Important Announcement
PubHTML5 Scheduled Server Maintenance on (GMT) Sunday, June 26th, 2:00 am - 8:00 am.
PubHTML5 site will be inoperative during the times indicated!

Home Explore ebook-DOL

ebook-DOL

Published by Kewal Krishan, 2015-01-15 01:30:29

Description: ebook-DOL

Search

Read the Text Version

राजभाषा विभाग से सबं धं ित - ई-बकुविषय सचू ी1- राजभाषा विभाग का पररचय ि दाययत्ि2- राजभाषा नीयि सबं धं ी प्रमखु यनदेश3- राजभाषा नीयि का कायाना ्ियन4- के न्रीय ह दं ी प्रशशक्षण संस्थान5- के न्रीय अनुिाद ब्यरू ो6- क्षेत्रीय कायाना ्ियन कायाायय7- ससं दीय राजभाषा सशमयि8- कम्प्यटू र पर ह दं ी के प्रयोग के शयए आई टी टू ल्स एिं सॉफ्टिये र9- राजभाषा ह दं ी के प्रचार-प्रसार के शयए प्रकाशन10-पुरस्कार योजनाएं11-कें र के काशमका ों के शयए प्रोत्सा न योजनाएं12-राजभाषा विभाग की उपयब्ब्धयां

अध्याय - 1 राजभाषा विभाग का परिचय व दाययत्य राजभाषा सबं ंधी सावं िधायनक और कानूनी व्यिस्थाओं का अनुपायन करने एिं सघं के सरकारीकामकाज में ह दं ी के प्रयोग को बढािा देने के शयए गृ मंत्रायय के एक स्ििंत्र विभाग के रूप में जनू , 1975मंे राजभाषा विभाग की स्थापना की गई थी। उसी समय से य विभाग संघ के सरकारी कामकाज मंे ह दं ी काप्रगामी प्रयोग बढाने के शयए प्रयास करिा आ र ा ै।राजभाषा विभाग के दाययत्ि यनम्पनशयखखि ंै- 1. सवं िधान में राजभाषा से संबंधधि उपबधं ों िथा राजभाषा अधिनियम, 1963 के उपबधं ों का कायाना ्ियन, उन उपबधं ों को छोड़कर ब्जनका कायाान्ियन ककसी अन्य विभाग को सौंप हदया गया ै। 2. राजभाषा सकं ल्प, 1968 के अनुबधं ों के अनसु ार के न्र सरकार के कायाया यों और सािजा यनक क्षेत्रों बकै ों/उपक्रमों द्िारा कायाना ्ियन के शयए राजभाषा ह दं ी के प्रचार और प्रगामी प्रयोग ेिु िावषकि कायकि ्रम िैयार ककया जािा ै और िावषका कायका ्रम मंे हदए गए यक्ष्यों िथा राजभाषा कायाान्ियन की प्रगयि पर एक िावषका मलू ्यांकन ररपोटा िैयार करिा ै जोकक सदन के दोनों सदनों के पटय पर रखी जािी ै । 3. राजभाषा अधधयनयम, 1963 के अिं गिा प्रदत्ि शब्तियों का प्रयोग करिे ुए कें र सरकार के कायााययों आहद मंे राजभाषा नीयि का अनुपायन सुयनब्चचि कराने के शयए राजभाषा नियम, 1976 बनाए गए ैं । इन यनयमों के अनुसार भाषाई आधार पर देश को यनम्पनशयखखि िीन क्षेत्रों मंे रखा गया ै । (i) 'क्षते ्र क' से बब ार, ररयाणा, ह माचय प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्िीसगढ, झारखडं ़, उत्िराखंड राजस्थान और उत्िर प्रदेश राज्य िथा अंडमान और यनकोबार द्िीप समू , हदल्यी सघं राज्य क्षेत्र अशभप्रेि ैं । (ii) 'क्षेत्र ख' से गजु राि, म ाराष्ट्र और पंजाब राज्य िथा चंडीगढ, दमण और दीि िथा दादरा और नगर िेयी सघं राज्य क्षते ्र अशभप्रेि ंै । (iii) क्षते ्र ‘ग' मंे उपयुता ि राज्यों िथा संघ राज्य क्षेत्रों से शभन्न राज्य िथा संघ राज्य क्षते ्र अशभप्रेि ंै । 4. उच्च न्यायायय की कायिा ा ी में अगं ्रेजी भाषा से शभन्न ककसी अन्य भाषा का सीशमि प्रयोग प्राधधकृ ि करने के शयए राष्ट्रपयि का पिू ा अनमु ोदन। 5. के न्रीय सरकार के कमचा ाररयों के शयए ह दं ी शशक्षण योजना और पत्र-पबत्रकाओं और उससे संबंधधि अन्य साह त्य का प्रकाशन िथा संघ की राजभाषा के रूप में ह दं ी के प्रगामी प्रयोग से संबंधधि सभी मामयों के शयए के न्रीय उत्िरदाययत्ि। 6. सघं की राजभाषा के रूप में ह दं ी के प्रयोग से संबधं धि सभी मामयों में समन्िय ब्जनमंे प्रशासयनक शब्दाियी, पाठ्य वििरण, पाठ्य पसु ्िक, प्रशशक्षण पाठयक्रम और उनके शयए अपेक्षक्षि उपस्कर (मानकीकृ ि शयवप सह ि) शाशमय ंै। 7. के न्रीय सधचिायय राजभाषा सेिा का गठन और सिं गा प्रबधं न। 8. के न्रीय ह दं ी सशमयि (इसकी उप सशमयियों सह ि) से संबधं धि मामये। 9. विशभन्न मतं ्राययों/विभागों द्िारा स्थावपि ह दं ी सया कार सशमयियों से सबं ंधधि काया का समन्िय । 10. के न्रीय अनिु ाद ब्यरू ो से सबं धं धि मामये। 11. ह दं ी शशक्षण योजना सह ि के न्रीय ह दं ी प्रशशक्षण संस्थान से संबधं धि मामये। 12. क्षते ्रीय कायाान्ियन कायााययों से सबं ंधधि मामये। 13. संसदीय राजभाषा सशमयि से संबंधधि मामये।

अध्याय- 2 िाजभाषा नीयि संबधं ी प्रमखु यनदेशसंविधान के अनुच्छे द 3(3)1) में य उपबंधधि ै कक सघं की राजभाषा ह दं ी और शयवप देिनागरीोगी । अनुच्छे द 3(2 में य भी उपबधं धि ै कक संघ के शासकीय कायों के शयए अगं ्रेजी भाषा का प्रयोगसंविधान के प्रारंभ से 15 िषा की अिधध )अथााि ् 25 जनिरी, 1965) िक ककया जािा र ेगा । अनचु ्छे द 3(3मंे संसद को य उपबधं धि करने की शब्ति दी ै कक ि विधध द्िारा शासकीय प्रयोजन के शयए 25 जनिरी,1965 के बाद भी अगं ्रेजी का प्रयोग जारी रखिा सके गी । िदनसु ार, राजभाषा अधधयनयम, 1963 (1967 मंेसंशोधधि) की धारा 3)2) में 25 जनिरी, 1965 के बाद भी शासकीय काया में अगं ्रेजी का प्रयोग जारी रखने कीव्यिस्था की गई ै । इस अधधयनयम में य भी यनधााररि ककया गया ै कक ह दं ी और अगं ्रेजी दोनों ी भाषाओंका प्रयोग कयिपय वियनहदाष्ट्ट प्रयोजनों के शयए अयनिायिा ककया जाएगा जसै े संकल्प, सामान्य आदेश, यनयम,अधधसचू ना, प्रशासयनक ि अन्य प्रयििदे न, प्रेस विज्ञब््ियां, ससं द के ककसी सदन या सदनों के समक्ष रखे जानेिाये प्रशासयनक िथा अन्य प्रयििेदन और शासकीय कागज-पत्र; संविदा, करार, अनुज्ञब््ि, अनुज्ञा पत्र, यनविदासचू ना और यनविदा प्रपत्र आहद ।  सवं ििाि का अनचु ्छे द 343)1) –सघं की राजभाषा ह दं ी, शयवप देिनागरी, अंक अंिरााष्ट्रीय रूप ।  अनुच्छे द 3(3)2) के अनसु ार संविधान के प्रारंभ से 15 िषा की अिधध िक ह दं ी के साथ अगं ्रेजी भाषा का प्रयोग । सवं िधान का अनुच्छे द343)3) –26 जनिरी 1965 के बाद भी सरकारी काया मंे अगं ्रेजी का प्रयोग जारी रखने ेिु अधधयनयम संरचना का प्रािधान । सवं िधान में भाषा संबधं ी अन्य अनचु ्छे द यनम्पनानसु ार ैं -अनचु ्छे द 120 ससं द की भाषाअनचु ्छे द 3(5 राज्य की राजभाषा या राजभाषाएंअनचु ्छे द 3(6 एक राज्य और दसू रे राज्य के बीच या ककसी राज्य और सघं के बीच पत्राहद की राजभाषाअनचु ्छे द 3(8 उच्चिम और उच्च न्यायायय के शयए प्रयोग की भाषाअनुचछ् े द 351 ह न्दी भाषा के विकास के शयए यनदेश राजभाषा अधिनियम, 1963 राजभाषा अधिनियम, 1963)संविधान के अनुच्छे द 343)3) के प्रािधान के अनुसार िषा 1963 मंे पाररि) धारा 3)1) - सवं िधान के प्रारंभ से 15 िषा की समाब््ि पर भी ह दं ी के अयिररति अंग्रेजी भाषा सघं के राजकीय कायों िथा संसद मंे काया के सवं ्यि ार के शयए प्रयोग में याई जािी र ेगी । धारा 3)3) -सकं ल्पों, साधारण आदेशों, यनयमों, अधधसूचनाओं, प्रेस विज्ञब््ियों, ससं द के समक्ष रखे जानेिाये कागजािों, विधधयों, करारों, यनविदा-प्रारूपों आहद में ह दं ी और अगं ्रेजी दोनों भाषाओं का प्रयोग ककयाजाए। धारा ( - राजभाषा ससं दीय सशमयि का गठन एिं किवा ्य राजभाषा अधधयनयम, 1963 समस्ि भारि में यागू ै, के िय धारा 6 और धारा 7 के उपबन्ध जम्पमू-कचमीर राज्य मंे यागू न ीं ोिे । )धारा 6 राज्य अधधयनयमों के प्राधधकृ ि अनिु ाद से सबं धं धि ै एिंधारा 7 उच्च न्यायायय की भाषा से सबं ंधधि ै )

