QwypUnz tSu eksU;wes.V Ldwy dk bZ&eq[k i= o\"kZ 1 vad 2 ¼2023½ बधं क क कलम से . . . . . ‘खुद को श त करते रह यूं क त पधा कभी कती नह!ं। ‘और ‘सफलता श ण और यास पर नभर करती है।‘ तो आ*खर +न यह है क श ण है या? सरल श-द. म कह तो अपने आप को या कसी दसू रे को ऐसी श ा देना या कौशल 3वक सत करना िजससे कसी 3वशेष काय म वीणता आजाए, उसे श ण कहते ह;। एक श क क< श ा जीवन पयत= चलती रहती है िजसमे उसे श ा देने हेतु समय-समय पर वयं भी अपने शै क तर को वतमान आव+यकता के अनसु ार बनाने हेतु Aानाजन करते रहना पड़ता है। जब एक सामाCय -यि त, श क के तौर पर सामािजक दजा ाDत करता है तो वह उसका अपना अिजत Aान होता है, कं तु वह सदा श क बने रहता है तो के वल सतत Aानाजन के आधार पर ह! और यह सतत Aानाजन उसे श ण के माEयम से ह! ाDत होता है। श ण के दौरान श क वतमान समय क< आव+यकता को जानकर अपने शै *णक -यवहार म नवाचार को सिFFलत करता है तदपु राCत अपने 3वGयाHथय. को गुणवKतापणू श ा दान करता है। 3वGयालय ने िजस वष से जैन श ा सम3ृ M के मागदशन म काय ारंभ कया तभी से श क श ण के महKव को जानकर काय णाल! मे सFम लत कया। य. क श ण के संबंध म Nी जवाहरलाल जी का कहना है श ण ह! आधार है श क और आतंकवाद! के सजृ न करने का। तब से आज तक श क. के श ण पर 3वGयालय Gवारा समय-समय पर श ण कायOम सFपCन कराए जाते रहे ह; और उसके सकाराKमक पPरणाम भी ाDत हुए ह;। श ण कायOम म 3वEयालय ने जहाँ ऑनलाइन एवं ऑफलाइन पM त का योग कया तो वह! 3वGयालय म तो कभी 3वGयालय के बाहर भी जाकर श ण संपCन कराया। मोCयूमट वॉइस के इस अकं म श क श ण के महKव को बतलाने के साथ 3वGयाHथओं हेतु अ भ-यि त -य त करने का समािजक मंच दान करना है। साथ ह! जो 3वGयाथW उKकृ Xट पPरणाम के साथ सफल हुए ह; ऐसे पूव एवं वतमान 3वGयाHथओं और उनके अ भभावक. के 3वचार. को थान Yदया गया है। 3वGयालय पPरवार आशा करता है क< यह अकं सभी पाठक. हेतु ेरणा [ोत रहेगा। इसी भावना के साथ, सह..... बधं क क कलम स-े श ण को भावी बनाने के लए श ण बहुत भावी होता है। भावी श ण के लए श क को बस अपने 3वषय का पूण Aान होना पयाDत नह!ं है। इस लए 3वGयालय बंधन समय-समय पर सं था म तो कभी सं था के बाहर और कभी सं था म ह! बाहर के श क. को बुला श ण कायOमो को आयोिजत करता रहता है। यह श ण कायOम श को क< बे सक आव+यकताओं को Eयान म रखकर तैयार कये जाते है। इन श ण के माEयम से नै तक श ा, सं कार, समय बंधन, जीवन चPर\\, गुणवKता पूण श ण जैसे मूलभूत 3वषय. पर श को को तैयार कया जाता है। & veu vØkra tSu 1
संपादक य . . . . . श ण का महKव श क के जीवन म उतना ह! महKव है िजतना सामाCय सा जीवन -यतीत करने वाले -यि त को भोजन क< होती है, यंू क िजस कार एक सामाCय सा -यि त भी भोजन से अपने शर!र म ऊजा पाकर फू तमान हो जाता है, वैसे ह! एक श क श ण पाकर अपने शै *णक काय म ऊजा से भर जाता है और अHधक उ^ेि_लत हो अपने काय को नवाचार से भर देता है। मोCयूमट वॉइस के इस अंक म देश के 3व`यात श क. के 3वचार. को समावेस कर श क. जीवन म श ण के महKव को बतलाने का यास कया गया है। साथ ह! aीXमकाल!न अवकाश के दौरान िजन श क. ने श ण ाDत कया है उनके जीवन म आए बदलाव और नई शै *णक पM त को भी इस अंक म अनुभव के आधार पर तुत करने का यास कया गया है। िजसका एक मा\\ उ^े+य पाठक. को यह बतलाना है क< श क श ण आ*खर य. आव+यक है। श ण, श क. के साथ 3वGयालय पूव 3वGयाHथय. के 3वचार. को भी इस अकं म सFम लत कया गया है जो आज वतमान म अCय उcच क ाओं म सफलता के शखर पर ह;। साथ ह! जो 3वGयाथW पाचं वी एवं आठवीं क ा म बहुत अcछे अकं . से सफल हुए ह; उन 3वGयाHथओं के साथ-साथ सफल 3वGयाHथओं के अ भभावक. के 3वचार. को भी इस अकं म थान Yदया गया है। थान देने का उ^+े य 3वGयाHथय. एवं अ भभावक. क< सोच को मंच देने के साथ-साथ पाठक. म सकाराKमक ऊजा का सजृ न करना भी है। म; सभी सफल 3वGयाHथय. एवं अ भभावक. को Yदल से बधाई देती हूँ जो अपने लeय को पाने म सफल हुए ह;। देखने म आया है क< कु छ 3वGयाHथओं का पर! ा पPरणाम सतं ोषजनक नह!