इस उप यास केनयेसंकरण पर दो श द िलखतेसमय म समझ नह ंपा रहा हूँक या िलखँू? अिधक-स-ेअिधक म अपनी हा दक कृत ता उन सभी पाठक के ित य कर सकता हूँज ह नेइसक कला मक अप रप वता केबावजूद इसको पस द कया है। मरेेिलए इस उप यास का िलखना वसैा ह रहा हैजैसा पीड़ा के ण म परू आ था सेाथना करना, और इस समय भी मझुेऐसा लग रहा हैजैसेम वह ाथना मन-ह -मन दोहरा रहा हूँ, बस... - धमवीर भारती अगर परुानेजमानेक नगर-देवता क और ाम-देवता क क पनाएँआज भी मा य होतींतो म कहता क इलाहाबाद का नगर-देवता ज र कोई रोमैटक कलाकार है। ऐसा लगता हैक इस शहर क बनावट, गठन, जंदगी और रहन- सहन म कोई बधँे-बधँायेिनयम नह ं, कह ंकोई कसाव नह ं, हर जगह एक व छ द खुलाव, एक बखर हुई-सी अिनयिमतता। बनारस क गिलय सेभी पतली गिलयाँऔर लखनऊ क सडक़ सेचौड़ सडक़। याकशायर और ाइटन केउपनगर का मकुाबला करनेवालेिस वल लाइ स और दलदल क ग दगी को मात करनेवालेमहु ल।ेमौसम म भी कह ंकोई सम नह ं, कोई स तलुन नह ं। सबुह मलयजी, दोपहर अंगार , तो शाम रेशमी! धरती ऐसी क सहारा के रेिग तान क तरह बालूभी िमल,ेमालवा क तरह हरे-भरेखेत भी िमल और ऊसर और परती क भी कमी नह ं। सचमचु लगता हैक याग का नगर-देवता वग-कंुज सेिनवािसत कोई मनमौजी कलाकार हैजसकेसजृन म हर रंग केडोरेह। और चाहेजो हो, मगर इधर वार, काितक तथा उधर वस त केबाद और होली केबीच केमौसम सेइलाहाबाद का वातावरण नैटिशयम और पजी केफूल सेभी यादा खूबसरूत और आम केबौर क खुशबूसेभी यादा महकदार होता है। िस वल लाइ स हो या अ ेड पाक, गंगातट हो या खुस बाग, लगता हैक हवा एक नटखट दोशीजा क तरह किलय केआँचल और लहर केिमजाज सेछेडख़ानी करती चलती है। और अगर आप सद सेबहुत नह ंडरतेतो आप जरा एक ओवरकोट डालकर सबुह-सबुह घमूनेिनकल जाएँतो इन खुली हुई जगह क फजाँ इठलाकर आपको अपनेजादूम बाँध लगेी। खासतौर सेपौ फटनेकेपहलेतो आपको एक ब कुल नयी अनभुिूत होगी। वस त केनय-ेनयेमौसमी फूल केरंग सेमकुाबला करनेवाली ह क सनुहली, बाल-सयू क अँगुिलयाँसबुह क राजकुमार केगुलाबी व पर बखरेहुए भ रालेगेसओुंको धीरे-धीरेहटाती जाती ह और ितज पर सनुहली त णाई बखर पड़ती है। एक ऐसी ह खुशनमुा सबुह थी, और जसक कहानी म कहनेजा रहा हूँ, वह सबुह सेभी यादा मासमू यवुक, भाती गाकर फूल को जगानेवालेदेवदतू क तरह अ ेड पाक केलॉन पर फूल क सरजमींकेकनारे- कनारेघमू रहा था। क थई वीटपी केरंग का प मीनेका ल बा कोट, जसका एक कालर उठा हुआ था और दसूरेकालर म सरो क एक प ी बटन होल म लगी हुई थी, सफेद म खन जीन क पतली पट और परै म सफेद जर क पशेावर सैडल, भरा हुआ गोरा चेहरा और ऊँचेचमकतेहुए माथेपर झूलती हुई एक खी भरू लट। चलत-ेचलतेउसनेएक रंग- बरंगा गुछा इक ठा कर िलया था और रह-रह कर वह उसेसघँू लतेा था। परूब केआसमान क गुलाबी पाँखुरयाँबखरनेलगी थींऔर सनुहलेपराग क एक बौछार सबुह केताजेफूल पर बछ रह थी। ''अरेसबुह हो गयी?'' उसनेच ककर कहा और पास क एक बच पर बठै गया। सामनेसेएक माली