राजभाषा नियम, 1976 ह दं ी के अनमु ायनि ज्ञान के आधार पर देश के राज्यों/संघ शाशसि प्रदेशों को िीन क्षते ्रों, यथा - क, ख,ग में पररभावषि ककया गया ै । राजभाषा यनयम िशमयनाडू राज्य मंे यागू न ीं ोिे । यनयम ( – पत्राहद की भाषा सबं धं ी यनयम । उपरोति यनयमानसु ार एिं भाषाई क्षेत्रों के अनुसार र िषािावषका कायका ्रम मंे पत्राचार के यक्ष्य यनधारा रि ककए जािे ंै । िावषकि कायकि ्रम माननीय गृ मंत्री जी के अनुमोदन से जारी ोिा ै । ििमा ान वित्ि िषा मंे पत्राचार के यनधााररि यक्ष्य यनम्पन प्रकार ैं - ‘क’ क्षेत्र ‘ख’ क्षेत्र ‘ग’ क्षते ्रहिन्दी में क क्षेत्र से क क्षेत्र को 100% ख क्षते ्र से क क्षते ्र को 90% ग क्षेत्र से क क्षेत्र को 55%मलू क क्षेत्र से ख क्षते ्र को 100% ख क्षेत्र से ख क्षते ्र को 90% ग क्षते ्र से ख क्षते ्र कोपत्राचार 55% क क्षेत्र से ग क्षेत्र को 65% ख क्षेत्र से ग क्षते ्र को 55% ग क्षेत्र से ग क्षेत्र को 55% क क्षते ्र से क ि ख क्षेत्र के ख क्षेत्र से क ि ख क्षते ्र के ग क्षते ्र से क ि ख क्षते ्र के राज्य/सघं राज्य क्षते ्र/व्यब्ति राज्य/सघं राज्य क्षते ्र/व्यब्ति राज्य/सघं राज्य 100% 100% क्षते ्र/व्यब्ति 85% यनयम 5 - ह दं ी मंे प्रा्ि पत्रों के उत्िर ह दं ी मंे हदए जाएं । यनयम 8)1) - कोई कमचा ारी ककसी फाइय पर हट्पणी या कायिा तृ ्ि ह दं ी या अंग्रेजी मंे शयख सकिा ै। उससे य अपेक्षा न ीं की जाएगी कक ि उसका अनुिाद दसू री भाषा में प्रस्िुि करे । यनयम 8(4) –के न्र सरकार यनयम 10(4) के अिं गिा अधधसधू चि कायााययों को वियनहदाष्ट्ट कर सकिी ै कक उनमें ह दं ी में प्रिीण कमचा ारी हट्पण और प्रारूप आहद मंे के िय ह दं ी का प्रयोग करें । यनयम 9 –कोई कमचा ारी ह दं ी मंे प्रिीण िभी माना जाएगा जब उसने मैहरक या उसके समिुल्य या उच्च स्िर की कोई परीक्षा ह दं ी माध्यम से उत्िीणा की ो, या ब्जसने स्नािक परीक्षा में अथिा उसके समिलु ्य अथिा उससे उच्चिर कोई परीक्षा ह दं ी एक िकै ब्ल्पक विषय से उत्िीणा की ो, या यनधारा रि प्रारूप मंे ह दं ी में प्रिीणिा की घोषणा की ो । यनयम 10(1) - ककसी कमचा ारी को ह दं ी का कायसा ाधक ज्ञान िभी माना जाएगा जब उसने महै रक या उसके समिलु ्य या उच्च स्िर की कोई परीक्षा ह दं ी विषय के साथ उत्िीणा की ो, या ब्जसने प्राज्ञ अथिा अन्य यनधााररि यनम्पनिर परीक्षा उत्िीणा की ो, या के न्र सरकार द्िारा उस यनशमत्ि वियनहदाष्ट्ट कोई अन्य परीक्षा उत्िीणा की ो, या यनधााररि प्रारूप में ह दं ी में कायसा ाधक ज्ञान की घोषणा की ो । यनयम 10)() - यहद ककसी कायाया य में 80% या अधधक कमचा ाररयों को ह दं ी का कायसा ाधक ज्ञान प्रा्ि ो िो उस कायाया य का नाम राजपत्र में अधधसूधचि ककया जाए । यनयम 12 - के न्र सरकार के कायाया य के प्रशासयनक प्रधान का य दाययत्ि ोगा कक ि राजभाषा अधधयनयम और राजभाषा यनयमों, इनके उपबंधों और इनके अधीन जारी यनदेशों का समधु चि अनुपायन सुयनब्चचि करे िथा इसके शयए उपयतु ि ि प्रभािकारी जाचं बबन्दु बनाए ।

राजभाषा संकल्प– 1968  सरकारी कामकाज मंे ह दं ी का प्रयोग बढाने के शयए अधधक ग न और व्यापक कायका ्रम ियै ार करना | )प्रयििषा विभाग द्िारा एक िावषका कायका ्रम जारी ककया जािा ै)  ह दं ी प्रयोग ि प्रसार ेिु उठाए कदमों िथा प्रगयि की समीक्षा को ससं द के दोनों सदनों में िावषका मलू ्यांकन ररपोटा के रुप मंे प्रस्ििु करना |  ह दं ी ि सवं िधान की 8िीं अनुसूची में सब्म्पमशयि भाषाओं के समब्न्िि विकास के शयए कायका ्रम ियै ार करना ।  बत्रभाषा फामयूा ा यागू करना |  अन्यथा की ब्स्थयि को छोड़िे ुए कंे रीय सरकार के पदों पर भिी ेिु ह दं ी अथिा अंग्रेजी, ककसी एक भाषा का अयनिाया ज्ञान ोना |  अखखय भारिीय एिं उच्चिर के न्रीय सेिाओं संबंधी परीक्षाओं के शयए सवं िधान की आठिीं अनसु चू ी मंे सब्म्पमशयि भाषाओं िथा अगं ्रेजी को िकै ब्ल्पक माध्यम के रूप में रखनाराजभाषा िीनत की विशषे ताएं i) कंे र सरकार के कायााययों से संबंधधि सभी यनयम-पसु ्िकंे , संह िाएं और अन्य प्रकक्रया साह त्य ह दं ी ि अंग्रेजी दोनों भाषाओं में ियै ार ककए जाने अपेक्षक्षि ंै । सभी फाम,ा रब्जस्टरों के शीषका , नामपट्ट, सूचनापट्ट ि येखन सामग्री की विशभन्न मदंे आहद ह दं ी ि अगं ्रेजी दोनों भाषाओं में ोनी अपेक्षक्षि ंै । ii) अधधकारी सुयनब्चचि करेंगे कक अधधयनयम की धारा 3)3) में वियनहदाष्ट्ट दस्िािजे ह दं ी ि अंग्रेजी दोनों भाषाओं मंे जारी ककए जाएं । iii) कंे र सरकार के प्रत्येक कायाया य का प्रशासयनक प्रधान सयु नब्चचि करेगा कक इस अधधयनयम, यनयमों के उपबंधों और यनयम 12 के अधीन जारी यनदेशों का समधु चि पायन ो और इस प्रयोजन के शयए उपयुति िथा प्रभािी जांच-बबदं ु बनाए जाएं । iv) राजभाषा नीयि का अनुपायन प्रेरणा और प्रोत्सा न द्िारा ककया जािा ै और य ककसी पर थोपी न ीं जािी ।

