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Gunahon Ka Devta

Published by THE MANTHAN SCHOOL, 2021-05-12 08:51:01

Description: Gunahon Ka Devta

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''नह ंकपरू, यह तो रह य लायी हूँ, हमशेा सुदर बनेरहनेका और प रय केकंुज सेनह ं, गुनाह केकंुज स।े मनेहमालय क छाँह म एक नया सगंीत सनुा कपरू, मांसलता का सगंीत। मसरू केसमाज म घलु-िमल गयी और मादक अनभुिूतयाँबटोरती रह - बना कसी प ा ाप केऔर मनेदेखा क दन - दन िनखरती जा रह हूँ। कपरू, सेस इतना बरुा नह ंजतना म समझती थी। तुहार या राय है?'' ''हाँ, म देख रहा हूँ, सेस लोग को उतना बरुा नह ंलगता, जतना म समझता था।'' ''नह ंच दर, िसफ इतना ह नह ं, अ छा मान लो जैसेतमु आजकल उदास हो और तुहारा िसर इस तरह अपनी गोद म रख लँूतो कुछ स तोष नह ंहोगा तुह?'' और प मी नेच दर का िसर सचमचु अपने ासा दोिलत व से िचपका िलया। च दर झ लाकर अलग हट गया। कैसी अजब लड़क है! थोड़ देर चुप बठैा रहा, फर बोला- '' य प मी, तमु एक लड़क हो, म तुह ंसेपछूता हूँ- या लड़ कय के मे म सेस अिनवाय है?'' ''हाँ।'' प मी नेप वर म जोर देकर कहा। ''लेकन प मी, म तमुसेनाम तो नह ंबताऊँगा लेकन एक लड़क हैजसको मनेयार कया हैलेकन शायद वह मझुसेशाद नह ंकर पाएगी। मरेेउसकेकोई शार रक स ब ध भी नह ंह। या तमु इसेयार नह ंकहोगी?'' ''कुछ दन बाद जब उसक शाद हो जायेतब पछूना, तुहारा सारा मे मर जाएगा। पहलेम भी तमुसेकहती थी-पुष और नार केस ब ध म एक अ तर ज र है। अब लगता हैयह सब एक भलुावा है।'' अपनेसेप मी ने कहा। ''लेकन दसूर बात तो सनुो, उसी क एक सखी है। वह जानती हैक म उसक सखी को यार करता हूँ, उसे नह ंकर सकता। कह ंसेस क तिृ का सवाल नह ंफर भी वह मझुेयार करती है। इसेतमु या कहोगी?'' च दर नेपछूा। ''यह और दसूरेढंग क प र थित है। देखो कपरू, तमुनेह नो ट म केबारेम नह ंपढ़ा। ऐसा होता हैक अगर कोई ह नो ट ट एक लड़क को ह नोटाइज कर रहा हैऔर बगल म एक दसूर लड़क बठै हैजो चुपचाप यह देख रह हैतो वातावरण के भाव सेअकसर ऐसा देखा जाता हैक वह भी ह नोटाइज हो जाती है, लेकन वह एक णक मानिसक मूछा होती हैजो टूट जाती है।'' प मी नेकहा। च दर को लगा जैसेबहुत कुछ सलुझ गया। एक ण म उसकेमन का बहुत-सा भार उतर गया। ''प मी, मझुेतुह ंएक लड़क िमली जो साफ बात करती हो और एक शु तक और बु केधरातल स।ेबस, म आजकल बु का उपासक हूँ, भगवान सेिचढ़ है।'' ''बु और शर र बस यह दो आदमी केमलू त व ह। दय तो दोन केअ त:सघंष क उलझन का नाम है।'' प मी नेकहा और सहसा घड़ देखतेहुए बोली, ''नौ बज रहेह, चलो साढ़ेनौ सेमैटनी है। आओ, देख आए!ँ'' ''मझुेकॉलजे जाना है, म जाऊँगा नह ंकह ं!''

''आज इतवार है, ोफेसर कपरू?'' प मी च दर को उठाकर बोली, ''म तुह उदास नह ंहोनेदँगूी, मरेेमीठेसपन!े तमुनेभी मझुेइस उदासी केइ जाल सेछुड़ाया था, याद हैन?'' और च दर केमाथेपर अपनेगरम मलुायम होठ रख दय।े माथेपर प मी केहोठ क गुलाबी आग च दर क नस को गुदगुदा गयी। वह ण-भर केिलए अपनेको भलू गया...प मी केरेशमी ॉक केगुदगुदातेहुए पश, उसकेव क अल य गरमाई और उसके पश केजादूम खो गया। उसकेअंग-अंग म सबुह क शबनम ढलकनेलगी। प मी उसकेबाल को अँगुिलय सेसलुझाती रह । फर कपरू केगाल थपथपाकर बोली, ''चलो!'' कपरूजाकर बठै गया। ''तमु ाइव करो।'' प मी बोली। च दर ाइव करनेलगा और प मी कभी उसकेकॉलर, कभी उसकेबाल, कभी उसकेहोठ सेखेलती रह । सात चाँद क रानी नेआ खर अपनी िनगाह केजादूसेस नाटेके ते को जीत िलया। पश केसकुुमार रेशमी तार नेनगर क आग को शबनम सेसींच दया। ऊबड़-खाबड़ खंडहर को अंग केगुलाब क पाँखुरय सेढँक दया और पीड़ा केअँिधयारेको सी पया पलक सेझरनेवाली दिूधया चाँदनी सेधो दया। एक सगंीत क लय थी जसम वग देवता खो गया, सगंीत क लय थी या उ ाम यौवन का भरा हुआ वार था जो च दर को एक मासमू फूल क तरह बहा लेगया...जहाँपजूा-द प बझु गया था, वहाँत णाई क साँस क इ धनषुी समाँझलिमला उठ थी, जहाँ फूल मरुझाकर धूल म िमल गयेथेवहाँपखुराजी पश केसकुुमार हरिसगंार झर पड़े....आकाश केचाँद केिलए जंदगी केआँगन म मचलता हुआ क हैया, थाली के ित ब ब म ह भलू गया... च दर क शाम प मी केअद य प क छाँह म मुकरा उठ ं। ठ क चार बजेप मी आती, कार पर च दर को ले जाती और च दर आठ बजेलौटता। यार के बना कतनेमह नेकट गय,ेप मी के बना एक शाम नह ंबीत पाती, लेकन अब भी च दर नेअपनेको इतना दरूरखा था क कभी प मी केहोठ केगुलाब नेच दर केहोठ केमगँूेसे बात भी नह ंक थीं। एक दन रात को जब वह लौटा तो देखा क अपनी कार आ गयी है। उसका मन फूल उठा। जैसेकोई अनाथ भटका हुआ ब चा अपनेसरं क क गोद केिलए तड़प उठता है, वसैेह वह पछलेडेढ़ मह नेसेडॉ टर साहब के िलए तरस गया था। जहाँइस व उसकेजीवन म िसफ नशा और नीरसता थी, वह ं दय केएक कोनेम िसफ एक सकुुमार भावना शषे रह गयी थी, वह थी डॉ टर शुला के ित। वह भावना कृत ता क भावना नह ंथी, डॉ टर शुला इतनेदरूनह ंथेक अब वह उनके ित कृत हो, इतनेबड़ेहो जानेपर भी वह जब कभी डॉ टर को देखता था तो लगता था जैसेकोई न हा ब चा अपनेअिभभावक क गोद म आकर िन त हो जाता हो। उसनेपास आकर देखा, डॉ टर साहब बरामदेम टहल रहेथे। च दर दौडक़र उनकेपाँव पर िगर पड़ा। डॉ टर साहब नेउसेउठाकर गलेसेलगा िलया और बड़ेयार सेउसक पीठ पर हाथ फेरतेहुए बोल-े''क वोकेशन हो गया? ड ी जीत लाय?े'' ''जी हाँ!'' बड़ वन ता सेच दर नेकहा। ''बहुत ठ क, अब ड . िल . क तयैार करो। तुह ज द ह स ल गवनमट म जाना है।'' डॉ टर साहब बोल,े''म तो पंह जनवर को द ली जा रहा हूँ। कम-स-ेकम साल भर केिलए?''

''इतनी ज द ; ऑफर कब आया?'' च दर नेअचरज सेपछूा। ''म उन दन द ली गया था न, तभी एजुकेशन िमिन टर सेबात हुई थी!'' डॉ टर साहब नेच दर को देखतेहुए कहा, ''अरे, तमु कुछ दबुलेहो रहेहो! य महरा जन नेठ क सेकाम नह ंकया?'' ''नह ं!'' च दर हँसकर बोला, '' बनती क शाद ठ क-ठाक हो गयी?'' '' बनती क शाद !'' डॉ टर साहब नेिसर झुकायेहुए, टहलतेहुए एक बड़ फ क हँसी हँसकर कहा, '' बनती और तुहार बआुजी दोन अ दर ह।'' ''अ दर ह!'' च दर को यह रह य कुछ समझ म ह नह ंआता था। ''इतनी ज द बनती लौट आयी?'' '' बनती गयी ह कहाँ?'' डॉ टर साहब नेबहुत चुपचाप िसर झुका कर कहा और बहुत क ण उदासी उनकेमहँुपर छा गयी। वह बचेैनी सेबरामदेम टहलनेलगे। च दर का साहस नह ंहुआ कुछ पछूनेका। कुछ अमगंल अव य हुआ है। वह अ दर गया। बआुजी अपनी कोठर म सामान रख रह थींऔर बनती बठै िसल पर उरद क भीगी दाल पीस रह थी! बनती नेच दर को देखा, दाल म सनेहुए हाथ जोड़कर णाम कया, िसर को आँचल सेढँककर चुपचाप दाल पीसनेलगी, कुछ बोली नह ं। च दर नेणाम कया और जाकर बआु केपरैछूिलय।े ''अरेच दर है, आओ बटेवा, हम तो लटुगय!े'' और बआु वह ंदेहर पर िसर थामकर बठै गयीं। '' या हुआ, बआुजी?'' ''होता का भइया! जौन बदा रहा भाग म ओ ह भवा।'' और बआु अपनी धोती सेआँसूप छकर बोलीं, '' हमर छाती पर मगँू दरैकेिलए बद रह तौन जमी है। भगवान कौन को ऐसी कलंकनी ब टया न दे। तीन भाँवर केबाद बारात उठ गयी, भइया! हमारा तो कुल डूब गया।'' और बआुजी नेउ च वर म दन शु कया। बनती नेचुपचाप हाथ धोयेऔर उठकर छत पर चली गयी। ''चुप रहो हो। अब रोय-रोय केकाहेजउ ह कान करत हउ। गुनव ती ब टया बाय, ह जारन आय के ब टया के िलए गोड़ेिग रह। अपना एका त होई केबठैो!'' महरा जन नेपड़ू उतारतेहुए कहा। ''आ खर बात या हुई, महरा जन?'' च दर नेपछूा। महरा जन नेजो बताया उससेपता लगा क लड़केवालेबहुत ह सकंणमना और वाथ थे। पहलेमालमू हुआ क लड़काउ ह ने ेजुएट बताया था। वह था इंटर फेल। फर दरवाजेपर झगड़ा कया उ ह न।ेडॉ टर साहब बहुत बगड़ गय,ेअ त म मड़वेम लोग नेदेखा क लड़केकेबाय हाथ क अँगुिलयाँगायब ह। डॉ टर साहब इस बात पर बगड़ेऔर उ ह नेमड़वेसेबनती को उठवा दया। फर बहुत लड़ाई हुई। लाठ तक चलनेक नौबत आ गयी। जैस-े तसैेझगड़ा िनपटा। तीन भाँवर केबाद याह टूट गया। ''अब बताओ, भइया!'' सहसा बआु आँसूप छकर गरज उठ ं-''ई इ ह का हुइ गवा रहा, इनक मित मार गयी।

गुसेम आय के बनती को उठवाय िल हन। अब हम ए ी बड़ ब टया लैकेकहाँजा ? अब हमर बरादर म कौन पछू एका? ए ा पढ़-िलख केइ ह का सझूा? अरेलड़क वालेहमशेा दब केचलैचाह ं।'' ''अरेतो या आँख ब द कर लते?े लगँड़े-ललूेलड़केसेकैसेयाह कर देत,ेबआु! तमु भी गजब करती हो!'' च दर बोला। ''भइया, जेकेभाग म लगँड़ा-ललूा बदा होई ओका ओह िमली। लड़ कयन को िनबाह करैचाह क सकल देखै चाह । अब हन याह केबाद कौन केहाथ-गोड़ टूट जायेतो औरत अपनेआदमी को छोड़ केगली-गली क हाँड़ चाटै? हम रहेतो जब बनती तीन बरस क हुई गयी, तब उनक सकल उजेलेम देखा रहा। जैसा भाग म रहा तसैा होता!'' च दर नेविच दय-ह न तक को सनुा और आ य सेबआु क ओर देखनेलगा।....बआुजी बकती जा रह थीं- ''अब कहतेह क बनती को पढ़उब!ै याह न करब!ैरह -सह इ जत भी बचे रहेह। हमार तो क मत फूट गयी...'' और वेफर रोनेलगीं, ''पदैा होतेकाहेनह ंमर गयी कुलबोरनी...कुल छनी...अभािगन!'' सहसा बनती छत सेउतर और आँगन म आकर खड़ हो गयी, उसक आँख म आग भर थी-''बस करो, माँजी!'' वह चीखकर बोली, ''बहुत सनु िलया मन।ेअब और बदा त नह ंहोता। तुहारेकोसनेसेअब तक नह ंमर , न म ँगी। अब म सनुगँूी नह ं, म साफ कह देती हूँ। तुह मरे श ल अ छ नह ंलगती तो जाओ तीरथ-या ा म अपना परलोक सधुारो! भगवान का भजन करो। समझी क नह ं!'' च दर नेता जुब सेबनती क ओर देखा। वह वह बनती हैजो माँजी क जरा-जरा-सी बात सेिलपटकर रोया करती थी। बनती का चेहरा तमतमाया हुआ था और गुसेसेबदन काँप रहा था। बआु उछलकर खड़ हो गयींऔर दगुुनी चीखकर बोलीं, ''अब बहुत जबान चलैलगी है। कौन हैतोर जेकेबल पर ई चमक दखावत है? हम काट के धर देब,ैतोकेबताय देइत हई। महँुझ सी! ऐसी न होती तो काहेई दन देखैपड़त। उ ह तो खाय गयी, हमहूँका खाय लवे!'' अपना महँुपीटकर बआु बोलीं। ''तमु इतनी मीठ नह ंहो माँजी क तुह खा ल!ँू'' बनती नेऔर तड़पकर जवाब दया। च दर त ध हो गया। यह बनती पागल हो गयी है। अपनी माँको या कह रह है! ''िछह, बनती! पागल हो गयी हो या? चलो उधर!'' च दर नेडाँटकर कहा। ''चुप रहो, च दर! हम भी आदमी ह, हमनेजतना बदा त कया है, हमींजानतेह। हम य बदा त कर! और तमुसे या मतलब? तमु कौन होतेहो हमारेबीच म बोलनेवाल?े'' '' या हैयह सब? तमु लोग सब पागल हो गयेहो या? बनती, यह या हो रहा है?'' सहसा डॉ टर साहब ने आकर कहा। बनती दौडक़र डॉ टर साहब सेिलपट गयी और रोकर बोली, ''मामाजी, मझुेद द केपास भजे द जए! म यहाँ

नह ंरहूँगी।'' ''अ छा बटे! अ छा! जाओ च दर!'' डॉ टर साहब नेकहा। बनती चली गयी तो बआु जी सेबोल,े''तुहारा दमाग खराब हो गया है। उस पर गुसा उतारनेसे या फायदा? हमारेसामनेयेसब बात करोगी तो ठ क नह ं होगा।'' ''अरेहम काहेबोलब!ैहम तो मर जा तो अ छा है...'' बआुजी पर जैसेदेवी माँआ गयी ह इस तरह सेझूम- झूमकर रो रह थीं...''हम तो वृदावन जाय केडूब मर ं! अब हम तमु लोगन क सकल न देखब।ैहम मर जा तो चाहेबनती को पढ़ायो चाहेनचायो-गवायो। हम अपनी आँख सेन देखब।ै'' उस रात को कसी नेखाना नह ंखाया। एक विच -सा वषाद सारेघर पर छाया हुआ था। जाड़ेक रात का गहन अँधेरा खामोश छाया हुआ था, महज एक अमगंल छाया क तरह कभी-कभी बआुजी का दन अँधेरेको झकझोर जाता था। सभी चुपचाप भखूेसो गय.े.. दसूरेदन बनती उठ और महरा जन केआनेकेपहलेह उसनेचूहा जलाकर चाय चढ़ा द । थोड़ देर म चाय बनाकर और टो ट भनूकर वह डॉ टर साहब केसामनेरख आयी। डॉ टर साहब कल क बात सेबहुत ह यिथत थे। रात को भी उ ह नेखाना नह ंखाया था, इस व भी उ ह नेमना कर दया। बनती च दर केकमरेम गयी, ''च दर, मामाजी नेकल रात को भी कुछ नह ंखाया, तमुनेभी नह ंखाया, चलो चाय पी लो!'' च दर नेभी मना कया तो बनती बोली, ''तमु पी लोगेतो मामाजी भी शायद पी ल।'' च दर चुपचाप गया। बनती थोड़ देर म गयी तो देखा दोन चाय पी रहेह। वह आकर मवेा िनकालनेलगी। चाय पीत-ेपीतेडॉ टर साहब नेकहा, ''च दर, यह पास-बकु लो। पाँच सौ िनकाल लो और दो हजार का हसाब अलग करवा दो।...अ छा देखो, म तो चला जाऊँगा द ली, बनती को शाहजहाँपरु भजेना ठ क नह ंहै। वहाँचार र तदेार ह, बीस तरह क बात ह गी। लेकन म चाहता हूँअब आगेजब तक यह चाहे, पढ़े! अगर कहो तो यहाँछोड़ जाऊँ, तमु पढ़ातेरहना!'' बनती आ गयी और त तर म भनुा मवेा रखकर उसम नमक िमला रह थी। च दर नेएक लाइस उठायी और उस पर नमक लगातेहुए बोला, ''वसैेआप यहाँछोड़ जाएँतो कोई बात नह ंहै, लेकन अकेलेघर म अ छा नह ं लगता। दो-एक रोज क बात दसूर होती है। एकदम सेसाल-भर केिलए...आप समझ ल।'' ''हाँबटेा, कहतेतो तमु ठ क हो! अ छा, कॉलजे केहो टल म अगर रख दया जाए!'' डॉ टर साहब नेपछूा। ''म लड़ कय को हो टल म रखना ठ क नह ंसमझता हूँ।'' च दर बोला, ''घर केवातावरण और वहाँकेवातावरण म बहुत अ तर होता है।'' ''हाँ, यह भी ठ क है। अ छा तो इस साल म इसेद ली िलयेजा रहा ह। अगलेसाल देखा जाएगा...च दर, इस मह न-ेभर म मरेा सारा व ास हल गया। सधुा का ववाह कतनी अ छ जगह कया गया, मगर सधुा पीली पड़ गयी

है। कतना द:ुख हुआ देखकर! और बनती केसाथ यह हुआ! सचमचु यह जाित, ववाह सभी पर पराएँबहुत ह बरु ह। बरु तरह सड़ गयी ह। उ ह तो काट फकना चा हए। मरेा तो वसैेइस अनभुव केबाद सारा आदश ह बदल गया।'' च दर बहुत अचरज सेडॉ टर साहब क ओर देखनेलगा। यह जगह थी, इसी तरह बठैकर डॉ टर साहब ने जाित- बरादर , ववाह आ द सामा जक पर पराओंक कतनी शसंा क थी! जंदगी क लहर नेहर एक को दस मह नेम कहाँसेकहाँलाकर पटक दया है। डॉ टर साहब कहतेगय.े..''हम लोग जंदगी सेदरूरहकर सोचतेह क हमार सामा जक संथाएँ वग ह, यह तो जब उनम धँसो तब उनक गंदगी मालमू होती है। च दर, तमु कोई गैर जात का अ छा-सा लड़काढूँढ़ो। म बनती क शाद दसूर बरादर म कर दँगूा।'' बनती, जो और चाय ला रह थी, फौरन बड़े ढ़ वर म बोली, ''मामाजी, आप जहर देद जए लेकन म शाद नह ंक ँगी। या आपको मरे ढ़ता पर व ास नह ं?'' '' य नह ं, बटे! अ छा, जब तक तरे इ छा हो, पढ़!'' दसूरेदन डॉ टर साहब नेबआुजी को बलुाया और पयेदेदय।े ''लो, यह पाँच सौ पहलेखच केह और दो हजार म सेतुह धीरे-धीरेिमलता रहेगा।'' दो-तीन दन केअ दर बआु नेजानेक सार तयैार कर ली, लेकन तीन दन तक बराबर रोती रह ं। उनकेआँसू थमेनह ं। बनती चुप थी। वह भी कुछ नह ंबोली, चौथेदन जब वह सामान मोटर पर रखवा चुक ंतो उ ह नेच दर सेबनती को बलुवाया। बनती आयी तो उ ह नेउसेगलेसेलगा िलया-और बहेद रोयीं। लेकन डॉ टर साहब को देखते ह फर बोल उठ ं-''हमर लड़क का दमाग तमु ह बगाड़ेहो। दिुनया म भाइयौ अपना नैहोत। अपनी लड़क को बया दयौ! हमर लड़क ...'' फर बनती को िचपटाकर रोनेलगीं। च दर चुपचाप खड़ा सोच रहा था, अभी तक बनती खराब थी। अब डॉ टर साहब खराब हो गय।ेबआु ने पये सभँालकर रख िलयेऔर मोटर पर बठै गयीं। सम त लांछन केबावजूद डॉ टर साहब उ ह पहुँचानेटेशन तक गय।े बनती बहुत ह चुप-सी हो गयी थी। वह कसी सेकुछ नह ंबोलती और चुपचाप काम कया करती थी। जब काम सेफुरसत पा लतेी तो सधुा केकमरेम जाकर लटे जाती और जाने या सोचा करती। च दर को बड़ा ता जुब होता था बनती को देखकर। जब बनती खुश थी, बोलती-चालती थी तो च दर बनती सेिचढ़ गया था, लेकन बनती के जीवन का यह नया प देखकर पहलेक सभी बात भलू गया। और उससेफर बात करनेक कोिशश करनेलगा। लेकन बनती यादा बोलती ह नह ं। एक दन दोपहर को च दर यिूनविसट सेलौटकर आया और उसनेरेडयो खोल दया। बनती एक त तर म अम द काटकर लेआयी और रखकर जानेलगी। ''सनुो बनती, या तमुनेमझुेमाफ नह ंकया? म कतना यिथत हूँ, बनती! अगर तमुको भलू सेकुछ कह दया तो तमु उसका इतना बरुा मान गयींक दो-तीन मह नेबाद भी नह ं भलूीं!'' ''नह ं, बरुा माननेक या बात है, च दर!'' बनती एक फ क हँसी-हँसकर बोली, ''आ खर नार का भी एक