आ रहा था। '' य जी, लाइ रे खुल गयी?'' ''अभी नह ंबाबजूी!'' उसनेजवाब दया। वह फर स तोष सेबठै गया और फूल क पाँखुरयाँनोचकर नीचेफकनेलगा। जमीन पर बछानेवाली सोनेक चादर परत पर परत बछाती जा रह थी और पड़े क छायाओंका रंग गहरानेलगा था। उसक बच केनीचेफूल क चुनी हुई प याँबखर थींऔर अब उसकेपास िसफ एक फूल बाक रह गया था। हलकेफालसई रंग केउस फूल पर गहरेबजनी डोरेथे। ''हलो कपरू!'' सहसा कसी नेपीछेसेक धेपर हाथ रखकर कहा, ''यहाँ या झक मार रहेहो सबुह-सबुह?'' उसनेमडुक़र पीछेदेखा, ''आओ, ठाकुर साहब! आओ बठैो यार, लाइ रे खुलनेका इ तजार कर रहा हूँ।'' '' य , यिूनविसट लाइ रे चाट डाली, अब इसेतो शर फ लोग केिलए छोड़ दो!'' ''हाँ, हाँ, शर फ लोग ह केिलए छोड़ रहा हूँ; डॉ टर शुला क लड़क हैन, वह इसक मेबर बनना चाहती थी तो मझुेआना पड़ा, उसी का इ तजार भी कर रहा हूँ।'' ''डॉ टर शुला तो पॉिल ट स डपाटमट म ह?'' ''नह ं, गवनमट साइकोलॉ जकल यरूो म।'' ''और तमु पॉिल ट स म रसच कर रहेहो?'' ''नह ं, इकनॉिम स म!'' ''बहुत अ छे! तो उनक लड़क को सद य बनवानेआयेहो?'' कुछ अजब वर म ठाकुर नेकहा। ''िछह!'' कपरू नेहँसतेहुए, कुछ अपनेको बचातेहुए कहा, ''यार, तमु जानतेहो क मरेा उनसेकतना घरेलू स ब ध है। जब सेम याग म हूँ, उ ह ंकेसहारेहूँऔर आजकल तो उ ह ंकेयहाँपढ़ता-िलखता भी हूँ...।'' ठाकुर साहब हँस पड़े, ''अरेभाई, म डॉ टर शुला को जानता नह ं या? उनका-सा भला आदमी िमलना मुकल है। तमु सफाई यथ म देरहेहो।'' ठाकुर साहब यिूनविसट केउन व ािथय म सेथेजो बरायनाम व ाथ होतेह और कब तक वेयिूनविसट को सशुोिभत करतेरहगे, इसका कोई िन य नह ं। एक अ छे-खासेपयेवालेय थेऔर घर केता लकुेदार। हँसमखु, फ तयाँकसनेम मजा लनेेवाल,ेमगर दल केसाफ, िनगाह केस चे। बोल-े ''एक बात तो म वीकार करता हूँक तुहार पढ़ाई का सारा ये डॉ. शुला को है! तुहारेघर वालेतो कुछ खचा भजेतेनह ं?'' ''नह ं, उनसेअलग ह होकर आया था। समझ लो क इ ह नेकसी-न- कसी बहानेमदद क है।'' ''अ छा, आओ, तब तक लोटस-प ड (कमल-सरोवर) तक ह घमू ल। फर लाइ रे भी खुल जाएगी!'' दोन उठकर एक कृम कमल-सरोवर क ओर चल दयेजो पास ह म बना हुआ था। सी ढय़ाँचढक़र ह उ ह ने
देखा क एक स जन कनारेबठैेकमल क ओर एकटक देखतेहुए यान म त लीन ह। िछपकली सेदबुल-ेपतल,े बाल क एक लट माथेपर झूमती हुई- ''कोई मेी ह, या कोई फलासफर ह, देखा ठाकुर?'' ''नह ंयार, दोन सेिनकृ को ट केजीव ह-येक व ह। म इ ह जानता हूँ। येरवी बस रया ह। एम. ए. म पढ़ता है। आओ, िमलाएँतुह!'' ठाकुर साहब नेएक बड़ा-सा घास का ितनका तोडक़र पीछेसेचुपके-सेजाकर उसक गरदन गुदगुदायी। बस रया च क उठा-पीछेमडुक़र देखा और बगड़ गया-''यह या बदतमीजी है, ठाकुर साहब! म कतनेग भीर वचार म डूबा था।'' और सहसा बड़ेविच वर म आँख ब द कर बस रया बोला, ''आह! कैसा मनोरम भात है! मरे आ मा म घोर अनभुिूत हो रह थी...।'' कपरू बस रया क मुा पर ठाकुर साहब क ओर देखकर मसुकराया और इशारेम बोला, ''हैयार शगल क चीज। छेड़ो जरा!'' ठाकुर साहब नेितनका फक दया और बोल,े''माफ करना, भाई बस रया! बात यह हैक हम लोग क व तो ह नह ं, इसिलए समझ नह ंपात।