अध्याय-3 राजभाषा िीनत का कायािन्ियिगृ मतं ्रायय, राजभाषा विभाग द्िारा प्रत्येक िषा संघ का राजकीय काया ह दं ी में करने के शयए एक िावषकाकायका ्रम जारी ककया जािा ै । िावषका कायका ्रम के अनुपायन मंे ुई उपयब्ब्धयां िावषका मूल्यांकन ररपोटा केरूप मंे संसद के दोनों पटयों पर रखी जािी ै । के न्र सरकार के कायाया यों मंे राजभाषा ह दं ी के कायाना ्ियन की समीक्षा, मॉनीहटरंग आहद करने केशयए अनेक सशमयियां गहठि ैं ब्जनका सकं ्षक्ष्ि वििरण इस प्रकार ै -के न्रीय हिदं ी सममनत माििीय प्रिािमंत्री जी की अध्यक्षिा मंे के न्रीय हिदं ी सममनत का गठन के न्रीय मंत्राययों/विभागों में समन्िय स्थावपि करने के आशय से िषा 1967 मंे ह दं ी के व्यापक स्िर पर प्रचार िथा प्रगामी प्रयोगाथा ककया गया था । य राजभाषा नीयि के सबं धं मंे म त्िपूणा हदशा-यनदेश देने िायी सिोच्च सशमयि ै। सशमयि में प्रधान मतं ्री जी के अयिररति 08 माननीय के न्रीय मंत्री )गृ मतं ्री जी उपाध्यक्ष, गृ मंत्रायय मंे राजभाषा विभाग के प्रभारी मतं ्री-सदस्य), 06 राज्यों के मखु ्य मतं ्री, 0( संसद सदस्य िथा ह दं ी एिं अन्य भारिीय भाषाओं के 22 विद्िान, कु य शमयाकर (0 )चायीस) सदस्य ंै । इस सशमयि की अब िक 30 बठै कंे ो चुकी ैं। इस सशमयि की वपछयी )30िीं) बठै क हदनांक 28.07.2011 को प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षिा में आयोब्जि ुई थी । इस बठै क मंे शयए गए यनणायों पर अनुििी कारािाई की जा र ी ै । के न्रीय हिदं ी सममनत का पिु गठि ि/उसके कायकि ाल बढािे का मामला राजभाषा विभाग के विचारािीि िै । हिदं ी सलािकार सममनतिः के न्र सरकार के मंत्राययों/विभागों में राजभाषा नीयि के सुचारू रूप से कायाान्ियन के बारे मंे सया देनेके उद्दचे य से सबं ंधधि मतं ्राययों/विभागों के मतं ्री की अध्यक्षिा मंे ििमा ान में 5( मंत्राययों/विभागों मंे ह दं ीसया कार सशमयियां गहठि ंै । इस सशमयि की िषा मंे कम से कम 02 बैठकंे आयोब्जि करना अपेक्षक्षि ै । के न्रीय राजभाषा कायािन्ियि सममनत - के न्र सरकार के मंत्राययों/विभागों मंे राजभाषा अधधयनयम,1963 और राजभाषा यनयम 1976 के उपबधं ों के अनुसार सरकारी प्रयोजनों के शयए ह दं ी के अधधकाधधकप्रयोग, के न्र सरकार के कमचा ाररयों के प्रशशक्षण िथा राजभाषा विभाग द्िारा समय-समय पर जारी ककए गएअनुदेशों के कायाान्ियन की समीक्षा करने के शयए िथा उसके अनुपायन मंे पाई गई कशमयों को दरू करने केउपाय सुझाने के उद्दचे य से सधचि, राजभाषा विभाग की अध्यक्षिा मंे के न्रीय राजभाषा कायाान्ियन सशमयिगहठि ै। मंत्राययों/विभागों मंे राजभाषा ह दं ी का काया देख र े प्रभारी अधधकारी (सयं तु ि सधचि स्िर) सशमयिके पदेन सदस्य ोिे ैं। इसकी िषा में एक बैठक आयोब्जि करना अपेक्षक्षि ै। अभी िक इसकी 37 बठै कंेआयोब्जि की जा चकु ी ंै। िगर राजभाषा कायानि ्ियि सममनतयां - राजभाषा ह दं ी के प्रयोग से सबं धं धि अनुदेशों के कायाना ्ियनऔर इसमंे बे िर िायमेय स्थावपि करने के शयए देश के विशभन्न नगरों में अभी िक 35( नगर राजभाषाकायाान्ियन सशमयियां गहठि ैं। नगर विशेष में ब्स्थि के न्रीय कायाया यों आहद के विभागाध्यक्ष इन सशमयियोंके सदस्य ोिे ैं और उनमें से िररष्ट्ठिम अधधकारी इन सशमयियों के अध्यक्ष नाशमि ककए जािे ंै। प्रत्येकसशमयि की िषा मंे 2 बठै कंे आयोब्जि करना अपेक्षक्षि ै। विभागीय राजभाषा कायानि ्ियि सममनतयां - कें र सरकार के सभीं मतं ्राययों/विभागों/ कायााययों आहद मंेविभागीय राजभाषा कायाान्ियन सशमयियां गहठि ंै। मंत्राययों/विभागों में इन सशमयियों मंे संयुति सधचि स्िरअथिा उससे ऊपर के अधधकारी अध्यक्ष ोिे ैं िथा विशभन्न प्रभागों के अधधकारी इनमें सदस्य ोिे ैं। इसकी

बैठकंे िीन मा में एक बार आयोब्जि ोिी ंै। बैठकों मंे यिमा ी प्रगयि ररपोटा की समीक्षा की जािी ै िथािावषका कायका ्रम के यक्ष्यों को प्रा्ि करने के उपाय ककए जािे ैं।

अध्याय-4 कंे रीय हिदं ी प्रमशक्षण संस्थाि राजभाषा विभाग के अंिगिा कंे रीय ह दं ी प्रशशक्षण संस्थान की स्थापना हदनांक 21 अगस्ि, 1985 को नीचे शयखे उद्दचे यों की पयू िा के शयए की गई थी :- (1) कें र सरकार के कायााययों, उपक्रमों, उद्यमों, यनगमों िथा बकैं ों आहद मंे नए भिी, ह दं ी न जानने िाये अधधकाररयों/कमचा ाररयों के शयए ह दं ी भाषा का िथा अगं ्रेजी टंकण और अगं ्रेजी आशुशयवप जानने िाये कमचा ाररयों के शयए ह दं ी टंकण और ह दं ी आशुशयवप के पणू का ाशयक ग न प्रशशक्षण की व्यिस्था करना । (2) प्रशशक्षण संस्थानों के प्रशशक्षकों को ह दं ी पढाने की नई िकनीक की जानकारी देने के शयए पुनचचयाा पाठ्यक्रमों का आयोजन करना । (3) संघ सरकार के उन अधधकाररयों/कमचा ाररयों के शयए जो ह दं ी का ज्ञान िो रखिे ंै, ककं िु ह दं ी में काया करने मंे कहठनाई म सूस करिे ंै, ऐसे अधधकाररयों/कमचा ाररयों के शयए पांच हदिसीय कायशा ायाओं का आयोजन करना । कें रीय हिदं ी प्रमशक्षण ससं ्थाि के उप-ससं ्थािसंस्थान के कायका यापों को गयि देने और प्रशशक्षण क्षमिा के विस्िार के शयए संस्थान के अंिगिा मुंबई,कोयकािा, बंेगयरू ु, ैदराबाद और चने ्नै मंे 5 उप-संस्थान काम कर र े ंै। साथ ी ह दं ी शशक्षण योजना केगुिा ाटी, हदल्यी, मुंबई, चने ्नै और कोयकािा में पाचं क्षते ्रीय कायाायय भी ैं। देश भर मंे ह दं ी शशक्षण योजना केअिं गिा ह दं ी भाषा ि ह दं ी टंकण/आशुशयवप का प्रशशक्षण देने के शयए 129 पूणका ाशयक प्रशशक्षण के न्र ि 18अशं काशयक प्रशशक्षण के न्र काया कर र े ंै।कंे रीय ह दं ी प्रशशक्षण ससं ्थान से संबंधधि अन्य सूचना http://chti.rajbhasha.gov.in पर उपयब्ध ै ।

अध्याय-5 कंे रीय अिुिाद ब्यूरो 01 माच,ा 1971 को स्थावपि राजभाषा विभाग का अधीनस्थ कायाायय के न्रीय अनुिाद ब्यूरो के न्र सरकार के मतं ्राययों, विभागों, कायााययों, उपक्रमों आहद के असांिाधधक प्रकक्रया साह त्य का अनिु ाद काया करिा ै और के न्र सरकार के कायााययों मंे अनिु ाद काया से जडु ़े अधधकाररयों के शयए अनिु ाद प्रशशक्षण कायका ्रमों का आयोजन करिा ै । ब्यूरो के हदल्यी ब्स्थि मुख्यायय के अयिररति बगै यूरू, मुम्पबई ि कोयकािा में अनिु ाद प्रशशक्षण के न्र ै। हदल्यी ब्स्थि मुख्यायय मंे प्रशशक्षण येने के शयए आने िाये प्रशशक्षणाधथया ों के शयए छात्रािास की व्यिस्थाएं ैं। ब्यरू ो द्िारा िषा 2011-12 के दौरान 50,200 मानक पषृ्ट्ठों )यनयशमि स्थापना द्िारा 38,200 पषृ्ट्ठों का िथा अनिु ाद क्षमिा विस्िार योजना द्िारा 12,000 पषृ्ट्ठों का) के अनिु ाद के िावषका यक्ष्य के सापेक्ष माच,ा 2012 िक कु य 55,562 मानक पषृ्ट्ठों का )यनयशमि स्थापना द्िारा 38,(10 पषृ्ट्ठों का िथा अनिु ाद क्षमिा विस्िार योजना द्िारा 12,121 पषृ्ट्ठों का) अनिु ाद ककया गया । िषा 2012-13 मंे 55,000 (यनयशमि स्थापना द्िारा 35,000 पषृ्ट्ठ िथा अनिु ाद क्षमिा विस्िार योजना द्िारा 20,000 पषृ्ट्ठ) मानक पषृ्ट्ठों के अनिु ाद के सापेक्ष हदसम्पबर, 2012 िक (6,6(( )यनयशमि स्थापना द्िारा 27,185 पषृ्ट्ठों का िथा अनिु ाद क्षमिा विस्िार योजना द्िारा 19,(59 पषृ्ट्ठों का) मानक पषृ्ट्ठों का अनुिाद ककया गया । सरल शब्दािली प्राय देखा गया ै कक ह न्दी के प्रयोग में ब्तयष्ट्ट शब्दों का प्रयोग ककया जािा ै। इस समस्या केसमाधान के शयए विभाग द्िारा 5000 प्रशासयनक शब्दों की एक सरय शब्दाियी का विकास करने का यनणयाशयया गया ै । द्विभाषी शब्दाियी को विभाग की िेबसाइट पर अपयोड कर हदया गया ै ।कंे रीय अनुिाद ब्यरू ो से सबं ंधधि अन्य सूचना http://ctb.rajbhasha.gov.in पर उपयब्ध ै ।

