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मुंबई दर्पण, अंक-6, जुलाई-सितम्बर, 2022

Published by Anjani Prakashan, 2023-07-07 05:48:40

Description: मुंबई दर्पण, अंक-6, जुलाई-सितम्बर, 2022

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मुंबई दर्ण्प 6अकं सितम्बर 2022 वर्ष् : 2022-23, अकं -6, जलु ाई-सितम्बर, 2022 पजं ाब एण्ड सिंध बैंैक, अचं ल कार््यालय, मुबं ई की तिमाही हिं दी गहृ पत्रिका जहाँ सेवा ही जीवन ध््ययेय है। Where Service is a way of life.

‘हर घर तिरंगा’ भारत की आज़ादी के 75 वर्ष् ‘हर घर तिरंगा’ भारत की आज़ादी के 75वेें वर््ष के उपलक्ष्‍य मेंे लोगोों को अपने घर पर तिरंगा झडं ा फहराने के लिए प्रोत््‍ससाहित करने हेतु ‘आज़ादी के अमृत’ महोत्‍सव के तत््‍ववावधान मेंे चलाया जा रहा एक अभियान है। झडं े के साथ हमारा सबं ंध सदैव व्‍यक्तिगत की बजाए औपचारिक और ससं ््‍थथागत रूप मेें अधिक रहा है। आज़ादी के 75वेंे वर््ष के दौरान एक राष्‍ट्र के रूप मेंे झडं े को सामहू िक रूप से घर पर लाना न के वल तिरंगे के साथ हमारे व्‍यक्तिगत संबंध का प्रतीक है बल्कि यह राष्‍ट्र निर््ममाण मेंे हमारी प्रतिबद्धता को भी दर््शशाता है। यह पहल लोगोों के दिलोों मेें देशभक्ति की भावना जागतृ करने और भारत के राष्‍‍ट््रीय झंडे के बारे मेें जागरूकता बढ़़ाने के लिए की गई है। पंजाब एण्ड सिं ध बैकंै अंचल कार््ययालय मुंबई तथा इसकी सभी अधीनस्थ शाखाओं ने घर जाकर भारत की आजादी के 75वेंे वर््ष के उपलक्ष्य मेंे लोगोों को अपने-अपने घरोों पर तिरंगा झडं ा फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जिसकी पशे हैंै कु छ झलकिया.ं ..

मुबं ई दर््पण पंजाब एण्ड सिंध बैंकै , अंचल कार्यालय मंुबई अंचल कार््यालय मुंबई पंजाब एण्ड सिंध बैंकै , अचं ल कार््यालय, मंुबई की तिमाही ई-पत्रिका 27/29 अंबालाल दोषी मार््ग फोर्ट् मुंबई-400001 वर््-ष 2022-23, अंक-6, जुलाई-सितम्बर, 2022 ई-मेल : [email protected] , दूरभाष : 022-22626055 çca/kdh; eaMy अनकु ्रमणिका इस अकं मेें पषृ ्ठ संख्या सं पादकीय 3 4 अविनाशी आत्मा और नश्वर शरीर 5 6 यौवन का दसू रा नाम क्रान्ति 8 10 बैंैकों मेंे नवीनतम तकनीकी और साइबर सुरक्षा 11 12 जीवन की अवस्थाएँ वित्तीय वर््ष 2022-23 : हिंदी कार््यशाला जलु ाई 2022 से सितम्बर 2022 : हिंदी दिवस विज्ञापन मुख्य संपादक प्रिय साथियो,ं श्री चमन लाल फील्ड महाप्रबंधक, मबंु ई अंचल यह प्रसन्नता का विषय है कि मं बु ई अचं ल कार््यायलय अपनी हिंदी पत्रिका “मं बु ई दर््पण” के नवीनतम अंक का प्रकाशन कर रहा है। मुझे “मं बु ई दर््पण” के 6वेें अंक के साथ जुड़कर अत्ंय त हर््ष महससू हो रहा है। पत्र पत्रिकाएँ नए लेखको,ं रचनाकारों को एक सार््थक और खुला मं च प्रदान करती है। जिन्हंेह लखे न के शुरूआती चरणों मेें न के वल अपनी अभिव्यक्ति को सबके समक्ष रखने का मौका मिलता है, अपितु लखे न कला के विषय मेें भी महत्वपूर््ण जानकारी सपं ादक एवं प्रकाशक प्राप्त होती है, जो नए लखे क के लिए बहुत लाभदायक होती है। इसलिए आप सभी श्री रवि यादव अंचल कार््यलया य मं बु ई और इसके सभी अधीनस्थ शाखाओं के कार््ममिकों से अनुरोध है कि राजभाषा अधिकारी आपलोगों के मन मेंे जो भी नवीन कल्पनाएं , नव काव्य धारा अकं ु रित हो रहा है कृ पया उसे मं बु ई दर््पण के माध्यम से सभी के समक्ष रखेें जिसे पं जाब एण्ड सिंध का एक और सपं ादक मंडल प्रत्केय कार््ममिक लाभान्वित हो सके । सूर््यकातं त्रिपाठी निराला की कु छ पं क्तियों के साथ अपनी बात समाप्त करता हूँू: श्री सरबजीत सिं ह श्री अमित कु मार \"मेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण, सहायक महाप्रबधं क मखु ्य प्रबधं क इसमेंे कहाँ मतृ ्?