वा य: - मेरी दादी को पढ़ने के िलए कह रहे हो? अरे! उसके िलए तो काला अoर भस बराबर ह।ै 5. िजसकW लाठी उसकW भस :- बलवान सब कु छ कर सकता है वा य: समय बदल रहा ह।ै अब िजसकW लाठी उसकW भस वाली कहावत सही नह4 हो सकती। 6. जो गरजते ह वो बरसते नह4:- जो बात अिधक करता है वह कायe नह4 करता। वा य: गौरव से घबराने कW ज़Gरत नह4 ह।ै वो तो यँू ही िचœलाता रहता ह।ै तमु जानते हो िक जो गरजते ह वह बरसते नह4 । 7. तेते पावँ पसाrरए जेती लाँबी सौर- आय के अनसु ार dयय करना चािहए वा य: - बेटा ! हम अपनी आवŠयकताओं के अनसु ार ही पैसे खचe करने चािहए। िफ़जलू खचˆ या िदखावे म कु छ नह4 रखा। तते े पाँव पसाrरए जते ी लाबँ ी सौर। 8. दरू के ढोल सहु ावने : - िजतनी ~िसि| हो जाती है उतनी स•यता पाई नह4 जाती वा य: - दखे ने म वह पोशाक इतनी संदु र लग रही थी परंतु एक बार धोने पर ही उसका रंग िनकल गया। िकसी ने सही ही कहा है दरू के ढोल सहु ावने लगते ह। 9. महँु म राम बगल म छु रीः- बाहर से अ छा, िदल का काला वा य: सशु ील का कोई या िव*ास करे! उसका हाल तो सभी जानते ह, महँु म राम बगल म छु री। 10. अधं ! म काना राजाः - मखू ¡ म थोड़ी बिु | वाला भी आदर पाता ह।ै वा यः बाहरव4 कW परीoा म पास होने पर संिचत से सभी सलाह लने े लगे। व2ततु ः वह तो अंध! म काना राजा ह।ै 11. अब पछताए होत या जब िचिड़याँ चगु गई ंखते - समय बीत जाने पर पछतावे से कोई लाभ नह4 वा य: परीoा का पrरणाम दखे कर रोने से या फ़ायदा। पहले तो ढंग से पढ़ाई नह4 कW अब पछताए होत या जब िचिड़याँ चगु गई ंखते । 12. आप भला तो जग भला:- यिद हम अ छे ह तो सब हमारे साथ अ छा dयवहार करगे वा य: तwु ह डरने कW या ज़Gरत। तुमने तो सबके साथ अ छा ही dयवहार िकया है िफर ये बात भी सच है िक आप भला तो जग भला। 13. उœटा चोर कोतवाल को डाँटे :- अपनी गलती और धमकाना दसू र! को वा य: रमेश कW आदत बहत बरु ी ह।ै अपनी गलती मानता नह4 और लड़ने लग जाता ह।ै ये तो वही बात हई उœटा चोर कोतवाल को डाँटे। 14. ऊँ ची दकु ान फWके पकवान:- बड़ी ~िसि| वाले ~ायः ओछा आचरण करते ह। वा य : लाला करोड़ीमल के यहाँ से चदं ा िमल जाएगा यह सोचकर चले मत जाना। वहाँ तो ऊँ ची दकु ान फWके पकवान वाली बात ह।ै 15. एक अनार सौ बीमारः- व2तु कम तथा चाहने वाले अिधक वा यः दकु ान म प2ु तक तो आई लेिकन िमलना मिु Šकल है य! िक वहाँ तो वही कहावत आती है एक अनार सौ बीमार। 16. खोदा पहाड़ िनकली चिु हयाः-पrरzम अिधक लाभ कम वा यः मनै े सोचा dयापार म फायदा हो जाएगा लेिकन खोदा पहाड़ िनकली चिु हया। 17. थोथा चना बाजे घना : - िदखावा करने वाला कु छ नह4 करता। वा य -एक पु2तक िलख कर अपने आप को महान किव समझने लगे ह। यह कहावत तो सच ही है थोथा चना बाजे घना। 18. हाथ कं गन को आरसी या = ~•यo को ~माण कW आवŠयकता नह4 होती वा य: भारतवषe अqय सभी दशे ! से अ छा ह।ै हाथ कं गन को आरसी या? 2वयं जांचकर देख लो। 158
अzयास काय3 (Work Book) अपिठत गyांश 1. िनIनिलिखत अपिठत गyांश पढ़कर % के उ;र िलिखए। गाड़ी के िडnबे म बहत मसु ािफर नह4 थ।े मेरे सामनेवाली सीट पर बैठे सरदार जी दरे से मुझे भारत के बटँ वारे के िक2से सुना रहे थे। वह फ़ौज म थे और लड़ाई म भी भाग ले चकु े थे। वे बात-बात पर हसँ ते और गोरे फ़ौिजय! कW िखœली उड़ाते। िडnबे म तीन पठान dयापारी भी थे। उनम से एक हरे रंग कW पोशाक पहने ऊपरवाली बथe पर लेटा हआ था। वह आदमी बहत गमु सुम था। दसू रा dयापारी ऊपर वाली बथe के सामने वाली बथe पर लटे कर नीचे बैठे अपने तीसरे साथी से बात कर रहा था। तीसरा dयापारी बहत ही हसँ मखु और दबु ला-पतला था और दोन! dयापाrरय! म बहत दरे से मज़ाक चल रहा था। मरे े साथ वाली सीट पर एक बहत मोटा आदमी बठै ा हआ था, जो बार-बार अपने थैले से खाने कW चीज़ िनकालकर खा रहा था। मरे े सामने दाई ओं र कोने म एक बुिढ़या बड़ी दरे से अपने िसर-महँु को ढापँ कर माला जप रही थी। - 1. Àेन म लेखक के सामने कW सीट पर कौन बैठा ह?ै () () अ) िकसान आ) डॉ टर इ) सरदार जी ई) फ़ौजी इ) लड़ाई के ई) फ़ौिजय! के 2. सरदार जी कौन-से िक2से सनु ा रहे थे? अ) गोरे फ़ौिजय! के आ) भारत के बँटवारे के 3. लखे क के दाई ंओर कौन बैठा था? 4. तीसरे dयापारी का 2वभाव कै सा था? 5. साथ वाली सीट पर बठै ा आदमी या कर रहा था? 6. ग™ाशं को उिचत शीषeक ~दान करो। ो;र िनIनिलिखत % के उ;र िलिखए। 1. चपरासी या नोिटस लाया था? राजन ने अcपू के परै म िचकौटी य! काटी? 2. ब च! के मनोभाव अcपू के उदाहरण दके र समझाए।ँ 3. कoा म रह कर भी अcपू का मन पढ़ाई म य! नह4 लगता था? प लेखन िम को जMम िदवस क< बधाई देते हfए प िलिखए। 159
_याकरण 1) िनIन 5रT Oथान% के िलए उिचत महु ावरे िलिखए। () 1. िवदशे से लौटने पर रोहन के 2वागत म उसके पrरवार वाल! ने .............................। () () (अ) घी के दीए जलाए (आ) हवा से बात करने लग)े 2. आजकल मीनाoी पढ़ाई म ................................................। (अ) दाँत खvे कर रही थी (आ) जी जान से जुटी ह)ै 3. रामू पर िव*ास मत करना उस का वही हाल है ...............................। (अ) आसमान िसर पर उठाना (आ) मँहु म राम बगल म छु री) 2) िनIनिलिखत महु ावर% को उनके अथ3 से िमलाइए। 1. कोœह} का बैल चगु ली करना 2. अगँ लु ी उठाना खशु ामद करना 3. गोबर गणेश बहत पrरzमी होना 4. कान भरना दोष िनकालना 5. तलवे चाटना प का मखू e 3) िनIनिलिखत लोकोिTय% का अथ3 िलिखए। 1. खोदा पहाड़ िनकली चिु हया - ___________________________________ 2. काला अoर भस बराबर - ___________________________________ 3. जो गरजते ह वो बरसते नह4 - ___________________________________ 4) िनIनिलिखत शeद% के वचन बदिलए। 1. ब चा - 4. दकु ान - 5. अलमारी- 2. माता - 6. चेहरा - 3. अuयािपका - 160
5) िनIनिलिखत वा य% म ि:या शeद रेखांिकत क<िजए। 4. उसके िपता द£तर जा रहे ह। 5. सब लड़िकयाँ अपनी-अपनी जगह पर बैठी ह। 1. उसके िपताजी उसे ये चीज़ बराबर ला दते े ह। 6. राधा नाच रही ह।ै 2. वहाँ और कोई लड़का नह4 जाता था। 3. माँ ने दाँत! तले उँगली दबाई। 4. खरीदना - ______________ 6) िनIनिलिखत शeद% के िवलोमाथ3 िलिखए। 5. सवाल --______________ 1. आसमान - ___________________ 6. हमशे ा - ______________ 2. िनyय - ___________________ 3. छावँ - ___________________ 7) िनIनिलिखत शeद% के अथ3 िलखकर वा य% म योग क<िजए। 1. टुकर-टुकर ताकना = ________________ - __________________________________ 2. दम घटु ना = ________________ - __________________________________ 3. ललचाना = ________________ - __________________________________ 8) िनIनिलिखत वा य% म कारक िच• पहचानकर रेखांिकत क<िजए। 1. वह कं धे पर व2ता लटकाए चला। 4. रामन ने फWस ज़मा कW। 2. दकु ानदार जार का ढ कन खोलने लगा। 5.उसने जेब म हाथ डाला। 3. उसकW चाल कW तज़े ी बढ़ी। 6. नीम के पेड़! कW घनी छाँव थी। 9) िनIनिलिखत शeद% के पुनŠिT िलिखए। 1. अपनी - _______ 2. साथ - _______ _______ 3. हसं ते - _______ 4. बचते - _______ 5. जाते - _______ 6. खाते - 10) िनIन रेखांिकत शeद% के िलंग बदलकर वा य िफर से िलिखए। 1. उसके िपताजी सब िखलौने लाते ह। उ. _____________________________________ 2. मेरा दो2त आठव4 कoा म पढ़ता ह।ै उ. _____________________________________ 3. सब लड़िकयाँ बगीचे म थी। उ. _____________________________________ 161
4. दादी ने कहानी सुनाई। उ. _____________________________________ 5. अuयापक ने पाठ पढ़ाया। उ. _____________________________________ 6. कौए ने गाने के िलए मँुह खोला। उ. _____________________________________ 11) िनIनिलिखत वा य% म िवशेषण शeद पहचािनए। 1. वहाँ अलमारी म काचँ के बड़े जार रखे थे। () अ) जार आ) अलमारी इ) बड़े ई) रखे 2. जार अब छोटा बनता जा रहा था। () अ) छोटा आ) बनता इ) रहा ई) था 3. दकु ान नज़दीक आ रही ह।ै () अ) आ आ) दकु ान इ) नज़दीक ई) रही 12) िनIनिलिखत महु ावर% के सही अथ3 पहचािनए। 1. नौ दो ‡यारह होना - () अ) भाग जाना आ) हसँ ी उड़ाना इ) चलना ई) वािपस आना 2. मात खाना- () अ) जीतना आ) खुश होना इ) हार जाना ई) परेशान होना 3. आखँ ो मे िचंगाrरयाँ सुलगना- () अ) आyयe म पड़ जाना आ) +ोिधत होना इ) मज़ाक उड़ाना ई) खशु ी िदखाना 13) िनIनिलिखत शeद% से उपसग3 अलग क<िजए। 1. आकृ “ () अ) कृ “ आ) कृ इ) अकृ ई) आ 2. अिभdयि„ () अ) िभ आ) अिभ इ) ि„ ई) dयि„ 3. िनषधे () अ) िनर आ) सदे इ) िनः ई) िनषे 14) िनIनिलिखत शeद% से 4यय अलग क<िजए। 1. सिwमिलत () अ) इत आ) इक इ) ईत ई) स 2. िचड़िचडाहट () अ) िच आ) िचड़ इ) हट ई) आहट 3. सजृ ना•मक () अ) सजृ आ) इत इ) आ•मक ई) सजृ ना 15) िनIनिलिखत वा य% के नकारा4मक pप के िलए उिचत शeद पहचािनए। 1. लड़के ने कं चे खरीद।े () अ) नह4 आ) मत इ) न ई) नकारना 2. जॉजe को िखलौने दो। () अ) नह4 आ) मत इ) न ई) नकारना 3. उस रा2ते से जाना ह।ै () अ) नह4 आ) मत इ) न ई) मना ~कृ ित अपrरिमत pान का भडं ार ह,ै परंतु उससे लाभ उठाने के िलए अनभु व आवŠयक ह।ै - हrरऔध 162