वािभमान है, मझुेमाँबचपन सेकुचलती रह , मनेतुह द द सेबढक़र माना। तमु भी ठोकर लगानेसेबाज नह ं आय,ेफर भी म सब सहती गयी। उस दन जब मडंप केनीचेमामाजी नेजबरद ती हाथ पकड़कर खड़ा कर दया तो मझुेउसी ण लगा क मझुम भी कुछ स व है, म इसीिलए नह ंबनी हूँक दिुनया मझुेकुचलती ह रहे। अब म वरोध करना, व ोह करना भी सीख गयी हूँ। जंदगी म नहे क जगह है, लेकन वािभमान भी कोई चीज है। और तुह अपनी जंदगी म कसी क ज रत भी तो नह ंहै!'' कहकर बनती धीरे-धीरेचली गयी। अपमान सेच दर का चेहरा काला पड़ गया। उसनेरेडयो ब द कर दया और त तर उठाकर नीचेरख द और बना कपड़ेबदलेप मी केयहाँचल दया। मनुय का एक वभाव होता है। जब वह दसूरेपर दया करता हैतो वह चाहता हैक याचक परू तरह वन होकर उसे वीकार करे। अगर याचक दान लनेेम कह ंभी वािभमान दखलाता हैतो आदमी अपनी दानवृ और दयाभाव भलूकर नशृसंता सेउसके वािभमान को कुचलनेम य त हो जाता है। आज ह त केबाद च दर केमन म बनती केिलए कुछ नहे, कुछ दया जागी थी, बनती को उदास मौन देखकर; लेकन बनती केइस वािभमान-भरे उ र नेफर उसकेमन का सोया हुआ साँप जगा दया था। वह इस वािभमान को तोड़कर रहेगा, उसनेसोचा। प मी केयहाँपहुँचा तो अभी धूप थी। जेनी कह ंगयी थी, बट अपनेतोतेको कुछ खला रहा था। कपरूको देखतेह हँसकर अिभवादन कया और बोला, ''प मी अ दर है!'' वह सीधा अ दर चला गया। प मी अपनेशयन-क म बठै हुई थी। कमरेम ल बी-ल बी खड़ कयाँथींजनम लकड़ केचौखट म रंग- बरंगेशीशेलगेहुए थे। खड़ कयाँ ब द थींऔर सरूज क करण इन शीश पर पड़ रह थींऔर प मी पर सात रंग क छायाएँखेल रह थीं। वह झुक हुई सोफेपर अधलटे कोई कताब पढ़ रह थी। च दर नेपीछेसेजाकर उसक आँख ब द कर लींऔर बगल म बठै गया। ''कपरू!'' अपनी सकुुमार अँगुिलय सेच दर केहाथ को आँख पर सेहटातेहुए प मी बोली और पलक म बहेद नशा भरकर सोनजुह क मुकान बखेरकर च दर को देखनेलगी। च दर नेदेखा, वह ाउिनगं क क वता पढ़ रह थी। वह पास बठै गया। प मी नेउसेअपनेव पर खींच िलया और उसकेबाल सेखेलनेलगी। च दर थोड़ देर चुप लटेा रहा, फर प मी केगुलाबी होठ पर अँगुिलयाँरखकर बोला, ''प मी, तुहारेव पर िसर रखकर म जाने य सबकुछ भलू जाता हूँ? प मी, दिुनया वासना सेइतना घबराती य है? म ईमानदार सेकहता हूँक अगर कसी को वासनाह न यार करके, कसी केिलए याग करकेमझुेजतनी शा त िमलती है, पता नह ं य मांसलता म भी उतनी ह शा त िमलती है। ऐसा लगता हैक शर र के वकार अगर आ या मक मे म जाकर शा त हो जातेह तो लगता है आ या मक मे म यासेरह जानेवालेअभाव फर कसी केमांसल-ब धन म ह आकर बझु पातेह। कतना सखु है तुहार ममता म!'' ''शी!'' च दर केहोठ को अपनी अँगुिलय सेदबाती हुई प मी बोली, ''चरम शा त के ण को अनभुव कया करो। बोलते य हो?'' च दर चुप हो गया। चुपचाप लटेरहा।

प मी क केसर ास उसकेमाथेको रह-रहकर चूम रह थींऔर च दर केगाल को प मी केव म धड़कता हुआ सगंीत गुदगुदा रहा था। च दर का एक हाथ प मी केगलेम पड़ इमीटेशन ह रेक माला सेखेलनेलगा। सारस केपखं सेभी यादा मलुायम सकुुमार गरदन सेछूटनेपर अँगुिलयाँलाजव ती क प य क तरह सकुचा जाती थीं। माला खोल ली और उसेउतारकर अपनेहाथ म लेिलया। प मी नेमाला लनेेकेिलए हाथ बढ़ाया ह था क गलेके बटन टच-सेटूट गय.े..बफानी चाँदनी उफनकर छलक पड़ । च दर को लगा उसकेगाल केनीचेबजिलय केफूल िसहर उठेह और एक मदमाता नशा टूटतेहुए िसतार क तरह उसकेशर र को चीरता हुआ िनकल गया। वह काँप उठा, सचमचु काँप उठा। नशेम चूर वह उठकर बठै गया और उसनेप मी को अपनी गोद म डाल िलया। प मी अनगं केधनषुक यचंा क तरह दोहर होकर उसक गोद म पड़ रह । त णाई का चाँद टूटकर दो टुकड़ेहो गया था और वासना केतफूान नेझीनेबादल भी हटा दयेथे। जहर ली चाँदनी नेनािगन बनकर च दर को लपटे िलया। च दर ने पागल होकर प मी को अपनी बाँह म कस िलया, इतनी यास सेलगा क प मी का द पिशखा-सा तन च दर केतन म समा जाएगा। प मी िन े आँख ब द कयेथी लेकन उसकेगाल पर जाने या खल उठा था! च दर केगलेम उसनेमणृाल-सी बाँह डाल द थीं। च दर नेप मी केहोठ को जैसेअपनेह ठ म समटे लनेा चाहा...इतनी आग...इतनी आग...नशा... ''ठाँय!'' सहसा बाहर ब दकू क आवाज हुई। च दर च क उठा। उसनेअपनेबाहुपाश ढ लेकर दय।ेलेकन प मी उसकेगलेम बाँह डालेबहेोश पड़ थी। च दर ने ण-भर प मी केभरपरू प यौवन को आँख सेपी लनेा चाहा। प मी नेअपनी बाँह हटा लींऔर नशेम मखमरू-सी च दर क गोद सेएक ओर लढ़ुक गयी। उसेअपनेतन-बदन का होश नह ंथा। च दर नेउसकेव ठ क कयेऔर फर झुककर उसक नशेम चूर पलक चूम लीं। ''ठाँय!'' ब दकू क दसूर आवाज हुई। च दर घबराकर उठा। ''यह या है, प मी?'' ''होगा कुछ, जाओ मत।'' अलसायी हुई नशीली आवाज म प मी नेकहा और उसेफर खींचकर बठा िलया। और फर बाँह म उसेसमटेकर उसका माथा चूम िलया। ''ठाँय!'' फर तीसर आवाज हुई। च दर उठ खड़ा हुआ और ज द सेबाहर दौड़ गया। देखा बट क ब दकू बरामदेम पड़ है, और वह पजंड़ेके पास मरेहुए तोतेका पखं पकडक़र उठायेहुए है। उसकेघाव सेबट केपतलनू पर खून चूरहा था। च दर को देखते ह बट हँस पड़ा, ''देखा! तीन गोली म इसेब कुल मार डाला, वह तो कहो िसफ एक ह लगी वरना...'' और पखं पकड़कर तोतेक लाश को झुलानेलगा। ''िछह! फको उस;ेह यारेकह ंके! मार य डाला उस?े'' च दर नेकहा। ''तमुसेमतलब! तमु कौन होतेहो पछूनेवाल?ेम यार करता था उस,ेमनेमार डाला!'' बट बोला और आ ह ते सेउसेएक प थर पर रख दया। माल िनकालकर फाड़ डाला। आधा माल उसकेनीचेबछा दया और आधेसे उसका खून प छनेलगा। फर च दर केपास आया। च दर केक धेपर हाथ रखकर बोला, ''कपरू! तमु मरेेदो त हो

न! जरा माल देदो।'' और च दर का माल लकेर तोतेकेपास खड़ा हो गया। बड़ हसरत सेउसक ओर देखता रहा। फर झुककर उसेचूम िलया और उस पर माल ओढ़ा दया। और बड़ेमातम क मुा म उसी केपास िसर झुकाकर बठै गया। ''बट , बट , पागल हो गये या?'' च दर नेउसका क धा पकड़ाकर हलातेहुए कहा, ''यह या नाटक हो रहा है?'' बट नेआँख खोलींऔर च दर को भी हाथ पकडक़र वह ंबठा िलया और बोला, ''देखो कपरू, एक दन तमु आये थेतो मनेतोता और जेनी दोन को दखाकर कहा था क जेनी सेम नफरत करता हूँ, उससेशाद कर लगँूा और तोते सेम यार करता हूँ, इसेमार डालगँूा। कहा था क नह ं? कहो हाँ।'' ''हाँ, कहा था।'' च दर बोला, ''लेकन य कहा था?'' ''हाँ, अब पछूा तमुन!ेतमु पछूोगे'मने य मार डाला' तो म कहूँगा क इसेअब मर जाना चा हए था, इसिलए इसेमार डाला। तमु पछूोगे, 'इसे य मर जाना चा हए?' तो म कहूँगा, 'जब कोई जीवन क पणूता पर पहुँचा जाता है तो उसेमर जाना चा हए। अगर वह अपनी जंदगी का ल य परूा कर चुका हैऔर नह ंमरता तो यह उसका अ याय है। वह अपनी जंदगी का ल य परूा कर चुका था, फर भी नह ंमरता था। म इसेयार करता था लेकन यह अ याय नह ंसह सकता था, अत: मनेइसेमार डाला!'' ''अ छा, तो तुहारेतोतेक भी जंदगी का कोई ल य था?'' ''हरेक क जदगी का ल य होता है। और वह ल य होता हैस य को, चरम स य को जान जाना। वह स य जान लनेेकेबाद आदमी अगर ज दा रहता है, तो उसक यह असीम बहेयाई है। मनेइसेवह स य िसखा दया। फर भी यह नह ंमरा तो मनेमार डाला। फर तमु पछूोगेक वह चरम स य या है? वह स य हैक मौत आदमी केशर र क ह या करती है। और आदमी क ह या गला घ ट देती है। मसलन तमु अगर कसी औरत केपास जा रहेहो या कसी औरत केपास सेआ रहेहो। और स भव हैउसनेतुहार आ मा क ह या कर डाली हो...'' ''ऊँह! अब तमु ज द ह परूेपागल हो जाओगे?'' च दर नेकहा और फर वह प मी केपास लौट गया। प मी उसी तरह मदहोश लटे थी। उसनेजातेह फर बाँह फैलाकर च दर को समटे िलया और च दर उसकेव क रेशमी गरमाई म डूब गया। जब वह लौटा तो बट हाथ म खुरपा िलयेएक ग ढï ब द कर रहा था। ''सनुो, कपरू! यहाँमनैेउसेगाड़ दया। यह उसक समािध है। और देखो, आत-ेआतेयहाँिसर झुका देना। वह बचेारा जीवन का स य जान चुका है। समझ लो वह सट परैट (स त शकुदेव) हो गया है!'' ''अ छा, अ छा!'' च दर िसर झुकाकर हँसतेहुए आगेबढ़ा। ''सनुो, को कपरू!'' फर बट नेपकुारा और पास आकर च दर केक धेपर हाथ रखकर बोला, ''कपरू, तमु मानतेहो क नह ंक पहलेम एक असाधारण आदमी था।''

''अब भी हो।'' च दर हँसतेहुए बोला। ''नह ं, अब म असाधारण नह ंहूँ, कपरू! देखो, तुह आज रह य बताऊँ। वह आदमी असाधारण होता हैजो कसी प र थित म कसी भी त य को वीकार नह ंकरता, उनका िनषधे करता चलता है। जब वह कसी को भी वीकार कर लतेा है, तब वह परा जत हो जाता है। म तो कहूँगा असाधारण आदमी बननेकेिलए स य को भी वीकार नह ं करना चा हए।'' '' या मतलब, बट ! तमु तो दशन क भाषा म बोल रहेहो। म अथशा का व ाथ हूँ, भाई!'' च दर नेकौतहूल सेकहा। ''देखो, अब मनेववाह वीकार कर िलया। जेनी को वीकार कर िलया। चाहेयह जीवन का स य ह य न हो पर मह ा तो िनषधे म होती है। सबसेबड़ा आदमी वह होता हैजो अपना िनषधे कर दे...लेकन म अब साधारण आदमी हूँ। स ती क म का अदना य । मझुेकतना दखु हैआज। मरेा तोता भी मर गया और मरे असाधारणता भी।'' और बट फर तोतेक क केपास िसर झुकाकर बठै गया। वह घर पहुँचा तो उसकेपाँव जमीन पर नह ंपड़ रहेथे। उसनेउफनी हुई चाँदनी चूमी थी, उसनेत णाई केचाँद को पश सेिसहरा दया था, उसनेनीली बजिलयाँचूमी थीं। ाण क िसहरन और गुदगुद सेखेलकर वह आ रहा था, वह प मी केहोठ केगुलाब को चूम-चूमकर गुलाब केदेश म पहुँच गया था और उसक नस म बहतेहुए रस म गुलाब झूम उठेथे। वह िसर सेपरैतक एक मदहोश यास बना हुआ था। घर पहुँचा तो जैसा उ लास सेउसका अंग-अंग नाच रहा हो। बनती के ित दोपहर को जो आ ोश उसकेमन म उभर आया था, वह भी शा त हो गया था। बनती नेआकर खाना रखा। च दर नेबहुत हँसतेहुए, बड़ेमीठे वर म कहा, '' बनती, आज तमु भी खाओ।'' ''नह ं, म नीचेखाऊँगी।'' ''अरेचल बठै, िगलहर !'' च दर नेबहुत दन पहलेके नहे के वर म कहा और बनती केपीठ म एक घसँूा मारकर उसेपास बठा िलया-''आज तुह नाराज नह ंरहनेदगे। लेखा, पगली!'' नफरत सेनफरत बढ़ती है, यार सेयार जागता है। बनती केमन का सारा नहे सखू-सा गया था। वह िचड़िचड़ , वािभमानी, ग भीर और खी हो गयी थी लेकन औरत बहुत कमजोर होती है। ई र न करे, कोई उसके दय क ममता को छूल।ेवह सबकुछ बदा त कर लतेी हैलेकन अगर कोई कसी तरह उसकेमन केरस को जगा दे, तो वह फर अपना सब अिभमान भलू जाती है। च दर न,ेजब वह यहाँआयी थी, तभी सेउसके दय क ममता जीत ली थी। इसिलए च दर केसामनेसदा झुकती आयी लेकन पछली बार सेच दर नेठोकर मारकर सारा नहे बखेर दया था। उसकेबाद उसके य व का रस सखूता ह गया। ोध जैसेउसक भ ह पर रखा रहता था। आज च दर नेउसको इतनेदलुार सेबलुाया तो लगा वह जानेकतनेदन का भलूा वर सनु रह है। चाहे च दर के ित उसकेमन म कुछ भी आ ोश य न हो, लेकन वह इस वर का आ ह नह ंटाल सकती, यह वह भली कार जानती थी। वह बठै गयी। च दर नेएक कौर बनाकर बनती केमहँु म देदया। बनती नेखा िलया। च दर नेबनती क बाँह म चुटक काट कर कहा-''अब दमाग ठ क हो गया पगली का! इतनेदन सेअकड़ फरती

थी!'' ''हूँ!'' बनती नेबहुत दन केभलूेहुए नहे के वर म कहा, ''खुद ह तो अपना दमाग बगाड़ेरहतेह और हम इ जाम लगातेह। तरकार ठ ड तो नह ंहै?'' दोन म सलुह हो गयी...जाड़ा अब काफ बढ़ गया था। खाना खा चुकनेकेबाद बनती शाल ओढ़ेच दर केपास आयी और बोली, ''लो, इलायची खाओगे?'' च दर नेलेली। छ लकर आधेदानेखुद खा िलय,ेआधेबनती केमहँु म देदय।े बनती नेधीरेसेच दर क अँगुली दाँत सेदबा द । च दर नेहाथ खींच िलया। बनती उसी केपलगँ पर पास ह बठै गयी और बोली, ''याद हैतुह? इसी पलगँ पर तुहारा िसर दबा रह थी तो तमुनेशीशी फक द थी।'' ''हाँ, याद है! अब कहो तुह उठाकर फक दँ।ू'' च दर आज बहुत खुश था। ''मझुे या फकोगे!'' बनती नेशरारत सेमहँुबनाकर कहा, ''म तमुसेउठूँगी ह नह ं!'' जब अंग का तफूान एक बार उठना सीख लतेा हैतो दसूर बार उठतेहुए उसेदेर नह ंलगती। अभी वह अपने तफूान म प मी को पीसकर आया था। िसरहानेबठै हुई बनती, ह का बादामी शाल ओढ़े, रह-रहकर मुकराती और गाल पर फूल केकटोरेखल जात,ेआँख म एक नयी चमक। च दर थोड़ देर देखता रहा, उसकेबाद उसनेबनती को खींचकर कुछ हचकतेहुए बनती केमाथेपर अपनेहोठ रख दय।े बनती कुछ नह ंबोली। चुपचाप अपनेको छुड़ाकर िसर झुकायेबठै रह और च दर केहाथ को अपनेहाथ म लकेर उसक अँगुिलयाँिचटकाती रह । सहसा बोली, ''अरे, तुहारेकफ का बटन टूट गया है, लाओ िसल दँ।ू'' च दर को पहलेकुछ आ य हुआ, फर कुछ लािन। बनती कतना समपण करती है, उसकेसामनेवह...लेकन उसनेअ छा नह ंकया। प मी क बात दसूर है, बनती क बात दसूर । बनती केसाथ एक प व अ तर ह ठ क रहता- बनती आयी और उसकेकफ म बटन सीनेलगी...सीत-ेसीतेबचेहुए डोरेको दाँत सेतोड़ती हुई बोली, ''च दर, एक बात कह मानोगे?'' '' या?'' ''प मी केयहाँमत जाया करो।'' '' य ?'' ''प मी अ छ औरत नह ंहै। वह तुह यार नह ंकरती, तुह बगाड़ती है।'' ''यह बात गलत है, बनती! तमु इसीिलए कह रह हो न क उसम वासना बहुत तीखी है!'' ''नह ं, यह नह ं। उसनेतुहार जंदगी म िसफ एक नशा, एक वासना द , कोई ऊँचाई, कोई प व ता नह ं। कहाँ द द , कहाँप मी? कस वग सेउतरकर तमु कस नरक म फँस गय!े''

''पहलेम भी यह सोचता था बनती, लेकन बाद म मनेसोचा क माना कसी लड़क केजीवन म वासना ह तीखी है, तो या इसी सेवह िन दनीय है? या वासना वत: म िन दनीय है? गलत! यह तो वभाव और य व का अ तर है, बनती! हरेक सेहम क पना नह ंमाँग सकत,ेहरेक सेवासना नह ंपा सकत।ेबादल है, उस पर करण पड़ेगी, इ धनषु ह खलगेा, फूल है, उस पर करण पड़ेगी, तब समु ह आएगा। बादल सेहम माँगनेलग तब समु और फूल सेमाँगनेलग इ धनषु, तो यह तो हमार एक क व वमयी भलू होगी। माना एक लड़क केजीवन म यार आया, उसनेअपनेदेवता केचरण पर अपनी क पना चढ़ा द । दसूर केजीवन म यार आया, उसनेचुबन, आिलगंन और गुदगुद क बजिलयाँद ं। एक बोली, 'देवता मरेे! मरेा शर र चाहेजसका हो, मरे पजूा-भावना, मरे आ मा तुहार हैऔर वह ज म-ज मा तर तक तुहार रहेगी...' और दसूर द पिशखा-सी लहराकर बोली, 'दिुनया कुछ कहे अब तो मरेा तन-मन तुहारा है। म तो बकेाबूहूँ! म क ँ या? मरेेतो अंग-अंग जैसेअलसा कर चूर हो गयेहै तुहार गोद म िगर पडऩेकेिलए, मरे त णाई पलुक उठ हैतुहारेआिलगंन म पस जानेकेिलए। मरेेलाज के ब धन जैसेिशिथल हुए जातेह? म क ँतो या क ँ? कैसा नशा पला दया हैतमुन,ेम सब कुछ भलू गयी हूँ। तमु चाहेजसेअपनी क पना दो, अपनी आ मा दो, लेकन एक बार अपनेजलतेहुए होठ म मरेेनरम गुलाबी होठ समटे लो न!' बताओ बनती, य पहली क भावना ठ क हैऔर दसूर क यास गलत?'' बनती कुछ देर तक चुप रह , फर बोली, ''च दर, तमु बहुत गहराई सेसोचतेहो। लेकन म तो एक मोट -सी बात जानती हूँक जसकेजीवन म वह यास जग जाती हैवह फर कसी भी सीमा तक िगर सकता है। लेकन जसनेयाग कया, जसक क पना जागी, वह कसी भी सीमा तक उठ सकता है। मनेतो तुह उठतेहुए देखा है।'' ''गलत है, बनती! तमुनेिगरतेहुए देखा हैमझुे! तमु मानोगी क सधुा सेमझुेक पना ह िमली थी, याग ह िमला था, प व ता ह िमली थी। पर वह कतनी दन टक ! और तमु यह कैसेकह सकती हो क वासना आदमी को नीचेह िगराती है। तमु आज ह क घटना लो। तमु यह तो मानोगी क अभी तक मनेतुह अपमान और ितर कार ह दया था।'' ''खैर, उसक बात जानेदो!'' बनती बोली। ''नह ं, बात आ गयी तो म साफ कहता हूँक आज मनेतुहारा ितदान देनेक सोची, आज तुहारेिलए मन म बड़ा नहेउमड़ आया। य ? जानती हो? प मी नेआज अपनेबाहुपाश म कसकर जैसेमरेेमन क सार कटुता, सारा वष खींच िलया। मझुेलगा बहुत दन बाद म फर पशाच नह ं, आदमी हूँ। यह वासना का ह दान है। तमु कैसे कहोगी क वासना आदमी को नीचेह लेजाती है!'' बनती कुछ नह ंबोली, च दर भी थोड़ देर चुप रहा। फर बोला, ''लेकन एक बात पछूूँ, बनती?'' '' या?'' ''बहुत अजब-सी बात है। सोच रहा हूँपछूूँया न पछूूँ!'' ''पछूो न!'' ''अभी मनेतुहारेमाथेपर होठ रख दय,ेतमु कुछ भी नह ंबोलीं, और म जानता हूँयह कुछ अनिुचत-सा था।