े या सोच रहेथेतमु?'' बस रया नेआँख खोलींऔर एक गहर साँस लकेर बोला, ''म सोच रहा था क आ खर मे या होता है, य होता है? क वता य िलखी जाती है? फर क वता केसंह उतने य नह ंबकतेजतनेउप यास या कहानी-संह?'' ''बात तो ग भीर है।'' कपरूबोला, ''जहाँतक मनेसमझा और पढ़ा है- मे एक तरह क बीमार होती है, मानिसक बीमार , जो मौसम बदलनेकेदन म होती है, मसलन वार-काितक या फागुन-चैत। उसका स ब ध र ढ़ क ह ड से होता है। और क वता एक तरह का स नपात होता है। मरेा मतलब आप समझ रहेह, िम. िसब रया?'' ''िसब रया नह ं, बस रया?'' ठाकुर साहब नेटोका। बस रया नेकुछ उजलत, कुछ परेशानी और कुछ गुसेसेउनक ओर देखा और बोला, '' मा क जएगा, आप या तो ायडवाद ह या गितवाद और आपकेवचार सवदा वदेशी ह। म इस तरह केवचार सेघणृा करता हूँ...।'' कपरूकुछ जवाब देनेह वाला था क ठाकुर साहब बोल,े''अरेभाई, बकेार उलझ गयेतमु लोग, पहलेप रचय तो कर लो आपस म। येह ी च कुमार कपरू, व व ालय म रसच कर रहेह और आप ह ी रवी बस रया, इस वष एम. ए. म बठै रहेह। बहुत अ छेक व ह।'' कपरूनेहाथ िमलाया और फर ग भीरता सेबोला, '' य साहब, आपको दिुनया म और कोई काम नह ंरहा जो आप क वता करतेह?'' बस रया नेठाकुर साहब क ओर देखा और बोला, ''ठाकुर साहब, यह मरेा अपमान है, म इस तरह केसवाल का आद नह ंहूँ।'' और उठ खड़ा हुआ।
''अरेबठैो-बठैो!'' ठाकुर साहब नेहाथ खींचकर बठा िलया, ''देखो, कपरू का मतलब तमु समझेनह ं। उसका कहना यह हैक तमुम इतनी ितभा हैक लोग तुहार ितभा का आदर करना नह ंजानत।े इसिलए उ ह ने सहानभुिूत म तमुसेकहा क तमु और कोई काम य नह ंकरत।ेवरना कपरूसाहब तुहार क वता केबहुत शौक न ह। मझुसेबराबर तार फ करतेह।'' बस रया पघल गया और बोला, '' मा क जएगा। मनेगलत समझा, अब मरेा क वता-संह छप रहा है, म आपको अव य भट क ँगा।'' और फर बस रया ठाकुर साहब क ओर मडुक़र बोला, ''अब लोग मरे क वताओंक इतनी माँग करतेह क म परेशान हो गया हूँ। अभी कल ' वणेी' केस पादक िमल।ेकहनेलगेअपना िच देदो। मनेकहा क कोई िच नह ंहैतो पीछेपड़ गय।ेआ खरकार मनेआइडेटट काड उठाकर देदया!'' ''वाह!'' कपरूबोला, ''मान गयेआपको हम! तो आप रा ीय क वताएँिलखतेह या मे क ?'' ''जब जैसा अवसर हो!'' ठाकुर साहब नेजड़ दया, ''वसैेतो यह वार ट का क व-स मलेन, शराबब द कॉ ेस का क व-स मलेन, शाद - याह का क व-स मलेन, सा ह य-स मलेन का क व-स मलेन सभी जगह बलुायेजातेह। बड़ा यश हैइनका!'' बस रया नेशसंा सेमुध होकर देखा, मगर फर एक गव का भाव महँुपर लाकर ग भीर हो गया। कपरूथोड़ देर चुप रहा, फर बोला, ''तो कुछ हम लोग को भी सनुाइए न!'' ''अभी तो मडूनह ंहै।'' बस रया बोला। ठाकुर साहब बस रया को