यु है जीवन ही जीवन अभी पड़़ा है आगे सारा यौवन स्वर््ण-किरण कल्लोलों पर बहता रे, बालक-मन। मरे े ही अविकसित राग से विकसित होगा बन्,ुध दिगन्त; अभी न होगा मरे ा अतं ।\" मैंै इस पत्रिका के सम्पादन से जडु ़़े सभी लोगों की प्रशं सा करता हूूँ। मेरी ओर से अनेकानके शभु कामनाएँ । (श्री चमन लाल) श्रीमती जोया प्रकाश श्री आकाश रौशन श्री गौरव कांबले फील््ड महाप्रबंधक वरिष्ठ प्रबंधक वरिष्ठ प्रबधं क अधिकारी यह गहृ पत्रिका के वल आंतरिक परिचालन हेतु है। ‘मुबं ई दर््पण’ के इस अंक मेंे प्रकाशित कोई भी सामग्री जसै े लेख, कविता सबं धं ित लेखकोों की है। इसमेें सपं ादक अथवा बैंैक का कोई उत्तरदायित्व नहीीं है।

ममंुबंुबईई ददरर्््प्पणण अविनाशी आत्मा आ त्मा अजन्मा, नित्य सनातन माया के सं पर््क मेंे आते ही जीव अनित्य और नश्वर शरीर और पुरातन है। शरीर के मारे को नित्य और नित्य को अनित्य समझने जाने पर भी यह नहीं मारा जाता। यदि लगता है। सत्य को असत्य और असत्य अमित कु मार कोई मरने वाला व्यक्ति स्वयं को मारने को सत्य समझने लगता है। जीव स्वयं मेंे समर््थ मानता है, और यदि कोई को शरीर मानने लगता है इसलिए मखु ्य प्रबधं क मारा जाने वाला व्यक्ति अपने को मारा जीव-शरीर व मन की क्रियाओं को अंचल कार््यालय मुबं ई गया समझता है तो वे दोनों ही आत्मा स्वयं की क्रियाएँ मानने लगता है। इस के स्वरूप को नहीं जानत,े क््योोंकि यह प्रकार शरीर और मन के द्वार सखु -दःु ख आत्मा या तो किसी को मारता है और की अनुभूत को भी अपनी अनभु तू ि न मारा ही जाता है। यह न तो स्वयं समझने लगता है और इस प्रकार स्वयं किसी से हुआ है और न इससे कोई को बं धनग्रस्त कर लेता है। उस बं धन भी हुआ है, अर््थथात् यह न तो किसी मेें बं ध जाने के बाद से ही जीव सं सारी का कार््य है और न कारण ही है, जिस हो जाता है, जनमने-मरने वाला हो प्रकार मनषु ्य पुराने वस्तत्रों को त्यागकर जाता है और न तो वह बं धन से मुक्त नए वस्तत्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही होता है और न ही वह सखु ी होता है। जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर नए शरीरों को प्राप्त होता है। आत्मा के रूप मेंे परमपिता परमात्मा हमारे अन्तर््मन मेें स्वयं विराज रहे है। यदि आत्मा अविकारी है तो आत्मा हमेें तो जप, तप, योग की अग्नि मेंे को धरण करने वाले जीव मेें काम, समा के तपाकर बीज से वकृ ्ष बनाना क्रोध, मद, मोह, द्ेवष आदि विकार क््यों है, मानव से माधव बनना है, नर से और कै से आते हैैं? यदि आत्मा अलग नारायण बनना है। पर इस ओर हमने है। निर््मल है, तो फिर जीव मेंे बुरे ध्यान ही कहाँ दिया? हम भूल गए कि विचार क््यों और कै से आते हैैं? यदि वस्तुतः हमेंे तो अपने समस्त विकारों से आत्मा ब्रह्म का अंश है तो जीव को मकु ्त होना भर है। हमेें तो साधना मेंे इसकी अनुभतू ि क््यों नहीं होती? अस्ुत रहकर अपनी इच्छाओं से, वासनाओं से जीवात्मा भी, जीव भी ब्रह्म की तरह मकु ्त होना