अितिरक्त काय्र प्र ो र 1. सुन न सकने पर रोिहत को कै सा लगता होगा? उ. सनु न सकने पर रोिहत वयं को बहुत असहाय महससू करता था। वह उदास रहने लगा था। िकसी कायर् म वह िच नहीं ले पा रहा था। वह िनराश रहने लगा था। 2. रोिहत म साहस कै से जागा? उ. रोिहत के िपता ने उसे िनराश दखे ा ,तब उ ह ने उसे समझाया िक -‘तमु सनु नही पाते हो तो क्या हआु , दखे तो सकते हो। जीवन म कु छ बनना ह,ै तो खबू पढ़ो।’ उ ह ने उसे पढ़ने के िलए कु छ िकताब लाकर दी। अपनी प्रितभा को पहचान कर आगे बढ़ने की प्ररे णा दी। इस प्रकार रोिहत का साहस और आ मिव ास लौट आया। 3. आ मिव ास की तरह अ य कौन से गुण आव यक ह? उ. आ मिव ास होने पर मनु य अपने जीवन म सफलता प्रा कर सकता ह।ै ढ़ िन य, ढ़ इ छाशिक्त, साहस, धयै र्, मदृ वु ाणी, ईमानदारी आिद ऐसे िवशेण गणु ह,ै जो मनु य को असफलता की िनराशा से बाहर िनकालते ह। यिद हमम ये िवशषे गणु ह , तो हम असंभव कायर् को भी सभं व कर सकते ह। ये सफलता के प्रमखु सोपान ह। डायरी लेखन डायरी को दनै ंिदनी भी कहते ह। इस म हर िदन के खट्ट-े मीठे अनभु व का लखे ा-जोखा िलखा जाता ह।ै डायरी िलखते समय िन निलिखत बात का यान रखना चािहए। 1. डायरी प्रितिदन िलखी जानी चािहए। 2. िदन, समय और थान का उ लखे अव य िकया जाना चािहए। 3. डायरी िलखते समय हम परू ी स चाई से सब बात िलखनी चािहए। आओ, पुनीत की िलखी डायरी के कु छ अंश देख। िदनांक - 19.6.2016 आज का िदन कु छ खास यतीत नहीं हुआ। अ यापक महोदय को मझु से बहुत आशा थी। वे मरे े परीक्षा के पिरणाम से सतं ु नही थ।े मनै े भी सकं प िलया है िक वािषकर् परीक्षा म अ छे अकं प्रा करके उनकी आशा पर खरा उत ँ गा। अपने संक प को िनभाने का पणू र् प्रय न क ँ गा। 150
िक्रया थानवाचक िक्रयािवशेषण कालवाचक िक्रयािवशेषण िजन िक्रयािवशषे ण श द से िक्रया के होने के िजन िक्रयािवशेषण श द से िक्रया के होने के समय का पता चलता ह,ै उ ह कालवाचक थान का पता चलता ह,ै उसे थानवाचक िक्रयािवशेषण कहते ह। जसै -े िचिड़या पास िक्रयािवशषे ण कहते ह। जैसे – ईशान दादी के घर कभी-कभी जाता था। आकर बैठ गयी। शलै जा वहाँ खले रही ह।ै राधा बाज़ार बार-बार जा रही ह।ै इन वाक्य म आए कभी-कभी और बार-बार कालवाचक िक्रयािवशेषण ह। अ यय : िक्रया िवशेषण िक्रया की िवशेषता को प्रकट करने वाले श द िक्रया िवशषे ण कहलाते ह। िक्रयािवशेषण श द िक्रया से पहले आकर उसकी िवशषे ता बताते ह। रीितवाचक िक्रयािवशेषण पिरमाणवाचक िक्रयािवशेषण िजन िक्रयािवशषे ण श द से िक्रया के होने की िजन िक्रयािवशषे ण श द से िक्रया के पिरमाण रीित या ढंग का पता चलता ह,ै उ ह रीितवाचक (मात्रा) का पता चलता ह,ै उ ह पिरमाणवाचक िक्रयािवशषे ण कहते ह। जसै े िक्रयािवशषे ण कहते ह। जैसे – गीता ज दी-ज दी नाचती ह।ै कम बोलो, काम अिधक करो। मनु ने ज़रा-सा खाना खाया। अिमत झटपट भाग गया। इन वाक्य म कम, अिधक, और ज़रा-सा ज दी-ज दी और झटपट रीितवाचक पिरमाणवाचक िक्रयािवशषे ण श द ह। िक्रयािवशषे ण ह। िक्रयािवशेषण श द: थानवाचक : उधर, इधर, यहा,ँ वहा,ँ उस ओर, इस ओर, आस-पास, दाएँ आिद। कालवाचक : रातभर, िदनभर, जब, तब, तरु ंत, लगातार, अभी, सबु ह, बार-बार, आिद। रीितवाचक : एकाएक, अचानक, यथासभं व, इसिलए, के कारण, अव य, वय,ं तज़े , शीघ्र, धीरे-धीरे, आिह ता-आिह ता, कै स,े वसै े, नहीं, मत आिद। पिरमाणवाचक : यादा, थोड़ी-सी, उतना, िजतना, बराबर, अिधक, बारी-बारी स,े थोड़ा-थोड़ा, काफ़ी, अ यंत आिद। 151
अ यास काय्र (Work Book) अपिठत गद्यांश िन न अपिठत गद्यांश को पढ़कर सही उ र िवक प से चुनकर िलिखए। एकाएक चार और अधं रे ा छा गया और ननमनु को लगा, वह पतले सकं रे रा ते से गज़ु र रहा ह।ै उसे डर-सा लगने लगा। उसने बौने का हाथ कसकर पकड़ िलया। असल म फू ल के अदं र म से होते हुए वे धरती के नीचे बढ़ते जा रहे थ।