अध्याय-6क्षेत्रीय कायानि ्ियि कायािलय के न्रीय सरकार के कायाया यों/उपक्रमों/बकंै ों/बीमा कम्पपयनयों /यनगमों/बोडों आहद में संघ की राजभाषा नीयिके कायाना ्ियन एिं राजभाषा के रूं प में ह न्दी के प्रचार प्रसार की ब्जम्पमेदारी राजभाषा विभाग, गृ मतं ्रायय की ै । इस प्रयोजन के शयए, देश के विशभन्न क्षते ्रों में राजभाषा विभाग गृ मंत्रायय के अधीन 08 क्षेत्रीयकायाान्ियन कायाायय कायरा ि ंै जो क्षेत्रीय आधार पर सघं सरकार की राजभाषा नीयि के कायाना ्ियन परयनगरानी रखिे ंै। क्षते ्रीय कायाान्ियन कायाया यों के शयए प्रयि अधधकारी प्रयि मा 12 यनरीक्षण का यक्ष्ययनधााररि ै।मखु ्य कायकि लापक्षते ्रीय कायाया य द्िारा अपने क्षते ्राधधकार में ब्स्थि के न्रीय सरकार के कायाया यों, उपक्रमों, बकंै ों, बीमाकम्पपयनयों, यनगमों, बोडो, संगठनों आहद में सघं सरकार की राजभाषा नीयि के कायाना ्ियन एिं राजभाषा के रूं पमंे ह न्दी के प्रचार प्रसार के शयये ककये जा र े मुख्य काया नीचे हदये गये ंै(1) के न्रीय सरकार के कायााययों, उपक्रमों, बकंै ों, बीमा कम्पपयनयों, यनगमों, बोडों, संगठनों आहद मंे राजभाषाअधधयनयम, 1963, राजभाषा यनयम, 1976 िथा राजभाषा से सम्पबधधि विशभन्न आदेशों का अनपु ायन सयु नब्चचिकरना ।(2) के न्रीय सरकार के कायाया यों, उपक्रमों, बकैं ों, बीमा कम्पपयनयों, बोडों, संगठनों आहद का राजभाषा सम्पबन्धीयनयशमि यनरीक्षण करना, पाई गयी कशमयों को यनरीक्षण ररपोटों के माध्यम से सम्पबधधि कायाया यों को सूधचिकरना िथा कशमयों को दरू करने के शयए अनसु रणात्मक कारािाई करना(3) क्षते ्राधधकार मंे ब्स्थि कायााययों से ह न्दी यिमा ी ररपोटा यनयशमि रूं प से प्रा्ि करना एिं उनकी समीक्षाकरके कशमयों को सम्पबधधि कायाया यों के ध्यान मंे सुधारात्मक कारािाई ेिु याना िथा उनका अनशु ्रिण कायाकरना ।(4) विभागीय राजभाषा कायाान्ियन सशमयियों की बैठकों में भाग येना ।(5) क्षेत्राधधकार में ब्स्थि नगर राजभाषा कायाना ्ियन सशमयि की बठै कों में भाग येना ।(6) ब्जस नगर में नगर राजभाषा कायाान्ियन सशमयि न ीं ै अथिा अयिररति नगर राजभाषा सशमयि केगठन की आिचयकिा ो, िो नई सशमयि गहठि करने का काया करना ।(7) क्षेत्रीय राजभाषा सम्पमेयनों का आयोजन करना ।(8) राजभाषा विभाग, गृ मंत्रायय द्िारा समय समय पर जारी ककये जाने िाये आदेशों की जानकारी अपनेक्षेत्राधधकार में ब्स्थि समस्ि कायााययों को प्रदान करना ।(9) अपने क्षेत्राधधकार से सम्पबधधि के न्रीय अनुिाद ब्यूरों एिं के न्रीय ह न्दी प्रशशक्षण संस्थान/ह न्दी शशक्षणयोजना के कायाया यों के साथ समन्िय स्थावपि करना ।

राजभाषा विभाग के क्षेत्रीय कायानि ्ियि कायािलयों के पते एिं अधिकार क्षते ्र पता अधिकार क्षते ्र1 उप यनदेशक )कायाान्ियन) , क्षते ्रीय कायाान्ियन कायाायय  म ाराष्ट्र )पब्चचम),  गजु राि गृ मतं ्रायय, राजभाषा विभाग,  गोिा के न्रीय सदन, कमरा न.ं 601ए, सेतटर 10,  दमण दीि, दादरा एिं नागर 6िां िय, सीबीडी, बेयापरु , निी मुम्पबई-400614 िेयीदरू भाष एिं फै तस- 022-27560225ई-मेय : [email protected], [email protected]. उप यनदेशक )कायाान्ियन) , क्षेत्रीय कायाान्ियन कायाायय )मध्य),  राजस्थानगृ मतं ्रायय, राजभाषा विभाग,  छत्िीसगढकमरा नम्पबर 206, यनमााण सदन, 52 ए, अरेरा ह ल्स,भोपाय -462011दरू भाष- 0755-2553149,0755-2553149ई-मेय पिा - [email protected], [email protected] उप यनदेशक )कायाना ्ियन) उत्िरी क्षते ्रीय कायाान्ियन कायाायय-।  हदल्यी सघं राज्य क्षेत्र)हदल्यी)  पंजाबगृ मतं ्रायय, राजभाषा विभाग, ए-149 सरोब्जनी नगर,  ररयाणानई हदल्यी-110023  ह माचय प्रदेशदरू भाष/फै तस-011-24674674  जम्पमू ि कचमीरई-मेय : [email protected] उप यनदेशक )कायाान्ियन) उत्िरी क्षेत्रीय कायाना ्ियन कायाया य-  उत्िर प्रदेश।। )गाब्जयाबाद)  उत्िराखण्डगृ मतं ्रायय, राजभाषा विभाग, कमरा न.ं 302, िीसरािय, सीजीओ भिन,कमया ने रूं नगर, गाब्जयाबाद-201001उत्िर प्रदेशदरू भाष/फै तस- 0120-2719356ई-मेय : [email protected]

5 उप यनदेशक )कायाना ्ियन) क्षते ्रीय कायाान्ियन कायाया य )पूि)ा  पब्चचम बगं ाय गृ मंत्रायय, राजभाषा विभाग, यनजाम पैयेस, 18िां िय,  उड़ीसा 234/4, आचाया जे. सी. बोस रोड़,  बब ार कोयकािा-700030  झारखण्ड दरु भाष-033-22875305 ,फै तस-033-22800356  अण्डमान एिं यनकोबारई-मेय : [email protected] उप यनदेशक )कायाान्ियन) क्षते ्रीय कायाान्ियन कायाायय )दक्षक्षण)  आन्ध प्रदेशगृ मंत्रायय, राजभाषा विभाग, के न्रीय सदन, 5िां िय,डी  कनााटकविगं , कोरमंगया,बंेगयूरूं -560034दरू भाष/फै तस 080-25536232ई-मेय : [email protected] उप यनदेशक )कायाान्ियन) क्षेत्रीय कायाना ्ियन कायाायय  असम )पिू ोत्िर)  बत्रपुरा गृ मंत्रायय, राजभाषा विभाग, राजगढ रोड़, िाई येन नं ।  शमजोरम पोस्ट -शशयपुखरी,गुिा ाटी- 781003  नागायैण्ड दरू भाष ि फै तस 0361-2524686  मखणपुर ई-मेय : [email protected]  मेघायय  शसककतम  अरूं णाचय प्रदेश8 उप यनदेशक )कायाान्ियन) क्षते ्रीय कायाान्ियन कायाायय )दक्षक्षण-  के रयपब्चचम)  िशमयनाडुगृ मतं ्रायय, राजभाषा विभाग, के न्रीय भिन, ब्यॉक सी-।, साििां  पुदचु ्चरे ीिय,  यक्षद्िीपसेस पी-ओ, कोब्च्च-682037, के रयई-मेय : [email protected]