है। अपने चित्त को, मन को ही अविनाशी है, नित्य है। मुक्त है। निर््मल, परिष्कृ त व पावन बनाना है। ब्रह्म की तरह जीव भी अमर है, यानि शरीर आत्मा का दिव्य धाम है। अतः गल या विकाररहित है। जीव जब ब्रह्म इस दिव्य धाम का आत्मदेव के मं दिर से उसके अंश के रूप मेंे धरती पर को सदा स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाए रखना आता है तो अपने मूल की तरह ही चाहिए, तभी इसमेंे चैतन्य की चेतना अविकारी अर््थथात् विकाररहित होता है। प्रकाशित एवं प्रतिष्ठित हो सके गी। शरीर धारण करते ही माया जीव से शरीर का यही वास्तविक शृंृगार एवं लिपट जाती है और माया से मिलते सौन्दर््य है। जीवन का उद्देश्य भी यही ही वह मलै ा हो जाता है। माया अर््थथात् है कि शरीर भगवान का एक दिव्य यं त्र विकार के सं पर््क मेंे आते ही वह अपने बन।े यह ऐसी बांसुरी बने कि भगवान निजस्वरूप से विलग हो जाता है। कृ ष्ण अपने होठों से लगा सकेें , ऐसी वीणा बने कि विद्यादायिनी माता वास्तव मेंे जगत के समस्त प्रपं च का सरस्वती के हाथों से झं कृ त हो उठे नाम ही माया है। समस्त विकार ही और धनषु बनकर मर््ययदा ा परु ुषोत्तम माया है। अज्ञान ही माया है, अविद्या राम के हाथों मेें सशु ोभित हो सकेें । ही माया है। माया के दो कार््य हैैं – इसी मेें इस नश्वर शरीर की सार््थकता एक सत्य पर परदा डालना और दसू रा एवं सफलता है। असत्य को स्थापित करना। इसलिए 4 \"हिन्दी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीीं किया।\" – डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पपजं जं ााबबएएणण््डडससििंधंधबबैैंैकैंक,,अअंचचं ललककाारर्््य्यलायायलयय,,ममंुबबुं ईईककीीततििममााहहीीपपत्तर्रििककाा

मुंबई दर्पण् यौवन का दूसरा नाम क्रान्ति ज ी वन तीन पड़ावों से गजु रता है एक बचपन दजू ा जवानी तीसरा बढु ़़ापा। बचपन लड़कपन को थामे आगे बढ़ता है। जहां मासमू ह्रदय जिज्ञासाओं से भरा होता है, वहीं बचपन माता-पिता गुरुजनों तथा अभिभावकों की छत्रछाया मेें गुजरता है। किन्तु यौवन जिज्ञासाओं से परिपूर््ण तो होता ही है साथ-साथ जोश, कु छ कर दिखाने के जज््बबे से भी उत्साहित रहता है। यौवन की परिभाषा हर व्यक्ति विशेष के जीवन मेें भिन्न है। अगर हम महान व्यक्तित्व के जीवन को देखेें तो समझ आता है कि जिसने अपने यौवन को सकारात्मकता से भर सही दिशा की ओर मोड़़ा वही इतिहास के पन््नोों पर अपनी अमिट छाप छोड़ गए। यौवन जीवन को अनेक आं तरिक तथा बाह्य अनुभवों से साक्षात्कार करवाता है। जब हम महान लोगों या युग पुरुष की बात करते हैैं तो सबसे पहले मर््यायदा पुरुषोत्तम राम की छवि सामने आती है जिन््होोंने यौवन की अवस्था को इस प्रकार परिभाषित किया कि वे मर््यदया ा परु ुषोत्तम कहलाए। जिन््होोंने यौवन के वेग को सं यम तथा अनशु ासन से स्वयं को तेजस्वी किया। मर््यादय ित यौवन नदी को बांधे उस बाँ ध की भाति है जो सषृ ्टि के सृजन के काम आती है और नदी के विनाशकारी स्वरूप से सृष्टि को बचाए रखता है। कहा जाता है यौवन क्रान्ति का दजू ा स्वरूप है पर कु छ युवक क्रान्ति को अपने सुविधानसु ार परिभाषित करते हैैं।पर वास्तव मेें क्रान्ति क्या है, क्या नियमों को तोड़ना, उल्ंल घनों को अपनाना ही क्रान्ति है? बिल्ुक ल नही,ं क्रान्ति सं वदे नशीलता है, क्रान्ति विरासत है, क्रान्ति स्वाभिमान है, क्रान्ति भगत सिंह का त्याग है, शिवाजी की तलवार है, श्री कृ ष्ण की गीता है, क्रान्ति बापू की दांडी यात्रा है, क्रान्ति स्वदेश के प्रति समर््पण है, जिस यौवन ने इसे समझा वही स्वामी विवेकानं द कहलाया। जोया प्रकाश वरिष्ठ प्रबधं क अंचल कार््यालय मंबु ई \"बच्चचों को विदेशी लिपि की शिक्षा देना उनको राष्ट्र के सच्चे प्रेम से वंचित करना है।\" – भवानीदयाल संन्यासी 5 वर्-्ष 2022-2023, अंक-6, जलु ाई-सितम्बर, 2022