तमु प मी नह ंहो! फर भी तमुनेकुछ भी वरोध नह ंकया...?'' बनती थोड़ देर तक चुपचाप अपनेपाँव क ओर देखती रह । फर शाल केछोर सेएक डोरा खींचतेहुए बोली, ''च दर, म अपनेको कुछ समझ नह ंपाती। िसफ इतना जानती हूँक मरेेमन म तमु जाने या हो; इतनेमहान हो, इतनेमहान हो क म तुह यार नह ंकर पाती, लेकन तुहारेिलए कुछ भी करनेसेअपनेको रोक नह ंसकती। लगता हैतुहारा य व, उसक श और उसक दबुलताए,ँउसक यास और उसका स तोष, इतना महान है, इतना गहरा हैक उसकेसामनेमरेा य व कुछ भी नह ंहै। मरे प व ता, मरे अप व ता, इन सबसे यादा महान तुहार यास है।...लेकन अगर तुहारेमन म मरेेिलए जरा भी नहे हैतो तमु प मी सेस ब ध तोड़ लो। द द सेअगर म बताऊँगी तो जाने या हो जाएगा! और तमु जानतेनह ं, द द अब कैसी हो गयी ह? तमु देखो तो आँस.ू..'' ''बस! बस!'' च दर नेअपनेहाथ सेबनती का महँुब द करतेहुए कहा, ''सधुा क बात मत करो, तुह कसम है। जंदगी केजस पहलूको हम भलू चुकेह, उसेकुरेदनेसे या फायदा?'' ''अ छा, अ छा!'' च दर का हाथ हटाकर बनती बोली, ''लेकन प मी को अपनी जंदगी सेहटा दो।'' ''यह नह ंहो सकता, बनती?'' च दर बोला, ''और जो कहो, वह म कर दँगूा। हाँ, तुहारे ित आज तक जो दुयवहार हुआ है, उसकेिलए म तमुसे मा माँगता हूँ।'' ''िछह, च दर! मझुेशिम दा मत करो।'' काफ रात हो गयी थी। च दर लटे गया। बनती नेउसेरजाई उढ़ा द और टेबल पर बजली का टड रखकर बोली, ''अब चुपचाप सो जाओ।'' बनती चली गयी। च दर पड़ा-पड़ा सोचनेलगा, दिुनया गलत कहती हैक वासना पाप है। वासना सेभी प व ता और माशीलता आती है। प मी सेउसेजो कुछ िमला, वह अगर पाप हैतो आज च दर नेजो बनती को दया, उसम इतनी मा, इतनी उदारता और इतनी शा त य थी? उसकेबाद बनती को वह बहुत दलुार और प व ता सेरखनेलगा। कभी-कभी जब वह घमूनेजाता तो बनती को भी लेजाता था। यूईयस डेके दन प मी नेदोन क दावत क । बनती प मी केपीछेचाहेच दर सेप मी का वरोध कर लेपर प मी केसामनेबहुत िश ता और नहेका बरताव करती थी। डॉ टर साहब क द ली जानेक तयैार हो गयी। बनती नेकाय म म कुछ प रवतन करा िलया था। अब वह पहलेडॉ टर साहब केसाथ शाहजहाँपरुजाएगी और तब द ली। िन य करत-ेकरतेअ त म पहली फरवर को वेलोग गय।े टेशन पर बहुत-सेव ाथ और डॉ टर साहब केिम उ ह वदा देनेकेिलए आयेथे। बनती व ािथय क भीड़ सेघबराकर इधर चली आयी और च दर को बलुाकर कहने लगी-''च दर! द द केिलए एक खत तो देदो!'' ''नह ं।'' च दर नेबहुत खेऔर ढ़ वर म कहा। बनती कुछ ण तक एकटक च दर क ओर देखती रह ; फर बोली, ''च दर, मन क ा चाहेअब भी वसैी हो, लेकन तमु पर अब व ास नह ंरहा।''

च दर नेकुछ जवाब नह ंदया, िसफ हँस पड़ा। फर बोली, ''च दर, अगर कभी कोई ज रत हो तो ज र िलखना, म चली आऊँगी, समझे?'' और फर चुपचाप जाकर बठै गयी। जब च दर लौटा तो उसकेसाथ कई साथी ोफेसर थे। घर पहुँचकर वह कार लकेर प मी केयहाँचल दया। पता नह ं य बनती केजानेका च दर को कुछ थोड़ा-सा द:ुख था। गरमी का मौसम आ गया था। च दर सबुह कॉलजे जाता, दोपहर को सोता और शाम को वह िनयिमत प से प मी को लकेर घमूनेजाता। डॉ टर साहब कार छोड़ गयेथे। कार प मी और च दर को लकेर दरू-दरूका च कर लगाया करती थी। इस बार उसनेअपनी छु टयाँद ली म ह बतानेक सोची थीं। प मी नेभी तय कया था क मसरू सेलौटतेसमय जुलाई म वह एक ह तेआकर डॉ टर शुला क महेमानी करेगी और द ली केपवूप रिचत से भी िमल लगेी। यह नह ंकहा जा सकता क च दर केदन अ छ तरह नह ंबीत रहेथे। उसनेअपना अतीत भलुा दया था और वतमान को वह प मी क नशीली िनगाह म डुबो चुका था। भ व य क उसेकोई खास िच ता नह ंथी। उसेलगता था क यह प मी क िनगाह केबादल और पश केफूल क जादूभर दिुनया अमर है, शा त है। इस जादूनेहमशेा केिलए उसक आ मा को अिभभतू कर िलया है, येहोठ कभी अलग न ह गे, यह बाहुपाश इसी तरह उसेघरेेरहेगा और प मी क गरम त ण साँस सदा इसी कार उसकेकपोल को िसहराती रहगी। आदमी का व ास हमशेा सीमाएँ और अ त भलू जानेका आद होता है। च दर भी सबकुछ भलू चुका था। अ लै क एक शाम। दन-भर लूचलकर अब थक गयी थी। लेकन दन-भर क लूक वजह सेआसमान म इतनी धूल भर गयी थी क धूप भी ह क पड़ गयी थी। माली बाहर िछड़काव कर रहा था। च दर सोकर उठा था और सुती िमटा रहा था। थोड़ देर बाद वह उठा, दशाओंक ओर िन ेय देखनेलगा। बड़ उदास-सी शाम थी। सड़क भी ब कुल सनूी थी, िसफ दो-एक साइ कल-सवार लूसेबचनेकेिलए कान पर तौिलया लपटेेहुए चलेजा रहेथे। एक बफ का ठेला भी चला जा रहा था। ''जाओ, बफ लेआओ?'' च दर नेमाली को पसैेदेतेहुए कहा। माली नेठेलावाले को बलुाया। ठेलावाला आकर फाटक पर क गया। माली बफ तड़ुवा ह रहा था क एक र शा, जस पर परदा बधँा था, वह भी फाटक केपास मड़ुा और ठेलेकेपास आकर क गया। ठेलावालेनेठेला पीछेकया। र शा अ दर आया। र शा म कोई परदानशीन औरत बठै थी, लेकन र शा केसाथ कोई नह ंथा, च दर को ता जुब हुआ, कौन परदानशीन यहाँआ सकती है! र शा सेएक लड़क उतर जसेच दर नह ंजानता था, लेकन बाहर का परदा जतना ग दा और परुाना था, लड़क क पोशाक उतनी ह साफ और चुत। वह सफेद रेशम क सलवार, सफेद रेशम का चुत कुरता और उस पर बहुत ह केशरबती फालसई रंग क चुनी ओढ़ेहुई थी। वह उतर और र शावालेसेबोली, ''अब घटंेभर म आकर मझुेलेजाना।'' र शावाला िसर हलाकर चल दया और वह सीधेअ दर चल द । च दर को बड़ा अचरज हुआ। यह कौन हो सकती हैजो इतनी बतेक लफु सेअ दर चल द । उसनेसोचा, शायद शरणािथय केिलए च दा माँगनेवाली कोई लड़क हो। मगर अ दर तो कोई हैह नह ं! उसनेचाहा क रोक देफर उसनेनह ंरोका। सोचा, खुद ह अ दर खाली देखकर लौट आएगी। माली बफ लकेर आया और अ दर चला गया। वह लड़क लौट । उसकेचेहरेपर कुछ आ य और कुछ िच ता क रेखाएँथीं। अब च दर नेउसेदेखा। एक साँवली लड़क थी, कुछ उदास, कुछ बीमार-सी लगती थी। आँख बड़ -बड़

लगती थींजो रोना भलू चुक ह और हँसनेम भी अश ह। चेहरेपर एक पीली छाँह थी। ऐसा लगता था, देखनेह सेक लड़क़ द:ुखी हैपर अपनेको सभँालना जानती है। वह आयी और बड़ फ क मुकान केसाथ, बड़ िश ता के वर म बोली, ''च दर भाई, सलाम! सधुा या ससरुाल म है?'' च दर का आ य और भी बढ़ गया। यह तो च दर को जानती भी है! ''जी हाँ, वह ससरुाल म है। आप...'' ''और बनती कहाँहै?'' लड़क नेबात काटकर पछूा। '' बनती द ली म है।'' '' या उसक भी शाद हो गयी?'' ''जी नह ं, डॉ टर साहब आजकल द ली म ह। वह उ ह ंकेपास पढ़ रह है। बठै तो जाइए!'' च दर नेकुस खसकाकर कहा। ''अ छा, तो आप यह ंरहतेह अब? नौकर हो गयेह गे?'' ''जी हाँ!'' च दर नेअचरज म डूबकर कहा, ''लेकन आप इतनी जानकार और प रचय क बात कर रह ह, मने आपको पहचाना नह ं, मा क जएगा...'' वह लड़क हँसी, जैसेअपनी क मत, जंदगी, अपनेइितहास पर हँस रह हो। ''आप मझुको कैसेपहचान सकतेह? म ज र आपको देख चुक थी। मरेे-आपकेबीच म दरअसल एक रोशनदान था, मरेा मतलब सधुा सेहै!'' ''ओह! म समझा, आप गेसूह!'' ''जी हाँ!'' और गेसूनेबहुत तमीज सेअपनी चुनी ओढ़ ली। ''आप तो शाद केबाद जैसेब कुल खो ह गयीं। अपनी सहेली को भी एक खत नह ंिलखा। अ तर िमयाँमजे म ह?'' ''आपको यह सब कैसेमालमू?'' बहुत आकुल होकर गेसूबोली और उसक पीली आँख म और भी मलैापन आ गया। ''मझुेसधुा सेमालमू हुआ था। म तो उ मीद कर रहा था क आप हम लोग को एक दावत ज र दगी। लेकन कुछ मालमू ह नह ंहुआ। एक बार सधुाजी नेमझुेआपकेयहाँभजेा तो मालमू हुआ क आप लोग नेमकान ह छोड़ दया है।''

''जी हाँ, म देहरादनूम थी। अ मीजान वगैरह सभी वह ंथीं। अभी हाल म वहाँकुछ पनाहगीर पहुँचे...'' ''पनाहगीर?'' ''जी, पजंाब केिसख वगैरह। कुछ झगड़ा हो गया तो हम लोग चलेआय।ेअब हम लोग यह ंह।'' ''अ तर िमयाँकहाँह?'' ''िमरजापरुम पीतल का रोजगार कर रहेह!'' ''और उनक बीवी देहरादनूम थी। यह सजा य द आपनेउ ह?'' ''सजा क कोई बात नह ं।'' गेसूका वर घटुता हुआ-सा मालमू देरहा था। ''उनक बीवी उनकेसाथ है।'' '' या मतलब? आप तो अजब-सी बात कर रह ह। अगर म भलू नह ंकरता तो आपक शाद ...'' ''जी हाँ!'' बड़ ह उदास हँसी हँसकर गेसूबोली, ''आपसेच दर भाई, म या िछपाऊँगी, जैसेसधुा वसैेआप! मरे शाद उनसेनह ंहुई!'' ''अरे! गुताखी माफ क जएगा, सधुा तो मझुसेकह रह थी क अ तर...'' ''मझुसेमहुबत करतेह!'' गेसूबात काटकर बोली और बड़ ग भीर हो गयी और अपनी चुनी केछोर म टँके हुए िसतारेको तोड़ती हुई बोली, ''म सचमचु नह ंसमझ पायी क उनकेमन म या था। उनकेघरवाल नेमरेेबजाय फूल को यादा पस द कया। उ ह नेफूल सेह शाद कर ली। अब अ छ तरह िनभ रह हैदोन क । फूल तो इतने अरसेम एक बार भी हम लोग सेिमलनेनह ंआयी!'' ''अ छा...'' च दर चुप होकर सोचनेलगा। कतनी बड़ वचंना हुई इस लड़क क जंदगी म! और कतनेदबे श द म यह कहकर चुप हो गयी! एक भी आँसूनह ं, एक भी िससक नह ं। सयंत वर और फ क मुकान, बस। च दर चुपचाप उठकर अ दर गया। महरा जन आ गयी थी। कुछ ना ता और शरबत भजेनेकेिलए कहकर च दर बाहर आया। गेसूचुपचाप लॉन क ओर देख रह थी, शूय िनगाह स।ेच दर आकर बठै गया और बोला-''बहुत धोखा दया आपको!'' ''िछह! ऐसी बात नह ंकहत,ेच दर भाई! कौन जानता हैक यह अ तर क मजबरू रह हो! जसको मनेअपना सरताज माना उसकेिलए ऐसा खयाल भी दल म लाना गुनाह है। म इतनी िगर हुई नह ंक यह सोचँूक उ ह ने धोखा दया!'' गेसूदाँत तलेजबान दबाकर बोली। च दर दंग रह गया। या गेसूअपनेदल सेकह रह है? इतना अखंड व ास हैगेसूको अ तर पर! शरबत आ गया था। गेसूनेतक लफु नह ंकया। लेकन बोली, ''आप बड़ेभाई ह। पहलेआप शु क जए।'' ''आपक फर कभी अ तर सेमलुाकात नह ंहुई?'' च दर नेएक घटँूपीकर कहा। ''हुई य नह ं? कई बार वह अ मीजान केपास आय।े''

''आपनेकुछ नह ंकहा?'' ''कहती या? यह सब बात कहन-ेसनुनेक होती ह! और फर फूल वहाँआराम सेहै, अ तर भी फूल को जान से यादा यार सेरखतेह, यह मरेेिलए बहुत है। और अब कहकर या क ँगी! जब फूल सेशाद तय हुई और वे राजी हो गयेतभी मनेकुछ नह ंकहा, अब तो फूल क माँग, फूल का सहुाग मरेेिलए सबुह क अजान से यादा पाक है।'' गेसूनेशरबत म िनगाह डुबायेहुए कहा। च दर ण-भर चुप रहा फर बोला- ''अब आपक शाद अ मीजान कब कर रह ह?'' ''कभी नह ं! मनेक द कर िलया हैक म शाद ताउ नह ंक ँगी। देहरादनूकेमटैिनट सटर म काम सीख रह थी। कोस परूा हो गया। अब कसी अ पताल म काम क ँगी।'' ''आप...!'' '' य , आपको ता जुब य हुआ? मनेअ मीजान को इस बात केिलए राजी कर िलया है। म अपनेपरै पर खड़ होना चाहती हूँ।'' च दर नेशरबत सेबफ िनकालकर फकतेहुए कहा- ''म आपक जगह होता तो दसूर शाद करता और अ तर सेभरसक बदला लतेा!'' ''बदला!'' गेसूमुकराकर बोली, ''िछह, च दर भाई! बदला, गुरेज, नफरत इससेआदमी न कभी सधुरा हैन सधुरेगा। बदला और नफरत तो अपनेमन क कमजोर को जा हर करतेह। और फर बदला म लँूकसस?े उसस,े दल क तनहाइय म म जसकेसजदेपड़ती हूँ। यह कैसेहो सकता है?'' गेसूकेमाथेपर व ास का तजे दमक उठा, उसक बीमार आँख म धूप लहलहा उठ और उसका कंचनलता-सा तन जगमगानेलगा। कुछ ऐसी ढ़ता थी उसक आवाज म, ऐसी गहराई थी उसक विन म क च दर देखता ह रह गया। वह जानता था क गेसूके दल म अ तर केिलए कतना मे था, वह यह भी जानता था क गेसूअ तर क शाद केिलए कस तरह पागल थी। वह सारा सपना ताश केमहल क तरह िगर गया। और प र थितय नेनह ं, खुद अ तर नेधोखा दया, लेकन गेसूहैक माथेपर िशकन नह ं, भ ह म बल नह ं, होठ पर िशकायत नह ं। नार के जीवन का यह कैसा अिमट व ास था! यानी जसेगेसूनेअपने मे का वणम दर समझा था, वह वालामखुी बनकर फूट गया और उसनेदद क पघली आग क धारा म गेसूको डुबो देनेक कोिशश क लेकन गेसूहैक अटल च टान क तरह खड़ है। च दर केमन म कह ंकोई ट स उठ । उसकेदल क धडक़न नेकह ंपर उससेपछूा। '...और च दर, तमुने या कया? तमु पुष थे। तुहारेसबल कंधेकसी के यार का बोझ य नह ंढो पाय,ेच दर?' लेकन च दर नेअपनी अ त:करण क आवाज को अनसनुी करतेहुए पछूा- ''तो आपकेमन म जरा भी दद नह ंअ तर को न पानेका?'' ''दद?'' गेसूक आवाज डूबनेलगी, िनगाह क जद पाँखुरय पर ह क पानी क लहर दौड़ गयी-''दद, यह तो िसफ सधुा समझ सकती है, च दर भाई! बचपन सेवह मरेेिलए या थे, यह वह जानती है। म तो उनका सपना

देखत-ेदेखतेउनका सपना ह बन गयी थी, लेकन खैर दद इंसान केयक देको और मजबतू न कर दे, आदमी के कदम को और ताकत न दे, आदमी के दल को ऊँचाई न देतो इंसान या? दद का हाल पछूतेह आप! कयामत के रोज तक मरे म यत उ ह ंका आसरा देखेगी, च दर भाई! लेकन इसकेिलए जंदगी म तो खामोश ह रहना होगा। बदं घर म जलतेहुए िचराग क तरह घलुना होगा। और अगर मनेउनको अपना माना हैतो वह िमलकर ह रहगे। आज न सह कयामत केबाद सह । महुबत क दिुनया म जैसेएक दन उनके बना कट जाता हैवसैेएक जंदगी उनकेबना कट जाएगी...लेकन उसकेबाद वेमरेेहोकर रहगे।'' च दर का दल काँप उठा। गेसूक आवाज म तारेबरस रहेथे... ''और आपसे या कहूँ, च दर भाई! या आपक बात मझुसेिछपी है? म जानती हूँ। सबकुछ जानती हूँ। सच पिूछए तो जब मनेदेखा क आप कतनी खामोशी सेअपनी दिुनया म आग लगतेदेख रहेह, और फर भी हँस रहेह, तो मनेआपसेसबक िलया। हम नह ंमालमू था क हम और आप, दोन भाई-बहन क क मत एक-सी है।'' च दर केमन म जानेकतनेघाव कसक उठे। उसकेमन म जानेकतना दद उमड़न-ेसा लगा। गेसूउसे या समझ रह हैमन म और वह कहाँपहुँच चुका है! जसनेच दर क जंदगी सेअपनेमन का द प जलाया, वह आज देवता केचरण तक पहुँच गया, लेकन च दर केमन क द पिशखा? उसनेअपनेयार क िचता जला डाली। च दर के महँु पर लािन क कािलमा छा गयी। गेसूचुपचाप बठै थी। सहसा बोली, ''च दर भाई, आपको याद है, पछलेसाल इ ह ंदन म सधुा सेिमलनेआयी थी और हसरत आपको मरेा सलाम कहनेगया था?'' ''याद हैï!'' च दर नेबहुत भार वर म कहा। ''इस एक साल म दिुनया कतनी बदल गयी!'' गेसूनेएक गहर साँस लकेर कहा, ''एक बार येदन चलेजातेह, फर बदेद कभी नह ंलौटत!ेकभी-कभी सोचती हूँक सधुा होती तो फर कॉलजे जात,े लास म शोर मचात,ेभागकर घास म लटेत,ेबादल को देखत,ेशरेकहतेऔर वह च दर क और हम अ तर क बात करत.े..'' गेसूका गला भर आया और एक आँसूचूपड़ा... ''सधुा और सधुा क याह-शाद का हाल बताइए। कैसेह उनकेशौहर?'' च दर केमन म आया क वह कह दे, गेस,ू य ल जत करती हो! म वह च दर नह ंहूँ। मनेअपनेव ास का म दर कर दया...म ते हूँ...मनेसधुा के यार का गला घ ट दया है...लेकन पुष का गव! पुष का छल! उसे यह भी नह ंमालमू होनेदया क उसका व ास चूर-चूर हो चुका हैऔर पछलेकतनेह मह न सेउसनेसधुा को खत िलखना भी ब द कर दया हैऔर यह भी नह ंमालमू करनेका यास कया क सधुा मरती हैया जीती! घटंा-भर तक दोन सधुा केबारेम बात करतेरहे। इतनेम र शावाला लौट आया। गेसूनेउसेठहरनेका इशारा कया और बोली, ''अ छा, जरा सधुा का पता िलख द जए।'' च दर नेएक कागज पर पता िलख दया। गेसूनेउठने का उप म कया तो च दर बोला, ''बैठए अभी, आपसेबात करकेआज जानेकतनेदन क बात याद आ रह ह!'' गेसूहँसी और बठै गयी। च दर बोला, ''आप अभी तक क वताएँिलखती ह?'' ''क वताए.ँ..'' गेसूफर हँसी और बोली, '' जंदगी कतनी हमगीर है, कतनी परुशोर, और इस शोर म नगम क हक कत कतनी! अब ह डयाँ, नस, शेर- वाइंट, प टयाँऔर मरहम म दन बीत जाता है। अ छा च दर भाई, सधुा

अभी उतनी ह शोख है? उतनी ह शरारती है!'' ''नह ं।'' च दर नेबहुत उदास वर म कहा, ''जाओ, कभी देख आओ न!'' ''नह ं, जब तक कह ंजगह नह ंिमल जाती, तब तक तो इतनी आजाद नह ंिमलगेी। अभी यह ंहूँ। उसी को बलुवाऊँगी और उसकेपित देवता को िलखँूगी। कतना सनूा लग रहा हैघर जैसेभतू का बसरेा हो। जैसेपरेत रहते ह !'' '' य 'परेत' बना रह ह आप? म रहता हूँइसी घर म।'' च दर बोला। ''अरे, मरेा मतलब यह नह ंथा!'' गेसूहँसतेहुए बोली, ''अ छा, अब मझुेतो अ मीजान नह ंभजेगी, आज जाने कैसेअकेलेआनेक इजाजत देद । आपको कसी दन बलुवाऊँतो आइएगा ज र!'' ''हाँ, आऊँगा गेस,ूज र आऊँगा!'' च दर नेबहुत नहेसेकहा। ''अ छा भाईजान, सलाम!'' ''नम त!े'' गेसूजाकर र शा पर बठै गयी और परदा तन गया। र शा चल दया। च दर एक अजीब-सी िनगाह सेदेखता रहा जैसेअपनेअतीत क कोई खोयी हुई चीज ढूँढ़ रहा हो, फर धीरे-धीरेलौट आया। सरूज डूब गया था। वह गुसलखाना ब द कर नहानेबठै गया। जानेकहाँ-कहाँमन भटक रहा था उसका। च दर मन का अ थर था, मन का बरुा नह ंथा। गेसूनेआज उसकेसामनेअचानक वह त वीर रख द थी जसम वह वग क ऊँचाइय पर मडँराया करता था। और जानेकैसा दद-सा उसकेमन म उठ गया था, गेसूनेअपनेअजानेम ह च दर केअ व ास, च दर क ित हंसा को बहुत बड़ हार द थी। उसनेिसर पर पानी डाला तो उसेलगा यह पानी नह ंहैजंदगी क धारा है, पघलेहुए अंगार क धारा जसम पडक़र केवल वह ज दा बच पाया है, जसकेअंग म यार का अमतृ है। और च दर केमन म या है? महज वासना का वष...वह सड़ा हुआ, गला हुआ शर र मा जो केवल स नपात केजोर से चल रहा है। उसनेअपनेमन केअमतृको गली म फक दया है...उसने या कया है? वह नहाकर आया और शीशेकेसामनेखड़ा होकर बाल काढऩेलगा- फर शीशेक ओर एकटक देखकर बोला, ''मझुे या देख रहेहो, च दर बाब!ूमझुेतो तमुनेबबाद कर डाला। आज कई मह नेहो गयेऔर तमुनेएक िच ठ तक नह ंिलखी, िछह!'' और उसनेशीशा उलटकर रख दया। महरा जन खाना लेआयी। उसनेखाना खाया और सुत-सा पड़ रहा। ''भइया, आज घमूैन जाबो?'' ''नह ं!'' च दर नेकहा और पड़ा-पड़ा सोचनेलगा। प मी केयहाँनह ंगया। यह गेसूदसूरेकमरेम बठै थी। इस कमरेम बनती उसेकैलाश का िच दखा रह थी।...िच उसकेमन म घमूनेलगे...च दर, या इस दिुनया म तुह ंरह गयेथेफोटो दखाकर पस द करानेकेिलए...च दर का हाथ उठा। तड़ सेएक तमाचा...च दर, चोट तो नह ंआयी...मान िलया क मरेेमन नेमझुसेन कहा हो, तमुसेतो मरेा मन कोई