पछलेपाँच साल सेजानतेथे, वेअ छ तरह जानतेथेक बस रया कस समय और कैसेक वता सनुाता है। अत: बोल,े''ऐसेनह ंकपरू, आज शाम को आओ। ज़रा गंगाजी चल, कुछ बो टंग रहे, कुछ खाना-पीना रहेतब क वता भी सनुना!'' कपरूको बो टंग का बहेद शौक था। फौरन राजी हो गया और शाम का व ततृकाय म बन गया। इतनेम एक कार उधर सेलाइ रे क ओर गुजर । कपरू नेदेखा और बोला, ''अ छा, ठाकुर साहब, मझुेतो इजाजत द जए। अब चलँूलाइ रे म। वो लोग आ गय।ेआप कहाँचल रहेह?'' ''म ज़रा जमखानेक ओर जा रहा हूँ। अ छा भाई, तो शाम को प क रह ।'' '' ब कुल प क !'' कपरूबोला और चल दया। लाइ रे केपो टको म कार क थी और उसकेअ दर ह डॉ टर साहब क लड़क बठै थी। '' य सधुा, अ दर य बठै हो?'' ''तुह ह देख रह थी, च दर।'' और वह उतर आयी। दबुली-पतली, नाट -सी, साधारण-सी लड़क , बहुत सुदर नह ं, केवल सुदर, लेकन बातचीत म बहुत दलुार ।
''चलो, अ दर चलो।'' च दर नेकहा। वह आगेबढ़ , फर ठठक गयी और बोली, ''च दर, एक आदमी को चार कताब िमलती ह?'' ''हाँ! य ?'' ''तो...तो...'' उसनेबड़ेभोलपेन सेमसुकरातेहुए कहा, ''तो तमु अपनेनाम सेमेबर बन जाओ और दो कताब हम देदया करना बस, यादा का हम या करगे?'' ''नह ं!'' च दर हँसा, ''तुहारा तो दमाग खराब है। खुद य नह ंबनतींमेबर?'' ''नह ं, हम शरम लगती है, तमु बन जाओ मेबर हमार जगह पर।'' ''पगली कह ंक !'' च दर नेउसका क धा पकडक़र आगेलेचलतेहुए कहा, ''वाह रेशरम! अभी कल याह होगा तो कहना, हमार जगह तमु बठै जाओ च दर! कॉलजे म पहुँच गयी लड़क ; अभी शरम नह ंछूट इसक ! चल अ दर!'' और वह हचकती, ठठकती, झपती और मड़ु-मडुक़र च दर क ओर ठ हुई िनगाह सेदेखती हुई अ दर चली गयी। थोड़ देर बाद सधुा चार कताब लादेहुए िनकली। कपरूनेकहा, ''लाओ, म लेल!ँू'' तो बाँस क पतली टहनी क तरह लहराकर बोली, ''सद य म हूँ। तुह य दँूकताब?'' और जाकर कार केअ दर कताब पटक द ं। फर बोली, ''आओ, बठैो, च दर!'' ''म अब घर जाऊँगा।'' ''ऊँहूँ, यह देखो!'' और उसनेभीतर सेकागज का एक बडंल िनकाला और बोली, ''देखो, यह पापा नेतुहारेिलए दया है। लखनऊ म कॉ ेस हैन। वह ंपढऩेकेिलए यह िनब ध िलखा हैउ ह न।ेशाम तक यह टाइप हो जाना चा हए। जहाँसंयाएँह वहाँखुद आपको बठैकर बोलना होगा। और पापा सबुह सेह कह ंगयेह। समझेजनाब!'' उसनेब कुल अ हड़ ब च क तरह गरदन हलाकर शोख वर म कहा। कपरू नेबडंल लेिलया और कुछ सोचता हुआ बोला, ''लेकन डॉ टर साहब का ह तलखे, इतनेपृ, शाम तक कौन टाइप कर देगा?'' ''इसका भी इ तजाम है,'' और अपनेलाउज म सेएक प िनकालकर च दर केहाथ म देती हुई बोली, ''यह कोई पापा क परुानी ईसाई छा ा है। टाइ प ट। इसकेघर म तुह पहुँचायेदेती हूँ। मकुज रोड पर रहती हैयह। उसी केयहाँटाइप करवा लनेा और यह खत उसेदेदेना।'' ''लेकन अभी मनेचाय नह ंपी।'' ''समझ गय,ेअब तमु सोच रहेहोगेक इसी बहानेसधुा तुह चाय भी पला देगी। सो मरेा काम नह ंहैजो म चाय पलाऊँ? पापा का काम हैयह! चलो, आओ!''