मुबं ई दरर्््पण्प बैकैं ोों मेें नवीनतम तकनीकी और साइबर सरु क्षा आकाश रौशन बैैं क किसी भी देश की अर््थव्यवस्था की रीढ़ या यं ू कहेें कि हमारी अर््थव्यवस्था एक प्रभावी की हड्डी मानी जाती है। पिछले दो दशकों कै शलेस अर््थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ रही है। वरिष्ठ प्रबंधक से नवीनतम तकनीकों ने बैैंकिं ग के क्षेत्र मेंे क््राांति अंचल कार््यलाय य मबंु ई लायी है। जिसने हमारी अर््थव्यवस्था को और भारत मेें इंटरनेट यूजर््स के बढ़ते आधार अधिक मजबतू ी प्रदान की है। रोज नए-नए के साथ बैंैकों ने भी अपने डिजिटल उत्पाद तकनीक के आविष्कारों ने बैंैकिं ग सवु िधा को उपयोग करने वाले ग्राहकों की सं ख्या मेंे वदृ ्धि ग्राहकों के लिए अधिक सुगमता प्रदान की है। की है। तकनीक की उपलब्धता ने हमारी बैैकं िं ग प्रणाली को काफी सढु ृढ तथा 24 x 7 बनाने आज बैैंकिं ग सवे ाओं की पहुँुच इस मेें सफलता प्राप्त की है और एक ऐसा वातावरण तकनीकी के माध्यम से दरू दराज या कहेें दरु ््गम तैयार किया है जिसमेंे हम पसै ों का लने देन एक स्थानों पर भी पहुँुच प्राप्त की है। भारतीय सरु क्षित वातावरण मेें आसानी से कर सकते अर््थव्यवस्था अनौपचारिक भगु तान के दायरे हैंै। तकनीकी ने लोगों के जीवन मेंे भी काफी से निकलकर औपचारिक रूप से तजे ी से आगे परिवर््तन लाया है और इसकी सहायता से काले बढ़ रही है और इसमेंे इसकी सहायता नवीनतम धन पर भी काफी हद तक अकं ु श लगाने मेंे तकनीक जसै े डेबिट तथा क्रेडिट कार््ड, यूपीआई, सफलता प्राप्त हुई है, सरकार के कर सं ग्रह मेें मोबाइल बैंकै िं ग, इंटरनेट बैंैकिं ग, प्लास्टिक मुद्रा वदृ ्धि हुई है। कै शलेस अर््थव्यवस्था ने पर््यवाय रण इत्यादि बहुत ही मामूली खर््च या यं ू कहेंे कि को भी लाभ पहुंुचाया है। शून्य खर््च पर प्रभावी रूप से आगे बढ़ रहा है बैैकं िं ग मेंे साइबर सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य 6 \"अब हिं दी ही माँ भारती हो गई है – वह सबकी आराध्य है, सबकी सपं त्ति है।\" – रविशंकर शुक्ल पजं ाब एण्ड सिंध बैकंै , अचं ल कार््यायलय, मबंु ई की तिमाही पत्रिका

मबंु ई दर्पण् उपयोगकर््तता की सं पत्ति की सरु क्षा करना है। जैस-े जसै े व्यक्ति कै शलसे मैलवेयर, अन्क्रिपटेड डेटा, स्पूफिं ग, डेटा मनै िपलु शे न इत्यादि। होता जाता है वह आगे की कार््रवाई या लने -देन ऑनलाइन या डिजिटल पसै े या प्लास्टिक मुद्रा के माध्यम से करता है और उसे बैैकं िं ग मेंे साइबर सुरक्षा का मुख्य उद्ेदश्य ग्राहकों के निजी डेटा साइबर सुरक्षा के तहत सरु क्षित करने की जरुरत पड़ती है। बैैकं ों के या जानकारियों की सुरक्षा करना है। इसके लिए कु छ उपाय करने लिए यह महत्वपूर््ण हो जाता है कि वे अपने ग्राहकों को या उनके डेटा होगं े, जसै े – सं यकु ्त सरु क्षा, बहु-कारक प्रमाणीकरण, साइबर बीमा, को साइबर हमलों से कै से सुरक्षित रखें।