अध्याय-7 संसदीय राजभाषा सममनत संसदीय राजभाषा सशमयि का गठन राजभाषा अधधयनयम, 1963 की धारा 4 के ि ि िषा 1976 मंे ककयागया । इस सशमयि में संसद के 30 सदस्य ोने का प्रािधान ै, 20 योकसभा से और 10 राज्यसभा से जोक्रमश योकसभा के सदस्यों िथा राज्यसभा के सदस्यों द्िारा आनपु ायिक प्रयियनधधत्ि पद्धयि के अनसु ार एकयसकं ्रमणीय मि द्िारा यनिाधा चि ोिे ैं । इस सशमयि का किवा ्य सघं के राजकीय प्रयोजनों के शयए ह दं ी के प्रयोग मंे कीगई प्रगयि का पुनविया ोकन कर और उस पर शसफाररशें करिे ुए राष्ट्रपयि को प्रयििेदन प्रस्िुि करना ै । अभी िकससं दीय राजभाषा सशमयि द्िारा प्रस्िुि प्रयििदे न के आठ खंड़ों पर राष्ट्रपयि जी के आदेश पाररि ककए जा चकु े ंै । संसदीय राजभाषा सशमयि के नौंिे खण्ड़ में की गयी शसफाररशों संबंधी प्रयििदे न माननीय राष्ट्रपयि जी कोहदनांक 02.06.2011 को प्रस्िुि ककया गया ै । प्रयििेदन के नौंिे खण्ड को संसद के मानसनू सत्र-2011 मेंसदन के पटय पर रखा गया । इसमंे की गयी शसफाररशों पर संबधं धि मतं ्राययों/विभागों/राज्य सरकारों/सघंशाशसि क्षते ्रों से हट्पखणयां प्रा्ि की जा र ी ंै । इनके अध्ययन के पचचाि ् इस पर राष्ट्रपयि जी के आदेशपाररि करने संबधं ी कारािाई की जायेगी । संसदीय राजभाषा सशमयि से संबंधधि अन्य सचू ना http://rajbhashasamiti.gov.in पर उपयब्ध ै ।

अध्याय-8 कम्‍्यटू र र पर हिदं ी के प्रयोग के मलए आई टर ी टर ू ल्स एिं साफ्टर िेयरयूनिकोड को सक्रक्रय करिाकं ्यटू र पर ह दं ी के प्रयोग के शयए प यी आिचयकिा यूयनकोड को सकक्रय करने की ोिी ै। यूयनकोडएनकोडडगं को सकक्रय करिे ी कं ्यटू र ककसी भी भाषा मंे काम करने के शयए सक्षम ो जािा ै । यूयनकोडसकक्रय कै से करें? )http://rajbhasha.gov.in/pdf/ittools.pdf)कंु जीपटर ल / कीबोडि के विकल्पयूयनकोड को सकक्रय करने के बाद अपनी आिचयकिा के अनसु ार कीबोडा के विकल्प का चयन कर, उसे इन्स्टायकरना ोिा ै । मखु ्यि िीन विकल्प ैं 1. इिस्क्स्क्र्टर कीबोडि 2. रेममगं ्टर ि कीबोडि 3. फोिेहटर क कीबोडिइनब्स्क्र्ट कीबोडा मानक कीबोडा ै िथा य सभी ओपेरेहटगं शसस्टम्पस )विडं ोज, शययनतस BOSS, मैकबुकआहद) मंे प ये से ी उपयब्ध ै। इसे भारिीय भाषाओं के शयए यूयनिसया कीबोडा भी क ा जा सकिा ै।कीबोडि कै से इन्स्टर ाल करें ?)http://rajbhasha.gov.in/pdf/ittools.pdf)इब्न्स्क्र्ट कीबोडा / कंु जीपटय पर ककसी एक भारिीय भाषा की टाइवपगं सीख येने के बाद ककसी भी भारिीयभाषा की टाइवपगं की जा सकिी ै तयोंकक सभी भारिीय भाषाओं के शयए इब्न्स्क्र्ट एक समान ै। भाषाइंडडया डॉट कॉम पर इंडडक ब्स्क्र्ट ट्यटू र नाम से एक सॉफ्टिये र उपयब्ध ै)http://bhashaindia.com/SiteCollectionDocuments/Downloads/MSInscript/MSInscriptTutorialHindi.zip ) ब्जसकी स ायिा से इब्न्स्क्र्ट कीबोडा येआउट सीखा जा सकिा ै।ह दं ीइब्न्स्क्र्ट टाइवपगं सीखने के शयएटीडीआईएय की साइट से यनशुल्क ह दं ी इनब्स्क्र्ट टाइवपगं ट्यटू र डाउनयोड ककया जा सकिा ै।)http://ildc.in/htm/ck-kbd.htm)हिदं ी फोंट्सके िय ययू नकोड समधथिा फॉन्ट का ी प्रयोग अधधकृ ि ै । इससे फाइयों के येन-देन में समस्या न ीं ोिी ै ।माइक्रोसॉफ़्ट िथा ए्पय ओएस िाये शसस्टम मंे प ये से ी ययू नकोड मगं य सह ि कई देिनागरी ययू नकोडफॉन्ट उपयब्ध ैं।अयिररति यूयनकोड समधथिा फोंट्स www.ildc.gov.inसे download ककए जा सकिे ै ।फोिेहटर क कीबोडिके िय अगँ ्रेजी अथिा रोमन शयवप मंे टाइवपगं का ज्ञान ोने पर भी ह दं ी / देिनागरी मंे टाइपकरने के शयएफोनहे टक टू ल्स का प्रयोग ककया जा सकिा ै । इसके भी ब ुि विकल्प ै।  माइक्रोसॉफ़्ट का टू य http://bhashaindia.com/ilit/Hindi.aspx डाउनयोड कर सकिे ैं। )इसके शयए आपके कं ्यटू र में NET FRAMEWORK अथााि डॉटनटे कफतस 2.0-3.5 इंस्टाय ोना जरूरी ै।)  गूगय का टू य http://www.google.com/intl/hi/inputtools/windows/डाउनयोड कर सकिे ंै।

श्रुतलेखि (स्पीच टर ू टर ैक्सस्टर टर ू ल)इस विधध में प्रयोतिा माइक्रोफोन मंे बोयिा ै िथा कम्प्यटू र मंे मौजदू स्पीच टू टैतस्ट प्रोग्राम उसे प्रोसैसकर पाठ/टैतस्ट मंे बदयकर शयखिा ै। इस प्रकार का काया करने िाये सॉफ्टिेयर को श्रुियेखन सॉफ्टिेयरक िे ैं। य टू य राजभाषा विभाग की साइट पर उपयब्ध ै। प्रयोग के शयए http://shrutlekhan-rajbhasha.rb-aai.in/live.aspx शयकं पर जाए ।मतं ्र – राजभाषामंत्र-राजभाषा एक मशीन साधधि अनिु ाद शसस्टम ै, जो राजभाषा के प्रशासयनक, वित्िीय, कृ वष, यघुउद्योग, सूचना प्रौद्योधगकी, स्िास््य रक्षा, शशक्षा एिं बकंै कं ग क्षेत्रों के दस्िािजे ों का अगं ्रेजी से ह दं ी मेंअनिु ाद करिा ै। य टू य राजभाषा विभाग की साइट पर उपयब्ध ै। प्रयोग के http://mantra-rajbhasha.rb-aai.in/mantrarajbhasha/ शयकं पर जाए ।

ई-मिाशब्दकोशई-म ाशब्दकोश एक द्विभाषी-द्विआयामी उच्चारण शब्दकोश ै। ई-म ाशब्दकोश की विशषे िाएं यनम्पनप्रकार ंै -: - देिनागरी शयवप यूयनकोड फोन्ट मंे - ह दं ी /अगं ्रेजी शब्दों का उच्चारण - स्पष्ट्ट प्रारूप, आसान ि त्िररि शब्द खोज - अक्षर क्रम में शब्द सूची, सीधा शब्द खोज - अंग्रेजी /ह दं ी अक्षरों द्िारा शब्द खोज - स्पीच इंटरफे स के साथ ह दं ी शब्द का उच्चारणय टू य राजभाषा विभाग की साइट पर उपयब्ध ै। प्रयोग के शयए http://e-mahashabdkosh.rb-aai.in/शयकं पर जाए ।लीला (LILA)हिदं ी पाठ्यक्रम एिं ऑिलाइि परीक्षाएँ -यनशुल्क ह दं ी भाषा सीखने के शयए राजभाषा विभाग द्िारा िैयार कराए गए यीया ह दं ी प्रबोध, यीया ह दं ीप्रिीण िथा यीया ह दं ी प्राज्ञ पाठ्यक्रमों के सॉफ्टिेयर उपयब्ध ंै। इन सॉफ्टिेयसा को कें रीय ह दं ी प्रशशक्षणससं ्थान, नई हदल्यी िथा विशभन्न कंे रीय ह दं ी प्रशशक्षण उपससं ्थानों से यनशुल्क प्रा्ि ककया जा सकिा ै।इन सॉफ्टिेयसा के इंटरनेट संस्करणों से अगँ ्रेजी माध्यम के साथ-साथ विशभन्न भारिीय भाषाओं के माध्यमसे भी यनशुल्क ह दं ी सीखी जा सकिी ै। इनमंे आडडयो-िीडडयो की सवु िधा भी ै। इंटरनेट ससं ्करण केशयए नीचे हदए शयकं पर ब्तयक करंे-http://lilappp.rb-aai.in/newhome.aspइन पाठ्यक्रमों की ऑनयाइन परीक्षा की सवु िधा भी उपयब्ध ै ब्जसके नमनू े नीचे हदए शयकं से देखे जासकिे ंैhttp://hindionlineexam.rb-aai.in/Mock_Exam/MockExam_Home.aspx