बात नह ंिछपाता...तो च दर, तमु शाद कर य नह ंलते?े पापा लड़क देख आएगँे...हम भी देख लगे...तो फर तमु बठैो तो हम पढ़गे, वरना हम शरम लगती है...च दर, तमु शाद मत करना, तमु इस सबकेिलए नह ंबनेहो...नह ं सधुा, तुहारेव पर िसर रखकर कतना स तोष िमलता है... आसमान म एक-एक करकेतारेटूटतेजा रहेथे। वह प मी केयहाँनह ंगया। एक दन...दो दन...तीन दन...अ त म चौथेदन शाम को प मी खुद आयी। च दर खाना खा चुका था और लॉन पर टहल रहा था। प मी आयी। उसनेवागत कया लेकन उसक मुकराहट म उ लास नह ंथा। ''कहो कपरू, आये य नह ं? म समझी, तमु बीमार हो गय!े'' प मी नेलॉन पर पड़ एक कुस पर बठैतेहुए कहा, ''आओ, बठैो न!'' उसनेच दर क ओर कुस खसकायी। ''नह ं, तमु बठैो, म टहलता रहूँगा!'' च दर बोला और कहनेलगा, ''पता नह ं य प मी, दो-तीन दन सेतबीयत बहुत उदास-सी है। तुहारेयहाँआनेको तबीयत नह ंहुई!'' '' य , या हुआ?'' प मी नेपछूा और च दर का हाथ पकड़ िलया। च दर प मी क कुस केपीछेखड़ा हो गया। प मी नेच दर केदोन हाथ पकडक़र अपनेगलेम डाल िलयेऔर अपना िसर च दर सेटकाकर उसक ओर देखने लगी। च दर चुप था। न उसनेप मी केगाल थपथपाय,ेन हाथ दबाया, न अलक बखेर ंऔर न िनगाह म नशा ह बखेरा। औरत अपने ित आनेवालेयार और आकषण को समझनेम चाहेएक बार भलू कर जाय,ेलेकन वह अपने ित आनेवाली उदासी और उपेा को पहचाननेम कभी भलू नह ंकरती। वह होठ पर होठ के पश केगूढ़तम अथ समझ सकती है, वह आपके पश म आपक नस सेचलती हुई भावना पहचान सकती है, वह आपकेव सेिसर टकाकर आपकेदल क धड़कन क भाषा समझ सकती है, य द उसेथोड़ा-सा भी अनभुव हैऔर आप उसकेहाथ पर हाथ रखतेह तो पश क अनभुिूत सेह जान जाएगी क आप उससेकोई कर रहेह, कोई याचना कर रहेह, सा वना देरहेह या सा वना माँग रहेह। मा माँग रहेह या मा देरहेह, यार का ार भ कर रहेह या समा कर रहेह। वागत कर रहेह या वदा देरहेह। यह पलुक का पश हैया उदासी का चाव और नशेका पश हैया ख नता और बमेनी का। प मी च दर केहाथ को छूतेह जान गयी क हाथ चाहेगरम ह , लेकन पश बड़ा शीतल है, बड़ा नीरस। उसम वह पघली हुई आग क शराब नह ंहैजो अभी तक च दर केहोठ पर धधकती थी, च दर के पश म बखरती थी। ''कुछ तबीयत खराब हैकपरू, बठै जाओ!'' प मी नेउठकर च दर को जबरद ती बठाल दया, ''आजकल बहुत महेनत पड़ती है, य ? चलो, तमु हमारेयहाँरहो!'' प मी म केवल शर र क यास थी, यह कहना प मी के ित अ याय होगा। प मी म एक बहुत गहर हमदद थी च दर केिलए। च दर अगर शर र क यास को जीत भी लतेा तो उसक हमदद को वह नह ंठुकरा पाता था। उस

हमदद का ितर कार होनेसेप मी द:ुखी होती थी और उसेवह तभी वीकृत समझती थी जब च दर उसके प के आकषण म डूबा रहे। अगर पुष केहोठ म तीखी यास न हो, बाहुपाश म जहर न हो तो वासना क इस िशिथलता सेनार फौरन समझ जाती हैक स ब ध म दरू आती जा रह है। स ब ध क घिन ता को नापनेका नार केपास एक ह मापदंड है, चुबन का तीखापन! च दर केमन म ह नह ंवरन पश म भी इतनी बखरती हुई उदासी थी, इतनी उपेा थी क प मी ममाहत हो गयी। उसकेिलए यह पहली पराजय थी! आजकल प मी जान जाती थी क च दर का रोम-रोम इस व प मी क साँस म डूबा हुआ है। लेकन प मी नेदेखा क च दर उसक बाँह म होतेहुए भी दरू, बहुत दरून जानेकन वचार म उलझा हुआ है। वह उससेदरूचला जा रहा है, बहुत दरू। प मी क धड़कन अ त- य त हो गयीं। उसक समझ म नह ं, आया वह या करे! च दर को या हो गया? या प मी का जादूटूट रहा है? प मी नेअपनी पराजय सेकंुठत होकर अपना हाथ हटा िलया और चुपचाप महँु फेरकर उधर देखनेलगी। च दर चाहेजतना उदास हो लेकन प मी क उदासी वह नह ंसह सकता था। बरु या भली, प मी इस व उसक सनूी जंदगी का अकेला सहारा थी और प मी क हमदद का वह बहुत कृत था। वह समझ गया, प मी य उदास है! उसनेप मी का हाथ खींच िलया और अपनेहोठ उसक हथेिलय पर रख दयेऔर खींचकर प मी का िसर अपनेकंधेपर रख िलया... पुष केजीवन म एक ण आता हैजब वासना उसक कमजोर , उसक यास, उसका नशा, उसका आवशे नह ं रह जाती। जब वासना उसक हमदद का, उसक सा वना का साधन बन जाती है। जब वह नार को इसिलए बाँह म नह ंसमटेता क उसक बाँह यासी ह, वह इसिलए उसेबाँह म समटे लतेा हैक नार अपना दखु भलू जाए। जस व वह नार क सी पया पलक केनशेम नह ंवरन उसक आँख केआँसूसखुानेकेिलए उसक पलक पर होठ रख देता है, जीवन केउस ण म पुष जस नार सेसहानभुिूत रखता है, उसकेमन क पराजय को भलुानेकेिलए वह नार को बाहुपाश केनशेम बहला देना चाहता है! लेकन इन बाहुपाश म यास जरा भी नह ंहोती, आग जरा भी नह ं होती, िसफ नार को बहलावा देनेका यास मा होता है। इसम कोई स देह नह ंक च दर केमन पर छाया हुआ प मी के प का गुलाबी बादल उचटता जा रहा था, नशा उखड़ा-सा रहा था। लेकन च दर प मी को द:ुखी नह ंकरना चाहता था, वह भरसक प मी को बहलायेरखता था...लेकन उसकेमन म कह ं-न-कह ंफर अंत का एक तफूान चलनेलगा था... गेसूनेउसकेसामनेउसक साल-भर पहलेक जंदगी का वह िच रख दया था, जसक एक झलक उस अभागे को पागल कर देनेकेिलए काफ थी। च दर जैस-ेतसैेमन को प थर बनाकर, अपनी आ मा को प क शराब म डुबोकर, अपनेव ास म छलकर उसको भलुा पाया था। उसेजीता पाया था। लेकन गेसूनेऔर गेसूक बात नेजैसे उसकेमन म मूछत पड़ अिभशाप क छाया म फर ाण- ित ा कर द थी और आधी रात केस नाटेम फर च दर को सनुाई देता था क उसकेमन म कोई काली छाया बार-बार िससकनेलगती हैऔर च दर के दय से टकराकर वह दन बार-बार कहता था, ''देवता! तमुनेमरे ह या कर डाली! मरे ह या, जसेतमुनेवग और ई र से बढ़कर माना था...'' और च दर इन आवाज सेघबरा उठता था। व मरण क एक तरंग जहाँच दर को प मी केपास खींच लायी थी, वहाँअतीत के मरण क दसूर तरंग उसे

वगे म उलझाकर जैसेफर उसेदरूखींच लेजानेकेिलए याकुल हो उठ । उसको लगा क प मी केिलए उसकेमन म जो मादक नशा था, उस पर लािन का कोहरा छाता जा रहा हैऔर अभी तक उसनेजो कुछ कया था, उसकेिलए उसी केमन म कह ं-न-कह ंपर ह क -सी अ िच झलकनेलगी थी। फर भी प मी का जादूबद तरूकायम था। वह प मी के ित कृत था और वह प मी को कह ं, कसी भी हालत म दखुी नह ंकरना चाहता था। भलेवह गुनाह करकेअपनी कृत ता जा हर य न कर पाय,ेलेकन जैसेबनती केमन म च दर के ित जो ा थी, वह निैतकता- अनिैतकता केब धन सेऊपर उठकर थी, वसैेह च दर केमन म प मी के ित कृत ता पुय और पाप केब धन से ऊपर उठकर थी। बनती नेएक दन च दर सेकहा था क य द वह च दर को अस तु करती है, तो वह उसेइतना बड़ा गुनाह लगता हैक उसकेसामनेउसेकसी भी पाप-पुय क परवा नह ंहै। उसी तरह च दर सोचता था क स भव हैक उसका और प मी का यह स ब ध पापमय हो, लेकन इस स ब ध को तोड़कर प मी को अस तुऔर द:ुखी करना इतना बड़ा पाप होगा जो अ य है। लेकन वह नशा टूट चुका था, वह साँस धीमी पड़ गयी थी...अपनी हर कोिशश केबावजूद वह प मी को उदास होनेसेबचा न पाता था। एक दन सबुह जब वह कॉलजे जा रहा था क प मी क कार आयी। प मी बहुत ह उदास थी। च दर नेआते ह उसका वागत कया। उसकेकान म एक नीलेप थर का बुदा था, जसक ह क छाँह गाल पर पड़ रह थी। च दर नेझुककर वह नीली छाँह चूम ली। प मी कुछ नह ंबोली। वह बठै गयी और फर च दर सेबोली, ''म लखनऊ जा रह हूँ, कपरू!'' ''कब? आजï?'' ''हाँ, अभी कार स।े'' '' य ?'' ''य ह , मन ऊब गया! पता नह ं, कौन-सी छाँह मझु पर छा गयी है। म शायद लखनऊ सेमसरू चली जाऊँ।'' ''म तुह जानेनह ंदँगूा, पहलेतो तमुनेबताया नह ं!'' ''तुह ंनेकहाँपहलेबताया था!'' '' या?'' ''कुछ भी नह ं! अ छा, चल रह हूँ।'' ''सनुो तो!'' ''नह ं, अब रोक नह ंसकतेतमु...बहुत दरूजाना हैच दर...'' वह चल द । फर वह लौट और जैसेयगु-यगु क यास बझुा रह हो, च दर केगलेम झूल गयी और कस िलया च दर को...पाँच िमनट बाद सहसा वह अलग हो गयी और फर बना कुछ बोलेअपनी कार म बठै गयी। ''प मी...तुह हुआ या यह?''

''कुछ नह ं, कपरू।'' प मी कार टाट करतेहुए बोली, ''म तमुसेजतनी ह दरूरहूँउतना ह अ छा है, मरेेिलए भी, तुहारेिलए भी! तुहारेइन दन के यवहार नेमझुेबहुत कुछ िसखा दया है?'' च दर िसर सेपरैतक लािन सेकंुठत हो उठा। सचमचु वह कतना अभागा है! वह कसी को भी स तु नह ं रख पाया। उसकेजीवन म सधुा भी आयी और प मी भी, एक को उसकेपुय नेउससेछ न िलया, दसूर को उसका गुनाह उससेछ नेिलयेजा रहा है। जानेउसके ह का मािलक कतना ूर खलाड़ हैक हर कदम पर उसक राह उलट देता है। नह ं, वह प मी को नह ंखो सकता-उसनेप मी का कॉलर पकड़ िलया, ''प मी, तुह हमार कसम है- बरुा मत मानो! म तुह जानेनह ंदँगूा।'' प मी हँसी-बड़ ह क ण लेकन सश हँसी। अपनेकॉलर को धीम-ेसेछुड़ाकर च दर क अँगुिलय को कपोल से दबा दया और फर व केपास सेएक िलफाफा िनकालकर च दर केहाथ म देदया और कार टाट कर द ...पीछे मडुक़र नह ंदेखा...नह ंदेखा। कार कड़ुवेधुएँका बादल च दर क ओर उड़ाकर आगेचल द । जब कार ओझल हो गयी, तब च दर को होश आया क उसकेहाथ म एक िलफाफा भी है। उसनेसोचा, फौरन कार लकेर जायेऔर प मी को रोक ल।े फर सोचा, पहलेपढ़ तो ल,ेयह है या चीज? उसनेिलफाफा खोला और पढऩेलगा- ''कपरू, एक दन तुहार आवाज और बट क चीख सनुकर अपणू वशे म ह अपनेशगंृार-गहृसेभाग आयी थी और तुह फूल केबीच म पाया था, आज तुहार आवाज मरेेिलए मकू हो गयी हैऔर अस तोष और उदासी के काँट केबीच म तुह छोडक़र जा रह हूँ। जा रह हूँइसिलए क अब तुह मरे ज रत नह ंरह । झूठ य बोल,ँूअब या, कभी भी तुह मरे ज रत नह ं रह थी, लेकन मनेहमशेा तुहारा दुपयोग कया। झूठ य बोल, तमु मरेेपित सेभी अिधक समीप रहेहो। तमुसे कुछ िछपाऊँगी नह ं। म तमुसेिमली थी, जब म एकाक थी, उदास थी, लगता था क उस समय तमु मरे सनुसान दिुनया म रोशनी केदेवदतूक तरह आयेथे। तमु उस समय बहुत भोल,ेबहुत सकुुमार, बहुत ह प व थे। मरेेमन म उस दन तुहारेिलए जानेकतना यार उमड़ आया! म पागल हो उठ । मनेतुह उस दन सलेामी क कहानी सनुायी थी, िसनमेा घर म, उसी अभािगन सलेामी क तरह म भी पगै बर को चूमनेकेिलए याकुल हो उठ । देखा, तमु प व ता को यार करतेहो। सोचा, य द तमुसेयार ह जीतना है, तो तमुसेप व ता क ह बात क ँ। म जानती थी क सेस यार का आव यक अंग है। लेकन मन म तीखी यास लकेर भी मनेतमुसेसेस- वरोधी बात करनी शु क ं। महँुपर प व ता और अ दर म भोग का िस ा त रखतेहुए भी मरेा अंग-अंग यासा हो उठा था...तुह होठ तक खींच लायी थी, लेकन फर साहस नह ंहुआ। फर मनेउस छोकर को देखा, उस िनता त ितभाह न दबुलमना छोकर िमस सधुा को। वह कुछ भी नह ंथी, लेकन म देखतेह जान गयी थी क तुहारेभा य का न है, जाने य उसेदेखतेह म अपना आ म व ास खो- सा बठै। उसके य व म कुछ न होतेहुए भी कम-स-ेकम अजब-सा जादूथा, यह म भी वीकार करती हूँ, लेकन

थी वह छोकर ह ! तुह न पानेक िनराशा और तुह न पानेक असीम यास, दोन केपीस डालनेवालेसघंष सेभागकर, म हमालय म चली आयी। जतना तीखा आकषण होता हैकपरूकभी-कभी नार उतनी ह दरूभागती है। अगर कोई याला महँुसेन लगाकर दरूफक दे, तो समझ लो क वह बहेद यासा है, इतना यासा क तिृ क क पना सेभी घबराता है। दन-रात उस पहाड़ क धवल चो टय म तुहार िनगाह मुकराती थीं, पर म लौटनेका साहस न कर पाती थी। लौट तो देखा क तमु अकेलेहो, िनराश हो। और थोड़ा-थोड़ा उलझेहुए भी हो। पहलेमनेतमु पर प व ता क आड़ म वजय पानी चाह थी, अब तमु पर वासना का सहारा लकेर छा गयी। तमु मझुेबरुा समझ सकतेहो, लेकन काश क तमु मरे यास को समझ पात,ेकपरू! तमुनेमझुे वीकार कया। वसैेनह ंजैसेकोई फूल शबनम को वीकार करे। तमुनेमझुेउस तरह वीकार कया जैसेकोई बीमार आदमी मा फया (अफ म) केइ जेशन को वीकार करे। तुहार यासी और बीमार वृयाँबदली नह ं, िसफ बहेोश होकर सो गयीं। लेकन कपरू, पता नह ंकसके पश सेवेएकाएक बखर गयीं। म जानती हूँ, इधर तमुम या प रवतन आ गया है। म तुह उसकेिलए अपराधी नह ंठहराती, कपरू ! म जानती हूँतमु मरेे ित अब भी कतनेकृत हो, कतने नहेशील हो लेकन अब तमुम वह यास नह ं, वह नशा नह ं। तुहारेमन क वासना अब मरेेिलए एक तरस म बदलती जा रह है। मझुेवह दन याद है, अ छ तरह याद हैच दर, जब तुहारेजलतेहुए होठ नेइतनी गहर वासना सेमरेेहोठ को समटे िलया था क मरेेिलए अपना य व ह एक सपना बन गया था। लगता था, सभी िसतार का तजे भी इसक एक िचनगार केसामनेफ का है। लेकन आज होठ होठ ह, आग केफूल नह ंरहे-पहलेमरे एक झलक से तुहारेरोम-रोम म सकैड़ इ छाओंक आँिधयाँगरज उठती थीं...आज तुहार नस का खून ठंडा है। तुहार िनगाह पथरायी हुई ह और तमु इस तरह वासना मरे ओर फक देतेहो, जैसेतमु कसी पालतूब ली को पावरोट का टुकड़ा देरहेहो। म जानती हूँक हम दोन केस ब ध क उ णता ख म हो गयी है। अब तुहारेमन म महज एक तरस है, एक कृत ता है, और कपरू, वह म वीकार नह ंकर सकँूगी। मा करना, मरेा भी वािभमान है। लेकन मनेकह दया क म तमुसेिछपाऊँगी नह ं! तमु इस म म कभी मत रहना क मनेतुह यार कया था। पहलेम भी यह सोचती थी। कल मझुेलगा क मनेअपनेको आज तक धोखा दया था। मनेइधर तुहार ख नता केबाद अपनेजीवन पर बहुत सोचा, तो मझुेलगा क यार जैसी थायी और गहर भावना शायद मरेेजैसेरंगीन ब हमखु वभावशाली केिलए हैह नह ं। यार जैसी ग भीर और खतरनाक तफूानी भावना को अपनेक ध पर ढोने का खतरा देवता या बुह न ह उठा सकतेह-तमु उसेवहन कर सकतेहो (कर रहेहो। यार क ित या भी यार क ह प रचायक हैकपरू), मरेेिलए आँसओुंक लहर म डूब जाना स भव नह ं। या तो यार आदमी को बादल क ऊँचाई तक उठा लेजाता है, या वग सेपाताल म फक देता है। लेकन कुछ ाणी ह, जो न वग केह न नरक के, वेदोन लोक केबीच म अ धकार क परत म भटकतेरहतेह। वेकसी को यार नह ंकरत,ेछायाओंको पकड़नेका यास करतेह, या शायद यार करतेह या िनर तर नयी अनभुिूतय केपीछेद वानेरहतेह और यार ब कुल करते

ह नह ं। उनको न द:ुख होता हैन सखु, उनक दिुनया म केवल सशंय, अ थरता और यास होती है...कपरू, म उसी अभागेलोक क एक यासी आ मा थी। अपनेएका त सेघबराकर तुह अपनेबाहुपाश म बाँधकर तुहारेव ास को वग सेखींच लायी थी। तमु वग- देवता, भलूकर मरेेअिभश लोक म आ गयेथे। आज मालमू होता हैक फर तुहारेव ास नेतुह पकुारा है। म अपनी यास म खुद धधक उठूँ, लेकन तुह मनेअपना िम माना था। तमु पर म आँच नह ंआनेदेना चाहती। तमु मरेेयो य नह ं, तमु अपनेव ास केलोक म लौट जाओ। म जानती हूँतमु मरेेिलए िच तत हो। लेकन मनेअपना रा ता िन त कर िलया है। ी बना पुष केआ य केनह ंरह सकती। उस अभागी को जैसे कृित नेकोई अिभशाप देदया है।...म थक गयी हूँइस मेलोक क भटकन स।े...म अपनेपित केपास जा रह हूँ। वे मा कर दगे, मझुेव ास है। उ ह ंकेपास य जा रह हूँ? इसिलए मरेेिम , क म अब सोच रह हूँक ी वाधीन नह ंरह सकती। उसके पास प ी व केिसवा कोई चारा नह ं। जहाँजरा वाधीन हुई क बस उसी अ धकूप म जा पड़ती हैजहाँम थी। वह अपना शर र भी खोकर तिृ नह ंपाती। फर यार सेतो मरेा व ास जैसेउठा जा रहा है, यार थायी नह ंहोता। म ईसाई हूँ, पर सभी अनभुव केबाद मझुेपता लगता हैक ह दओुंकेयहाँ मे नह ंवरन धम और सामा जक प र थितय केआधार पर ववाह क र ित बहुत वैािनक और नार केिलए सबसे यादा लाभदायक है। उसम नार को थोड़ा ब धन चाहे य न हो लेकन दािय व रहता है, स तोष रहता है, वह अपनेघर क रानी रहती है। काश क तमु समझ पातेक खुलेआकाश म इधर-उधर भटकनेकेबाद, तफूान सेलड़नेकेबाद म कतनी आतरुहो उठ हूँ ब धन केिलए, और कसी सश डाल पर बनेहुए सखुद, सकुोमल नीड़ म बसरेा लनेेकेिलए। जस नीड़ को म इतने दन पहलेउजाड़ चुक थी, आज वह फर मझुेपकुार रहा है। हर नार केजीवन म यह ण आता हैऔर शायद इसीिलए ह दूमे केबजाय ववाह को अिधक मह व देतेह। म तुहारेपास नह ं क । म जानती थी क हम दोन केस ब ध म ार भ सेइतनी विच ताएँथींक हम दोन का स ब ध थायी नह ंरह सकता था, फर भी जन ण म हम दोन एक ह तफूान म फँस गयेथे, वे ण मरेेिलए अमूय िनिध रहगे। तमु बरुा न मानना। म तमुसेजरा भी नाराज नह ंहूँ। म न अपनेको गुनहगार मानती हूँ, न तुह, फर भी अगर तमु मरे सलाह मान सको तो मान लनेा। कसी अ छ -सी सीधी-साद ह दूलड़क से अपना ववाह कर लनेा। कसी बहुत बौ क लड़क , जो तुह यार करनेका दम भरती हो, उसकेफ देम न फँसना कपरू, म उ और अनभुव दोन म तमुसेबड़ हूँ। ववाह म भावना या आकषण अकसर जहर बखेर देता है। याह करनेकेबाद एक-आध मह नेकेिलए अपनी प ी स हत मरेेपास ज र आना, कपरू। म उसेदेखकर वह स तोष पा लगँूी, जो हमार स यता नेहम अभाग सेछ न िलया है। अभी म साल भर तक तमुसेनह ंिमलगँूी। मझुेतमुसेअब भी डर लगता हैलेकन इस बीच म तमु बट का खयाल रखना। कभी-कभी उसेदेख लनेा। पयेक कमी तो उसेन होगी। बीवी भी उसेऐसी िमल गयी है, जसनेउसे ठ क कर दया है...उस अभागेभाई सेअलग होतेहुए मझुेकैसा लग रहा है, यह तमु जानत,ेअगर तमु बहन होत।े अगला प तुह तभी िलखँूगी जब मरेेपित सेमरेा समझौता हो जाएगा...नाराज तो नह ंहो?