े जब कोई बैकंै साइबर हमले एं टीवायरस और एं टी मैलवेयर एप्लीके शन का इंस्टालशे न, मखु ्य का सामना करता है तो यह न के वल बैंैकों की स्थिति को प्रभावित सूचना सरु क्षा प्रबं धक की नियकु ्ति, सुरक्षा, वास्ुतकला, नटे वर््क सुरक्षा करता है बल्कि इसके ग्राहकों की सं पत्ति को भी नकु सान पहुंुचाता अभियं ता इत्यादि। बैंकै ों को हमेशा विभिन्न माध्यमों से उपभोक्ता है। आम तौर पर जब कोई ग्राहक ऑनलाइन ठगी (धोखाधड़़ी) का जागरूकता जारी रखने की ज़रुरत है जिसमेंे लोगों को निम्नलिखित शिकार होता है और अपने पसै े खो बैठता है तो समयानसु ार शिकायत बातों पर ध्यान देने के लिए प्रतिबद्ध होने की आवश्यकता है जैसे कि- दर््ज करवाने पर उसके खोया पैसा वापस मिल सकते हैंै लके िन इस दरमियान उसे काफी मानसिक तथा शारीरिक परेशानियों से गुजरना 1. साइबर अपराध के से सुरक्षित रहने के लिए विभिन्न सुरक्षा पड़ता है। वह अपना बहुमूल्य समय भी बर््बबाद करता है जिसकी कोई उपायों का पालन किया जाना चाहिए। क्षतिपूर््तति नहीं हो पाती है। 2. मजबूत पासवर््ड का उपयोग किया जाना चाहिए। पासवर््ड आज के इस दौर मेंे डेटा उल्लं घन के मामले बैकंै ों के लिए जटिल होना चाहिए, जिसका अनुमान लगाना सं भव न हो। सिरदर््द बने हुए हैैं। अगर किसी बैंैक के ग्राहकों के डेटा मेें सेंधे लग जाती है तो इससे लोगों का बैैंक से भरोसा उठ जाता है। जिससे बैकैं ों 3. सतर््क रहेंे और अपनी पहचान तथा महत्वपरू ््ण जानकारी की की प्रतिष्ठा को बहुत बड़ा आघात पहुुंचता है। इस प्रकार बैकंै ों के चोरी से बचने के लिए खदु को स्मार््ट और एक्टिव बनाएं । लिए मौजदू ा सुरक्षा उपायों का मूल््याांकन करने और महत्वपरू ््ण डेटा की सरु क्षा के लिए साइबर सुरक्षा की आवश्यकता पड़ती है। जसै े-जैसे 4. सोशल मीडिया पर गोपनीयता को बनाए रखेंे। दनु िया डिजिटल होती जा रही है, साइबर हमलावरों ने डेटा पर हमला करने और डेटा को चोरी करने के अलग-अलग तरीके ढूंढ लिये हैैं जो 5. सिस्टम को लगातार अपडेट करते रहेें। हाल-फिलहाल की अनके घटनाओं से देखा जा सकता है। पिछले कु छ वर्षषों मेें बैंैकिं ग क्षेत्र मेें साइबर अपराध बढे हैैं जैसे कि फिशिंग, बैकंै िं ग मेंे साइबर सुरक्षा बढ़ते तकनीक के साथ ऐसी चीज है जिससे समझौता नहीं किया जा सकता है। वित्तीय सं स्थानों मेें डिजिटलीकरण की प्रगति के साथ, ऎसी फु लप्रूफ तथा सशक्त साइबर सुरक्षा की आवश्यकता है जो ग्राहकों और बैंकै ों के डेटा तथा सं पत्ति की सरु क्षा के साथ कोई समझौता ना करेें। \"हिं दुस्तान की भाषा हिं दी है और उसका दृश्यरूप या उसकी लिपि सर्ग्व ुणकारी नागरी ही है।\" – गोपाललाल खत्री 7 वर््-ष 2022-2023, अंक-6, जलु ाई-सितम्बर, 2022

मुबं ई दर््णप जीवन की अवस्थाएं प्र कृ ति का नियम है जहां से वह आरंभ बनाते हैंै तो उसका निव हम बहुत मजबूत होती है, वहीं पर आकर समाप्त होती बनाते हैैं, क््योोंकि पूरी इमारत इसके ऊपर ही है। हम जन्म लेते हैंै यवु ा होते हैंै और वदृ ्ध खड़़ी होती है। यह मानव जीवन का सबसे हो जाते हैंै। यह जीवन चक्र सदैव ऐसे ही महत्वपूर््ण अवस्था है। चलता रहता है। युवावस्था मेंे प्रवशे करने के उपरांत हम वसै े तो मानव जीवन की कई सारी अपने जीवन का लक्ष्य निर््धधारित करते है। जो गौरव कांबले अवस्थाएं हैंै। इनमेें तीन अवस्थाएं प्रमुख यवु ा अपने यवु ावस्था मेंे कठोर तपस्या कर अधिकारी