अध्याय – 9 राजभाषा हिदं ी के प्रचार-प्रसार के मलए प्रकाशि राजभाषा ह दं ी के प्रचार-प्रसार िथा विकास के प यू को सरकारी िंत्र में सशति रूप से पेश करने केउद्देचय से राजभाषा विभाग मंे पत्रिका एकक द्िारा िषष 1978 से त्रमै ाशसक पबत्रका राजभाषा भारिी का मरु ण,प्रकाशन िथा वििरण ककया जा रहा ै। ?? पत्रिका मंे राजभाषा/साहहत्य/ज्ञान-विज्ञान तथा ? ?? हहदंि ी मंे लिखे ? ? ज्ञानप्रद िेख विलभन्न स्तिभं ोंचचतंि न, साहहत्त्यकी, पुरानी यादंे-?? पररप्रेक्ष्य मंे, विश्ि हहदंि ी दर्नष , पिकाररता, संसि ्कृ तत, उदारीकरण,तकनीकी/िजै ्ञातनक, विविध आहद के अंितर्तष िेख प्रकालर्त ककए जाते हैं ? िैज्ञातनक विषयों ?? हहदिं ी मंे िेखनको बढािा देने की दृत्टि से पत्रिका मंे ?? ??? के िेखों को प्राथलमकता दी जाती है ? ?? पत्रिका में प्रिासीभारतीय/भारतीय मूि के व्यत्ततयों के िेखों को भी र्ालमि ककया जाता है ? इसमें विशभन्न विषयों से सबं ंधधि येखों के साथ, मतं ्राययों, विभागों, उपक्रमों, बकैं ों ि अन्य संस्थाओं कीराजभाषा सबं ंधी गयिविधधयों को स्थान हदया जािा ै । इसके अततररतत कें द्र सरकार के कायाषियों मंे हहदिं ी केप्रचार-प्रसार सिंबधिं ी र्ततविचधयों के बारे में ? ? ?-? ? ? ?? राजभाषा विभार् द्िारा जारी आदेर्ों/अनदु ेर्ों को भीपत्रिका में प्रकालर्त ककया जाता है ? ?? पत्रिका कंे द्रीय सरकार के कायािष यों, उपक्रमों, बकैं ों, ?? ? राजभाषा कायाषन्ियन सलमततयों, हहदंि ी स्ियिंसेिी ससंि ्थाओंि, िेखकों, विद्िानों, विश्िविद्याियों, विलभन्न पत्रिका सपंि ादकों इत्याहद को तन:र्ुल्क वितररत कीजाती है ? इसकी मदु ्रण सखंि ्या 5,000 है ? हदसम्पबर, 2014 िक इस पबत्रका के 140 अंक प्रकाशशि ो चकु ेहंै।ह दं ी गृ पत्रिका पिु स्काि योजना विभाग द्िारा के न्र सरकार के मतं ्राययों/कायााययों/उपक्रमों आहद द्िारा राजभाषा ह दं ी के अधधकाधधकप्रचार-प्रसार के शयए प्रकाशशि की जा र ी ह दं ी र्हृ पबत्रकाओं को स्िरीय बनाने के उद्दचे य से “र्हृ पबत्रकापरु स्कार योजना” शुरू की गई ै । हहदिं ी र्हृ -पत्रिकाओंि के लिए इस पुरस्कार योजना के अतंि र्तष प्रत्येक भाषाई क्षिे यथा‘क’, ‘ख’ तथा ‘र्’ को दो-दो परु स्कार हदए जािे ंै । परु स्कारों के अंति र्तष र्ील्ड और प्रमाण पि-प्रदान ककए जाते हैं ।उच्च स्ििीय पसु ्िकों की सचू ी िैयाि किना राजभाषा विभार् द्िारा िषष 1990 से प्रततिषष हहदंि ी की स्तरीय पसु ्तकों की सचू ी तैयार की जाती है, त्जसेभारत सरकार के मििं ाियों/विभार्ों आहद में पररचाशय? ककया जाता है ताकक विभार् द्िारा जारी िावषकष कायकष ्रममें तनधाषररत िक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सचू ीर्त पसु ्तकों की खरीद विलभन्न मििं ाियों/विभार्ों आहद द्िाराकी जा सके ? सचू ी में र्ालमि की जाने िािी पसु ्तकंे कै िंेडर िषष के हहसाब से मंिगिाई जाती हैं ? साथ हीिेखकों/प्रकार्कों से ?? ? ? ? का ?? प्रमाणपि भी प्राप्त ककया जाता है कक उतत पुस्तकों मंे राटर-विघिनकारी अथिा देर्द्रोह-उन्मखु ी एिंि आतकिं िाद ? सापिं ्रदातयकता उत्तजे क सामग्री नहींि है ? ? पसु ्तक में कोईराजनतै तक, भौर्ोलिक अथिा राजनतयक वििादास्पद तथ्य नहींि ै ? प्रिासी भारतीय/भारतीयों/भारतीय मूि केव्यत्तत/व्यत्ततयों के सिंबधिं में सिंबचंि धत देर् के भारतीय दतू ािास/उच्चायोर् द्िारा जारी प्रमाणीकरण भी प्रा्िककया जािा है ?







अध्याय-11 कंे र के काममकि ों के मलए प्रोत्सािि योजिाएंI. हिदं ी मशक्षण योजिा की परीक्षाएँ उत्तीणि करिे पर कें रीय सरकार के कमचि ाररयों को ममलिे िाले ियै स्क्क्सतक िेति, िकद परु स्कार आहद प्रोत्सािि1. ियै स्क्क्सतक िते ि– ह दं ी भाषा, ह दं ी टंकण एिं आशुशयवप की परीक्षाएँ उत्िीणा करने पर कें र सरकार केअधधकाररयों/कमाचाररयों को 12 म ीने की अिधध के शयए एक ििे न िवृ द्ध के बराबर का िैयब्तिक िेिन हदयाजािा ै।)क) प्रबोि परीक्षा– िैयब्तिक ििे न के िय उन् ीं अराजपबत्रि कमचा ाररयों को हदया जािा ै ब्जनके शयए प्रबोधपाठ्यक्रम अंयिम पाठ्यक्रम के रूप में यनधारा रि ककया गया ै और जो इस परीक्षा को 55 प्रयिशि या अधधकअकं येकर उत्िीणा करिे ंै। राजपबत्रि अधधकाररयों को प्रबोध परीक्षा उत्िीणा करने पर िैयब्तिक ििे न न ींहदया जािा ै। (का0ज्ञा0 सं0-12014/2/76-रा0भा0 (डी.) हदिाकं 2.9.1976))ख) प्रिीण परीक्षा– िैयब्तिक ििे न के िय उन् ीं अधधकाररयों/कमचा ाररयों को हदया जािा ै ब्जनके शयए प्रिीणपाठ्यक्रम अंयिम पाठ्यक्रम के रूप में यनधााररि ककया गया ै-)1) अराजपबत्रि कमचा ाररयों को 55 प्रयिशि या अधधक अंक येकर प्रिीण परीक्षा उत्िीणा करने पर ।)2) राजपबत्रि अधधकाररयों को 60 प्रयिशि या अधधक अंक येकर प्रिीण परीक्षा उत्िीणा करने पर। (का0ज्ञा0स0ं 12014/2/76-रा0भा0(डी.)/हदिांक 2.9.1976))ग) प्राज्ञ परीक्षा - िैयब्तिक िेिन के िय उन् ीं सरकारी अधधकाररयों/ कमचा ाररयों )राजपबत्रि / अराजपबत्रि) कोप्राज्ञ परीक्षा उत्िीणा करने पर हदया जािा ै। ब्जनके शयए य पाठयक्रम अंयिम पाठ्यक्रम के रूप मंे यनधारा रिककया गया ै। (का0ज्ञा0सं0 12014/1/78-रा०भा०(डी.) हदिांक 14.2.1979))घ) हिदं ी शब्द संसािि/हिदं ी टर ंकण– ह दं ी शब्द ससं ाधन / ह दं ी टंकण की परीक्षा उत्िीणा करने िाये कें र सरकारके अराजपबत्रि कमचा ाररयों को एक िेिन िवृ द्ध के बराबर 12 म ीने की अिधध के शयए ियै ब्तिक िेिन हदयाजािा ै। इसके अयिररति स ायक, अनिु ादक, प्रिर श्रेणी शयवपक िथा प्रिर येखा परीक्षक, ब्जनके शयए ह दं ीटंकण का प्रशशक्षण अयनिाया न ीं ै पर उपयोगी ै, को अिर श्रेणी शयवपकों की भांयि ी उति वित्िीयप्रोत्सा न िथा अन्य सुविधाएँ इस संबंध मंे जारी की गई विशभन्न शिों के अधीन दी जािी ैं। (का0ज्ञा0स0ं -12016/2/78-रा0भा0(डी.) हदिांक 10.1.1979))ङ) हिदं ी आशुमलवप– )i) अराजपबत्रि ह दं ी भाषी आशुशयवपकों को ह दं ी आशुशयवप की परीक्षा उत्िीणा करने पर12 म ीने के शयए एक िेिन िवृ द्ध, जो आगामी िेिन िवृ द्ध में शमया दी जािी ै, के बराबर ियै ब्तिक िेिनहदया जािा ै।)ii) राजपबत्रि आशुशयवपकों को 90 प्रयिशि या अधधक अंक येकर ह दं ी आशुशयवप परीक्षा उत्िीणा करने परियै ब्तिक िेिन हदया जािा ै। ब्जन आशुशयवपकों )राजपबत्रि एि अराजपबत्रि दोनों) की मािभृ ाषा ह दं ी न ीं ै, उन् ंे ह दं ी आशुशयवपकी परीक्षा उत्िीणा करने पर दो िेिन िवृ द्धयों के बराबर ियै ब्तिक िेिन हदया जािा ै। ये िेिन िवृ द्धयां भािीििे न िवृ द्धयों में शमयाई जाएँगी। ऐसे कमचा ारी प ये िषा दो िेिन िवृ द्धयों के बराबर और दसू रे िषा प यी ििे निवृ द्ध को शमया हदए जाने पर के िय एक िेिन िवृ द्ध के बराबर ियै ब्तिक िेिन प्रा्ि कर सकिे ैं। (का0ज्ञा0सं0-12014/2/76/रा0भा0(डी.) हदिांक 2.09.1976)हटर ्पणी ब्जस कमचा ारी को सेिाकायीन ह दं ी प्रशशक्षण से छू ट शमयी ुई ो उस कमचा ारी को संबंधधि परीक्षाउत्िीणा करने पर ककसी प्रकार के वित्िीय याभ/ प्रोत्सा न न ीं शमयेंगे।