ं आया है जो कह!ं न कह!ं 3वGयाHथओं के मन को असहज करता है, पर मेरा उन 3वGयाHथओं से कहना है क< या हुआ अगर इस वष आपके मनःकू ल पPरणाम ाDत नह!ं हुआ, अभी तो जीवन क< शु आत है यास करते रहो इस बार के पPरणाम से श ा लो और आगे बढ़ो, भ3वXय म अव+य ह! सभी को आशानhु प पPरणाम ाDत ह.गे। सभी के उiजवल भ3वXय क< कामना के साथ, - यो त जनै धाना यापक क कलम से . . . . . सामाCय श ा से अनुभवी श क और अनभु वी श क से धानाEयापक क< िजFमेदार! तक का मेरा सफर अनेकानके अनभु व. से होकर गजु रा है। िजसमे मुझे सीखने के साथ अपने आपको बंधन क< नजर म सM भी करना पड़ा है तब कह!ं जाकर मुझे 3वGयालय बंधन के काय म अपनी सेवाएं देने का अवसर ाDत हुआ। जीवन म जो भी -यि त पढ़ना ारFभ कर देता है वह सामािजक पटल पर श क कहलाने लगता है पर वह श क बनता नह!ं है वरन श क बनने क< थम सीढ़! चढ़ता है और वह नकल पड़ता है कभी न समाDत होने वाले Aान hपी र ते पर। म;ने 3वGयालय म श क के तौर पर जब काय करना ारFभ कया तभी से आज तक अनके ानके श ण ाDत कये तब कह!ं जाकर म कु छ हद तक अपने शै *णक कौशल को गणु वKतापूण बना पाई हूँ। म;ने पाथवे इंटरनशे नल कू ल, Yद_ल! म दो बार, सन साइन व_ड वाइड कू ल, गोवा म एक बार श ण ाDत कया है. आज तक के पाचं वष के कायकाल म म; ३० से अHधक ऑनलाइन एवं ऑफलाइन पM त से ाDत कर चुक< हूँ और हमशे ा ह! श ण. से कु छ नया सीखती हूँ। म; सभी श क. से कहना चाहूंगी क< श ण पM त और अपने जीवन को -यवि थत बनाने म श ण बहुत ह! आव+यक है अतः सभी को श ण. को महKव देते हुए अपनी काय णाल! को उCनत बनाने का यास करना चाYहए और 3वGयाHथओं एवं देश 3वकास म अपना अमू_य और सारग भत योगदान देना चाYहए। - अनुराधा चौर सया 2
श\"ण क मह$ता जीवन 3वकास के थम चरण म द! जाने वाल! श ा ह! ाथ मक श ा है । जो भ3वXय क< नींव म थम शला का काय करती है िजस कार कमजोर नीवं कसी भी मजबतू व 3वशाल इमारत को धाराशाह! कर देती है उसी कार यYद ारिFभक श ा म नै तकता, मौ लकता, गुणवKता नह!ं होगी तो नि+चत ह! बालक का भ3वXय भी गत क< ओर चला जाएगा। आरिFभक बाल जीवन म द! गई श ा बालक के सामािजक, मान सक, नै तक, सां कृ तक, मान सक 3वकास के साथ-साथ ह! उसके -यि तKव 3वकास म भी महKKवपूण योगदान नभाती है। ाथ मक श ा छा\\. को 3व भCन 3वषय. क< बु नयाद! समझ को कौशलता पूवक योग करना सखाती है िजससे बालक के बोलने लखने पढ़ने व सीखने के कौशल का 3वकास होता है। श ण के े\\ म श ण क< महKवपूण भू मका होती है। कु छ सीखने से पहले सीखना भी अ नवाय है इस लए श क - श ण क< समय - समय पर 3वशेष आव+यकता होती है िजसके लए जhर! है क श ण क< गभं ीरता व उपयोHगता पर 3व+वास करते हुए श ण aहण कया जाए। जनै श ा सम3ृ M अपने थापना काल से आज तक इसी श ण क< महKता को समझ कर ह! काय करते हुए नरCतर अaशील है। समय काल के साथ-साथ इसके ाhप म अनेक. बदलाव आए ह;, जो जhर! भी है, सह! अथo म आज से लगभग 10 वष पहले बोया गया बीज अंकु Pरत प_ल3वत होते हुए आज एक 3वशाल वट वृ सम बनने क< तैयार! म है, िजसक< शाखाऐं मEय देश के बंुदेलखडं के अ तPर त अCय े\\ो व राiय. म भी फै लने लगी है। यह! जीवन 3वकास के पथ पर नरंतर बढ़ते कदम. क< पदचाप ह! तो है। - %ीमती मीनू जैन चीफ को)डन+ ेटर, जनै श\"ा सम/ृ 0 श\"क श\"ण 1य2 आव5यक है? या आपने कभी कोई बीज लगाकर पौधा उगाया है? जब हम बीज बोते ह;, कु छ समय बाद कोपल फू टती है हम उसका बड़ा जतन करते ह;, बहुत संभालते ह;। जब वह बड़ा हो जाता है उस म फू ल आने लगते ह; उसम फल आने लगते ह; तो या उसको संभालना छोड़ देते ह;? नह!ं। ये हो सकता है क उस तरह से नह!