े एकाएक ननमनु को रंग- िबरंगी रोशनी िदखाई दी। ऐसा लग रहा था, सबु ह के सरू ज की रोशनी म अबीर, गलु ाल, नीले, पीले सभी रंग िबखर गए ह । आकाश को उ ह ने ढक िलया हो। नीचे ज़मीन पर रंग-िबरंगे सनु हरे, पहले और जगु नू की भािँ त िटमिटमात,े िझलिमलाते अनोखे फू ल िखले थे। छोटे-छोटे फू ल भी अपना काम खदु ही कर रहे थे, फू ल अपनी टहनी बढ़ाता और पानी लके र अपने िसर पर डाल लेता। कोई अपने आस-पास सफ़ाई कर रहा था, तो कोई अपनी जड़ को खोदने का काम कर रहा था। प्र ः 1. ननमनु को क्या लगा? () अ) खशु ी हुई आ) उ सकु ्ता हुई इ) डर लगा ई) मन लगा 2. ननमनु कहाँ जा रहा था? () अ) आकाश म आ) धरती के नीचे इ) धरती के ऊपर ई) पानी म 3. ननमनु ने वहाँ क्या दखे ा? () अ) िटमिटमाते तारे आ) चाँद इ) िझलिमलाते अनोखे फू ल ई) सरू ज 4. ‘सरू ज’ के उिचत समानाथीर् श द चिु नए? () अ) सयू ्,र िदनकर आ) रजनीचर, िदनकर इ) तारे, िसतारे ई) भान,ू नक्षत्र 5. उिचत शीषकर् चिु नए। () अ) िटमिटमाते जगु नू आ) इदं ्रधनषु इ) िझलिमलाते अनोखे फू ल ई) चमकते िसतारे प्र ो र िन न प्र के उ र िलिखए। 1. रोिहत के आ मिव ास से आपको क्या िशक्षा िमलती ह?ै 2. अपनी िकसी एक िच के बारे म िलिखए। 152
डायरी लेखन अ यास- आप भी अपने िदन के कु छ अशं डायरी के प म िलिखए। याकरण 1. िन न िक्रया-िवशेषण श द से वाक्य म प्रयोग कीिजए। 1. धीरे उ. 2. तेज-तजे उ. 3. ज दी उ. 2. िन न वाक्य म िक्रया-िवशेषण श द पहचानकर िलिखए। 1. तमु तजे कदम से चलो। उ. 2. रोिहत धीरे-धीरे चलता ह।ै उ. 3. रोिहत परू ी महे नत म जटु गया। उ. 3. िन न रेखांिकत िक्रया-िवशेषण श द के भेद िलिखए। 1. म पहले आया था। उ. 2. वह बहुत खाता ह।ै उ. 3. यह काम झटपट कर डालो। उ. 4. िन न मुहावर के अथर् िलखकर वाक्य म प्रयोग कीिजए। 1. आखँ ो म खटकना - वाक्यः 2. कान खड़े होना - वाक्यः 3. छक्के छु डाना - वाक्यः 153
5. िन न श द के वचन बदलकर िलिखए। 4. िकताब - 1. छु ट्टी - 5. पिसल - 2. बगीचा - 6. दरवाज़ा - 3. िचिड़या - 6. िन न रेखांिकत श द को याकरण के आधार पर पहचानकर िलिखए। 1. रोिहत सनु ने की शिक्त खो बैठा। 2. उसने िचिड़या का िचत्र बनाया। 3. उसने िचत्र म लाल रंग भरे। 7. िन न वाक्य के नकारा मक प िलिखए। 1. रोिहत ने िचत्र बनाया। उ. 2. अपन से बड़ का अनादर करो। उ. 3. गिु ड़या सदंु र ह।ै उ. 8. िन न वाक्यांश के िलए एक श द िलिखए। 1. िजसे दखे कर डर लगे - 2. िजसे अपने आप म िव ास हो - 3. ज्ञान दने े वाली - 4. जानने की इ छा रखने वाला - 5. महीने म एक बार होने वाला - 6. पिर म करने वाला - 9. िन न श द के पया्रयवाची श द िलिखए। 4. मन - 1. िकताब - 5. सदंु र - 2. िचत्र - 6. िदन - 3. िपता- 154
10. िन न श द के िवलोमाथ्र िलिखए। 4. िदन × 1. िपछले × 5. अ छा × 2. सदंु र × 6. खरीदना × 3. प्रशसं ा × 11. िन न वाक्य म िक्रया श द पहचानकर को क म सही उ र िलिखए। 1. रोिहत का िचत्र सदंु र बना था। ( ) अ) िचत्र आ) रोिहत इ) सदंु र ई) बना ) ई) ) 2. सधु ा तज़े भागती ह।ै आ) भागती इ) सधु ा ई) ( अ) तज़े है ) 3. घोड़ा धीरे–धीरे चल रहा था। ) ( ) अ) रहा आ) घोड़ा इ) चल धीरे-धीरे ) 12. िन न वाक्य के काल पहचानकर को क म सही उ र िलिखए। ( ) )( 1. ब चा िवद्यालय गया। ( अ) वतरम् ानकाल आ) भतू काल इ) भिव यतक् ाल ) ( ) 2. राज पत्र िलखगे ा। ) अ) वतरम् ानकाल आ) भिव यतक् ाल इ) भतू काल ( मखू र् 3. पंिडत पजू ा करते ह। अ) भिव यतक् ाल आ) भतू काल इ) वत्रमानकाल ( कान 13. िन न श द के पया्रयवाची श द पहचानकर को क म सही उ र िलिखए। िदव 1. महे नत- ( अ) म आ) आलसी इ) चु त ई) पढ़ना ई) 2. आखँ - ई) ( दयालु अ) रात आ) िदन इ) नयन ई) ई) ( 3. िदन- ई) घमडं अ) दोपहर आ) शाम इ) सायं 14. िन न श द के अथर् पहचानकर को क म सही उ र िलिखए। 1. लौटना अ) वापस जाना आ) सोना इ) जागना 2. लाचार अ) दुखी आ) िववश इ) सखु ी 3. उदास अ) बेचनै आ) तड़प इ) दुखी 155
15. िन न रेखांिकत श द के वचन बदलकर को क म सही अक्षर िलिखए। 1. लड़का िचत्र बना रहा ह।ै ( ) ई) लड़क ) अ) लड़की आ) लड़के इ) लड़िकयाँ ) ( 2. वह मिू त्र बनाता ह।ै ई) मरू र्त अ) मतू ीर् आ) मिू तर्याँ इ) मतु ्र ( ई) पसल 3. मझु े पिसल दो। अ) पिसला आ) पिे सल इ) पसै ीलै ल य प्रा करने की ढ़ इ छा हो तो िवकलांगता कभी अड़चन नहीं बन सकती। 156