2 िकद परु स्कार– ह दं ी प्रबोध, प्रिीण, प्राज्ञ, ह दं ी शब्द ससं ाधन/ह दं ी टंकण और ह दं ी आशुशयवप की परीक्षाएँअच्छे अकं ों से उत्िीणा करने पर पात्रिा के अनुसार यनम्पनशयखखि नकद पुरस्कार प्रदान ककए जािे ैं, ब्जनकीििमा ान दरें यनम्पनानसु ार ैं-)1) प्रबोि Rs.1600/- 1. 70 प्रयिशि या इससे अधधक अकं प्रा्ि करने पर Rs.800/- Rs.(00/- 2. 60 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 70 प्रयिशि से कम अकं प्रा्ि करने पर Rs.1800/- 3. 55 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 60 प्रयिशि से कम अकं प्रा्ि करने पर)2) प्रिीण 1. 70 प्रयिशि या इससे अधधक अंक प्रा्ि करने पर 2. 60 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 70 प्रयिशि से कम Rs.1200/- अकं प्रा्ि करने पर Rs.600/- 3. 55 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 60 प्रयिशि से Rs. 2(00/- कम अंक प्रा्ि करने पर Rs. 1600/- Rs. 800/-)3) प्राज्ञ 1. 70 प्रयिशि या इससे अधधक अकं प्रा्ि करने पर 2. 60 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 70 प्रयिशि से कम अंक प्रा्ि करने पर 3. 55 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 60 प्रयिशि से कम अकं प्रा्ि करने पर)() हिदं ी शब्द संसािि/हिदं ी टर ंकण Rs. 2(00/- 1. 97 प्रयिशि या इससे अधधक अंक प्रा्ि करने पर Rs. 1600/- 2. 95 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 97 प्रयिशि से Rs. 800/- कम अकं प्रा्ि करने पर 3. 90 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 95 प्रयिशि से कम Rs. 2(00/- अंक प्रा्ि करने पर Rs. 1600/- Rs. 800/-)5) हिदं ी आशुमलवप 1. 95 प्रयिशि या इससे अधधक अंक प्रा्ि करने पर 2. 92 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 95 प्रयिशि से कम अंक प्रा्ि करने पर 3. 88 प्रयिशि या इससे अधधक परंिु 92 प्रयिशि से कम अकं प्रा्ि करने पर)6) निजी प्रयत्िों से हिदं ी मशक्षण योजिा की हिदं ीभाषा, हिदं ी शब्द संसािि/हिदं ी टर ंकण एिं हिदं ीआशुमलवप परीक्षाएँ उत्तीणि करिे पर एकमु‍त परु स्कार1. ह दं ी शशक्षण योजना की प्रबोध परीक्षा Rs.1600/-2. ह दं ी शशक्षण योजना की प्रिीण परीक्षा Rs.1500/-3. ह दं ी शशक्षण योजना की प्राज्ञ परीक्षा Rs.2(00/-(. ह दं ी शशक्षण योजना की ह दं ी शब्द ससं ाधन/ह दं ी टंकण परीक्षा Rs.1600/-

5. ह दं ी शशक्षण योजना की ह दं ी आशुशयवप परीक्षा Rs.3000/-ब्जन कमाचाररयों को ह दं ी के सेिाकायीन प्रशशक्षण से छू ट प्रा्ि ै उन् ें संबंधधि स्िर की ह दं ी परीक्षा उत्िीणाकरने पर नकद एिं एकमचु ि परु स्कार देय न ीं ोंगे। ह दं ी शशक्षण योजना द्िारा आयोब्जि ह दं ी शब्द ससं ाधन/ह दं ी टंकण एिं ह दं ी आशुशयवप परीक्षाएँउत्िीणा करने पर कें र सरकार के कमचा ाररयों को शमयने िाये वित्िीय प्रोत्सा न िथा ियै ब्तिक िेिन, नकदपुरस्कार एिं एकमशु ि् परु स्कार से संबंधधि आदेश उन सभी कमचा ाररयों पर भी यागू ोंगे जो ह दं ी शशक्षणयोजना द्िारा आयोब्जि ह दं ी शब्द संसाधन/ह दं ी टंकण एिं आशुशयवप की परीक्षाएँ इयतै रॉयनक टाइपराइटर याकं ्यटू र का प्रयोग करके उत्िीणा करिे ंै ।हटर ्पणी:1. एकमुचि पुरस्कार प्रचायन कमचा ाररयों के अयिररति के िय उन् ीं कमचा ाररयों को हदया जाएगा जोऐसे स्थानों पर िनै ाि ैं ज ाँ ह दं ी शशक्षण योजना के प्रशशक्षण कें र न ीं ैं अथिा ज ाँ संबंधधि पाठ्यक्रम केप्रशशक्षण की व्यिस्था न ीं ै ।2 जो प्रशशक्षाथी यनजी प्रयत्नों से ह दं ी शशक्षण योजना की ह दं ी भाषा, ह दं ी शब्द संसाधन/ह दं ी टंकण एिं ह दं ीआशुशयवप परीक्षाएँ उत्िीणा करिे ंै उनको एक मचु ि परु स्कार के अयािा नकद पुरस्कार प्रदान करिे समययनधारा रि ककए गए प्रयिशि से पाँच प्रयिशि अंक कम प्रा्ि करने पर भी नकद पुरस्कार राशश प्रदान कीजाएगी।II. अगं ्रेजी के अनतररक्सत हिदं ी में भी सरकारी काम-काज करिे के मलए आशुमलवपकों तथा टर ंककों के मलए प्रोत्सािि भत्ताअगं ्रेजी के अयिररति ह दं ी मंे भी सरकारी काम-काज करने के शयए आशुशयवपकों िथा टंककों के शयए प्रोत्सा नभत्िा प्रयिमा क्रमश: 2(0/- रूपये ि 160/- देने का प्रािधान ै । (आदेश स.ं 1303(/12/2009-रा.भा.)नीयि))III. सरकारी कामकाज (हटर ्पण/आलेखि) मलू रूप से हिदं ी में करिे तथा अधिकाररयों द्िारा हिदं ी मेंडडक्सटर ेशि देिे के मलए प्रोत्साििसरकारी काम मयू रूप से ह दं ी मंे करने के शयए पुरस्कार राशश यनम्पन प्रकार ै –(क) के न्र सरकार के प्रत्येक मतं ्रायय/विभाग/सबं ंद्ध कायाया य के शयए स्िितं ्र रूप से:प या परु स्कार )2 परु स्कार) : प्रत्येक 2000/- रूपयेदसू रा पुरस्कार )3 परु स्कार) : प्रत्येक 1200/- रूपयेिीसरा परु स्कार )5 पुरस्कार) : प्रत्येक 600/- रूपये(ख) के न्र सरकार के ककसी विभाग के प्रत्येक अधीनस्थ कायाायय के शयए स्ििंत्र रूप से:प या परु स्कार )2 पुरस्कार) : प्रत्येक 1600/- रूपयेदसू रा पुरस्कार )3 परु स्कार) : प्रत्येक 800/- रूपयेिीसरा पुरस्कार )5 पुरस्कार) : प्रत्येक 600/- रूपये (आदेश स.ं II/12013/01/2011-रा.भा.)नीयि/कें अनु.ब्यरू ो))