इकाई-III 11. एक ितनका अयोUया िसहं उपाUयाय अथ38ा9ता िति:या 1. िच म या िदखायी दे रहा है? उ. िच म माँ सपू म चावल पछोड़ रही ह।ै वहाँ एक लड़का आखँ मल रहा ह।ै पीछे कु छ घर ह। 2. लड़का या कर रहा है और य%? उ लड़का आखँ मल रहा ह।ै माँ के सपू म चावल पछोड़ने के कारण एक ितनका लड़के कW आखँ म िगर गया होगा। 3. आँख% म ितनका िगरने पर या होता है? उ. आँख! म ितनका िगरने पर बचे ैनी होती ह।ै आखँ ! म अनयास ही आँसू आ जाते ह। आखँ लाल हो जाती ह। xि“ अ2प“ हो जाती ह।ै 1. मठँू = कपड़े से बनी मठँू knob of cloth 2. ऐठं ना = िजद करना to twist, to be conceited 3. दबे पाँव = चपु चाप with silent steps छत के चार! ओर का दीवार parapet 4. मडंु ेर = सखू ी घास का छोटा टुकड़ा straw 5. ितनका = सकं ोच करना to hesitate ढ़गं से with manner 6. िझझकना= dय‡ं य करना to ridicule 7. ढब से = 8. ताने दने ा = 1. मF घमंड% म भरा ऐठं ा हfआ, एक िदन जब था मुंडेरे पर खड़ा। आ अचानक दूर से उड़ता हfआ, एक ितनका आखँ म मेरी पड़ा। 163
सगं : ~2ततु प™ाशं हमारी पाठ्य पु2तक बाल-बसंत-2 के एक ितनका किवता से िलया गया ह।ै इस किवता के किव अयोuया िसंह उपाuयाय जी ह किव कहते ह िक एक ितनका किवता उन लोग! के िलए एक सदं शे है जो घमडं ी होते ह और यह नह4 सोचते िक हर व2तु का अपना-अपना महÁव होता ह।ै भावाथ3 : किव का कहना है िक एक िदन म बहत अकड़ कर घमंड से भरा ऐठं ा हआ मंड़ु ेर पर खड़ा था। तभी दरू से उड़ता हआ एक ितनका आकर मरे ी आखँ म िगर गया। 2. मF िझझक उठा, हfआ बेचैन-सा, लाल होकर आँख भी दुखने लगी। मूँठ देने लोग कपड़े क< लगे ऐठं बेचारी दबे पाँव% भगी। संग – ~2ततु प™ांश हमारी पाठ्य प2ु तक बाल-बसतं -2 के एक ितनका किवता से िलया गया ह।ै इस के किव अयोuया िसंह उपाuयाय जी ह किव कहते ह िक- भावाथ3 : ितनके के िगरते ही किव बेचैन हो गया। उसकW आँख लाल हो गई तथा ददe के कारण दखु ने लगी। लोग कपड़े को गमe कर के सकने लग।े िजससे ददe एक दम कम हो गया मान! ऐठं दवे पाँव भाग गयी हो। 3. जब िकसी ढब से िनकल ितनका गया, तब \"समझ\" ने य% मुझे ताने िदए। ऐठं ता तू िकस िलए इतना रहा, एक ितनका है बहfत तेरे िलए। सगं – ~2तुत प™ांश हमारी पाठ्य प2ु तक बाल-बसतं -2 के एक ितनका किवता से िलया गया ह।ै इस के किव अयोuया िसंह उपाuयाय जी ह किव कहते ह िक- भावाथ3 : घमडं ी dयि„ कW आखँ से जब ितनका िनकल गया तो बिु | ने उसे ताने िदये और कहा िक तwु ह िकस बात का इतना घमडं है तwु हारे घमडं को तोड़ने के िलए एक ितनका ही क़ाफW ह।ै 1. हम घमंड य% नह^ करना चािहए? बताइए। उ. हम िकसी भी हालत म घमडं नह4 करना चािहए। एक कहावत भी ह,ै “घमडं देवताओं को भी न“ कर दते ा ह।ै ” छोटा-सा हœका ितनका भी हमारे बड़cपन का घमंड तोड़ दते ा ह।ै इसिलए हम घमडं नह4 करना चािहए। 2. ‘एक ितनका’ किवता म िकस घटना क< चचा3 क< गई है, िजससे घमंड नह^ करने का सदं ेश िमलता है? उ. ‘एक ितनका’ किवता म आखँ म ितनका िगर कर बचे ैन होने कW चचाe कW ह।ै किव घमडं करने वाले को यह संदशे दे रहे है िक आखँ म एक छोटा-सा ितनका िगरकर हम बचे ैन कर सकता ह।ै एक नqहा ितनका हमारे घमडं को चकनाचरू कर सकता ह।ै हम घमडं नह4 करना चािहए। िकसी को छोटा नह4 समझना चािहए। 3. ‘ऐठं ता तू िकस िलए इतना रहा, एक ितनका है बहfत तेरे िलए। इन पंिTय% के भाव के बारे म चचा3 क<िजए। 164
उ. “घमडं करने वाले से उसकW बिु | कहती है िक तमु इतना घमडं य! करते हो? एक छोटा-सा, हœका ितनका तुwहारा घमंड तोड़ सकता ह।ै ” यह कथन ठीक ही ह।ै हर व2तु का अपना-अपना मह•व होता ह।ै अपने बड़cपन का घमडं नह4 करना चािहए। कहावत भी है िक घमंड दवे ताओं को भी न“ कर दते ा ह।ै तेलगु ु के कबीर वेमना भी कहते ह िक जतू े म छोटा प•थर, आँख! म छोटा ितनका भी बहत बचे नै करता ह।ै 1. किव कहाँ खड़ा था? अित5रT 2.किव को बचे ैनी य! हई? 3. इस किवता को िमल कर गाइए। 4. अqय िकसी किव कW किवता कoा म सनु ाइए। 1. नीचे दी गई किवता क< पंिTय% को सामाMय वा य म बदिलए। जैसे-एक ितनका आखँ म मरे ी पड़ा - मेरी आखँ म एक ितनका पड़ा। मठँू दने े लोग कपड़े कW लगे - लोग कपड़े कW मठँू देने लगे। क) एक िदन जब था मडंु ेरे पर खड़ा उ) एक िदन जब मडुं ेरे पर खड़ा था। ख) लाल होकर आँख थी दखु ने लगी। उ) आखँ लाल होकर दखु ने लगी थी। ग) ऐठं बेचारी दबे पावँ ! भागी। उ) बचे ारी ऐठं दबे पाव! भागी। जब िकसी ढंग से िनकल ितनका गया। उ) जब ितनका िकसी ढंग से िनकल गया। 2. आँख% म ितनका पड़ने के बाद घमंडी क< या दशा हfई? उ. आखँ ! म ितनका पड़ने के बाद घमडं ी बचे नै था। उसकW आखँ लाल होकर दखु ने लगी। लोग कपड़े कW मठँू दने े लग।े 3. घमंडी क< आँख से ितनका िनकालने के िलए उसके आसपास के लोग% ने या िकया? उ. घमडं ी कW आखँ से ितनका िनकालने के िलए उसके आस-पास के लोग! ने कपड़े कW मँठू दी। अित5रT 1. ‘खड़ा’ का uविनसाwय शnद ‘पड़ा’ ह।ै इसी ~कार लगी तथा िदए शnद! के uविनसाwय शnद िलिखए। 2. ितनका शnद का त•सम तणृ है इसी ~कार आँख, पाँव, का त•सम Gप ढूिं ढ़ए। 3. म िझझक उठा, हआ बेचैन –सा। इस वा य म और शnद का ~योग करके वा य िफर से िलिखए। अUयापन संके त - सिु नए-बोिलए और पिढ़ए म िदए गए अितrर„ ~… छा ! कW pान-विृ | हते ु ह। - अuयापक/अuयािपका छा ! से िनwन ~… पछू तथा उनके उfर कW सराहना कर। 165
अिभ_यिT सृजना4मकता 1. ‘एक ितनका’ किवता म घमडं ी को उसक< ‘समझ’ ने चेतावनी दी - ऐठं ता तू िकस िलए इतना रहा, एक ितनका है बहfत तेरे िलए। इसी कार क< चेतावनी कबीर ने भी दी है - ितनका कबहqँ न िनंिढए, पाँव तले जो होय। कबहqँ उिड़ आँिखन परै, पीर घनेरी होय॥ उ. सगं -~2ततु भाव हमारी पाठ्य प2ु तक बाल-वसंत -2 एक ितनका किवता से िलया गया ह।ै इस किवता के किव अयोuया िसंह उपाuयाय हrरऔध जी ह। किव का कथन है िक- भाव : ितनका पाँव के नीचे आता ह।ै पर उसके िलए कभी उसकW िनंदा न कर। नह4 तो, वह िकसी भी समय उड़कर आँख! म पड़कर, घोर पीड़ा देता है अथातe छोटी सी व2तु भी का भी अपना मह•व होता ह।ै 2. इस किवता का सदं ेश या है? िलिखए। उ. इस किवता का संदशे है िक कभी घमंड नह4 करना चािहए। छोटा, हलका सा ितनका भी उड़कर आखँ म िगरकर भी हमारे बड़cपन का घमंड तोड़ सकता ह।ै घमडं दवे ताओं को भी न“ कर दते ा ह।ै िवफलता, अशांित, अ2व2थता आिद कW जड़ है - घमंड। अतः हम घमंड नह4 करना चािहए। भाषा क< बात 1. नीचे दी गई कबीर क< पंिTय% म ितनका शeद का योग एक से अिधक बार िकया गया है। इनके अलग- अलग अथ” क< जानकारी ाa कर और उनका वा य म योग कर। उठा बबूल ेम का, ितनका उड़ा अकास। ितनका-ितनका हो गया, ितनका ितनके पास॥ उ. 1. ितनका = सूखी घास का टुकड़ा - 2कू ल आते समय ितनका उड़कर मरे ी आखँ म आ िगरा। 2. ितनका हो जाना = दबु ला-पतला हो जाना - िनहाrरका न खाने के कारण ितनका हो गई। 1. ‘िकसी ढब से िनकलना’ का अथ3 है िकसी ढगं से िनकलना। ‘ढब से’ जैसे कई वा यांश% से आप प5रिचत ह%गे, जैस-े धम से वा यांश है लेिकन Uविनय% म समानता होने-के बाद भी ढब से और धम से जैसे वा यांश% के योग म अंतर है। ‘छप से’ इ4यािद का योग Uविन jारा ि:या को सिू चत करने के िलए िकया जाता है। 166
नीचे कु छ Uविन jारा ि:या को सिू चत करने वाले वा यांश और कु छ अधूरे वा य िदए गए हF। उिचत वा यांश चनु कर वा य% के खाली Oथान भ5रए- (क) छप से (ख) टप से (ग) थर3 से (घ) सन् से उ. (क) मढ़क पानी म छप से कू द गया। (ख) नल बंद होने के बाद पानी कW एक बँदू टप से चू गई। (ग) म ठंड म थरe से कापँ गया। (घ) ठंडी हवा सन् से गज़ु री। 1. इस किवता को किव ने ‘मF’ से आरंभ िकया है- ‘मF घमंड% म भरा ऐठं ा हfआ।’ किव का यह ‘मF’ किवता पढ़नेवाले _यिT से भी जुड़ सकता है और तब अनुभव यह होगा िक किवता पढ़नेवाला _यिT अपनी बात बता रहा है। यिद किवता म ‘मF’ क< जगह ‘वह’ या कोई नाम िलख िदया जाए, तब किवता के वा य% म बदलाव आ जाएगा। किवता म ‘मF’ के Oथान पर ‘वह’ या कोई नाम िलखकर वा य% के बदलाव को देिखए और कJा म पढ़कर सुनाइए। उ. वह घमंड! म भरा ऐठं ा हआ, एक िदन जब था मडंु ेरे पर खड़ा। आ अचानक दरू से उड़ता हआ, एक ितनका आखँ म उसकW पड़ा। वह िझझक उठा, हआ बचे ैन-सा, लाल होकर आँख भी दखु ने लगी। मँठू दने े लोग कपड़े कW लगे, ऐठं बचे ारी दबे पाँव भागी। जब िकसी ढब से िनकल ितनका गया, तब ‘समझ’ ने य! उसे ताने िदए। ऐठं ता तू िकस िलए इतना रहा, एक ितनका है बहत तरे े िलए। 2. नीचे दी गई पिं Tय% को Uयान से पिढ़ए - ऐठं बेचारी दबे पाँव% भगी, तब ‘समझ’ ने य% मझु े ताने िदए। इन पंिTय% म ‘ऐठं ’ और ‘समझ’ शeद% का योग सजीव ाणी क< भाँित हfआ है। कoपना क<िजए, यिद ‘ऐठं ’ और ‘समझ’ िकसी नाटक म दो पा होते तो उनका अिभनय कै सा होता? उ. ऐठं : इस संसार म म सबसे बड़ी ह}।ँ समझ : तमु नह4 हो सकती। ऐठं : य! नह4? 167
समझ : जरा ठहरो, पता चलेगा। ऐठं : (दोन! रा2ते म जाते हए बात करते रहते ह। इतने म एक ितनका उड़कर ऐठं कW आखँ म िगरा।) समझ : हाय! (आखँ को मलती ह)ै , बाप रे! ऐठं : ओहो! या हआ? समझ : ऐठं : आँख बहत दखु रही ह।ै आखँ से आसँ ू डब-डबाने लग।े समझ : (सामने से सपु rरिचत क”णा आती ह।ै वह अपने आँचल से ितनका िनकालती ह।ै ितनका उड़ जाता ह।ै ) अब कै सी हो? वाह-वाह! अब ठीक ह।ै बहत आराम ह।ै अब मालमू हआ, या? (ऐठं इतने म चपु चाप िफसलकर िनकल जाती ह।ै ) अरे! तू कहाँ...? अहा! (यविनका िगरती ह।ै ) 1. आदमी को घमंड नह^ करना चािहए। घमंड से या नकु सान होता है? घमंड को दूर करने के िलए हम या करना चािहए? उ. एक कहावत है िक घमडं देवताओंको भी न“ कर दते ा ह।ै घमंड से हमारे मन और तन अ2व2थ होते ह। पार2पrरक संबंध टूटते ह। काम िवफल होते ह। कु छ संदभ¡ म झगड़े पैदा होते ह। घमडं को दरू करने के उपाय:-हर dयि„ को योगासन! का अÃयास करना चािहए। सदा शािं त से रहना चािहए। िकसी dयि„ को छोटा नह4 समझना चािहए। धन संपिf का इस ससं ार तक ही काम है यह िकसी के साथ नह4 जाती हमशे ा इस बात को याद रखना चािहए। यिद घमडं आता है तो मँहु नह4 खोलना चािहए। मौन-{त रखना चािहए। सदा ~सqन रहने का अÃयास करना चािहए। या मF ये कर सकता हqँ/सकती हqँ हाँ ( ) नह^ ( × ) 1. किवता गा सकता ह}।ँ सुना सकता ह}।ँ भाव बता सकता ह}ँ 2. इस 2तर कW किवताओं का भाव पढ़कर समझ सकता ह}।ँ 3. इस 2तर कW किवताओं का भाव dयाšया करते हए िलख सकता ह}।ँ 4. किवता के शnद! से वा य बना सकता ह}।ँ 5. किवता के आधार पर अिभनय कर सकता ह}।ँ इस पाठ म मFने ये नए शeद सीखे 168
