेष स्थान है। यह फसलों से जुड़ा एक त्योहार है। इसमे के लिए 10 वदे ियों का निर््मणमा किया जाता है। इस त्योहार को मनाने प्रत्येक वर््ष भादो माह के एकादशी के दिन मनाया जाता है जो कि का मुख्य आशय, अपने फसलों को ख़राब होने से बचाना तथा बड़ी ग्रीगेरियन कै लेंेडर के अनुसार अगस्त माह के मध्य अथवा सितम्बर मात्रा मेंे फसल प्राप्त करना है। इस उत्सव मेंे लोग सभी बिमारियों से माह के शुरुआत मेंे पड़ता है। यह त्योहार विशषे तः असम राज्य मकु ्ति के लिए अपने इष्ट से प्रार््थना करते हैंै। के चाय बागानों मेंे काम करने वाले समुदाय के द्वारा मनाया जाता है। इस त्योहार मेें चाय-समदु ाय के लोग अपने इष्टदेव ‘करम’ की पूजा-अर््चना करते हैैं तथा उनसे अच्छी फसल होने की कामना करते करम पजू ा मेें कुं वारी लड़कियां तीन दिनों तक व्रत रखती हैैं जिन्ेह \"हिं दी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइये।\" – बरे िस कल्यएव 17 इं डियन बैंकै , अचं ल कार््ययला य, गवु ाहाटी की छमाही पत्रिका
पारम्परिक कला एवं संस्कृति से समदृ ्ध मिजोरम मन्टू दास शाखा प्रबंधक बिजयनगर शाखा मिज़ोरम कु ल 3 शब््दोों से मिलकर बना है, जिसमेंे मि यानी लोग, ज़ो - यानी ख़ूबसूरत पहाड़ी इलाक़ा और रम - यानी धरती के रूप मेंे जाना जाता है। भारत के उत्तर परू ््व मेें मौजदू मिज़ोरम अपने सुहावने मौसम के लिए दनु िया भर मेें मशहूर है। ख़बू सूरत से दिखने वाले इस राज्य को पहाड़ों की धरती भी कहा जाता है, क््यूूंकि मिज़ोरम का ज़्यादातर हिस्सा पहाड़ियों से घिरा हुआ है और अपनी खबू सूरत 21 पहाड़ी श्ंृर्खलाओं के लिए भी जाना जाता है। इसके अलावा मिज़ोरम अपनी सं स्ृक ति और परम्पराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। मिज़़ोरम का शुरुआती इतिहास मं गोलायड प्रजाति से शुरू होता है लके िन ब्रिटिश मिशनरीज़ के सम्पर््क मेें आने के बाद ये लोग शिक्षा के मामले मेें काफी बेहतर हुए और ब्रिटिश मिशनरीज़ ने ही इन लोगों मेंे मिज़ो भाषा की शरु ुआत भी की। मिज़़ोरम की साक्षरता दर भी क़रीब 91 फीसदी से ज़्यादा है, जोकि मिजोरम को के रल के बाद दसू रा सबसे अधिक साक्षरता दर वाला राज्य बनाती है। समय-समय पर कई जनजातियों के लोग आते रहने के कारण वर््तमान मेें मिजोरम मेें कई जनजातियों के लोग रहते हैैं और यहां रहने वाली अलग-अलग किस्म की जनजातियों की वजह से मिज़ोरम की सं स्ृक ति काफी व्यापक और समृद्ध है। यहां जाति और लिंग के आधार पर कोई असमानता नहीं हैंै। ज़्यादातर हिस्से मेंे लोगों का विवाह आदिवासी समाज के ही रीतिरिवाजों पर ही होता है। यहां के लोग लव-मरै िज मेंे ज़्यादा विश्वास रखते हैंै। इसके अलावा यहां शादी-विवाह और तलाक को लेकर कोई ज़रूरी नियम नहीं है। पुरुष और स्त्री दोनों की रजामं दी के बाद ही यहां के लोगों के विवाह कराये जाते हैैं। 3311\"भारतेेंदु और द्विवेदी ने हिं दी की जड़ पाताल तक पहुँचा दी है; उसे उखाड़ने का जो दुस्साहस करेगा वह निश्चय ही भकू ं पध्वस्त होगा।\" – शिवपूजन सहाय इंइडिं डिययननबैबैंकैैकं , ,अअचं चं ललककारा्र््य्यालययालयय, ,गगुववु ाहाहाटाटी ीककी ीछछममाहाही ीपपत्रत्िरकिका ा
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