ं संभालते िजस तरह से हमने उसको जब बोया था तब संभाला था; ले कन उसको नय मत hप से पानी देना पड़ता है, समय समय पर खाद देनी पड़ती है; तभी पौधा अcछs तरह फलता फू लता है। ऐसा ह! कु छ श क को अपने श ण कौशल को बनाए रखने के लए करना जhर! है। आज के वAै ा नक युग म हर रोज कु छ नया हमारे जीवन म जुड़ता रहता है और श क िजन बcच. के जीवन को भा3वत करते ह; वह भ3वXय के सजृ नहार है। तो यह उनका कत-य है क व अपनी सोच को उस समय के साथ मलाकर आज उन बcच. का संवधन कर जो कल को संवारगे। या आप जानते ह; क एक अके ला श क अपने कPरयर के दौरान औसतन 3000 से अHधक छा\\. को भा3वत करता है? श क. के hप म, वे ऐसी ि थ त म ह; जहां वे अपने छा\\. के शै *णक और समa 3वकास को भा3वत करते ह;। ले कन सीखने के माहौल म बदलाव के साथ, श क. और 3वGयाHथय. के बीच क< खाई लगातार बढ़ती जा रह! है। श क श ण श क. को नवीनतम झान. और संसाधन. के साथ अGयतन करके इस अतं र को कम करने म मदद करता है। चाहे वह बेहतर क ा बंधन हो या श ण के नए तर!के , श ण के कई फायदे ह; जो श क. के साथ-साथ छा\\. क< भी मदद करते ह;। 3
आज के बcचे वीuडयो और तु तय. के माEयम से ऑनलाइन सीखना पसंद करते ह;। वे कई संसाधन. का उपयोग करते ह; जो उCह अकाद मक hप से लाभािCवत करते ह;। टे नोलॉजी और श ा को अलग करना लगभग असंभव हो गया है । श क श ण श क. को उनक< क ाओं म टे नोलॉजी लाने के लए उHचत Aान से लैस करता है। वे सीखने क< सु3वधा के साथ-साथ छा\\. क< Hच को बढ़ाने के लए रणनी तक hप से इले vॉ नक गैजेwस का उपयोग कर सकते ह;। इसके अलावा, वे छा\\. को यह भी बता सकते ह; क इंटरनटे पर कहां और या देखना है। नई श ण रणनी तयाँ सीखना एक श क क< श ण मताओं को बढ़ाता है। एक छा\\ क< तरह, Kयेक श क को अपने वयं के कौशल का आकं लन करने के लए एक श ण रणनी त खोजने क< आव+यकता होती है जो उनके लए उपयु त हो। श क श ण ऐसे तर!क. पर Eयान कYxत करता है जो यह पहचानता है क छा\\. के लए या अcछा है और एक श क इसका उपयोग कै से कर सकता है। श ण म के वल छा\\. को पाठ सं े3षत करने से कह!ं अHधक शा मल है। श ण कायOम. के माEयम से, श क संगठन और बंधन जसै े कौशल. म सुधार कर सकते ह;, जो श ण पेशे का अ भCन अंग ह;। श क 3वGयाHथय. के -यवहार का 3व+लेषण करके शार!Pरक और मान सक दोन. कार क< सम याओं क< पहचान भी कर सकते ह; । चंू क छा\\ कू ल म बहुत समय yबताते ह;, ऐसे कौशल उCह सह! सहायता खोजने और मु^. को ज_द! हल करने म मदद कर सकते ह;। Kयेक क ा म जीवन के सभी े\\. के छा\\ होते ह;। इसम ऐसे बcचे शा मल हो सकते ह; जो सामािजक मु^. और सीखने क< अ मताओं सYहत 3व भCन सम याओं का सामना करते ह;। एक श क के hप म उनक< आव+यकताओं को Eयान म रखते हुए समझना और पढ़ाना आव+यक है। श ण इन सम याओं को समझने और सुलझाने म मदद करता है। श क सीधे एक छा\\ क< सीखने और समझ को भा3वत करते है। िजस तरह से वे पढ़ाते ह;, िजस 3वषय को वे कवर करते ह;, और उनका समa रवैया छा\\ क< शै *णक Hच को बना या yबगाड़ सकता है। एक अcछs तरह से श त श क, जो अपने श ण 3वHधय. पर अGयतन है, 3वGयाथW के दशन को बेहतर ढंग से भा3वत करेगा। छा\\. के लए, श क उनके भरोसेमंद वय क. म से एक ह;। नतीजतन, वे अ सर अपनी नजी सम याओं को लेकर श क. के पास आते ह;। श क इन मु^. से बाहर आने के लए बcच. का मागदशन करते हुए एक Nोता और परामशदाता क< भू मका नभाते ह;। श क श ण कायOम. के साथ , श क पयाDत सहायता दान करना और संवेदनशील मु^. को संभालना सीख सकते ह;। बढ़ते आ3वXकार. और खोज. के साथ, पा{यOम लगातार अपडेट होता रहता है। नय मत श ण से श क. को नवीनतम जानकार! के साथ अप-टू -डेट रहने और वतमान पा{यOम से पPरHचत होने म मदद मलती है। अHधकांश श ण कायOम श क. के लए अCय श क. से मलने का थान होते ह;। साथी श क अपनी 3वशेषAता और अनुभव साझा कर सकते ह;, और अCय तभागी उनसे सीख सकते ह;। यह सहकमW सीखने को बढ़ावा देता है और श क. को उन ि थ तय. के लए तैयार करता है जो अभी आने वाल! ह;। श क भी अपनी सम याओं को साझा कर सकते ह; जब क अCय श क सव|Kतम संभव समाधान खोजने के लए सहायता करते ह;। कु ल मलाकर, श ण कायOम औपचाPरक के साथ-साथ अनौपचाPरक श ा के लए एक थान बन जाते ह;। श ण के yबना, आज के श ा उGयोग क< अKयHधक मांग वाल! कृ त को बनाए रखना चुनौतीपूण हो सकता है। श ण कायOम. के माEयम से, हम सीखने के वातावरण का नमाण कर सकते ह; जो श क. और छा\\. दोन. के लए आदश हो। ाचाया+, ह9राम:ण - /पना\"ी वडोद7रया 8ेनर, जनै श\"ा सम/ृ 0 ाथ मक /व<यालय, अहमदाबाद 4