- िमला ड ूज।'' च दर प मी को लौटानेनह ंगया। कॉलजे भी नह ंगया। एक ल बा-सा खत बनती को िलखता रहा और इसक ितिल प कर दोन न थी कर भजे दयेऔर उसकेबाद थककर सो गया... बना खाना खाय!े तीन गिमय क छु टयाँहो गयी थींऔर च दर छु टयाँबतानेद ली गया था। सधुा भी आयी हुई थी। लेकन च दर और सधुा म बोलचाल नह ंथी। एक दन शाम केव डॉ टर साहब नेच दर सेकहा, ''च दर, सधुा इधर बहुत अनमनी रहती है, जाओ इसेकह ंघमुा लाओ।'' च दर बड़ मुकल सेराजी हुआ। दोन पहलेकनॉट लसे पहुँचे। सधुा नेबहुत फ क और टूटती हुई आवाज म कहा, ''यहाँबहुत भीड़ है, मरे तबीयत घबराती है।'' च दर नेकार घमुा द शहर सेबाहर रोहतक क सड़क पर, द ली सेप ह मील दरू। च दर नेएक बहुत हर -भर जगह म कार रोक द । कसी बहुत परुानेपीर का टूटा-फूटा मजार था और क केचबतूरेको फोडक़र एक नीम का पड़ेउग आया था। चबतूरे केदो-तीन प थर िगर गयेथे। चार-पाँच नीम केपड़े लगेथेऔर क केप थर केपास एक िचराग बझुा हुआ पड़ा था और कई एक सखूी हुई फूल-मालाएँहवा सेउड़कर नीचेिगर गयी थीं। क केआस-पास ढेर नीम केितनकेऔर सखूेहुए नीम केफूल जमा थे। सधुा जाकर चबतूरेपर बठै गयी। दरू-दरूतक स नाटा था। न आदमी न आदमजाद। िसफ गोधूिल केअलसातेहुए झ क म नीम चरमरा उठतेथे। च दर आकर सधुा क दसूर ओर बठै गया। चबतूरेपर इस ओर सधुा और उस ओर च दर, बीच म िचर-नीरव क ... सधुा थोड़ देर बाद मड़ु और च दर क ओर देखा। च दर एकटक क क ओर देख रहा था। सधुा नेएक सखूा हार उठाया और च दर पर फककर कहा, ''च दर, या हमशेा मझुेइसी भयानक नरक म रखोगे? या सचमचु हमशेा केिलए तुहारा यार खो दया हैमन?े'' ''मरेा यार?'' च दर हँसा, उसक हँसी उस स नाटेसेभी यादा भयकंर थी...''मरेा यार! अ छ याद दलायी तमुन!ेम आज यार म व ास नह ंकरता। या यह कहूँक यार केउस प म व ास नह ंकरता!'' '' फर?'' '' फर या, उस समय मरेेमन म यार का मतलब था याग, क पना, आदश। आज म समझ चुका हूँक यह सब झूठ बात ह, खोखलेसपनेह!'' ''तब?'' ''तब! आज म व ास करता हूँक यार केमानेिसफ एक है; शर र का स ब ध! कम-स-ेकम औरत केिलए। औरत बड़ बात करेगी, आ मा, पनुज म, परलोक का िमलन, लेकन उसक िस िसफ शर र म हैऔर वह अपने यार क मंजल पार कर पुष को अ त म एक ह चीज देती है-अपना शर र। म तो अब यह व ास करता हूँसधुा क वह औरत मझुेयार करती हैजो मझुेशर र देसकती है। बस, इसकेअलावा यार का कोई प अब मरेेभा य

म नह ं।'' च दर क आँख म कुछ धधक रहा था...सधुा उठ , और च दर केपास खड़ हो गयी-''च दर, तमु भी एक दन ऐसेहो जाओगे, इसक मझुेकभी उ मीद नह ंथी। काश क तमु समझ पातेक...'' सधुा नेबहुत दद भरे वर म कहा। '' नहे है!'' च दर ठठाकर हँस पड़ा-और उसनेसधुा क ओर मडुक़र कहा, ''और अगर म उस नहे का माण माँगँूतो? सधुा!'' दाँत पीसकर च दर बोला, ''अगर तमुसेतुहारा शर र माँगँूतो?'' ''च दर!'' सधुा चीखकर पीछेहट गयी। च दर उठा और पागल क तरह उसनेसधुा को पकड़ िलया, ''यहाँकोई नह ंहै-िसवा इस क के। तमु या कर सकती हो? बहुत दन सेमन म एक आग सलुग रह है। आज तुह बबाद कर दँूतो मन क नारक य वदेना बझु जाए....बोलो!'' उसनेअपनी आँख क पघली हुई आग सधुा क आँख म भरकर कहा। सधुा ण-भर सहमी-पथरायी सेच दर क ओर देखती रह फर सहसा िशिथल पड़ गयी और बोली, ''च दर, म कसी क प ी हूँ। यह ज म उनका है। यह माँग का िस दरूउनका है। इस शर र का शगंृार उनका है। मझु गला घ टकर मार डालो। मनेतुह बहुत तकलीफ द है। लेकन...'' ''लेकन...'' च दर हँसा और सधुा को छोड़ दया, ''म तुह नहे करती हूँ, लेकन यह ज म उनका है। यह शर र उनका है-ह:! ह:! या अ दाज ह वचंना के। जाओ सधुा...म तमुसेमजाक कर रहा था। तुहारेइस जूठेतन म रखा या है?'' सधुा अलग हटकर खड़ हो गयी। उसक आँख सेिचनगा रयाँझरनेलगीं, ''च दर, तमु जानवर हो गय;ेम आज कतनी शिम दा हूँ। इसम मरेा कसरू है, च दर! म अपनेको दंड दँगूी, च दर! म मर जाऊँगी! लेकन तुह इंसान बनना पड़ेगा, च दर!'' और सधुा नेअपना िसर एक टूटेहुए ख भेपर पटक दया। च दर क आँख खुल गयी, वह थोड़ देर तक सपनेपर सोचता रहा। फर उठा। बहुत अजब-सा मन था उसका। बहुत परा जत, बहुत खोया हुआ-सा, बहेद खिसयाहट सेभरा हुआ था। उसकेमन म एकाएक खयाल आया क वह कसी मनोरंजन म जाकर अपनेको डुबो दे-बहुत दन सेउसनेिसनमेा नह ंदेखा था। उन दन बनाड शॉ का 'सीजर ऐडं लयोपेा' लगा हुआ था, उसनेसोचा क प मी क िम ता का प रपाक िसनमेा म हुआ था, उसका अ त भी वह िसनमेा देखकर मनाएगा। उसनेकपड़ेपहन,ेचार बजेसेमैटनी थी, और व हो रहा था। कपड़ेपहनकर वह शीशेके सामनेआकर बाल सवँारनेलगा। उसेलगा, शीशेम पड़ती हुई उसक छाया उससेकुछ िभ न है, उसनेऔर गौर से देखा-छाया रह यमय ढंग सेमुकरा रह थी; वह सहसा बोली- '' या देख रहा है?'' 'मखुड़ा या देखेदरपन म।' एक लड़क सेपरा जत और दसूर सेसपनेम ित हंसा लनेेका कलकं नह ंदख पड़ता तझुे? अपनी छ व िनरख रहा है? पापी! पितत!'' कमरेक द वार नेदोहराया-''पापी! पितत!'' च दर तड़प उठा, पागल-सा हो उठा। कंघा फककर बोला, ''कौन हैपापी? म हूँपापी? म हूँपितत? मझुेतमु नह ं समझत।ेम िचर-प व हूँ। मझुेकोई नह ंजानता।''

''कोई नह ंजानता! हा, हा!'' ित ब ब हँसा, ''म तुहार नस-नस जानता हूँ। तमु वह हो न जसनेआज सेडेढ़ साल पहलेसपना देखा सधुा केहाथ सेलकेर अमतृ बाँटनेका, दिुनया को नया स देश देकर पगै बर बननेका। नया स देश! खूब नया स देश दया मसीहा! प मी... बनती...सधुा...कुछ और छोक रयाँबटोर ल।ेच र ह न!'' ''मनेकसी को नह ंबटोरा! जो मरे जंदगी म आया, अपन-ेआप आया, जो चला गया, उसेमनेरोका नह ं। मरेे मन म कह ंभी अहम क यास नह ंथी, कभी भी वाथ नह ंथा। या म चाहता तो सधुा को अपनेएक इशारेसे अपनी बाँह म नह ंबाँध सकता था!'' ''शाबाश! और नह ंबाँध पायेतो सधुा सेभी जी भरकर बदला िनकाल रहा है। वह मर रह हैऔर तूउस पर नमक िछड़कनेसेबाज नह ंआया। और आज तो उसेएका त म करनेका सपना देख अपनी पलक को देवम दर क तरह प व बना िलया तनू!ेकतनी उ नित क हैतरे आ मा न!ेइधर आ, तरेा हाथ चूम ल।ँू'' ''चुप रहो! पराजय क इस वलेा म कोई भी यंय करनेसेबाज नह ंआता। म पागल हो जाऊँगा।'' ''और अभी या पागल सेकम हैत?ू अहंकार पश!ुतूबट सेभी गया-गुजरा है। बट पागल था, लेकन पागल कु क तरह काटना नह ंजानता था। तूकाटना भी जानता हैऔर अपनेभयानक पागलपन को साधना और याग भी सा बत करता रहता है। द भी!'' ''बस करो, अब तमु सीमा लाँघ रहेहो।'' च दर नेमुठयाँकसकर जवाब दया। '' य , गुसा हो गय,ेमरेेदो त! अहंवाद इतनेबड़ेहो और अपनी त वीर देखकर नाराज होतेहो! आओ, तुह आ ह तेसेसमझाऊँ, अभागे! तूकहता हैतनूेवाथ नह ंकया। वकलांग देवता! वह वाथ हैजो अपनेसेऊपर नह ं उठ पाता! तरेेिलए अपनी एक साँस भी दसूरेकेमन केतफूान सेभी यादा मह वपणू रह है। तनूेअपनेमन क उपेा केपीछेसधुा को भ ट म झ क दया। प मी केअ व थ मन को पहचानकर भी उसके प का उपभोग करने म नह ंहचका, बनती को यार न करतेहुए भी बनती को तनूे वीकार कया, फर सब का ितर कार करता गया...और कहता हैतूवाथ नह ं। बट पागल हो लेकन वाथ नह ंहै।'' ''ठहरो, गािलयाँमत दो, मझुेसमझाओ न क मरेेजीवन-दशन म कहाँपर गलती रह है! गािलय सेमरेा कोई समझौता नह ं।'' ''अ छा, समझो! देखो, म यह नह ंकहता क तमु ईमानदार नह ंहो, तमु श शाली नह ंहो, लेकन तमु अ तमखुी रहे, घोर य वाद रहे, अहंकार त रहे। अपनेमन क वकृितय को भी तमुनेअपनी ताकत समझनेक कोिशश क । कोई भी जीवन-दशन सफल नह ंहोता अगर उसम बा यथाथ और यापक स य धूप-छाँह क तरह न िमला हो। म मानता हूँक तनूेसधुा केसाथ ऊँचाई िनभायी, लेकन अगर तरेेय व को, तरेेमन को, जरा-सी ठेस पहुँचती तो तूगुमराह हो गया होता। तनूेसधुा के नहेका िनषधे कर दया। तनूेबनती क ा का ितर कार कया। तनूेप मी क प व ता क ...और इसेअपनी साधना समझता है? तूयाद कर; कहाँथा तूएक वष पहलेऔर अब कहाँहै?'' च दर नेबड़ कातरता सेित ब ब क ओर देखा और बोला, ''म जानता हूँ, म गुमराह हूँलेकन बईेमान नह ं!

तमु मझुे य िध कार रहेहो! तमु कोई रा ता बता दो न! एक बार उसेभी आजमा ल।ँू'' ''रा ता बताऊँ! जो रा ता तमुनेएक बार बनाया था, उसी पर तमु मजबतू रह पाय?े फर या एक केबाद दसूरे रा तेपर चहलदमी करना चाहतेहो? देखो कपरू, यान सेसनुो। तमुसेशायद कसी नेकभी कहा था, शायद बट ने कहा था क आदमी तभी तक बड़ा रहता हैजब तक वह िनषधे करता चलता है। पता नह ंकस मानिसक आवशे म एक केबाद दसूरेत व का व वसं और वनाश करता चलता है। हर च टान को उखाड़क फकता रहता हैऔर तमुने यह जीवन-दशन अपना िलया था, भलू सेया अपनेअनजानेम ह । तुहार आ मा म एक श थी, एक तफूान था। लेकन यह ल य था। तुहार जंदगी म लहर उठनेलगींलेकन गहराई नह ं। और याद रखो च दर, स य उसे िमलता हैजसक आ मा शा त और गहर होती हैसमु क गहराई क तरह। समु क ऊपर सतह क तरह जो व ुध और तफूानी होता है, उसकेअंत म चाहेकतनी गरज हो लेकन स य क शा त अमतृमयी आवाज नह ं होती।'' ''लेकन वह गहराई मझुेिमली नह ं?'' ''बताता हूँ-घबराते य हो! देखो, तमुम बहुत बड़ा अधैय रहा है। श रह , पर धैय और ढ़ता ब कुल नह ं। तमु ग भीर समुतल न बनकर एक सश लेकन अशा त लहर बन गयेजो हर कनारेसेटकराकर उसेतोड़नेकेिलए य हो उठ । तमुम ठहराव नह ंथा। साधना नह ंथी! जानतेहो य ? तुह जहाँसेजरा भी तकलीफ िमली, अवरोध िमला वह ंसेतमुनेअपना हाथ खींच िलया! वह ंतमु भाग खड़ेहुए। तमुनेहमशेा उसका िनषधे कया-पहलेतमुने समाज का िनषधे कया, य को साधना का के बनाया; फर य का भी िनषधे कया। अपनेवचार म, अ तमखुी भावनाओंम डूब गय,ेकम का िनषधे कया। फर तो कम म ऐसी भागदौड़, ऐसी वमखुता शु हुई क बस! न मानवता का यार जीवन म ितफिलत कर सका, न सधुा का। प मी हो या बनती, हरेक सेतूिन य खलौनेक तरह खेलता गया। काश क तनूेसमाज केिलए कुछ कया होता! सधुा केिलए कुछ कया होता लेकन तूकुछ न कर पाया। जसनेतझुेजधर चाहा उधर उ ेरत कर दया और तूअंधेऔर इ छा वह न परतं अंधड़ क तरह उधर ह हू-हूकरता हुआ दौड़ गया। माना मनेक समाज केआधार पर बनेजीवन-दशन म कुछ किमयाँह: लेकन अंशत: ह उसेवीकार कर कुछ काम करता, माना क सधुा के यार सेतझुेतकलीफ हुई पर उसक मह ा केह आधार पर तू कुछ िनमाण कर लेजाता। लेकन तूतो जरा-सेअवरोध केबहानेस पणू का िनषधे करता गया। तरेा जीवन िनषधे क िन यता क मानिसक ित याओंक शखंृला रहा है। अभागे, तनूेहमशेा जंदगी का िनषधे कया है। दिुनया को वीकार करता, यथाथ को वीकार करता, जंदगी को वीकार करता और उसकेआधार पर अपनेमन को, अपनेमन के यार को, अपनेजीवन को स तिुलत करता, आगेबढ़ता लेकन तनूेअपनी मन क गंगा को य क छोट -सी सीमा म बाँध िलया, उसेएक पोखरा बना दया, पानी सड़ गया, उसम गंध आनेलगी, सधुा के यार क सीपी जसम स य और सफलता का मोती बन सकता था, वह मर गयी और केहुए पानी म वकृित और वासना केक ड़ेकुलबलुाने लगे। शाबाश! या अमतृपाया हैतनू!ेध य है, अमतृ-पु!'' ''बस करो! यह यंय म नह ंसह सकता! म या करता!'' ''कैसी लाचार का वर है! िछह, असफल पगै बर! साधना यथाथ को वीकार करकेचलती है, उसका िनषधे करके नह ं। हमारेयहाँई र को कहा गया हैनिेत निेत, इसका मतलब यह नह ंक ई र परम िनषधे व प है। गलत, निेत

म 'न' तो केवल एक वण है। 'इित' दो वण ह। एक िनषधे तो कम-स-ेकम दो वीकृितयाँ। इसी अनपुात म क पना और यथाथ का सम वय य नह ंकया तनू?े'' ''म नह ंसमझ पाता-यह दशन मरे समझ म नह ंआता!'' ''देखो, इसको ऐसेसमझो। घबराओ मत! कैलाश नेअगर नार के य व को नह ंसमझा, सधुा क प व ता को ितर कृत कया, लेकन उसनेसमाज केिलए कुछ तो कया। गेसूनेअपनेववाह का िनषधे कया, लेकन अ तर के ित अपनेयार का िनषधे तो नह ंकया। अपनेय व का िनमाण कया। अपनेच र का िनमाण कया। यानी गेस,ू एक लड़क सेतमु हार गय,ेिछह!'' ''लेकन म कतना थक गया था, यह तो सोचो। मन को कतनी ऊँची-नीची घा टय स,ेमौत सेभी भयानक रा त सेगुजरनेम और कोई होता तो मर गया होगा। म जंदा तो हूँ!'' ''वाह, या जंदगी है!'' ''तो या क ँ, यह रा ता छोड़ दँ?ूयह य व तोड़ डाल?ँू'' '' फर वह िनषधे और व वसं क बात। िछह देखो, चलनेको तो गाड़ का बलै भी रा तेपर चलता है! लेकन सकैड़ मील चलनेकेबाद भी वह गाड़ का बलै ह बना रहता है। या तमु गाड़ केबलै बनना चाहतेहो? नह ंकपरू! आदमी जंदगी का सफर तय करता है। राह क ठोकर और मसुीबत उसके य व को पुता बनाती चलती ह, उसक आ मा को प रप व बनाती चलती ह। या तमुम प रप वता आयी? नह ं। म जानता हूँ, तमु अब मरेा भी िनषधे करना चाहतेहो। तमु मरे आवाज को भी चुप करना चाहतेहो। आ म- वचंना तो तरेा पशेा हो गया है। कतना खतरनाक है तूअब...तूमरेा भी...ितर कार...करना...चाहता...है।'' और छाया, धीरे-धीरेएक वह ब दुबनकर अ य हो गयी। च दर चुपचाप शीशेकेसामनेखड़ा रहा। फर वह िसनमेा नह ंगया। च दर सहसा बहुत शा त हो गया। एक ऐसेभोलेब चेक तरह जसनेअपराध कम कया, जससेनकुसान यादा हो गया था, और जस पर डाँट बहुत पड़ थी। अपनेअपराध क चेतना सेवह बोल भी नह ंपाता था। अपना सारा दखु अपनेऊपर उतार लनेा चाहता था। वहाँएक ऐसा स नाटा था जो न कसी को आनेकेिलए आम त कर सकता था, न कसी को जानेसेरोक सकता था। वह एक ऐसा मदैान था जस पर क सार पगडंडयाँतक िमट गयी ह ; एक ऐसी डाल थी जस पर केसारेफूल झर गयेह , सारेघ सलेउजड़ गयेह । मन म उसकेअसीम कंुठा और वदेना थी, ऐसा था क कोई उसकेघाव छूलेतो वह आँसओुंम बखर पड़े। वह चाहता था, वह सबसे मा माँग ल,े बनती स,ेप मी स,ेसधुा सेऔर फर हमशेा केिलए उनक दिुनया सेचला जाए। कतना दखु दया था उसनेसबको! इसी मन: थित म एक दन गेसूनेउसेबलुाया। वह गया। गेसूक अ मीजान तो सामनेआयींपर गेसूनेपरदे म सेह बात क ं। गेसूनेबताया क सधुा का खत आया हैक वह ज द ह आएगी, गेसूसेिमलन।ेगेसूको बहुत ता जुब हुआ क च दर केपास कोई खबर य नह ंआयी!

च दर जब घर पहुँचा तो कैलाश का एक खत िमला- '' य च दर, बहुत दन सेतुहारा कोई खत नह ंआया, न मरेेपास न इनकेपास। या नाराज हो हम दोन स?े अ छा तो लो, तुह एक खुशखबर सनुा दँ।ूम सांकृितक िमशन म शायद ऑ ेिलया जाऊँ। डॉ टर साहब नेकोिशश कर द है। आधा पया मरेा, आधा सरकार का। तुह भला या फुरसत िमलगेी यहाँआनेक ! म ह इ ह लकेर दो रोज केिलए आऊँगा। इनक कोई मसुलमान सखी हैवहाँ, उससेयेभी िमलना चाहती ह। हमार खाितर का इ तजाम रखना-म 11 मई को सबुह क गाड़ से पहुँचँूगा। तुहारा-कैलाश।'' सधुा केआनेकेपहलेच दर नेघर क ओर नजर दौड़ायी। िसवा ाइंग म और लॉन केसचमचु बाक घर इतना ग दा पड़ा था क गेसूसच ह कह रह थी क जैसेघर म ते रहतेह । आदमी चाहेजतना सफाई-पस द और सुिचपणू य न हो, लेकन औरत केहाथ म जाने या जादूहैक वह घर को छूकर ह चमका देती है। औरत के बना घर क यव था सभँल ह नह ंसकती। सधुा और बनती कोई भी नह ंथी और तीन ह मह नेम बगँलेका प बगड़ गया था। उसनेसारा बगँला साफ कराया। हालाँक दो ह दन केिलए सधुा और कैलाश आ रहेथे, लेकन उसनेइस तरह बगँलेक सफाई करायी जैसेकोई नया समारोह हो। सधुा का कमरा बहुत सजा दया था और सधुा क छत पर दो पलगँ डलवा दयेथे। लेकन इन सब इंतजाम केपीछेउतनी ह िन य भावह नता थी जैसेक वह एक होटल का मनैजेर हो और दो आग तकु का इ तजाम कर रहा हो। बस। मानसनू केदन म अगर कभी कसी नेगौर कया हो तो बा रश होनेकेपहलेह हवा म एक नमी, प य पर एक ह रयाली और मन म एक उमगं-सी छा जाती है। आसमान का रंग बतला देता हैक बादल छानवेालेह, बदँू रम झमानेवाली ह। जब बादल बहुत नजद क आ जातेह, बदँू पड़नेकेपहलेह दरूपर िगरती हुई बदँू क आवाज वातावरण पर छा जाती है, जसेधुरवा कहतेह। य - य सधुा केआनेका दन नजद क आ रहा था, च दर केमन म हवाएँकरवट बदलनेलग गयी थीं। मन म उदास सनुसान म धुरवा उमड़न-ेघमुड़नेलगा था। मन उदास सनुसान आकुल ती ा म बचेैन हो उठा था। च दर अपनेको समझ नह ंपा रहा था। नस म एक अजीब-सी घबराहट मचलनेलगी थी, जसका वह व ेषण नह ंकरना चाहता था। उसका य व अब पता नह ं य कुछ भयभीत-सा था। इ तहान ख म हो रहेथे, और जब मन क बचेैनी बहुत बढ़ जाती थी तो पर क क आदत केमतुा बक वह का पयाँजाँचनेबठै जाता था। जस समय पर क केघर म पा रवा रक कलह हो, मन म अंत हो या दमाग म फतरूहो, उस समय उ ह कॉ पयाँजाँचनेसेअ छा शरण थल नह ंिमलता। अपनेजीवन क पर ा म फेल हो जाने क खीझ उतारनेकेिलए लडक़ को फेल करनेकेअलावा कोई अ छा रा ता ह नह ंहै। च दर जब बहेद द:ुखी होता