अ यास प्र पत्र अथ्रग्रा ता प्रितिक्रया I. िन निलिखत पिठत पद्यांश पढ़कर प्र के उ र िलिखए। काल करै सो आज कर, आज करै सो अब। पल म परलै होयगो, बहुरी करैगो कब।। बरु ा जो दखे न म चला, बरु ा न िमिलया कोय। जो िदल खोजा आपना, मझु सा बरु ा न कोय।। प्र : 1. पहले दोहे म किव िकसके मह व की बात करता ह?ै 2. जो काम हम आज करना ह,ै उसे कब समा करना चािहए? 3. जब म बरु ा दखे ने गया तो क्या हुआ? 4. जब मनै े अपना मन खोजा तो क्या हुआ? 5. रेखांिकत श द के अथ्र िलिखए। अिभ यिक्त सजृ ना मकता II. इन प्र के उ र २-३ वाक्य म िलिखए। प्र : 1. सनु ीता क्य घबरा रही थी? 2. रोिहत के द्वारा उतारे गये िचत्र के बारे म दो वाक्य िलिखए। 3. हम अपने सािथय के साथ आपस म कै सा यवहार करना चािहए? िन न प्र से िकसी एक का उ र िलिखए। 1. समय का सदपु योग पर िनबंध िलिखए। 2. आव यक पु तक मगँ वाने हते ु पु तक–िवक्रे ता को पत्र िलिखए। III. िनदशेर् के अनुसार िलिखए। भाषा की बात 1. साहस- (अथर् िलखकर वाक्य बनाइए) 2. पड़े हम छाया िमलती ह।ै ........ (उिचत कारक िच लगाकर वाक्य परू े कीिजए।) 3. गडु ्डा - (िलगं बदिलए।) 4. छाया × (िवलोम श द िलिखए) 5. वह पटरी के पास गई। (िक्रया श द पहचािनए।) 157
उपवाचक कं जूस सठे अथ्रग्रा ता प्रितिक्रया एक सठे था। एक िदन उसे नािरयल की ज़ रत पड़ गयी। वह नािरयल लेने बाज़ार पहुचँ ा। उसने दकु ानदार से पछू ा- “एक नािरयल िकतने का?” दकु ानदार बोला – “दस पये का।” सठे बोला- “दस पये के दो दे दो न।” दकु ानदार बोला- आगे िमलगे। सेठ आगे गया। वहाँ दस पये के दो नािरयल िमल रहे थ।े सेठ बोला- “दस पये के चार दे दो न।” दसू रा दकु ानदार बोला- “आगे िमलग।े ” सठे आगे गया। वहाँ दस पये के चार नािरयल िमल रहे थे। सठे बोला- “दस पये के आठ दे दो न।” तीसरा दकु ानदार बोला- “आगे निरयल के पेड़ ह। वहीं से तोड़ लो। कु छ भी नहीं दने ा पड़ेगा।” सेठ पड़े के पास पहुचँ ा। उसने पड़े पर से पहले कभी नािरयल नहीं तोड़े थे। सेठ पड़े पर चढ़ गया। खबू सारे नािरयल तोड़ िलये, पर जब उतरने के िलए सोचा तो डरने लगा। इतने ऊँ चे पेड़ से कै से उत ँ । बस सठे पेड़ पर लटके -लटके ही िच लाने लगा- “मझु े बचाओ, मझु े बचाओ। बचाने वाले को दो हज़ार पये दगँू ा।” िन न पिठत गद्यांश को पढ़कर प्र के उ र िलिखए। सठे पड़े के पास पहुचँ ा। उसने पड़े पर से पहले कभी नािरयल नहीं तोड़े थ।े सठे पड़े पर चढ़ गया। खबू सारे नािरयल तोड़ िलये, पर जब उतरने के िलए सोचा तो डरने लगा। इतने ऊँ चे पेड़ से कै से उत ँ । बस सठे पड़े पर लटके -लटके ही िच लाने लगा- “मझु े बचाओ, मझु े बचाओ। बचाने वाले को दो हज़ार पये दगँू ा.....” प्र ः 1. सेठ कहाँ पहुचँ ा? उ. सठे पेड़ के पास पहुचँ ा। 2. सेठ कहाँ चढ़ा? उ. सठे पेड़ पर चढ़ गया। 3. पेड़ से उतरने के िलए सोचा तो डर क्य लगा? उ. सेठ डर गया िक इतने ऊँ चे पड़े से कै से उत ँ ? 4. सेठ पेड़ पर लटके -लटके क्या िच लाने लगा? उ. सेठ िच लाने लगा - ‘मझु े बचाओ - मझु े बचाओ। बचाने वाले को दो हज़ार दगँू ा।’ 5. िन न श द से वाक्य म प्रयोग कीिजए। उ. 1) नािरयल - मरे े घर के पास एक नािरयल का पड़े ह।ै 2) पड़े - मझु े पड़े पर चढ़ना तो आता ह,ै उतरना नहीं। 158
अपिठत गद्यांश 1. िन न अपिठत गद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। घोड़ा शाकाहारी पशु ह।ै घोड़ा गाड़ी खींचता ह।ै यह सवारी के काम आता ह।ै यह वफादार पशु ह।ै यह दौड़ता ह।ै इसके सींग नहीं होते। यह मानव का स चा साथी ह।ै यह यदु ध् म काम आता था। अब पिु लस के काम आता ह।ै प्र : 1. घोड़ा कै सा पशु है? () अ) शाकाहारी आ) मासँ ाहारी इ) धोखबे ाज़ ई) झठू ा 2. घोड़ा क्या खींचता है? () अ) गाड़ा आ) गाड़ी इ) बैलगाड़ी ई) टाँगा 3. यह िकसके काम आता है? () अ) खींचने के आ) सवारी के इ) बोझा ढोने के ई) दौड़ने के 4. अब घोड़ा िकसके काम आता है? () अ) पिु लस आ) सवारी इ) यदु ्ध ई) दौड़ने के 5. शाकाहारी श द से प्र यय अलग कीिजए। () अ) हारी आ) आरी इ) री ई) ई 2. िन न अपिठत गद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। रंगाराव ,दवे ी गंगान मा का भक्त था। वह तीसरी कक्षा म पढ़ता था। रंगाराव को उसके ज मिदवस की शभु कामनाएँ दके र उसके दो त वापस जा रहे थे। गंगान मा दवे ालय पहुचँ ने पर उनको टन-टन वर सनु ाई पड़ा। डरकर सभी वापस