च दर जाकर भीतर बठै गया और कताब उठाकर देखनेलगा, ''अरे, चार क वता क कताब उठा लायी-समझ म आएगँी तुहारे? य , सधुा?'' ''नह ं!'' िचढ़ातेहुए सधुा बोली, ''तमु कहो, तुह समझा द। इकनॉिम स पढऩेवाले या जान सा ह य?'' ''अरे, मकुज रोड पर लेचलो, ाइवर!'' च दर बोला, ''इधर कहाँचल रहेहो?'' ''नह ं, पहलेघर चलो!'' सधुा बोली, ''चाय पी लो, तब जाना!'' ''नह ं, म चाय नह ंपऊँगा।'' च दर बोला। ''चाय नह ंपऊँगा, वाह! वाह!'' सधुा क हँसी म दिूधया बचपन छलक उठा-''महँु तो सखूकर गोभी हो रहा है, चाय नह ंपएगँे।'' बगँला आया तो सधुा नेमहरा जन सेचाय बनानेकेिलए कहा और च दर को टड म म बठाकर याले िनकालनेकेिलए चल द । वसैेतो यह घर, यह प रवार च कपरूका अपना हो चुका था; जब सेवह अपनी माँसेझगडक़र याग भाग आया था पढऩेकेिलए, यहाँआकर बी. ए. म भरती हुआ था और कम खच केखयाल सेचौक म एक कमरा लकेर रहता था, तभी डॉ टर शुला उसकेसीिनयर ट चर थेऔर उसक प र थितय सेअवगत थे। च दर क अँेजी बहुत ह अ छ थी और डॉ. शुला उससेअ सर छोटे-छोटेलखे िलखवाकर प काओंम िभजवातेथे। उ ह नेकई प के आिथक त भ का काम च दर को दलवा दया था और उसकेबाद च दर केिलए डॉ. शुला का थान अपनेसरं क और पता सेभी यादा हो गया था। च दर शरमीला लड़का था, बहेद शरमीला, कभी उसनेयिूनविसट केवजीफेके िलए भी कोिशश न क थी, लेकन जब बी. ए. म वह सार यिूनविसट म सव थम आया तब वयंइकनॉिम स वभाग नेउसेयिूनविसट केआिथक काशन का वतैिनक स पादक बना दया था। एम. ए. म भी वह सव थम आया और उसकेबाद उसनेरसच लेली। उसकेबाद डॉ. शुला यिूनविसट सेहटकर यरूो म चलेगयेथे। अगर सच पछूा जाय तो उसकेसारेकैरयर का ये डॉ. शुला को था ज ह नेहमशेा उसक ह मत बढ़ायी और उसको अपनेलड़केसे बढक़र माना। अपनी सार मदद केबावजूद डॉ. शुला नेउससेइतना अपनापन बनायेरखा क कैसेधीरे-धीरेच दर सार गैरयत खो बठैा; यह उसेखुद नह ंमालमू। यह बगँला, इसकेकमरे, इसकेलॉन, इसक कताब, इसकेिनवासी, सभी कुछ जैसेउसकेअपनेथेऔर सभी का उससेजानेकतनेज म का स ब ध था। और यह न ह दबुली-पतली रंगीन च करन-सी सधुा। जब आज सेवष पहलेयह सातवींपास करकेअपनी बआु केपास सेयहाँआयी थी तब सेलकेर आज तक कैसेवह भी च दर क अपनी होती गयी थी, इसेच दर खुद नह ंजानता था। जब वह आयी थी तब वह बहुत शरमीली थी, बहुत भोली थी, आठवींम पढऩेकेबावजूद वह खाना खातेव रोती थी, मचलती थी तो अपनी कॉपी फाड़ डालती थी और जब तक डॉ टर साहब उसेगोद म बठाकर नह ंमनातेथे, वह कूल नह ंजाती थी। तीन बरस क अव था म ह उसक माँचल बसी थी और दस साल तक वह अपनी बआु केपास एक गाँव म रह थी। अब तरेह वष क होनेपर गाँव वाल नेउसक शाद पर जोर देना और शाद न होनेपर गाँव क औरत नेहाथ नचाना और महँु मटकाना शु कया तो डॉ टर साहब नेउसेइलाहाबाद
बलुाकर आठवींम भत करा दया। जब वह आयी थी तो आधी जंगली थी, तरकार म घी कम होनेपर वह महरा जन का चौका जूठा कर देती थी और रात म फूल तोडक़र न लानेपर अकसर उसनेमाली को दाँत भी काट खाया था। च दर सेज र वह बहेद डरती थी, पर न जाने य च दर भी उससेनह ंबोलता था। लेकन जब दो साल तक उसके येउप व जार रहेऔर अ सर डॉ टर साहब गुसेकेमारेउसेन साथ खलातेथेऔर न उससेबोलतेथे, तो वह रो-रोकर और िसर पटक-पटककर अपनी जान आधी कर देती थी। तब अ सर च दर नेपता और पुी का समझौता कराया था, अ सर