श\"क श\"ण एक प7रचय ….. श\"क2 के लए 8े नगं एवं वक+ शॉप क मह$ता श क श ण रणनी तय. को बढ़ावा देता है जो एक श क क< श ण मताओं को बढ़ाता है। एक छा\\ क< तरह, Kयेक श क को अपने वयं के कौशल का आकलन करने के लए एक श ण रणनी त खोजने क< आव+यकता होती है जो उनके लए उपयु त हो। इसी Oम म, श क कायशालाएं हाल के Yदन. म चचा का 3वषय बनी हुई ह;। समय बदल रहा है, पढ़ाने का तर!का बदल रहा है और छा\\. क< मान सकता भी बदल रह! है। COVID महामार! ने पूर! श ा णाल! और पारंपPरक श ण को ऑनलाइन कर Yदया, कु छ श क बदलाव के लए तैयार नह!ं थ।े श क कायशालाएं उनके लए वरदान के hप म सामने आ‚। श\"क कायश+ ालाएं 1या हA? कायशालाओं क< पPरभाषा है- एक सं Dत गहन पा{यOम, एक संगोXठs, या बैठक. क< एक Nखंृ ला िजसम आमतौर पर कम सं`या म तभाHगय. के बीच बातचीत और सूचनाओं के आदान- दान पर जोर Yदया जाता है। इस लए यह कहा जा सकता है क श क श ण कायशालाएँ ऐसी कायशालाएँ ह; जो श क. को नई श ण रणनी तय., क ा बंधन क< रणनी तय., तकनीक< उCन त आYद को 3वक सत करने और सीखने म मदद करती ह;। सं पे म, श क श ण कायशालाएँ श क. को समa hप से नरंतर 3वकास के अवसर दान करती ह; उनक< मताओं का सव|Kतम उपयोग करने के लए मागदशन एवं ेPरत करती ह;। श\"क2 के लए यह कायश+ ालाएँ 1य2 मह$वपूण+ हA? आगे बढ़ते रहने के लए, श ण क< नयी तकनीक सीखने के लए, तकनीक< नर रता से बचने के लए और एक छा\\ के पसंद!दा होने के लए, एक श क को खदु को अपडटे ेड रखने क< आव+यकता होती है और इसी लए कहते ह; क श ण हमेशा सीखने क< Oया है और यYद कोई इस फ<_ड म कदम रख रहा है तो श ण के लए उCह अपडटे ेड होने के लए वयं को तैयार करना चाYहए। श क श ण कायशालाओं को श क. का भरपरू सहयोग मल रहा है, कई सं थान और यहां तक क सरकार भी श क. को श क श ण कायशाला कायOम दान करती है। श\"क2 के 8े नगं से लाभ: 8Eड श क छा\\. पर गहरा भाव डाल सकते ह;, उCह क ा म बेहतर ढंग से संलƒन होने म मदद कर सकते ह; और उcच शै *णक उपलि„धयां हा सल कर सकते ह;। जसै े-जसै े छा\\ कू ल म अपने समय का आनदं लेना शुh करते ह;, उपि थ त म काफ< सुधार होता है, िजससे छा\\. Gवारा पढ़ाई बीच म ह! छोड़ने क< दर कम हो जाती है। छा\\ वतः बेहतर सामािजक 3वकास और अनुशासन Yदखाते ह; और समाज म अपनी पहचान अपने बल पर बना सकते ह;| यहाँ हम लयोनाड| दा 3वचं ी का एक उMरण साझा करना चाहगे- “जवानी म सीखी गई सीख बुढ़ापे क< बुराई को रोकती है; और यYद आप समझते ह; क बुढ़ापा अपने भोजन के लए Aान रखता है, तो आप अपने आप को युवाव था म ऐसा आचरण करगे क आपके बुढ़ापे म पोषण क< कमी नह!ं होगी”, एक श क को हमेशा सीखते रहना चाYहए। हैFपी ट9Gचगं और हैFपी ल नगI ! - द9पक गग+ मोKटवेशनल Lपीकर एवं कॉपMरेट 8ैनर, नई KदOल9 5