रंगाराव के घर आए। अके ले रंगाराव ने उस मिं दर म दखे ा दो ब चे िसक्क से खले रहे थे। िजससे टन-टन की आवाज़ हो रही थी। वापस आकर रंगाराव ने अपने दो त को बताया। वे शिमदा हो गए। इसिलए हम सोच-समझकर काम करना चािहए। प्र : 1. रंगाराव िकसका भक्त था? () अ) दवे ी गंगान मा आ) दो त इ) ब च ई) िकसी का नही () 2. वह कौन सी कक्षा म पढ़ता था? अ) प्रथम आ) िद्वतीय इ) तीसरी ई) चौथी 3. िकसका ज मिदन था? () अ) दवे ी गगं ान मा आ) रंगाराव इ) िमत्र ई) ब चे का 4. िसक्क से कौन खेल रहे थे? () अ) ब चे आ) रंगाराव इ) दवे ी गंगान मा ई) दो त ( 5. शुभकामना श द का वचन बदलकर िलिखए। ) अ) शभु कामनाएँ आ) शभु कामनाओं इ) शभु कामना ई) सभी 159
3. िन न अपिठत गद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। मदर टेरेसा का असली नाम “आग्नेस” ह।ै ये िवदशे ी िशिक्षका थी। ये पढ़ाने के िलए कलक ा आई। मदर टेरेसा को भारतीय गरीब पर दया आई। चरै ीिट िमशनरी थािपत कर दीन-हीन की सवे ा की। उ ह ने दीन-हीन के िलए 125 दशे मे 570 आ म थािपत िकए। इनको नोबले शांित परु कार, मगे्सेसे परु कार, भारत र न आिद से स मािनत िकया गया। प्र : 1. मदर टेरेसा का असली नाम क्या है? () अ) आग्नसे आ) िशिक्षका इ) मदर ई) टेरेसा 2. ये क्या करती थीं? () अ) िवदशे ी थी। आ) िशिक्षका थी। इ) िवदशे ी िशिक्षका ई) पढ़ाती थी। 3. दीन-हीन के िलए िकतने आ म थािपत िकए। () अ) 125 आ) 570 इ) 521 ई) 75 4. मदर टेरेसा को िकन पुर कार से स मािनत िकया गया? () अ) नोबेल शािं त परु कार आ) मगे स् से े परु कार इ) भारत र न ई) सभी ) 5. स मािनत - प्र यय अलग कीिजए। ( अ) मािनत आ) इत इ) त ई) आिनत 4. िन न अपिठत गद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। रोज़ गड़िरया बालक भड़े ,बकिरयाँ जंगल म चराता था। उसके िपता और कु छ िकसान नज़दीक के खते म काम करते थे। ब चा उनसे मज़ाक करने के िलए “बाघ-बाघ” कहकर िच लाया। वे लािठयाँ िलए दौड़ आए। ब चा हसँ पड़ा। इसी तरह एक-दो बार उसने िकया। एक िदन सचमचु बाघ आ गया। ब चा मदद के िलए ज़ोर से िच लाया। सभी ने इसे झठू ा समझा। बाघ ने ब चे को मार कर खा िलया। इससे यह िशक्षा िमलती है िक झठू े का महँु काला। कभी–कभी झठू जान भी ले सकता ह।ै प्र : 1. भेड़ ,बकिरयाँ कौन चराता था? () अ) गड़िरया बालक आ) िकसान इ) िपता ई) इनम से कोई नही 2. खेत म कौन काम करते थे? ( ) अ) गड़िरया आ) िपता इ) िकसान ई) िपता औऱ िकसान ( 3. ब चे ने मज़ाक म क्या कहकर िच लाया? ) अ) बाघ-बाघ आ) मदद इ) सहायता ई) सभी 4. बाघ ने ब चे को क्या िकया? () अ) मार िदया आ) खा िलया इ) मारकर खा िलया ई) छोड़ िदया 5. गद्यांश से मुहावरा चुनकर िलिखए। उ. __________________________ 160
5. िन न अपिठत गद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। इस ससं ार का िनयम है – जैसा करोग,े वसै ा भरोगे। यहाँ यिक्त जैसा काम करता ह,ै उसे वसै ा ही फल प्रा होता ह।ै अ छा काय्र करके यिक्त अ छा फल भोगता है और बरु ा काम करके उसे दडं भगु तना ही पड़ता ह।ै कई बार ऐसा भी दखे ने म आता है िक बरु ा कमर् वाला फल–फू ल रहा ह।ै यह ि थित अिधक समय तक नहीं रहती। बरु े काम का अंत बरु ा अव य होता ह।ै आम खाने के िलए आम की गठु ली ही बोनी पड़ती ह।ै अतः मनु य को चािहए िक ऐसे अ छे कम्र कर, िजससे दसू र को भी शीतलता िमले और वयं भी सखु – शािं त पा सक। प्र : 1. संसार का िनयम क्या है? () () अ) जैसा करोग,े वैसा भरोगे आ) कै सा करोग,े वसै ा भरोगे इ) वसै ा करोग,े जसै ा भरोगे ई) इनम से कोई नही 2. अ छा काय्र करने पर यिक्त कै सा फल भोगता है? अ) अ छा आ) मीठा इ) बरु ा ई) सफल 3. बुरा कमर् करने वाला क्या कर रहा है? () () अ) समय बबाद्र आ) बैठा इ) फल–फू ल ई) सभी 4. मनु य को कै से काम करना चािहए? अ) अ छे काम आ) बरु े काम इ) बैठकर ई) शीतलता 5. मनु यता, शीतलता श द से प्र यय अलग कीिजए। उ. __________________________ 161