सधुा को डाँटा था, समझाया था, और सधुा, घर-भर सेअ हड़ परुवाई और व ोह झ केक तरह तोड़-फोड़ मचाती रहनेवाली सधुा, च दर क आँख केइशारेपर सबुह क नसीम क तरह शा त हो जाती थी। कब और य उसनेच दर केइशार का यह मौन अनशुासन वीकार कर िलया था, यह उसेखुद नह ंमालमू था, और यह सभी कुछ इतने वाभा वक ढंग स,ेइतना अपन-ेआप होता गया क दोन म सेकोई भी इस या सेवा कफ नह ं था, कोई भी इसके ित जाग क न था, दोन का एक-दसूरेके ित अिधकार और आकषण इतना वाभा वक था जैसे शरद क प व ता या सबुह क रोशनी। और मजा तो यह था क च दर क श ल देखकर िछप जानेवाली सधुा इतनी ढ ठ हो गयी थी क उसका सारा व ोह, सार झँुझलाहट, िमजाज क सार तजेी, सारा तीखापन और सारा लड़ाई-झगड़ा, सभी क तरफ सेहटकर च दर क ओर के त हो गया था। वह व ो हनी अब शा त हो गयी थी। इतनी शा त, इतनी सशुील, इतनी वन , इतनी िम भा षणी क सभी को देखकर ता जुब होता था, लेकन च दर को देखकर जैसेउसका बचपन फर लौट आता था और जब तक वह च दर को खझाकर, छेडक़र लड़ नह ंलतेी थी उसेचैन नह ंपड़ता था। अ सर दोन म अनबोला रहता था, लेकन जब दो दन तक दोन महँु फुलायेरहतेथेऔर डॉ टर साहब केलौटनेपर सधुा उ साह सेउनके यरूो का हाल नह ंपछूती थी और खातेव दलुार नह ंदखाती थी तो डॉ टर साहब फौरन पछूतेथे, '' या... च दर सेलड़ाई हो गयी या?'' फर वह महँु फुलाकर िशकायत करती थी और िशकायत भी या- या होती थीं, च दर ने उसक हेड िम ेस का नाम एलीफटा ( ीमती हिथनी) रखा था, या च दर नेउसको डबटे केभाषण के वाइंट नह ं बताय,ेया च दर कहता हैक सधुा क स खयाँकोयला बचेती ह, और जब डॉ टर साहब कहतेह क वह च दर को डाँट दगेतो वह खुशी सेफूल उठती और च दर केआनेपर आँख नचाती हुई िचढ़ाती थी, ''कहो, कैसी डाँट पड़ ?'' वसैेसधुा अपनेघर क परुखन थी। कस मौसम म कौन-सी तरकार पापा को मा फक पड़ती है, बाजार म चीज का या भाव है, नौकर चोर तो नह ंकरता, पापा कतनेसोसाय टय केमेबर ह, च दर केइ नॉिम स केकोस म या है, यह सभी उसेमालमू था। मोटर या बजली बगड़ जानेपर वह थोड़ -बहुत इंजीिनय रंग भी कर लतेी थी और मातृव का अंश तो उसम इतना था क हर नौकर और नौकरानी उससेअपना सखु-द:ुख कह देतेथे। पढ़ाई केसाथ- साथ घर का सारा काम-काज करतेहुए उसका वा य भी कुछ बगड़ गया था और अपनी उ के हसाब सेकुछ अिधक शा त, सयंम, ग भीर और बजुुग थी, मगर अपनेपापा और च दर, इन दोन केसामनेहमशेा उसका बचपन इठलानेलगता था। दोन केसामनेउसका दय उ मु था और नहेबाधाह न। लेकन हाँ, एक बात थी। उसेजतना नहे और नहे-भर फटकार और वा य के ित िच ता अपनेपापा से िमलती थी, वह सब बड़ेिन: वाथ भाव सेवह च दर को देडालती थी। खान-ेपीनेक जतनी परवाह उसकेपापा उसक रखतेथे, न खानेपर या कम खानेपर उसेजतनेदलुार सेफटकारतेथे, उतना ह याल वह च दर का रखती थी और वा य केिलए जो उपदेश उसेपापा सेिमलतेथे, उसेऔर भी नहे म पागकर वह च दर को देडालती थी।