अित5रT काय3 ो;र 1. लेखक को िकस बात पर घमंड था? उ. शायद लखे क 2वभाव से ही घमडं ी था। उसे शायद अपनी सफलता पर, अपनी काdय रचना पर बहत घमडं रहा होगा। लेिकन एक घमडं ी मनªु य अ सर दसू र! को अपने से हीन समझता है और उसे लगने लगता है िक वह अपने से आसापास के लोग! से अिधक बिु |मान और अिधक सफल ह।ै लिे कन यिद वह िकसी जीव या व2तु को तु छ समझता है तो कई बार उसके िलए वही व2तु कोई बड़ी मसु ीबत खड़ी कर सकती है और उसको मिु Šकल म डाल सकती ह।ै 2. लेखक क< आँख म या पड़ गया था और उससे लेखक को या परेशानी हfई? उ. लखे क जब एक िदन मडंु ेर पर खड़ा था। अचानक उसकW आखँ म एक ितनका आ पड़ा था। िजस कW वजह से लेखक कW आखँ दखु ने लगी थी और लाल भी हो गई थी। लेखक शायद अपनी ही धनु म था और घमंड के कारण ऐठं म खड़ा था। मगर ितनका आँख म पड़ते ही उसकW सारी ऐठं िनकल गई और वह एकदम असहाय महसूस करने लगा। ऐसा लगा िक किव का सारा घमडं , सारी ऐठं उसी समय िनकल गई। वा यांश िकसी भी बात को कम से कम शnद! म dय„ करना भी एक कला ह।ै िहदं ी म वा य! के बड़े-बड़े िह2स! के िलए ‘एक शnद’ का ~योग िकया जाता ह।ै इqह वा यांश के िलए एक शnद या समािसक शnद कहा जाता ह।ै वा यांश क< कु छ िवशेषताए:ँ 1. इसके ~योग से भाषा सिं oŒ एवं ~भावशाली बनती ह।ै 2. भाषा सहज और आकषeक भी बनती ह।ै इसके कु छ उदाहरण िनwनिलिखत ह- 1. जो िदखाई न दे - अxŠय अजqमा 2. िजसका जqम न हो - अजातश ु अजर 3. िजसका कोई श ु न हो - अमर अपढ़, अनपढ़ 4. जो बढ़ू ा न हो - िनसंतान 5. जो कभी न मरे - अनदु ार अधीर, धैयeहीन 6. जो पढ़ा -िलखा न हो - सिहªणु अि]तीय 7. िजसके कोई सतं ान न हो - अिव*नीय अथाह 8. जो उदार न हो - 9. िजसम धैयe न हो - 10. िजसम सहन शि„ हो - 11. िजसके समान दसू रा न हो - 12. िजस पर िव*ास न िकया जा सके - 13. िजसकW थाह न हो - 169
14. दरू कW सोचने वाला - दरू दशˆ 15. जो दसू र! पर अ•याचार करे - अ•याचारी 16. िजसके पास कु छ भी न हो - अिकं चन आयात 17. दसू रे दशे से अपने दशे म सामान आना- िनयाeत 18. अपने दशे से दसू रे दशे म सामान जाना- अन*र अजये 19. जो कभी न“ न हो - आ•मह•या उदडं 20. िजसे कोई जीत न सके - ऊसर िकं वदंती 21. अपनी ह•या 2वयं करना - कु लीन कु šयात 22. िजसे दडं का भय न हो - owय oणभंगरु 23. िजस भिू म पर कु छ न उग सके - िटकाऊ दwपित 24. जनता म ~चिलत सनु ी -सनु ाई बात- 25. जो उ च कु ल म उ•पqन हआ हो - 26. िजसकW सब जगह बदनामी हो - 27. जो oमा के यो‡य हो - 28. शीÄ न“ होने वाला - 29. कु छ िदन! तक बने रहना वाला - 30. पित-प•नी का जोड़ा - जीवनी यह ग™ सािह•य कW नवीन िवधा ह।ै इसके अqतगतe िकसी महाप”ु ष šयाित ~ाŒ dयि„ के जीवन कW घटनाओ,ं उसके ि+या कलाप! आिद का वणeन िकया जाता ह।ै िजनसे पाठकगण ~रे णा ~ाŒ कर अपने जीवन को भी उfम बना सक। िहदं ी के इस िवधा को सम|ृ करने वाल! म बाबू गलु ाब राय, राम नाथ समु न, डा. राम िवलास शमाe, अमतृ राय आिद के नाम ~मखु ह।ै सभु –ाकु मारी चौहान सुभ‘ाकु मारी का जqम नागपचं मी के िदन 16 अग2त 1904 को इलाहाबाद (उfर~दशे ) के िनकट िनहालपरु गावँ म एक सwपqन पrरवार म हआ था सभु ‘ाकु मारी को बचपन से ही काdय-‰थं ! से िवशेष लगाव व Gिच थी। आपका िव™ाथˆ जीवन ~याग म ही बीता। अœपायु म ही सुभ‘ा कW पहली किवता ~कािशत हई थी। सभु ‘ा और महादवे ी वमाe दोन! बचपन कW सहिे लयाँ थ4। सभु ‘ाकु मारी का िववाह खंडवा (मuय~दशे ) िनवासी 'ठाकु र ल•मण िसंह' के साथ हआ। पित के साथ वे भी महा•मा गांधी के आदं ोलन से जड़ु गई औं र राªÀ-~ेम पर किवताएँ करने लगी। 1948 म एक सड़क दघु eटना म आपका िनधन हो गया। सािह4य कृ ितयां आपका पहला काdय-सं‰ह 'मुकु ल' 1930 म ~कािशत हआ। इनकW चनु ी हई किवताएँ 'ि धारा' म ~कािशत हई ह। 'झाँसी कW रानी' इनकW बहचिचतe रचना ह।ै 170
किवता : अनोखा दान, आराधना, इसका रोना, उपoे ा, उœलास,कलह-कारण, कोयल, िखलौनवे ाला, चलते समय, िचंता, जीवन-फू ल, झाँसी कW रानी कW समािध पर, झांसी कW रानी, िझलिमल तारे, ठुकरा दो या cयार करो, तमु , नीम, पrरचय, पानी और धपू , पछू ो, ~तीoा, ~थम दशeन, ~भु तमु मेरे मन कW जानो, ि~यतम से, फू ल के ~ित, िबदाई, Åम, मधमु य cयाली, मुरझाया फू ल, मेरा गीत, मरे ा जीवन, मेरा नया बचपन, मेरी टेक, मरे े पिथक, यह कदwब का पड़े -2, यह कदwब का पेड़, िवजयी मयरू , िवदा, वीर! का हो कै सा वसqत, वदे ना, dयाकु ल चाह, समपणe , साध, 2वदशे के ~ित, जिलयाँवाला बाग म बसंत। सभु ‘ाजी को ~ाय: उनके काdय के िलए ही जाना जाता है लेिकन उqह!ने राªÀीय आंदोलन म भी सि+य भागीदारी कW और जेल या ा के पyात आपके तीन कहानी सं‰ह भी ~कािशत हए, जो िनwनिलिखत ह: िबखरे मोती (1932 ),उqमािदनी (1934),सीधे- सादे िच (1947 ) । 171
अzयास काय3 पिठत भावाथ3 िनIनिलिखत पyांश का स सगं भावाथ3 िलिखए। जब िकसी ढब से िनकल ितनका गया, तब 'समझ' ने य! मझु े ताने िदए। ऐठं ता तू िकसिलए इतना रहा, एक ितनका है बहत तरे े िलए। पा याय ो;र िनIनिलिखत % के उ;र िलिखए। 1. लेखक कW आखँ का ितनका िकस ~कार िनकला और उसे 2वयं पर ‡लािन य! हई? 2. घमडं िकस ~कार मनªु य के जीवन को न“ कर सकता ह?ै उदाहरण दे कर समझाइए। 3. एक ितनका किवता का साराशं अपने शnद! म िलिखए? जीवनी डॉ॰ ए. पी. जे. अeदुल कलाम क< जीवनी िलिखए। _याकरण 1) िनIन वा यांश% के िलए एक शeद िलिखए। 1. िजसका मœू य न लगाया जा सके - _______________________ 2. जो ममु िकन न हो - _______________________ 3. सरलता से िमलने वाला - _______________________ 4. जो सगा भाई ह।ै - _______________________ 5. सब कु छ जानने वाला - _______________________ 6. जो धमe को न माने - _______________________ 2) िनIनिलिखत एक शeद को वा यांश म िलिखए। 1. कविय ी - ___________________________________ 2. अxŠय - ___________________________________ 3. अनपढ़ - ___________________________________ 172
4. िनभeय - ___________________________________ 5. दरू दशˆ - ___________________________________ 6. अगम - ___________________________________ 3) िनIनिलिखत वा य% को उिचत शeद से िमलाइए। 1.िजसे कोई जीत न सके अकथनीय 2. जो कभी न मरे जनzिु त 3. जो कहा न जा सके कपटी 4. िजस कW उपमा न हो अजेय 5. िजस के मन म कपट हो अनपु म 6. लोग! से सनु ी सनु ाई बात अमर 4) िनIनिलिखत कृ त3 वा य% को कम3 वा य म बदलकर िलिखए। 1 वह +ोिधत हो उठा । उ. _________________________________________ 2. माँ खाना पका रही थी। उ. _________________________________________ 3.सीता कपड़े धो रही है । उ. _________________________________________ 5) िनIनिलिखत शeद% के िवलोमाथ3 िलिखए। 1. जब - ________ 4. िनकलना - ________ 2. इतना - ________ 5. भरा - ________ 3. पावँ - ________ 6. तेरे - ________ 6) िनIनिलिखत शeद% का समतकु ांत शeद िलिखए। 1 1. खड़ा - __________ 4. लोग - __________ 2. िदन - __________ 5. मठँू - __________ 3. पावँ - __________ 6. लाल - _________ 7) िनIनिलिखत शeद% के अथ3 िलिखए। 1. ऐठं ना - 4. िझझकना - 2. दबे पाँव - 5. ताने दने ा - 3. मंडु ेर - 6. ढब से - 173
8) िनIन रेखांिकत शeद% के वचन बदिलए। 1. एक िदन म मंडु ेर पर खड़ा था। - _______________ 2. िचिड़या ितनका उठाकर लाई। - _______________ 3. आँख लाल होकर दखु ने लगी। - _______________ 4. लोग कपड़ा उठाकर लाए। - _______________ 5. लड़का सो रहा ह।ै - _______________ 6. किव मंडु ेर पर खड़ा था। - _______________ 9) िनIन रेखांिकत शeद% के िलंग बदल कर वा य िफर से िलिखए। 1.किव िझझक उठा। - _______________ 2. लेखक िकस िलए ऐठं ती रही। - _______________ 3. माँ कपड़े कW मठँू दने े लगी। - _______________ 4. लड़का नाच रहा था। - _______________ 5. काले बादल दखे कर मोर नाचने लगा। - _______________ 6. कौए को दखे ते ही िचिड़या मंुडेर से उड़ी। - _______________ 10) उिचत वा यांश चुनकर वा य% म खाली जगह भ5रए। (छप स,े टप से, सन् से ) 1. ठंडी हवा _______________से गजु री। 2. मढक पानी म _______________से कू द गया। 3. नल बदं होने के बाद पानी कW एक बंदू _______________से िगरी। 11) िनIनिलिखत शeद% के पया3यवाची िलिखए। 1. घमंड आ) अहकं ार, दभ,e वर इ) अहकं ार, दभe, गवe () अ) अहकं ार, दर, गवe ई) हकं ार, दभ,e गवe 2. दहे () अ) शरीर, का, तन आ) शरीर, काया, तना इ) शरीर, काया, तन ई) शरीर, काम, तन 3. आखँ () अ) चo,ु ने , िनयम आ) चo,ु ने , नयन इ) चo,ु नव, नयन ई) चoरु , ने , नयन 174