अध्याय-12 िाजभाषा ववभाग की उपलब्धधयां सघं सरकार की राजभाषा नीयि के सबं धं में संिधै ायनक प्रािधानों, राजभाषा अधधयनयम, 1963 एिं राजभाषा यनयम, 1976, राजभाषा सकं ल्प, 1968 िथा राष्ट्रपयि के समय समय पर जारी आदेशों के अनुपायन के शयए राजभाषा विभाग एक नोडय विभाग ै। इसकी स्थापना जनू , 1975 मंे की गई थी। य विभाग के न्रीय सरकार के कायाया यों में ह न्दी के प्रगामी प्रयोग को बढाने के शयए अनेक गयिविधधयां चया र ा ै । इनमें के न्र सरकार के कमचा ाररयों को ह न्दी भाषा, ह न्दी आशुशयवप, ह न्दी टंकण ि अनिु ाद का प्रशशक्षण देना, कायााययों का यनरीक्षण करना, आिधधक ररपोटा के माध्यम से प्रगयि पर यनगरानी रखना, राजभाषा कायाान्ियन के प्रोत्सा न के शयए विशभन्न योजनाएं यागू करना, अखखय भारिीय िथा क्षते ्रीय स्िर के सम्पमेयन आहद करना और कायाान्ियन के शयए विशभन्न स्िरों पर गहठि सशमयियों की बठै कों आहद से सबं ंधधि कायों का समन्िय करना आहद शाशमय ै । य विभाग राजभाषा ह न्दी के प्रचार प्रसार के शयए स ायक साह त्य का प्रकाशन िथा वििरण का काया भी करिा ै । कायाया यों मंे प्रयोग में आने िाये विशभन्न इयतै रायनक उपकरणों में देिनागरी शयवप के माध्यम से काम करने की सवु िधा बढाने की दृब्ष्ट्ट से ऐसे उपकरणों के विकास िथा उपयब्धिा संबंधी गयिविधधयों में समन्िय स्थावपि करने की भूशमका भी राजभाषा विभाग यनभा र ा ै । राजभाषा विभाग मयू ि राजभाषा ह न्दी के प्रचार, प्रसार और प्रयोग से जुड़ी गयिविधधयां यनष्ट्पाहदि करिा ै । य विभाग के न्र सरकार के कायाया यों में सरकारी कामकाज में ह न्दी के अधधकाधधक प्रयोग को प्रोत्सा न देिा ै । राजभाषा विभाग सरकारी कमचा ाररयों को ह न्दी भाषा एंि ह दं ी टंकण/आशुशयवप का प्रशशक्षण, सरकारी सामग्री के अनुिाद काय,ा राजभाषा ह दं ी के प्रचार-प्रसार, प्रोत्सा न स्िरूप पुरस्कार वििरण के िावषका यक्ष्य यनधााररि करिा ै िथा उनको परू ा करने का प्रयास ककया जािा ै । विभाग का य भरसक प्रयास ोिा ै कक बजट मंे आिहं टि राशश का सदपु योग ककया जाए । राजभाषा विभाग की तकिीकी उपलब्धध राजभाषा विभाग का िकनीकी प्रभाग कं ्यटू र मंे ह दं ी के प्रयोग के शयए साफ्टिये र विकशसि करिाने एिं प्रशशक्षण हदयिाने के साथ-साथ िकनीकी सम्पमेयनों/सगं ोब्ष्ट्ठयों के माध्यम से मतं ्राययों/विभागों, उपक्रमों, बकैं ों आहद से सम्पपका स्थावपि करिा ै िथा इयैतरॉयनक उपकरणों ि साफ्टिेयर अनपु ्रयोग )Applications) द्िारा ह दं ी मंे काया करने में आ र ी कहठनाईयों को दरू करने का प्रयास करिा ै। िकनीकी प्रभाग के न्र सरकार के कमचा ाररयों के शयए ह दं ी प्रयोग के शयए कं ्यूटर प्रशशक्षण कायका ्रमों का आयोजन राष्ट्रीय सचू ना विज्ञान के न्र, नई हदल्यी, सी-डके , नोएडा, िथा एन.पी.टी.आई.,फरीदाबाद के माध्यम से करिािा ै । इन कायका ्रमों मंे के न्रीय सरकार के मंत्राययों/विभागों, उपक्रमों, बकंै ों के अधधकारी/कमचा ारी यन शुल्क भाग ये सकिे ैं । िकनीकी प्रभाग द्िारा प्रत्येक िषा चार िकनीकी सगं ोब्ष्ट्ठयों और कं ्यटू र प्रदशया नयों का भी आयोजनककया जािा ै ब्जसमें कं म्प्यूटरों में द्विभाषी (ह दं ी-अंग्रेजी) सवु िधाओं के बारे मंे निीनिम जानकारी दी जािी ै। िषा 2011-12 मंे इस प्रकार की पांच सगं ोब्ष्ट्ठयां आयोब्जि करिायी गयी । ििमा ान वित्ि िषा 2012-13 मंे 0(िकनीकी सगं ोब्ष्ट्ठयों के आयोजन का यक्ष्य ै। िषा 2013-14 में भी 0( िकनीकी सगं ोब्ष्ट्ठयों के आयोजन कायक्ष्य ै। अनशु ्रिण याइन उपयब्ध कराने के शयए नए साफ्टिये र-यनष्ट्पादन संबधं ी ररपोटा वित्िीय एिंकाय/ा प्रशासयनक का विकास

राजभाषा विभाग, गृ मतं ्रायय देश के विशभन्न भागों मंे ब्स्थि यगभग दस जार के न्रीय सरकारी कायााययों मंे राजभाषा के प्रयोग के अनुश्रिण िथा राजभाषा कायाान्ियन के शयए नोडय विभाग ै । उति कायाायय देश भर में ब्स्थि 350 नगर राजभाषा कायाान्ियन सशमयियों के सदस्य ै । नगर राजभाषा कायाान्ियन सशमयियों )नराकास) मंे अनुश्रिण की प्रकक्रया िीन स्िरीय ैैः (क) प्रथम स्िर पर राजभाषा विभाग के के न्रीय ह दं ी प्रशशक्षण ससं ्थान एिं के न्रीय अनिु ाद ब्यूरो के क्रमशैः 05 ि 03 क्षते ्रीय कायााययों से उनके अधीनस्थ कायाया यों की सचू नाएं प्रा्ि ोिी ंै। के न्रीय ह दं ी प्रशशक्षण संस्थान के ह दं ी शशक्षण योजना के अिं गिा 109 पणू का ाशयक प्रशशक्षण के न्र, 05 अशं काशयक प्रशशक्षण के न्र, टंकण/आशुशयवप के 20 पणू का ाशयक प्रशशक्षण के न्र िथा 13 अशं काशयक प्रशशक्षण के न्र काया कर र े ंै। )ख) राजभाषा विभाग को के न्रीय ह दं ी प्रशशक्षण ससं ्थान ि के न्रीय अनिु ाद ब्यूरो से प्रशशक्षण की वित्िीय एिं भौयिक आख्याएं प्रा्ि ोिी ैं । )ग) राजभाषा विभाग को समस्ि के न्रीय मतं ्राययों/विभागों से प्रशशक्षण की वित्िीय एिं भौयिक आख्याएं प्रा्ि ोिी ंै । इन समस्ि आख्याओं को मनै ुअय की बजाए साफ्टिेयर ए्यीके शन्स के माध्यम से आन-याइन ककया जाना परम आिचयक ै । िैब पर आधाररि एक आन-याइन सूचना प्रबंधन प्रणायी का विकास ककया गया ै। इस शसस्टम द्िारा सभी मतं ्राययों/विभागों, अधीनस्थ/सबं दं ्ध कायााययों, उपक्रमों, ि बकैं ों से आन-याइन यिमा ी प्रगयि ररपोटा, िावषका मलू ्यांकन ररपोटा आहद विभाग ि अधीनस्थ कायााययों को भेज सकंे गे । इस शसस्टम का विकास, स्थापना एिं परीक्षण कर शयया गया ै और इसे जल्द ी यागू कर हदया जाएगा । य ां य भी उल्येख करना प्रासंधगक ै कक राजभाषा के कायाान्ियन का अनुश्रिण शीषिा म स्िर पर माननीय प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षिा में गहठि के न्रीय ह दं ी सशमयि, समस्ि मतं ्राययों/विभागों मंे संबधं धि माननीय मतं ्रीगण की अध्यक्षिा में गहठि ह दं ी सया कार सशमयियों िथा सधचि, राजभाषा की अध्यक्षिा मंे गहठि के न्रीय राजभाषा कायाान्ियन सशमयि द्िारा ककया जािा ै । इन सबके अयिररति संसदीय राजभाषा सशमयि भी राजभाषा के प्रयोग का सिि ् अनशु ्रिण करिी ै । अिैः उब्ल्यखखि प्रयोजनाथा साफ्टिये र ए्यीके शन टू ल्स का विकास यनिािं आिचयक ै । राजभाषा ह न्दी के प्रचार-प्रसार िथा विकास के प यू को सरकारी िंत्र में सशति रूप से पेश करने केउद्दचे य से राजभाषा विभाग मंे अनसु धं ान प्रभाग की स्थापना की गई ै।विमभन्ि आयोजि हिदं ी हदिस राजभाषा विभाग द्िारा प्रयििषा 1( शसिम्पबर ह दं ी हदिस के रूप में मनाया जािा ै। राजभाषा केप्रयोग को प्रोत्साह ि करने के उद्देचय से इस समारो में राजभाषा के प्रयोग मंे सिशा ्रेष्ट्ठ प्रगयि ाशसय करनेिाये मंत्राययों/विभागों/ कायााययों/बकैं ों एिं उपक्रमों को, िथा ह दं ी मंे उच्च कोहट के मौशयक पसु ्िक येखन िथाउत्कृ ष्ट्ट येखों ेिु परु स्कार प्रदान ककए जािे ंै।

क्षते ्रीय राजभाषा सम्‍मेलि राजभाषा ह दं ी के प्रयि एक आदशा िािािरण बनाने, इसके कायाान्ियन में आने िायी कहठनाइयों पर चचाा करने िथा क्षेत्रीय स्िर पर के न्रीय सरकारी कायाया यों मंे राजभाषा नीयि के कायाान्ियन को प्रोत्सा न देने के शयए प्रयि िषा ( क्षते ्रीय राजभाषा सम्पमेयनों का आयोजन ककया जािा ै । सघं की राजभाषा के रूप मंे ह दं ी के प्रचार-प्रसार िथा राजभाषा सबं ंधी संिधै ायनक प्रािधान, राजभाषा अधधयनयम, राजभाषा यनयम और माननीय राष्ट्रपयि जी द्िारा समय-समय पर जारी आदेशों का अनुपायन विधधिि रूप से करने के शयए इन राजभाषा सम्पमेयनों में संघ की राजभाषा नीयि सबं ंधी विषयों पर विचार मथं न भी ककया जािा ै। अभी िक 88 सम्पमेयनों का आयोजन ककया जा चुका ै।


Like this book? You can publish your book online for free in a few minutes!
Create your own flipbook