च दर कैबजेखाना खाता है, यहाँसेजाकर घर पर कतनी देर पढ़ता है, रात को सोतेव दधू पीता हैया नह ं, इन सबका लखेा-जोखा उसेसधुा को देना पड़ता, और जब कभी उसकेखान-ेपीनेम कोई कमी रह जाती तो उसेसधुा क डाँट खानी ह पड़ती थी। पापा केिलए सधुा अभी ब ची थी; और वा य केमामलेम सधुा केिलए च दर अभी ब चा था। और कभी-कभी तो सधुा क वा य-िच ता इतनी यादा हो जाती थी क च दर बचेारा जो खुद त दुत था, घबरा उठता था। एक बार सधुा नेकमाल कर दया। उसक तबीयत खराब हुई और डॉ टर नेउसेलड़ कय का एक टॉिनक पीनेकेिलए बताया। इ तहान म जब च दर कुछ दबुला-सा हो गया तो सधुा अपनी बची हुई दवा ले आयी। और लगी च दर सेजद करनेक '' पयो इस!े'' जब च दर नेकसी अखबार म उसका व ापन दखाकर बताया क लड़ कय केिलए है, तब कह ंजाकर उसक जान बची। इसीिलए जब आज सधुा नेचाय केिलए कहा तो उसक ह काँप गयी य क जब कभी सधुा चाय बनाती थी तो यालेकेमहँुतक दधू भरकर उसम दो-तीन च मच चाय का पानी डाल देती थी और अगर उसने यादा ांग चाय क माँग क तो उसेखािलस दधू पीना पड़ता था। और चाय केसाथ फल और मवेा और खुदा जाने या- या, और उसकेबाद सधुा का इसरार, न खानेपर सधुा का गुसा और उसकेबाद क ल बी-चौड़ मनहुार; इस सबसेच दर बहुत घबराता था। लेकन जब सधुा उसे टड म म बठाकर ज द सेचाय बना लायी तो उसेमजबरू होना पड़ा, और बठैे-बठैेिनहायत बबेसी सेउसनेदेखा क सधुा नेयालेम दधू डाला और उसकेबाद थोड़ -सी चाय डाल द । उसकेबाद अपनेयालेम चाय डालकर और दो च मच दधू डालकर आप ठाठ सेपीनेलगे, और बतेक लफु सेदिूधया चाय का याला च दर केसामनेखसकाकर बोली, ''पी जए, ना ता आ रहा है।'' च दर नेयालेको अपनेसामनेरखा और उसेचार तरफ घमुाकर देखता रहा क कस तरफ सेउसेचाय का अंश िमल सकता है। जब सभी ओर सेयालेम ीरसागर नजर आया तो उसनेहारकर याला रख दया। '' य , पीते य नह ं?'' सधुा नेअपना याला रख दया। ''पीएँ या? कह ंचाय भी हो?'' ''तो और या खािलस चाय पी जएगा? दमागी काम करनेवाल को ऐसी ह चाय पीनी चा हए।'' ''तो अब मझुेसोचना पड़ेगा क म चाय छोड़ूँया रसच। न ऐसी चाय मझुेपस द, न ऐसा दमागी काम!'' ''लो, आपको व ास नह ंहोता। मरे लासफेलो हैगेसूकाजमी; सबसेतजे लड़क है, उसक अ मी उसेदधू म चाय उबालकर देती है।'' '' या नाम हैतुहार सखी का?'' ''गेस!ू'' ''बड़ा अ छा नाम है!'' ''और या! मरे सबसेघिन िम हैऔर उतनी ह अ छ हैजतना अ छा नाम!''
''ज र-ज र,'' महँु बचकातेहुए च दर नेकहा, ''और उतनी ह काली होगी, जतनेकालेगेस।ू'' ''धत,्शरम नह ंआती कसी लड़क केिलए ऐसा कहतेहुए!'' ''और हमारेदो त क बरुाई करती हो तब?'' ''तब या! वेतो सब ह ह बरुे! अ छा तो ना ता, पहलेफल खाओ,'' और वह लटे म छ ल-छ लकर स तरा रखनेलगी। इतनेम य ह वह झुककर एक िगरेहुए स तरेको नीचेसेउठानेलगी क च दर नेझट सेउसका याला अपनेसामनेरख िलया और अपना याला उधर रख दया और शा त िच सेपीनेलगा। स तरेक फाँक उसक ओर बढ़ातेहुए य ह उसनेएक घटँूचाय ली तो वह च ककर बोली, ''अरे, यह या हुआ?'' ''कुछ नह ं, हमनेउसम दधू डाल दया। तुह दमागी काम बहुत रहता है!'' च दर नेठाठ सेचाय घटँूतेहुए कहा। सधुा कुढ़ गयी। कुछ बोली नह ं। चाय ख म करकेच दर नेघड़ देखी। ''अ छा लाओ, या टाइप कराना है? अब बहुत देर हो रह है।'' ''बस यहाँतो एक िमनट बठैना बरुा लगता हैआपको! हम कहतेह क ना तेऔर खानेकेव आदमी को ज द नह ंकरनी चा हए। बैठए न!'' ''अरे, तो तुह कॉलजे क तयैार नह ंकरनी है?'' ''करनी य नह ंहै। आज तो गेसूको मोटर पर लतेेहुए तब जाना है!'' ''तुहार गेसूऔर कभी मोटर पर चढ़ है?'' ''जी, वह सा बर हुसनै काजमी क लड़क है, उसकेयहाँदो मोटर ह और रोज तो उसकेयहाँदावत होती रहती ह।'' ''अ छा, हमार तो दावत कभी नह ंक ?'' ''अहा हा, गेसूकेयहाँदावत खाएगँे! इसी महँुस!