श\"क2 क कलाम से . . . . . श ण के माEयम से मैने यह अनुभव कया क< हमारे जीवन म कोई भी काय को करने क< मन मे इcछाशि त व आKम3व+वास होना आव+यक है। हम न+चय व सक_प से कया गया कYठन से कYठन काय भी सरल व सुगम हो जाता है। म; भी पहले कसी के सामने बात रखने व कहने से डर लगता था क< म; कु छ गलत न बोल दँ ू या कु छ मुझ से गलत काय न हो जाये। और मुझे इन सब बात. से डर लगता था। और सभी श ण. व मेरे सहपाYठय. ने मेरा सपोट कया व मदद क< और मेरा मनोबल बढाया अब यह है क< कु छ हद तक मेरा डर कम हुआ है। अब मुझ म कु छ बदलाव आया है अपनी बात रख भी पाती हूँ कह पाती हूं और मैने श ण के माEयम से सीखा क< हम सबसे पहले अपने पा{यOम क< तैयार! करना वयं का मू_याकन - व बcचो का मू_यांकन करना आव+यक है। इस से हम यह Aात होता है। क< कस तर!के से बcच. को पढाने मे Yदलच प व नये झान ला सके । नये खले . से, ऑuडयो से, 3वuडयो से, Fयूिजक से, डासं कहा नओं से, क3वता से, गायन से, ाकृ तक व तुओं से, पयावरण इKयाYद के साथ माEयम से भी। हम अपने लशे न Dलान के मुताyबक ह! हम अपने लास hम के बातावरण का बदलाव करते रहना चाYहयो। हम अगले Yदन कस ट!Hचगं ऐड क< आव+यकता है या कसी व तु आYद क< आव+यकता हो तो पूव म पहले से अपनी डायर! म नोट कर ल। संभवतः यह श ण का फल है है क< आज म; योƒय श क बनने क< पहल! सीढ़! चढ़ने म सफल हो पाई हूँ। - / यंका तवार9 म;ने श ण के दौरान समय का बंधन करना सीखा है साथ ह! साथ नई ग त3वHधय. एवं काय णा लय. के माEयम से बcच. को पढ़ाना सीखा इसके अलावा अ भभावक. के साथ सपं क था3पत करना त तदउपरातं फोलोअप लेने जैसे काय को जाना । इस वष के श ण म म;ने बcच. क< एकाa मता एकाa शि त और इcछा शि त को जाaत करना भी सीखा । तथा यह भी सीखा क कै से ˆ मत 3वGयाथW को अEययन से जोड़ा जा सकता है। - शवानी सेन 6
म;ने श ण के दौरान समय के अनु प चलना सखा सके मेने इस वष के श ण मे पूव ाथ मक बcच. को अपने श ण काय के दौरान ऑuडओ 3वजुअल Yदखावा कहा नयां सुनाकर एवं वतमान श ा नी त के अनसु ार खेल खेल मे पढ़ाना सीखा, साथ ह! मेने सीखा क< समूह मे कै से काय कया जा सकता है ओर कै से बड़ी से बड़ी कYठनाइय. को सुलझाया जा सकता है। - रंजना सेन श ण के Gवारा म;ने अनभु व कया क बcच. आसपास के वातावरण से भी बcच. बहुत कु छ सीखते ह; क ा म जाने के पूव टॉ3पक के अनसु ार क ा को कै से -यवि थत करना है बcच. को ोKसाYहत करने के लए उCह अलग-अलग इनाम देकर उCह ोKसाYहत कर सकते ह; िजससे वह सीखने को लाला यत रहे, अगर कसी बcचे को एक बार समझाने से समझ ना आए तो उसे अलग-अलग ग त3वHधय. के माEयम से समझाने का यास करना म;ने इस श ण से सीखा, संगीत व बॉडी मूवमट से बcचे न के वल सुनकर बि_क अपने बॉडी मवू मट से भी बहुत कु छ सीखते ह;, श ण के Gवारा मन; े टाइम मैनजे मट और लेसन Dलान के बारे म भी सीखा यह श ण मरे ा पहला अनुभव रहा िजससे म;ने बहुत कु छ सीखा और आगे सीखने क< आशा रखती हूं। - पूजा तवार9 श ण के Gवारा म;ने अनभु व कया क पढ़ाने के एक नह!ं बि_क अनके ो तर!के होते ह; और बcचे ना के वल पढ़ाने से या समझाने से बि_क आसपास के वातावरण से भी बहुत कु छ सीखते ह;, अगर कु छ समझाने के लए एि ट3वट! का उपयोग कर तो बcचे iयादा अcछे से उसे सीख सकते ह; और उसे वह याद भी रहेगा। संगीत या गेम के माEयम से भी उसे सखा सकते ह;, यह त ण मेरा पहला अनभु व है इसम म;ने जाना मदर ट!चर या ह; और क ा म जाने के पवू या- या तैयार! करना आव+यक है, क ा म जाने से पवू टॉ3पक अनसु ार क ा को -यवि थत करना। अतः उस क ा के आसपास का वातावरण उसके टॉ3पक के अनसु ार करना, श ण के पूव मुझे अपनी बात करने म या सभी के सामने पढ़ाने म डर लगता था वो भी बहुत हद तक कम हुआ। - मेघा जनै श ण के Gवारा मैने सीखा क नCह मुCह बcच. को अ भभावक. क< अनपु ि थ त म 5 से 6 घटं े तक कै से सभं ालना चाYहए और उनको कै से समझाइस देकर नै तक मू_य. को उनके जीवन म घोला जा सकता है Œामा, डासं , टोर! इKयाYद माEयम. को योग नै तक मू_य. को समझाने म कै से योग म लाया जाए यह! एक नया अनभु व था साथ ह! बcच. को कै से आपस म 3वषय. को जोड़कर पढ़ाया जाए यह! म;ने जाना। - पूजा साहू इस वष के HगXम काल!न आठ Yदवसीय श ण कायOम से मेने मदर ट!चर कॉCसेDट को जाना जो क< बड़े एवं शहर! 3वGयालाओं का सबसे पसंद!दा पूव ाथ मकता शै *णक पM त ाhप मेरे लए भी यह नया अनुभव है य. क इसम एक ह! श क को सभी 3वषयो क< िजFमेदार! के साथ साथ बcचे के सभी े\\. मे 3वकास करने क< भी िज़Fमेदार! होती है जो क< आने वाले समय मे हम सभी को ये चुनौती होगी। - नेहा सेन 7