हैैं। बचपन की अवस्था, यवु ावस्था और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अग्रसर रहते अंचल कार््यालय मुंबई वदृ ्धावस्था मानव जीवन का अतं िम चरण है। हैैं, वह अपने लक्ष्य को पा लेते हैैं। लके िन बचपन मनुष्य जीवन का सबसे सनु हरा जो युवा अपना रास्ता भटक जाते हैैं उनका पल होता है। बालपन की मधुर यादेंे हमारे परू ा जीवन कष्ट मेंे गुजरता है। जब मैंै यवु ा मानस पटल पर सदैव विचरण करती रहती थी, तब मेरा ज्यादातर वक्त रसोई मेें गुजरा है। जिन बच््चों का बचपन खशु ियों और जहां से मैंै हूँू, (बिहार) वहां पर लड़कियों उल्लास भरा गुजरता है, उसका प्रभाव के लिए सबसे महत्वपरू ््ण कार््य रसोई का उनके पूरे जीवन पर दिखता है। इसके ठीक काम था। पढ़़ाई के साथ-साथ हम लोगो विपरीत जिन बच््चों का बचपन कष्ट भरा को रसोई के काम मेंे भी निपुण होना पड़ता गुजरता है, उन बच््चों की मनोदशा भिन्न हो था। आज परिस्थितियां काफी बदल गई हैंै। जाती है। जिस प्रकार जब हम कोई मकान आज लड़कियों के लिए भी सबसे महत्वपरू ््ण कार््य शिक्षा है। 8 \"हिं दी उन सभी गणु ोों से अलकं ृ त है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्ेरणी मेें सभासीन हो सकती है।\" – मैथिलीशरण गपु ्त पंजाब एण्ड सिंध बैंकै , अचं ल कार््ययला य, मुबं ई की तिमाही पत्रिका

मुंबई दर््पण वृद्धावस्था मानव जीवन का अतं िम चरण है। इस अवस्था मेंे आने वदृ ्ध ऐसे हैंै जिनके बच्चे विदेश मेें जाकर वहीं पर अपनी गृहस्थी बसा पर जिंदगी थम सी जाती है। यह हमारे जीवन मेें कब ली है। अगर वह उन्हहें वहां ले जाते हैैं तो वहां पर उनका मन नहीं आ जाता है हमेें पता ही नहीं चलता। इस अवस्था मेें पहुंुचने पर मनुष्य की शारीरिक और मानसिक लगता है। हमेें हमेशा वही जगह पर रहना अच्छा लगता शक्तियां बहुत कमजोर हो जाती हैंै। उम्र के इस है जहां पर हमारे मित्र और परिवार रहते हैंै। नई पड़़ाव मेें हम सारी जिम्मदे ारियों से जगह मेंे सामं जस्य बनाकर रहना उनके लिए बहुत मकु ्त हो जाते हैैं। कहते हैंै बच्ेच मुश्किल हो जाता है। कु छ दिन तो वह गुजार और वृद्ध दोनों एक समान होते हैंै। लते े हैंै लेकिन ज्यादा दिन तक उनके साथ ऐसा सच भी है हम वृद्ध हो जाते हैंै रह नहीं पात।े लेकिन हमारी मनोदशा सदैव बच्ेच की होता है वही बच््चों से उत्साह जो व्यक्ति अके ला रह और उमं ग होती है। बल्कि उससे जाता है उन्हेंह शारीरिक के साथ- भी ज्यादा क््योोंकि हमारे पास उम्र साथ मानसिक परेशानियों का का अनभु व ज्यादा होता है। भी सामना करना पड़ता है। शारीरिक कमजोरियां तो सबको जिन बजु ुर्गगों का जीवन उनके परिवार और दोस््तों के बीच गुजरता है दिखाई देती हैैं पर मानसिक उनका जीवन जीना बहुत आसान हो तनाव नही,ं हमारा मन जाता है लेकिन जो वृद्ध दंपति अपने बच््चों और उसकी स्वास्थ्य और परिवार से दरू रहते हैैं उनका जीवन बहुत भी उतना ही कष्ट मेें हो जाता है। जरूरी है जितना कि हमारे शरीर बढु ़़ापे मेंे अगर पति पत्नी का साथ हो तो जीवन और दसू रे अगं , सहु ाना हो जाता है। जीवनसाथी की सबसे ज्यादा क््योोंकि आप आवश्यकता बढु ़़ापे मेें ही होती है। जो वदृ ्ध बुढ़़ापे मेंे अके ले मानसिक विकारों हो जाते हैंै उनका जीवन जीना कठिन हो जाता है। ऐसा देखा गया है को शारीरिक रूप कि, ज्यादातर वृद्ध अके लपे न का शिकार हो गए हैंै। उनके बच््चों की शादी हो गई है या उनके बच्चे रोजगार के कारण उनसे दरू रह रहे हैंै। से देख नहीं सकते,तो हम मानसिक स्वास्थ्य को इतना महत्व नहीं ऐसी परिस्थिति मेंे वह अपने आपको हमशे ा ही अके ला महससू करते देते हैंै। हर इंसान को एक दिन वदृ ्ध होना है इसे हमेंे सहजता से हैैं।