अपिठत पद्यांश 1. िन न अपिठत को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। चाह नहीं म सरु बाला के गहन म गथँू ा जाऊँ । चाह नहीं प्रेमी की माला िबंध यारी को ललचाऊँ । चाह नहीं सम्राट के शव पर हे हिर डाला जाऊँ । चाह नहीं दवे के िसर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ । मझु े तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर दने ा तमु फक। मातभृ िू म पर शीश चढ़ाने िजस पथ जावे वीर अनेक। प्र : 1. यह पद्यांश िकसकी अिभलाषा की ओर संके त करता है? ( ) ) अ) पु प आ) ितरंगा इ) कली ई) पणर् ) ( ) 2. फू ल िकसे नहीं ललचाना चाहता? ) दवे अ) सरु बाला आ) यारी इ) हिर ई) ( 3. फू ल िकसके शव पर डाला जाना नहीं चाहता? दवे ( अ) सरु बाला आ) यारी इ) सम्राट ई) प्रमे ी की माला पर 4. फू ल िकस पथ पर वनमाली को फकने के िलए कहता है? ( अ) वीर के पथ पर आ) प्रेमी के पथ पर इ) सम्राट के शव पर ई) पेड़, छाया 5. पथ के पया्रयवाची िलिखए। अ) मागर्, राह, रा ता आ) जगह, रा ता इ) माग,र् जगह ई) 2. िन न अपिठत पद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। ज म-ज मांतर के पु य का पिरणाम है िज़ंदगी, तप्रण व समप्णर का पिरणाम है िज़दं गी। वग्र के दवे का पैगाम है िज़दं गी, सवे ा और बिलदान का अजं ाम है िज़ंदगी। िज़दं गी एक िवलक्षण अिभयान ह।ै िज़ंदगी तपोिन मनीिषय का त व ज्ञान ह।ै ऐसे िजयो िक मरकर भी मु कु राए िज़दं गी, मौत को भी हसँ कर गले लगाए िज़ंदगी। प्र : 1. िज़ंदगी िकसका पिरणाम है? () ई) सभी अ) पु य आ) तपणर् इ) समपण्र () 2. िज़ंदगी िकसका पैगाम है? ई) वग्र के दवे का अ) पु य का आ) सेवा का इ) बिलदान का 162
( ) ) 3. िज़ंदगी िकनका त व ज्ञान है? ) अ) तपोिन मनीिषय का आ) पु य का इ) समपण्र का ई) दवे का ) 4. िज़ंदगी िकसका अंजाम है? ( ) ) अ) सवे ा और बिलदान का आ) तपोिन मनीिषय का ) ) इ) वगर् के दवे का ई) सभी 5. हसँ कर का िवलोम िलिखए। ( अ) रोकर आ) मु कु राकर इ) मरकर ई) जीना 3. िन न अपिठत पद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। यह मधमु य दशे हमारा, हमको है जग से यारा। उ र िगिरराज िहमालय ह,ै बन ताज वसधु ा का, इससे िनकली जलधारा, करती है काम सधु ा का।। ( 1. यह मधुमय देश िकनका है? अ) हमारा आ) भारत का इ) िगिरराज का ई) वसधु ा का ( 2. हमको जग से यारा क्या है? अ) मधमु य आ) दशे इ) िगिरराज ई) जलधारा ( 3. िगिरराज िकस िदशा म है? अ) पि म आ) पवू र् इ) उ र ई) दिक्षण ( 4. “वसुधा” का अथ्र क्या है? अ) सधु ा आ) दशे इ) िगिरराज ई) पृ वी ( 5. जलधारा िकसका काम करती है? अ) सधु ा आ) िवष इ) िगिरराज ई) वसधु ा 4. िन न अपिठत पद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। ओ िनराशा, तू बता क्या चाहती ह?ै म किठन तफू ान िकतने झले आया, म दन के पास हसँ -हसँ खले आया। मृ य-ु सागर-तीर पर पद-िच रखकर, म अमरता का नया सदं शे लाया। आज तू िकसको डराना चाहती ह?ै ओ िनराशा, तू बता क्या चाहती ह,ै शलू क्या दखे ँू चरण जब उठ चकु े ह, हार कै सी हौसले जब बढ़ चकु े ह। तज़े मरे ी चाल आधँ ी क्या करेगी? 163
प्र : 1. किव िकसको ललकार रहा है? ( ) ई) आशा को ) अ) तफू ान को आ) िनराशा को इ) परेशािनय को ( 2. िनराशा िकसे डराना चाहती है? अ) साहसी किव को आ) मननशील पाठक को इ) जझु ा वीर को ई) िनराश यिक्त को 3. किव िकसको नहीं देखना चाहता है? ( ) ई) रा ते को ) अ) शलू को आ) फू ल को इ) माला को ) ( 4. िकसकी चाल तेज़ है? ई) लखे क की अ) गायक की आ) राही की इ) किव की ( ई) रोना 5. ‘हसँ ना’ श द का िवलोम िलिखए। अ) सोना आ) खाना इ) चलना 5. िन न अपिठत पद्यांश को पढ़कर सही िवक प का चयन कीिजए। हसँ लो दो क्षण खशु ी िमली गर, वरना जीवन-भर क्रं दन ह।ै िकसका जीवन हसँ ी-खशु ी म इस दिु नया म रहकर बीता? सदा-सव्दर ा सघं ष को, इस दिु नया म िकसने जीता? िखलता फू ल लान हो जाता, हसँ ता-रोता चमन-चमन ह।ै प्र : 1. किव के अनुसार जीवन म क्या है? () अ) खिु शयाँ ही खिु शयाँ ह। आ) सखु -दःु ख दोन ह। इ) क्रं दन ही क्रं दन ह।ै ई) सघं षर् ही संघष्र ह।ै 2. हसँ ी-खुशी रहकर क्या नहीं बीतता है? () अ) जीवन आ) आनंद ई) िनराशा ई) िवचार () खशु ी को () 3. इस दुिनया म िकसको नहीं जीता जा सकता है? ई) अ) भाव को आ) दःु ख को इ) सघं ष को 4. लान कौन हो जाता है? अ) हसँ ता-रोता चमन आ) िखलता फू ल इ) चमकते तारे ई) उगता सयू ्र 5. ‘दुिनया’ श द का पया्रयवाची िलिखए। () उ) संसार, पानी आ) जगत, प्रकृ ित ऋ) जग, पड़े ई) संसार, जगत 164