श ण कायOम कह!ं न कह!ं ऊजा दान करते है और नये ाhप का भी Aान कराते है 3वGयालय बंधन श क से या करवाना चाहता है कै से करवाना चाहता है और या पPरणाम चाहता है यह जानने का अवसर श क श ण के दौरान ह! मालूम करता है। इस वष म;ने एक नये कॉCसेDट को जाना जो क संभवतः अपने \\े के 3वGयालय. के लए नया होगा। इस वष जहाँ 3वGयालय पवू ाथ मक छा\\. हेतु बैग लेस ाhप ारंभ कर रहा है तो वह!ं श क. एवं अ भभावक. के मEय तकनीक< संसाधन. का योग भी करने वाला है नई श ा नी त के अनसु ार जो भी Yदशा नदŽश सु नि+चत कये गये है उन सभी नदŽश. के पPरपालन हेतु हम सभी को इस वष के श क श ण म श त कया गया जो क कह!ं न कह!ं श क. अ भभावक. एवं 3वGयाHथय. के लए Yहतकर होगा। इस वष 3वGयालय बंधन क< मनसा है क पूव ाथ मक बcचे yबना बैग के 3वGयालय आय ह! साथ ह! वह गहृ काय जसै े तनावपूण काय से मु त रह। साथ ह! क ा एक एवं दो के 3वGयाथW भी सम त काय 3वGयालय म ह! संपCन कर िजससे बcचे घर म तनाव मु त जीवन -यतीत कर सक। - / यकं ा पटै7रया पूव+ छाR2 के /वचार-------- मै मानसी सोनी 3पता Nी हPर साद सोनी। मेने इस वष क ा 12वी मे शासक<य उcचतर माEय मक 3वGयालय घुवारा से 95% अकं . से उKतीण क< है मने े 3वGयालय मे थम और िजले मे तीसरा थान ाDत कया है िजसका Nेय अपने गु जनो एवं माता 3पता को देती हूँ साथ Yह मेने फू लचxं जैन म.Cयुमट कू ल के सम त श क. का आभार -य त करती हूँ क< आप लोगो ने जो आधाPरय Aान दान कया संभवत उसी का ह! पPरणाम है क< आज मे सफल हुई हूँ। - मानसी सोनी म; सव थम अपने 3वGयालय फू लचxं जनै मोCयूमट कू ल घवु ारा का आभार -य त करती हूँ क उCह.ने मेरे 3वचार. को महKव Yदया। कसी भी 3वGयाथW के जीवन को सफल बनाने के लए उसके पPरवार के बाद दसू रा सबसे बड़ा योगदान उसके 3वGयालय का होता है। म; यह कहना चाहूंगी क म; 12वीं क< पर! ा अcछे अकं . से उKतीण कर पाई इसका महKवपणू कारण मेर! नीवं का मजबूत होना है और म; इस 3वGयालय म पढ़ाने वाले सभी श क. को धCयवाद देती हूँ क उCह.ने मुझे इस काyबल बनाया क म; इस मुकाम तक पहुंची हूं। - अना मका श1ु ला मै कु . अपे ा कु जरू 3पता Nी मु तकु मार कु जूर माता Nी मती तेज कु मार! शासक<य कCया उcचतर् माEय मक 3वGयालय घुवारा क ा 10वी क< पर! ा मे 92.4% ाDत कर बहुत खशु हु और मेरे सवNेठ सफलता के पीछे बहुत. का हाथ रहा है मैने अपनी माEय मक श ा फू लचंx जैन मोCयमु ट कू ल घवु ारा मे पुरा कया जँहा कू ल के बंधक डा. अ ण कु मार जनै व शै *णक टॉफ के Mारा जो मागदशन व सं कार मला वो मेर! सफालता का बु नयाद बना। िजसको मै शासक<य उcचतर माEय मक 3वGयालय घुवारा मे ाचाय Nी बी एल जाप त के NेXठ शाला संचालन व गु जन. क< मेहनत व मागदशन से सफलता को जार! रखने मे कामयाब रह! ओर सवNेXठ सफलता को ाDत करने मे सफल रह! अतः मे अपनी सफलता का शेय माता 3पता के अलावा फू लचंx जनै म.Cयूमट कू ल घुवारा के बंधक डा. अ ण कु मार जनै व शै *णक टॉफ और शासक<य कCया उcचतर माEय मक 3वGयालय घवु ारा के ाचाय Nी बी एल जाप त शै *णक टाफ िजCहोने मेरे साथ कड़ी मेहनत के साथ साथ समय समय पर सवNेXठ मागदशन Yदया ह;। - अपे\"ा कु जूर 8