वर््तमान समय मेें यह बहुत बड़़ी समस्या बनती जा रही है। कई स्वीकार कर बजु रु ्गगों की हमेशा मदद करनी चाहिए। हमारे आसपास अगर बुजरु ््ग रहते हैंै तो हमारा कर््तव्य बनता है कि हम उनसे हमेशा मेलजोल बनाकर रखे।ें हमेें अपने सोसाइटी मेें समय-समय पर बुजरु ्गगों के लिए कु छ ना कु छ आयोजन करते रहना चाहिए, ताकि उनके जीवन मेें उमं ग और उत्साह बना रहे। प्रकृ ति ने इस धरती पर सबको समान हक दिया है जो इंसान अपनी दिशा को खुद ही निर््धधारित करता है इसे सहजता से स्वीकार करता है उसका जीवन चाहे कितना भी कठिन हो पर वह अपना जीवन बहुत आनं द परू ््वक व्यतीत करते हैंै। \"दाहिनी हो परू ््ण करती है अभिलाषा पूज्य हिं दी भाषा हंसवाहिनी का अवतार है।\" – अज्ञात 9 वर्ष-् 2व0र्2ष-् 22-022022-32,0अ2ंक3,-अ6ंक, ज-ुल5,ाअई-प्सरैलित-जम्नूबर,,22002222

मुंबई दर््पण मबुं ई दर्पण् वित्तीय वर््ष 2022-23 : हिं दी कार््यशाला दिनाकं 01.08.2022 को अचं ल मबु ंई द्वारा स्टाफ सदस्ययों एवं स्थानीय शाखाओं के लिए एक विशेष हिं दी कार््यशाला का आयोजन किया गया । यह कार््यशाला शाखाओं के साथ ई-माध्यम से आयोजित की गई एवं साथ ही अंचल स्टाफ सदस्ययों को भी प्रशिक्षण दिया गया। राजभाषा हिं दी के कार््ययान्वयन मेंे स्टाफ सदस्ययों की भूमिका बहुत अहम होती है। हिं दी के प्रति उत्साह बनाए रखने के लिए कार््यशाला का आयोजन किया जाता है। इस कार््यशाला की अध्यक्षता महाप्रबधं क महोदय श्री चमनलाल जी , सहायक महाप्रबंधक श्री भगवान चौधरी जी ने की । कार््यशाला का सचं ालन राजभाषा अधिकारी, रवि यादव द्वारा किया गया। सर््वप्रथम उद्घाटन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई और राजभाषा अधिकारी द्वारा महाप्रबंधक महोदय का स्वागत किया गया और इसी क्रम मेंे सहायक महाप्रबंधक महोदय श्री भगवान चौधरी जी ने सभी सहभागियोों का स्वागत किया। कोविड-19 की सुरक्षा नियमोों को ध्यान मेंे रखते हुए ही इस कार््यशाला का आयोजन किया गया। इसके पश्चात सभी सहभागियोों का परिचय प्राप्त किया गया। अपने अध्यक्षीय भाषण मेंे महाप्रबधं क महोदय एवं सहायक महाप्रबधं क महोदय ने सभी कार््मिम कोों को सवं िधान मेें उल्लिखित राजभाषा हिं दी का सम्मान करने की बात कही और कहा कि हिं दी एक कड़़ी है जिससे हम एक दूसरे से जुड़ सकते हैैं। कार््ययालय के अधिक कार््य हिं दी मेंे करने की सलाह दी और आशा व्यक्त की कि आज की इस कार््यशाला के पश्चात यहां उपस्थित सभी सदस्य अपने दैनिक कार्ययों का निष्पादन हिं दी मेंे ही करने का प्रयास करेेंगेें। इसके पश्चात राजभाषा अधिकारी द्वारा कं प्टूय र पर यूनिकोड का प्रयोग कै से किया जाए, सबं धत डैस्क प्रशिक्षण प्रदान किया गया। डेस्क पर सभी को बारी-बारी से यूनिकोड इंस्टॉल कराना व हिं दी टाइपिं ग का अभ्यास भी कराया गया। इसके पश्चात हिं दी पत्राचार, बैकैं िं ग शब्दावली पर सत्र लिया गया। दैनिक कार्ययों मेें प्रयोग आने वाले शब्ददों का उदाहरण देते हुए राजभाषा अधिकारी ने अपना सत्र बहुत ही सरल और सहज ढंग से प्रस्तुत किया। 10 \"उसी दिन मरे ा जीवन सफल होगा जिस दिन मैंै सारे भारतवासियोों के साथ शुद्ध हिं दी मेंे वार््ततालाप करूँू गा।\" – शारदाचरण मित्र पंजाब एण्ड सिंध बैैंक, अचं ल कार््यलाय य, मंुबई की तिमाही पत्रिका