पत्र लेखन 1. िपता जी को िवहार यात्रा म जाने हेतु पैसे मँगवाते हुए पत्र िलिखए। थान : _________ िदनाकं : __________ आदरणीय िपताजी, सादर प्रणाम, आशा करता हूँ िक आप सकु शल ह ग।े मने यह पत्र आपको यह बताने के िलए िलखा है िक हमारे िवदय् ालय ने िवदय् ािथय्र को राज थान भ्रमण के िलए ले जाने का काय्कर ्रम बनाया ह।ै िजसके िलए मझु े एक हज़ार पए की आव यकता ह।ै म आपसे अनरु ोध करता हूँ िक यिद आप मरे ा जाना सही समझ तो एक हज़ार पये भजे द। घर म माताजी को मरे ा प्रणाम व छोटी बहन को यार। आपका पतु ्र, ल य। पता: घर नं. ….. गली नं. ….. नई िद ली। 2. बीमारी के कारण दो िदन की छु ट्टी माँगने हेतु प्रधाना यापक जी को पत्र िलिखए। थान... िदनाकं ... सवे ा म, माननीय प्रधानाचाय्र जी, ी गजु राती िवद्यामिं दर, हदै राबाद। महोदय, सिवनय िनवदे न है िक म कक्षा सातवीं की िवदय् ाथीर् साक्षी अग्रवाल हू।ँ मझु े कल से तज़े बखु ार ह।ै डॉक्टर ने दो िदन आराम करने की सलाह दी ह।ै इसिलए म आपसे दो िदन का अवकाश प्रदान करने का अनरु ोध करती हू।ँ अतः कृ पा करके मझु े दो िदन का अवकाश प्रदान कर। म आपकी बहुत आभारी रहूगँ ी। ध यवाद। आपकी आज्ञाकािरणी छात्रा, साक्षी अग्रवाल, कक्षा – सातवीं 165
3. अपने बड़े भाई के िववाह म शािमल होने के िलए प्रधानाचाय्र जी से सात िदन की छु ट्टी माँगते हुए पत्र िलिखए। थान : _________ िदनाकं : __________ सेवा म, प्रधानाचाय्र महोदय, सरदार पटेल िवदय् ालय, हदै राबाद। महोदय, मरे े बड़े भयै ा का िववाह तारीख _______ को होना तय हआु ह।ै िजसम मरे ा उपि थत रहना अिनवाय्र ह।ै िजसके कारण मझु े िदनाकं (........) तक छु ट्टी चािहए। आपसे अनरु ोध करता हूँ िक आप मझु े इन सात िदन की छु ट्टी प्रदान कर। आपका आज्ञाकारी छात्र, िदनशे कक्षा ......... 4. िमत्र को ज मिदन की बधाई देते हुए पत्र िलिखए। थान - _________ िदनाकं -__________ िप्रय िमत्र राके श, आशा करता हूँ तमु वहाँ सकु शल ह गे। तु हारा ज मिदन आने वाला ह।ै पर िकसी कारणवश म तु हारे ज मिदवस समारोह म नहीं आ पाऊँ गा। तु ह ज मिदन की बहुत बधाई एव शभु कामनाए।ँ अपने माता-िपता को मरे ी ओर से प्रणाम कहना। तु हारा िमत्र, सािहल। पता- पी राके श , घर नं....... गली न.ं ..... 166
5. व थ रहने के सझु ाव दते े हुए अपने छोटे भाई के नाम पत्र िलिखए। थान : _________ िदनाकं : __________ यारे भाई िटंकू , म इस पत्र के द्वारा तु ह व थ रहने के कु छ सझु ाव दने ा चाहता हू।ँ रोज़ नान करना चािहए। साफ कपड़े पहनने चािहए। व छ जल पीना चािहए। बढ़ते नाखनू को काटना चािहए। इन सब बात पर िवशेष यान दने ा चािहए। िजससे हम व थ रह सक। व छता के प्रित सावधानी हमारे वा य पर िवशेष प्रभाव डालती ह।ै माता–िपता को मरे ा प्रणाम कहना। ध यवाद तु हारा भाई, महशे पता : _________ नाम : _________ घर न.ं _______________ गली नं. ______________ शहर : _______________ 6. डाकपाल को िशकायती पत्र िलिखए। थान : _________ िदनाकं : _________ सवे ा म, डाकपाल महोदय, रमशे नगर, नई िद ली महोदय, म आपका यान रमशे नगर (ई . लॉ) के डािकए की लापरवाही की ओर िदलाना चाहती हू।ँ इस क्षते ्र का डािकया िनयिमत प से डाक िवतरण नहीं करता। िदन म दो बार डाक बाँटने के थान पर वह के वल एक ही बार आता ह।ै उसके आने का समय िनि त नहीं ह।ै वह हमारे पत्र इधर–उधर फक जाता ह।ै यद्यिप हमने लटै रबॉक्स लगा रखा है ,पर वह पत्र उसम नहीं डालता। उसकी इस लापरवाही के कारण हमारे अनके आव यक पत्र गमु हो जाते ह। अिनयिमत डाक–िवतरण के कारण अनके पत्र िवलबं से िमलते ह। आपसे िवनम्र प्राथरन् ा है िक आप इस क्षते ्र के डािकए को त परता से काम करने के िनदशेर् द ,तािक हम सचु ा प से डाक–िवतरण का कायर् हो सके । ध यवाद सिहत, भवदीया, रचना मदै ीर ा 167