तो वह कॉ पयाँजाँचता। जस दन सबुह सधुा आ रह थी, उस रात को तो च दर का मन ब कुल बकेाब-ूसा हो गया। लगता था जैसे उसनेसोचन-ेवचानेसेह इनकार कर दया हो। उस दन च दर एक ण को भी अकेला न रहकर भीड़-भाड़ म खो जाना चाहता था। सबुह वह गंगा नहानेगया, कार लकेर। कॉलजे सेलौटकर दोपहर को अपनेएक िम केयहाँचला गया। लौटकर आया तो नहाकर एक कताब क दकुान पर चला गया और शाम होनेतक वह ंखड़ा-खड़ा कताब उलटता और खर दता रहा। वहाँउसनेबस रया का गीत-संह देखा जो ' बनती' नाम बदल उसने' व लव' नाम से छपवा िलया था और मखु गितशील क व बन गया था। उसनेवह संह भी खर द िलया। अब सधुा केआनेम मुकल सेबारह घटंेक देर थी। उसक तबीयत बहुत घबरानेलगी थी और वह बस रया केका य-संह म डूब गया। उन सड़ेहुए गीत म ह अपनेको भलुानेक कोिशश करनेलगा और अ त म उसने अपनेको इतना थका डाला क तीन बजेका अलाम लगाकर वह सो गया। सधुा क गाड़ साढ़ेचार बजेआती थी। जब वह जागा तो रात अपनेमखमली पखं पसारेनींद म डूबी हुई दिुनया पर शा त का आशीवाद बखेर रह थी। ठंडेझ केलहरा रहेथेऔर उन झ क पर प व ता छायी हुई थी। यह पछुआ केझ केथे। ा महुूत म ाचीन आय नेजो रह य पाया था, वह धीरे-धीरेच दर क आँख केसामनेखुलन-ेसा लगा। उसेलगा जैसेयह उसके य व क नयी सबुह है। एक बड़ा शा त सगंीत उसक पलक पर ओस क तरह िथरकनेलगा। ितज केपास एक बड़ा-सा िसतारा जगमगा रहा था! च दर को लगा जैसेयह उसके यार का िसतारा हैजो जानेकस अ ात पाताल म डूब गया था और आज सेवह फर उग गया है। उसनेएक अ ध व ासी भोलेब चेक तरह उस िसतारेको हाथ जोडक़र कहा, ''मरे कंचन जैसी सधुा रानी के यार, तमु कहाँखो गयेथे? तमु मरेेसामने नह ंरहे, म जानेकन तफूान म उलझ गया था। मरे आ मा म सार गुता सधुा के यार क थी। उसेमनेखो दया। उसकेबाद मरे आ मा पीलेप ेक तरह तफूान म उड़कर जानेकस क चड़ म फँस गयी थी। तमु मरे सधुा के यार हो न! मनेतुह सधुा क भोली आँख म जगमगातेहुए देखा था। वदेमं-जैसेइस प व सबुह म आज फर मरेे पाप म िल तन को अमतृ सेधोनेआयेहो। म व ास दलाता हूँक आज सधुा केचरण पर अपनेजीवन केसारे गुनाह को चढ़ाकर हमशेा केिलए मा माँग लगँूा। लेकन मरे साँस क साँस सधुा! मझुे मा कर दोगी न?'' और विच -सेभावावशे और पलुक सेउसक आँख म आँसूआ गय।ेउसेयाद आया क एक दन सधुा नेउसक हथेिलय को होठ सेलगाकर कहा था-जाओ, आज तमु सधुा के पश सेप व हो...काश क आज भी सधुा अपनेिमसर -जैसे होठ सेच दर क आ मा को चूमकर कहे-जाओ च दर, अभी तक जंदगी केतफूान नेतुहार आ मा को बीमार, अप व कर दया था...आज सेतमु वह च दर हो। अपनी सधुा केच दर। ह रणी-जैसी भोली-भाली सधुा केमहान प व च दर... तयैार होकर च दर जब टेशन पहुँचा तो वह जैसेमोहा व -सा था। जैसेवह कसी जादूया टोना पढ़ा-हुआ-सा घमू रहा था और वह जादूथा सधुा के यार का पनुरावतन। गाड़ घटंा-भर लटेथी। च दर को एक पल काटना मुकल हो रहा था। अ त म िसगनल डाउन हुआ। कुिलय म हलचल मची और च दर पटर पर झुककर देखनेलगा। सबुह हो गयी थी और इंजन दरूपर एक कालेदाग-सा दखाई पड़ रहा था, धीरे-धीरेवह दाग बड़ा होनेलगा और ल बी-सी हर पछँू क तरह लहराती हुई ेन आती दखाई पड़ ।

च दर केमन म आया, वह पागल क तरह दौड़कर वहाँपहुँच जाए। जस दन एक घोर अ व ासी म व ास जाग जाता है, उस दन वह पागल-सा हो उठता है। उसेलग रहा था जैसेइस गाड़ म सभी ड बेखाली ह। िसफ एक ड बे म अकेली सधुा होगी। जो आतेह च दर को अपनी यार-भर िनगाह म समटेलगेी। गाड़ के लटेफाम पर आतेह हलचल बढ़ गयी। कुिलय क दौड़धूप, मसुा फर क हड़बड़ , सामान क उठा-धर सेलटेफॉम भर गया। च दर पागल -सा इस सब भीड़ को चीरकर ड बेदेखनेलगा। एक दफेपरू गाड़ का च कर लगा गया। कह ंभी सधुा नह ंदखाई द । जैसेआँसूसेउसका गला ँधनेलगा। या आयेनह ंयेलोग! क मत कतना यंय करती हैउसस!ेआज जब वह कसी केचरण पर अपनी आ मा उ सग कर फर प व होना चाहता था तो सधुा ह नह ंआयी। उसनेएक च कर और लगाया और िनराश होकर लौट पड़ा। सहसा सकेड लास केएक छोटे- सेड बेम सेकैलाश नेझाँककर कहा, ''कपरू!'' च दर मड़ुा, देखा क कैलाश झाँक रहा है। एक कुली सामान उतारकर खड़ा है। सधुा नह ंहै। जैसेकसी नेझ केसेउसकेमन का द प बझुा दया। सामान बहुत थोड़ा-सा था। वह ड बेम चढक़र बोला, ''सधुा नह ंआयी?'' ''आयी ह, देखो न! कुछ तबीयत खराब हो गयी है। जी िमतला रहा है।'' और उसनेबाथ म क ओर इशारा कर दया। सधुा बाथ म म बगल म लोटा रखेिसर झुकायेबठै थी-''देखो! देखती हो?'' कैलाश बोला, ''देखो, कपरू आ गया।'' सधुा नेदेखा और मुकल सेहाथ जोड़ पायी होगी क उसेिमतली आ गयी...कैलाश दौड़ा और उसक पीठ पर हाथ फेरनेलगा और च दर सेबोला-''पखंा लाओ!'' च दर हत भ था। उसकेमन नेसपना देखा था...सधुा िसतार क तरह जगमगा रह होगी और अपनी रोशनी क बाँह म च दर के ाण को सलुा देगी। जादगूरनी क तरह अपनेयार केपखं सेच दर क आ मा केदाग प छ देगी। लेकन यथाथ कुछ और था। सधुा जादगूरनी, आ मा क रानी, प व ता क सा ा ी सधुा, बाथ म म बठै हैऔर उसका पित उसेसा वना देरहा था। '' या कर रहेहो, च दर!...पखंा उठाओ ज द स।े'' कैलाश नेय ता सेकहा। च दर च क उठा और जाकर पखंा झलनेलगा। थोड़ देर बाद महँुधोकर सधुा उठ और कराहती हुई-सी जाकर सीट पर बठै गयी। कैलाश नेएक त कया पीछेलगा दया और वह आँख ब द करकेलटेगयी। च दर नेअब सधुा को देखा। सधुा उजड़ चुक थी। उसका रस मर चुका था। वह अपनेयौवन और प, चंचलता और िमठास क एक जद छाया मा रह गयी थी। चेहरा दबुला पड़ गया था और ह डयाँिनकल आयी थीं। चेहरा दबुला होनेसेलगता था आँख फट पड़ती ह। वह चुपचाप आँख ब द कयेपड़ थी। च दर पखंा हाँक रहा था, कैलाश एक सटूकेस खोलकर दवा िनकाल रहा था। गाड़ यह ंआकर क जाती है, इसिलए कोई ज द नह ंथी। कैलाश नेदवा द । सधुा नेदवा पी और फर उदास, बहुत बार क, बहुत बीमार वर म बोली, ''च दर, अ छेतो हो! इतनेदबुलेकैसे लगतेहो? अब कौन तुहारेखान-ेपीनेक परवा करता होगा!'' सधुा नेएक गहर साँस ली। कैलाश ब तर लपटे रहा था। ''तुह या हो गया है, सधुा?''

''मझुेसखु-रोग हो गया है!'' सधुा बहुत ीण हँसी हँसकर बोली, ''बहुत सखु म रहनेसेऐसा ह हो जाता है।'' च दर चुप हो गया। कैलाश नेब तर कुली को देतेहुए कहा, ''इ ह नेतो बीमार केमारेहम लोग को परेशान कर रखा है। जानेबीमा रय को या महुबत हैइनस!ेचलो उठो।'' सधुा उठ । कार पर सधुा केसाथ पीछेसामान रख दया गया और आगेकैलाश और च दर बठैे। कैलाश बोला, ''च दर, तमु बहुत धीमे ाइव करना वरना इ ह च कर आनेलगेगा...'' कार चल द । च दर कैलाश क वदेश-या ा और कैलाश च दर केकॉलजे केबारेम बात करतेरहे। मुकल सेघर तक कार पहुँची होगी क कैलाश बोला, ''यार च दर, तुह तकलीफ तो होगी लेकन एक दन केिलए कार तमु मझुेदेसकतेहो?'' '' य ?'' ''मझुेजरा र वाँतक बहुत ज र काम सेजाना है, वहाँकुछ लोग सेिमलना है, कल दोपहर तक म चला आऊँगा।'' ''इसकेमतलब मरेेपास नह ंरहोगेएक दन भी?'' ''नह ं, इ ह छोड़ जाऊँगा। लौटकर दन-भर रहूँगा।'' ''इ ह छोड़ जाओगे? नह ंभाई, तमु जानतेहो क आजकल घर म कोई नह ंहै।'' च दर नेकुछ घबराकर कहा। ''तो या हुआ, तमु तो हो!'' कैलाश बोला और च दर केचेहरेक घबराहट देखकर हँसकर बोला, ''अरेयार, अब तमु पर इतना अ व ास नह ंहै। अ व ास करना होता तो याह केपहलेह कर लते।े'' च दर मुकरा उठा, कैलाश नेच दर केक धेपर हाथ रखकर धीमेसेकहा ता क सधुा न सनु पाय-े''वसैेचाहे मझुेकुछ भी अस तोष य न हो, लेकन इनका च र तो सोनेका है, यह म खूब परख चुका हूँ। इनका ऐसा च र बनानेकेिलए तो म तुह बधाई दँगूा, च दर! और फर आज केयगु म!'' च दर नेकुछ जवाब नह ंदया। कार पो टको म लगी। सधुा, कैलाश, च दर उतरे। माली और नौकर दौड़ आय,ेसधुा नेउन सबसेउनका हाल पछूा। अ दर जातेह महरा जन दौडक़र सधुा सेिलपट गयी। सधुा को बहुत दलुार कया। कैलाश महँु-हाथ धो चुका था, नहानेचला गया। महरा जन चाय बनानेलगी। सधुा भी महँु-हाथ धोनेऔर नहाने चली गयी। कैलाश तौिलया लपटेेनहाकर आया और बठै गया। बोला, ''आज और कल क छुट लेलो, च दर! इनक तबीयत ठ क नह ंहैऔर मझुेजाना ज र है!'' ''अ छा, लेकन आज तो जाकर हा जर देना ज र होगा। फर लौट आऊँगा!'' महरा जन चाय और ना ता ले आयी। कैलाश नेना ता लौटा दया तो महरा जन बोली, ''वाह, दामाद हुइकेअकेली चाय पीबो भइया, अब हन डॉ टर साहब सिुनह तो का क हह।''

''नह ंमाँजी, मरेा पटे ठ क नह ंहै। दो दन केजागरण सेआ रहा हूँ। फर लौटकर खाऊँगा। लो च दर, चाय पयो।'' ''सधुा को आनेदो!'' च दर बोला। ''वह पजूा-पाठ करकेखाती ह।'' ''पजूा-पाठ!'' च दर दंग रह गया, ''सधुा पजूा-पाठ करनेलगी?'' ''हाँभाई, तभी तो हमार माताजी अपनी बहूपर मरती ह। असल म वह पजूा-पाठ करती थीं। शुआत क इ ह ने पजूा केबरतन धोनेसेऔर अब तो उनसेभी यादा प क पजुा रन बन गयी ह।'' कैलाश नेइधर-उधर देखा और बोला, ''यार, यह मत समझना म सधुा क िशकायत कर रहा हूँ, लेकन तमु लोग नेमझुेठ क नह ंचुना!'' '' य ?'' च दर कैलाश के यवहार पर मुध था। ''इन जैसी लड़ कय केिलए तमु कोई क व या कलाकार या भावकु लड़काढूँढ़तेतो ठ क था। मरेेजैसा यावहा रक और नीरस राजनीितक इनकेउपयु नह ंहै। घर भर इनसेबहेद खुश है। जब सेयेगयी ह, माँऔर शकंर भइया दोन नेमझुेनालायक करार देदया है। इ ह ंसेपछूकर सब करतेह, लेकन मनेजो सोच रखा था, वह मझुेनह ंिमल पाया!'' '' य , या बात है?'' च दर नेपछूा, ''गलती बताओ तो हम इ ह समझाए।ँ'' ''नह ं, देखो गलत मत समझो। म यह नह ंकहता क इनक गलती है। यह तो गलत चुनाव क बात है।'' कैलाश बोला, ''न इसम मरेा कसरू, न इनका! म चाहता था कोई लड़क जो मरेेसाथ राजनीित का काम करती, मरे सबलता और दबुलता दोन क सिंगनी होती। इसीिलए इतनी पढ़ -िलखी लड़क सेशाद क । लेकन इ ह धम और सा ह य म जतनी िच है, उतनी राजनीित सेनह ं। इसिलए मरेेय व को हण भी नह ंकर पायीं। वसैेमरे शार रक यास को इ ह नेचाहेसमपण कया, वह भी एक बमेनी स,ेउससेतन क यास भलेह बझु जाती हो कपरू, लेकन मन तो यासा ह रहता है...बरुा न मानना। म बहुत प बात करता हूँ। तमुसेिछपाना या?...और वा य केमामलेम ये इतनी लापरवाह ह क म बहुत द:ुखी रहता हूँ।'' इतनेम सधुा नहाकर आती हुई दख पड़ । कैलाश चुप हो गया। सधुा क ओर देखकर बोला, ''मरे अटैची भी ठ क कर दो। म अभी चला जाऊँवरना दोपहर म तपना होगा।'' सधुा चली गयी। सधुा केजातेह कैलाश बोला, ''भरसक म इ ह द:ुखी नह ंहोनेदेता, हाँ, अकसर येदखुी हो जाती ह; लेकन म या क ँ, यह मरे मजबरू है, वसैेम इ ह भरसक सखुी रखनेका यास करता हूँ...और येभी जायज-नाजायज हर इ छा केसामनेझुक जाती ह, लेकन इनकेदल म मरेेिलए कोई जगह नह ंहै, वह जो एक प ी केमन म होती है। लेकन खैर, जंदगी चलती जा रह है। अब तो जैसेहो िनभाना ह है!'' इतनेम सधुा आयी और बोली, ''देखए, अटैची सवँार द है, आप भी देख ली जए...'' कैलाश उठकर चला गया। च दर बठैा-बठैा सोचनेलगा-कैलाश कतना अ छा है, कतना साफ और व छ दल का है! लेकन सधुा नेअपनेको कस तरह िमटा डाला...

इतनेम सधुा आयी और च दर सेबोली, ''च दर! चलो, वो बलुा रहेह!'' च दर चुपचाप उठा और अ दर गया। कैलाश नेतब तक या ा केकपड़ेपहन िलयेथे। देखतेह बोला, ''अ छा च दर, म चलता हूँ। कल शाम तक आ जानेक कोिशश क ँगा। हाँदेखो, यादा घमुाना मत। इनक सखी को यहाँ बलुवा लो तो अ छा।'' फर बाहर िनकलता हुआ बोला, ''इनक जद थी आनेक , वरना इनक हालत आनेलायक नह ं थी। माताजी सेम कह आया हूँक लखनऊ मेडकल कॉलजे लेजा रहा हूँ।'' कैलाश कार पर बठै गया। फर बोला, ''देखो च दर, दवा इ ह देदेना याद स,ेवह ंरखी है।'' कार टाट हो गयी। च दर लौटा। बरामदेम सधुा खड़ थी। चुपचाप बझुी हुई-सी। च दर नेउसक ओर देखा, उसनेच दर क ओर देखा, फर दोन नेिनगाह झुका लीं। सधुा वह ंखड़ रह । च दर ाइंग- म म जाकर कताब वगैरह उठा लाया और कॉलजे जानेकेिलए िनकला। सधुा अब भी बरामदेम खड़ थी। गुमसमु...च दर कुछ कहना चाहता था...लेकन या? कुछ था, जो न जानेकब सेसिंचत होता आ रहा था, जो वह य करना चाहता था, लेकन सधुा कैसी हो गयी है! यह वह सधुा तो नह ंजसकेसामनेवह अपनेको सदा य कर देता था। कभी सकंोच नह ंकरता था, लेकन यह सधुा कैसी हैअपनेम िसमट -सकुची, अपनेम बधँी-बधँायी, अपनेम इतनी िछपी हुई क लगता था दिुनया के ित इसम कह ंकोई खुलाव ह नह ं। च दर केमन म जानेकतनी आवाज तड़प उठ ंलेकन...कुछ नह ंबोल पाया। वह बरामदेम ठठक गया, िन ेय। वहाँअपनी कताब खोलकर देखनेलगा, जैसेवह याद करना चाहता था क कह ंभलू तो नह ंआया हैकुछ लेकन उसकेअ तमन म केवल एक ह बात थी। सधुा कुछ तो बोल।ेयह इतना गहरा, इतनी घटुनवाला मौन, यह तो जैसेच दर के ाण पर घटुन क तरह बठैता जा रहा था। सधुा...िनवात िनवास म द पिशखा- सी अचल, िन प द, थमेहुए तफूान क तरह मौन। च दर नेअ त म नो स िलए, घड़ देखी और चल दया। जब वह सीढ़ तक पहुँचा तो सहसा सधुा क छायामिूत म हरकत हुई। सधुा नेपाँव केअँगूठेसेफश पर एक लक र खींचतेहुए नीचेिनगाह झुकायेहुए कहा, '' कतनी देर म आओगे?'' च दर क गया। जैसेच दर को िसतार का राज िमल गया हो। सधुा भला बोली तो! लेकन, फर भी अपनेमन का उ लास उसनेजा हर नह ंहोनेदया, बोला, ''कम-स-ेकम दो घटंेतो लगगेह ।'' सधुा कुछ नह ंबोली, चुपचाप रह गयी। च दर नेदो ण ती ा क क सधुा अब कुछ बोलेलेकन सधुा फर भी चुप। च दर फर मड़ुा। ण-भर बाद सधुा नेपछूा, ''च दर, और ज द नह ंलौट सकत?े'' ज द ! सधुा अगर कहेतो च दर जायेभी न, चाहेउसेइ तीफा देना पड़े। या सधुा भलू गयी क च दर के य व पर अगर कसी का शासन हैतो सधुा का! वह जो अपनी जद स,ेउछलकर, लडक़र, ठकर च दर सेहमशेा मनचाहा काम करवाती रह है...आज वह इतनी द नता स,ेइतनी वनय स,ेइतनेअ तर और इतनी दरू से य कह रह हैक ज द नह ंलौट सकत?े य नह ंवह पहलेक तरह दौडक़र च दर का कॉलर पकड़ लतेी और मचलकर कहती, 'ए, अगर ज द नह ंलौटेतो...' लेकन अब तो सधुा बरामदेम खड़ होकर ग भीर-सी, डूबती हुई-सी आवाज म पछू रह है-ज द नह ंलौट सकत!ेच दर का मन टूट गया। च दर क उमगं च टान सेटकराकर बखर गयी...उसनेबहुत भार -सी आवाज म पछूा, '' य ?'' ''ज द लौट आतेतो पजूा करकेतुहारेसाथ ना ता कर लते!ेलेकन अगर यादा काम हो तो रहनेदो, मरे वजह सेहरज मत करना!'' उसनेउसेठ डे, िश और भावह न वर म कहा।

हाय सधुा! अगर तमु जानती होती क मह न उ ा त च दर का टूटा और यासा मन तमुसेपरुानेनहेक एक बदँू केिलए तरस उठा हैतो भी या तमु इसी दरू सेबात करती! काश, क तमु समझ पाती क च दर नेअगर तमुसेकुछ दरू भी िनभायी हैतो उससेखुद च दर कतना बखर गया है। च दर नेअपना देव व खो दया है, अपना सखु खो दया है, अपनेको बबाद कर दया हैऔर फर भी च दर केबाहर सेशा त और सगुठत दखनेवाले दय केअ दर तुहारेयार क कतनी गहर यास धधक रह है, उसकेरोम-रोम म कतनी जहर ली तृणा क बजिलयाँ क ध रह ह, तमुसेअलग होनेकेबाद अतिृ का कतना बड़ा रा ता उसनेआग क लपट म झुलसतेहुए बताया है। अगर तमु इसेसमझ लतेी तो तमु च दर को एक बार दलुारकर उसकेजलतेहुए ाण पर अमतृक चाँदनी बखेरने केिलए य हो उठती; लेकन सधुा, तमुनेअपनेबा व ोह को ह समझा, तमुनेउस ग भीर यार को समझा ह नह ंजो इस बाहर व ोह, इस बाहर व वसं केमलू म पय वनी क पावन धारा क तरह बहता जा रहा है। सधुा, अगर तमु एक ण केिलए इसेसमझ लो...एक ण-भर केिलए च दर को पहलेक तरह दलुार लो, बहला लो, ठ लो, मना लो तो सधुा च दर क जलती हुई आ मा, नरक िचताओंम फर सेअपना गौरव पा ल,े फर सेअपनी खोयी हुई प व ता जीत ल,े फर सेअपना व मतृ देव व लौटा ल.े..लेकन सधुा, तमु बरामदेम चुपचाप खड़ इस तरह क बात कर रह हो जैसेच दर कोई अप रिचत हो। सधुा, यह या हो गया हैतुह? च दर, बनती, प मी सभी क जंदगी म जो भयकंर तफूान आ गया है, जसनेसभी को झकझोर कर थका डाला है, इसका समाधान िसफ तुहारे यार म था, िसफ तुहार आ मा म था, लेकन अगर तमुनेइनकेच र का अ तिन हत स य न देखकर बाहर व वसं सेह अपना आगेका यवहार िन त कर िलया तो कौन इ ह इस च वात सेखींच िनकालगेा! या येअभागे इसी च वात म फँसकर चूर हो जाएगँे...सधुा... लेकन सधुा और कुछ नह ंबोली। च दर चल दया। जाकर लगा जैसेकॉलजे केपर ा भवन म जाना भी भार मालमू देरहा था। वह ज द ह भाग आया। हालाँक सधुा के यवहार नेउसका मन जैसेतोड़-सा दया था, फर भी जाने य वह अब आज सधुा को एक काशवृबनकर लपटेलनेा चाहता था। जब च दर लौट आया तो उसनेदेखा-सधुा तो उसी केकमरेम है। उसनेउसकेकमरेकेएक कोनेम दर हटा द है, वहाँपानी िछड़क दया और एक कुश केआसन पर सामनेचौक पर कोई पोथी धरेबठै है। चौक पर एक ते व बछाकर धूपदानी रख द हैजसम धूप सलुग रह है। लॉन सेशायद कूछ फूल तोड़ लायी थी जो धूपदानी के पास रखेहुए थे। बगल म एक ा क माला रखी थी। एक शु ते रेशम क धोती और केवल एक चोली पहनेहुए प लेसेबाँह तक ढँकेहुए वह एका मनोयोग से थ का पारायण कर रह थी। धूपदानी सेधू-रेखाएँमचलती हु, लहराती हु, उसकेकपोल पर झूलती हु सखूी- खी अलक सेउलझ रह थीं। उसनेनहाकर केश बाँधेनह ंथे...च दर नेजूतेबाहर ह उतार दयेऔर चुपचाप पलगँ पर बठैकर सधुा को देखनेलगा। सधुा नेिसफ एक बार बहुत शा त, बहुत गहर आकाश-जैसी व छ िनगाह सेच दर को देखा और फर पढऩेलगी। सधुा केचार ओर एक विच -सा वातावरण था, एक अपािथव विगक योित केरेश सेबनुा हुआ झीना काश उस पर छाया हुआ था। गलेम पड़ा हुआ आँचल, पीठ पर बखरेहुए सनुहलेबाल, अपना सबकुछ खोकर वर म ख न सहुाग पर छायेहुए वधै य क तरह सधुा लग रह थी। माँग सनूी थी, माथेपर रोली का एक बड़ा-सा ट का था और चेहरेपर वग केमरुझायेहुए फूल क घलुती हुई उदासी, जैसेकसी नेचाँदनी पर हरिसगंार केपीलेफूल छ ंटेदेदयेह ।