म;ने क ा 10 म सFपूण मEय देश म 8वां थान ाDत कया है, िजसम म;ने 97.40 अकं ाDत कए है। मेर! सफलता का Nेय फू लचंx जनै मोCयूमट कू ल घुवारा को जाता है, जहां पर म;ने नसर! से आठवीं तक क< पढ़ाई पूण क<। वहां से मेरा आधार मजबूत होने के कारण म; आज इतनी सफल बन पाई हूं। इस लए म; इस 3वGयालय का धCयवाद करती हूँ क मुझे इसके काyबल बनाया। साथ ह! म; शासक<य कCया उcचतर माEय मक 3वGयालय के श क. का भी धCयवाद करती हूं क मुझे इस योƒय बनाया। अतं म कहूँगी अगर िजंदगी म सह! मागदशन मलता रहेगा तो हम कसी भी चुनौती को पूण कर सकते है और अपना लeय ाDत कर सकते ह;। - अनुSका जनै सभी गु जन. के मागदशन से ह! मुझे यह सफलता ाDत हुई है। इसका Nेय म; अपने माता 3पता के साथ साथ गु जन. को भी देती हूं िजCह.ने समय समय पर मुझे कसी भी +न म सम या होने पर मुझे मागदशन Yदया। 8वीं तक म;ने फू लचंx जैन मोCयूमट कू ल म पढ़ाई क< है। पैसे क< सम या होने के कारण म; बाहर पढ़ने नह!ं गई तथा सरकार! कू ल म ह! पढ़ाई क<। शु आत म अaं ेजी कू ल से सरकार! के YहCद! कू ल क< पढ़ाई म काफ< सम या आई मेरे माता 3पता ने पैस. के लए बहुत संघष कया है। उCह.ने मुझे बहुत ोKसाYहत कया है। कसी +न म सम या होने पर सोशल मीuडया भी इ तेमाल कया है। म; आगे चलकर कले टर बनना चाहती हूँ। म; अपने लeय ािDत के लए ऐसे ह! मेहनत करती रहूंगी। - सिृ Sटका म%ा छाR2 के /वचार -------- म;ने क ा 8 वीं म 528 अकं (88%) ाDत कर क ा म पहला थान ाDत कया है। म;ने यहां कू ल म क ा यकू े जी से 8वीं तक श ा ाDत क< है। म;ने यहां बहुत सी बात. को सीखा। जसै े श क, माता- 3पता और बुजुगo का आदर सKकार व सFमान करना। म; अपने श क. का और अपने माता-3पता का धCयवाद करती हूं, िजCह.ने मुझे पढ़ाया और आज इस काyबल बनाया क< म; अपने लeय को पाने म सफल हो पाई हूँ । - नUै सी सोनी म; फू लचxं जैन मोCयमू ट कू ल घवु ारा का क ा 8वीं का छा\\ हूँ और मैने इस वष क ा 8वीं 84.85% अंक. से उKतीण क< है। म;ने अपनी ारं भक श ा यह! से पूण क< है म;ने इस 3वGयालय म समय का सदपु योग करना और पढ़ाई को खले के माEयम से सीखना तथा अCय Oयाकलाप. के Gवारा म;ने बहुत कु छ सीखा जो भ3वXय म मेरे जीवन को सफल बनायेगा। - देव असाट9 आज मुझे यह सफलता गु जन. के कारण मल! है। गु जन. के साथ साथ मेर! बहन ने भी मेर! पढ़ाई म सहायता क< है। मुझे इस 3वGयालय म पढ़ाई को लेकर कोई भी सम या हो सभी श क. ने मेर! पुर! मदद क< है। मेरे माता 3पता ने भी मुझे ेPरत कया है और मेरा मनोबल बढ़ाया है। म; बड़ी होकर IPS officer बनना चाहती हूं। आगे चलकर भी म; मेहनत कhं गी और अपने माता 3पता और गु जन. का नाम रोशन कhं गी। - गौर9 म%ा 9
मै फू लचंx जैन मोCयूमट कू ल क< छा\\ा हूँ। मेने क ा पांचवी म 81.50 तशत अकं ाDत कये ह;। िजसके Nेय म अपने माता-3पता और गु जन. को देती हूँ। म; आगे चलकर डॉ टर बनकर समाज क< सेवा करना चाहती हूँ। म;ने 3वGयालय म अपने गु जन. से पढ़ाई के साथ अनशु ासन, बड़. का सFमान और अपनी भावनाओं को -य त करना सीखा है। - नVया जैन अ भभावक2 के /वचार….. मेरे सभी बcच. क ारं भक श ा फू लचxं जैन मोCयूमट कू ल से हुई है म; अपने बcच. क< पढ़ाई से संतुXट हूं। मेर! बड़ी बेट! मानसी िजसने क ा 8 वीं तक इस 3वGयालय म अEययन संपCन कया इसके प+चात ् 12 क ा शासक<य कCया उcचतर माEय मक 3वGयालय घुवारा से उKकृ Xट अंक. से उKतीण क< है साथ ह! नCै सी ने 8 वीं क ा म 3वGयालय म थम थान पाया है जो क कह! न कह!ं 3वGयालय के श क. के Gवारा सह! मागदशन दान करने का ह! पPरणाम है म; दोन. 3वGयालय. के श क. को धCयवाद देती हूँ क उCह.ने हमारे बcच. को सफलता Yदलाने म अमू_य योगदान दान कया। - रेखा सोनी सव थम म; 3वGयालय तथा 3वGयालय के सभी श को को धCयवाद देती हूँ। कहते है क नीवं मजबूत हो तो इमारत भी उस पर मजबूत ह! बनती है और इमारत बनने क< शु आत हो चकु < है और जब यह इमारत परू ! बन जायेगी अथात ् जब मेर! बेट! अपने लeय को ाDत कर लेगी उसम एक महKवपूण योगदान आप सभी का रहेगा। - स/वता श1ु ला फू लचCx जनै मोCयूमट कू ल से मेरे सभी बcचो क< ारं भक श ा पणू हुई है इसम मेरे बcच. के आधाPरय Aान क< नीवं को तैयार कया गया है िजसम हमारे बcच. को नै तकता सदाचार मौ लकता सां कृ तक 3वकास क< और भी 3वशेष Eयान Yदया गया है। अतः मै 3वGयालय के सभी श क. का धCयवाद करती हूँ। - तजे कु मार9 कु जूर My self Pawan Kumar Jain, father of Miss. Anushka Jain, who