7. िद ली पिरवहन िनगम की बस की यव था म सधु ार हेतु पत्र िलिखए। थान : _________ िदनांक: __________ सवे ा म, महाप्रबंधक, िद ली पिरवहन िनगम, नई िद ली। महोदय, म आपका यान िद ली पिरवहन िनगम की िबगड़ती बस यव था की ओर िदलाना चाहता हू।ँ ितलकनगर से शाहदरा के िलए कोई बस नहीं चलती। के वल एक बस जनकपरु ी से शाहदरा जाते हुए यहाँ से गज़ु रती ह।ै वह बस पहले से ही ठसाठस भरी होती ह।ै इससे ितलकनगर के याित्रय को बड़ा क होता ह।ै आपसे िवनम्र प्राथनर् ा है िक ितलकनगर से आधा–आधा घटं े के अतं राल से शाहदरा के िलए बस–सवे ा शु की जानी चािहए। आपकी इस कृ पा के िलए हम आपके आभारी रहगे भवदीय, भारत मैदीर ा (मतं ्री) दिै नक यात्री सगं म 168
िनबंध 1. होली भारतवष्र म अनेक यौहार मनाए जाते ह। प्र यके यौहार का अपना िवशेष मह व होता ह।ै होली भी इन यौहार म से एक मह वपणू ्र यौहार ह।ै भारत िविभ न ऋतओु ं का दशे ह।ै वसतं को ऋतरु ाज की सजं ्ञा दी जाती ह।ै रंग का योहार होली ऋतरु ाज वसंत के आने का सचू क ह।ै शीत ऋतु के उपरांत वसतं म प्रकृ ित अनिगनत रंग के फू ल से सज जाती ह।ै सव्तर ्र प्रकृ ित के रंग– िबरंगे सौ दय्र का ही साम्रा य होता ह।ै रंग–िबरंगे पु प एवं सरस के पीले पु प को दखे कर मन प्रस न हो जाता है और म ती से झमू उठता ह।ै इस रंग–िबरंगे वसंत म ही होली का शभु ागमन होता ह।ै यह फा गनु मास की पिू णम्र ा के िदन मनाया जाता ह।ै होली से सबं ंिधत एक पौरािणक कथा इस प्रकार प्रचिलत है – प्र ाद का िपता िहर यक यप एक अ याचारी राजा था। वह वयं को भगवान समझता था। वह चाहता था िक सभी लोग उसी को भगवान मान, उसकी पजू ा कर। उसका पतु ्र प्र ाद भगवान हरी का स चा भक्त था। उसने अपने िपता की आज्ञा का पालन नहीं िकया। यह दखे कर िहर यक यप के क्रोध की सीमा न रही। उसने अनेक उपाय द्वारा प्र ाद को समझाने का प्रयास िकया। अतं म िहर यक यप ने प्र ाद का वध करने का िनणय्र िलया। उसने अपनी बहन होिलका से अपने पतु ्र का वध करने म सहायता मागँ ी। होिलका को यह वरदान प्रा था िक आग उसे जला नहीं पाएगी। होिलका प्र ाद को गोद म लके र िचता म बैठ गयी। पिरणाम यह हुआ िक होिलका तो जल गयी पर तु प्र ाद सरु िक्षत आग से बाहर आ गया। इस पाप और अ याचार की पराजय की खशु ी म होिलका दहन का पव्र मनाया जाने लगा। लोग एक महीना पहले से ही च दा जमा कर लते े ह। होली के िदन रात के समय लकिड़य का ढेर जमा करके उसकी पजू ा करके शभु महु ूत्र म आग लगा दी जाती ह।ै दसू रे िदन लोग एक-दसू रे पर रंग डालते ह। परु ाने वरै -भाव को भलू कर गले िमलते ह। इस तरह रंग का यह यौहार िमत्रता, एकता और समानता का संदशे लके र आता ह।ै 2. िक्रके ट आज िक्रके ट बड़ा मनोरंजक खले बन गया ह।ै ब च,े बढ़ू े सभी के मन म उसे दखे ने की अिभलाषा रहती ह।ै आज से दो सौ वषर् पहले यह खेल भारत म शु हुआ। भारतीय टीम को िवदशे म मचै खले ने का पहला अवसर सन् 1928 ई. म िमला। धीरे–धीरे भारतीय टीम ने संसार म प्रशसं नीय थान प्रा कर िलया। िक्रके ट के खले म दो दल होते ह। प्र यके दल म ग्यारह िखलाड़ी होते ह। खले खले ने के िलए बड़े मदै ान की आव यकता होती ह।ै जहाँ से गद फकी जाती ह,ै उससे 20 मीटर की दरू ी पर तीन िवके ट एक रेखा म सीधी गाढ़ दी जाती ह।ै खले शु होने से पहले दोन दल टॉस करते ह। खले ने वाले दल का एक–एक िखलाड़ी बारी–बारी से आकर िवके ट के सामने खड़ा होता है और गद को पीट कर रन बनाता ह।ै एक िखलाड़ी िवके ट के पीछे खड़ा होता ह,ै उसे िवके ट कीपर कहते ह। गद फकने वाले को बॉलर कहते ह। बॉलर के पीछे खड़े होने वाले को रनर कहते ह। दसू रे दल का िखलाड़ी िजसे बॉलर या गदबाज़ कहते ह। िवके ट को ल य बनाकर गद इस प्रकार फकने का प्रयास करता है िक वह िवके ट पर जाकर लग।े िवके ट पर खड़ा होने वाला यिक्त बेट्समनै िवके ट को बचाने का प्रयास करता ह।ै वह साथ म गद को ब ले से पीट कर दरू फकने की कोिशश करता ह।ै फीि डंग करने वाले िखलाड़ी ब ले द्वारा पीटी हुई गद को रोक कर िवके ट कीपर या बॉलर के पास पहुचँ ाने का प्रय न करते ह। इस खले म अिधक रन बनाने वाली टीम को िवजयी माना जाता ह।ै इस प्रकार एक पक्ष वाले ब लेबाज़ी समा करने पर दसू रे पक्ष वाले ब लबे ाज़ी शु करते ह। इस प्रकर िक्रके ट का खले खले ा जाता ह।ै आज यह खले अ यिधक लोकिप्रय हो गया ह।ै इस खले के द्वारा अ तरार् ट्रीय तर पर मले -जोल भी बढ़ता ह।ै सद्भावना बढ़ती ह।ै खले हम खले की भावना से ही खले ना चािहए। इसम ई या्र या द्वषे को थान नहीं दने ा चािहए। 169