ममंबु बंु ईईददरर््््णप पण सितबं र 2022 : हिं दी दिवस सं घ की राजभाषा नीति एवं भारत सरकार के निदेशानुसार कि मुझे यह जानने मेें बहुत खशु ी हो रही है कि अभी भी प्रत्कये वर््ष की भांति इस वर््ष भी मं बु ई अचं ल मेें 14.09.2022 बहुत से लोग हैैं जो हमारी भारतीय सं स्कृति और परंपराओं को से 29.09.2022 तक हिंदी पखवाड़़ा का आयोजन किया बनाए रखने मेंे दिलचस्पी रखते हैंै और हिंदी भाषा के महत्व गया। हिंदी दिवस कार््यक्रम के दौरान फील्ड महाप्रबं धक, को आगे बढ़़ा रहे हैैं। मैंै यहां उपस्थित सभी लोगों से अपील श्री चमन लाल शीहं मार जी एवं अंचल कार््ययला य मेंे कार््यरत करता हूंू कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी मेंे यथासं भव हिंदी कार््ममिक व स्थानीय शाखाओं के सदस्य उपस्थित थ।े श्री भाषा का इस्मेत ाल करेंे और लोगों के बीच इसे और अधिक भगवान चौधरी, सहायक महाप्रबं धक जी नेें सभी कार््ममिक को व्यापक बनाए। राजभाषा हिंदी के प्रति जागरुक किया गया। हिंदी दिवस कार््यक्रम के दौरान सहायक महाप्रबं धक, समारोह का प्रारंभ सरस्वती वं दना के साथ किया गया। फोर््ट शाखा, श्री सरबजीत सिंह जी नेें सर््वप्रथम राजभाषा इसके पश्चात फील्ड महाप्रबं धक महोदय श्री चमन लाल हिंदी के सं वैधानिक प्रावधानो,ं अधिनियमो,ं और नियमों की शीहं ामार जी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। तत्पश्चात श्री जानकारी बहुत ही रोचक ढंग से कार््ममिकों के बीच रखा और भगवान चौधरी, सहायक महाप्रबं धक महोदय ने माननीय गहृ सहज बोलचाल की भाषा के प्रयोग पर जोर दिया। मं त्री श्री अमित शाह का सं देश पढ़कर सुनाया। इस अवसर पर कार््ममिकों मेें हिंदी के प्रति जागरूकता प्रकट करने के इस समारोह मेें सुश्री रंजना टाटले जी ने अधिक से लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। अधिक लोगों को हिंदी मेें काम काज करने के लिए प्रोत्साहित सभी कार््ममिकों ने बढ़-चढकर भाग लिया। तत्पश्चात फील्ड किया। महाप्रबं धक महोदय, सहायक महाप्रबं धक महोदय, मखु ्य प्रबं धक महोदय/महोदया, द्वारा क्रमशः हिंदी दिवस की महत्ता कार््यक्रम का सं चालन राजभाषा अधिकारी रवि यादव पर अपना विचार प्रकट किया। द्वारा किया गया। हिंदी पखवाड़़ा के अंतर््गत हिंदी सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी’ प्रतियोगिता और वाचन प्रतियोगिता (विषय वस्ुत को देखकर पढ़ना) मेें प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कार््ममिकों को फील्ड महाप्रबं धक महोदय, सहायक महाप्रबं धक महोदय और मखु ्य प्रबं धक महोदय द्वारा पुरस्कार और प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। साथ ही जो प्रतिभागी प्रतियोगिता मेंे स्थान प्राप्त न कर सकेंे उन्हंहे प्रोत्साहन परु स्कार भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर सहायक महाप्रबं धक, श्री. भगवान चौधरी जी ने हिंदी के स्वरुप तथा इसकी बोलियों के बारे मेें जानकारी दी तथा अपनी बात को आगे बढ़़ाते हुए उन््होोंने कहा वर्ष्-2022-2023, अकं -6, जलु ाई-सितम्बर, 2022 11


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