has secured 8th rank in Madhya Pradesh in class 10th with 97.4% marks. His basic education (Pre-primary to middle class) is completed in Phoolchandra Jain Monument School Ghuwara. His base in studies is perfectly made in this School. I am expressing my special gratitude towards this school by the help of which Anushka has secured 8th rank in (M.P.). Thank you Phoolchandra Jain Monument School all staff. I also thank Govt. Girls Higher Secondary school, Ghuwara teaching staffs that’s supported many kinds of my doughter. - Dr. Pawan Jain नगर के बीच. बीच ि थत सव सु3वधा यु त कFDयटू र श ा, समाCय Aान तथा 3व भCन तयोगी पर! ा क< तैयार! कराने वाला फू लचंx जनै मोCयुमट मuडल कू ल घुवारा नगर का सव|Kतम 3वGयालय है। 3वGयालय नरंतर ग त क< ओर अaसर है। छा\\ / छा\\ाओं का शै *णत तर अ त उKतम है। नरंतर ग त कर। इCह! शुभकामनाओं के साथ। - एस. के . जैन ाचाय,+ %ी ग० ० वणY पी.जी. कॉलेज, घुवारा 10
ijh{kk ifj.kke 2022&23 ¼ikapoh ,oa vkBoh½ ikapoh Js; tSu uO;k tSu xkSjh feJk _\"kHk f}osnh vaf’kdk tSu lqgkuk flag ekgh tSu 84-00 82-00 80-00 80-00 79-00 79-00 78-00 vkBoh uSUlh lksuh l`\"Vh tSu nso vlkVh vaf’kdk ;kno tkx`fr lkgw 88-00 87-83 84-67 81-50 79-67 Áxfr tSu f’kokuh ;kno g\"kZo/kZu flag jktiwr vkfnR; pkSos 79-33 78-00 76-50 75-67 सफलता के नयम आचाय देव¡त ने कहा क कठोप नषद म मनXु य के जीवन के दो माग बताए गए ह;। एक है ेय माग और दसू रा है Nेय माग। ेय माग वह है जो दसू र. Gवारा बनाया गया है, जो आसान है और िजस पर आप आसानी से जा तो सकते ह;, मगर अपनी मंिजल तक नह!ं पहुंच पाते। दसू रा है Nेय माग, Nेय माग वह है जो कYठन तो है मगर आप थोड़ा पPरNम, थोड़े पु षाथ के साथ इस माग पर चलते हुए अपनी मंिजल को ाDत कर लेते ह;। भीड़ के साथ चलने वाल. क< कोई पहचान नह!ं होती, बि_क भीड़ से अलग अपना रा ता बनाने वाले और दसू र. को भी उस रा ते पर चलाने वाले लोग ह! दु नया म महान कहे जाते ह;। उ¢ के िजस पड़ाव से बcचे गजु र रहे ह., उस व त शर!र म तेजी से हाम|Cस चज होते ह;। इस उ¢ म जो बcचे Yदल से सोचते ह; वो अपने लeय से भटक जाते ह;, इसके 3वपर!त जो बcचे Yदमाग से सोचते है और अपने लeय क< ािDत के लए कठोर पPरNम करते ह; वे नि+चत ह! उiiवल भ3वXय का नमाण करते ह;। सZपादक मंडल MkW- v#.k ds- tSu ¼Áca/kd½] Jhefr T;ksfr tSu ¼laiknd½] veu vØkar tSu ¼lg&Áca/kd½ vuqjk/kk pkSjfl;k ,oa Áxfr lDls1u1k ¼Á/kkuk/;kid½ ,oa leLr f’k{kd
Phoolchandra Jain Monument School Ghuwara, District – Chhatarpur (MP) 471313 Email: [email protected], Contact: 9424910900, 9300485622, 7869107073 Dise Code: 23090128201 fo|ky; ds [kkl foanq %& 1- orZeku vko’;drkuqlkj xq.koRrkiw.kZ f’k{kk 2- lhlhbZ iSVuZ ij ekfld ewY;kadu ,oa ifjppkZ 3- dEI;wVj f’k{kk 4- lrr vfHkHkkod lEesyu ,oa ifjppkZ 5- Mkal] Mªkek ,oa laxhr f’k{kk 6- detksj cPpksa gsrq ,,y,l d{kk,sa 7- [kys f’k{kk 8- Ikkoj oSdi gsrq buoVZj lqfo/kk 9- vko’;drkuqlkj ’kS{kf.kd Hkze.k 10- vkVZ ,.M Øk¶V vkSj oksds’kuy f’k{kk 11- vkjvks ds }kjk LoPN fQYVj ikuh 12- lhlhVhoh ds }kjk lqj{kk 13- ,csdl ,Mwds’ku ls ekufld fodkl dk Á;kl 14- Áfr;ksxh ijh{kk gsrq vk/kkj fuekZ.k 15- lkekftd tqMko gsrq lekftd fØ;kdykiksa dk vk;kstu 16- iwoZ lqfuf’pr Áca/ku Ák#i 17- vkokxeu lqfo/kk gsrq cl ,oa lalk/ku 18- lexz LokLF; ijh{k.k 19- lkaLd`frd tqMko gsrq lkaLd`frd dk;ZØeksa dk vk;kstu 20- laLdkjksa ds l`tu gsrq laLdkj iks”zkd dk;ZØe Áos’k ÁkjaHk d{kk ulZjh ls vkBoh rd l= ÁkjaHk % 15 twu 2023 12
Search
Read the Text Version
- 1 - 12
Pages: