हूँक मनेतुह यार कया है, या तमुनेमझुेयार कया है। म भी समझती हूँऔर तमु भी समझतेहो लेकन यह न तमुसेिछपा हैन मझुसेक तमुनेजो कुछ दया हैवह यार सेकह ं यादा ऊँचा और यार सेकह ं यादा महान है।...म याह नह ंकरना चाहती थी, मनेपरस इनकार कर दया था, इतनी रोयी थी, खीझी थी, बाद म मनेसोचा क यह गलत है, यह वाथ है। जब पापा मझुेइतना यार करतेह तो मझुेउनका दल नह ंदखुाना चा हए। पर मन के अ दर क जो खीझ थी, जो कुढऩ थी, वह कह ंतो उतरती ह । वह म अपनेपर उतार देना चाहती थी, मन म आता था अपनेको कतना क देडालँूइसीिलए अपनेगैरेज म जाकर मोटर सभँाल रह थी, लेकन वहाँभी असफल रह और अ त म वह खीझ अपनेमन पर भी न उतारकर उस पर उतार जसको मनेअपनेसेभी बढ़कर माना है। वह खीझ उतर तमु पर!'' च दर नेसधुा क ओर देखा। सधुा मसुकराकर बोली, ''न, ऐसेमत देखो। यह मत समझो क अपनेआज के यवहार केिलए म तमुसे मा मागँूगी। म जानती हूँ, माँगनेसेतमु द:ुखी भी होगेऔर डाँटनेभी लगोगे। खैर, आज सेम अपना रा ता पहचान गयी हूँ। म जानती हूँक मझुेकतना सभँलकर चलना है। तुहारेसपनेको परूा करनेके िलए मझुेअपनेको या बनाना होगा, यह भी म समझ गयी हूँ। म खुश रहूँगी, सबल रहूँगी और सश रहूँगी और जो रा ता तमु दखलाओगेउधर ह चलगँूी। लेकन एक बात बताओ च दर, मनेयाह कर िलया और वहाँसखुी न रह पायी, फर और उ ह वह भावना, उपासना न देपायी और फर तुह द:ुख हुआ, तब?'' च दर नेघास का एक ितनका तोडक़र कहा, ''देखो सधुा, एक बात बताओ। अगर म तुह कुछ कह देता हूँऔर उसेतमु मझुी को वापस देदेती हो तो कोई बहुत ऊँची बात नह ंहुई। अगर मनेतुह सचमचु ह नहेया प व ता जो कुछ भी दया है, उसेतमु उन सभी केजीवन म ह य नह ं ितफिलत कर सकती जो तुहारेजीवन म आतेह, चाहेवह पित ह य न ह । तुहारेमन केअ य नहे-भडंार केउपयोग म इतनी कृपणता य ? मरेा सपना कुछ और ह है, सधुा। आज तक तुहार साँस केअमतृ नेह मझुेयह साम ी द क म अपनेजीवन म कुछ कर सकँू और म भी यह चाहता हूँक म तुह वह नहे दँूजो कभी घटेह न। जतना बाँटो उतना बढ़ेऔर इतना मझुे व ास हैक तमु य द नहेक एक बदँू दो तो मनुय या से या हो सकता है। अगर वह नहे रहेगा तो तुहारे पित को कभी कोई अस तोष या हो सकता हैऔर फर कैलाश तो इतना अ छा लड़का है, और उसका जीवन इतना ऊँचा क तमु उसक जंदगी म ऐसी लगोगी, जैसेअँगूठ म ह रा। और जहाँतक तुहारा अपना सवाल है, म तमुसे भीख माँगता हूँक अपना सब कुछ खोकर भी अगर मझुेकोई स तोष रहेगा तो यह देखकर क मरे सधुा अपने जीवन म कतनी ऊँची है। म तमुसेइस व ास क भीख माँगता हूँ।'' ''िछह, मझुसेबड़ेहो ,च दर! ऐसी बात नह ंकहत!ेलेकन एक बात है। म जानती हूँक म च मा हूँ, सयू क करण सेह जसम चमक आती है। तमुनेजैसेआज तक मझुेसवँारा है, आगेभी तमु अपनी रोशनी अगर मरे आ मा म भरतेगयेतो म अपना भ व य भी नह ंपहचान सकँूगी। समझे!'' ''समझा, पगली कह ंक !'' थोड़ देर च दर चुप बठैा रहा फर सधुा केपाँव सेिसर टकाकर बोला-''परेशान कर डाला, तीन रोज स।ेसरूत तो देखो कैसी िनकल आयी हैऔर बसैाखी को कुल चार रोज रह गय।ेअब मत दमाग बगाड़ना! वेलोग आतेह ह गे!'' '' बनती! दवा लेआ...'' बनती उठकर गयी तो सधुा बोली, ''हटो, अब हम घास पर बठैगे!'' और घास पर बठैकर
वह बोली, ''लेकन एक बात है, आज सेलकेर याह तक तमु हर अवसर पर हमारेसामनेरहना, जो कहोगेवह हम करतेजाएगँे।'' ''हाँ, यह हम जानतेह।'' च दर नेकहा और कुछ दरूहटकर घास पर लटे गया और आकाश क ओर देखने लगा। शाम हो गयी थी और दन-भर क उड़ हुई धूल अब बहुत कुछ बठै गयी थी। आकाश केबादल ठहरेहुए थे और उन पर अ णाई झलक रह थी। एक दरुंगी पतगं बहुत ऊँचेपर उड़ रह थी। च दर का मन भार था। हालाँक जो तफूान परस उठा था वह ख म हो गया था, लेकन च दर का मन अभी मरा-मरा हुआ-सा था। वह चुपचाप लटेा रहा। बनती दवा और पानी लेआयी। दवा पीकर सधुा बोली, '' य , चुप य हो, च दर?'' ''कोई बात नह ं।'' '' फर बोलते य नह ं, देखा बनती, अभी-अभी या कह रहेथेऔर अब देखो इ ह।'' सधुा बोली। ''हम अभी बतातेह इ ह!'' बनती बोली और िगलास म थोड़ा-सा पानी लकेर च दर केऊपर फक दया। च दर च ककर उठ बठैा और बगड़क़र बोला, ''यह या बदतमीजी है? अपनी द द को यह सब दलुार दखाया करो।'' ''तो य पड़ेथेऐस?ेबात करगेऋ ष-मिुनय जैसेऔर उदास रहगेब च क तरह! वाह रेच दर बाब!ू'' बनती नेहँसकर कहा, ''द द , ठ क कया न मन?े'' '' ब कुल ठ क, ऐसेह इनका दमाग ठ क होगा।'' ''इतनेम डॉ टर शुला आयेऔर कुरसी पर बठै गय।ेसधुा केमाथेपर हाथ रखकर देखा, ''अब तो तूठ क है?'' ''हाँ, पापा!'' '' बनती, कल तुहार माताजी आ रह ह। अब बसैाखी क तयैार करनी है। सधुा केजेठ आ रहेह और सास।'' सधुा चुपचाप उठकर चली गयी। च दर, बनती और डॉ टर साहब बठैेउस दन का बहुत-सा काय म बनातेरहे। च दर को सबसेबड़ा स तोष था क सधुा ठ क हो गयी थी। बसैाख पनूो केएक दन पहलेह सेबनती नेघर को इतना साफ कर डाला था क घर चमक उठा था। यह बात तो दसूर हैक टड - म क सफाई म बनती ने च दर केबहुत-सेकागज बहुारकर फक दयेथेऔर आँगन धोतेव उसनेच दर केकपड़ को छ ट सेतर कर दया था। उसकेबदलेम च दर नेबनती को डाँटा था और सधुा देख-देखकर हँस रह थी और कह रह थी, ''तमु य िचढ़ रहेहो? तुह देखनेथोड़ेह आ रह ह हमार सास।'' बशैाखी पनूो क सबुह डॉ टर साहब और बआुजी गाड़ लकेर उनको िलवा लानेगयेथे। च दर बाहर बरामदेम बठैा अखबार पढ़ रहा था और सधुा अ दर कमरेम बठै थी। अब दो दन उसेबहुत दब-ढँककर रहना होगा। वह बाहर नह ंघमू सकती थी; य क जानेकैसेऔर कब उसक सास आ जाएँऔर देख ल। बआु उसेसमझा गयी थींऔर उसनेएक ग भीर आ ाकार लड़क क तरह मान िलया था और अपनेकमरेम चुपचाप बठै थी। बनती कढ़ केिलए बसेन फट रह थी और महरा जन नेरसोई म दधू चढ़ा रखा था।
सधुा चुपकेसेआयी, कवाड़ क आड़ सेदेखा क पापा और बआु क मोटर आ तो नह ंरह है! जब देखा क कोई नह ंहैतो आकर चुपेसेखड़ हो गयी और पीछेसेच दर केहाथ सेअखबार लेिलया। च दर नेपीछेदेखा तो सधुा एक ब चेक तरह मसुकरा द और बोली, '' य च दर, हम ठ क ह न? ऐसेह रह न? देखा तुहारा कहना मानतेह न हम?'' ''हाँसधुी, तभी तो हम तमुको इतना दलुार करतेह!'' ''लेकन च दर, एक बार आज रो लनेेदो। फर उनकेसामनेनह ंरो सकगे।'' और सधुा का गला ँध गया और आँख छलछला आयी। ''िछह, सधुा...'' च दर नेकहा। ''अ छा, नह ं-नह ं...'' और झटकेसेसधुा नेआँसूप छ िलय।ेइतनेम गेट पर कसी कार का भ पूसनुाई पड़ा और सधुा भागी। ''अरे, यह तो प मी क कार है।'' च दर बोला। सधुा क गयी। प मी नेपो टको म आकर कार रोक । ''हैलो, मरेेजुड़वा िम , या हाल हैतमु लोग का?'' और हाथ िमलाकर बतेक लफु सेकुस खींचकर बठै गयी। ''इ ह अ दर लेचलो, च दर! वरना अभी वेलोग आतेह गे!'' सधुा बोली। ''नह ं, मझुेबहुत ज द है। आज शाम को बाहर जा रह हूँ। बट अब मसरू चला गया है, वहाँसेउसनेमझुेभी बलुाया है। उसकेहाथ म कह ंिशकार म चोट लग गयी है। म तो आज जा रह हूँ।'' सधुा बोली, ''हम लेचिलएगा?'' ''चिलए। कपरू, तमु भी चलो, जुलाई म लौट आना!'' प मी नेकहा। ''जब अगलेसाल हम लोग क िम ता क वषगाँठ होगी तो म चलगँूा।'' च दर नेकहा। ''अ छा, वदा!'' प मी बोली। च दर और सधुा नेहाथ जोड़ेतो प मी नेआगेबढक़र सधुा का महँु हथेिलय म उठाकर उसक पलक चूम लींऔर बोली, ''मझुेतुहार पलक बहुत अ छ लगती ह। अरे! इनम आँसओुंका वाद है, अभी रोयी थीं या?'' सधुा झप गयी। च दर केक धेपर हाथ रखकर प मी नेकहा, ''कपरू, तमु खत ज र िलखतेरहना। चलतेतो बड़ा अ छा रहता। अ छा, आप दोन िम का समय अ छ तरह बीत।े'' और प मी चल द । थोड़ देर म डॉ टर साहब क कार आयी। सधुा नेअपनेकमरेकेदरवाजेब द कर िलय,े बनती नेिसर पर प ला ढक िलया और च दर दौड़कर बाहर गया। डॉ टर साहब केसाथ जो स जन उतरेवेठगन-ेस,ेगोरे-स,ेगोल चेहरेकेकुलीन स जन थेऔर ख र का कुरता और धोती पहनेहुए थे। हाथ म एक छोटा-सा सफर बगै था। च दर नेलनेेको हाथ बढ़ाया तो हँसकर बोल,े''नह ंजी, या इतना-सा बगै लेचलनेम मरेा हाथ थक जाएगा। आप लोग
तो खाितर करकेमझुेमह वपणू बना दगे!'' सब लोग टड म म गय।ेवह ंडॉ टर शुला नेप रचय कराया-''यह हमारेिश य और लड़के, ा त केहोनहार अथशा ी च कुमार कपरूऔर आप शाहजहाँपरु के िस काँेसी कायकता और यिुनिसपल किम र ी शकंरलाल िम ।'' ''अब तूनहाय लवे सकंर , फर चाय ठंडाय जइहै।'' बआुजी नेआकर कहा। आज बआुजी नेबहुत दन पहलेक बटूदार साड़ पहन रखी थी और शायद वह खुश थीं य क बनती को डाँट नह ंरह थीं। ''नह ं, म तो वेटंग- म म नहा चुका। चाय म पीता नह ं। खाना ह तयैार कराइए।'' और घड़ देखकर शकंर बाबू बोल,े''मझुेजरा वरा य-भवन जाना हैऔर दो बजेक गाड़ सेवापस चलेजाना हैऔर शायद उधर सेह चला जाऊँगा।'' उ ह नेबहुत मीठे वर सेमसुकरातेहुए कहा। ''यह तो अ छा नह ंलगता क आप आयेभी और कुछ केनह ं।'' डॉ टर शुला बोल।े ''हाँ, म खुद कना चाहता था लेकन माँजी क तबीयत ठ क नह ंहै। कैलाश भी कानपरुगया हुआ है। मझुे ज द जाना चा हए।'' बनती नेलाकर थाली रखी। च दर नेआ य सेडॉ टर साहब क ओर देखा। वेहँसकर बोल,े''भाई, यह लोग हमार तरह छूत-पाक नह ंमानत।ेशकंर तुहारेस दाय केह, यह ंक चा खाना खा लगे।'' ''इ ह ा ïण कहत केहै, ई तो क र तान है, हमरो धरम बगा डऩ हंयाँआय कै!'' बआुजी बोलीं। बआुजी नेह यह शाद तय करायी थी, लड़काबताया था और दरूकेर तेसेवेकैलाश और शकंर क भाभी लगती थीं। शकंर बाबूनेहाथ धोयेऔर कुस खींचकर बठै गय।ेच दर, क ओर देखकर बोल,े''आइए, होनहार डॉ टर साहब, आप तो मरेेसाथ खा सकतेह?'' ''नह ं, आप खाइए।'' च दर नेतक लफु करतेहुए कहा। ''अजी वाह! म ा ïण हूँ, शु; मरेेसाथ खाकर आपको ज द मो िमल जाएगा। कह ंहाथ म तरकार लगी रह गयी तो आपकेिलए वग का फाटक फौरन खुल जाएगा! खाओ।'' दो कौर खानेकेबाद शकंर बाबूनेबआुजी सेकहा, ''यह बहूहै, जो लड़क थाली रख गयी थी?'' ''अरेराम कहौ, ऊ तो हमार छोर हैबनती! पहचन यौ न।ै पछलेसाल तो मुनेकेववाह म देखेहोबो!'' बआुजी बोलीं। शकंर बाबूकैलाश सेकाफ बड़ेथेलेकन देखनेम बहुत बड़ेनह ंलगतेथे। खात-ेपीतेबोल,े''डॉ टर साहब! लड़क सेक हए, रोट देजाय।ेम इसी तरह देख लगँूा, और यादा तडक़-भड़क क कोई ज रत नह ं!'' डॉ टर साहब नेबआुजी को इशारा कया और वेउठकर चली गयीं। थोड़ देर म सधुा आयी। साद सफेद धोती
पहन,ेहाथ म रोट िलयेदरवाजेपर आकर हचक , फर आकर च दर सेबोली, ''रोट लोगे!'' और बना च दर क आवाज सनुेरोट च दर केआगेरखकर बोली, ''और या चा हए?'' ''मझुेकढ़ चा हए!'' शकंर बाबूनेकहा। सधुा गयी और कढ़ लेआयी। शकंर बाबूकेसामनेरख द । शकंर बाबू नेआँख उठाकर सधुा क ओर देखा, सधुा नेिनगाह नीची कर लींऔर चली गयी। ''बहुत अ छ हैलड़क !'' शकंर बाबूनेकहा। ''इतनी पढ़ -िलखी लड़क म इतनी शम-िलहाज नह ंिमलती। सचमचु जैसेआपक एक ह लड़क थी, आपनेउसेखूब बनाया है। कैलाश के ब कुल यो य लड़क है। यह तो क हए डॉ टर साहब क िश ा बल होती हैवरना हमारा कहाँसौभा य था! जब सेमरे प ी मर तभी सेमाताजी कैलाश केववाह क जद कर रह ह। कैलाश अ तजातीय ववाह करना चाहता था, लेकन हम तो अपनी जाित म ह इतना अ छा स ब ध िमल गया।'' ''तो तोहरेअब हन कौन बसै ा गयी। तहुौ काहेनाह बहुरया लैअउ यौ। सधुी केअकेल मन न लगी!'' बआुजी बोलीं। शकंर बाबूकुछ नह ंबोल।ेखाना खाकर उ ह नेहाथ धोयेऔर घड़ देखी। ''अब थोड़ा सो ल,ँूया जानेद जए। आइए, बात कर हम और आप,'' उ ह नेच दर सेकहा। एक बजेतक च दर शकंर बाबूसेबात करता रहा और डॉ टर साहब और सधुा वगैरह खाना खातेरहे। शकंर बाबूबहुत हँसमखु थेऔर बहुत बातनूी भी। च दर को तो कैलाश सेभी यादा शकंर बाबूपस द आय।ेबात करनेसेमालमू हुआ क शकंर बाबू क आयुअभी तीस वष सेअिधक क नह ंहै। एक पाँच वष का ब चा हैऔर उसी केहोनेम उनक प ी मर गयी। अब वेववाह नह ंकरगे, वेगाँधीवाद ह, काँेस के मखु थानीय कायकता ह और यिुनिसपल किम र ह। घर के जमींदार ह। कैलाश बरेली म पढ़ता था। अब भी कैलाश का कोई इरादा कसी कार क नौकर या यापार करनेका नह ंहै, वह मजदरू केिलए सा ा हक प िनकालनेका इरादा कर रहा है। वह सधुा को बजाय घर पर रखनेकेअपने साथ रखेगा य क वह सधुा को आगेपढ़ाना चाहता है, सधुा को राजनीित ेम लेजाना चाहता है। बीच म एक बार बनती आयी और उसनेच दर को बलुाया। च दर बाहर गया तो बनती नेकहा, ''द द पछू रह ह, येकतनी देर म जाएगँे?'' '' य ?'' ''कह रह ह अब च दर को याद थोड़ेह हैक सधुा भी इसी घर म है। उ ह ंसेबात कर रहेह।'' च दर हँस दया और कुछ नह ंकहा। बनती बोली, ''येलोग तो बहुत अ छेह। म तो कहूँगी सधुा द द को इससेअ छा प रवार िमलना मुकल है। हमारेससरुक तरह नह ंह येलोग।'' ''हाँ, फर भी सधुा इतनी सवेा नह ंकर रह हैइनक । बनती, तमु सधुा को कुछ िश ा देदो इस मामलेम।'' ''हाँ-हाँ, हम सवेा करनेक िश ा देदगेऔर याह करनेकेबाद क िश ा अपनी प मी सेदलवा देना। खुद तो उनसेलेह चुकेह गेआप!''
च दर झप गया। ''पाजी कह ंक , बहुत बशेरम हो गयी है। पहलेमहँुसेबोल नह ंिनकलता था!'' ''तमुनेऔर द द नेह तो कया बशेरम! हम या कर? पहलेहम कतना डरतेथे!'' बनती नेउसी तरह गदन टेढ़ करकेकहा और मसुकराकर भाग गयी। जब डॉ टर साहब आयेतो शकंर बाबूनेकहा, ''अब तो म जा रहा हूँ, यह माला मरे ओर सेबहूको देद जए।'' और उ ह नेबड़ सुदर मोितय क माला बगै सेिनकाली और बआुजी केहाथ म देद । ''हाँ, एक बात है!'' शकंर बाबूबोल,े'' याह हम लोग मह नेभर केअ दर ह करगे। आपक सब बात हमनेमानी, यह बात आपको हमार माननी होगी।'' ''इतनी ज द !'' डॉ टर शुला च क उठे, ''यह अस भव है, शकंर बाबू! म अकेला हूँ, आप जानतेह।'' ''नह ं, आपको कोई क न होगा।'' शकंर बाबूबहुत मीठे वर म बोल,े''हम लोग र ित-रसम केतो कायल ह नह ं। आप जतना चाहेर ित-रसम अपनेमन सेकर ल। हम लोग तो िसफ छह-सात आदिमय केसाथ आएगँे। सबुह आएगँे, अपनेबगँलेम एक कमरा खाली करा द जएगा। शाम को अगवानी और ववाह कर द। दसूरेदन दस बजेहम लोग चलेजाएगँे।'' ''यह नह ंहोगा।'' डॉ टर साहब बोल,े''हमार तो अकेली लड़क हैऔर हमारेभी तो कुछ हौसलेह। और फर लड़क क बआु तो यह कभी भी नह ं वीकार करगी।'' ''देखए, म आपको समझा दँ,ूकैलाश शा दय म तड़क-भड़क केस त खलाफ है। पहलेतो वह इसिलए जाित म ववाह नह ंकरना चाहता था, लेकन जब मनेउसेभरोसा दलाया क बहुत सादा ववाह होगा तभी वह राजी हुआ। इसीिलए इसेआप मान ह ल फर ववाह केबाद तो जंदगी पड़ है। आपक अकेली लड़क हैजतना चा हए, क रए। रहा कम समय का तो शभु य शी म!्फर आपको कुछ खास इ तजाम भी नह ंकरना, अगर कुछ हो तो क हए म यह ंरह जाऊँ, आपका काम कर दँ!ू'' शकंर बाबूहँसकर बोल।े कुछ देर तक बात होती रह ं, अ त म शकंर बाबूनेअपनेसौज य और मीठे वभाव सेसभी को राजी कर ह िलया। उसकेबाद उ ह नेसबसेवदा माँगी, चलतेव बआुजी और डॉ टर साहब केपरैछुए, च दर सेहाथ िमलाया और शकंर बाबूसबका मन जीतकर चलेगय।े बआुजी नेमाला हाथ म ली, उसेउलट-पलटकर देखा और बोलीं, ''एक ऊ आयेरहेजूताखोर! एक ठो कागज थमाय केचलेगय!े'' और एक गहर साँस लकेेचली गयीं। डॉ. साहब नेसधुा को बलुाया। उसकेहाथ म वह माला रखकर उसेिचपटा िलया। सधुा पापा क गोद म महँु िछपाकर रो पड़ । उसकेबाद सधुा चली गयी और च दर, डॉ टर साहब और बआुजी बठैेशाद केइ तजाम क बात करतेरहे। यह तय हुआ क अभी तो इ ह ंक इ छानसुार ववाह कर दया जाए फर यिूनविसट खुलनेपर सभी को बलुाकर अ छ दावत वगैरह देद जाए। यह भी तय हुआ क बआुजी गाँव जाकर अनाज, घी, ब डय़ाँऔर नौकर वगैरह का इ तजाम
कर लाएँऔर प ह दन केअ दर लौट आए।ँअगवानी ठ क छह बजेशाम को हो जाए और सबुह केना तेम या दया जाए, यह सभी डॉ टर साहब नेतय कर डाला। लेकन िन य यह कया गया क चँूक आदमी बहुत कम आ रहे ह, अत: सबुह-शाम केना तेका काम यिूनविसट केकसी रेतराँको देदया जाए। इसी बीच म बनती खरबजूा और शरबत लाकर रख गयी और च दर नेबहुत आराम सेशरबत पीतेहुए पछूा, '' कसनेबनाया है?'' ''सधुा द द न।े'' ''आज बड़ खुश मालमू पड़ती है, चीनी बहुत कम छोड़ है!'' च दर बोला। बआु और बनती दोन हँस पड़ ं। थोड़ देर बाद च दर उठकर भीतर गया तो देखा क सधुा अपनेपलगँ पर बठै सामनेएक कताब रखेजाने या देख रह हैऔर सामनेवह माला पड़ है। च दर गया और बोला, ''सधुा! आज म बहुत खुश हूँ।'' सधुा नेआँख उठायींऔर च दर क ओर देखकर मसुकरानेक कोिशश क और बोली, ''म भी बहुत खुश हूँ।'' '' य , तय हो गया इसिलए?'' बनती नेपछूा। ''नह ं, च दर बहुत खुश ह इसिलए!'' और एक गहर साँस लकेर कताब ब द कर द । ''कौन-सी कताब है, सधुा?'' च दर नेपछूा। ''कुछ नह ं, इस पर उदूकेकुछ अशआर िलखेह जो गेसूनेसनुायेथे।'' सधुा बोली। च दर नेबनती क ओर देखा और कहा, '' बनती, कैलाश तो जैसा हैवसैा ह है, लेकन शकंरबाबूक तार फ म कर नह ंसकता। या राय हैतुहार ?'' ''हाँ, हैतो सह ; द द इतनी सखुी रहगी क बस! द द , हम भलू मत जाना, समझीं!'' बनती बोली। ''और हम भी मत भलूना सधुा!'' च दर नेसधुा क उदासी दरूकरनेकेिलए छेड़तेहुए कहा। ''हाँ, तुह भलूेबना कैसेकाम चलगेा।'' सधुा नेऔर भी गहर साँस लतेेहुए कहा और एक आँसूगाल पर फसल ह आया। ''अरेपगली, तमु सब कुछ अपनेच दर केिलए कर रह हो, उसक आ ा मानकर कर रह हो। फर यह आँसू कैस?ेिछह! और यह माला सामनेरखे या कर रह हो?'' च दर नेबहलाया। ''माला तो द द इसिलए सामनेरखेथींक बतलाऊँ...बतलाऊँ!'' बनती बोली, ''असल म रामायण क कहानी तो सनुी हैच दर, तमुन?ेरामच नेअपनेएक भ को मोती क माला द तो वह उसेदाँत सेतोडक़र देख रहा था क उसकेअ दर रामनाम हैया नह ं। सो यह माला सामनेरखकर देख रह थीं, इसम कह ंच दर क झलक हैया नह ं?'' ''चुप िगलहर कह ंक ?'' सधुा हँस पड़ , ''बहुत बोलना आ गया है!'' सधुा नेहँसतेहुए बनावट गुसेसेकहा।
फर सधुा त कयेसेटककर बठै गयी-''आज गेसूनह ंहै। मझुेगेसूक बहुत याद आ रह है।'' '' य ?'' ''इसिलए क आज उसकेकई शरेयाद आ रहेह। एक दफेउसनेसनुाया था- येआज फजा खामोश है य , हर जर को आ खर होश है य ? या तमु ह कसी केहो न सके, या कोई तुहारा हो न सका।' इसी क अ तम पं है- मौज भी हमार हो न सक ं, तफूाँभी हमारा हो न सका'!'' ''वाह! यह पं बहुत अ छ है,'' च दर नेकहा। ''आज गेसूहोती तो बहुत-सी बात करत!े'' सधुा बोली, ''देखो च दर, जंदगी भी या होती है! आदमी या सोचता हैऔर या हो जाता है। आज सेतीन-चार मह नेपहलेमने या सोचा था! लास- म सेभागकर हम लोग पड़े के नीचेलटेकर बात करतेथे, तो म हमशेा कहती थी-म शाद नह ंक ँगी। पापा को समझा लगँूी। उस दन या मालमू था क इतनी ज द जुए केनीचेगरदन डाल देनी होगी और पापा को भी जीतकर कसी दसूरेसेहार जाना होगा। अभी उसक तय भी नह ंहुई और मह न-ेभर बाद मरे...'' सधुा थोड़ देर चुप रह और फर-''और दसूर बात उसक , जो मनेतुह बतायी थी। उसनेकहा था जब कसी केकदम हट जातेह िसर केनीचेस,ेतब मालमू होता हैक हम कसका सपना देख रहेथे। पहलेहम भी नह ंमालमू होता था क हमारेिसर कसकेकदम पर झुक चुकेह। याद है? मनेतुह बताया था, तमुनेपछूा था!'' ''याद है।'' च दर नेकहा। बनती उठकर चली गयी लेकन सधुा या च दर कसी नेयान भी नह ंदया। च दर बोला, ''लेकन सधुा, इन सब बात को सोचनेसे या फायदा, आगेका रा ता सामनेहै, बढ़ो।'' ''हाँ, सो तो हैह देवता मरेे! कभी-कभी जानेकतनी परुानी बात मन म आ ह जाती ह और मन करता हैक म सोचती ह जाऊँ। जाने य मन को बड़ा स तोष िमलता है। और च दर, जब म वहाँरहूँगी, तमुसेदरू, तो इ ह ं मिृतय केअलावा और या शषे रहेगा...तुह वह दन याद हैजब म गेसूकेयहाँनह ंजा पायी थी और उस थान पर हम लोग म झगड़ा हो गया था...च दर, वहाँसब कुछ हैलेकन म लड़ूँगी-झगड़ूँगी कससेवहाँ?'' च दर एक फ क -सी हँसी हँसकर बोला, ''अब या ज म-भर ब ची ह बनी रहोगी!'' ''हाँच दर, चाहती तो यह थी लेकन जंदगी तो जबरद ती सब सखु छ न लतेी हैऔर बदलेम कुछ भी नह ं देती। आओ, चलो लॉन पर चल। शाम को तमुसेबात ह करगे!'' उसकेबाद सधुा रात को आठ बजेउठ , जब बआु तयैार होकर टेशन जा रह थींऔर ाइवर मोटर िनकाल रहा था। और उदास टम टमातेहुए िसतार नेदेखा क च दर और सधुा दोन क आँख म आँसओुंक अवशषे नमी झलिमला रह थी। उठतेहुए सधुा ने ण-भर च दर क ओर देखा, च दर नेिसर झुका िलया और बहुत उदास
आवाज म कहा, ''चलो सधुा, बहुत देर कर द हम लोग न।े'' प ह दन बाद बआु आयींतो उ ह नेघर क श ल ह बदल द । दरवाजेपर और बरसाती म ह द केहाथ क छाप लग गयी, कमर का सभी सामान हटाकर द रयाँबछा द गयींऔर सबसेअ दर वालेकमरेम सधुा का सब सामान रख दया गया। टड - म क सभी कताब समटे द गयींऔर वहाँएक बड़ -सी मशीन लाकर रख द गयी जस पर बठैकर बनती िसलाई करती थी। उसी को कपड़ेऔर गहन का भडंार-घर बनाया गया और उसक चाबी बनती या बआु केपास रहती थी। गाँव सेएक महरा जन, एक कहा रन और दो मजदरूआयेथे, वेसभी गैरेज म सोते थेऔर दन-भर काम करतेथेऔर 'पानी पीन'ेको माँगतेरहतेथे। सभी कुिसयाँऔर सोफासटेिनकलवाकर सायबान म लगवा दयेगयेथे। रसोई केपार वाली कोठर म कुहड़, प ल, यालेवगैरह रखेथेऔर पजूा वालेकमरेम श कर, घी, तरकार और अनाज था। िमठाई कहाँरखी जाएगी, इस पर बआुजी, महरा जन और बनती म घटंे-भर तक बहस हुई लेकन जब बआुजी नेबनती सेकहा, ''आपन लड़के-ब चेका बयाह कयो तो कतरनी अस जबान चलाय िल ो, अब हन हर काम म काहेटाँग अड़ावा करत हौ!'' तो बनती चुप हो गयी और अ त म बआुजी क राय सव प र मानी गयी। बआुजी क जबान जतनी तजे थी, हाथ भी उतनेह तजे। चार बोरा गेहूँउ ह नेसाफ करके कोठ रय म भरवा दय।ेकम-स-ेकम पाँच तरह क दाल लायी थीं। बसेन पसवाया, दाल दरवायी, पापड़ बनवाय,ेमदैा छनवाया, सजूी दरवायी, बर -मगँुौर डलवायीं, चावल क कचौ रयाँबनवायींऔर सबको अलग-अलग गठर म बाँधकर रख दया। रात को अकसर बआुजी, महरा जन तथा गाँव क मह रन ढोलक लकेर बठै जातींऔर गीत गातीं। बनती उनम भी शािमल रहती। सच पछूो तो सधुा के याह का जतना उछाह बआु को नह ंथा, उतना बनती को था। वह सबुह सेउठकर झाड़ू लकेर सारा घर बहुार डालती थी, इसकेबाद नहाकर तरकार काटती, उसकेबाद फर चाय चढ़ाती। डॉ टर साहब, च दर, सधुा सभी को चाय देती, बठैकर च दर अगर कुछ हसाब िलखाता तो हसाब िलखती, फर अपनी मशीन पर बठै जाती और बारह-एक बजेतक िसलाई करती रहती, फर दोपहर को चावल और दाल बीनती, शाम को खरबजूे काटती, शरबत बनाती और रात-भर जाग-जागकर गाती या द द को हँसानेक कोिशश करती। एक दन सधुा नेकहा, ''मरेेयाह म तो इतनी खुश है, अपनेयाह म या करेगी?'' तो बनती नेजवाब दया, ''अपनेयाह म तो म खुद बड बजाऊँगी, वद पहनकर!'' घर चमक उठा था जैसेरेशम! लेकन रेशम केचमकदार, रंगीन उ लास भरेगोलेकेअ दर भी एक ाणी होता है, उदास त ध अपनी साँस रोककर अपनी मौत क ण- ण ती ा करनेवाला रेशम का क ड़ा। घर केइस सारे उ लास और चहल-पहल सेिघरा हुआ िसफ एक ाणी था जसक साँस धीरे-धीरेडूब रह थी, जसक आँख क चमक धीरे-धीरेकुहला रह थी, जसक चंचलता नेउसक नजर सेवदा माँग ली थी, वह थी-सधुा। सधुा बदल गयी थी। गोरा च पई चेहरा पीला पड़ गया था, और लगता था जैसेवह बीमार हो। खाना उसेजहर लगनेलगा था, अपने कमरेको छोड़कर कह ंजाती न थी। एक शीतलपाट बछायेउसी पर दन-रात पड़ रहती थी। बनती जब हँसती हुई खाना लाती और सधुा केइनकार पर बनती केआँसूछलछला आतेतब सधुा पानी केघटँू केसहारेकुछ खा लतेी और उदास, फर अपनी शीतलपाट पर लटे जाती। वग को कोई इ धनषु सेभर देऔर शची को जहर पला दे, कुछ ऐसा ह लग रहा था वह घर। डॉ टर शुला का साहस न होता था सधुा सेबोलनेका। वह रोज बनती सेपछू लते-े''सधुा खाना खाती हैया
नह ं?'' बनती कहती, ''हाँ।'' तो एक गहर साँस लकेर अपनेकमरेम चलेजात।े च दर परेशान था। उसनेइतना काम शायद कभी भी न कया हो अपनी जंदगी म। सनुार केयहाँ, कपड़ेवालेके यहाँ, फर राशिनगं अफसर केयहाँ, पिुलस बड ठ क करानेपिुलस लाइंस, अज देनेमैज ेट केयहाँ, पया िनकालने बक, शािमयानेका इ तजाम, पलगँ, कुस वगैरह का इ तजाम, खान-ेपरोसनेकेबरतन केइ तजाम और जाने या- या...और जब बरु तरह थककर आता, जेठ क तपती हुई दोपहर म, तब बनती आकर बताती-सधुा नेआज फर कुछ नह ंखाया तो उसका मन होता था वह िसर पटक-पटक दे। वह सधुा केपास जाता, सधुा आँसूप छकर बठैती, एक टूट -फूट मसुकान सेच दर का वागत करती। च दर उससेपछूता, ''खाती य नह ं?'' ''खाती तो हूँच दर, इससे यादा गरिमय म म कभी नह ंखाती थी।'' सधुा कहती और इतने ढ़ वर सेक च दर सेकुछ ितवाद नह ंकरतेबनता। अब बाहर काम लगभग समा हो गयेथे। वसैेतो सभी जगह ह द िछडक़कर प रवाना कयेजा चुकेथे लेकन िनमंण-प भी बहुत सुदर छपकर आयेथे, हालाँक कुछ देर हो गयी थी। याह को अब कुल सात दन बचे थे। च दर सबुह दस बजेएक ड बेम िनमंण-प और िलफाफा-भरेहुए आया और टड - म म बठै गया। बनती बठै हुई कुछ िसल रह थी। ''सधुा कहाँहै? उसेबलुा लाओ।'' सधुा आयी, सजूी आँख, सखूेहोठ, खेबाल, मलैी धोती, िन ाण चेहरा और बीमार चाल। हाथ म पखंा िलये थी। आयी और च दर केपास बठै गयी-''कहो, या कर आय,ेच दर! अब कतना इ तजाम बाक है?'' ''अब सब हो गया, सधुा रानी! आज तो परैजवाब देरहेह। साइ कल चलात-ेचलातेपरैम जैसेगाँठ पड़ गयी ह ।'' च दर नेकाड फैलातेहुए कहा, ''शाद तुहार होगी और जान मरे िनकली जा रह हैमहेनत स।े'' ''हाँच दर, इतना उ साह तो और कसी को नह ंहैमरे शाद का!'' सधुा नेकहा और बहुत दलुार सेबोली, ''लाओ, परैदबा दँूतुहारे?'' ''अरेपागल हो गयी?'' च दर नेअपनेपरैउठाकर ऊपर रख िलय।े ''हाँ, च दर!'' गहर साँस लतेेहुए सधुा बोली, ''अब मरेा अिधकार भी या हैतुहारेपरैछूनेका। मा करना, म भलू गयी थी क म परुानी सधुा नह ंहूँ।'' और टप सेदो आँसूिगर पड़े। सधुा नेपखंेक ओट कर आँख प छ लीं। ''तमु तो बरुा मान गयीं, सधुा!'' च दर नेपरैनीचेरखतेहुए कहा। ''नह ंच दर, अब बरुा-भला माननेके दन बीत गय।ेअब गैर क बात का भी बरुा-भला नह ंमान पाऊँगी, फर घर केलोग क बात का बरुा-भला या...छोड़ो येसब बात। ये या िनमंण-प छपा है, देख!'' च दर नेएक िनमंण-प उठाया, उसेिलफाफेम भरकर उस पर सधुा का नाम िलखकर कहा, ''लो, हमार सधुा का याह है, आइएगा ज र!''
सधुा नेिनमंण प लेिलया-''अ छा!'' एक फ क हँसी हँसकर बोली, ''अ छा, अगर हमारेपितदेव नेआ ा देद तो आऊँगी आपकेयहाँ। उनका भी नाम िलख द जए वरना बरुा न मान जाए।ँ'' और सधुा उठ खड़ हुई। ''कहाँचली?'' च दर नेपछूा। ''यहाँबहुत रोशनी है! मझुेअपना अँधेरा कमरा ह अ छा लगता है।'' सधुा बोली। ''चलो बनती, वह ंकाड लेचलो!'' च दर नेकहा, ''आओ सधुा, आज काड िलखतेजाएगँे, तमुसेबात करते जाएगँे। जंदगी देखो, सधुी! आज प ह दन सेतमुसेदो िमनट बठैकर बात भी न कर सके।'' ''अब या करना है, च दर! जैसा कह रहेहो वसैा कर तो रह हूँ। अभी कुछ और बाक है या? बता दो वह भी कर डाल।ँूअब तो रो-पीटकर ऊँचा बनना ह है।'' बनती नेकाड समटेेतो सधुा डाँटकर बोली-''रख इसेयह ं; चली उठा के! बड़ च दर क आ ाकार बनी है। ये भी हमार जान क गाहक हो गयी अब! हमारेकमरेम लायी येसब, तो टाँग तोड़ दँगूी! पाजी कह ंक !'' बनती नेकाड धर दय।ेनौकर नेआकर कहा, ''बाबजूी, कुहार अपना हसाब माँगता है!'' ''अ छा, अभी आया, सधुा!'' और च दर चला गया। और इस तरह दन बीत रहेथे। शाद नजद क आती जा रह थी और सभी का सहारा एक-दसूरेसेछूटता जा रहा था। सधुा केमन पर जो कुछ भी धीरे-धीरेमरघट क उदासी क तरह बठैता जा रहा था और च दर अपनेयार स,ेअपनी मसुकान स,ेअपनेआँसओुंसेधो देनेकेिलए याकुल हो उठा था, लेकन यह जंदगी थी जहाँयार हार जाता है, मसुकान हार जाती ह, आँसूहार जातेह-त तर , याल,ेकुहड़, प ल, कालीन, द रयाँऔर बाजेजीत जाते ह। जहाँअपनी जंदगी क रेणा-मिूत केआँसूिगननेकेबजाय कुहड़ और यालेिगनवाकर रखनेपड़तेह और जहाँ कसी आ मा क उदासी को अपनेआँसओुंसेधोनेकेबजाय प ल धुलवाना यादा मह वपणू होता है, जहाँभावना और अ त केसारेतफूान सनुार और बजलीवाल क बात म डूब जातेह, और जहाँदो आँसओुंम डूबतेहुए य य क पकुार शहनाइय क आवाज म डूब जाती हैऔर जस व क आदमी के दय का कण-कण त व त हो जाता है, जस व उसक नस म िसतारेटूटतेह, जस व उसकेमाथेपर आग धधकती है, जस व उसकेिसर पर सेआसमान और पाँव तलेसेधरती हट जाती है, उस समय उसेशाद क सा ड़य का मोल-तोल करना पड़ता है और बाजेवालेको एडवा स पया देना पड़ता है। ऐसी थी उस व च दर क जंदगी और उस जंदगी नेअपना च परू तरह चला दया था। करोड़ तफूान घमुड़ातेहुए उसेनचा रहेथे। वह एक ण भी कह ंनह ंटक पाता था। एक पल भी उसेचैन नह ंथा, एक पल भी वह यह नह ंसोच पाता था क उसकेचार ओर या हो रहा है? वह बहेोशी म, मछूा म मशीन क तरह काम कर रहा था। आवाज थींक उसकेकान सेटकराकर चली जाती थीं, आँसूथेक दय को छूनह ंपातेथे, च उसे फँसाकर खींचेिलयेजा रहा था। बजली सेभी यादा तजे, लय सेभी यादा सश वह खंचा जा रहा था। िसफ एक ओर। शाद का दन। सधुा नेनथुनी पहनी, उसेनह ंमालमू। सधुा नेकोरेकपड़ेपहन,ेउसेनह ंमालमू। सधुा ने चूड़ेपहन,ेउसेनह ंमालमू। घर म गीत हुए, उसेनह ंमालमू। सधुा नेचूहा पजूतेव अपना िसर पटक दया, उसे
नह ंमालमू...वह य नह ंथा, तफूान म उड़ता हुआ एक पीला प ा था जो वा याच म उलझ गया था और झ के उसेनचायेजा रहेथे... और उसेहोश आया तब, जब बनती जबरद ती उसका हाथ पकडक़र खींच लेगयी बारात आनेकेएक दन पहल।ेउस छत पर, जहाँसधुा पड़ रो रह थी, च दर को ढकेलकर चली आयी। च दर केसामनेसधुा थी। सधुा, जससेवह पता नह ं य बचना चाहता था। अपनी आ मा केसघंष स,ेअपने अ त:करण केघाव क कसक सेघबराकर जैसेकोई आदमी एका त कमरेसेभागकर भीड़ म िमल जाता है, भीड़ के िनरथक शोर म अपनेको खो देना चाहता है, बाहर केशोर म अ दर का तफूान भलुा देना चाहता है; उसी तरह च दर पछलेह तेसेसब कुछ भलू गया; उसेिसफ एक चीज याद रहती थी-शाद का ब ध। सबुह सेलकेर सोनेकेव तक वह इतना काम कर डालना चाहता था क उसेएक ण भी बठैनेका मौका न िमल,ेऔर सोनेसेपहलेवह इतना थक जाय,ेइतना चूर-चूर हो जायेक लटेतेह नींद उसेजकड़ लेऔर उसेबहेोश कर दे। लेकन उस व बनती उसे उसकेव मरण- थल सेखींचकर एका त म लेआयी हैजहाँउसक ताकत और उसक कमजोर , उसक प व ता और उसका पाप, उसक मसुकान और उसकेआँस,ूउसक ितभा और उसक व मिृत; उसक सधुा अपनी जंदगी के िचर तन मोड़ पर खड़ अपना सब कुछ लटुा रह थी। च दर को लगा जैसेउसको अभी च कर आ जाएगा। वह अकुलाकर खाट पर बठै गया। शाम थी, सरूज डूब रहा था और दन-भर क तपी हुई छत पर जलती हुई बरसाती केनीचेएक खरहर खाट पर सधुा लटे थी। एक मह न पीली धोती पहन,ेकोर मारक न क कुत , पहन,े खेिचकटेहुए बाल और नाक म बहुत बड़ -सी नथ। प ह दन केआँसओुंनेचेहरेको जानेकैसा बना दया। न चेहरेपर सकुुमारता थी, न कठोरता। न प था, न ताजगी। िसफ ऐसा लगता था क जैसा सधुा का सब कुछ लटु चुका है। न केवल यार और जंदगी लटु है, वरन आवाज भी लटुगयी हैऔर नीरवता भी। वभैव भी लटुगया और याचना भी। सधुा नेअपनेपीलेप लेसेआँसूप छेऔर उठकर बठै गयी। दोन चुप। पहलेकौन बोल!े बनती आयी, च दर और सधुा का खाना रखकर चली गयी। ''खाना खाओगी, सधुा?'' च दर नेपछूा। सधुा कुछ बोली नह ंिसफ िसर हला दया। और डूबतेहुए सरूज और उड़तेहुए बादल क ओर देखकर जाने या सोचनेलगी। च दर नेथाली खसका द और सधुा को अपनी ओर खींचकर बोला, ''सधुा, इस तरह कैसेकाम चलगेा। तुह ंको देखकर तो म अपना धीरज सभँालगँूा, बताओ और तुह ंयह कर रह हो!'' सधुा च दर केपास खसक आयी और दो िमनट तक चुपचाप च दर क ओर फट हुई पथरायी आँख सेदेखती रह और एकदम दय को फाड़ देनेवाली आवाज म चीखकर रो उठ - ''च दर, अब या होगा!'' च दर क समझ म नह ंआया, वह या करे! आँसूउसकेसखू चुकेथे। वह रो नह ंसकता था। उसकेमन पर कह ंकोई प थर रखा था जो आँसओुंक बदँू को बननेकेसाथ ह सोख लतेा था लेकन वह तड़प उठा, ''सधुा!'' वह घबराकर बोला, ''सधुा, तुह हमार कसम है-चुप हो जाओ! चुप... ब कुल चुप...हाँ...ऐसेह !'' सधुा च दर केपाँव म महँु िछपायेथी-''उठकर बठैो ठ क सेसधुा...इतना समझ-बझूकर यह सब करती हो, िछह! तुह अपना दल मजबतू करना चा हए वरना पापा को कतना दखु होगा।'' ''पापा नेतो मझुसेबोलना भी छोड़ दया है, च दर! पापा सेकह दो आज तो बोल ल, कल सेहम उ ह परेशान
करनेनह ंआएगँे, कभी नह ंआएगँे। अब उनक सधुा को सब लेजा रहेह, जानेकहाँलेजा रहेह!'' और फर वह फफक-फफककर रो पड़ । च दर नेबनती सेपापा को बलुवाया। सधुा को रोतेहुए देखकर बनती खड़ हो गयी, ''द द , रोओ मत द द , फर हम कसकेभरोसेरहगेयहाँ?'' और सधुा को चुप करात-ेकरातेबनती भी रोनेलगी। और आँसूप छतेहुए चली गयी। पापा आय।ेसधुा चुप हो गयी और कुछ कहा नह ं, फर रोनेलगी। डॉ टर शुला भरायेगलेसेबोल,े''मझुेयह रोआई अ छ नह ंलगती। यह भावकुता य ? तमु पढ़ -िलखी लड़क हो। इसी दन केिलए तुह पढ़ाया-िलखाया गया था! भावकुता से या फायदा?'' कहत-ेकहतेडॉ टर शुला खुद रोनेलगे। ''चलो च दर यहाँस!ेअभी जनवासा ठ क करवाना है।'' च दर और डॉ टर शुला दोन उठकर चलेगय।े अपनी शाद केपहल,ेहमशेा केिलए अलग होनेसेपहलेसधुा को इतना ह मौका िमला...उसकेबाद... सबुह छह बजेगाड़ आती थी, लेकन खुश क मती सेगाड़ लटे थी; डॉ टर शुला तथा अ य लोग बारात का वागत करनेटेशन पर जा रहेथेऔर च दर घर पर ह रह गया था जनवासेका इ तजाम करन।ेजनवासा बगल म था। माथुर साहब केबगँलेकेदोन हॉल और कमरा खाली करवा िलयेगयेथे। च दर सबुह छह ह बजेआ गया था और जनवासेम सब सामान लगवा दया था। नहानेका पानी और बाक इ तजाम कर वह घर आया। जलपान का इ तजाम तो केदार केहाथ म था लेकन कुछ तौिलयेिभजवानेथे। '' बनती, कुछ तौिलयेिनकाल दो।'' च दर नेबनती सेकहा। बनती उद क दाल धो रह थी। उसनेफौरन उठकर हाथ धोयेऔर कमरेक ओर चली गयी। ''ऐ बनती...'' बआुजी नेभडंारेकेअ दर सेआवाज लगायी-''जानेकहाँमर गयी महँुझ सी! अरेिसगंार-पटार बाद म कर िलयो, काम म तिनक द दा नैलगत।ेबसेन का कन टर कहाँरखा है?'' ''अभी आय!े'' बनती नेच दर सेकहा और अपनी माँकेपास दौड़ , प ह िमनट हो गयेलेकन बनती लौट ह नह ं। याह का घर! हर तरफ सेबनती क पकुार मचती और बनती पखं लगायेउड़ रह थी। जब बनती नह ंलौट तो च दर नेसधुा को ढुँढक़र कहा, ''सधुी, एक बहुत बड़ा-सा तौिलया िनकाल दो।'' सधुा चुपचाप उठ और टड - म म चली गयी। च दर भी पीछे-पीछेगया। ''बठैो, अभी िनकालकर लातेह!'' सधुा नेभर हुई आवाज म कहा और बगल केकमरेम चली गयी। वहाँसे लौट तो उसकेहाथ म मीठेक त तर थी। ''अरेखानेका व नह ंहै, सधुा! आठ बजेलोग आ जाएगँे।'' ''अभी दो घटंेह, खा लो च दर! अब कभी तुहारेकाम म हरजा करकेखानेको नह ंकहूँगी!'' सधुा बोली। च दर चुप।
''याद है, च दर! इसी जगह आँचल म िछपाकर नानखटाई लायी थी। आओ, आज अपनेहाथ सेखला दँ।ूकल ये हाथ परायेहो जाएगँे। और सधुा नेएक इमरती तोडक़र च दर केमहँु म देद । च दर क आँख म दो आँसूछलक आय-ेसधुा नेअपनेहाथ सेआँसूप छ दयेऔर बोली, ''च दर, घर म कोई खानेका खयाल करनेवाला नह ंहै। खात-े पीतेजाना, तुह हमार कसम है। म शाहजहाँपरुसेलौटकर आऊँगी तो दबुलेमत िमलना।'' च दर कुछ बोला नह ं। आँसूबहतेगय,ेसधुा खलाती गयी, वह खाता गया। सधुा नेिगलास म पानी दया, उसनेहाथ धोया और जेब से माल िनकाला। '' य , आज आँचल म हाथ नह ंप छोगे?'' सधुा बोली। च दर नेआँचल हाथ म लेिलया और पलक पर आँचल दबाकर फूट-फूटकर रो पड़ा। ''िछह, च दर! आज तो हम सभँल गयेह, हमनेसब वीकार कर िलया चुपचाप। अब तमु कमजोर मत बनो, तमुनेकहा था, म शा त रहूँतो शा त हो गयी। अब य मझुेभी लाओगे! उठो।'' च दर उठ खड़ा हुआ। सधुा नेएक पान च दर केमहँुम देकर क था उसक कमीज सेलगा दया। च दर कुछ नह ंबोला। ''अरे, आज तो लड़ लो, च दर! आज सेख म कर देना।'' इतनेम बनती तौिलया लेआयी। ''द द , इ ह कुछ खला दो। येखा नह ंरहेह।'' बनती नेकहा। '' खला दया।'' सधुा बोली, ''देखो च दर, आज म नह ंरोऊँगी लेकन एक शत पर। तमु बराबर मरेेसामनेरहना। मडंप म रहोगेन?'' ''हाँ, रहूँगा।'' च दर नेआँसूपीतेहुए कहा। ''कह ंचलेमत जाना! मरे आ खर बनती है।'' सधुा बोली। च दर तौिलया लकेर चला आया। चँूक बारात म कुल आठ ह लोग थेअत: घर क और माथुर साहब क दो ह कार सेकाम चल गया। जब ये लोग आयेतो ना तेका सामान तयैार था और च दर चुपचाप बठैा था। उसनेफौरन सबका सामान लगवाया और सामान रखवाकर वह जा ह रहा था क कैलाश नेपीछेसेक धेपर हाथ रखकर उसेपीछेघमुा िलया और गलेसे लगकर बोला, ''कहाँचलेकपरूसाहब, नम त!ेचलो, पहलेना ता करो।'' और खींचकर वह च दर को लेगया। अपने बगल क मजे पर बठाकर, उसक चाय अपनेहाथ सेबनायी और बोला, ''कुछ नाराज थे या, कपरू? खत का जवाब य नह ंदेतेथे?'' ''हम तो बराबर खत का जवाब देतेरहे, यार!'' कपरूचाय पीतेहुए बोला। ''अ छा तो हम घमूतेरहेइधर-उधर, खत गड़बड़ हो गयेह गे।...लो, समोसा खाओ!'' कैलाश नेकहा। च दर ने िसर हलाया तो बोला, 'अरे, वाह याँ? शाद तुहार नह ंहो रह है, हमार हो रह है, समझे? तमु य तक लफु कर रहेहो। अ छा कपरू...काम तो तुह ंपर होगा सब!'' ''हाँ!'' कपरूबोला।
''बड़ा अफसोस है, यार!'' जब हम लोग पहली दफा िमलेथेतो यह नह ंमालमू था क तमु और डॉ टर साहब इतना अ छा इनाम दोगे, अपनेको बचानेका। हमारेलायक कोई काम हो तो बताओ!'' ''आपक दआु है!'' च दर नेिसर झुकाकर कहा, और सभी हँस पड़े। इतनेम शकंर बाबूडॉ टर साहब केसाथ आयेऔर सब लोग चुप हो गय।े दन भर के यवहार सेच दर नेदेखा क कैलाश भी उतना ह अ छा हँसमखु और शालीन हैजतनेशकंर बाबू थे। वह उसेराजनीितक ेम जतना फौलाद लगा था, घरेलूजंदगी म उतना ह अ छा लगा। च दर का मन खुशी सेनाच उठा। सधुा क ओर सेवह थोड़ा िन त हो गया। अब सधुा िनभा लेजाएगी। वह मौका िनकालकर घर म गया। देखा, सधुा को औरत घरेेहुए बठै ह और महावर लगा रह ह। बनती कन तर म सेघी िनकाल रह थी। च दर गया और बनती क चोट घसीटकर बोला, ''ओ िगलहर , घी पी रह है या?'' बनती नेदंग होकर च दर क ओर देखा। आज तक कभी अ छे-भलेम तो च दर नेउसेनह ंिचढ़ाया था। आज या हो गया? आज जब क पछलेप ह रोज सेच दर केहोठ मसुकराना भलू गयेह। ''आँख फाड़कर या देख रह है? कैलाश बहुत अ छा लड़का है, बहुत अ छा। अब सधुा बहुत सखुी रहेगी। कतना अ छा होगा, बनती! हँसती य नह ंिगलहर !'' और च दर नेबनती क बाँह म चुटक काट ली। ''अ छा! हम द द समझा है या? अभी बताती हूँ।'' और घी भरेहाथ सेच दर क बाँह पकड़कर बनती नेजोर सेघमुा द । च दर नेअपनेको छुड़ाया और बनती को चपत मारकर गुनगुनाता हुआ चला गया। बनती नेकन तर केमहँुपर लगा घी प छा और मन म बोली, 'देवता और कसेकहतेह?' शाम को बारात चढ़ । साद -सी बारात। िसफ एक बड था। कैलाश नेशरेवानी और पायजामा पहना था, और टोपी। िसफ एक माला गलेम पड़ थी और हाथ म कंगन बधँा था। मौर पीछेकसी आदमी केहाथ म था। जयमाला क र म होनेवाली थी। लेकन बआुजी ने प कर दया क हमार लड़क कोई ऐसी-वसैी नह ंक याह केपहलेभर बारात म महँु खोलकर माला पहनाय।ेलेकन घघँूट केमामलेपर सधुा ने ढ़ता सेमना कया था, वह घघँूट ब कुल नह ंकरेगी। अ त म पापा उसेलकेर मडंप म आय।ेघर का काम-काज िनबट गया था। सभी लोग आँगन म बठैेथे। कािमनी, भा, लीला सभी थीं, एक ओर बाराती बठैेथे। सधुा शा त थी लेकन उसका महँु हण केच मा क तरह िन तजे था। मडंप का एक ब ब खराब हो गया था और च दर सामनेखड़ा उसेबदल रहा था। सधुा नेजात-ेजातेच दर को देखा और आँसूप छकर मसुकरानेलगी और मसुकराकर फर आँसूप छनेलगीं। कािमनी, भा, लीला तमाम लड़ कयाँ कैलाश पर फ तयाँकस रह थीं। सधुा िसर झुकायेबठै थी। पापा सेउसनेकहा, '' बनती को हमारेपास भजे दो।'' बनती आकर सधुा केपीछेबठै गयी। कैलाश नेआँख केइशारेसेच दर को बलुाया। च दर जाकर पीछेबठैा तो कैलाश नेकहा, ''यार, यहाँजो लोग खड़ेह इनका प रचय तो बता दो चुपकेस!े'' च दर नेसभी का प रचय बताया। कािमनी, भा, लीला सभी केबारेम जब च दर बता रहा था तो बनती बोली, ''बड़ेलालची मालमू देतेह आप? एक सेस तोष नह ंहै या? वाह रेजीजाजी!'' कैलाश नेमसुकराकर च दर सेपछूा, ''इसका याह तय हुआ क नह ं?''
''हो गया।'' च दर नेकहा। ''तभी बोलनेका अ यास कर रह ह; मडंप म भी इसीिलए बठै ह या?'' कैलाश नेकहा। बनती झप गयी और उठकर चली गयी। संकार शु हुआ। कैलाश केहाथ म ना रयल और उसक मुठ पर सधुा केदोन हाथ। सधुा अब चुप थी। इतनी चुप...इतनी चुप क लगता था उसकेहोठ नेकभी बोलना जाना ह नह ं। संकार केदौरान ह पार प रक वचन का समय आया। कैलाश नेसभी ित ाएँ वयंकह ं। शकंरबाबूनेकहा, लड़क भी िश त हैऔर उसेभी वयंवचन करनेह गे। सधुा नेिसर हला दया। एक अस तोष क लहर-सी बाराितय म फैल गयी। च दर नेबनती को बलुाया। उसकेकान म कहा, ''जाकर सधुा सेकह दो क पागलपन नह ंकरत।ेइससे या फायदा?'' बनती नेजाकर बहुत धीरे सेसधुा केकान म कहा। सधुा नेिसर उठाकर देखा। सामनेबरामदेक सी ढय़ पर च दर बठैा हुआ बड़ा िच तत-सा कभी शकंरबाबूक ओर देखता और कभी सधुा क ओर। सधुा सेउसक िनगाह िमली और वह िसहर-सा उठा, सधुा ण-भर उसक ओर देखती रह । च दर नेजाने या कहा और सधुा नेआँख -ह -आँख म उसे या जवाब देदया। उसकेबाद सधुा नीचेरखेहुए पजूा केना रयल पर लगेहुए िस दरूको देखती रह फर एक बार च दर क ओर देखा। विच -सी थी वह िनगाह, जसम कातरता नह ंथी, क णा नह ंथी, आँसूनह ंथे, कमजोर नह ंथी, था एक ग भीरतम व ास, एक उपमाह न नहे, एक स पणूतम समपण। लगा, जैसेवह कह रह हो-सचमचु तमु कह रहेहो, फर सोच लो च दर...इतने ढ़ हो...इतनेकठोर हो...मझुसेमहँु से य कहलवाना चाहतेहो... या सारा सखु लटूकर थोड़ -सी आ मवचंना भी मरेेपास नह ंछोड़ोगे?...अ छा लो, मरेेदेवता! और उसनेहारकर िसस कय सेसनेवर म अपनेको कैलाश को सम पत कर दया। ित ाएँदोहरा द ंऔर उसकेबाद साड़ का एक छोर खींचकर, नथ क डोर ठ क करनेकेबहानेउसनेआँसूप छ िलय।े च दर नेएक गहर साँस ली और बगल म बठै हुई बआुजी सेकहा, ''बआुजी, अब तो बठैा नह ंजाता। आँख म जैसेकसी नेिमच भर द हो।'' ''जाओ...जाओ, सोय रहो ऊपर, खाट बछ है। कल सबुह दस बजेवदा करेको है। कुछ खायो पयो न,ैतो पड़े रहबो!'' बआु नेबड़े नहेसेकहा। च दर ऊपर गया तो देखा एक खाट पर बनती औधंी पड़ िससक रह है। '' बनती! बनती!'' उसनेबनती को पकडक़र हलाया। बनती फूट-फूटकर रो पड़ । ''उठ पगली, हम तो समझाती है, खुद अपन-ेआप पागलपन कर रह है।'' च दर नेँधेगलेसेकहा। बनती उठकर एकदम च दर क गोद म समा गयी और ददनाक वर म बोली, ''हाय च दर...अब... या...होगा?'' च दर क आँख म आँसूआ गय,ेवह फूट पड़ा और बनती को एक डूबतेहुए सहारेक तरह पकडक़र उसक माँग पर महँु रखकर फूट-फूटकर रो पड़ा। लेकन फर भी सभँल गया और बनती का माथा सहलातेहुए और अपनी िसस कय को रोकतेहुए कहा, ''रो मत पगली!'' धीरे-धीरेबनती चुप हुई। और खाट केपास नीचेछत पर बठै गयी और च दर केघटुन पर हाथ रखकर बोली,
''च दर, तमु आना मत छोड़ना। तमु इसी तरह आतेरहना! जब तक द द ससरुाल सेलौट न आए।ँ'' ''अ छा!'' च दर नेबनती क पीठ पर हाथ रखकर कहा, ''घबरातेनह ं। तमु तो बहादरुलड़क हो न! सब चीज बहादरु सेसहना चा हए। कैसी द द क बहन हो? य ?'' बनती उठकर नीचेचली गयी। च दर लटे रहा। उसक पोर-पोर म दद हो रहा था। नस-नस को जैसेकोई तोड़ रहा हो, खींच रहा हो। ह डय केरेश-ेरेशेम थकान िमल गयी थी लेकन उसेनींद नह आयी। आँगन म परुो हतजी केमं-पाठ का वर और बीच- बीच म आनेवालेकसी बाराती या औरत क आवाज उसकेमन को अ त- य त कर देती थीं। उसक थकान और उसक अशा त ह उसको बार-बार झटकेसेजगा देती थी। वह करवट बदलता, कभी ऊपर देखता, कभी आँख ब द कर लतेा क शायद नींद आ जाए लेकन नींद नह ंह आयी। धीरे-धीरेनीचेका रव भी शा त हो गया। संकार भी समा हुआ। बाराती उठकर चलनेलगेऔर वह आवाज सेयह पहचाननेक कोिशश करनेलगा क अब कौन या कर रहा है। धीरे-धीरेसब शोर शा त हो गया। च दर नेफर करवट बदली और आँख ब द कर ली। धीरे-धीरेएक कोहरा उसकेमन पर छा गया। वह इतना जागा क अब अगर वह आँख भी ब द करता तो जब पलक पतुिलय सेछा जातींतो एक बहुत कड़ुआ दद होनेलगा था। जैस-ेतसैेउसक थोड़ -सी आँख लगी... कसी नेसहसा जगा दया। पलक ब द करनेम जतना दद हुआ था उतना ह पलक खोलनेम। उसनेपलक खोलीं-देखा सामनेसधुा खड़ थी... माँग और माथेम िस दरू, कलाई म कंगन, हाथ म अँगूठयाँ, कड़े, चूड़े, गलेम गहन,ेबड़ -सी नथुनी डोरेके सहारेकान म बधँी हुई, आँख- जनम भाद क घटाओंक गरज खामोश हो रह बरसात-सी हो गयी थी। वह ण-भर पतैानेखड़ रह । च दर उठकर बठै गया! उसका दल इस तरह धडक़ रहा था जैसेकसी केसामने भा य का ठा हुआ देवता खड़ा हो। सधुा कुछ बोली नह ं। उसनेदोन हाथ जोड़ेऔर झुककर च दर केपरै पर माथा टेक दया। च दर नेउसकेिसर पर हाथ रखकर कहा, ''ई र तुहारा सहुाग अटल करे! तमु बहुत महान हो। मझुेतमु पर आज सेगव है। आज तक तमु जो कुछ थी उससेकह ं यादा हो मरेेिलए, सधुा!'' सधुा कुछ बोली नह ं। आँचल सेआँसूप छती हुई पायतानेजमीन पर बठै गयी। और अपनेगलेसेएक बलेेका हार उतारा। उसेतोड़ डाला और च दर केपाँव खींचकर खाट केनीचेजमीन पर रख िलय।े ''अरेयह या कर रह हो, सधुा।'' च दर नेकहा। ''जो मरेेमन म आएगा!'' बहुत मुकल सेँधेगलेसेसधुा बोली, ''मझुेकसी का डर नह ं, तमु जो कुछ दंड दे चुकेहो, उससेबड़ा दंड तो अब भगवान भी नह ंदेसकगे?'' सधुा नेच दर केपाँव पर फूल रखकर उ ह चूम िलया और अपनी कलाई म बधँी हुई एक पुड़या खोलकर उसम सेथोड़ा-सा िस दरूउन फूल पर िछडक़कर, च दर केपाँव पर िसर रखकर चुपचाप रोती रह ।
थोड़ देर बाद उठ और उन फूल को समटेा। अपनेआँचल केछोर म उ ह बाँध िलया और उठकर चली...धीम-े धीमेिन:श द... ''कहाँचली, सधुा?'' च दर नेसधुा का हाथ पकड़ िलया। ''कह ंनह ं!'' अपना हाथ छुड़ातेहुए सधुा नेकहा। ''नह ं-नह ं, सधुा, लाओ येहम रखगे!'' च दर नेसधुा को रोकतेहुए कहा। ''बकेार है, च दर! कल तक, परस तक येजूठेहो जाएगँे, देवता मरेे!'' और सधुा िससकतेहुए चली गयी। एक चमकदार िसतारा टूटा और परूेआकाश पर फसलतेहुए जानेकस ितज म खो गया। दसूरेदन आठ बजेतक सारा सामान टेशन पहुँच गया था। शकंर बाबूऔर डॉ टर साहब पहलेह टेशन पहुँच गयेथे। बाराती भी सब वह ंचलेगयेथे। कैलाश और सधुा को टेशन तक लानेका ज मा च दर पर था। बहुत ज द करत-ेकरातेभी सवा नौ बजेगयेथे। उसनेफर जाकर कहा। कैलाश और सधुा खड़ेहुए थे। पीछेसेनाइन सधुा केिसर पर पखंा रखी थी और बआुजी रोचना कर रह थीं। च दर केज द मचानेपर अ त म उ ह फुरसत िमली और वह आगेबढ़े। मोटर पर सधुा ने य ह पाँव रखा क बनती पाँव सेिलपट गयी और रोनेलगी। सधुा जोर से बलख- बलखकर रो पड़ । च दर नेबनती को छुड़ाया। सधुा पीछेबठैकर खड़क पर महँुरखकर िससकती रह । मोटर चल द । सधुा मडुक़र अपनेघर क ओर देख रह थी। बनती नेहाथ जोड़ेतो सधुा चीखकर रो पड़ । फर चुप हो गयी। टेशन पर भी सधुा ब कुल शा त रह । सधुा और कैलाश केिलए सकेड लास म एक बथ सरु त थी। बाक लोग योढ़ेम थे। शकंर बाबूनेदोन को उस ड बेम पहुँचाया और बोल,े''कैलाश, तमु जरा हमारेसाथ आओ। िम टर कपरू, जरा बहूकेपास आप र हए। म डॉ टर साहब को यहाँभजे रहा हूँ।'' च दर खडक़ केपास खड़ा हो गया। शकंर बाबूका छोटा ब चा आकर अपनी नयी चाची केपास बठै गया और उनक रेशमी चादर सेखेलनेलगा। च दर चुपचाप खड़ा था। सहसा सधुा नेउसकेहाथ पर अपना महेँद लगा हाथ रख दया और धीमेसेकहा, ''च दर!'' च दर नेमडुक़र देखा तो बोली, ''अब कुछ सोचो मत। इधर देखो!'' और सधुा नेजानेकतनेदलुार सेच दर सेकहा, ''देखो, बनती का यान रखना। उसेतुहारेह भरोसेछोड़ रह हूँऔर सनुो, पापा को रात को सोतेव दधू म ओव ट न ज र देदेना। खान-ेपीनेम गड़बड़ मत करना, यह मत समझना क सधुा मर गयी तो फर बना दधू क चाय पीनेलगो। हम ज द सेआ जाएगँे। प मी का कोई खत आयेतो हम िलखना।'' इतनेम डॉ टर साहब और कैलाश आ गय।ेकैलाश क पाटमट केबाथ म म चला गया। डॉ टर साहब आयेऔर सधुा केिसर पर हाथ रखकर बोल,े''बटेा! आज तरे माँहोती तो कतना अ छा होता। और देख, मह न-ेभर म बलुा लगेतझुे! वहाँघबराना मत।'' गाड़ नेसीट द ।
पापा नेकहा, ''बटेा, अब ठ क सेरहना और भावकुता या बचपना मत करना। समझी!'' पापा नेआँख से माल लगा िलया-'' ववाह बहुत बड़ा उ रदािय व है। अब तुहार नयी जंदगी है। अब तक बटे थी, अब बहूहो...।'' सधुा बोली, ''पापा, तुहारा ओव ट न का ड बा शीशेवाली मजे पर है। उसेपी िलया करना और पापा, बनती को गाँव मत भजेना। च दर को अब घर पर ह बलुा लो। तमु अकेलेपड़ गय!ेऔर हम ज द बलुा लनेा...'' गाड नेसीट द । कैलाश नेज द सेडॉ टर साहब केपरैछुए। च दर सेहाथ िमला िलया। सधुा बोली, ''च दर, येपजुा बनती को देना और देखो मरेा नतीजा िनकलेतो तार देना।'' गाड़ चल पड़ । ''अ छा पापा, अ छा च दर...'' सधुा नेहाथ जोड़ेऔर खडक़ पर टककर रोनेलगी। और बार-बार आँसूप छ-प छकर देखनेलगी।... गाड़ लटेफाम केबाहर चली गयी तब च दर मड़ुा। उसकेबदन म पोर-पोर म दद हो रहा था। वह कैसेघर पर पहुँचा उसेमालमू नह ं। दो च दर को ह त-ेभर तक होश नह ंरहा। शाद के दन म उसेएक नशा था जसकेबल पर वह मशीन क तरह काम करता गया। शाद केबाद इतनी भयकंर थकावट उसक नस म कसक उठ क उसका चलना- फरना मुकल हो गया था। वह अपनेघर सेहोटल तक खाना खानेनह ंजा पाता था। बस पड़ा-पड़ा सोता रहता। सबुह नौ बजेसोता; पाँच बजेउठता; थोड़ देर होटल म बठैकर फर वापस आ जाता। चुपचाप छत पर लटेा रहता और फर सो जाता। उसका मन एक उजड़ेहुए नीड़ क तरह था जसम सेवचार, अनभुिूत, प दन और रस केवहंगम कह ंदरूउड़ गये थे। लगता था, जैसेवह सब कुछ भलू गया है। सधुा, बनती, प मी, डॉ टर साहब, रसच, थीिसस, सभी कुछ! येसब चीज कभी-कभी उसकेमन म नाच जातींलेकन च दर को ऐसा लगता क येकसी ऐसी दिुनया क चीज ह जसको वह भलू गया है, जो उसके मिृत-पटल सेिमट चुक है, कोई ऐसी दिुनया जो कभी थी, कह ंथी, लेकन कसी भयकंर जल लय नेजसका कण-कण व त कर दया था। उसक दिुनया अपनी छत तक सीिमत थी, छत केचार ओर क ऊँची द वार और उन चारद वार सेबधँेहुए आकाश केचौकोर टुकड़ेतक ह उसकेमन क उड़ान बधँ गयी थी। उजाला पाख था। पहलेवह लुधक तारेक रोशनी देखता फर धीरे-धीरेचाँद क दिूधया रोशनी सफेद कफन क तरह छा जाती और वह मन म थकेहुए वर जैसेचाँदनी को ओढ़ता हुआ-सा कहता, ''सो जा मरुदे...सो जा।'' छठेदन उसका मन कुछ ठ क हुआ। थकावट, जो एक कचुल क तरह उस पर छायी हुई थी, धीरे-धीरेउतर गयी और उसेलगा जैसेमन म कुछ टूटा हुआ-सा दद कसक रहा है। यह दद य है, कैसा है, यह उसकेकुछ समझ म नह ंआता था। पाँच बजेथेलेकन धूप ब कुल नह ंथी। पीलेउदास बादल क एक झीनी तह नेढलतेहुए आषाढ़ के सरूज को ढँक िलया था। हवा म एक ठंडक आ गयी थी; लगता था क झ के कसी वषा केदेश सेआ रहेह। वह उठा, नहाया और बनती केघर चल पड़ा। डॉ टर शुला लॉन पर हाथ म कताब िलयेटहल रहेथे। पाँच दन म जैसेवह बहुत बढ़ूेहो गयेथे। बहुत झुके हुए-सेिन तजे चेहरा, डबडबायी आँख और चाल म जैसेउ थक गयी हो। उ ह नेच दर का वागत भी उस तरह नह ंकया जैसेपहलेकरतेथे। िसफ इतना बोल,े''च दर, दो दफे ाइवर को भजेकर बलुाया तो मालमू हुआ तमु सो रहेहो। अब अपना सामान यह ंलेआओ।'' और वेबठैकर कताब उलट-पलट कर देखनेलगे। अभी तक वेबढ़ूेथे,
उनका य व त ण था। आज लगता था जैसेउनके य व पर झुरयाँपडऩेलगी ह, उनके य व क कमर भी झुक गयी है। च दर कुछ नह ंबोला। चुपचाप खड़ा रहा। सामनेआकाश पर एक अजब-सी जद छा रह थी। डॉ टर साहब नेकताब ब द क और बोल,े''सनुा है...कॉलजे के सपल आ गयेह। जाऊँजरा उनसेतुहारेबारेम बात कर आऊँ। तमु जाओ, सधुा का खत आया हैबनती केपास।'' ''बआुजी ह?'' च दर नेपछूा। ''नह ं, आज ह सबुह तो गयीं। हम लोग कतना रोकतेरहेलेकन उ ह कह ंऔर चैन ह नह ंपड़ता। बनती को बड़ मुकल सेरोका मन।े'' और डॉ टर साहब गैरेज क ओर चल पड़े। च दर भीतर गया। सारा घर इतना सनुसान था, इतना भयकंर स नाटा क च दर केरोए-ँरोएँखड़ेहो गय।ेशायद मौत केबाद का घर भी इतना नीरव और इतना भयानक न लगता होगा जतना यह शाद केबाद का घर। िसफ रसोई सेकुछ खटपट क आवाज आ रह थी। '' बनती!'' च दर नेपकुारा। बनती चौकेम थी। वह िनकल आयी। बनती को देखतेह च दर दंग हो गया। वह लड़क इतनी दबुली हो गयी थी क जैसेबीमार हो। रो-रोकर उसक आँख सजू गयी थींऔर होठ मोटेपड़ गयेथे। च दर को देखतेह उसनेकड़ाह उतारकर नीचेरख द और बखर हुई लट सधुारकर, आँचल ठ क कर बाहर िनकल आयी। कमरेसेखींचकर एक चौक आँगन म डालकर च दर सेबहुत उदास वर म बोली, ''बैठए!'' ''घर कतना सनूा लग रहा हैबनती, तमु अकेलेकैसेरहती होगी?'' च दर नेकहा। बनती क आँख म आँसू छलछला आय।े '' बनती, रोती य हो? िछह! मझुेदेखो। म कैसेप थर बन गया हूँ। य ? तमु तो इतनी अ छ लड़क हो।'' च दर नेबनती केक धेपर हाथ रखकर कहा। बनती नेआँसूभर पलक च दर क ओर उठायींऔर बड़ेह कातर वर म कहा, ''आप देवता हो सकतेह, लेकन हरेक तो देवता नह ंहै। फर आपनेकहा था आप आएगँेबराबर। पछलेह तेसेआयेभी नह ं। यह भी नह ं सोचा क हमारा या हाल होगा! रोज सबुह-शाम कोई भी आता तो हम दौडक़र देखतेक आप आयेह या नह ं। द द आपक थीं! बस उन तक आपका र ता था। हम तो आपकेकोई नह ंह।'' ''नह ंबनती! इतनेथक गयेथेक हम कह ंआन-ेजानेक ह मत ह नह ंपड़ती थी। बआुजी को जाने य दया तमुन?ेउ ह रोक लतेी!'' च दर नेकहा। ''अरे, वह थींतो रोनेभी नह ंदेती थीं। म दो-तीन दन तक रोयी तो मझु पर बहुत बगड़ ंऔर महरा जन से बोलीं, ''हमनेतो ऐसी लड़क ह नह ंदेखी। बड़ बहन का याह हो गया तो मारेजलन केदन-रात आँसूबहा-बहाकर अमगंल बनाती है। जब बखत आएगा तभी शाद करगेक अभी ह कसी केसाथ िनकाल दँ।ू'' बनती नेएक गहर साँस लकेर कहा, ''आप समझ नह ंसकतेक जंदगी कतनी खराब है। अब तो हमार तबीयत होती हैक मर जाए।ँ अभी तक द द थीं, सहारा दयेरहती थीं। ह मत बधँायेरहती थीं, अब तो कोई नह ंहमारा।'' ''िछह, ऐसी बात नह ंकरत,ेबनती! मह न-ेभर म सधुा आ जाएगी। और माँक बात का या बरुा मानना?''
''आप लड़क होतेतो समझत,ेच दर बाब!ू'' बनती बोली और जाकर एक त तर म ना ता लेआयी, ''लो, द द कह गयी थींक च दर केखान-ेपीनेका खयाल रखना लेकन यह कसको मालमू था क द द केजातेह च दर गैर हो जाएगँे।'' ''नह ंबनती, तमु गलत समझ रह हो। जाने य एक अजीब-सी ख नता मन म आ गयी थी। कुछ करनेक तबीयत ह नह ंहोती थी। आज कुछ तबीयत ठ क हुई तो सबसेपहलेतुहारेह पास आया। बनती! अब सधुा केबाद मरेा हैह कौन, िसवा तुहारे?'' च दर नेबहुत उदास वर म कहा। ''तभी न! उस दन म बलुाती रह गयी और आप यह गय,ेवह गयेऔर आँख सेओझल! मनेतो उसी दन समझ िलया था क अब परुानेच दर बाबूबदल गय।े'' बनती नेरोतेहुए कहा। च दर का मन भर आया था, गलेम आँसूअटक रहेथेलेकन आदमी क जंदगी भी कैसी अजब होती है। वह रो भी नह ंसकता था, माथेपर दखु क रेखा भी झलकनेनह ंदेसकता था, इसिलए क सामनेकोई ऐसा था, जो खुद दखुी था और सधुा क थाती होनेकेनातेबनती को समझाना उसका पहला कत य था। बनती केआँसूरोकनेके िलए वह खुद अपनेआँसूपी गया और बनती सेबोला, ''लो, कुछ तमु भी खाओ।'' बनती नेमना कया तो उसने अपनेहाथ सेबनती को खला दया। बनती चुपचाप खाती रह और रह-रहकर आँसूप छती रह । इतनेम महरा जन आयी। बनती नेचौकेकेकाम समझा दयेऔर च दर सेबोली, ''चिलए, ऊपर चल।'' च दर नेचार ओर देखा। घर का स नाटा वसैा ह था। सहसा उसकेमन म एक अजीब-सी बात आयी। सधुा केसाथ कभी भी कह ंभी वह जा सकता था, लेकन बनती केसाथ छत पर अकेलेजानेम य उसकेअ त:करण नेगवाह नह ं द । वह चुपचाप बठैा रहा। बनती कुछ भी हो, कतनी ह समीप य न हो, बनती सधुा नह ंथी, सधुा नह ंहो सकती थी। ''नह ं, यह ंठ क है।'' च दर बोला। बनती गयी। सधुा का प लेआयी। च दर का मन जानेकैसा होनेलगा। लगता था जैसेअब आँसूनह ं कगे। उसकेमन म िसफ इतना आया क अभी बह र घटंेपहलेसधुा यह ंथी, इस घर क ाण थी; आज लगता हैजैसेइस घर म सधुा थी ह नह ं... आँगन म अँधेरा होनेलगा था। वह उठकर सधुा केकमरेकेसामनेपड़ हुई कोच पर बठै गया और बनती ने ब ी जला द । खत छोटा-सा था- ''डॉ टर च दर बाब,ू या तमु कभी सोचतेथेक तमु इतनी दरूहोगेऔर म तुह खत िलखँूगी। लेकन खैर! अब तो घर म चैन क बसंी बजातेह गे। एक अकेलेम ह काँटे-जैसी खटक रह थी, उसेभी तमुनेिनकाल फका। अब तुह न कोई परेशान करता होगा, न तुहारेपढ़न-ेिलखनेम बाधा पहुँचती होगी। अब तो तमु एक मह नेम दस- बारह थीिसस िलख डालोगे। जहाँदन म चौबीस घटंेतमु आँख केसामनेरहतेथे, वहाँअब तुहारेबारेम एक श द सनुनेकेिलए तड़प
उठती हूँ। कई दफेतबीयत आती हैक जैसेबनती सेतुहारेबारेम बात करती थी वसैेह इनसे(तुहारेिम स)े तुहारेबारेम बात क ँलेकन येतो जानेकैसी-कैसी बात करतेह। और सब ठ क है। यहाँबहुत आजाद हैमझुे। माँजी भी बहुत अ छ ह। परदा ब कुल नह ंकरतीं। अपनेपजूा के सारेबरतन पहलेह दन हमसेमजँवाय।े देखो, पापा का यान रखना। और बनती को जैसेम छोड़ आयी हूँउतनी ह मोट रहे। म मह न-ेभर बाद आकर तुह ंसेबनती को वापस लगँूी, समझे? यह न करना क म न रहूँतो मरेेबजाय बनती को ला- लाकर, कुढ़ा- कुढ़ाकर मार डालो, जैसी तुहार आदत है। चाय यादा मत पीना-खत का जवाब फौरन! तुहार -सधुा।'' च दर नेिच ठ एक बार फर पढ़ , दो बार पढ़ , और बार-बार पढ़ता गया। हलकेहरेकागज पर छोटे-छोटेकाले अ र जानेकैसेलग रहेथे। जाने या कह रहेथे, छोटे-छोटेअथात कुछ उनम अथ था जो श द सेभी यादा ग भीर था। यगु पहलेवयैाकरण नेउन श द केजो अथ िन त कयेथे, सधुा क कलम सेजैसेउन श द को एक नया अथ िमल गया था। च दर बसेधु-सा त मय होकर उस खत को बार-बार पढ़ता गया और कस समय वेछोटे-छोटे नादान अ र उसके दय केचार ओर कवच-जैसेबौ कता और स तलुन केलौह प को चीरकर अ दर बधं गये और दय क धड़कन को मरोडऩा शु कर दया, यह च दर को खुद नह ंमालमू हुआ जब तक क उसक पलक से एक गरम आँसूखत पर नह ंटपक पड़ा। लेकन उसनेबनती सेवह आँसूिछपा िलया और खत मोड़क़र बनती को दे दया। बनती नेखत लकेर रख िलया और बोली, ''अब चिलए खाना खा ली जए!'' च दर इनकार नह ंकर सका। महरा जन नेथाली लगायी और बोली, ''भइया, नीचेअब हन आँगन धोवा जाई, आप जाय केऊपर खाय लवे।'' च दर को मजबरून ऊपर जाना पड़ा। बनती नेखाट बछा द । एक टूल डाल दया। पानी रख दया और नीचे थाली लानेचली गयी। च दर का मन भार हो गया था। यह वह जगह है, वह खाट हैजस पर शाद क रात वह सोया था। इसी केपतैानेसधुा आकर बठै थी अपनेनयेसहुाग म िलपट हुई-सी। यह पर सधुा केआँसूिगरेथे...। बनती थाली लकेर आयी और नीचेबठैकर पखंा करनेलगी। ''हमार तबीयत तो हैह नह ंखानेक , बनती!'' च दर नेभरायेहुए वर म कहा। ''अरे, बना खाय-ेपीयेकैसेकाम चलगेा? और फर आप ऐसा करगेतो हमार या हालत होगी? द द केबाद और कौन सहारा है! खाइए!'' और बनती नेअपनेहाथ सेएक कौर बनाकर च दर को खला दया! च दर खानेलगा। च दर चुप था, वह जाने या सोच रहा था। बनती चुपचाप बठै पखंा झल रह थी। '' या सोच रहेह आप?'' बनती नेपछूा। ''कुछ नह ं!'' च दर नेउतनी ह उदासी सेकहा।
''नह ंबताइएगा?'' बनती नेबड़ेकातर वर सेकहा। च दर एक फ क मसुकान केसाथ बोला, '' बनती! अब तमु इतना यान न रखा करो! तमु समझती नह ं, बाद म कतनी तकलीफ होती है। सधुा ने या कर दया हैयह वह खुद नह ंसमझती!'' ''कौन नह ंसमझता!'' बनती एक गहर साँस लकेर बोली, ''द द नह ंसमझती या हम नह ंसमझत!ेसब समझते ह लेकन जानेमन कैसा पागल हैक सब कुछ समझकर धोखा खाता है। अरेदह तो आपनेखाया ह नह ं।'' वह पड़ू लानेचली गयी। और इस तरह दन कटनेलगे। जब आदमी अपनेहाथ सेआँसूमोल लतेा है, अपन-ेआप दद का सौदा करता है, तब दद और आँसूतकलीफ-देह नह ंलगत।ेऔर जब कोई ऐसा हो जो आपकेदद केआधार पर आपको देवता बनाने केिलए तयैार हो और आपकेएक-एक आँसूपर अपनेसौ-सौ आँसूबखेर दे, तब तो कभी-कभी तकलीफ भी भली मालमू देनेलगती है। लेकन फर भी च दर के दन कैसेकट रहेथेयह वह जानता था। लेकन अकबर केमहल म जलतेहुए द पक को देखकर अगर कसी नेजाड़ेक रात जमनुा केघटुन -घटुन पानी म खड़ेहोकर काट द , तो च दर अगर सधुा के यारे- यारेखत केसहारेसमय काट रहा था तो कोई ता जुब नह ं। अपनेअ ययन म ौढ़, अपनेवचार म उदार होनेकेबावजूद च दर अपने वभाव म ब चा था, जससेजंदगी कुछ भी करवा सकती थी बशत जंदगी को यह आता हो क इस भोल-ेभालेब चेको कैसेबहलावा दया जाय।े बहलावेकेिलए मसुकान ह ज र नह ंहोती ह, शायद आँसओुंसेमन ज द बहल जाता है। बनती केआँसओुं म च दर सधुा क तसवीर देखता था और बहल जाता था। वह रोज शाम को आता और बनती सेसधुा क बात करता, जानेकतनी बात, जानेकैसी बात और बनती केमा यम सेसधुा म डूबकर चला आता था। चँूक सधुा के बना उसका दन कटना मुकल था, एक ण कटना मुकल था इसिलए बनती उसक एक ज रत बन गयी थी। वह जब तक बनती सेसधुा क बात नह ंकर लतेा था, तब तक जैसेवह बचेैन रहता था, तब तक उसक कसी काम म तबीयत नह ंलगती थी। जब तक सधुा सामनेरह , कभी भी उसेयह नह ंमालमू हुआ क सधुा का या मह व हैउसक जंदगी म। आज जब सधुा दरूथी तो उसनेदेखा क सधुा उसक साँस सेभी यादा आव यक थी उसक जंदगी केिलए। लगता था वह एक ण सधुा के बना ज दा नह ंरह सकता। सधुा केअभाव म बनती केमा यम सेवह सधुा को ढूँढ़ता था और जैसेसरूज केडूब जानेपर चाँद सरूज क रोशनी उधार लकेर रात को उ जयारा कर देता हैउसी तरह बनती सधुा क याद सेच दर के ाण पर उ जयार बखेरती रह । च दर बनती को इस तरह अपनी साँस क छाँह म दबुकायेरहा जैसेबनती सधुा का पश हो, सधुा का यार हो। बनती भी च दर केमाथेपर उदासी केबादल देखतेह तड़प उठती थी। लेकन फर भी बनती च दर को हँसा नह ंपायी। च दर का परुाना उ लास लौटा नह ं। साँप का काटा हुआ जैसेलहर लतेा हैवसैेह च दर क नस म फैला हुआ उदासी का जहर रह-रहकर च दर को झकझोर देता था। उन दन दो-दो तीन-तीन दन तक च दर कुछ नह ं करता था, बनती केपास भी नह ंजाता था, बनती केआँसओुंक भी परवाह नह ंकरता था। खाना नह ंखाता था, और अपनेको जतनी तकलीफ हो सकती थी, देता था। फर य ह सधुा का कोई खत आता था, वह उसेचूम लतेा और फर व थ हो जाता था। बनती चाहेजतना करेलेकन च दर क इन भयकंर उदासी क लहर को च दर से
छ न नह ंपायी थी। चाँद कतनी कोिशश य न करे, वह रात को दन नह ंबना सकता। लेकन आदमी हँसता है, दखु-दद सभी म आदमी हँसता है। जैसेहँसत-ेहँसतेआदमी क स नता थक जाती है वसैेह कभी-कभी रोत-ेरोतेआदमी क उदासी थक जाती हैऔर आदमी करवट बदलता है। ता क हँसी क छाँह म कुछ व ाम कर फर वह आँसओुंक कड़ धूप म चल सके। ऐसी ह एक सबुह थी जब क च दर केउदास मन म आ रहा था क वह थोड़ देर हँस भी ल।ेबात य हुई थी क उसेशलेी क एक क वता बहुत पस द आयी थी जसम शलैी नेभारतीय मलयज को स बोिधत कया है। उसने अपना शलेी-क स का थ उठाया और उसेखोला तो वह आम केअचार केदाग सामनेपड़ गयेजो सधुा ने शरारतन डाल दयेथे। बस वह शलेी क क वता तो भलू गया और उसेयाद आ गयी आम क फाँक और सधुा क शरारत सेभर शोख आँख। फर तो एक केबाद दसूर शरारत ाण म उठ-उठकर च दर क नस को गुदगुदानेलगी और च दर उस दन जाने य हँसनेकेिलए याकुल हो उठा। उसेऐसा लगा जैसेसधुा क यह दरू, यह अलगाव सभी कुछ झूठ है। सच तो वेसनुहलेदन थेजो सधुा क शरारत सेमसुकरातेथे, सधुा केदलुार म जगमगातेथे। और कुछ भी हो जाय,ेसधुा उसकेजीवन का एक ऐसा अमर स य हैजो कभी भी डगमगा नह ंसकता। अगर वह उदास होता है, द:ुखी होता हैतो वह गलत है। वह अपनेह आदश को झूठा बना रहा है, अपनेह सपनेका अपमान कर रहा है। और उसी दन सधुा का खत भी आया जसम सधुा नेसाफ-साफ तो नह ंपर इशारेसेिलखा था क वह च दर केभरोसेह कसी तरह दन काट रह थी। उसनेसधुा को एक प िलखा, जसम वह शरारत, वह खझानेक बात थींजो वह हमशेा सधुा सेकरता था लेकन जसेवह पछलेतीन मह नेम भलू गया था। उसकेबाद वह बनती केयहाँगया। बनती अपनी धोती म ोिशया क बले टाँक रह थी। ''लेिगलहर , तरे द द का खत! लाओ, िमठाई खलाओ।'' ''हम काहेको खलाए!ँआप खलाइए जो खलेपड़ेह आज!'' बनती बोली। ''हम! हम य खलाएगँे! यहाँतो सधुा का नाम सनुतेह तबीयत कुढ़ जाती है!'' ''अरेचिलए, आपका घर मरेा देखा है। मझुसेनह ंबन सकतेआप!'' बनती नेमहँु िचढ़ाकर कहा, ''आज बड़ेखुश ह!'' ''हाँ, बनती...'' एक गहर साँस लकेर च दर चुप हो गया, ''कभी-कभी उदासी भी थक जाती है!'' और महँु झुकाकर बठै गया। '' य , या हुआ?'' बनती नेच दर क बाँह म सईु चुभो द -च दर च क उठा। ''हमार श ल देखतेह आपके चेहरेपर महुरम छा जाता है!'' ''अजी नह ं, आपका मखु-मडंल देखकर तो आकाश म च मा भी ल जत हो जाता होगा, ीमती बनती वदषुी!'' च दर नेहँसकर कहा। आज च दर बहुत खुश था। बनती लजा गयी और फर उसकेगाल म फूल केकटोरेखल गयेऔर उसनेच दर केक धेसेफर सईू
चुभोकर कहा, ''आपको एक बड़ेमजेक बात बतानी हैआज!'' '' या?'' '' फर हँिसएगा मत! और िचढ़ाइएगा नह ं!'' बनती बोली। ''कुछ तरेेयाह क बात होगी!'' च दर नेकहा। ''नह ं, याह क नह ं, मे क !'' बनती नेहँसकर कहा और झप गयी। ''अ छा, िगलहर को यह रोग कब सïे?'' च दर नेहँसकर पछूा, ''अपनी माँजी क शकल देखी हैन, काटकर कुएँ म फक दगी तझुे!'' ''अब या कर, कोई िसर पर मे मढ़ ह देतो!'' बनती नेबड़ेआ म व ास सेकहा। थी बड़ खुले वभाव क लड़क । ''आ खर कौन अभागा हैवह! जरा नाम तो सनु।'' च दर बोला। ''हमारेमहाक व मा टर साहब।'' बनती नेहँसकर कहा। ''अ छा, यह कब स!ेतनूेपहलेतो कभी बताया नह ं।'' ''अब तो जाकर हम मालमू हुआ। पहलेसोचा द द को िलख द। फर कहा वहाँजानेकसकेहाथ म िच ठ पड़े। तो सोचा तुह बता द!'' ''हुआ या आ खर?'' च दर नेपछूा। ''बात यह हुई क पहलेतो हम द द केसाथ पढ़तेथेतब तो मा टर साहब कुछ नह ंबोलतेथे, इधर जबसेहम अकेलेपढऩेलगेतब सेक वताएँसमझानेकेबहानेदिुनया-भर क बात करतेरहे। एक बार क दगु पढ़ात-ेपढ़ातेबड़ ठंड साँस लकेर बोल,ेकाश क आप भी देवसनेा बन सकतीं। बड़ा गुसा आया मझुे। मन म आया कह दँूक म तो देवसनेा बन जाती लेकन आप अपना क व स मलेन का पशेा छोड़कर क दगु कैसेबन पाएगँे। लेकन फर मनेकुछ कहा नह ं। द द सेसब बात कह द । द द तो ह ह लापरवाह। कुछ कहा ह नह ंउ ह न।ेऔर मा टर साहब वसैे अ छेह, पढ़ातेभी अ छा ह, लेकन यह फतरूजानेकैसेउनके दमाग म चढ़ गया।'' बनती बड़ेसहज वभाव से बोली। ''लेकन इधर या हुआ?'' च दर नेपछूा। ''अभी कल आय,ेएक हाथ म उनकेएक मोट -सी कॉपी थी। देगयेतो देखा वह उनक क वताओंका संह है और उसका नाम उ ह नेरखा है' बनती'। अभी आतेह गे। या कर कुछ समझ म नह ंआता। अभी तक द द के भरोसेहमनेसब छोड़ दया था। वह पता नह ंकब आएगँी।'' ''अ छा लाओ, वह संह हम देदो।'' च दर नेकहा, ''और बस रया सेकह देना वह च दर केहाथ पड़ गया।
फर कल सबुह तुह मजा दखलाएगँे। लेकन हाँ, यह पहलेबता दो क तुहारा तो कुछ झुकाव नह ंहैउधर, वरना बाद म हम कोसो?'' च दर नेछेड़तेहुए कहा। ''अरेहाँ, मसुलमान भी हो तो बहेना केसगं! क वय सेयार लगाकर कौन बवालत पाल!े'' बनती नेझपतेहुए कहा। दसूरेदन सबुह पहुँचा तो बस रया साहब पढ़ा रहेथे। बस रया क श ल पर कुछ मायसूी, कुछ परेशानी, कुछ िच ता थी। उसको बनती नेबता दया क संह च दर केपास पहुँच गया है। च दर को देखतेह वह बोला, ''अरे कपरू, या हाल है?'' और उसकेबाद अपनेको िनद ष बतानेकेिलए फौरन बोला, ''कहो, हमारा संह देखा है?'' ''हाँदेखा है, जरा आप इ ह पढ़ा ली जए। आपसेकुछ ज र बात करनी ह।'' च दर नेइतनेकठोर वर म कहा क बस रया के दल क धडक़न डूबन-ेसी लगीं। वह काँपती हुई आवाज म बहुत मुकल सेअपनेको स हालतेहुए बोला, ''कैसी बात? कपरू, तमु कुछ गलत समझ रहेहो।'' कपरूएक उपेा क हँसी हँसा और चला गया। डॉ टर साहब पजूा करकेउठेथे। दोन म बात होती रह ं। उनसे मालमू हुआ क अगलेमह नेम स भवत: च दर क िनयु हो जाएगी और तीन दन बाद डॉ टर साहब खुद सधुा को लानेकेिलए शाहजहाँपरुजाएगँे। उ ह नेबआुजी को प िलखा हैक य द वह आ जाएँतो अ छा है, वरना च दर को दो-तीन दन बाद यह ंरहना पड़ेगा य क बनती अकेली है। च दर क बात दसूर हैलेकन और लोग केभरोसे डॉ टर साहब बनती को अकेलेनह ंछोड़ सकत।े अ व ास आदमी क वृय को जतना बगाड़ता है, व ास आदमी को उतना ह बनाता है। डॉ टर साहब च दर पर जतना व ास करतेथे, सधुा च दर पर जतना व ास करती थी और इधर बनती उस पर जतना व ास करनेलगी थी उसकेकारण च दर केच र म इतनी ढ़ता आ गयी थी क वह फौलाद बन गया था। ऐसेअवसर पर जब मनुय को ग भीरतम उ रदािय व स पा जाता हैतब वभावत: आदमी केच र म एक विच -सा िनखार आ जाता है। यह िनखार च दर केच र म बहुत उभरकर आया था और यहाँतक क बआुजी अपनी लड़क पर अ व ास कर सकती थीं, वह भी च दर को देवता ह मानती थीं, बनती पर और चाहेजो ब धन हो लेकन च दर केहाथ म बनती को छोड़कर वेिन त थीं। डॉ टर साहब और च दर बठैेबात कर ह रहेथेक बनती नेआकर कहा, ''चिलए, मा टर साहब आपका इ तजार कर रहेह!'' च दर उठ खड़ा हुआ। रा तेम बनती बोली, ''हमसेबहुत नाराज ह। कहतेह तुह हम ऐसा नह ंसमझतेथे!'' च दर कुछ नह ंबोला। जाकर बस रया केसामनेकुस पर बठै गया। ''तमु जाओ, बनती!'' बनती चली गयी तो च दर नेकहा, बहुत ग भीर वर म, '' बस रया साहब, आपका संह देखकर बहुत खुशी हुई लेकन मरेे मन म िसफ एक शकंा है। यह ' बनती' नाम के या मानेह?'' बस रया नेअपनेगलेक टाई ठ क क , वह गरमी म भी टाई लगाता था, और दन म नाइट कैप पहनता था। टाई ठ क कर, खँखारकर बोला, ''म भी यह समझता था क आपको यह गलत-फहमी होगी। लेकन वा त वक बात यह हैक मझुेम यकाल क क वता बहुत पस द है, खासतौर म उसम बनती ( ाथना) श द बड़ा मधुर है। मनेयह संह तो बहुत पहलेतयैार कया था। मझुेबड़ा ता जुब हुआ जब म बनती सेिमला। मनेउनसेकहा क यह संह
भी बनती नाम का है। फर मनेउ ह लाकर दखला दया।'' च दर मसुकराया और मन-ह -मन कहा, 'हैबस रया बहुत चालाक। लेकन खैर म हार नह ंमान सकता।' और बहुत ग भीर होकर बठै गया। ''तो यह संह इस लड़क केनाम पर नह ंहै?'' '' ब कुल नह ं।'' ''और बनती केिलए आपकेमन म कह ंकोई आकषण नह ं?'' '' ब कुल नह ं। िछह, आप मझुे या समझतेह।'' बस रया बोला। ''िछह, म भी कैसा आदमी हूँ, माफ करना बस रया! मनेयथ म शक कया।'' बस रया यह नह ंजानता था क यह दाँव इतना सफल होगा। वह खुशी सेफूल उठा। सहसा च दर नेएक गहर साँस ली। '' या बात हैच दर बाब?ू'' बस रया नेपछूा। ''कुछ नह ंबस रया, आज तक मझुेतुहार ितभा, तुहार भावना, तुहार कला पर व ास था, आज सेउठ गया।'' '' य ?'' '' य या? अगर बनती-जैसी लड़क केसाथ रहकर भी तमु उसकेआ त रक सौ दय सेअपनी कला को अिभिसिंचत न कर सकेतो तुहारेमन म कला मकता है; यह म व ास नह ंकर पाता। तमु जानतेहो, म परुाने वचार का सकंण, बड़ा बजुुग तो हूँनह ं, म भी भावनाओंको समझता हूँ। म सौ दय-पजूा या यार को पाप नह ं समझता और मझुेतो बहुत खुशी होती यह जानकर क तमुनेयेक वताएँबनती पर िलखी ह, उसक रेणा सेिलखी ह। यह मत समझना क मझुेइससेजरा भी बरुा लगता। यह तो कला का स य है। पा ा य देश म तो लोग हर क व को रेणा देनेवाली लड़ कय क खोज म वष बता देतेह, उसक क वता से यादा मह व उसक क वता केपीछे रहनेवालेय व को देतेह। ह दो तान म पता नह ं य हम नार को इतना मह वह न समझतेह, या डरतेह, या हमम इतना निैतक साहस नह ंहै। तुहारा वभाव, तुहार ितभा कसी हालत म मझुेवदेश के कसी क व सेकम नह ंलगती। मनेसोचा था, जब तमु अपनी क वताओंके रेणा मक य व का नाम घो षत करोगेतो सार दिुनया बनती को और हमारेप रवार को जान जाएगी। लेकन खैर, मनेगलत समझा था क बनती तुहार रेणा- ब दु थी।'' और च दर चुपचाप ग भीरता सेबस रया केसंह केपृउलटनेलगा। बस रया केमन म कतनी उथल-पथुल मची हुई थी। च दर का मन इतना वशाल है, यह उसेकभी नह ंमालमू था। यहाँतो कुछ िछपानेक ज रत ह नह ंऔर जब च दर इतनी प बात कर रहा हैतो बस रया य िछपाय।े ''कपरू, म तमुसेकुछ नह ंिछपाऊँगा। म कह नह ंसकता क बनती जी मरेेिलए या ह। शेस पयर क
िमरा डा, साद क देवसनेा, दाँतेक बीए स, क स क फैनी और सरू क राधा सेबढ़कर माधुय अगर मझुेकह ं िमला हैतो बनती म। इतना, इतना डूब गया म बनती म क एक क वता भी नह ंिलख पाया। मरेा संह छपनेजा रहा था तो मनेसोचा क इसका नाम ह य न ' बनती' रखँू।'' च दर नेबड़ मुकल सेअपनी हँसी रोक । दरवाजेकेपास िछपी खड़ हुई बनती खल खलाकर हँस पड़ । च दर बोला, ''नाम तो ' बनती' बहुत अ छा सोचा तमुन,ेलेकन िसफ एक बात है। मरेेजैसेवचार केलोग सभी नह ंहोत।े अगर घर केऔर लोग को यह मालमू हो गया, मसलन डॉ टर साहब को, तो वह न जाने या कर डालगे। इन लोग को क वता और उसक रेणा का मह व ह नह ंमालमू। उस हालत म अगर तुहार बहुत बइे जती हुई तो न हम कुछ बोल पाएगँेन बनती। डॉ टर साहब पिुलस को स प द, यह अ छा नह ंलगता। वसैेमरे राय हैक तमु बनती ह नाम रखो; बड़ा नया नाम है; लेकन यह समझ लो क डॉ टर साहब बहुत स त ह इस मामलेम।'' बस रया क समझ म नह ंआता था क वह या करे। थोड़ देर तक िसर खुजलाता रहा, फर बोला, '' या राय हैकपरू, तुहार ? अगर म कोई दसूरा नाम रख दँूतो कैसा रहेगा?'' ''बहुत अ छा रहेगा और सरु त रहेगा। अभी अगर तमु बदनाम हो गयेतो आगेतुहार उ नित केसभी माग ब द हो जाएगँे। आदमी मे करेमगर जरा सोच-समझकर; म तो इस प म हूँ।'' ''भावना को कोई नह ंसमझता इस दिुनया म। कोई नह ंसमझता, हम कलाकार क कतनी मसुीबत है।'' एक गहर साँस लकेर बस रया बोला, ''लेकन खैर! अ छा तो कपरू, या राय हैतुहार ? म या नाम रखँूइसका?'' च दर ग भीरता सेिसर झुकायेथोड़ देर तक सोचता रहा। फर बोला, ''तुहार क वताओंम बहुत रस है। कैसा रहेअगर तमु इसका नाम 'गड़ेरयाँ' रखो!'' '' या?'' बस रया ता जुब सेबोला। ''हाँ-हाँगड़ेरयाँ, मरेा मतलब हैग नेक गड़ेरयाँ!'' दरवाजेकेपीछेबनती सेन रहा गया और खल खलाकर हँस पड़ और सामनेआ गयी। च दर भी अ टïहास कर पड़ा। बस रया ण-भर आँख फाड़ेदोन क ओर देखता रहा। उसकेबाद वह य ह मजाक समझा, उसका चेहरा लाल हो गया। हैट उठाकर बोला, ''अ छा, आप लोग मजाक बना रहेथेमरेा। कोई बात नह ं, म देखँूगा। िम टर कपरू, आप अपनेको या समझतेह?'' वह चल दया। ''अरे, सनुो बस रया!'' च दर नेपकुारा, वह हँसी नह ंरोक पा रहा था। बस रया मड़ुा। मड़ुकर बोला, ''कल सेम पढ़ानेनह ंआ सकता। म आपक शकल भी नह ंदेखना चाहता।'' उसनेबनती सेकहा। ''तो महँुफेरकर पढ़ा द जएगा।'' च दर बोला। बनती फर हँस पड़ । बस रया नेमडुक़र बड़ेगुसेसेदेखा और परैपटकतेहुए चला गया। ''बचेारेक व, कलाकार आज क दिुनया म यार भी नह ंकर पात।े'' च दर नेकहा और दोन क हँसी बहुत देर तक गँूजती रह ।
अग त क उदास शाम थी, पानी रम झमा रहा था और डॉ टर शुला केसनूेबगँलेम बरामदेम कुस डाल,े लॉन पर छोटे-छोटेग ढ म पखं धोती और कुलले करती हुई गौरैय क तरफ अपलक देखता हुआ च दर जानेकन खयाल म डूबा हुआ था। डॉ टर साहब सधुा को िलवानेकेिलए शाहजहाँपरुगयेथे। बनती भी जद करकेउनकेसाथ गयी थी। वहाँसेयेलोग द ली घमूनेकेिलए चलेगयेथेलेकन आज प ह रोज हो गयेउन लोग का कोई भी खत नह ंआया था। डॉ टर साहब नेयरूो को महज एक अज भजे द थी। च दर को डॉ टर साहब केजानेकेपहले ह कॉलजे म जगह िमल गयी थी और उसने लास लनेेशु कर दयेथे। वह अब इसी बगँलेम आ गया था। सबुह तो लास केपाठ क तयैार करनेऔर नो स बनानेम कट जाती थी, दोपहर कॉलजे म कट जाती थी लेकन शाम बड़ उदास गुजरती थींऔर फर प ह दन सेसधुा का कोई भी खत नह ंआया। वह उदास बठैा सोच रहा था। लेकन यह उदासी थी, दखु नह ंथा। और वह भी उदासी, एक देवता क उदासी जो दखु भर न होकर सुदर और सकुुमार अिधक होती है। एक बात ज र थी। जब कभी वह उदास होता था तो जाने य वह यह हमशेा सोचनेलगता था क उसकेजीवन म जो कुछ हो गया हैउस पर उसेगव करना चा हए जैसेवह अपनी उदासी को अपनेगव से िमटानेका यास करता था। लेकन इस व एक बात रह-रहकर उभर आती थी उसकेमन म, 'सधुा नेखत य नह ं िलखा?' पानी ब कुल ब द हो गया था। प म केदो-एक बादल खुल गयेथे। और पकेजामनु केरंग केएक बहुत बड़े बादल केपीछेसेडूबतेसरूज क उदास करण झाँक रह थीं। इधर क ओर एक इ धनषु खल गया था जो मोटर गैरेज क छत सेउठकर दरूपर युल टस क ल बी शाख म उलझ गया था। इतनेम छाता लगायेपो टमनै आया, उसनेपो टको म अपनेजूत म लगी क चड़ झाड़ , परैपटकेऔर करिमच केझोलेसेखत िनकालेऔर सीढ़ पर फैला दय।ेउनम सेढूँढ़कर तीन िलफाफेिनकालेऔर च दर को देदय।ेच दर नेलपककर िलफाफेलेिलय।ेपहला िलफाफा बआु का था बनती केनाम, दसूरा था ओ रयटंल इ योरेस का िलफाफा डॉ टर साहब केनाम और तीसरा एक सुदर-सा नीला िलफाफा। यह सधुा का होगा। पो टमनै जा चुका था। उसने इतनेयार सेिलफाफेको चूमा जतनेयार सेडूबता हुआ सरूज नीली घटाओंको चूम रहा था। ''पगली कह ंक ! परेशान कर डालती है। यहाँथी तो वह आदत, वहाँहैतो वह आदत !'' च दर नेमन म कहा और िलफाफा खोल डाला। िलफाफा प मी का था, मसरू सेआया। उसनेझ लाकर िलफाफा फक दया। सधुा कतनी लापरवाह है। वह जानती हैक च दर को यहाँकैसा लग रहा होगा। बनती नेबता दया होगा फर भी वह लापरवाह ! मारेगुसेके... थोड़ देर बाद उसनेप मी का खत पढ़ा। छोटा-सा खत था। प मी अभी मसरू म ह है, अ टूबर तक आएगी। लगभग सभी या ी जा चुकेह लेकन उसेपहाड़ क बरसात बहुत अ छ लग रह है। बट इलाहाबाद चला गया है। उसकेसाथ वहाँसेएक पहाड़ ईसाई लड़क भी गयी है। बट कहता हैक वह उसकेसाथ शाद करेगा। बट अब बहुत व थ है। च दर चाहेतो जाकर बट सेिमल ल।े सधुा केखत केन आनेसेच दर केमन म बहुत बचेैनी थी। उसेठ क सेमालमू भी नह ंहो पा रहा था क ये लोग ह कहाँ? बट केआनेक खबर िमलनेपर उसेस तोष हुआ, चलो एक दन बट सेह िमल आएगँे, अब देख कैसेह वह?
तीसरेया चौथेदन जब अक मात पानी ब द था तो वह कार लकेर बट केयहाँगया। बरसात म इलाहाबाद क िस वल लाइ स का सौ दय और भी िनखर आता है। खे-सखूेफुटपाथ और मदैान पर घास जम जाती है; बगँलेक उजाड़ चहारद वा रय तक हर -भर हो जाती ह। ल बेऔर घनेपड़े और झा डय़ाँिनखरकर, धुलकर हरेमखमली रंग क हो जाती ह और कोलतार क सडक़ पर थोड़ -थोड़ पानी क चादर-सी लहरा उठती हैजसम पड़े क हर छायाएँ बछ जाती ह। बगँलेम पली हुई ब ख केदल सड़क पर चलती हुई मोटर को रोक लतेेह और हर बगँलेम से रेडयो या ामोफोन केसगंीत क लहर मचलती हुई वातावरण पर छा जाती ह। कॉलजे सेलौटकर, एक याला चाय पीकर, कार लकेर च दर बट केयहाँचल दया। वह बहुत दन बाद बट को देखनेजा रहा है। जन य य को उसनेअपनेजीवन म देखा था, बट शायद उन सभी सेिनराला था, अ तु था। लेकन कतना अभागा था। नह ं, अभागा नह ंकमजोर था बट । और वह या कमजोर था यह सार दिुनया कतनी कमजोर है। बट का बगँला आ गया था। वह उतरकर अ दर गया। बाहर कोई नह ंथा। बरामदेम एक पजंरा टँगा हुआ था जसम एक बहुत छोटा तोतेका ब चा टँगा था। च दर भीतर जानेम हचक रहा था य क एक तो प मी नह ंथी और दसूरेकोई और लड़क भी बट केसाथ आयी थी, बट क भावी प ी। च दर नेआवाज द । अ दर कोई बहुत भार पुष- वर म एक साधारण गीत गा रहा था। च दर नेफर आवाज द । बट बाहर आया। च दर उसेदेखकर दंग रह गया, बट का चेहरा भर गया था, जवानी लौट आयी थी, पीलपेन क बजाय चेहरेपर खून दौड़ गया था, सीना उभर आया था। बट खाक रंग का कोट, बहुत मोटा खाक हैट, खाक चेज, िशकार बटूपहनेहुए था और क धेपर ब दकू लटक रह थी। वह आया ाइंग म केदरवाजेपर पीठ झुकाकर एक हाथ सेब दकू पकडक़र और एक हाथ आँख केआगेरखकर उसनेइस तरह देखा जैसेवह िशकार ढूँढ़ रहा हो। च दर के ाण सखू गय।ेउसनेमन-ह -मन सोचा, पहली बार तो वह कुती म बट सेजीत गया था, लेकन अबक बार जीतना मुकल है। कहाँबकेार फँसा आकर। उसनेघबरायी हुई आवाज म कहा- ''यह म हूँिम टर बट , च दर कपरू, प मी का िम !'' ''हाँ-हाँ, म जानता हूँ।'' बट तनकर खड़ा हो गया और हँसकर बोला, ''म आपको भलूा नह ं; म तो आपको यह दखला रहा था क म पागल नह ंहूँ, िशकार हो गया हूँ।'' और उसनेच दर केक धेपकड़कर इतना जोर सेझकझोर दया क च दर क पसिलयाँचरमरा उठ ं। ''आओ!'' उसनेच दर केक धेदबाकर बरामदेक ह कोच पर बठा दया और सामनेकुस पर बठैता हुआ बोला, ''म तुह अ दर लेचलता, लेकन अ दर जेनी हैऔर एक मरेा िम । दोन बात कर रहेह। आज जेनी क सालिगरह है। तमु जेनी को जानतेहो न? वह तराई केक बेम रहती थी। मझुेिमल गयी। बहुत खराब औरत है! म त दुत हो गया हूँन!'' ''बहुत, मझुेता जुब हैक त दुती केिलए तमुने या कया तीन मह नेतक!'' ''नफरत, िम टर कपरू! औरत सेनफरत। उससे यादा अ छा टॉिनक त दुती केिलए कोई नह ंहै।'' ''लेकन तमु तो शाद करनेजा रहेहो, लड़क लेआयेहो वहाँस।े''
''अकेली लड़क नह ं, िम टर! म वहाँसेदो चीज लाया हूँ। एक तो यह तोतेका ब चा और एक जेनी, वह लड़क । तोतेको म बहुत यार करता हूँ, यह बड़ा हो जाएगा, बोलनेलगेगा तो इसेगोली मार दँगूा और लड़क सेम बहुत नफरत करता हूँ, इससेशाद कर लगँूा! य , हैन ठ क? इसको िशकार का चाव कहतेह और अब म िशकार हूँ न!'' च दर हाँकहेया न कहे। अभी बट का दमाग ब कुल वसैा ह है, इसम कोई शक नह ं। वह या बात करे? अ त म बोला- ''यह ब दकू तो उतारकर र खए। हमशेा बाँधेरहतेह!'' ''हाँ, और या? िशकार का पहला िस ा त हैक जहाँखतरा हो, जंगली जानवर ह वहाँकभी बना ब दकू के नह ंजाना चा हए?'' और बहुत धीमेसेच दर केकान म बट बोला, ''तमु जानतेहो च दर, एक औरत हैजो चौबीस घटंेघर म रहती है। म तो एक ण को ब दकू अलग नह ंरखता।'' सहसा अ दर सेकुछ िगरनेक आवाज आयी, कोई चीखा और लगा जैसेकोई चीज पयानो पर िगर और परद को तोड़ती हुई नीचेआ गयी। फर कुछ झगड़ क आवाज आयी। च दर च क उठा, '' या बात हैबट , देखो तो!'' बट नेहाथ पकडक़र च दर को खींच िलया-''बठैो, बठैो! अ दर मरेेिम और जेनी सालिगरह मना रहेह, अ दर मत जाना!'' ''लेकन यह आवाज कैसी ह?'' च दर नेिच ता सेपछूा। ''शायद वेलोग मे कर रहेह गे!'' बट बोला और िन तता सेबठै गया। और ण-भर बाद उसनेअजब-सा य देखा। एक बट का ह हमउ आदमी हाथ सेमाथेका खून प छता हुआ आया। वह नशेम चूर था। और बहुत भ गािलयाँदेता हुआ चला जा रहा था। वह िगरता-पड़ता आया और उसनेबट को देखतेह घसँूा ताना-''तमुनेमझुेधोखा दया। मझुसेपचास पयेउपहार लेिलया...म अभी तुह बताता हूँ।'' च दर त ध था। या करे या न करे? इतनेम अ दर सेजेनी िनकली। ल बी-तगड़ , कम-स-ेकम तीस वष क औरत। उसनेआतेह पीछेसेउस आदमी क कमीज पकड़ और उसेसीढ़ सेनीचेक चड़ म ढकेल दया और सकैड़ गाली देतेहुए बोली, ''जा सीधे, वरना ह ड नह ंबचेगी यहाँ।'' वह फर उठा तो खुद भी नीचेकूद पड़ और घसीटती हुई दरवाजेकेबाहर ढकेल आयी। बट साँस रोकेअपराधी-सा खड़ा था। वह लौट और बट का कालर पकड़ िलया-''म िनद ष हूँ! म कुछ नह ं जानता!'' सहसा जेनी नेच दर क ओर देखा-''हूँ, यह भी तुहारा दो त है। अभी बताती हूँ!'' और जो वह च दर क ओर बढ़ तो च दर नेमन-ह -मन प मी का मरण कया। कहाँफँसाया उस क ब त नेखत िलखकर। य ह जेनी नेच दर का कालर पकड़ा क बट बड़ेकातर वर म बोला, ''उसेछोड़ दो! वह मरेा नह ंप मी का िम है!'' जेनी क गयी। ''तमु प मी केिम हो? अ छा बठै जाओ, बठै जाओ, तमु शर फ आदमी मालमू पड़तेहो। मगर आगेसे
तुहारा कोई िम आया तो म उसक ह या कर डालगँूी। समझेक नह ं, बट ?'' बट नेिसर हलाया, ''हाँ, समझ गय!े'' जेनी अ दर चल द , फर सहसा बाहर आयी और बट को पकडक़र घसीटती हुई बोली, ''पानी बरस रहा है, इतनी सद बढ़ रह हैऔर तमुने वटेर नह ंपहना, चलो पहनो, मरनेक ठानी है। म साफ बतायेदेती हूँचाहेदिुनया इधर क उधर हो जाय,ेम बना शाद कयेमरनेनह ंदँगूी तुह।'' और वह बकरेक तरह बट का कान पकडक़र अ दर घसीट लेगयी। च दर नेमन म कहा, यह कुछ इस रह यमय बगँलेका असर हैक हरेक का दमाग खराब ह मालमू देता है। दो िमनट बाद जब बट लौटा तो उसकेगलेम गुलब द, ऊनी वटेर, ऊनी मोजेथे। वह हाँफता हुआ आकर बठै गया। ''िम टर कपरू! तुह मानना होगा क यह लड़क , यह डाइन जेनी बहुत ूर है।'' ''मानता हूँ, बट ! सोलह आनेमानता हूँ।'' च दर नेमसुकराहट रोककर कहा, ''लेकन यह झगड़ा या है?'' ''झगड़ा या होता है? औरत को समझना बहुत मुकल है।'' ''इस औरत केफ देम फँसेकैसेतमु?'' च दर नेपछूा। ''शी! शी!'' होठ पर हाथ रखकर धीरेबोलनेका इशारा करतेहुए बट नेकहा, ''धीरेबोलो। बात ऐसी हुई क जब म तराई म िशकार खेल रहा था तो एक बार अकेलेछूट गया! यह एक पशनर फॉरेट गाड क अन याह लड़क थी। िशकार म बहुत होिशयार। म भटकतेहुए पहुँचा तो इसका बाप बीमार था। म क गया। तीसरेदन वह मर गया। उसे जानेकौन-सा रोग था क उसका चेहरा बहुत डरावना हो गया था और पटेफूल गया था। रात को इसेबहुत डर लगा तो यह मरेेपास आकर लटेगयी। बीच म ब दकू रखकर हम लोग सो गय।ेरात को इसनेबीच सेब दकू हटा द और अब वह कहती हैक मझुसेयाह करेगी और नह ंक ँगा तो मार डालगेी। प मी भी मझुसेबोली-तुह अब याह करना ह होगा। अब मजबरू है, िम टर कपरू!'' च दर चुप बठैा सोच रहा था, कैसी विच जंदगी हैइस अभागेक ! मानो कृित नेसारेआ य इसी क क मत केिलए छोड़ रखेथे। फर बोला- ''यह आज या झगड़ा था?'' ''कुछ नह ं। आज इसक सालिगरह थी। यह बोली, ''मझुेकुछ उपहार दो।\" म बहुत देर तक सोचता रहा। या दँू इस?े कुछ समझ ह म नह ंआया। बहुत देर सोचनेकेबाद मनेसोचा-म तो इसका पित होनेजा रहा हूँ। इसेएक मेी उपहार म देदँ।ूमनेएक िम सेकहा क तमु मरे भावी प ी सेआज शाम को मे कर सकतेहो? वह राजी हो गया, म लेआया।'' च दर जोर सेहँस पड़ा। ''हँसो मत, हँसो मत, िम टर कपरू!'' बट बहुत ग भीर बनकर बोला, ''इसका मतलब यह हैक तमु औरत को समझतेनह ं। देखो, एक औरत उसी चीज को यादा पस द करती है, उसी के ित समपण करती हैजो उसक जंदगी
म नह ंहोता। मसलन एक औरत हैजसका याह हो गया है, या होनेवाला है, उसेय द एक नया मेी िमल जायेतो उसक स नता का ठकाना नह ंरहता। वह अपनेपित क बहुत कम परवा करेगी अपने मेी केसामन।ेऔर अगर वाँर लड़क हैतो वह अपनेमेी क भावनाओंक परू तौर सेह या कर सकती हैय द उसेएक पित िमल जायेतो! म तो समझता हूँक कोई भी पित अपनी प ी को य द कोई अ छा उपहार देसकता हैतो वह हैएक नया मेी और कोई भी मेी अपनी रानी को य द कोई अ छा उपहार देसकता हैतो वह यह क उसेएक पित दान कर दे। तुहार अभी शाद तो नह ंहुई?'' ''न!'' ''तो तमु मे तो ज र करतेह गे...न, िसर मत हलाओ...म यक न नह ंकर सकता...। म इतनी सलाह तुह दे रहा हूँ, क अगर तमु कसी लड़क सेयार करतेहो तो ई र केवा तेउससेशाद मत करना-तमु मरेा क सा सनु चुकेहो। अगर दल सेयार करना चाहतेहो और चाहतेहो क वह लड़क जीवन-भर तुहार कृत रहेतो तमु उसक शाद करा देना...यह लड़ कय केसेस जीवन का अ तम स य है...! हा! हा! हा!'' बट हँस पड़ा। च दर को लगा जैसेआग क लपट उसेतपा रह है। उसनेभी तो यह कया हैसधुा केसाथ जसेबट कतने विच वर म कह रहा है। उसेलगा जैसेइस ते-लोक म सारा जीवन वकृत दखाई देता है। वहाँसाधना क प व ता भी क चड़ और पागलपन म उलझकर गंद हो जाती है। िछह, कहाँबट क बात और कहाँउसक सधुा... वह उठ खड़ा हुआ। ज द सेवदा माँगकर इस तरह भागा जैसेउसकेपरै केनीचेअंगारेिछपेह । फर उसेनींद नह ंआयी। चैन नह ंआया। रात को सोया तो वह बार-बार च क-सा उठा। उसनेसपना देखा, एक बहुत ब ा कपरूका पहाड़ है। बहुत बड़ा। मलुायम कपरूक बड़ -बड़ च टान और इतनी प व खुशबूक आदमी क आ मा बलेेका फूल बन जाय।ेवह और सधुा उन सौरभ क च टान केबीच चढ़ रहेह। केवल वह हैऔर सधुा...सधुा सफेद बादल क साड़ पहनेहैऔर च दर करन क चादर लपटेेहै। जहाँ-जहाँच दर जाता है, कपरूक च टान पर इ धनषु खल जातेह और सधुा अपनेबादल केआँचल म इ धनषुकेफूल बटोरती चलती है। सहसा एक च टïन हली और उसम सेएक भयकंर ते िनकाला। एक सफेद कंकाल- जसकेहाथ म अपनी खोपड़ और एक हाथ म जलती मशाल और उस मडंुह न कंकाल नेखोपड़ हाथ म लकेर च दर को दखायी। खोपड़ हँसी और बोली, ''देखो, जंदगी का अ तम स य यह है। यह!'' और उसनेअपनेहाथ क मशाल ऊँची कर द । ''यह कपरूका पहाड़, यह बादल क साड़ , यह करन का प रधान, यह इ धनषु केफूल, यह सब झूठेह। और यह मशाल, जो अपनेएक पश म इस सबको पघला देगी।'' और उसनेअपनी मशाल एक ऊँचेिशखर सेछुआ द । वह िशखर धधक उठा। पघलती हुई आग क एक धार बरसाती नद क तरह उमडक़र बहनेलगी। ''भागो, सधुा!'' च दर नेचीखकर कहा, ''भागो!'' सधुा भागी, च दर भागा और वह पघली हुई आग क महानद लहरातेहुए अजगर क तरह उ ह अपनी गंुजिलका म लपटेनेकेिलए चल पड़ । शतैान हँस पड़ा, ''हा! हा! हा!'' च दर नेदेखा, सधुा शतैान क गोद म थी।
च दर च ककर जाग गया। पानी बदं था लेकन घनघोर अँधेरा था। और पशाचनी क तरह पागल हवा पड़े को झकझोर रह थी जैसेयगु केजमेहुए व ास को उखाड़ फकना चाहती हो। च दर काँप रहा था, उसका माथा पसीने सेतर था। वह उठकर नीचेआया। उसकेकदम ठ क नह ंपड़ रहेथे। बरामदेक ब ी जलायी। महरा जन उठ -''का है भइया!'' उसनेपछूा। ''कुछ नह ं, अ दर सोऊँगा।'' च दर नेकहा और सधुा केकमरेम जाकर ब ी जलायी। सधुा क चारपाई पर लटे गया। फर उठा, चार ओर केदरवाजेब द कर दयेक कह ंकोई फर ऐसा सपना बाहर केभयकंर अँधेरेम सेन चला आय।े लेकन बट क बात सेअ दर-ह -अ दर उसकेमन म जानेकहाँ या टूट गया जो फर बन नह ंपाया। अभी तक उसेअपनेपर गव था, व ास था, अब कभी-कभी वह अपनेय व का व ेषण करनेलगा था। अब वह कभी- कभी अपनेव ास पर िसर ऊँचा करनेकेबजाय उ ह सामनेफक देता और एक िनरपे वैािनक क तरह उनक चीर-फाड़ करता, उनक शव-पर ा कया करता। अभी तक उसके व ास का स बल था, अब कसी नेउसेतक का अ -श देदया था। जानेकस रा सी रेणा सेउसनेअपनी आ मा को चीरना शु कया। और इस तक- वतक और अ व ास केभयकंर जल- लय क एक लहर नेउसेएक दन नरक केकनारेलेजा पटका। सधुा का खत आया था। द ली म पापा अपनेकुछ काम से केथेऔर सधुा क तबीयत खराब हो गयी थी। अब वह दो-तीन रोज म आ जाएगी। लेकन च दर केमन पर एक अजब-सा असर हुआ था इस खत का। सधुा का प नह ंआया था, सधुा दरूथी तब वह खुश था, वह उ लिसत था। सधुा का प आतेह सहसा वह उदास हो गया। उदास तो या उसेउबकाई-सी आनेलगी। उसेयह सब सहसा, पता नह ंएक नाटक-सा लगनेलगा था, एक बहुत स ता, नीचे तर का नाटक। उसे लगता था-येसब चार ओर का याग, साधन, सौ दय, यह सब झूठ है। सधुा भी अ ततोग वा वह साधारण लड़क है जो वाँरेजीवन म पित और ववा हत जीवन म मेी क भखूी होती है। वह भी शतैान सेपणूतया हारा नह ंथा। वह लड़नेक कोिशश करता था। लेकन वह हार रहा था, यह भी उसे मालमू था। और च दर के जस गव नेउसक जीत म साथ दया था, वह गव उसक हार म साथ देरहा था। उसने मन म सोच िलया क वह सधुा स,ेसभी लड़ कय स,ेइस सारेनाटक सेनफरत करता है। सधुा का ववाह होना ह था, सधुा को ववाह करना था, सधुा केआँसूझूठेथे, अगर च दर सधुा को न भी समझाता तो घमू- फर सधुा ववाह करती ह । तब फर व ास काहेका? याग काहेका? व ास टूट चुका था, गव जंदा था, गव घमडं म बदल गया था, घमडं नफरत म, और नफरत नस को चूर-चूर कर देनेवाली उदासी म। सधुा जब आयी तो उसनेच दर को ब कुल बदला हुआ पाया। एक बात और हुई जसनेऔर भी आग सलुगा
द । यह लोग दोपहर को एक बजेकेलगभग आयेजब क च दर कॉलजे गया था। पापा तो आतेह नहा-धोकर सोने चलेगय।ेसधुा और बनती नेआतेह अपनेकमरेक सफाई शु क ; कमरेक सार कताब झाड़ ं, कपड़ेठ क कय,ेमजे साफ क ंऔर उसकेबाद कमरा धोनेम लग गयीं। बनती बा ट म पानी भर-भर लानेलगी और सधुा झाड़ूसेफश धोनेलगी। हाथ म चूड़ेअब भी थे, पाँव म बिछया और माँग म िस दरू-चेहरा बहुत पीला पड़ गया था सधुा का; चेहरेक ह डïयाँिनकल आयी थींऔर आँख क रोशनी भी मलैी पड़ गयी थी। वह जाने य कमजोर भी हो गयी थी। झाड़ूलगात-ेलगातेसधुा बनती सेबोली, ''आज मालमू पड़ता हैक म आदमी हूँ! कल तक तो हैवान थी। पापा को भी जाने या सझूा क इ ह भी साथ द ली लेगय।ेम तो शरम सेमर जाती थी।'' थोड़ देर बाद च दर आया। बाहर ह उसेमालमू हो गया था क सब लोग आ गयेह। उसेजाने य ऐसा लग रहा था क वह उलटेलौट जाय,ेवह अगर इस घर म गया तो जानेउससे या अनथ हो जाएगा, लेकन वह बढ़ता ह गया। टड - म म डॉ टर साहब सो रहेथे। वह लौटा और अपनेकपड़ेउतारनेकेिलए ाइंग- म क ओर चला। सधुा ने य ह आहट पायी, वह फौरन झाड़ूफककर भागी, िसर खुला, धोती कमर म खँुसी हुई, हाथ ग दे, बाल बखरेऔर बतेहाशा दौड़कर च दर सेिलपट गयी और ब च क भोली हँसी हँसकर बोली, ''च दर, च दर! हम आ गय,ेअब बताओ!'' और च दर को इस तरह कस िलया क अब कभी छोड़ेगी नह ं। ''िछह, दरूहटो, सधुा! यह या नाटक करती हो! आज तमु ब ची नह ंहो!'' और सधुा को बड़ खाई सेपरे हटाकर अपनेकोट पर सेसधुा केहाथ सेलगी हुई िम ट झाड़तेहुए च दर चुपचाप अपनेकमरेम चला गया। सधुा पर जैसेबजली िगर पड़ हो। वह प थर क तरह खड़ रह । फर जैसेलडख़ड़ाती हुई अपनेकमरेम गयी और चारपाई पर लटेकर फूट-फूटकर रोनेलगी। च दर सधुा सेनह ंह बोला। डॉ टर साहब केजगतेह उनसेबात करनेलगा, शाम को वह साइ कल लकेर घमूनेिनकल गया। लौटकर ऊपर छत पर चला गया और बनती को पकुारकर कहा, ''अगर तकलीफ न हो तो जरा ऊपर खाना देजाओ।'' बनती नेथाली लगायी और सधुा सेकहा, ''लो द द ! दे आओ!'' सधुा नेिसर हलाकर कहा, ''तूह देआ! म अब कौन रह गयी उनक ।'' बनती केबहुत समझानेपर सधुा ऊपर खाना लेगयी। च दर लटेा था गुमसमु। सधुा ने टूल खींचकर खाना रखा। च दर कुछ नह ंबोला। उसनेपानी रखा। च दर कुछ नह ंबोला। ''खाओ न!'' सधुा नेकहा और एक कौर बनाकर च दर को देनेलगी। ''तमु जाओ!'' च दर नेबड़े खे वर म कहा, ''म खा लगँूा!'' सधुा नेकौर थाली म रख दया और च दर केपायतानेबठैकर बोली, ''च दर, तमु य नाराज हो, बताओ हमसे या पाप हो गया है? पछलेडेढ़ मह नेहमनेएक-एक ण िगन-िगनकर काटेह क कब तुहारेपास आए।ँहम या मालमू था क तमु ऐसेहो गयेहो। मझुेजो चाहेसजा देलो लेकन ऐसा न करो। तमु तो कुछ भी नह ंसमझत।े'' और सधुा नेच दर केपरै पर िसर रख दया। च दर नेपरैझटक दय,े''सधुा, इन सब बात सेफायदा नह ंहै। अब इस तरह क बात करना और सनुना म भलू गया हूँ। कभी इस तरह क बात करतेअ छा लगता था। अब तो कसी सोहािगन केमहँुसेयह शोभा नह ंदेता!''
सधुा ितलिमला उठ , ''तो यह बात हैतुहारेमन म! म पहलेसेसमझती थी। लेकन तुह ंनेतो कहा था, च दर! अब तुह ंऐसेकह रहेहो? शरम नह ंआती तुह।'' और सधुा नेहाथ सेयाह वालेचूड़ेउतारकर छत पर फक दय,े बिछया उतारनेलगी-और पागल क तरह फट आवाज म बोली, ''जो तमुनेकहा, मनेकया, अब जो कहोगेवह क ँगी। यह चाहतेहो न!'' और अ त म उसनेअपनी बिछया उतारकर छत पर फक द । च दर काँप गया। उसनेइस य क क पना भी नह ंक थी। '' बनती! बनती!'' उसनेघबराकर पकुारा और सधुा सेबोला, ''अरे, यह या कर रह हो! कोई देखेगा तो या सोचेगा! पहनो ज द स।े'' ''मझुेकसी क परवा नह ं। तुहारा तो जी ठंडा पड़ जाएगा!'' च दर उठा। उसनेजबरद ती सधुा केहाथ पकड़ िलय।े बनती आ गयी थी। ''लो, इ ह चूड़ेतो पहना दो!'' बनती नेचुपचाप चूड़ेऔर बिछया पहना द । सधुा चुपचाप उठ और नीचेचली गयी। च दर अपनी खाट पर िसर झुकायेल जत-सा बठैा था। ''ली जए, खाना खा ली जए।'' बनती बोली। ''म नह ंखाऊँगा।'' च दर नेँधेगलेसेकहा। ''खाइए, वरना अ छ बात नह ंहोगी। आप दोन िमलकर मझुेमार डािलए बस क सा ख म हो जाए। न आप सीधेमहँुसेबोलतेह, न द द । पता नह ंआप लोग को या हो गया है?'' च दर कुछ नह ंबोला। ''खाइए, आपको हमार कसम है। वरना द द खाना नह ंखाएगँी! आपको मालमू नह ं, द द क तबीयत इधर बहुत खराब है। उ ह सबुह-शाम बखुार रहता है। द ली म तबीयत बहुत खराब हो गयी थी। आप ऐसेकर रहेह। बताइए, उनका या हाल होगा। आप समझतेह गेयह बहुत सखुी ह गी लेकन आपको या मालमू!...पहलेआप द द केएक आँसूपर पागल हो उठतेथे, अब आपको या हो गया है?'' च दर नेिसर उठाया-और गहर साँस लकेर बोला, ''जाने या हो गया है, बनती! म कभी नह ंसोचता था क सधुा को म इतना द:ुख देसकँूगा। इतना अभागा हूँक म खुद भी इधर घलुता रहा और सधुा को भी इतना दखुी कर दया। और सचमचु च दर क आँख म आँसूभर आय।े बनती च दर केपीछेखड़ थी। च दर का िसर अपनी छाती म लगाकर आँसूप छती हुई बोली, ''िछह, अब और द:ुखी होइएगा तो द द और भी रोएगँी। ली जए, खाइए!'' ''जाओ, द द को बलुा लो और उ ह भी खला दो!'' च दर नेकहा। बनती गयी। फर लौटकर बोली, ''बहुत रो रह ह। अब आज उनका नशा उतर जानेद जए, तब कल बात क जएगा।'' '' फर सधुा नेन खाया तो?''
''नह ं, आप खा ली जएगा तो वेखा लगी। उनको खलाए बना म नह ंखाऊँगी।'' बनती बोली और अपनेहाथ से कौर बनाकर च दर को देनेलगी। च दर नेखाना शु कया और धीरे-सेगहर साँस-लकेर बोला, '' बनती! तमु हमार और सधुा क उस जनम क कौन हो?'' सबुह केव च दर जब ना ता करनेबठैा तो डॉ टर साहब केसाथ ह बठैा। सधुा आयी और याला रखकर चली गयी। वह बहुत उदास थी। च दर का मन भर आया। सधुा क उदासी उसेकतना ल जत कर रह थी, कतना दखुी कर रह थी। दन-भर कसी काम म उसक तबीयत नह ंलगी। उसने लास छोड़ दय।ेलाइ रे म भी जाकर कताब उलट-पलटकर चला आया। उसकेबाद से गया जहाँउसेअपनी थीिसस छपनेको देनी थी, उसकेबाद ठाकुर साहब केयहाँगया। लेकन कह ंभी वह टक नह ंपाया। जब तक वह सधुा को हँसा न ल,ेसधुा केआँसूसखुा न दे; उसेचैन नह ंिमलगेा। शाम को वह लौटा तो खाना तयैार था। बनती सेउसनेपछूा, ''कहाँहैसधुा?'' ''अपनी छत पर।'' बनती नेकहा। च दर ऊपर गया। पानी परस सेबदं था और बादल भी खुलेहुए थेलेकन तजे परुवयैा चल रह थी। तीज का चाँद शरमीली दुहन-सा बादल म महँु िछपा रहा था। हवा केतजे झकोर पर बादल उड़ रहेथेऔर कचनार बादल म तीज का धनषुाकार चाँद आँखिमचौली खेल रहा था। सधुा नेअपनी खाट बरसाती केबाहर खींच ली थी। छत पर धँुधला अँधेरा था और रह-रहकर सधुा पर चाँदनी केफूल बरस जातेथे। सधुा चुपचाप लटे हुई बादल को देखती हुई जाने या सोच रह थी। च दर गया। च दर को देखतेह सधुा उठ खड़ हुई और उसनेबजली जला द और चुपचाप बठै गयी। च दर बठै गया। वह कुछ भी नह ंबोली। बगल म बछ हुई बनती क खाट पर सधुा बठै गयी। च दर को समझ नह ंआता था क वह या कहे। सधुा को इतना द:ुख दया उसन।ेसधुा उससेकल शाम से बोली तक नह ं। ''सधुा, तमु नाराज हो गयी! मझुेजाने या हो गया था। लेकन माफ नह ंकरोगी?'' च दर नेबहुत काँपती हुई आवाज म कहा। सधुा कुछ नह ंबोली-चुपचाप बादल क ओर देखती रह । ''सधुा?'' च दर नेसधुा केदो कबतूर जैसेउजलेमासमू परै को लकेर अपनी गोद म रख िलया और भरेहुए गलेसेबोला, ''सधुा, मझुेजाने या हो जाता हैकभी-कभी! लगता हैवह पहलेवाली ताकत टूट गयी। म बखर रहा हूँ। तमु आयी और तुहारेसामनेमन का जानेकौन-सा तफूान फूट पड़ा! तमुनेउसका इतना बरुा मान िलया। बताओ, अगर तमु ह ऐसा करोगी तो मझुेसभँालनेवाला फर कौन है, सधुा?'' और च दर क आँख सेएक बदँूआँसूसधुा के पाँव पर चूपड़ा। सधुा नेच ककर अपनेपाँव खींच िलय।ेऔर उठकर च दर क खाट पर बठै गयी और च दर के क धेपर िसर रखकर फूट-फूटकर रो पड़ । बहुत रोयी...बहुत रोयी। उसकेबाद उठ और सामनेबठै गयी। ''च दर! तमुनेगलत नह ंकया। म सचमचु कतनी अपरािधन हूँ। मनेतुहार जंदगी चौपट कर द है। लेकन म या क ँ? कसी नेतो मझुेकोई रा ता नह ंबताया था। अब हो ह या सकता है, च दर! तमु भी बदा त करो और हम भी कर।'' च दर नह ंबोला। उसनेसधुा केहाथ अपनेहोठ सेलगा िलय।े''लेकन म तुह इस तरह बखरने नह ंदँगूी! तमुनेअब अगर इस तरह कया तो अ छ बात नह ंहोगी। फर हम तो बराबर हर पल तुहारेह बारेम
सोचतेरहेऔर तुहार ह बात सोच-सोचकर अपनेको धीरज देतेरहेऔर तमु इस तरह करोगेतो...'' ''नह ंसधुा, म अपनेको टूटनेनह ंदँगूा। तुहारा यार मरेेसाथ है। लेकन इधर मझुेजाने या हो गया था!'' ''हाँ, समझ लो, च दर! तुह हमारेसहुाग क लाज है, हम कतनेदखुी ह, तमु समझ नह ंसकत।ेएक तुह ंको देखकर हम थोड़ा-सा दखु-दद भलू जातेह, सो तमु भी इस तरह करनेलगे! हम लोग कतनेअभागेह!'' और वह फर चुपचाप लटेकर ऊपर देखती हुई जाने या सोचनेलगी। च दर नेएक बार धँुधली रेशमी चाँदनी म मरुझायेहुए सोनजुह केफूल-जैसेमहँुक ओर देखा और सधुा केनरम गुलाबी होठ पर ऊँगिलयाँरख द ं। थोड़ देर वह आँसूम भीगेहुए गुलाब क दखु-भर पखं रय सेउँगिलयाँउलझायेरहा और फर बोला- '' या सोच रह थीं?'' च दर नेबहुत दलुार सेसधुा केमाथेपर हाथ फेरकर कहा। सधुा एक फ क हँसी हँसकर बोली- ''जैसेआज लटे हुई बादल को देख रह हूँऔर पास तमु बठैेहो, उसी तरह एक दन कॉलजे म दोपहर को म और गेसूलटेेहुए बादल को देख रहेथे। उस दन उसनेएक शरेसनुाया था। 'कैफ बरदोश बादल को न देख, बखेबर तूकुचल न जाए कह ं।' उसका कहना कतना सच िनकला! भा य नेकहाँलेजा पटका मझुे!'' '' य , वहाँतुह कोई तकलीफ तो नह ं?'' च दर नेपछूा। ''हाँ, समझतेतो सब यह ह, लेकन जो तकलीफ हैवह म जानती हूँया बनती जानती है।'' सधुा नेगहर साँस लकेर कहा, ''वहाँआदमी भी बनेरहनेका अिधकार नह ं।'' '' य ?'' च दर नेपछूा। '' या बताएँतुह च दर! कभी-कभी मन म आता हैक डूब म ँ। ऐसा भी जीवन होगा मरेा, यह कभी म नह ं सोचती थी।'' सधुा नेकहा। '' या बात है? बताओ न!'' च दर नेपछूा। ''बता दँगूी, देवता! तमुसेभला या िछपाऊँगी लेकन आज नह ं, फर कभी!'' सधुा नेकहा, ''तमु परेशान मत हो। कहाँतमु, कहाँदिुनया! काश क कभी तुहार गोद सेअलग न होती म!'' और सधुा नेअपना महँुच दर क गोद म िछपा िलया। चाँदनी क पखं रयाँबरस पड़ ं। उ लास और रोशनी का मलय पवन फर लौट आया था, फर एक बार च दर, सधुा और बनती के ाण को वभोर कर गया था क सधुा को मह न-ेभर बाद ह जाना हैऔर सधुा भलू गयी थी क शाहजहाँपरुसेभी उसका कोई नाता है। बनती का इ तहान हो गया था और अकसर च दर और सधुा बनती के याह केिलए गहनेऔर कपड़े खर दनेजात।े जंदगी फर खुशी के ह कोर पर झूलनेलगी थी। बनती का याह उतरतेअगहन म होनेवाला था। अब दो-ढाई मह नेरह गयेथे। सधुा और च दर जाकर कपड़ेखर दतेऔर लौटकर बनती को जबरद ती पहनातेऔर गुडय़ा क तरह उसेसजाकर खूब हँसत।ेदोन केबड़े-बड़ेहौसलेथेबनती केिलए। सधुा बनती को सलवार और
चुनी का एक सटे और गरारा और कुरतेका एक सटे देना चाहती थी। च दर बनती को एक ह रेक अँगूठ देना चाहता था। च दर बनती को बहुत नहेकरनेलगा था। वह बनती के याह म भी जाना चाहता था लेकन गाँव का मामला, का यकुज क बारात। शहर म सधुा, बनती और च दर को जतनी आजाद थी उतनी वहाँभला य कर हो सकती थी! फर कहनेवाल क जबान, कोई या कह बठैे! यह सब सोचकर सधुा नेच दर को मना कर दया था। इसीिलए च दर यह ंबनती को जतनेउपहार और आशीवाद देना चाहता था, देरहा था। सधुा का बचपन लौट आया था और दन-भर उसक शरारत और कलका रय सेघर हलता था। सधुा नेच दर को इतनी ममता म डुबो िलया था क एक ण वह च दर को अपनेसेअलग नह ंरहनेदेती थी। जतनी देर च दर घर म रहता, सधुा उसेअपनेदलुार म, अपनी साँस क गरमाई म समटेेरहती थी, च दर केमाथेपर हर ण वह जानेकतना नहे बखेरती रहती थी! एक दन च दर आया तो देखा क बनती कह ंगयी हैऔर सधुा चुपचाप बठै हुई बहुत-सेपरुानेखत को सभँाल रह है। एक ग भीर उदासी का बादल घर म छाया हुआ है। च दर आया। देखा, सधुा आँख म आँसूभरेबठै है। '' या बात है, सधुा?'' '' खसती क िच ठ आ गयी च दर, परस शकंर बाबूआ रहेह।'' च दर के दय क धडक़न पर जैसेकसी नेहथौड़ा मार दया। वह चुपचाप बठै गया। ''अब सब ख म हुआ, च दर!'' सधुा नेबड़ ह क ण मुकान सेकहा, ''अब साल-भर केिलए वदा और उसकेबाद जाने या होगा?'' च दर कुछ नह ंबोला। वह ंलटे गया और बोला, ''सधुा, द:ुखी मत हो। आ खर कैलाश इतना अ छा है, शकंर बाबूइतनेअ छेह। दखु कस बात का? रहा म तो अब म सश रहूँगा। तमु मरेेिलए मत घबराओ!'' सधुा एकटक च दर क ओर देखती रह । फर बोली, ''च दर! तुहारेजैसेसब य नह ंहोत?ेतमु सचमचु इस दिुनया केयो य नह ंहो! ऐसेह बनेरहना, च दर मरेे! तुहार प व ता ह मझुेज दा रख सकेगी वना म तो जस नरक म जा रह हूँ...'' ''तमु उसेनरक य कहती हो! मरे समझ म नह ंआता!'' ''तमु नह ंसमझ सकत।ेतमु अभी बहुत दरूहो इन सब बात स,ेलेकन...'' सधुा बड़ देर तक चुप रह । फर खत सब एक ओर खसका दयेऔर बोली, ''च दर, उनम सबकुछ है। वेबहुत अ छेह, बहुत खुलेवचार केह, मझुे बहुत चाहतेह, मझु पर कह ंसेकोई ब धन नह ं, लेकन इस सारे वग का मोल जो देकर चुकाना पड़ता हैउससेमरे आ मा का कण-कण व ोह कर उठता है।'' और सहसा घटुन म महँुिछपाकर रो पड़ । च दर उठा और सधुा केमाथेपर हाथ रखकर बोला, ''िछह, रोओ मत सधुा! अब तो जैसा है, जो कुछ भी है, बदा त करना पड़ेगा।'' ''कैसेक ँ, च दर! वह इतनेअ छेह और इसकेअलावा इतना अ छा यवहार करतेह क म उनसे या कहूँ? कैसेकहूँ?'' सधुा बोली। ''जानेदो सधुी, जैसी जंदगी हो वसैा िनबाह करना चा हए, इसी म सुदरता है। और जहाँतक मरेा खयाल है
ववैा हक जीवन के थम चरण म ह यह नशा रहता है, फर कसको यह सझूता है। आओ, चलो चाय पीए!ँउठो, पागलपन नह ंकरत।ेपरस चली जाओगी, लाकर नह ंजाना होता। उठो!'' च दर नेअपनेमन क जुगुसा पीकर ऊपर सेबहुत नहेसेकहा। सधुा उठ और चाय लेआयी। च दर नेअपनेहाथ सेएक कप म चाय बनायी और सधुा को पलाकर उसी म पीनेलगा। चाय पीत-ेपीतेसधुा बोली- ''च दर, तमु याह मत करना! तमु इसकेिलए नह ंबनेहो।'' च दर सधुा को हँसाना चाहता था-''चल वाथ कह ंक ! य न क ँ याह? ज र क ँगा! और जनाब, दो-दो क ँगा! अपनेआप तो कर िलया और मझुेउपदेश देरह ह!'' सधुा हँस पड़ । च दर नेकहा- ''बस ऐसेह हँसती रहना हमशेा, हमार याद करकेऔर अगर रोयी तो समझ लो हम उसी तरह फर अशा त हो उठगेजैसेअभी तक थे!...'' फर याला सधुा केहोठ सेलगाकर बोला, ''अ छा सधुी, कभी तमु सनुो क म उतना प व नह ंरहा जतना क हूँतो तमु या करोगी? कभी मरेा य व अगर बगड़ गया, तब या होगा?'' ''होगा या? म रोकनेवाली कौन होती हूँ! म खुद ह या रोक पायी अपनेको! लेकन च दर, तमु ऐसेह रहना। तुह मरेे ाण क सौग ध है, तमु अपनेको बगाडऩा मत।'' च दर हँसा, ''नह ंसधुा, तुहारा यार मरे ताकत है। म कभी िगर नह ंसकता जब तक तमु मरे आ मा म गँुथी हुई हो।'' तीसरेदन शकंर बाबूआयेऔर सधुा च दर केपरै क धूल माथेपर लगाकर चली गयी...इस बार वह रोयी नह ं, शा त थी जैसेवध थल पर जाता हुआ बबेस अपराधी। जब तक आसमान म बादल रहतेह तब तक झील म बादल क छाँह रहती है। बादल केखुल जानेकेबाद कोई भी झील उनक छाँह को सरु त नह ंरख पाती। जब तक सधुा थी, च दर क जंदगी का फर एक बार उ लास और उसक ताकत लौट आयी थी, सधुा केजातेह वह फर सबकुछ खो बठैा। उसकेमन म कोई थािय व नह ंरहा। लगता था जैसेवह एक जलागार हैजो बहुत गहरा है, लेकन जसम हर चाँद, सरूज, िसतारेऔर बादल क छाँह पड़ती हैऔर उनकेचलेजानेकेबाद फर वह उनका ित ब ब धो डालता हैऔर बदलकर फर वसैा ह हो जाता है। कोई भी चीज पानी को रँग नह ंपाती, उसेछूनह ंपाती, हाँ, लहर म उनक छाया का प वकृत हो जाता है। च दर को चार ओर क दिुनया सहज गुजरतेहुए बादल का िन सार तमाशा-सी लग रह थी। कॉलजे क चहल- पहल, ढलती हुई बरसात का पानी, थीिसस और ड ी, बट का पागलपन और प मी केखत-येसभी उसकेसामनेआते और सपन क तरह गुजर जात।ेकोई चीज उसके दय को छून पाती। ऐसा लगता था क च दर एक खोखला य हैजसम िसफ एक सापे अ त:करण मा है, कोई िनरपे आ मा नह ंऔर दय भी जैसेसमा हो गया था। एक जलह न ह केबादल क तरह वह हवा केहर झ केपर तरैरहा था। लेकन टकता कभी भी नह ंथा। उसक भावनाए,ँ
उसका मन, उसक आ मा, उसके ाण, उसका सबकुछ सो गया था और वह जैसेनींद म चल- फर रहा था, नींद म सबकुछ कर रहा था। जानेकेआठ-नौ रोज बाद सधुा का खत आया- ''मरेेभा य! म इस बार तुह जस तरह छोड़ आयी हूँउससेमझुेपल-भर को चैन नह ंिमलता। अपनेको तो बचे चुक , अपने मन केमोती को क चड़ म फक चुक , तुहार रोशनी को ह देखकर कुछ स तोष है। मरेेद पक, तमु बझुना मत। तुह मरेे नहेक लाज है। मरे जंदगी का नरक फर मरेेअंग म िभदना शु हो गया है। तमु कहतेहो क जैसेहो िनबाह करना चा हए। तमु कहतेहो क अगर मनेउनसेिनबाह नह ंकया तो यह तुहारेयार का अपमान होगा। ठ क है, म अपनेिलए नह ं, तुहारेिलए िनबाह क ँगी, लेकन म कैसेसभँालँूअपनेको? दल और दमाग बबेस हो रहेह, नफरत सेमरेा खून उबला जा रहा है। कभी-कभी जब तुहार सरूत सामनेहोती हैतो जैसेअपना सखु-दखु भलू जाती हूँ, लेकन अब तो जंदगी का तफूान जानेकतना तजे होता जा रहा हैक लगता हैतुह भी मझुसेखींचकर अलग कर देगा। लेकन तुह अपनेदेव व क कसम है, तमु मझुेअब अपने दय सेदरून करना। तमु नह ंजानतेक तुहार याद केह सहारेम यह नरक झेलनेम समथ हूँ। तमु मझुेकह ंिछपा लो-म या क ँ, मरेा अंग-अंग मझु पर यंय कर रहा है, आँख क नींद ख म है। पाँव म इतना तीखा दद हैक कुछ कह नह ंसकती। उठत-ेबठैतेच कर आने लगा है। कभी-कभी बदन काँपनेलगता है। आज वह बरेली गयेह तो लगता हैम आदमी हूँ। तभी तुह िलख भी रह हूँ। तमु दखुी मत होना। चाहती थी क तुह न िलखँूलेकन बना िलखेमन नह ंमानता। मरेेअपन!ेतमुनेतो यह सोचकर यहाँभजेा था क इससेअ छा लड़का नह ंिमलगेा। लेकन कौन जानता था क फूल म क ड़ेभी ह गे। अ छा, अब माँजी नीचेबलुा रह ह...चलती हूँ...देखो अपनेकसी खत म इन सब बात का ज मत करना! और इसेफाड़कर फक देना। तुहार अभािगन-सधुी।'' च दर को खत िमला तो एक बार जैसेउसक मूछा टूट गयी। उसनेखत िलया और बनती को बलुाया। बनती हाथ म साग और डिलया िलयेआयी और पास बठै गयी। च दर नेवह खत बनती को देदया। बनती नेपढ़ा और च दर को वापस देदया और चुपचाप तरकार काटनेलगी। वह उठा और चुपचाप अपनेकमरेम चला गया। थोड़ देर बाद बनती चाय लकेर आयी और चाय रखकर बोली, ''आप द द को कब खत िलख रहेह?'' ''म नह ंिलखँूगा!'' च दर बोला। '' य ?'' '' या िलखँूबनती, कुछ समझ म नह ंआता!'' कुछ झ लाकर च दर नेकहा। बनती चुपचाप बठै गयी। थोड़ देर बाद च दर बड़ेमलुायम वर म बोला, '' बनती, एक दन तमुनेकहा था क म देवता हूँ, तुह मझु पर गव है। आज
भी तुह मझु पर गव है?'' ''पहलेसे यादा!'' बनती बोली। ''अ छा, ता जुब है!'' च दर बोला, ''अगर तमु जानती क आजकल कभी-कभी म या सोचता हूँतो तुह ता जुब होता! तमु जानती तो, सधुा केइस खत सेमझुेजरा-सा भी दखु नह ंहुआ, िसफ झ लाहट ह हुई है। म सोच रहा था क य सधुा इतना वाँग भरती हैदखु और अंत का! कस लड़क को यह सब पस द नह ं? कस लड़क के यार म शर र का अंश नह ंहोता? लाख ितभाशािलनी लड़ कयाँह लेकन अगर वेकसी को यार करगी तो उसेअपनी ितभा नह ंदगी, अपना शर र ह दगी और य द वह अ वीकार कर िलया जाय तो शायद ित हंसा से तड़प भी उठगी। अब तो मझुेऐसा लगनेलगा क सेस ह यार है, यार का मुय अंश है, बाक सभी कुछ उसक तयैार है, उसकेिलए एक समिुचत वातावरण और व ास का िनमाण करना है...जाने य मझुेइस सबसेबहुत नफरत होती जाती है। अभी तक म सेस और यार को दो चीज समझता था, यार पर व ास करता था, सेस सेनफरत, अब मझुेदोन ह एक चीज लगती ह और जानेकैसेअ िच-सी हो गयी हैइस जंदगी स।ेतुहार या राय है, बनती?'' ''मरे? अरे, हम ब-ेपढ़े-िलखेआदमी, हम या आपसेबात करगे! लेकन एक बात है। यादा पढऩा-िलखना अ छा नह ंहोता।'' '' य ?'' च दर नेपछूा। ''पढ़न-ेिलखनेसेह आप और द द जाने या- या सोचतेह! हमनेदेहात म देखा हैक वहाँलड़ कयाँसमझती ह क उ ह या करना है। इसिलए कभी इन सब बात पर अपना मन नह ंबगाड़तीं। ब क मनेतो देखा हैसभी शाद केबाद मोट होकर आती ह। और द द अब छोट -सी नह ंक ऐसी उनक तबीयत खराब हो जाय। यह सब मन म घटुनेका नतीजा है। जब यह होना ह हैतो य द द द:ुखी होती ह? उ ह तो और मोट होना चा हए।'' बनती बोली। इस सम या का इतना सरल समाधान सनुकर च दर को हँसी आ गयी। ''अब तमु ससरुाल जा रह हो। मोट होकर आना!'' ''धत,्आप तो मजाक करनेलगे!'' ''लेकन बनती, तमु इस मामलेम बड़ व ान मालमू देती हो। अभी तक यह व ा कहाँिछपा रखी थी?'' ''नह ं, आप मजाक न बनाइए तो म सच बताऊँक देहाती लड़ कयाँशहर क लड़ कय से यादा होिशयार होती ह इन सब मामल म।'' ''सच?'' च दर नेपछूा। वह गाँव क जंदगी को बहेद िनर ह समझता था। ''हाँऔर या? वहाँइतना दरुाव, इतना गोपन नह ंहै। सभी कुछ उनकेजीवन का उ मु है। और याह केपहले ह वहाँलड़ कयाँसबकुछ...''
''अरेनह ं!'' च दर नेबहेद ता जुब सेकहा। ''लो यक न नह ंहोता आपको? मझुेकैसेमालमू हुआ इतना। म आपसेकुछ नह ंिछपाती, वहाँतो सब लोग इसे इतना वाभा वक समझतेह जतना खाना-पीना, हँसना-बोलना। बस लड़ कयाँइस बात म सचेत रहती ह क कसी मसुीबत म न फँस!'' च दर चुपचाप बठै चाय पीता रहा। आज तक वह जंदगी को कतना प व मानता रहा था लेकन जंदगी कुछ और ह है। जंदगी अब भी वह हैजो सृ केआर भ म थी...और दिुनया कतनी चालाक है! कतनी भलुावा देती है! अ दर सेमन म जहर िछपाकर भी होठ पर कैसी अमतृमयी मसुकान झलकाती रहती है! यह बनती जो इतनी शा त, सयंत और भोली लगती थी, इसम भी सभी गुन भरेह। इस दिुनया म? च दर नेजंदगी को परखनेम कतना बड़ा धोखा खाया है।... जंदगी यह है-मांसलता और यास और उसकेसाथ-साथ अपनेको िछपानेक कला। वह बठैा-बठैा सोचता रहा। सहसा उसनेपछूा- '' बनती, तमु भी देहात म रह हो और सधुा भी। तमु लोग क जंदगी म वह सब कभी आया?'' बनती ण-भर चुप रह , फर बोली, '' य , या नफरत करोगेसनुकर!'' ''नह ंबनती, जतनी नफरत और अ िच दल म आ गयी हैउससे यादा आ सकती हैभला! बताना चाहो तो बता दो। अब म जंदगी को समझना चाहता हूँ, वा त वकता के तर पर!'' च दर नेग भीरता सेपछूा। ''मनेआपसेकुछ नह ंिछपाया, न अब िछपाऊँगी। पता नह ं य द द सेभी यादा आप पर व ास जमता जा रहा है। सधुा द द क जंदगी म तो यह सब नह ंआ पाया। वेबड़ विच -सी थीं। सबसेअलग रहती थींऔर पढ़तीं और कमल केपोखरेम फूल तोड़ती थीं, बस! मरे जंदगी म...'' च दर नेचाय का याला खसका दया। जानेकस भाव सेउसनेबनती केचेहरेक ओर देखा। वह शा त थी, िन वकार थी और बना कसी हचक केकहती जा रह थी। च दर चुप था। बनती नेअपनेपाँव सेच दर केपाँव क उँगिलयाँदबातेहुए पछूा, '' या सोच रहेह आप? सनु रहेह आप?'' ''जानेदो, म नह ंसनुगँूा। लेकन तमु मझु पर इतना व ास य करती हो?'' च दर नेपछूा। ''जाने य ? यहाँआकर मनेद द केसाथ आपका यवहार देखा। फर प मी वाली घटना हुई। मरेेतन-मन म एक विच -सी ा आपकेिलए छा गयी। जानेकैसी अ िच मरेेमन म दिुनया केिलए थी, आपको देखकर म फर व थ हो गयी।'' ''ता जुब है! तुहारेमन क अ िच दरू हो गयी दिुनया के ित और मरेेमन क अ िच बढ़ गयी। कैसे अ त वरोध होतेह मन क ित याओंम! एक बात पछूूँ, बनती! तमु मरेेइतनेसमीप रह हो। सकैड़ बार ऐसा हुआ होगा जो मरेेवषय म तुहारेमन म शकंा पदैा कर देता, तमु सकैड़ बार मरेेिसर को अपनेव पर रखकर मझुे
सा वना देचुक हो। तमु मझुेबहुत यार हो, लेकन तमु जानती हो म तुह यार नह ंकरता हूँ, फर यह सब या है, य है?'' बनती चुप रह -''पता नह ं य है? मझुेइसम कभी कोई पाप नह ंदखा और कभी दखा भी तो मन नेकहा क आप इतनेप व ह, आपका च र इतना ऊँचा हैक मरेा पाप भी आपको छूकर प व हो जाएगा।'' ''लेकन बनती...'' ''बस?'' बनती नेच दर को टोककर कहा, ''इससेअिधक आप कुछ मत पिूछए, म हाथ जोड़ती हूँ!'' च दर चुप हो गया। च दर जतना सलुझानेका यास कर रहा था, चीज उतनी ह उलझती जा रह थीं। सधुा नेजंदगी का एक प च दर केसामनेरखा था। बनती उसेदसूर दिुनया म खींच लायी। कौन सच है, कौन झूठ? वह कसका ितर कार करे, कसको वीकार करे। अगर सधुा गलती पर हैतो च दर का ज मा है, च दर नेसधुा क ह या क है...लेकन कतनी िभ न ह दोन बहन! बनती कतनी यावहा रक, कतनी यथाथ, सयंत और सधुा कतनी आदश, कतनी क पनामयी, कतनी सूम, कतनी ऊँची, कतनी सकुुमार और प व । जीवन क सम याओंकेअ त वरोध म जब आदमी दोन प को समझ लतेा हैतब उसकेमन म एक ठहराव आ जाता है। वह भावना सेऊपर उठकर व छ बौ क धरातल पर जंदगी को समझनेक कोिशश करनेलगता है। च दर अब भावना सेहटकर जंदगी को समझनेक कोिशश करनेलगा था। वह अब भावना सेडरता था। भावना के तफूान म इतनी ठोकर खाकर अब उसनेबु क शरण ली थी और एक पलायनवाद क तरह भावना सेभाग कर बु क एकांिगता म िछप गया था। कभी भावकुता सेनफरत करता था, अब वह भावना सेह नफरत करनेलगा था। इस नफरत का भोग सधुा और बनती दोन को ह भगुतना पड़ा। सधुा को उसनेएक भी खत नह ंिलखा और बनती से एक दन भी ठ क सेबात नह ंक । जब भावना और सौ दय केउपासक को बु और वा त वकता क ठेस लगती हैतब वह सहसा कटुता और यंय सेउबल उठता है। इस व च दर का मन भी कुछ ऐसा ह हो गया था। जानेकतनेजहर लेकाँटेउसक वाणी म उग आयेथे, ज ह वह कभी भी कसी को चुभानेसेबाज नह ंआता था। एक िनमम िनरपेता सेवह अपनेजीवन क सीमा म आनेवालेहर य को कटुता केजहर सेअिभ ष करता चलता था। सधुा को वह कुछ िलख नह ंसकता था। प मी यहाँथी नह ं, ल-ेदेकर बची अकेली बनती जसेइन जहर लेवाण का िशकार होना पड़ रहा था। िसत बर बीत रहा था और अब वह गाँव जानेक तयैार कर रह थी। डॉ टर साहब नेदस बर तक क छुट ली थी और वे भी गाँव जानेवालेथे। शाद केमह न-ेभर पहलेसेउनका जाना ज र था। च दर खुश नह ंथा, नाराज नह ंथा। एक वग देवदतू जसेपशाच नेखर द िलया हो, उ ह ंक तरह वह जंदगी केसखु-द:ुख को ठोकर मारता हुआ कनारेखड़ा सभी पर हँस रहा था। खास तौर सेनार पर उसकेमन का सारा जहर बखरनेलगा था और उसम उसेयह भी अकसर यान नह ंरहता था क वह कससे या बात कर रहा है। बनती सबकुछ चुपचाप सहती जा रह थी, बनती को सधुा क तरह रोना नह ंआता था; न उसक च दर इतनी परवा
ह करता था जतनी सधुा क । दोन म बात भी बहुत कम होती थीं, लेकन बनती मन-ह -मन द:ुखी थी। वह या करे! एक दन उसनेच दर केपरैपकड़कर बहुत अननुय सेकहा-''आपको यह या होता जा रहा है? अगर आप ऐसे ह करगेतो हम द द को िलख दगे!'' च दर बड़ भयावनी हँसी हँसा-''द द को या िलखोगी? मझुेअब उसक परवा नह ं। वह दन गय,ेबनती! बहुत बन िलयेहम।'' ''हाँ, च दर बाब,ूआप लड़क होतेतो समझत!े'' ''सब समझता हूँम, कैसा दोहरा नाटक खेलती ह लड़ कयाँ! इधर अपराध करना, उधर मखु बर करना।'' बनती चुप हो गयी। एक दन जब च दर कॉलजे सेआया तो उसकेिसर म दद हो रहा था। वह आकर चुपचाप लटेगया। बनती नेआकर पछूा तो बोला, '' य , य म बतलाऊँक या है, तमु िमटा दोगी?'' बनती नेच दर केिसर पर हाथ रखकर कहा, ''च दर, तुह या होता जा रहा है? देखो कैसी ह डयाँिनकल आयी ह इधर। इस तरह अपनेको िमटानेसे या फायदा?'' ''िमटानेस?े'' च दर उठकर बठै गया-''म िमटाऊँगा अपनेको लड़ कय केिलए? िछह, तमु लोग अपनेको या समझती हो? या हैतमु लोग म िसवा एक नशीली मांसलता के? इसकेिलए म अपनेको िमटाऊँगा?'' बनती नेच दर को फर िलटा दया। ''इस तरह अपनेको धोखा देनेसे या फायदा, च दर बाब?ू म जानती हूँद द केन होनेसेआपक जंदगी म कतना बड़ा अभाव है। लेकन...'' ''द द केन होनेपर? या मतलब हैतुहारा?'' ''मरेा मतलब आप खूब समझतेह। म जानती हूँ, द द होतींतो आप इस तरह न िमटातेअपनेको। म जानती हूँ द द केिलए आपकेमन म या था?'' बनती नेिसर म तले डालतेहुए कहा। ''द द केिलए या था?'' च दर हँसा, बड़ विच हँसी-''द द केिलए मरेेमन म एक आदशवाद भावकुता थी जो अधकचरेमन क उपज थी, एक ऐसी भावना थी जसकेऔिच य पर ह मझुेव ास नह ं, वह एक सनक थी।'' ''सनक!'' बनती थोड़ देर तक चुपचाप िसर म तले ठ कती रह । फर बोली, ''अपनी साँस सेबनायी देवमिूत पर इस तरह लात तो न मा रए। आपको शोभा नह ंदेता!'' बनती क आँख म आँसूआ गय,े'' कतनी अभागी ह द द !'' च दर एकटक बनती क ओर देखता रहा और फर बोला, ''म अब पागल हो जाऊँगा, बनती!'' ''म आपको पागल नह ंहोनेदँगूी। म आपको छोडक़र नह ंजाऊँगी।'' ''मझुेछोडक़र नह ंजाओगी!'' च दर फर हँसा-''जाइए आप! अब आप ीमती बनती होनेवाली ह। आपका याह होगा। म पागल हो रहा हूँ, इससे या हुआ? इन सब बात सेदिुनया नह ं कती, शहनाइयाँनह ंबदं होतीं, ब दनवार
नह ंतोड़ेजात!े'' ''म नह ंजाऊँगी च दर अभी, तमु मझुेनह ंजानत।ेतुहार इतनी ताड़ना और यंय सहकर भी तुहारेपास रह , अब दिुनया-भर क लांछना और यंय सहकर तुहारेपास रह सकती हूँ।'' बनती नेतीखे वर म कहा। '' य ? तुहारेरहनेसे या होगा? तमु सधुा नह ंहो। तमु सधुा नह ंहो सकती! जो सधुा हैमरे जंदगी म, वह कोई नह ंहो सकता। समझीं? और मझु पर एहसान मत जताओ! म मर जाऊँ, म पागल हो जाऊँ, कसी का साझा! य तमु मझु पर इतना अिधकार समझनेलगीं-अपनी सवेा केबल पर? म इसक र ी-भर परवा नह ंकरता। जाओ, यहाँस!े'' और उसनेबनती को धकेल दया, तले क शीशी उठाकर बाहर फक द । बनती रोती हुई चली गयी। च दर उठा और कपड़ेपहनकर बाहर चल दया, ''हूँ, येलड़ कयाँसमझती ह अहसान कर रह ह मझु पर!'' बनती केजानेक तयैार हो गयी थी और िलया- दया जानेवाला सारा सामान पकै हो रहा था। डॉ टर साहब भी मह न-ेभर क छुट लकेर साथ जा रहेथे। उस दन क घटना केबाद फर बनती च दर सेब कुल ह नह ंबोली थी। च दर भी कभी नह ंबोला। येलोग कार पर जानेवालेथे। सारा सामान पीछे-आगेलादा जानेवाला था। डॉ टर साहब कार लकेर बाजार गये थे। च दर उनका हो डॉल सभँाल रहा था। बनती आयी और बोली, ''म आपसेबात कर सकती हूँ?'' ''हाँ, हाँ! तमु उस दन क बात का बरुा मान गयीं! अममून लड़ कयाँस ची बात का बरुा मान जाती ह! बोलो, या बात है?'' च दर नेइस तरह कहा जैसेकुछ हुआ ह न हो। बनती क आँख म आँसूथे, ''च दर, आज म जा रह हूँ!'' ''हाँ, यह तो मालमू है, उसी का इ तजाम कर रहा हूँ!'' ''पता नह ंमने या अपराध कया च दर क तुहारा नहे खो बठै। ऐसा ह था च दर तो आतेह आतेइतना नहेतमुनेदया ह य था?...म तमुसेकभी भी द द का थान नह ंमाँग रह थी...तमुनेमझुेगलत य समझा?'' ''नह ं, बनती! म अब नहे इ या द पस द नह ंकरता हूँ। पणू प रप व मनुय हूँऔर येसब भावनाएँअब अ छ नह ंलगतींमझुे। नहेवगैरह क दिुनया अब मझुेबड़ उथली लगती है!'' ''तभी च दर! इतनेदन मनेरोत-ेरोतेबताय।ेतमुनेएक बार पछूा भी नह ं। जंदगी म िसवा द द और तुहारे, कौन था? तमुनेमरेेआँसओुंक परवा नह ंक । तुह कसरूनह ंदेती; कसरूमरेा ह होगा, च दर!'' ''नह ं, कसरूक बात नह ंबनती! औरत केरोनेक कहाँतक परवा क जाए, वेकुे, ब ली तक केिलए उतने ह द:ुख सेरोती ह।'' ''खैर, च दर! ई र करेतमु जीवन-भर इतनेमजबतू रहो। मनेअगर कभी तुहारेिलए कुछ कया, वसैेकया भी या, लेकन अगर कुछ भी कया तो िसफ इसिलए क मरेेमन क जानेकतनी ममता तमुनेजीत ली, या म हमशेा
इस बात केिलए पागल रहती थी क तुह जरा-सी भी ठेस न पहुँचे, म या कर डालँूतुहारेिलए। तमुन,ेतुहारे य व नेमझुेजादूम बाँध िलया था। तमु मझुसेकुछ भी करनेकेिलए कहतेतो म हचक नह ंसकती थी-लेकन खैर, तुह मरे ज रत नह ंथी। तमु पर भार हो उठती थी म। मनेअपनेको खींच िलया, अब कभी तुहारेजीवन म आनेका साहस नह ंक ँगी। यह भी कैसेकहूँक कभी तुह मरे ज रत पड़ेगी। म जानती हूँक तुहारेतफूानी य व केसामनेम बहुत तुछ हूँ, ितनकेसेभी तुछ। लेकन आज जा रह हूँ, अब कभी यहाँआनेका साहस न क ँगी। लेकन या चलतेव आशीवाद भी न दोगे? कुछ आगेका रा ता न बताओगे?'' बनती नेझुककर च दर केपरैपकड़ िलयेऔर िससक-िससककर रोनेलगी। च दर नेबनती को उठाया और पास क कुस पर बठा दया और िसर पर हाथ रखकर बोला, ''आशीवाद देवताओंसेमाँगा जाता है। म अब ते हो चुका हूँ, बनती!'' च दर अब एका त चाहता था और वह च दर को िमल गया था। परूा घर खाली, एक महरा जन, माली और नौकर। और सारेघर म िसफ स नाटा और उस स नाटेका ते च दर। च दर चाहेजतना टूट जाय,ेचाहेजतना बखर जाय,ेलेकन च दर हारनेवाला नह ंथा। वह हार भी जायेलेकन हार वीकार करना उसेनह ंआता था। उसके मन म अब स नाटा था, अपनेमन केपजूागहृ म था पत सधुा क पावन, ांजल देवमिूत को उसनेकठोरता से उठाकर बाहर फक दया था। म दर क मिूतमयी प व ता, बनती को अपमािनत कर दया था और म दर केपजूा- उपकरण को, अपनेजीवन केआदश और मानदंड को उसनेचूर-चूर कर डाला था, और बतुिशकन वजेता क तरह ूरता सेहँसतेहुए म दर केभ नावशषे पर कदम रखकर चल रहा था। उसका मन टूटा हुआ खँडहर था जसके उजाड़, बछेत कमर म चमगादड़ बसरेा करतेह और जसके वसंावशषे पर िगरिगट पहरा देतेह। काश क कोई उन खँडहर क ट उलटकर देखता तो हर प थर केनीचेपजूा-म िससकतेहुए िमलत,ेहर धूल क पत म घंटय क बहेोश विनयाँिमलतीं, हर कदम पर मरुझायेहुए पजूा केफूल िमलतेऔर हर शाम-सवरेेभ न देवमिूत का क ण दन द वार पर िसर पटकता हुआ िमलता...लेकन च दर ऐसा-वसैा दुमन नह ंथा। उसनेम दर को चूर-चूर कर उस पर अपनेगव का पहरा लगा दया था क कभी भी कोई उस पर खँडहर केअवशषे कुरेदकर परुानेव ास, परुानी अनभुिूतयाँ, परुानी पजूाएँफर सेन जगा दे। बतुिशकन तो म दर तोडऩेकेबाद सारा शहर जला देता है, ता क शहर वालेफर उस म दर को न बना पाए-ँऐसा था च दर। अपनेमन को सनुसान कर लनेेकेबाद उसनेअपनी जंदगी, अपना रहन-सहन, अपना मकान और अपना वातावरण भी सनुसान कर िलया था। अगहन आ गया था, लेकन उसके चार ओर जेठ क दपुहर सेभी भयानक स नाटा था। बनती जब सेगयी उसनेकोई खत नह ंभजेा था। सधुा केभी प ब द हो चुकेथे। प मी केदो खत आय।े प मी आजकल द ली घमू रह थी, लेकन च दर नेप मी को कोई जवाब नह ंदया। अकेला...अकेला... ब कुल अकेला...सहारा म थल क नीरस भयावनी शा त और वह भी जब तक क काँपता हुआ लाल सरूज बालूके ितज पर अपनी आ खर साँस तोड़ रहा हो और बालूकेट ल क अधमर छायाएँलहरदार बालूपर धीरे-धीरेरग रह ह । बनती के याह को प ह दन रह गयेथेक सधुा का एक प आया... ''मरेेदेवता, मरेेनयन, मरेेपथं, मरेे काश!
आज कतनेदन बाद तुह खत िलखनेका मौका िमल रहा है। सोचा था, बनती के याह केमह न-ेभर पहलेगाँव आ जाऊँगी तो एक दन केिलए तुह आकर देख जाऊँगी। लेकन इरादेइरादेह और जंदगी जंदगी। अब सधुा अपने जेठ और सास केलड़केक गुलाम है। याह केदसूरेदन ह चला जाना होगा। तुह यहाँबलुा लतेी, लेकन यहाँ ब धन और परदा तो ससरुाल सेभी बदतर है। मनेबनती सेतुहारेबारेम बहुत पछूा। वह कुछ नह ंबतायी। पापा सेइतना मालमू हुआ क तुहार थीिसस छपनेगयी है। क वोकेशन नजद क है। तुह याद है, वायदा था क तुहारा गाउन पहनकर म फोटो खंचवाऊँगी। वह दन याद करती हूँतो जानेकैसा होनेलगता है! एक क वोकेशन क फोटो खंचवाकर ज र भजेना। या तमुनेबनती को कोई द:ुख दया था? बनती हरदम तुहार बात पर आँसूभर लाती है। मनेतुहारेभरोसे बनती को वहाँछोड़ा था। म उससेदरू, माँका सखु उसेिमला नह ं, पता मर गय।े या तमु उसेइतना भी यार नह ं देसकत?ेमनेतुह बार-बार सहेज दया था। मरे त दुती अब कुछ-कुछ ठ क है, लेकन जानेकैसी है। कभी-कभी िसर म दद होनेलगता है। जी िमचलानेलगता है। आजकल वह बहुत यान रखतेह। लेकन वेमझुको समझ नह ं पाय।ेसारेसखु और आजाद केबीच म कतनी अस तुहूँ। म कतनी परेशान हूँ। लगता हैहजार तफूान हमशेा नस म घहराया करतेह। च दर, एक बात कहूँअगर बरुा न मानो तो। आज शाद केछह मह नेबाद भी म यह कहूँगी च दर क तमुने अ छा नह ंकया। मरे आ मा िसफ तुहारेिलए बनी थी, उसकेरेशेम वेत व ह जो तुहार ह पजूा केिलए थे। तमुनेमझुेदरूफक दया, लेकन इस दरू केअँधेरेम भी ज म-ज मा तर तक भटकती हुई िसफ तुह ंको ढूँढूँगी, इतना याद रखना और इस बार अगर तमु िमल गयेतो जंदगी क कोई ताकत, कोई आदश, कोई िस ा त, कोई वचंना मझुेतमुसेअलग नह ंकर सकेगी। लेकन मालमू नह ंपनुज म सच हैया झूठ! अगर झूठ हैतो सोचो च दर क इस अना दकाल के वाह म िसफ एक बार...िसफ एक बार मनेअपनी आ मा का स य ढूँढ़ पाया था और अब अन तकाल केिलए उसेखो दया। अगर पनुज म नह ंहैतो बताओ मरेेदेवता, या होगा? करोड़ सृयाँह गी, लय ह गेऔर म अतृिचनगार क तरह असीम आकाश म तड़पती हुई अँधेरेक हर परत सेटकराती रहूँगी, न जानेकब तक केिलए। य - य दरू बढ़ती जा रह है, य - य पजूा क यास बढ़ती जा रह है! काश म िसतार केफूल और सरूज क आरती सेतुहार पजूा कर पाती! लेकन जानतेहो, मझुे या करना पड़ रहा है? मरेेछोटेभतीजेनीलूने पहाड़ चूहेपालेह। उनकेपजंड़ेकेअ दर एक प हया लगा हैऔर ऊपर घंटयाँलगी ह। अगर कोई अभागा चूहा उस च म उलझ जाता हैतो य - य छूटनेकेिलए वह परै चलाता है य - य च घमूनेलगता है; घंटयाँबजने लगती ह। नीलूबहुत खुश होता हैलेकन चूहा थककर बदेम होकर नीचेिगर पड़ता है। कुछ ऐसेह च म फँस गयी हूँ, च दर! स तोष िसफ इतना हैक घंटयाँबजती ह तो शायद तमु उ ह पजूा केम दर क घंटयाँसमझतेहोगे। लेकन खैर! िसफ इतनी ाथना हैच दर! क अब थककर ज द ह िगर जाऊँ! मरेेभा य! खत का जवाब ज द ह देना। प मी अभी आयी या नह ं? तुहार , ज म-ज म क यासी-सधुा।'' च दर नेखत पढ़ा और फौरन िलखा-
'' य सधुा, तुहार प बहुत दन केबाद िमला। तुहार भाषा वहाँजाकर बहुत िनखर गयी है। म तो समझता हूँक अगर खत कह ंछुपा दया जायेतो लोग इसेकसी रोमांटक उप यास का अंश समझ, य क उप यास केह पा ऐसेखत िलखतेह, वा त वक जीवन केनह ं। खैर, म अ छा हूँ। हरेक आदमी जंदगी सेसमझौता कर लतेा हैक तुमनेजंदगी सेसमपण कराकर उसके हिथयार रख िलयेह। अब कलेकेबाहर सेआनवेाली आवाज अ छ नह ंलगतीं, न खत केपानेक उ सकुता, न जवाब िलखनेका आ ह। अगर मझुेअकेला छोड़ दो तो बहुत अ छा होगा। म वनती करता हूँ, मझुेखत मत िलखना-आज वनती करता हूँ य क आ ा देनेका अब साहस भी नह ं, अिधकार भी नह ं, य व भी नह ं। खत तुहारा तुह भजे रहा हूँ। कभी जंदगी म कोई ज रत आ पड़ेतो ज र याद करना-बस, इसकेअलावा कुछ नह ं। अपनेम स तु-च कुमार कपरू।'' उसकेबाद फर वह सनुसान जंदगी का ढरा। खँडहर केस नाटेम भलूकर आयी हुई बाँसरु क आवाज क तरह सधुा का प , सधुा का यान आया और चला गया। खँडहर का स नाटा, स नाटेकेउ ल,ूिगरिगट और प थर काँपे और फर मुतदै सेअपनी जगह पर जम गयेऔर उसकेबाद फर वह उदास स नाटा, टूटता हुआ-सा अकेलापन और मूछत दोपहर केफूल-सा च दर... नव बर का एक खुशनमुा वहान; सोनेकेकाँपतेतारेसबुह क ठ ड हवाओंम उलझेहुए थे। आकाश एक छोटे ब चेकेनीलम नयन क तरह भोला और व छ लग रहा था। या रयाँशरद केफूल सेभर गयी थींऔर एक नयी ताजगी मौसम और मन म पलुक उठ थी। च दर अपना परुाना क थई वटेर और पीलेरंग केप मीनेका ल बा कोट पहनेलॉन पर टहल रहा था। छोटे-छोटेप लेदबूपर कलोल कर रहेथे। सहसा एक कार आकर क और प मी उसम सेकूद पड़ और वाँर हरणी क तरह दौडक़र च दर केपास पहुँच गयी-''हलो माई वॉय, म आ गयी!'' च दर कुछ नह ंबोला, ''आओ, ाइंग म म बठैो!'' उसनेउसी मदुा-सी आवाज म कहा। उसेप मी केआनेक कोई स नता नह ंथी। प मी उसकेउदास चेहरेको देखती रह , फर उसकेक धेपर हाथ रखकर बोली, '' य कपरू, कुछ बीमार हो या?'' ''नह ंतो, आजकल मझुेिमलना-जुलना अ छा नह ंलगता। अकेला घर भी है!'' उसनेउसी फ क आवाज म कहा। '' य , िमस सधुा कहाँहै? और डॉ टर शुला!'' ''वेलोग िमस बनती क शाद म गयेह।'' ''अ छा, उसक शाद भी हो गयी, डैम इट। जैसेयेलोग पागल हो गयेह, बट , सधुा, बनती!... य , िमलत-े जुलते य नह ंतमु?''
''य ह , मन नह ंहोता।'' ''समझ गयी, जो मझुेतीन-चार साल पहलेहुआ था, कुछ िनराशा हुई हैतुह!'' प मी बोली। ''नह ं, ऐसी तो कोई बात नह ं।'' ''कहना मत अपनी जबान स,े वीकार कर लनेेसेपुष का गव टूट जाता है।...यह तो तुहारेच र म मझुे यारा लगता है। खैर, यह ठ क हो जाएगा...! म तुह ऐसेनह ंरहनेदँगूी।'' ''मसरू म इतनेदन या करती रह ं?'' च दर नेपछूा। ''योग-साधन!'' प मी नेहँसकर कहा, ''जानतेहो, आजकल मसरू म बफ पड़ रह है। मनेकभी बफ केपहाड़ नह ं देखेथे। अँगरेजी उप यास म बफ पड़नेका ज सनुा बहुत था। सोचा, देखती आऊँ। या कपरू! तमु खत य नह ं िलखतेथे?'' ''मन नह ंहोता था। अ छा बट क शाद कब होगी?'' च दर नेबात टालनेकेिलए कहा। ''हो भी गयी। म आ भी नह ंपायी क सनुतेह जेनी एक दन बट को पकड़क़र खींच लेगयी और पादर से बोली, 'अभी शाद करा दो।' उसनेशाद करा द । लौटकर जेनी नेबट का िशकार सटूफाड़ डाला और अ छा-सा सटू पहना दया। बड़ेविच ह दोन । एक दन सद केव बट वटेर उतारकर जेनी केकमरेम गया तो मारेगुसेके जेनी नेिसवा पतलनू केसारेकपड़ेउतारकर बट को कमरेसेबाहर िनकाल दया। म तो जब सेआयी हूँ, रोज नाटक देखती हूँ। हाँ, देखो यह तो म भलू ह गयी थी...'' और उसनेअपनी जेब सेपीतल क एक छोट -सी मिूत िनकालकर मजे पर रखी-''एक भो टया औरत इसेबचे रह थी। मनेइसेमाँगा तो वह बोली-यह िसफ मद केिलए है।' मनेपछूा, ' य ?' तो बोली-'इसेअगर मद पहन लेतो उस पर कसी औरत का जादूनह ंचलता। वह औरत या तो मर जाती है या भाग जाती हैया उसका याह कसी दसूरेसेहो जाता है।' तो मनेसोचा, तुहारेिलए लतेी चल।ँू'' च दर नेदेखा वह अवलो कतेर क महायानी मिूत थी। उसनेहँसकर उसेलेिलया फर बोला, ''और या लायी अपनेिलए?'' ''अपनेिलए एक नया रह य लायी हूँ।'' '' या?'' ''इधर देखो, मरे ओर, म सुदर लगती हूँ?'' च दर नेदेखा। प मी अठारह साल क लड़क -सी लगनेलगी है। चेहरेकेकोनेभी जैसेगोल हो गयेथेऔर महँु पर बहुत ह भोलापन आ गया था, आँख म वाँरापन आ गया था, चेहरेपर सोना और केसर, च पा, हरिसगंार घलु- िमल गयेथे। ''सचमचु प मी, लगता हैजैसेकौमाय लौट आया हैतमु पर तो! प रय केकंुज सेअपना बचपन फर चुरा लायी या?''
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