12) िनIनिलिखत वा य% म ि:या शeद रेखांिकत क<िजए। 1. आँख म ितनका या धलू िगरे तो कु छ लोग मठँू दते े ह। () () अ) ितनका आ) आखँ इ) दते े ई) धलू () 2. रामू गहृ कायe न करने के कारण कoा से दबे पावँ भाग गया। () () अ) गहृ कायe आ) कारण इ) पावँ ई) भाग गया। () 3. गलती करने पर गीता ने रीता को ताने िदए। () () अ) िदए आ) गलती इ) ताने ई) गीता ने () 13) िनIनिलिखत वा य% मे सव3नाम रेखांिकत क<िजए। ई) िदए () 1. तब ‘समझ’ ने य! मझु े ताने िदए। ई) गया () अ) तब आ) ताने इ) मझु े ई) आँख! () 2. हम सब समझ म आ गया। अ) हम आ) समझ इ) आ 3. मरे ी आखँ ! म ददe हो रहा ह।ै अ) ददe आ) रहा इ) मरे ी 14) िनIनिलिखत वा य% मे िवशेषण शeद पहचािनए। 1. कल मरे ी आखँ ! म उड़ते हए छोटे ितनके पड़े। अ) आँख! म आ) छोटे इ) मेरी ई) ितनके ई) पर 2. एक िदन किव ऊँ ची मडँु ेर पर खड़ा था। ई) नीम अ) ऊँ ची आ) मँडु ेर इ) खड़ा इ) भिवªयकाल इ) भिवªयकाल 3. वह घने नीम के पडे कW छावँ म चलने लगा। इ) भिवªयकाल अ) पडे आ) छावँ इ) घने 15) िनIन वा य% का काल पहचािनए। 1. आँख! म उड़ता हए ितनके पड़ा। अ) वतeमानकाल आ) भतू काल 2. ितनके िनकल जाएगा। अ) वतeमानकाल आ) भूतकाल 3. किवता गाना गा रही ह।ै अ) वतeमानकाल आ) भतू काल मुÆी भर संकœपवान लोग िजनकW अपने ल•य म xढ़ आ2था ह,ै इितहास कW धारा को बदल सकते ह। - महा•मा गांधी 175
उपवाचक नीलकं ठ महादेवी वमा3 1. िचड़ीमार = बहिे लया bird-catcher 2. कमबšत = कमनसीबी unfortunate 3. तीतर = मगु ाe जाित का एक ~िस| पoी partridge 4. िनरीoण = ग़ौर से दखे ना inspection 5. बारहा = कई बार ~ायः so many times 6. अ2तु = इसिलए therefore 7. पर लगना = अजीब सा dयवहार करना some unusual feature 8. 2तबक = फू ल! का गु छा bunch of flowers 9. मनु ािसब = उिचत reasonable 10. कु nजा = टेढ़ी पीठवाली hunch back 11. के का = मोर कW कू क cry of a peacock 12. म‘ं = गंभीर serious 13. नख़ास = पशओु ं का बाज़ार animals market 14. ल का कबतू र = पखं े जैसी पँछू वाला कबतू र fan tailed pigeon 15. चहू दे ानी = चहू े का िपंजरा rat-trap ो;र 1 मोर-मोरनी के नाम िकस आधार पर रखे गये? उ. नीली गदनe के कारण मोर का नाम रखा गया नीलकं ठ। उसकW छाया के समान साथ वाली मोरनी का नामकरण हआ राधा। 2. जाली के बड़े घर म पहचfँ ने पर मोर के ब च% का िकस कार Oवागत हfआ? उ. ससरु ाल म नववधु का 2वागत जैसे होता ह,ै वैसा ही जाली के बड़े घर म पहचँ ने पर मोर के ब च! का 2वागत हआ। उस बड़े घर के पrरवारवाल! म कोतहु ल पदै ा हआ। ल का कबतू र नाचना छोड़कर दौड़ पड़ा और उनके चार! ओर घमू -घमू कर गटु र-गँू कW रािगनी अलापने लगा। बड़े खरगोश सÃय सभा सद! के सामान +म से बठै कर गंभीर भाव से उनका िनरीoण करने लग।े ऊन कW गद जैसे छोटे खरगोश उनके चार! ओर उछलकू द मचाने लग।े तोते भी मानो भली-भाँित दखे ने के िलए एक आखँ बदं करके उनका परीoण करने लग।े 176
3. लेिखका को नीलकं ठ क< कौन-कौन सी चेmाएँ बहfत भाती थ^? उ. नीलकं ठ कW जीव-जंतओु ं का सेनाप•य और सरं oण कW चे“ाए,ँ दडं िवधान कW चे“ाए,ँ असाधारण ~मे और ममता कW च“े ाएँ, साँप के दो खडं करना, खरगोश के ब चे को बचाने और उस ब चे को रातभर उपचार करने कW च“े ाएँ, लेिखका के दशे ी-िवदशे ी अितिथय! के सwमखु न•ृ य आिद कW चे“ाएँ बहत भाती थ4। 4. ‘इस आनदं ो4सव क< रािगनी म बेमेल Oवर कै से बज उठा’- वा य िकस घटना क< ओर सकं े त कर रहा है? उ. ‘इस आनंदो•सव कW रािगनी म बमे ले 2वर कै से बज उठा।’- वा य भावी दखु द घटना कW ओर संके त कर रहा ह।ै िजस के कारण लिे खका को नीलकं ठ को खोना पड़ा था। वह था कु nजा मोरनी को घर म लाना। कु nजा के कारण राधा और नीलकं ठ के बीच दरू ी आ गई। िजससे कारण एक िदन नीलकं ठ ने अपने ~ाण ही •याग िदए। 5. वसतं ऋतु म नीलकं ठ के िलए जालीघर म बंद रहना असहनीय य% हो जाता था? उ. वसतं ऋतु सवe~धान मानी जाती ह।ै वह चैत और वसै ाख के महीन! म आती ह।ै इसे ऋतुओं का राजा कहते ह। इस ऋतु म जब आम के वoृ सनु हरी मजं rरय! से लद जाते थे। अशोक नए लाल पœलव! से ढक जाता था। तब नीलकं ठ के िलए जालीघर म बदं रहना असहनीय हो जाता था। नीलकं ठ को वसतं ऋतु बहुत भाती ह।ै 6. जालीघर म रहनेवाले सभी जीव एक-दूसरे के िम बन गए थे, पर कु eजा के साथ ऐसा संभव य% नह^ हो पाया? उ. कु nजा, नाम के अनसु ार 2वभाव से भी कु nजा ही ~मािणत हो गई। उसकW बिु | भी टेढ़ी हो गई। वह ईªयाe, कलह और +ू र 2वभाव वाली बन गई। नीलकं ठ और राधा को साथ दखे ते ही वह उqह मारने दौड़ती। च!च से मार- मारकर उसने राधा कW कलगी न!च डाली, पंख न!च डाले। नीलकं ठ उससे दरू भागता था और वह उसके साथ रहना चाहती थी। न िकसी जीव-जqतु को वह नीलकं ठ के समीप आने दते ी। इसिलए, जालीघर म रहनवे ाले सभी जीव! का एक-दसू रे के िम होते हए भी, कु nजा के साथ ऐसा संभव नह4 हो पाया। 7. नीलकं ठ ने खरगोश के ब चे को साँप से िकस तरह बचाया ? इस घटना के आधार पर नीलकं ठ के Oवभाव क< िवशेषताओं का उoलेख क<िजए। उ. साँप ने खरगोश के ब चे का आधा िपछला शरीर महँु म दबा रखा था, शेष आधा बाहर था। उस समय नीलकं ठ अपने झूले म सो रहा था। िशशु-खरगोश के च4-च4 का मंद 2वर सनु कर वह पूछँ -पखं समेटकर सर से एक झपvे म नीचे आ गया। उसने साँप को फन के पास पंज! से दबाया और च!च से इतने ~हार िकए िक वह अधमरा हो गया। खरगोश का ब चा मखु से िनकल आया। बाद म, साँप के दो खडं कर िदए और खरगोश के ब चे का उपचार भी िकया। इस ~कार नीलकं ठ ने खरगोश के ब चे को साँप से बचाया। इस घटना के आधार पर कह सकते ह िक जीव-जंतओु ं का संरoण करना, +ू र जतं ुओंको कठोर दडं दने ा सि+य एवं समयोिचत चयाe, क”णा xि“ आिद नीलकं ठ के 2वभाव कW िवशेषताएँ ह। 177
पिठत गyांश 1. नीचे िदए गए पिठत गyांश को पढ़कर % के उ;र दीिजए। नीलकं ठ और राधा कW सबसे ि~य ऋतु तो वषाe ही थी। मेघ! के उमड़ आने से पहले ही वे हवा म उसकW सजल आहट पा लेते थे और तब उनकW मदं के का कW गँजू -अनगु जँू ती{ से ती{तर होती हई मान! बँदू ! के उतरने के िलए सोपान-पंि„ बनने लगती थी। मघे के गजeन कW ताल पर ही उसके तqमय न•ृ य का आरंभ होता। और िफर मेघ िजतना अिधक गरजता, िबजली िजतनी अिधक चमकती, बँदू ! कW rरमिझमाहट िजतनी ती{ होती जाती, नीलकं ठ के न•ृ य का वगे उतना ही अिधक बढ़ता जाता और उसकW के का का 2वर उतना ही मं‘ से मं‘तर होता जाता। वषाe के थम जाने पर वह दािहने पंजे पर दािहना पंख और बाएँ पर बायाँ पंख फै लाकर सखु ाता। कभी- कभी वे दोन! एक-दसू रे के पंख! से टपकनेवाली बदूँ ! को च!च से पी-पीकर पंख! का गीलापन दरू करते रहत।े इस आनदं ो•सव कW रािगनी म बेमेल 2वर कै से बज उठा, यह भी एक क”ण कथा ह।ै - 1. नीलकं ठ और राधा कW सबसे ि~य ऋतु कौन-सी थी? उ. नीलकं ठ और राधा कW सबसे ि~य ऋतु वषाe ऋतु थी। 2. वे न•ृ य कब आरंभ करते थ?े उ. मघे के गजनe के ताल पर ही उनका तqमय न•ृ य आरंभ होता। 3. नीलकं ठ के न•ृ य का वगे कब-कब बढ़ता रहता था? उ. बदू ! कW rरम-िझमाहट िजतनी ती{ होती, नीलकं ठ के न•ृ य का वगे उतना ही अिधक होता जाता। 4. वे दोन! एक दसू रे के पंख! का गीलापन कै से दरू करत?े उ. वे दोन! एक दसू रे के पखं ! से टपकने वाली बँदू ! को पी-पी कर पंख! का गीलापन दरू करते रहत।े 5. नीचे िदए गए शnद! के िवलोम शnद िलखो। उ. 1) ि~य × अि~य 2) ती{ × मदं 3) आरंभ × अतं 4) बेमेल × मेल 178
इकाई-IV 12. वीर कुँ वर िसहं अ2ात अथ45ा6ता िति7या - 1. िच म कौन-कौन िदखायी दे रहे ह? उ िच म गाँधीजी, नेताजी, सरदार ब लभभाई पटेल, भगतिसंह और रिव नाथ टैगोर िदखायी दे रहे ह।& 2. ितरंगा िकनक याद िदलाता है? !य\"? उ. ितरंगा )वतं भारत का रा+,ीय िचहन् ह।ै इसिलए ितरंगा )वतं ता क0 याद िदलाता ह।ै वह 1याग, बिलदान, सपं नता और शािं त का 3तीक भी ह।ै 3. $वतं ता आदं ोलन के बारे म तुम !या जानते हो? उ. असं5य देश-भ7, िन)वाथ8 लोग, 9ी-प;ु ष सभी ने भारतमाता को दासता से िवम7ु कराने के िलए आज़ादी क0 लड़ाइयाँ लड़@। एक ओर Bांितकारी भगतिसंह, नते ाजी, अ लDू र आिद दशे -भ7 लड़ते रह।े दसू री ओर शांितमिू तE गाँधी आिद देश- भ7 लड़ते रह।े अतं म, अिहसं ा के आयधु से अँFजे G को भगाकर भारत को )वतं ता 3दान क0 गई। 1. बग़ावत = िव ोह rebellion, revolt 2. फ़ासँ ी = फं दा लगाकर िदया जाने वाला 3ाणदडं execution 3. आदं ोलन = उथल-पथु ल agitation 4. कू च करना = यaु क0 रवानगी to march towards war 5. कhज़ा करना = अिधकार जमाना to occupy 6. सां3दाियक = पारंपDरक 3था से संबिं धत communal 7. Dरयासत = राmय state 8. हकo ू मत = शासन, राmय rule, jurisdiction 9. कृ िष = खते ी बाड़ी cultivation 10. उtोग = उtम industry 11. रजवाड़ा = दशे ी Dरयासत former princely state of India 12. लोहा लेना = लड़ना to fight 13. घमासान = भयानक fierce 179
14. अफ़वाह = उड़ाई हईo खबर rumour 15. अिकं चन = बहoत गरीब very poor, pauper 16. िकफ़ायत = बचत thrift, economy 17. मकतब = मदरसा, पाठशाला Arabic and Persian school सन् 1857 के अनेक )वतं ता सैनानी थे। िज हGने ि{िटश शासन क0 जड़G को िहला िदया था। िजनम से एक ठाकु र कँु वर िसंह भी थ।े िजनका म5ु य ;प से उ लखे िकया जा रहा ह।ै िजसने ि{िटश स|ा के िवरोध म बहादरु ी के साथ यaु िकया। कँु वर िसंह के िपता जगदीशपरु Dरयासत के ज़मीनदार थे। उनके िपता वीर और )वािभमानी थ।े उनके }यि71व का 3भाव कँु वर िसहं पर भी पड़ा। 1827 म ठाकु र कँु वर िसंह ने िपता क0 म1ृ यु के बाद Dरयासत क0 िज़~मेदारी सँभाली। उन िदनG ि{िटश हoकू मत का अ1याचार चरम सीमा पर था। इससे लोगG म भयकं र असंतोष फै ल रहा था। ि{िटश हoकू मत के समय कृ िष उtोग और }यापार का तो बहoत ही बरु ा हाल था। भारतीयG को अपने ही दशे म ऊँ चे पदG से विं चत कर िदया था। िजससे चारG ओर ि{िटशG के िखलाफ़ रोष फै ला हoआ था। जगदीशपरु के जंगलG म बसDु रया बाबा नाम के िसa सतं रहते थे। उ हGने ही कँु वर िसंह म दशे भि7 क0 भावना जागतृ क0 थी। अब वे Bांित के अ य सचं ालक नेताओं के साथ िमल कर इस आज़ादी क0 लड़ाई को आगे बढ़ाना चाहते थ।े 27 जलु ाई 1857 को उ हGने आर-पार िवजय 3ा• क0। अंFेजी सने ा को परा)त कर 23 अ3ैल 1858 को )वाधीनता क0 िवजय पताका फहराते हएo जगदीशपरु पहचoँ गए। द‚ु मन को उनके सामने से या तो भागना पड़ता था या कट कर मरना पड़ता था। )वाधीनता सेनानी वीर कँु वर िसहं , यaु कला म पणू E ƒप से कु शल थे। छापामार यaु म उ ह महारत हािसल थी। अFं ेजी सेनानी उनके रण कौशल को समझने म पणू Eतः असमथE थे। द‚ु मन को उनके सामने या तो भागना पड़ता या कट के मरना पड़ता। कँु वर िसंह अ1यतं उदार एवं संवेदनशील }यि7 थे। उनके यहाँ िहदं ओु ं और मसु लमानG के 1योहार िमलकर मनाए जाते थे। उनक0 आिथEक ि)थित अˆछी नह@ थी। िफर भी वे िनधEन }यि7यG क0 सहायता िकया करते थे। वीर कँु वर िसंह ने एिशया का सबसे बड़े पशु मले े का उपयोग )वाधीनता क0 योजना के अंतगEत अपनी गु• बठै कG के िलए िकया था। उसम भी सफलता पाई। िबहार के 3िसa किव ने िलखा हःै - \")वतं ता का सैिनक था, आज़ादी का दीवाना था। सब कहते ह& कँु वर िसंह भी बड़ा वीर मदाEना था।\" 1. $वतं ता स5ं ाम के बारे म आप !या जानते ह? बताइए। उ. ि{िटश शासन क0 दमन-नीित के िवƒa िव ोह करने पर मंगल पांडे को 8 अ3ैल, 1857 को फाँसी दे दी गई। इसके िवƒa भारतीय सिै नकG ने आंदोलन िकया। इस आंदोलन ने )वतं ता 3ाि• का 3ो1साहन, रा+,ीय एकता, सां3दाियक सदभ् ाव आिद को बढ़ाया। )वतं ता संFाम म नाना, ता1या टोपे, बहादरु शाह, ठाकु र कँु वर िसंह, लŠमीबाई, बगे म हज़रत महल आिद असं5य महान् दशे भ7G ने 3ाणापEण िकया। असं5य दशे भ7, िन)वाथ8 लोग, 9ी-प;ु ष, बाल-वaृ सभी ने भारतमाता को दासता से िवमु7 कराने के िलये आज़ादी क0 लड़ाईयाँ लड़ी। एक ओर Bािं तकारी भगतिसंह, नते ाजी, 180
अ लDू र आिद दशे भ7 लड़ते रह।े दसू री ओर शांितमिू तE गाँधी आिद दशे -भ7 लड़ते रह।े अतं म, अिहसं ा के आयधु से अFँ जे G को भगाकर भारत को )वतं ता 3दान क0 गई। 2. वीर कँु वर िसहं को पढ़ने के साथ-साथ कु <ती और घुड़सवारी म अिधक मन लगता था। आपको पढ़ने के अलावा और िकन-िकन गितिविधय\" या काम\" म खबू मजा आता है? बताइए। उ. मझु े पढ़ने के अलावा तैरना, साईिकल चलाना, नाचना आिद म खबू मजा आता ह।ै 3. $वाधीनता क योजना बनाने के िलए सोनपरु के मेले को !य\" चुना गया होगा? उ. सोनपरु के मले े को एिशया का सब से बड़ा पशु-मेला माना जाता ह।ै यह हािथयG के Bय-िवBय के िलए भी िव5यात ह।ै यह मेला िवशाल मदै ान म हoआ होगा। वहाँ बहतo भीड़ हoई होगी। तरह-तरह के लोग आए हGग।े सभी इस मेले म अपन-े अपने काम म }य)त हoए हGगे। दसू रG के काम पर ‹यान दने े क0 संभावना नह@ हईo होगी । इसिलए )वाधीनता क0 योजना बनानवे ालG के िलए यह सरु िŒत )थान िसa हoआ होगा। इन •िŽयG से )वाधीनता क0 योजना बनाने के िलए सोनपरु के मले े को चनु ा गया होगा। अितIरF 1. मगं ल पांडे को फासँ ी “यG दी गई? 2. िद ली के अितDर7 कहाँ भीषण यaु हoए? 3. िकस ने िव ोह क0 सिBय योजनाएँ बनाई?ं 4. जगदीशपरु के पतन का “या कारण था? 1. पाठ के िकन सगं \" से आपको पता चलता है िक कँु वर िसहं साहसी, उदार एवं $वािभमानी EयिF थे? उ. िन~नांिकत 3संगG से हम पता चलता है िक कँु वर िसंह साहसी उदार एवं )वािभमानी }यि7 थे : (क) 27 जुलाई, 1857 को कँु वर िसहं ने आर पार िवजय 3ा• क0। ....... कँु वर िसंह क0 इस िवजय या ा से अFँ ेजG के होश उड़ गए। ....... उ हGने 22 माचE, 1858 को आज़मगढ़ पर कhजा कर िलया। ....... अFं ज़े ी सेना को परा)त कर वीर कँु वर िसहं 23 अ3ैल, 1858 को )वाधीनता क0 िवजय पताका फहराते हoए जगदीशपरु पहचoँ गए। ....... द‚ु मन को उनके सामने से या तो भागना पड़ता था या कट मरना पड़ता था। ....... उसका िच दखे कर अबभी द‚ु मन होते ह& भयभीत। (साहस संबंिधत 3संग) (ख) ......... उनक0 आिथEक ि)थित बहतo अˆछी नह@ थी, िफर भी वे िनधनE }यि7यG क0 सहायता करते थे। उ हGने अपने इलाके म अनेक सिु वधाएँ 3दान क0 थ@। ...... सड़क का िनमाEण .......... कु एँ खदु वाए ........ जलाशय ....... तालाब बनवाए ..... कँु वर िसंह उदार एवं अ1यतं सवं ेदनशील }यि7 थे। इ{ािहम खाँ और िकफ़ायत हoसैन उनक0 सेना म उˆच पदG पर आसीन थे । पाठशालाएँ और मदरसे भी बनाए। (उदारता से सबं िं धत 3संग) (ग) ......... उन िदनG ि{िटश हकo ू मत का अ1याचार चरमसीमा पर था। ..... कृ िष, उtोग और }यापार का तो बहतo ही बरु ा हाल था। रजवाड़G के राजदरबार भी समा• हो गए थे। भारतीयG को अपने ही दशे म मह1वपणू E और ऊँ ची नौकDरयG से विं चत कर िदया गया था। ....... ऐसी ि)थित म कँु वर िसहं ने ि{िटश हoकू मत से लोहा लने े का संक प िलया। ()वािभमान से संबिं धत 3संग) 181
2. पाठ पढ़कर $वतं ता सेनािनय\" के नाम और उनक िवशेषताएँ बताइए। (क) मंगलपांडे :- अंFजे ी सने ा अिधकारी गाय और सुअर क0 चब8 से बने कारतसू G को दाँतG से चीरकर उनका 3योग करने का भारतीय सैिनकG पर दबाव डाल रहे थे। भारतीय सैिनक मगं लपाडं े उसका िवरोध करता ह।ै दबाव डालने पर पांडे ने उसे मार डाला। बाद म 8 अ3ैल, 1857 को मंगलपांडे को फासँ ी दे दी गई। (ख) बहादुरशाह ज़फर :- बहादरु शाह ज़फ़र भी अँFजे G के िवƒa लड़ते ह।& अँFजे ी फ़ौज बहादरु शाह को लाल िकले म बंदी बनाती ह।ै िव ोही आकर उ ह म7ु कर अपना बादशाह घोिषत करते ह।& भारत म अFँ जे ी शासकG का शासन ख1म करने का िन”य िकया। िजसके िलए आिखरी दम तक लड़ते रह।े (ग) झाँसी क रानी लPमीबाई :- अँFजे बलपवू Eक झाँसी को अपने राmय म िमला लने ा चाहते थ।े रानी लŠमीबाई ने इसका डटकर िवरोध िकया- “म& अपनी झासं ी कभी नह@ दगूँ ी। चाहे मझु े अपने 3ाण ही “यG न दने े पड़े।” एक िदन अFं ेज़G ने अपनी िवशाल सेना के साथ झांसी पर धाव बोल िदया। यaु भिू म म अपने द|कपु को पीठ पर बाँध कर घोड़े पर सवार रानी रणचंडी क0 तरह अँFज़े सेना पर टूट पड़ती ह।ै कई िदन घमासान यaु चलता रहता ह।ै रानी श ओु ं के घरे े को चीरती हoई आगे बढ़ती ह।ै इस म घायल होकर भी वह श ुओं का साहस से मकु ाबला करती हoई वीरगित पाती ह।ै आज भी हम गाते ह।& ‘खबू लड़ी मदाEनी वह तो झाँसी वाली रानी थी।’ अितIरF 1. पाDरवाDरक म ‘इक’ 31यय ह।ै इसी 3कार िज़~मदे ारी, आिथEक, मह1वपणू E, वीरता शhदG से 31यय अलग क0िजए। 2. सौभाœय म सौ उपसगE है इसी 3कार )वधीनता, )वािभमान, असंतोष, )वतं शhदG से उपसगE अलग क0िजए। 3. शरू वीर - शरू है जो वीर शhदG से बना ह।ै इसी तरह )वािभमानी, राजदरबार, ऐितहािसक, शhदG को भी अलग क0िजए। अTयापन सकं े त - सिु नए-बोिलए और पिढ़ए म िदए गए अितDर7 3™ छा G क0 šान-विृ a हते ु ह।& - अ‹यापक/अ‹यािपका छा G से िन~न 3™ पछू तथा उनके उ|र क0 सराहना कर। अिभEयिF सजृ नाQमकता 1. वीर कँु वर िसहं के EयिFQव क कौन-कौन सी िवशेषताओ ं ने आपको भािवत िकया? उ. सां3दाियक सदभ् ाव को बढ़ाना, वयोवaृ होते हएo भी बहादरु ी के साथ यaु करना, रण-कु शलता, पाठशाला के िलए ज़मीन दान करना, सड़क-िनमाEण, जलाशय, तालाब बनवाना, कु एँ खुदाना, इ{ािहम खाँ और िकफ़ायत हसo ैन को उनक0 सेना म उˆचपद दने े क0 उदारता आिद, वीर कँु वर िसहं के }यि71व क0 इन िवशेषताओं ने मुझे 3भािवत िकया। 182
2. सां दाियक सद्भाव म कुँ वर िसंह क गहरी आ$था थी - पाठ के आधार पर कथन क पिु X क िजए। उ. कँु वर िसंह ने सं)कृ त, िह दी के अलावा फ़ारसी भी सीखी। इ{ािहम खाँ और िकफ़ायत हoसैन को अपनी सेना म उˆच पदG पर आसीन कराया। इनके आधार पर इस कथन क0 पिु Ž कर सकते ह& िक “सां3दाियक सद् भाव म कँु वर िसंह क0 गहरी आ)था थी।” 3. आम तौर पर मेले मनोरंजन, खरीद फरोYत एवं मेलजोल के िलए होते ह। वीर कँु वर िसंह ने मेले का उपयोग िकस Zप म िकया? उ. वीर कँु वर िसहं ने एिशया के सबसे बड़े पशु मेले का उपयोग )वाधीनता क0 योजना के अंतगEत अपनी गु• बैठकG के िलए िकया। उसम सफलता भी पाई। भाषा क बात 1. िद[ली क ओर कू च कर गए। रेखांिकत श\\द से वा!य बनाइए। उ. कू च : बाबर काबलु से कू च कर गया। 2. कँु वर िसहं का नाम कई ]िXय\" से उ[लेखनीय है। ]िX श\\द का योग करते ह^ए िभ_न अथ4 म वा!य िलिखए। उ. •िŽ : 1. िनगाह अ‹यापक नटखट बˆचG पर •िŽ रखते ह& 2. दखे ने क0 शि7 बढ़ू G क0 •िŽ जाती रहती ह।ै 3. दीठ या नज़र लगना •िŽ न लगने के िलए बˆचG के मखु पर बड़े आकार का काला ितलक लगाते ह।& 4. िवचार मेरी •िŽ म यह शीषकE उपयु7 ह।ै 5. अिभ3ाय इस संदभE म यही मेरी •िŽ ह।ै 3. ‘हे गंगा मैया! अपने aयार क यह अिकं चन भट $वीकार करो।’ रेखांिकत श\\द के दो पया4यवाची श\\द िलिखए। उ. 1. अिकं चन - िबलकु ल मामलू ी, बहoत ही साधारण 2. भट - उपहार, नजराना 1. आप जानते ह& िक िकसी शhद को बहoवचन म 3योग करने पर उसक0 वतEनी म बदलाव आता ह।& जैसे - सेनानी एक }यि7 के िलए 3योग करते ह& और सने ािनयG एक से अिधक के िलए। सेनानी शhद क0 वतनE ी म बदलाव यह हoआ है िक अंत के वणE ‘नी’ क0 मा ा दीघE ‘ ’ (ई) से ह)व ‘ ’ (इ) हो गई ह।ै ऐसे शhदG को, िजनके अतं म दीघE ईकार होता ह,ै बहवo चन बनाने पर वह इकार हो जाता ह,ै यिद शhद के अतं म •)व इकार होता ह,ै तो उसम पDरवतनE नह@ होता जैसे-•िŽ से •िŽयG। उ. 1. ‘इ’ कारांत शhदG के अंत म ‘यG’ जोड़ा जाता ह।ै 183
ितिथ - ितिथयG, जाित-जाितयG, राि -राि यG। 2. ‘ई’ कारांत शhदG क0 ‘ई’ मा ा ‘इ’ म बदल जाती है और अंत म यG जोड़ा जाता ह।ै सने ानी - सेनािनयG, नदी - निदयG, हाथी – हािथयG 2. नीचे िदए गए श\\द\" का वचन बदिलए - उ. नीित - नीितयG ि)थित - ि)थितयG )वािभमानी - )वािभमािनयG िज़~मदे ाDरयG - िज़~मदे ारी गोली - गोिलयG सलामी - सलािमयG 1. अभी तक आपने कँु वर िसंह के बारे म जानकारी ाc क । कdा म कँु वर िसहं का एकल पा ािभनय क िजए। उ. इस ि{िटश हoकू मत का अ1याचार चरम सीमा पर ह।ै कृ िष, उtोग और }यापार का तो बहoत ही बरु ा हाल ह।ै रजवाड़G के राज दरबार भी समा• हो गए ह।& भारतीयG को अपने ही देश म मह1वपणू E और ऊँ ची नौकDरयG से विं चत कर िदया जाता ह।ै म& चपु नह@ रह सकता। म& गोरे ि{िटश हoकू मत से लोहा लेने का संक प करता हŸ।ँ अपने ग;ु जी ‘बसDु रया बाबा’ के उपदशे ानसु ार दशे -भ7 होकर भारत-माँ को म7ु कराना ह।ै सोनपरु मेले म अपनी ग•ु बैठकG का आयोजन करता हŸ।ँ बढ़ू े होकर भी यaु के िलए त1पर हŸ।ँ छापामार यaु करने म कु शल हŸ।ँ इसी से अँFजे ी सेना को परा)त कर )वाधीनता क0 िवजय पताका फहराते हoए जगदीशपरु पहचoँ गए। अब सारी सने ा गगं ा पार कर चुक0। ओह! वही डगलस, नीच! गोिलयाँ बरसाने लगा। हाय, एक गोली बाएँ हाथ क0 कलाई को भदे ती हoई िनकल गई। अब यह हाथ तो बके ार हो ही गया और गोली का जहर फै लगे ा। हे गंगा मैया! इस हाथ को काट रहा हŸ।ँ अपने ¡यारे क0 यह अिकं चन भट )वीकार करो! भारत वषE क0 जय! भारत-माता क0 जय! जय। 1. वीर कँु वर िसहं और अनेक $वतं ता सेनािनय\" ने देश को $वतं बनाने के िलये अनेक Qयाग िकये थे। देश क $वतं ता और िवकास के िलए तुम !या करोगे, एक सeचे देशभF म कौन-से गुण होने चािहए? अपने िवचार िलिखए। उ. म& अपने दशे से 3ेम करता हŸ।ँ सम)त भारतीयG को भाई-बहन के समान देखता हŸ।ँ म& सवदE ा इस दशे एवं इसके šान-भंडार के अनƒु प बनने का 3यास क;ँ गा। 31येक }यि7 के 3ित न¢ता पवू Eक }यवहार क;ँ गा। म& अपने दशे और उसक0 जनता के 3ित भि7 क0 शपथ लँूगा। उनके मगं ल एवं समिृ a क0 कामना करता हŸ।ँ सˆचे दशे -भ7 के गणु :- सˆचा दशे भ7 िन)वाथEपरता, ममता, समता, एकता, सवे ा त1परता आिद गणु G से शोिभत होता ह।ै £Žाचार, Dर¤तखोर, कhजाखोरी आिद से दरू रहता ह।ै £Žाचारी, Dर¤तखोर, कhजाखोर आिद असामािजक त1वG को दरू करने का 3यास करता ह।ै उसम ‘वसधु ैव कु टुंबकम्’ क0 भावना ओत3ोत होती ह।ै 184
!या म ये कर सकता हg/ँ सकती हgँ हाँ ( ) नहi ( × ) 1. पाठ का भाव अपने शhदG म बता सकता हŸ।ँ भावG से संबिं धत बातचीत कर सकता हŸ।ँ 2. इस )तर क0 गt सामFी का भाव पढ़ कर समझ सकता हŸ।ँ 3. इस )तर के व गtांशG क0 }या5या करते हoए िलख सकता हŸ।ँ 4. पाठ के शhदG को अपनी बातचीत म 3योग कर सकता हŸ।ँ 5. पाठ का एकल अिभनय कर सकता हŸ।ँ इस पाठ म मने ये नए श\\द सीखे 185
अितIरF काय4 ोrर 1. ‘झाँसी क रानी’ किवता म िकन वीर योkाओं के नाम आए थे िज_ह\"ने सन् 1857 गदर म अ5ेज\" के िवok िवpोह िकया? उस सन् 1857 के गदर ने पूरे भारत वष4 को िकस कार झकझोरा और अं5ेज\" के िवok भड़काया था? उ. ‘झाँसी क0 रानी’ किवता म बहतo -से ऐसे शरू -वीरG के नाम बताए गए, िज हGने खलु े आम अFं ेजG के िवƒa िव ोह िकया था। उनके नाम अहमद शाह मौलवी, ठाकु र कँु वर िसहं , लŠमी बाई, ता1ं या टोपे आिद। सन् 1857 के सश9 िव ोह म माचE सन् 1857 म अंFेजG के िवƒa बगावत करने पर मगं ल पाडं े को फाँसी दी गई। अ3ैल सन् 1857 मरे ठ म भारतीय सिै नकG ने अFं ेजG के िवƒa बगावत क0 जो, िद ली क0 ओर कू च कर गए। 11 मई को उ हGने िद ली पर कhज़ा कर िलया और अhदलु शाह ज़फर को भारत का शासक घोिषत कर िदया। इस 3कार सन् 1857 के इस गदर ने परू े भारत म आज़ादी क0 लहर फै ला दी। 2. सन् 1857 का गदर सां दाियक सqाव बढ़ाने म िकस कार सहायक था? इसम वीर कुँ वर िसहं का !या योगदान था? उ. भारत म सां3दाियक स¦ाव बढ़ाने म इस आदं ोलन का िवशेष मह1व ह।ै “यGिक िद ली के अलावा जहाँ अ1यिधक भीषण यaु हoए थे – कानपरु , लखनऊ इसके साथ ही अ य कई भागG म )थानीय िव ोह हoए। इसम अलग-अलग सं3दायG के नेताओंने एक जुट हो कर भाग िलया। इस यaु के §ारा ही आगे चलकर रा+,ीय एकता और आदं ोलन क0 न@व पड़ी। कँु वर िसंह ने Bांित के अ य नेताओं से िमलकर आज़ादी क0 इस लड़ाई को आगे बढ़ाया। वे कालपी, िमजाEपरु , कानपरु एवं लखनऊ तक गए। उनक0 वीरता क0 क0ितE परू े उ|र भारत म फै ल गई थी। इस 3कार उ हGने अ य कई नते ाओं के साथ िमल कर यaु िकए िजससे एकता क0 भावना बढ़ने म मदद िमली। प - लेखन पु$तक िव7े ता से पु$तक मँगवाने हेतु प िलिखए। िदनांक – ................. 3षे कः 186 िकरन कु मार बी hलॉक, जनकपरु ी, हदै राबाद। सेवा म, 3बंधक महोदय, मधबु न 3काशन, 2876, सलु तान बाजार, हदै राबाद।
िवषयः प)ु तक मँगवाने के िलए प । मा यवर, आपसे अनरु ोध है िक िन~निलिखत प)ु तक वी.पी.पी. §ारा ऊपर िलिखत पते पर यथाशी© भजे ने का कŽ कर। अिFम धनरािश के ;प म 200 ; का ब&क ªा«ट सलं œन ह।ै कृ पया इस बात का ‹यान रख िक प)ु तक नवीन सं)करण क0 ही हG तथा अˆछी दशा म हG। प)ु तकG क0 सचू ी इस 3कार ह।ै 1. िहदं ी िनबंध माला 5 3ितयाँ 2. िहदं ी }याकरण भाग – 3 5 3ितयाँ 3. शhदकोश 6 3ितयाँ 4. मधबु न कहानी संFह 10 3ितयाँ सध यवाद! भवदीय, िकरन वचन सšं ा शhद के िजस ;प से यह šात हो िक वह एक के िलए 3य7ु हoआ है या एक से अिधक के िलए , उसे वचन कहते ह।ै वचन के 3कार :- वचन के दो भदे होते ह& :- 1. एकवचन 2. बह^वचन 1. एकवचन :- िजस शhद से एक ही }यि7 या व)तु का बोध हो, उसे एकवचन कहते ह।ै जैसे - लड़का, प)ु तक, के ला, गमला, चहू ा, तोता आिद। 2. बह^वचन :- िजस शhद से एक से अिधक सं5या का बोध हो,उसे बहवo चन कहते ह।ै जैसे- लड़के , प)ु तक, के ले, गमले, चहू ,े तोते आिद। एकवचन से बह^वचन बनाने के िनयम :- 1. आकारांत पिु लंग शhदG के 'आ' को 'ए' कर दते े ह।ै जसै े – एकवचन बह^वचन लड़का लड़के मगु ाE मगु - घोड़ा घोड़े कपड़ा कपड़े बटे ा बटे े 2. अकारांत 9ीिलगं शhदG म 'अ' को 'एं ' कर दते े ह।ै जैसे – एकवचन बह^वचन बात बात आँख आँख रात रात पु)तक प)ु तक 187
3. या अतं वाले 9ीिलंग शhदG म 'या' को 'याँ' कर दते े ह।ै जसै े – एकवचन बह^वचन िचिड़या िचिड़याँ गिु ड़या गिु ड़याँ चिु हया चिु हयाँ िडिबया िडिबयाँ 4. आकारांत 9ीिलगं शhदG के आगे 'ए'ँ लगा दते े ह।ै जैसे :- एकवचन बह^वचन क या क याएँ भजु ा भजु ाएँ पि का पि काएँ माता माताएँ नदी निदयाँ 5. इकारातं 9ीिलगं शhदG म याँ लगा दते े ह।ै जसै े – लड़क0 लड़िकयाँ एकवचन बह^वचन जाित जाितयाँ रीित रीितयाँ 6. 9ीिलंग शhदG म अि तम उ,ऊ म एँ जोड़कर दीघE ऊ का ह)व हो जाता ह।ै जैसे – एकवचन बह^वचन व)तु व)तएु ँ बहo बहएo ँ गौ गौएँ रचना रचनाएँ 7. कु छ शhदG म गणु , वण,E भाव आिद शhद लगाकर बहवo चन बनाया जाता ह।ै जैसे- एकवचन बह^वचन }यापारी }यापारीगण िम िम वगE साधु साधजु न नोट - कु छ शhद दोनG वचनG म एक जैसे रहते ह।ै जसै े -िपता, योaा, चाचा, िम , फल, बाज़ार, अ‹यापक, फू ल, छा , दादा, राजा, िवtाथ8 आिद। 188
अxयास काय4 (Work Book) अपिठत गwांश 1. िनvनिलिखत गwांश पढ़कर \" के उrर दीिजए। बने ीमाधव िसंह गौरीपरु गावँ के ज़म@दार और न~बरदार थ।े उनके िपतामह िकसी समय बड़े धन-धा य संप न थ।े गाँव का प“का तालाब और मंिदर िजनक0 अब मर~मत भी मुि‚कल थी, उ ह@ क0 क0ितE-)तभं थे। कहते ह,& इस दरवाज़े पर हाथी झमू ता था, अब उसक0 जगह एक बढ़ू ी भ&स थी, िजसके शरीर म अि)थ-पंजर के िसवा और कु छ शेष न रहा था; पर दधू शायद बहoत दते ी थी; “यGिक एक न एक आदमी हाँड़ी िलये उसके िसर पर सवार ही रहता था। बेनीमाधव िसंह अपनी आधी से अिधक सपं ि| वक0लG को भट कर चकु े थ।े उनक0 वतEमान आय एक हज़ार ƒपये वािषकE से अिधक न थी। ठाकु र साहब के दो बेटे थ।े बड़े का नाम ¯ीकं ठ िसंह था। उसने बहoत िदनG के पDर¯म और उtोग के बाद बी. ए. क0 िडFी 3ा• क0 थी। अब एक द°तर म नौकर था। छोटा लड़का लालिबहारी िसंह दोहरे बदन का, सजीला जवान था। भरा हoआ मखु ड़ा, चौड़ी छाती। भस& का दो सरे ताजा दधू वह उठ कर सबेरे पी जाता था। ¯ीकं ठ िसंह क0 दशा िबलकु ल िवपरीत थी। : 1. बने ीमाधव कौन थ?े () उ. अ) जम@दार, न~बरदार आ) िपतामह इ) अ‹यापक ई) डॉ“टर 2. बहoत दधू दने े वाला कौन सा जानवर था? () अ) गाय आ) भ&स इ) बकरी ई) भेड़ 3. गtांश म क0ित-E )तंभ िकसे कहा गया है? 4. बी.ए. क0 िडFी िकसने 3ा• क0 थी? 5. लालिबहारी कौन था? 6. गtांश म आए पनु ƒि7 शhद छाँटकर िलिखए। उ. _____________________________________________________________________________ ोrर िनvनिलिखत \" के उrर िलिखए। 1. वीर सैनानी कँु वर िसहं को िकस यaु म महारत हािसल थी और उसके “या पDरणाम थे? 2. वीर कँु वर िसहं अंFजे G को धोखा दके र गगं ा पार कै से गए? 3. ठाकु र कँु वर िसंह के समय ि{िटश हoकू मत िकस 3कार अ1याचार कर रही थी? प - लेखन पु$तकालय म पु$तक शािमल करने हेतु धानाचाय4 को प िलिखए। 189
Eयाकरण 1) िनvन वा!य\" के वचन बताइए। 1. आ¯म म कई छा ाएँ पढ़ती थ@। - 2. उनके साथी पड़े G से फल तोड़ने लग।े - 3. वमाE जी सकपका गए। - 4. कु |े दम साधे खड़े रह।े - 5. नानी जी सो रही ह।& - 6. हम अभी आए। - 2) िनvन वा!य\" के वचन बदल कर िलिखए। 1. धोबी कपड़े धो रहा ह।ै उ. _____________________________ 2. बˆचा मदै ान म खेल रहा ह।ै उ. _____________________________ 3. बरगद का परु ाना पेड़ कटा पड़ा था। उ. _____________________________ 3) िनvन IरF $थान\" को शुk वचन से पूरा क िजए। 1. _________________________ने गाना सनु ाया। लड़िकयाँ/लड़िकयG 2. _________________________दौड़ रहे ह।& घोड़े/घोड़G 3. एक साल म छह_________________________होती ह।& ऋतओु /ं ऋतएु ँ 4) िनvनिलिखत वा!य\" म कारक िच~ रेखांिकत क िजए। 1. )वतं ता संFाम म असं5य पुƒषG ने अपने 3ाणG क0 आहoित दी। 2. इस किवता म ठाकु र कँु वर िसंह का नाम भी आया ह।ै 3. रानी ने आिखरी दम तक यaु िकया। 5) िनvनिलिखत श\\द\" के अथ4 िलख कर वा!य\" म योग क िजए। 1. कhज़ा करना = ____________ _____________________________________________ 2. लोहा लेना = ____________ _____________________________________________ 3. होश उड़ जाना = ____________ _____________________________________________ 190
4. परा)त करना = ____________ ____________________________________________ 5. आBमण करना = ____________ ___________________________________________ 6) िनvनिलिखत श\\द\" का उनके अथ4 से िमलान क िजए। 1. शासक क) भयकं र 2. िव)ततृ ख) आज़ादी 3. भीषण ग) राजा 4. )वतं ता घ) फै ला हoआ 5. हoकू मत ङ) िबना 6. विं चत च) राmय 7) िनvनिलिखत श\\द\" के पया4यवाची िलिखए। 1. जंगल - _____________, ____________, ___________ 2. mवाला - _____________, ____________, ___________ 3. आBमण - _____________, ____________, ___________ 4. ससं ार - _____________, ____________, ___________ 5. गगं ा - _____________, ____________, ___________ 6. कु शल - _____________, ____________, ___________ 8) िनvनिलिखत श\\द\" के िवलोमाथ4 िलिखए। 1. वीर - ____________ 4. िवजय - ____________ 5. आज़ादी - ____________ 2. आरंभ - ____________ 6. उदार - ___________ 3. )वाधीनता - ____________ 9) िनvनिलिखत श\\द\" के िलंग बदिलए। 1. वीर - ____________ 4. ज़म@दार - ___________ 5. शरे - ____________ 2. वaृ - ____________ 6. बढ़ू ा - ____________ 3. नायक - ___________ 191
10) िनvन वा!य\" को य•ु म श\\द\" से पूरा क िजए। 1. कँु वर क0 .............................दीŒा क0 }यव)था क0। 2. कँु वर िसंह यaु ...................... म िनपुण थे। 3. मेले म हािथयG का ........................... िवBय होता था। 11) िनvनिलिखत सिं ध श\\द\" को उन के भेद से िमलाइए। 1. अ1यिधक विृ a सिं ध 2. सदभ् ाव िवसगE सिं ध 3. जलाशय गणु सिं ध 4. मनोहर }यंजन संिध 5. ऐकै क दीघE संिध 6. परोपकार यण संिध 12) िनvनिलिखत वा!य\" म िवशेषण श\\द पहचािनए। 1. िद ली म अ1यिधक भीषण यaु हoआ। () () अ) अ1यिधक आ) िद ली इ) यaु ई) भीषण () ई) सवE 2. इस लड़ाई क0 mवाला िबहार म सवE }या• हो गई। ई) अ1याचार ( ) (अ) ( ) (स) अ) लड़ाई आ) }या• इ) िबहार () 3. उन िदनG ि{िटश हकू मत का अ1याचार चरम सीमा पर था। अ) उन िदनG आ) चरम इ) हकू मत 13) िनvनिलिखत श\\द\" मे उपसग4 पहचािनए। 1. असंतोष - अ) तोष आ) सतं ोष इ) अ ई) सं इ) इय ई) िBय 2. सिBय - अ) स आ) B इ) अथ ई) थ 3. असमथE - अ) सम आ) अ 14) िनvन वा!य\" म कारक िच~ पहचािनए। इ) मे, के ई) से, से () 1. कँु वर िसंह से उनका संपकE पहले से ही था। ई) से , के () ई) ने, के िलए () अ) स,े म आ) से, के 2. िसपािहयG ने फ़ौजी को सलामी दी। अ) म, के आ) ने, को इ) म, के 3. वह बूढ़ा शूरवीर इस अव)था म भी यaु के िलए त1पर हो गया। अ) से, के िलए आ) पर, के िलए इ) म, के िलए 192
15) अथ4 क ]िX से िनvन वा!य पहचािनए। इ) आšाथEक वा“य () 1. िसपािहयो फ़ौिजयG को सलामी दो। इ) आšाथEक वा“य ई) संदहे ा1मक वा“य अ) 3™वाचक वा“य आ) नकारा1मक वा“य इ) आšाथEक वा“य () 2. “या उसक0 बटे ी बहतo शरारती ह?ै ई) दहे ा1मकवा“य अ) 3™वाचक वा“य आ) नकारा1मक वा“य () 3. लोग ऊँ ची नौकDरयG से बंिचत नह@ थे। ई) संदहे ा1मक वा“य अ) 3™वाचक वा“य आ) नकारा1मक वा“य म)ु कान थके हएo के िलए िव¯ाम ह,ै उदास के िलए िदन का 3काश है तथा कŽ के िलए 3कृ ित का सव´|म उपहार ह।ै - अšात 193
इकाई-IV 13. संघष4 के कारण म तनु किमज़ाज हो गयाःधनराज सपं ािदत अंश अथ45ा6ता िति7या - 1. Tयान चंद के बारे म आप !या जानते ह? उ. ‹यान चदं : (ज म : 29-8-1905 ; म1ृ यु : 3-12-1979) ‹यानिसंह 16 साल क0 आयु म भारतीय सेना म भत8 हो गए। अपने कतE}य िनभाने के बाद चाँदनी रातG म वे हॉक0 खले ते थे। इसिलए उनके कोच और िखलाड़ी उ ह ‹यान चं कहकर पकु ारते थे। सन् 1928, 1932 ओर 1936 म संप न ओिलंिपक B0ड़ाओं म लगातार तीन )वणE पदक उ हGने 3ा• िकए। वे 1956 म सवे ा िनव|ृ हएo । सरकार ने उसी वषE उ ह पµभषू ण उपािध से स~मािनत िकया। बाद म उ हGने कई हॉक0-िशŒण- िशिवर चलाए। वे म5ु य हॉक0 कोच रह।े “गोल” उनक0 आ1मकथा ह।ै 2. हॉक को भारत का राƒ„ीय खेल कहा जाता है? उ. हॉक0 1928 म भारत उपमहादव् ीप म अFं ेजी सेना दव् ारा लाई गई। 1928 ,1932 ओर 1936 म लगातार ओिलंिपक के तीन )वणE पदक भारत को िमल।े शायद, इसिलए हॉक0 भारत का रा+,ीय खले कहा जाता होगा। 3. हॉक के कु छ िखलािड़य\" के नाम बताओ। उ. ‹यानचदं , धनराज िप लै, संदीप िसंह, हरदयालिसंह, तषु ार खडटेकर, सरदारिसहं , गरु बाजिसंह, मन3ीत, रघनु ाथ, सनु ील आिद हॉक0 के कु छ िखलािड़यG के नाम ह।& 1. कद = ऊचाई, लबं ाई size, height 2. काठी = 3. दबदबा = शारीDरक गठन frame, physique 4. जझु ाƒ = 5. धमू मचाना = रोब, आतकं commanding influence 6. िफसड्डी = 7. तनु किमज़ाज = योaा warrior 8. लाग-लपटे = 9. उकसाना = उ लासपणू E चहल-पहल to make fanfare 10. अहिमयत = िनक~मा, िपछड़ा हoआ backward िचड़िचड़ा, जो बात-बात पर नाराज हो जाए easily irritated संबंध, लगाव liking भड़काना to provoke मह1व, गंभीरता significance 194
11. शोहरत = 5याित, जोरG क0 चचाE celebrity, fame 12. सफ़र करना = 13. तोहफ़ा = या ा करना to travel 14. गाढ़ी कमाई = भट, उपहार present, gift अिधक पDर¯म से कमाया गया धन hard-earned money हॉक0 के स3ु िसa िखलाड़ी जब पत& ीस वषE के हो गए तो िवनीता पा¹डेय से उनका एक साŒा1कार हoआ िजसका एक अंश यहाँ िदया गया ह।ै िवनीता पा¹डेय के उनके कŽ-सा‹य जीवन के बारे म पछू ने पर उ हGने बताया िक बचपन मिु ‚कलG से भरा था। दोनG बड़े भाई हॉक0 खले ते थे। उ ह@ से मझु े भी शौक हoआ। लिे कन अपनी हॉक0 ि)टक नह@ थी । जो बहoत बाद म िमली वो भी भाइयG क0 परु ानी, लिे कन मरे े िलए बहoत क0मती थी। मन& े जूिनयर हॉक0 टीम सन् 1985 म खले ी, तब म& िसफE 16 साल का था। 1986 म मझु े सीिनयर ट@म म डाल िदया गया। उस साल हमने बहतo अˆछा खले खले ा और बहतo धमू मचाई। मझु े 1989 म ऑल िवन एिशया कप के क& प म चनु िलया गया। तब से आज तक पीछे मड़ु कर नह@ देखा। पढ़ाई म तो एक दम िफसड्डी था। यिद म& हॉक0 का िखलाड़ी न होता तो मझु े एक चपरासी क0 भी नौकरी न िमलती। उ हGने अपनी तनु किमज़ाज़ी के संबधं म बताया िक वे बचपन से ही बहoत असरु िŒत महसूस करते थे “यGिक उनके पालन-पोषण म उनक0 माँ को बहoत संघषE करना पड़ा था । इसीिलए कभी-कभी उ ह गु)सा भी बहतo आता है जो भी बात मन म हो सीधे कह डालते ह& बाद म कई बार चाहे पछताना ही “यG न पड़े। साथ ही वो एक भावकु इ सान भी थ।े िकसी क0 तकलीफ देख नह@ सकत।े पDरवार क0 अहमीयत के बारे म उ हGने बताया िक वे सबसे अिधक अपनी माँ के करीब ह।& माँ ने ही उनम और उनके भाई बहनG म अˆछे स)ं कार डालने क0 कोिशश क0। उनक0 सबसे बड़ी भाभी भी उनके िलए माँ के समान है वो भी उनके िलए 3रेणा-9ोत रही ह।& पहली बार कृ ि म घास पर खले ने जब वे नई िद ली गए। तब वे झुक-झुक कर घास को छू रहे थे और हरै ान थे िक िवšान भी इतनी तर“क0 कर सकता ह।ै उ हGने बताया िक उ हGने पहली कार अपने पहले इ~¡लायर से ली थी। बहoत दरे तक तो िखलाड़ी बनने के बाद भी वो लोकल ,ेन म आते जाते थे। उ हGने बताया िक उस समय खेलG म इतनी कमाई नह@ थी। इसिलए धीरे धीरे महे नत करके उ हGने अपने पDरवार वालG का पालन पोषण िकया। सन् 1999 म उ ह सरकार क0 तरफ से पवई म एक «लटै िमला जो वे अपने पैसG से कभी न खरीद पाते। िकं तु सेलिे {िटज़ के साथ एक मंच पर बठै ने से तथा जब रा+,पित से िमले तब यह महसूस हoआ िक वे अब िकतने खास ह।& यह हॉक0 ही थी िजसके चलते हर जगह 3ित»ा िमली।इस साŒा1कार से हम यह सीख िमली िक िकतनी भी तकलीफ आएँ, डटकर उनका सामना करना ह।ै लŠय िसिa के िलए 3य1न करते रहना ह।ै आगे बढ़ते रहना ह।ै 1. साdाQकार पढ़कर आपके मन म धनराज िप[लै क कै सी छिव उभरती है? वण4न क िजए। उ. धनराज िप लै ज म से गरीब थ।े वे दबु ले – पतले और छोटे बˆचे – जैसे चहे रेवाले थे। जझु ाƒ थे। पढ़ाई म िफसड्डी थ।े दसव@ कŒा तक पढ़ सके । वे हसँ ोड़, तनु कु िमज़ाज, भावकु इनसान ओर अपार मात3ृ मे ी थे। िबना लाग-लपटे वाले थे। वे मन म जो आता थे, सीधा साधे कह डालते थ।े पर बाद म पछताते थे। अपनी गलितयG के िलए माफ़0 माँगने से शरमाते नह@। हॉक0 के िसतारे होकर भी मंबु ई क0 लोकल ,ेनG म सफ़र करते थे। थोड़ी आमदनी से उ ह अपना पDरवार चलाना 195
पड़ता था। बचत-पैसे से बहन क0 शादी क0। हर महीने माँ के िलए पैसा भेजते थे। उनको हर जगह 3ित»ा भी िमली। इस 3कार, धनराज िप लै क0 छिव कई रंगG म उनको उभारती ह।ै 2. िकन िवशेषताओंके कारण हॉक भारत का राƒ„ीय खेल माना जाता है? उ. हॉक0 1928 म भारत उपमहादव् ीप म अंFजे ी सेना दव् ारा लाई गई। सन 1928, 1932 ओर 1936 म लगातार ओलिं पक के तीन )वणE पदक भारत को िमल।े वह खले भारत म बहoत 3िसa हoआ। अब तक ओलंिपक के आठ )वणE पदक भारत को िमले। शायद, इसिलए हॉक0 भारत का रा+,ीय खले कहा जाता होगा। 3. यह कोई ज़oरी नहi िक शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए-!या आप धनराज िप[लै क इस बात से सहमत ह? बताओ। उ. “यह कोई ज़;री नह@ िक शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए” – म& धनराज िप लै क0 इस बात से सहमत हŸ।ँ “यGिक जब धनराज म टै“सी म चढ़ने क0 या मािलक दव् ारा दी गई कार म पे,ोल डालकर आने क0 हिै सयत नह@ थी, तो शोहरत पैसे क0 बचत करने मे थी। न िक अप}यय करना। इसिलए म& धनराज िप लै के उपय7ु कथन से पणू E सहमत हŸ।ँ अितIरF 1. हॉक0 क0 ि)टक न होने पर िप ले कै से खले ते थे? 2. कब से ले कर धनराज ने पीछे मड़ु कर नह@ दखे ा? 3. धनराज को कई बार पछताना पड़ा वे कौन से अवसर थे? 4. आजकल भी कई िखलाड़ी जो बहतo अˆछा खेलते ह& लेिकन उ ह अवसर ही नह@ िमल पाता। इस का कारण “या हो सकता है? कŒा म चचाE क0िजए। 1. मेरी माँ ने मझु े अपनी िसिk को िवन‡ता से सभँ ालने क सीख दी है- धनराज िप[लै क इस बात का !या अथ4 है? उ. ’मरे ी माँ ने मझु े अपनी 3िसिa को िवन¢ता से सँभालने का सीख दी ह।ै धनराज िप लै क0 इस बात का अथE होता है िक उनक0 माँ ने उन सब भाई – बहनG म अˆछे सं)कार डालने क0 कोिशश क0। समाज म उनका अˆछा नाम था। उसे न िबगड़ऩे क0 और पDरि)थितयG का िवन¢ता से सामना करने क0 माँ ने सीख दी। तदन् सु ार िप लै जी को उसक0 सीख का पालन करना चािहए था। उ हGने उसका पालन भी िकया था। 2. धनराज िप[लै को अपने जीवन म िकन-िकन किठनाइय\" का सामना करना पड़ा? साdाQकार पढ़कर बताओ। उ. धनराज िप लै को अपने जीवन म िविवध किठनाइयG का सामना करना पड़ा। वे बहतo गरीब थे। हॉक0 खेलने का शौक होते हoए भी हॉक0 ि)टक खरीदने तक क0 हिै सयत नह@ थी। सािथयG के खेल क0 समाि• के बाद उसक0 ि)टक माँगकर काम चलाते थे। उ ह िजंदगी म हर चीज के िलए जझू ना पड़ा। काफ़0 नामी िखलाड़ी होने के बावजदू वे मंबु ई क0 लोकल ने G म सफ़र करते थे। टै“सी म चढ़ने क0 हिै सयत उनम नह@ थी। अपनी थोड़ी आमदनी से पDरवार चलाते थे, माँ के िलए पैसा भेजते थे। बिहन क0 शादी क0। अपनी मेहनत क0 गाढ़ी कमाई से नई कार खरीदी। दो बडे ƒम का एक छोटा-सा °लटै खरीदा। 196
अितIरF 1. भावकु शhद का सिं धिवˆछेद भौ +उक है इसी 3कार िवtालय, सरु ेश,अ1यंत, िप ाšा शhदG का संिधिवˆछेद क0िजए। 2. पाठ म आए अंकG को शhदG म िलिखए। 3. म& िकसी तरह दसव@ तक पहचoँ ा। यह वा“य भतू काल म ह।ै इसी तरह के पाँच वा“य पाठ म से ढूढ़ँ कर िलिखए। अTयापन सकं े त - सिु नए-बोिलए और पिढ़ए म िदए गए अितDर7 3™ छा G क0 šान-विृ a हते ु ह।& - अ‹यापक/अ‹यािपका छा G से िन~न 3™ पछू तथा उनके उ|र क0 सराहना कर। अिभEयिF सृजनाQमकता 1. Tयानचदं को हॉक का जादूगर कहा जाता है। !य\"? पता लगाइए। उ. जादगू र ग•ु ƒप से अ½यास कर दखे ते – दखे ते ही हमारी पलक झपके िबना अपना जादू – टोना चलाते, हम अचंभे म डाल देता ह।ै उसी 3कार, ‹यानचंद भी सने ा म अपना कत}E य िनभाकर रात चादँ नी म हॉक0 खले ने का अ½यास करते थे। अपने खले का जादू 3दिशEत कर दशEकG, िखलािड़यG और कोच को अचंभे म डाल देते थे। इसिलए कोच ने उ ह ‘‹यानिसंह’ के बजाय ‹यानचंद कहा। लगातार 1928, 1932 ओर 1936 म संप न ओिलिं पक B0ड़ाओं म उ हGने )वणE पदक पाए। इन कारणG से पता चलता है िक ‹यानचदं को हॉक0 का जादगू र कहा जाता ह।ै 2. धनराज िप[लै ने ज़मीन से उठकर आसमान का िसतारा बनने तक क या ा क है। लगभग सौ श\\द\" म इस सफ़र का वण4न क िजए। उ. धनराज बहतo गरीब थ।े उनक0 हॉक0-ि)टक खरीदने तक क0 हिै सयत नह@ थी। सािथयG के खले ख1म होने के बाद उनके हॉक0-ि)टक उधार माँगकर काम चलाते थे। 16 साल क0 आयु मे,1985 म, मिणपरु म , जिू नयर रा+,ीय हॉक0 खेली। वे बहoत जझु ाƒ थे। 1986 म सीिनयर टीम म उ ह डाल िदया गया। उ हGने अपने बड़े भाई के साथ मबंु ई लीग म बेहतरीन खेल खेला और खबू धमू मचाई। 1988 के ऑलिं पक के िलए बलु ावा नह@ आने के कारण कु छ दखु हoआ। लिे कन, अगले साल ही आलँ िवन एिशया कप के क& प के िलए चनु िलया गया। तबसे लेकर कभी उ हGने पीछे मड़ु कर नह@ देखा। हॉक0 के िसतारे होकर भी मंबु ई क0 लोकल ,ेनG और बसG म सफ़र करते थे। वे कभी हसँ ाते, कभी ƒलाते, कभी िव)मय करते ओर कभी खीजते थ।े उनके }यि71व म कई रंग और कई भाव थ।े इस 3कार उ हGने ज़मीन से उठकर आसमान का िसतारा बनने क0 या ा तक क0 ह।ै 3. इस साdाQकार से तुvह !या सीख िमलती है? उ. िजंदगी एक लड़ाई ह।ै िकतनी भी तकलीफ़े आएँ उनका डटकर सामना करना ह।ै लŠय िसिa के िलए 3य1न करते रहना चािहए। आगे बढ़ते रहना चािहए। ’ कŽे फिल’ ¯मयवे जयत।े यही सीख इस साŒा1कार से िमलती ह।ै 197
4. क) अपनी गलितय\" के िलए माफ़ माँगना आसान होता है या मिु <कल? उ. अपनी गलितयG के िलए माफ़0 माँगना मिु ‚कल होता ह।ै ख) !या आप और आपके आसपास के लोग अपनी गलितय\" के िलए माफ़ माँग लेते ह? उ. हाँ, अगर म& या मेरे आसपास के लोग गलती करते ह& तो माफ़0 माँग लेते ह।& 5. माफ़ माँगना मुि<कल होता है या माफ़ करना? अपने अनभु व के आधार पर िलिखए। उ. माफ़ करने से माफ़0 माँगना ही मिु ‚कल होता ह!ै जब म& दसू री कŒा म था, तब मेरे दो)त का नया गद चोरी-िछपे घर ले आया। दसू रे िदन िपताजी को मालमू होने पर उ हGने मझु े समझा बझु ाकर उसे वापस देकर माफ़0 माँगने को कहा। तब म& बहoत शिमद¿ ा हoआ और माफ़0 माँगना बहतo मुि‚कल हoआ। एक हफते के बाद उसी दो)त से खेलते समय उसने मझु पर गद जोर से फक कर चोट पहचoँ ाई। काफ़0 दरे के बाद माफ़0 माँगने पर, उसे झट से मन& े माफ़ कर िदया। मेरे इस अनभु व के आधार पर कह सकता हŸँ िक माफ़ करना आसान होता ह,ै लिे कन माफ0 माँगना मिु ‚कल होता ह।ै भाषा क बात 1. िप[लै अभी भी मंुबई कi लोकल pेन\" म सफ़र करते है। (रेखांिकत श\\द का पया4य िलखकर उसका वा!य योग क िजए। उ. सफ़र – या ा - आज भी हमारे गाँव म या ा क0 सिु वधाएँ बहoत कम ह।& 2. म अपने दो$त\" और अपने पIरवार क बह^त क़p करता हgँ । (रेखांिकत श\\द का पया4य िलखकर वा!य योग क िजए।) उ. क - मू य - म& बड़G क0 बात क0 बहतo क करता हŸ।ँ 3. पाठ से पाँच य•ु म श\\द चुनकर वा!य योग क िजए। उ. 1. दबु ला-पतला: म& अपनी कŒा का दबु ला-पतला बˆचा हŸ।ँ 2. बोDरयाः िब)तरा: नटखट नगशे बोDरया-िब)तरा बाँधकर अपने गाँव चला गया। 3. कभी-कभी : म& कभी-कभी िसनमे ा दखे ता हŸ।ँ 4. सीध-े सीध:े आजकल सीधे-सीधे कहना भी मिु ‚कल होता ह।ै 5. धीरे-धीरे: मरे ी छोटी बहन )कू ल जाते समय धीरे-धीरे चलती ह।ै 4. पाठ म कई अं5ेजी श\\द\" का योग ह^आ है। उनके अथ4 िहदं ी और अपनी मातृभाषा म जानो। उ. 1. ि)टक - к - छड़ी मरे े बड़े भाई के पास हॉक0 क0 एक नई ि)टक ह।ै 2. जिू नयर - к - किन» म& जिू नयर दल से िविवध 3ितयोिगताओं म भाग लेता हŸ।ँ 198
3. सीिनयर-टीम – - वDर» दल आठव@ से दसव@ तक के िवदय् ाथ8 सीिनयर-टीम के अंतगEत आते ह।& 4. बेड;म – к - शयन कŒ म& हमेशा बडे ;म म ही सोता हŸ।ँ 5. हाउस - - घर हम तीन कमरे वाले हाउस म रहते ह।& 1. नीचे कु छ श\\द िलखे ह िजनम अलग-अलग Qयय\" के कारण बारीक अंतर है। इस अंतर को समझाने के िलए इन श\\द\" का वा!य म योग क िजए- ेरणा ेरक ेIरत संभव संभािवत संभवतः उQसाह उQसािहत उQसाहवध4क उ. क) 1) 3रे णा िहदं ी अ‹यापक क0 3रे णा से मझु म िहदं ी के 3ित अिधक ƒिच पदै ा हईo । 2) 3रे क इटं रनेट पढ़ाई का 3रे क ह।ै 3) 3Dे रत गाँधीजी का }यि71व अˆछे कायE करने के िलए 3ेDरत करते ह।& ख) 1) संभव बˆचG म कोई भी पDरवतEन संभव होता ह।ै 2) संभािवत इस रा)ते से जाने मे दघु Eटना संभािवत ह।ै 3) संभवतः आम चनु ाव संभवतः असमय म नह@ हGग।े ग) 1) उ1साह बˆचG को खेलG म बहतo उ1साह होता ह।ै 2) उ1सािहत हमारे 3धाना‹यापक जी सामािजक सेवा म भाग लने े के िलए भी हम उ1सािहत करते ह।& 3) उ1साहवधEक छोटी-सी 3शंसा बड़ी सफलता के िलए उ1साहवधEक होती ह।ै 2. तुनकु िमज़ाज श\\द तनु कु ओर िमज़ाज दो श\\द\" के िमलने से बना है। dिणक, तिनक और तुनुक एक ही श\\द के िभ_न Zप ह। इस कार का oपांतर दूसरे श\\द\" म भी होता है, जैसे-बादल, बादर, बदरा, बदIरया, मयूर, मयूर, मयूरा, मोर, दप4ण, दरपन। श\\द्कोश क सहायता लेकर एक ही श\\द के दो या दो से अिधक Zप को खोिजए। कम-से-कम चार श\\द और उनके अ_य oप िलिखए। उ. 1) राि – राित –रात 2) ज म – जनम – जनमु 3) मिण – मिन – मन – मिनया 4) कायE – काजू – काज 199
Search
Read the Text Version
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
- 6
- 7
- 8
- 9
- 10
- 11
- 12
- 13
- 14
- 15
- 16
- 17
- 18
- 19
- 20
- 21
- 22
- 23
- 24
- 25
- 26
- 27
- 28
- 29
- 30
- 31
- 32
- 33
- 34
- 35
- 36
- 37
- 38
- 39
- 40
- 41
- 42
- 43
- 44
- 45
- 46
- 47
- 48
- 49
- 50
- 51
- 52
- 53
- 54
- 55
- 56
- 57
- 58
- 59
- 60
- 61
- 62
- 63
- 64
- 65
- 66
- 67
- 68
- 69
- 70
- 71
- 72
- 73
- 74
- 75
- 76
- 77
- 78
- 79
- 80
- 81
- 82
- 83
- 84
- 85
- 86
- 87
- 88
- 89
- 90
- 91
- 92
- 93
- 94
- 95
- 96
- 97
- 98
- 99
- 100
- 101
- 102
- 103
- 104
- 105
- 106
- 107
- 108
- 109
- 110
- 111
- 112
- 113
- 114
- 115
- 116
- 117
- 118
- 119
- 120
- 121
- 122
- 123
- 124
- 125
- 126
- 127
- 128
- 129
- 130
- 131
- 132
- 133
- 134
- 135
- 136
- 137
- 138
- 139
- 140
- 141
- 142
- 143
- 144
- 145
- 146
- 147
- 148
- 149
- 150
- 151
- 152
- 153
- 154
- 155
- 156
- 157
- 158
- 159
- 160
- 161
- 162
- 163
- 164
- 165
- 166
- 167
- 168
- 169
- 170
- 171
- 172
- 173
- 174
- 175
- 176
- 177
- 178
- 179
- 180
- 181
- 182
- 183
- 184
- 185
- 186
- 187
- 188
- 189
- 190
- 191
- 192
- 193
- 194
- 195
- 196
- 197
- 198
- 199
- 200
- 201
- 202
- 203
- 204
- 205
- 206
- 207
- 208
- 209
- 210
- 211
- 212
- 213
- 214
- 215
- 216
- 217
- 218
- 219
- 220
- 221
- 222
- 223
- 224
- 225
- 226
- 227
- 228
- 229
- 230
- 231
- 232
- 233
- 234
- 235
- 236