थोड़ देर तक सधुा प वर म पढ़ती रह । उसकेबाद उसनेपोथी ब द कर रख द । उसकेबाद आँख ब द कर जानेकस अ ात देवता को हाथ जोडक़र नम कार कया... फर उठ खड़ हुई और फश पर च दर केपास बठै गयी। आँचल कमर म ख स िलया और बना िसर उठायेबोली, ''चलो, ना ता कर लो!'' ''यह ंलेआओ!'' च दर बोला। सधुा उठ और ना ता लेआयी। च दर नेउठाकर एक टुकड़ा महँु म रख िलया। लेकन जब सधुा उसी तरह फश पर चुपचाप बठै रह तो च दर नेकहा, ''तमु भी खाओ!'' ''म!'' वह एक फ क हँसी हँसकर बोली, ''म खा लँूतो अभी कैहो जाय।ेम िसवा नींबूकेशरबत और खचड़ के अब कुछ नह ंखाती। और वह भी एक व !'' '' य ?'' ''असल म पहलेमनेएक त कया, प ह दन तक केवल ात:काल खानेका, तब सेकुछ ऐसा हो गया क शाम को खातेह मन बगड़ जाता है। इधर और कई रोग हो गयेह।'' च दर का मन रो आया। सधुा, तमु चुपचाप इस तरह अपनेको िमटाती रह ं! मान िलया च दर नेएक खत म तुह िलख ह दया था क अब प - यवहार ब द कर दो! लेकन या अगर तमु प भजेतींतो च दर क ह मत थी क वह उ र न देता! अगर तमु समझ पातींक च दर केमन म कतना दखु है! च दर चाहता था क सधुा क गोद म अपनेमन क सभी बात बखेर दे...लेकन सधुा कहे, कुछ िशकायत करेतो च दर अपनी सफाई दे...लेकन सधुा तो हैक िशकायत ह नह ंकरती, सफाई देनेका मौका ह नह ंदेती...यह देव व क मिूत-सी पथर ली सधुा! यह च दर क सधुा तो नह ं! च दर का मन बहुत भर आया। उसके ँधेगलेसेपछूा, ''सधुा, तमु बहुत बदल गयी हो। खैर और तो जो कुछ हैउसकेिलए अब म या कहूँ, लेकन अपनी त दुती बगाड़कर य तमु मझुेदखु देरह हो! अब य भी मरे जंदगी म या रहा है! लेकन एक ह स तोष था क तमु सखुी हो। लेकन तमुनेमझुसेवह सहारा छ न िलया...पजूा कसक करती हो?'' ''पजूा कहाँ, पाठ करती हूँ, च दर! गीता का और भागवत का, कभी-कभी सरूसागर का! पजूा अब भला कसक क ँगी? मझु जैसी अभािगनी क पजूा भला वीकार कौन करेगा?'' ''तब यह एक व का भोजन य ?'' ''यह तो ाय है, च दर!'' सधुा नेएक गहर साँस लकेर कहा। '' ाय त...?'' च दर नेअचरज सेकहा। ''हाँ, ाय ...'' सधुा नेअपनेपाँव के बिछय को धोती केछोर सेरगड़तेहुए कहा, '' ह दूगहृ तो एक ऐसा जेल होता हैजहाँकैद को उपवास करके ाण छोड़नेक भी इजाजत नह ंरहती, अगर धम का बहाना न हो! धम के बहानेउपवास करकेकुछ सखु िमल जाता है।'' एक ण आता हैक आदमी यार सेव ोह कर चुका है, अपनेजीवन क रेणा-मिूत क गोद सेबहुत दन तक

िनवािसत रह चुका है, उसका मन पागल हो उठता हैफर सेयार करनेको, बहेद यार करनेको, अपनेमन का दलुार फूल क तरह बखरा देनेको। आज व ोह का तफूान उतर जानेकेबाद अपनी उजड़ हुई जंदगी म बीमार सधुा को पाकर च दर का मन तड़प उठा। सधुा क पीठ पर लहराती हुई सखूी अलक हाथ म लेलीं। उ ह गँूथनेका असफल यास करतेहुए बोला- ''सधुा, यह तो सच हैक मनेतुहारेमन को बहुत दखुाया है, लेकन तमु तो हमार हर बात को, हमारेहर ोध को मा करती रह हो, इस बात का तमु इतना बरुा मान गयी?'' '' कस बात का, च दर!'' सधुा नेच दर क ओर देखकर कहा, ''म कस बात का बरुा मान गयी!'' '' कस बात का ाय कर रह हो तमु, इस तरह अपनेको िमटाकर!'' '' ाय तो म अपनी दबुलता का कर रह हूँ, च दर!'' ''दबुलता?'' च दर नेसधुा क अलक को घटाओंक तरह िछटकाकर कहा। ''दबुलता-च दर! तुह यान होगा, एक दन हम लोग नेिन य कया था क हमारेयार क कसौट यह रहेगी च दर, दरूरहकर भी हम लोग ऊँचेउठगे, प व रहगे। दरूहो जानेकेबाद च दर, तुहारा यार तो मझुम एक ढ़ आ मा और व ास भरता रहा, उसी केसहारेम अपनेजीवन केतफूान को पार कर लेगयी; लेकन पता नह ंमरेे यार म कौन-सी दबुलता रह क तमु उसे हण नह ंकर पाय.े..म तमुसेकुछ नह ंकहती। मगर अपनेमन म कतनी कंुठत हूँक कह नह ंसकती। पता नह ंदसूरा ज म होता हैया नह ं; लेकन इस ज म म तुह पाकर तुहारेचरण पर अपनेको न चढ़ा पायी। तुह अपनेमन क पजूा म यक न न दला पायी, इससेबढ़कर और दभुा य या होगा? म अपनेय व को कतना ग हत, कतना िछछला समझनेलगी हूँ, च दर!'' च दर नेना ता खसका दया। अपनी आँख म झलकतेहुए आँसूको िछपातेहुए चुपचाप बठै गया। ''ना ता कर लो, च दर! इस तरह तुह अपनेपास बठाकर खलानेका सखु अब कहाँनसीब होगा! लो।'' और सधुा नेअपनेहाथ सेउसेएक नमक न सवे खला दया। च दर केभरेआँसूसधुा केहाथ पर चूपड़े। ''िछह, यह या, च दर!'' ''कुछ नह ं...'' च दर नेआँसूप छ डाल।े इतनेम महरा जन आयी और सधुा सेबोली, '' ब टया रानी! लवे ई नानखटाई हम क हैसेबनाय केरख दया रहा क तोकेखलाइब!े'' ''अ छा! हम भी महरा जन, इतनेदन सेतुहारेहाथ का खानेकेिलए तरस गय,ेतमु चलो हमारेसाथ!'' '' हयाँच दर भइया केकौन देखी? अब ब टया इनहूँके याह कर देव, तो हम चली तोहरेसाथ!'' सधुा हँस पड़ , च दर चुपचाप बठैा रहा। महरा जन खचड़ डालनेचली गयी। सधुा नेचुपचाप नानखटाई क

त तर उठाकर एक ओर रख द -च दर चुप, अब या बात करे! पहलेवह दोन घटं या बात करतेथे! उसेबड़ा ता जुब हुआ। इस व कोई बात ह नह ंसझूती है। पहलेजानेकतना व गुजर जाता था, दोन क बात का खा मा ह नह ंहोता था। सधुा भी चुप थी। थोड़ देर बाद च दर बोला, ''सधुी, तमु सचमचु पजूा-पाठ म व ास रखती हो...'' '' य , करती तो हूँ, च दर! हाँ, मिूत ज र नह ंपजूती, पर कृण को ज र पजूती हूँ। अब सभी सहारेटूट गय,े तमुनेभी मझुेछोड़ दया, तब मझुेगीता और रामायण म बहुत स तोष िमला। पहलेम खुद ता जुब करती थी क औरत इतना पजूा-पाठ य करती ह, फर मनेसोचा- ह दूनार इतनी असहाय होती है, उसेपित स,ेपुस,ेसभी से इतना लांछन, अपमान और ितर कार िमलता हैक पजूा-पाठ न हो तो पशुबन जाय।ेपजूा-पाठ ह नेह दूनार का च र अभी तक इतना ऊँचा रखा है।'' ''म तो समझता हूँयह अपनेको भलुावा देना है।'' ''मानती हूँच दर, लेकन अगर कोई ह दूधम क इन कताब को यान सेपढ़ेतब वह जान,े या हैइनम! जानेकतनी ताकत देती ह य!ेअभी तक जंदगी म मनेयह सोचा हैक पुष हो या नार , सभी केजीवन का एकमा स बल व ास है, और इन थ म सभी सशंय को िमटाकर व ास का इतना गहन उपदेश हैक मन पलुक उठता है।...म तमुसेकुछ नह ंिछपाती। च दर, जब बनती के याह म तमुनेमरेा प लौटा दया तो म तड़प उठ । एक अ व ास मरे नस-नस म गँुथ गया। मनेसमझ िलया क तुहार सार बात झूठ थीं। एक जानेकैसी आग मझुे हरदम झुलसाती रहती थी! मरेा वभाव बहुत बगड़ गया था। मझुेहरेक सेनफरत हो गयी थी। हरेक पर झ ला उठती थी... कसी बात म मझुेचैन नह ंिमलता था। धीरे-धीरेमनेइन कताब को पढऩा शु कया। मझुेलगनेलगा क शा त धीरे-धीरेमरे आ मा पर उतर रह है। मझुेलगा क यह सभी थ पकुार-पकुारकर कह रहेह-'सशंया मा वन यित!' धीरे-धीरेमनेइन बात को अपनेजीवन पर घटाना शु कया, तो मनेदेखा क सार भ क कताब और उनका दशन बड़ा मनोहर पक है, च दर! कृण यार केदेवता ह। वशंी क विन व ास क पकुार है। धीरे-धीरे तुहारे ित मरेेमन म जगा हुआ अ व ास िमट गया, मनेकहा, तमु मझुसेअलग ह कहाँहो, म तो तुहार आ मा का एक टुकड़ा हूँजो एक जनम केिलए अलग हो गयी। लेकन हमशेा तुहारेचार ओर च मा क तरह च कर लगाती रहूँगी, जस दन मनेपढ़ा- सवधमान ्प र य य मामकेंशरणंज। अहंवांसवपापेयो मो िय यािम मा शचु:॥ तो मझुेलगा क तुहारा खोया हुआ यार मझुेपकुारकर कह रहा है-मरे शरण म चलेआओ, और िसवा तुहारे यार केमरेा भगवान और हैह या...उसकेबाद सेच दर, मरेेमन म व ास और मे झलक आया, अपनेजीवन क प रिध म आनेवालेहर य केिलए। सभी मझुेबहुत चाहनेलगे...लेकन च दर, जब बनती यहाँसेद ली जाते व मरेेसाथ गयी और उसनेसब हाल बताया तो मझुेकतना द:ुख हुआ। कतनी लािन हुई। तुहारेऊपर नह ं, अपनेऊपर।'' बात भावना मक तर सेउठकर बौ क तर पर आ चुक थीं। च दर फौरन बोला, ''सधुा, लािन क तो कोई बात नह ं, कम-स-ेकम मनेजो कुछ कया हैउस पर मझुेजरा-सी भी शम नह ं!'' च दर के वर म फर एक बार गव

और कड़वाहट-सी आ गयी थी-''मनेजो कुछ कया हैउसेम पाप नह ंमानता। तुहारेभगवान नेतुह जो कुछ रा ता दखलाया, वह तमुनेकया। मरेेभगवान नेजो रा ता मझुेदखलाया, वह मनेकया। तमु जानती ह हो मरे जंदगी क प व ता तमु थी, तुहार भोली िन पाप साँस मरेेसभी गुनाह, मरे सभी कमजो रयाँसलुाती रह ह। जस दन तमु मरे जंदगी सेचली गयीं, कुछ दन तक मनेअपनेको सभँाला। इसकेबाद मरे आ मा का कण-कण ोह कर उठा। मनेकहा, वग केमािलक साफ-साफ सनुो। तमुनेमरे जंदगी क प व ता को छ न िलया है, म तुहारे वग म वासना क आग धधकाकर उसेनरक सेबदतर बना दँगूा। और मनेहोठ केकनारेचुबन क लपट सलुगानी शु कर द ं...धीरे-धीरेमहा मशान केस नाटेम करोड़ वासना क लपट जहर लेसाँप क तरह फँुफकारनेलगीं। मरेेमन को इसम बहुत स तोष िमला, बहुत शा त िमली। यहाँतक क बनती केिलए म अपनेमन क सार कटुता भलू गया। म कैसेकह दँूक यह सब गुनाह था। सधुा, अगर ठ क सेदेखो, ग भीरता सेसमझो तो जो कुछ तुहारेिलए मरेेमन म था, उसी क ित या वह हैजो मरेेमन म प मी केिलए है। तुहारा दलुार और प मी क वासना दोन एक िस केकेदो पहलूह। अपनेपहलूको सह और दसूरेपहलूको गलत य कहती हो? देवता क आरती म जलता हुआ द पक प व हैऔर उससेिनकला हुआ धुआँअप व ! द प-िशखा निैतक हैऔर धूम-रेखा अनिैतक? लािन कस बात क , सधुा?'' च दर नेबहुत आवशे म कहा। ''िछह, च दर! तमु मझुेसमझेनह ं! म निैतक-अनिैतक क बात ह नह ंकरती। मरेेभगवान न,ेमरेेयार नेमझुे अब उस दिुनया म पहुँचा दया हैजो निैतक-अनिैतक सेउठकर है। तमुनेअपनेभगवान सेव ोह कया, लेकन उ ह ने तुहार बात पर कोई फैसला भी तो दया होता। वेइतनेदयालुह क कभी मानव केकाय पर फैसला ह नह ंदेत।े दंड तो दरूक बात, वेतो केवल आदमी को समझाकर, उसक कमजो रयाँसमझकर उसे मा करनेऔर उसेयार करनेक बात कहतेह, च दर! वहाँनिैतकता-अनिैतकता का ह नह ं।'' ''तब? यह लािन कस बात क तुह!'' च दर नेपछूा। '' लािन तो मझुेअपनेपर थी, च दर! रहा तुहारा प मी सेस ब ध तो म बनती क तरह नह ंसोचती, इतना व ास रखो। मरे पाप और पुय क तराजूह दसूर है। फर कम-स-ेकम अब इतना देख-सनुकर म यह नह ंमानती क शर र क यास ह पाप है! नह ंच दर, शर र क यास भी उतनी ह प व और वाभा वक हैजतनी आ मा क पजूा। आ मा क पजूा और शर र क यास दोन अिभ न ह। आ मा क अिभ य शर र सेहै, शर र का संकार, शर र का स तलुन आ मा सेहै। जो आ मा और शर र को अलग कर देता है, वह मन केभयकंर तफूान म उलझकर चूर-चूर हो जाता है। च दर, म तुहार आ मा थी। तमु मरेेशर र थे। पता नह ंकैसेहम लोग अलग हो गय!ेतुहारे बना म केवल सूम आ मा रह गयी। शर र क यास, शर र क रंगीिनयाँमरेेिलए अप रिचत हो गयीं। पित को शर र देकर भी म स तोष न देपायी...और मरेेबना तमु केवल शर र रह गय।ेशर र म डूब गय.े..पाप का जतना ह सा तुहारा उतना ह मरेा...पाप क वतैरणी केइस कनारेजब तक तमु तड़पोगे, तभी तक म भी तड़पगँूी...दोन म से कसी को भी चैन नह ंऔर कभी चैन नह ंिमलगेा...'' ''लेकन फर...'' ''हटाओ इन सब बात को, च दर! तमुनेयथ यह बात उठायी। म अब बात करना भलूती जा रह हूँ। म तो आयी थी तुह देखकर कुछ मन का ताप िमटान।ेउठो, खाना खाए!ँ'' सधुा बोली।

''नह ं, म चाहता हूँ, बात सलुझ जाए,ँसधुा!'' च दर नेसधुा केहाथ पर अपना िसर रखकर कहा, ''मरे तकलीफ अब बहेद बढ़ती जा रह है। म पागल न हो जाऊँ!'' ''िछह, ऐसी बात नह ंसोचत।ेउठो!'' च दर को उठाकर सधुा बोली। दोन नेखाना खाया। महरा जन बड़ेदलुार से परसती रह ंऔर सधुा सेबात करती रह ं। खाना खाकर च दर लटे गया और सोचनेलगा, अब या सचमचु उसके और सधुा केबीच म कोई इतना भयकंर अ तर आ गया हैक दोन पहलेजैसेनह ंहो सकत?े लगभग चार बजेवह जागा तो उसनेदेखा क उसकेपाँव केपास िसर रखकर सधुा सो रह है। पखंेक हवा वहाँतक नह ंपहुँचती। वह पसीनेसेतर-बतर हो रह है। च दर उठा, उसेनींद म ऐसा लगा क जैसेइधर कुछ हुआ ह नह ंहै। सधुा वह सधुा है, च दर वह च दर है। उसनेसधुा केप लेसेसधुा केमाथेऔर गलेका पसीना प छ दया और हाथ बढ़ाकर पखंा उसक ओर घमुा दया। सधुा नेआँख खोलीं, एक अजीब-सी िनगाह सेच दर क ओर देखा और च दर केपाँव को खींचकर व सेलगा फर आँख ब द करकेलटेगयी। च दर नेअपना एक हाथ सधुा के माथेपर रख िलया और वह चुपचाप बठैा सोचनेलगा, आज सेलगभग साल-भर पहलेक बात, जब उसनेपहल-ेपहल सधुा को कैलाश का िच दखाया था, और सधुा रो-धोकर उसकेपाँव म इसी तरह महँु िछपाकर सो गयी थी...और आज...सधुा साल-भर म कहाँसेकहाँजा पहुँची है! च दर कहाँसेकहाँपहुँच गया है! काश क कोई उनक जंदगी क लटे सेइस वष-भर म खींची हुए मानिसक रेखाओंको िमटा सकेतो कतनेसखुी हो जाएँदोन ! च दर नेसधुा को हलाया और बोला- ''सधुा, सो रह हो?'' ''नह ं।'' ''उठो।'' ''नह ंच दर, पड़ रहनेदो। तुहारेचरण म सबकुछ भलूकर एक ण केिलए भी सो सकँूगी, मझुेइसका व ास नह ंथा। सबकुछ छ न िलया हैतमुन,ेएक ण क आ म- वचंना य छ नतेहो?'' सधुा नेउसी तरह पड़ेहुए जवाब दया। ''अर , उठ पगली!'' च दर केमन म जानेकहाँमरा पड़ा हुआ उ लास फर सेज दा हो उठा था। उसनेसधुा क बाँह म जोर सेचुटक काटतेहुए कहा, ''उठती हैया नह ं, आलसी कह ंक !'' सधुा उठकर बठै गयी। ण-भर च दर क ओर पथरायी हुई िनगाह सेदेखती रह और बोली, ''च दर, म जाग रह हूँ। तुह ंनेउठाया हैमझुे...च दर। कह ंसपना तो नह ंहैक फर टूट जाए!'' और सधुा िससक-िससक कर रो पड़ । च दर क आँख म आँसूआ गय।ेथोड़ देर बाद वह बोला, ''सधुा, कोई जादगूर अगर हम लोग केमन सेयह काँटा िनकाल देता तो म कतना सखुी होता! लेकन सधुा, अब म तुह दखुी नह ंक ँगा।'' ''यह तो तमुनेपहलेभी कहा था, च दर! लेकन इधर जानेकैसेहो गय।े लगता हैतुहारेच र म कह ं थािय व नह ं...इसी का तो मझुेदखु है, च दर!''

''अब रहेगा, सधुा! तुह खोकर, तुहारेयार को खोकर म देख चुका हूँक म आदमी नह ंरह पाता, जानवर बन जाता हूँ। सधुा, अगर तमु आज सेमह न पहलेिमल जातींतो जो जहर मरेेमन म घटु रहा है, वह तहुारेसामने य करकेम ब कुल िन त हो जाता। अ छा सधुा, यहाँआओ। चुपचाप लटे जाओ, म तमुसेसबकुछ कह डाल,ँू फर सब भलू जाऊँ। बोलो, सनुोगी?'' सधुा चुपचाप लटेगयी और बोली, ''च दर! या तो मत बताओ या फर सभी प बता दो...'' ''हाँ, ब कुल प सधुी; तमुसेकुछ िछपा सकता हूँभला!'' च दर नेह क -सी चपत मारकर कहा, ''आज मन जैसेपागल हो रहा हैतुहारेचरण पर बखर जानेकेिलए...जादगूरनी कह ंक ! देखो सधुा- पछली दफेतमुनेमझुे बहुत कुछ बताया था, कैलाश केबारेम!'' ''हाँ।'' ''बस, उसकेबाद सेएक अजीब-सी अ िच मरेेमन म तुहारेिलए होनेलगी थी; म तमुसेकुछ िछपाऊँगा नह ं। तुहारेजानेकेबाद बट आया। उसनेमझुसेकहा क औरत केवल नयी सवंदेना, नया वाद चाहती हैऔर कुछ नह ं, अ ववा हत लड़ कयाँववाह, और ववा हत लड़ कयाँनयेमेी...बस यह उनका चरम ल य है। लड़ कयाँशर र क यास केअलावा और कुछ नह ंचाहतीं...जैसेअराजकता के दन म कसी देश म कोई भी चालाक नतेा श छ न लतेा है, वसैेह मानिसक शूयता के ण म बट जैसेमरेा दाशिनक गुहो गया। उसकेबाद आयी प मी। उससेमनेकहा क या आव यक हैक पुष और नार केस ब ध म सेस हो ह ? उसनेकहा, 'हाँ, और य द नह ंहैतो लटेािनक (आदशवाद ) यार क ित या सेस क ह यास म होती है।' अब म तुह अपनेमन का चोर बतला दँ।ूमनेसोचा क तमु भी अपनेववैा हक जीवन म रम गयी हो। शर र क यास नेतुह अपनेम डुबा दया हैऔर जो अ िच तमु मरेेसामनेय करती हो वह केवल दखावा है। इसिलए मन-ह -मन मझुेतमुसेिचढ़-सी हो गयी। पता नह ं य यह संकार मझुम ढ़-सा हो गया और इसी केपीछेम तुह ंको नह ं, प मी को छोड़कर सभी लड़ कय सेनफरत-सी करनेलगा। बनती को भी मनेबहुत दखु दया। याह म जानेकेपहलेह बहुत दखुी होकर गयी। रह प मी क बात तो म उस पर इसिलए खुश था क उसनेबड़ यथाथ-सी बात कह थी। लेकन उसनेमझुसेकहा क आदशवाद यार क ित या शार रक यास म होती है। तमुको इसका अपराधी मानकर तमुसेतो नाराज हो गया लेकन अ दर-ह - अ दर वह संकार मरेा य व बदलनेलगा। सधुा, पता नह ं, तुहारेजीवन म ित या के प म शार रक यास जागी या नह ंपर मरेेमन केगुनाह तो तफूान क तरह लहरा उठे। लेकन तमुसेएक बात नह ंिछपाऊँगा। वह यह क ऐसेभी ण आयेह जब प मी केसमपण नेमरेेमन क सार कटुता धो द है....बोलो, तमु कुछ तो बोलो, सधुा!'' ''तमु कहतेचलो, च दर! म सनु रह हूँ।'' ''हाँ...लेकन उस दन गेसूआयी। उसनेमझुेफर परुानेदन क याद दला द और फर जैसेप मी केिलए आकषण उखड़-सा गया। अ छा सधुा, एक बात बताओ। तमु यह मानती हो क कभी-कभी एक य केमा यम से दसूरेय क भावनाओंक अनभुिूत होनेलगती है?'' '' या मतलब?''

''मरेा मतलब जैसेमझुेगेसूक बात म उस दन ऐसा लगा, जैसेतमु बोल रह हो। और दसूर बात तुह बताऊँ। तुहारेपीछेबनती रह मरेेपास। सारेअँधेरेम वह एक रोशनी थी, बड़ ीण, टम टमाती हुई, सारह न-सी। ब क मझुेतो लगता था क वह रोशन ह इसिलए थी क उसम रोशनी तुहार थी। मनेकुछ दन बनती को बहुत यार कया। मझुेऐसा लगता था क अभी तक तमु मरेेसामनेथीं, अब तमु उसकेमा यम सेआती हो। लगता था जैसेवह एक य व नह ंहै, तुहारेय व का ह अंश है। उस लड़क म जस अंश तक तमु थींवह अंश बार-बार मरेेमन म रस उभार देता था। य सधुा! मन क यह भी कैसी अजब-सी गित है!'' सधुा थोड़ देर चुप रह , फर बोली, ''भागवत म एक जगह एक ट का म हमनेपढ़ा था च दर क जसको भगवान बहुत यार करतेह, उसम उनक अंशािभ य होती है। बहुत बड़ा वैािनक स य हैयह! म बनती को बहुत यार करती हूँ, च दर!'' ''समझ गया म।'' च दर बोला, ''अब म समझा, मरेेमन म इतनेगुनाह कहाँसेआय।ेतमुनेमझुेबहुत यार कया और वह तुहारेय व केगुनाह मरेेय व म उतर आय!े'' सधुा खल खलाकर हँस पड़ । च दर केक धेपर हाथ रखकर बोली, ''इसी तरह हँसत-ेबोलतेरहतेतो य यह हाल होता? मनमौजी हो। जब चाहो खुश हो गय,ेजब चाहो नाराज हो गय!े'' उसकेबाद वह उठ और बाहर सेएक त तर म कुछ फल काटकर लायी। च दर नेदेखा-आम। ''अरेआम! अभी कहाँसेआम लेआयीï? कौन लाया?'' ''लखनऊ उतर थी? वहाँसेतुहारेिलए लतेी आयी।'' च दर नेएक आम क फाँक उठाकर खायी और कसी परुानी घटना क याद दलानेकेिलए आँचल सेहाथ प छ दय।ेसधुा हँस पड़ और बड़ दलुार-भर ताडऩा के वर म बोली, ''बोलो, अब तो दमाग नह ंबगाड़ोगेअपना?'' ''कभी नह ंसधुी, लेकन प मी का या होगा? प मी सेम स ब ध नह ंतोड़ सकता। यवहार चाहेजतना सीिमत कर दँ।ू'' ''म कब कहती हूँ, म तुह कह ंसेकभी बाँधना ह नह ंचाहती। जानती हूँक अगर चाहूँभी तो कभी अपनेमन केबाहुपाश ढ लेकर तुह िचरमु तो म न देपाऊँगी, तो भला ब धन ह य बाँधँू! प मी शाम को आएगी?'' ''शायद...'' दरवाजा खटका और गेसूने वशे कया। आकर, दौडक़र सधुा सेिलपट गयी। च दर उठकर चला आया। ''चले कहाँभाईजान, बैठए न।'' ''नहा ल,ँूतब आता हूँ...'' च दर चल दया। वह इतना खुश था, इतना खुश क बाथ- म म खूब गाता रहा और नहा चुकनेकेबाद उसेखयाल आया क उसनेबिनयाइन उतार ह नह ंथी। नहाकर कपड़ेबदलकर वह आया तब भी गुनगुना रहा था। कमरेम आया तब देखा गेसूअकेली बठै है।

''सधुा कहाँगयी?'' च दर नेनाचतेहुए वर म कहा। ''गयी हैशरबत बनान।े'' गेसूनेचुनी सेिसर ढँकतेहुए और पाँव को सलवार सेढँकतेहुए कहा। च दर इधर- उधर ब स म माल ढूँढऩेलगा। ''आज बड़ेखुश ह, च दर भाई! कोई खायी हुई चीज िमल गयी है या? अरे, म बहन हूँकुछ इनाम ह दे द जए।'' गेसूनेचुटक ली। ''इनाम क बात या, कहो तो वह चीज ह तुह देदँ!ू'' ''हाँ, कैलाश बाबूकेदल सेपिूछए।'' गेसूबोली। ''उनकेदल सेतुह ंबात कर सकती हो!'' गेसूनेझपकर महँुफेर िलया। सधुा हाथ म दो िगलास िलए आयी। ''लो गेस,ूपयो।'' एक िगलास गेसूको देकर बोली, ''च दर, लो।'' ''तमु पयो न!'' ''नह ं, म नह ंपऊँगी। बफ मझुेनकुसान करेगी!'' सधुा नेचुपचाप कहा। च दर को याद आ गया। पहलेसधुा िचढ़-िचढ़कर अपनेआप चाय, शरबत पी जाती थी...और आज... '' या ढूँढ़ रहेहो, च दर?'' सधुा बोली। '' माल, कोई िमल ह नह ंरहा!'' ''साल-भर म माल खो दयेह गे! म तो तुहार आदत जानती हूँ। आज कपड़ा ला दो, कल सबुह माल सी दँू तुहारेिलए।'' और उठकर उसनेकैलाश केब स सेएक माल िनकालकर देदया। उसकेबाद च दर बाजार गया और कैलाश केिलए तथा सधुा केिलए कुछ कपड़ेखर द लाया। इसकेसाथ ह कुछ नमक न जो सधुा को पस द था, पठेा, एक तरबजू, एक बोतल गुलाब का शरबत, एक सुदर-सा पने और जाने या- या खर द लाया। सधुा नेदेखकर कहा, ''पापा नह ंह, फर भी लगता हैम मायकेआयी हूँ!'' लेकन वह कुछ खा-पी नह ंसक । च दर खाना खाकर लॉन म बठै गया, वह ंउसनेअपनी चारपाई डलवा ली। सधुा के ब तर छत पर लगेथे। उसकेपास महरा जन सोनवेाली थीं। सधुा एक त तर म तरबजू काटकर लेआयी और कुस डालकर च दर भी चारपाई केपास बठै गया। च दर तरबजू खाता रहा...थोड़ देर बाद सधुा बोली- ''च दर, बनती केबारेम तुहार या राय है?'' ''राय? राय या होती? बहुत अ छ लड़क है! तमुसेतो अ छ ह है!'' च दर नेछेड़ा।

''अरे, मझुसेअ छ तो दिुनया है, लेकन एक बात पछू? बहुत ग भीर बात है!'' '' या?'' ''तमु बनती सेयाह कर लो।'' '' बनती स?ेकुछ दमाग तो नह ंखराब हो गया है?'' ''नह ं! इस बारेम पहल-ेपहले'य'ेबोलेक च दर सेबनती का याह य नह ंकरती, तो मनेचुपचाप पापा से पछूा। पापा ब कुल राजी ह, लेकन बोलेमझुसेक तुह ंकहो च दर स।ेकर लो; च दर! बआुजी अब दखल नह ं दगी।'' च दर हँस पड़ा, ''अ छ खुराफात तुहारेदमाग म उठती ह! याद है, एक बार और तमुनेयाह करनेकेिलए कहा था?'' सधुा केमहँुसेएक ह का िन: ास िनकल पड़ा-''हाँ, याद है! खैर, तब क बात दसूर थी, अब तो तुह कर लनेा चा हए।'' ''नह ंसधुा, शाद तो मझुेनह ंह करनी है। तमु कह य रह हो? तमु मरेे- बनती केस ब ध को कुछ गलत तो नह ंसमझ रह हो?'' ''नह ंजी, लेकन यह जानती हूँक बनती तमु पर अ ध ा रखती है। उससेअ छ लड़क तुह िमलगेी नह ं। कम-स-ेकम जंदगी तुहार यव थत हो जाएगी।'' च दर हँसा, ''मरे जंदगी शाद सेनह ं, यार सेसधुरेगी, सधुा! कोई ऐसी लड़क ढूँढ़ दो जो तुहार जैसी हो और यार करेतो म समझँूभी क तमुनेकुछ कया मरेेिलए। शाद -वाद बकेार हैऔर कोई बात करनी हैया नह ं?'' ''नह ंच दर, शाद तो तुह करनी ह होगी। अब म ऐसेतुह नह ंरहनेदँगूी। बनती सेन करो तो दसूर लड़क ढूँढूँगी। लेकन शाद करनी होगी और मरे पस द सेकरनी होगी।'' च दर एक उपेा क हँसी हँसकर रह गया। सधुा उठ खड़ हुई। '' य , चल द ं?'' ''हाँ, अब नींद आ रह होगी तुह, सोओ।'' च दर नेरोका नह ं। उसनेसोचा था, सधुा बठैेगी। जानेकतनी बात करगे! वह सधुा सेउसका सब हाल पछूेगा, लेकन सधुा तो जानेकैसी तट थ, िनरपे और अपनेम सीिमत-सी हो गयी हैक कुछ समझ म नह ंआता। उसने च दर सेसबकुछ जान िलया लेकन च दर केसामनेउसनेअपनेमन को कह ंजा हर ह नह ंहोनेदया, सधुा उसके पास होकर भी जानेकतनी दरूथी! सरोवर म डूबकर पछं यासा था।

कर ब घटंा-भर बाद सधुा दधू का िगलास लकेर आयी। च दर को नींद आ गयी थी। वह च दर केिसरहानेबठै गयी-''च दर, सो गये या?'' '' य ?'' च दर घबराकर उठ बठैा। ''लो, दधू पी लो।'' सधुा बोली। ''दधू हम नह ंपएगँे।'' ''पी लो, देखो बफ और शरबत िमला दया है, पीकर तो देखो!'' ''नह ं, हम नह ंपएगँे। अब जाओ, हम नींद लग रह है।'' च दर गुसा था। ''पी लो मरेेराजदलुारे, चमक रहेह चाँद-िसतारे...'' सधुा नेलोर गातेहुए च दर को अपनी गोद म खींचकर ब च क तरह िगलास च दर केमहँु सेलगा दया। च दर नेचुपचाप दधू पी िलया। सधुा नेिगलास नीचेरखकर कहा, ''वाह, ऐसेतो म नीलूको दधू पलाती हूँ।'' ''नीलूकौन?'' ''अरेमरेा भतीजा! शकंर बाबूका लड़का।'' ''अ छा!'' ''च दर, तमुनेपखंा तो छत पर लगा दया है। तमु कैसेसोओगे?'' ''मझुेनींद आ जाएगी।'' च दर फर लटेगया। सधुा उठ नह ं। वह दसूर पाट सेहाथ टेककर च दर केव केआर-पार फूल केधनषु- सी झुककर बठै गयी। एकादशी का न ध प व च मा आसमान क नीली लहर पर अध खलेबले केफूल क तरह काँप रहा था। दधू म नहायेहुए झ केचाँदनी सेआँख-िमचौली खेल रहेथे। च दर आँख ब द कयेपड़ा था और उसक पलक पर, उसकेमाथेपर, उसकेहोठ पर चाँद क पाँखुरयाँबरस रह थीं। सधुा नेच दर का कॉलर ठ क कया और बड़ेह मधुर वर म पछूा, ''च दर, नींद आ रह है?'' ''नह ं, नींद उचट गयी!'' च दर नेआँख खोलकर देखा। एकादशी का प व च मा आकाश म था और पजूा से अिभ ष एकादशी क उदास चाँदनी उसकेव पर झुक बठै थी। उसेलगा जैसेप व ता और अमतृका च पई बादल उसके ाण म िलपट गया है। उसनेकरवट बदलकर कहा, ''सधुा, जंदगी का एक पहलूख म हुआ। दद क एक मंजल ख म हो गयी। थकान भी दरूहो गयी, लेकन अब आगेका रा ता समझ म नह ंआता। या क ँ?'' ''करना बहुत है, च दर! अपनेअ दर क बरुाई सेलड़ िलय,ेअब बाहर क बरुाई सेलड़ो। मरेा तो सपना था च दर क तमु बहुत बड़ेआदमी बनोगे। अपनेबारेम तो जो कुछ सोचा था वह सब नसीब नेतोड़ दया। अब तुह ं

को देखकर कुछ स तोष िमलता है। तमु जतनेऊँचेबनोगे, उतना ह चैन िमलगेा। वना म तो नरक म भनु रह हूँ।'' ''सधुा, तुहार इसी बात सेमरे सार ह मत, सारा बल टूट जाता है। अगर तमु अपनेप रवार म सखुी होती तो मरेा भी साहस बधँा रहता। तुहारा यह हाल, तुहारा यह वा य, यह असमय वरैा य और पजूा, यह घटुन देखकर लगता है या क ँ? कसकेिलए क ँ?'' ''म भी या क ँ, च दर! म यह जानती हूँक अब येभी मरेा बहुत खयाल रखतेह, लेकन इस बात पर मझुे और भी दखु होता है। म इ ह स तिुलत नह ंकर पाती और उनक खुलकर उपेा भी नह ंकर पाती। यह अजब-सा नरक हैमरेा जीवन भी, लेकन यह ज र हैच दर क तुह ऊँचा देखकर म यह नरक भी भोग लेजाऊँगी। तमु दल मत छोटा करो। एक ह जंदगी क तो बात है, उसकेबाद...'' ''लेकन म तो पनुज म म व ास ह नह ंकरता।'' ''तब तो और भी अ छा है, इसी ज म म जो सखु देसकतेहो, देलो। जतना ऊँचेउठ सकतेहो, उठ लो।'' ''तमु जो रा ता बताओ वह म अपनानेकेिलए तयैार हूँ। म सोचता हूँ, अपनेय व सेऊपर उठूँ...लेकन मरेे साथ एक शत है। तुहारा यार मरेेसाथ रहे!'' ''तो वह अलग कब रहा, च दर! तुह ंनेजब चाहा महँु फेर िलया। लेकन अब नह ं। काश क तमु एक ण का भी अनभुव कर पातेक तमुसेदरूवहाँ, वासना केक चड़ म फँसी हुई म कतनी याकुल, कतनी यिथत हूँतो तमु ऐसा कभी न करत!ेमरेेजीवन म जो कुछ अपणूता रह गयी हैच दर, उसक पणूता, उसक िस तुह ंहो। तुह मरेे ज म-ज मा तर क शा त क सौग ध है, तमु अब इस तरह न करना! बस याह कर लो और ढ़ता सेऊँचाई क ओर चलो।'' '' याह केअलावा तुहार सब बात वीकार ह। लेकन फर भी तमु अपना यार वापस नह ंलोगी कभी?'' ''कभी नह ं।'' ''और हम कभी नाराज भी हो जाएँतो बरुा नह ंमानोगी?'' ''नह ं!'' ''और हम कभी फसल तो तमु तट थ होकर नह ंबठैोगी ब क बना डरेहुए मझुेखींच लाओगी उस दलदल स?े'' ''यह क ठन हैच दर, आ खर मरेेभी ब धन ह। लेकन खैर...अ छा यह बताओ, तमु द ली कब आओगे?'' ''अब द ली तो दशहरेम आऊँगा। गिमय म यह ंरहूँगा।...लेकन हो सका तो लौटनेकेबाद शाहजहाँपरु आऊँगा।'' सधुा चुपचाप बठै रह । च दर भी चुपचाप लटेा रहा। थोड़ देर बाद च दर नेसधुा क हथेली अपनेहाथ पर रख

ली और आँख ब द कर लीं। जब वह सो गया तो सधुा नेधीरे-सेहाथ उठाया, खड़ हो गयी। थोड़ देर अपलक उसे देखती रह और धीरे-धीरेचली आयी। दसूरेदन सबुह सधुा नेआकर च दर को जगाया। च दर उठ बठैा तो सधुा बोली-''ज द सेनहा लो, आज तुहारेसाथ पजूा करगे!'' च दर उठ बठैा। नहा-धोकर आया तो सधुा नेचौक केसामनेदो आसन बछा रखेथे। चौक पर धूप सलुग रह थी और फूल गमक रहेथे। ढेर-के-ढेर बले और अग त केफूल। च दर को बठाकर सधुा बठै। उसनेफर वह वशे धारण कर िलया था। रेशम क धोती और रेशम का एक अ तवासक, गीलेबाल पीठ पर लहरा रहेथे। ''लेकन म बठैा-बठैा या क ँगा?'' उसनेपछूा। सधुा कुछ नह ंबोली। चुपचाप अपना काम करती गयी। थोड़ देर बाद उसनेभागवत खोली और बड़ेमधुर वर म गो पका-गीत पढ़ती रह । च दर संकृत नह ंसमझता था, पजूा म व ास नह ंकरता था, लेकन वह ण जाने कैसा लग रहा था! च दर क साँस म धूप क पावन सौरभ केडोरेगँुथ गयेथे। उसकेघटुन पर रह-रहकर स : नाता सधुा केभीगेकेश सेगीलेमोती चूपड़तेथे। कृशकाय, उदास और प व सधुा केपजूा के साद जैसेमधुर वर म ीम ागवत के ोक उसक आ मा को अमतृ सेधो रहेथे। लगता था, जैसेइस पजूा क ा वत बलेा म उसके जीवन-भर क भलू, कमजो रयाँ, गुनाह सभी धुलता जा रहा था।...जब सधुा नेभागवत ब द करकेरख दया तो पता नह ं य च दर नेणाम कर िलया-भागवत को या भागवत क पजुा रन को, यह नह ंमालमू। थोड़ देर बाद सधुा नेपजूा क थाली उठायी और उसनेच दर केमाथेपर रोली लगा द । ''अरेम!'' ''हाँतमु! और कौन...मरेेतो दसूरा न कोई!'' सधुा बोली और ढेर-के-ढेर फूल च दर केचरण पर चढ़ाकर, झुककर च दर केचरण को णाम कर िलया। च दर नेघबराकर पाँव खींच िलए, ''म इस यो य नह ंहूँ, सधुा! य ल जत कर रह हो?'' सधुा कुछ नह ंबोली...अपनेआँचल सेएक छलकता हुआ आँसूप छकर ना ता लानेचली गयी। जब वह यिूनविसट सेलौटा तो देखा, सधुा मशीन रखेकुछ िसल रह है। च दर नेकपड़ेबदलकर पछूा, ''कहो, या िसल रह हो?'' '' माल और बिनयाइन! कैसेकाम चलता था तुहारा? न स दकू म एक भी माल है, न एक भी बिनयाइन। लापरवाह क भी हद है। तभी कहती हूँयाह कर लो!'' ''हाँ, कसी दज क लड़क सेयाह करवा दो!'' च दर खाट पर बठै गया और सधुा मशीन पर बठै-बठै िसलती रह । थोड़ देर बाद सहसा उसनेमशीन रोक द और एकदम सेघबरा कर उठ । '' या हुआ, सधुा...''

''बहुत दद हो रहा है....'' वह उठ और खाट पर बहेोश-सी पड़ रह । च दर दौडक़र पखंा उठा लाया। और झलने लगा। ''डॉ टर बलुा लाऊँ?'' ''नह ं, अभी ठ क हो जाऊँगी। उबकाई आ रह है!'' सधुा उठ । ''जाओ मत, म पीकदान उठा लाता हूँ।'' च दर नेपीकदान उठाकर रख दया और सधुा क पीठ सहलानेलगा। फर सधुा हाँफती-सी लटे गयी। च दर दौड़कर इलायची और पानी लेआया। सधुा नेइलायची खायी और फर पड़ रह । उसकेमाथेपर पसीना झलक आया। ''अब कैसी तबीयत है, सधुा?'' ''बहुत दद हैअंग-अंग म...मशीन चलाना नकुसान कर गया।'' सधुा नेबहुत ीण वर म कहा। ''जाऊँकसी डॉ टर को बलुा लाऊँ?'' ''बकेार है, च दर! म तो लखनऊ म दखा आयी। इस रोग का या इलाज है। यह तो जंदगी-भर का अिभशाप है!'' '' या बीमार बतायी तुह?'' ''कुछ नह ं।'' ''बताओ न?'' '' या बताऊँ, च दर!'' सधुा नेबड़ कातर िनगाह सेच दर क ओर देखा और फूट-फूटकर रो पड़ । बरु तरह िससकनेलगी। सधुा चुपचाप पड़ कराहती रह । च दर नेअटैची म सेदवा िनकालकर द । कॉलजे नह ंगया। दो घटंे बाद सधुा कुछ ठ क हुई। उसनेएक गहर साँस ली और त कयेकेसहारेउठकर बठै गयी। च दर नेऔर कई त कये पीछेरख दय।ेदो ह घटंेम सधुा का चहेरा पीला पड़ा गया। च दर चुपचाप उदास बठैा रहा। उस दन सधुा नेखाना नह ंखाया। िसफ फल िलय।ेदोपहर को दो बजेभयकंर लूम कैलाश वापस आया और आतेह च दर सेपछूा, ''सधुा क तबीयत तो ठ क रह ?'' यह जानकर क सबुह खराब हो गयी थी, वह कपड़ेउतारने केपहलेसधुा केकमरेम गया और अपनेहाथ सेदवा देकर फर कपड़ेबदलकर सधुा केकमरेम जाकर सो गया। बहुत थका मालमू पड़ता था। च दर आकर अपनेकमरेम कॉ पयाँजाँचता रहा। शाम को कािमनी, भा तथा कई लड़ कयाँ, ज ह गेसूनेखबर देद थी, आयींऔर सधुा और कैलाश को घरेेरह ं। च दर उनक खाितर-तव जो म लगा रहा। रात को कैलाश नेउसे अपनी छत पर बलुा िलया और च दर केभ व य केकाय म केबारेम बात करता रहा। जब कैलाश को नींद आने लगी, तब वह उठकर लॉन पर लौट आया और लटेगया। बहुत देर तक उसेनींद नह ंआयी। वह सधुा क तकलीफ केबारेम सोचता रहा। उधर सधुा बहुत देर तक करवट बदलती रह । यह दो दन सपन क तरह बीत गयेऔर कल वह फर चली जाएगी च दर सेदरू, न जानेकब


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