3. पु तकालय पु तकालय का अथ्र होता ह–ै पु तक का घर अथात्र ् जहाँ िविभ न प्रकार की पु तक का भ डार हो। ज्ञानाजनर् और िविभ न प्रकार के अ ययन का ऐसा के द्र जहाँ नाना प्रकार की पु तक होती ह, पु तकालय कहा जाता ह।ै प्र यके िव िवद्यालय और महािवद्यालय म एक स प न पु तकालय अव य होता ह।ै िजससे िवद्याथीर् पाठ्यपु तक के अितिरक्त भी ज्ञानाजनर् करने म सक्षम होते ह। पु तकालय का िवकास भारत म ही हुआ। तक्षिशला और नाल दा िव िवद्यालय म बहृ द् पु तकालय थे। िजनम ज्ञान प्रा करने हते ु चीन, जापान, ित बत, लंका आिद दशे के यिक्त आया करते थ।े आज भी दशे म कई प्रिति त पु तकालय ह। पु तकालय का उपयोग कई प्रकार से होता ह।ै यह ज्ञान–प्राि का सव्र े मा यम ह।ै एक ही थान पर िविभ न प्रकार की पु तक का संग्रह और वहाँ का शा त वातावरण ज्ञान–प्राि म सहायक होता है तथा िविभ न िवद्वान के िवचार से हमारा पिरचय होता ह।ै िवद्याथीर् और िविभ न प्रितयोगी परीक्षाओं म बैठने वाले छात्र के िलए पु तकालय एक वरदान के प म ह।ै पु तक एक अ छी िमत्र, साथी, सखा व हमारी मागद्र श्रक होती ह। ये ऐसी िमत्र ह जो हम स माग्र पर ले जाती ह। सामािजक, राजनीितक, िवज्ञान आिद क्षते ्र की जानकारी हम पु तक से ही िमलती ह।ै रा ट्र के प्रित िविश भाव भी जागते ह। अ छी पु तक के अ ययन से यिक्त का मानिसक व आि मक िवकास होता ह।ै हम पु तकालय से अनके लाभ पा सकते ह। हम स जन बनकर वहाँ जाना चािहए। पु तक पर अनाव यक वाक्य िलखना, उन पर िनशान लगाना, उनके पृ फाड़ना आिद अपने तु छ यिक्त व का पिरचय दने ा ह।ै कु छ पाठक तो पु तक चरु ाने म भी मािहर होते ह। यह भी उिचत काय्र नहीं। हम पु तक को अपना िमत्र, गु और पू य मानना चािहए। पु तकालय हमारे जीवन के िलए अ यिधक मह वपणू र् और उपयोगी ह। उनके प्रित पू य भाव रखना चािहए। उनका उिचत प्रयोग करके हम महान और े बनने का प्रयास करना चािहए। 4. मेरा भारत महान ‘सारे जहाँ से अ छा िह दो ताँ हमारा’ किव इकबाल की यह पिं क्त प्र येक भारतवासी के मन म गौरव का सचं ार कर दते ी ह।ै भारत िव का प्राचीनतम दशे ह।ै प्राचीन काल म भी यहाँ सं कृ ित और स यता सव च िशखर पर थी। ज्ञान के ोत वदे का प्रादभु ावर् इसी धरती पर हुआ। अपने ज्ञान एवं सां कृ ितक उ चादश के कारण भारत िव गु की सजं ्ञा से अिभिहत रहा ह।ै दु यतं और शकंु तला के पतु ्र भरत के नाम पर इस दशे का नाम भारत पड़ा। अपने आदश्र एवं आ याि मक मू य के कारण ही सं कृ ित एवं स यता आज भी िवद्यमान ह।ै यहाँ िविभ न ऋतएु ँ होने के कारण अनके धन–धा य पाए जाते ह। भारत म लोहा, कोयल, अभ्रक, ताबँ ा आिद खिनज के िवशाल भंडार ह। भारत के उ र म ठ डी जलवायु पाई जाती है तो दिक्षण म सम जलवायु पाई जाती ह।ै भारत के पि मी तट पर भारी वषा्र होती है तो राज थान (वषारर् िहत क्षते ्र) म सखू ा रह जाता ह।ै यहाँ गगं ा, यमनु ा, गोमती, ब्र पतु ्र, कृ णा, कावेरी आिद निदयाँ अपना अमतृ मय जल दके र भारत को सींचती ह। अनेक धम,्र संप्रदाय, जाित, भाषा, प्रातं के लोग यहाँ रहते ह। इसी िवशेषता पर ससं ार को आ यर् है – अनके ता म एकता, भारत की िवशषे ता। प्राचीन काल से ही भारत अपने ज्ञान, सं कृ ित, यापार आिद के िलए प्रिसद्ध रहा ह।ै आज भी हमने बहुमखु ी उ नित की ह।ै हमने िसद्ध िकया है िक वैज्ञािनक प्रगित म हम िकसी दशे से पीछे नहीं ह। आज हम बड़ी–बड़ी मशीन भी िनयात्र करते ह। भारत राम, कृ ण, बदु ्ध, महावीर, नानक, मीरा, तलु सी, िववेकान द, दयान द सर वती, गाधं ी जसै े महापु ष की भिू म ह।ै हम सभी धम का स मान करते हुए आपस म प्रमे पवू ्कर रहते ह। दशे की अखडं ता एवं एकता के िलए यिद आव यक हो तो हम अपने प्राण की बाजी भी लगा दते े ह। यही मरे ा यारा भारत ह।ै यही मरे ी मातभृ िू म है िजस पर हम अपना सव्र व बिलदान कर सकते ह- “ऐसी मातभृ िू म है मरे ी वगरल् ोक से भी यारी, इसके पद कमल पर मरे ा तन, मन, धन सब बिलहारी।” 170
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