ेजनाब उसक शाद भी तय हो गयी है, अगलेजाड़ तक शायद हो भी जाय।'' ''िछह, बड़ खराब लड़क हो! कहाँरहता है यान तुहारा?'' सधुा नेमजाक म परा जत कर बहुत वजय-भर मसुकान सेउसक ओर देखा। च दर नेझपकर िनगाह नीची कर ली तो सधुा पास आकर च दर का क धा पकडक़र बोली-''अरेउदास हो गय,ेनह ंभइया, तुहारा भी याह तय कराएगँे, घबराते य हो!'' और एक मोट -सी इकनॉिम स क कताब उठाकर बोली, ''लो, इस मटुक सेयाह करोगे! लो बातचीत कर लो, तब तक म वह िनब ध लेआऊँ, टाइप करानेवाला।'' च दर नेखिसयाकर बड़ जोर सेसधुा का हाथ दबा दया। ''हाय रे!'' सधुा नेहाथ छुड़ाकर महँुबनातेहुए कहा, ''लो बाबा, हम जा रहेह, काहेबगड़ रहेह आप?'' और वह चली गयी! डॉ टर साहब का िलखा हुआ िनब ध उठा
लायी और बोली, ''लो, यह िनब ध क पा डुिल प है।'' उसकेबाद च दर क ओर बड़ेदलुार सेदेखती हुई बोली, ''शाम को आओगे?'' ''न!'' ''अ छा, हम परेशान नह ंकरगे। तमु चुपचाप पढऩा। जब रात को पापा आ जाएँतो उ ह िनब ध क ितिल प देकर चलेजाना!'' ''नह ं, आज शाम को मरे दावत हैठाकुर साहब केयहाँ।'' ''तो उसकेबाद आ जाना। और देखो, अब फरवर आ गयी है, मा टर ढूँढ़ दो हम।'' ''नह ं, येसब झूठ बात है। हम कल सबुह आएगँे।'' ''अ छा, तो सबुह ज द आना और देखो, मा टर लाना मत भलूना। ाइवर तुह मकुज रोड पहुँचा देगा।'' वह कार म बठै गया और कार टाट हो गयी क फर सधुा नेपकुारा। वह फर उतरा। सधुा बोली, ''लो, यह िलफाफा तो भलू ह गयेथे। पापा नेिलख दया है। उसेदेदेना।'' ''अ छा।'' कहकर फर च दर चला क फर सधुा नेपकुारा, ''सनुो!'' ''एक बार म य नह ंकह देती सब!'' च दर नेझ लाकर कहा। ''अरेबड़ ग भीर बात है। देखो, वहाँकुछ ऐसी-वसैी बात मत कहना लड़क स,ेवरना उसकेयहाँदो बड़े-बड़े बलुडॉग ह।'' कहकर उसनेगाल फुलाकर, आँख फैलाकर ऐसी बलुडॉग क भिंगमा बनायी क च दर हँस पड़ा। सधुा भी हँस पड़ । ऐसी थी सधुा, और ऐसा था च दर। िस वल लाइ स केएक उजाड़ ह सेम एक परुान-ेसेबगँलेकेसामनेआकर मोटर क । बगँलेका नाम था 'रोजलान' लेकन सामनेकेक पाउंड म जंगली घास उग रह थी और गुलाब केफूल केबजाय अहातेम मरुगी के पखं बखरेपड़ेथे। रा तेपर भी घास उग आयी थी और और फाटक पर, जसकेएक ख भेक कॉिनस टूट चुक थी, बजाय लोहेकेदरवाजेकेदो आड़ेबाँस लगेहुए थे। फाटक केएक ओर एक छोटा-सा लकड़ का नामपटल लगा था, जो कभी काला रहा होगा, लेकन जसेधूल, बरसात और हवा नेिचतकबरा बना दया था। च दर मोटर सेउतरकर उस बोड पर िलखेहुए अधिमटेसफेद अ र को पढऩेक कोिशश करनेलगा, और जानेकसका महँु देखकर सबुह उठा था क उसेसफलता भी िमल गयी। उस पर िलखा था, 'ए. एफ. ड ूज'। उसनेजेब सेिलफाफा िनकाला और पता िमलाया। िलफाफेपर िलखा था, 'िमस पी. ड ूज'। यह बगँला है, उसेस तोष हुआ। ''हॉन दो!'' उसने ाइवर सेकहा। ाइवर नेहॉन दया। लेकन कसी का बाहर आना तो दरू, एक मरुगा, जो अहातेम कुडक़ुड़ा रहा था, उसनेमडुक़र बड़ेस देह और ास सेच दर क ओर देखा और उसकेबाद पखं फडफ़ड़ाते हुए, चीखतेहुए जान छोडक़र भागा। ''बड़ा मनहूस बगँला है, यहाँआदमी रहतेह या ते?'' कपरूनेऊबकर कहा और
ाइवर सेबोला, ''जाओ तमु, हम अ दर जाकर देखतेह!'' ''अ छा हुजूर, सधुा बीबी से या कह दगे?'' ''कह देना, पहुँचा दया।'' कार मड़ु और कपरूबाँस फाँदकर अ दर घसुा। आगेका पो टको खाली पड़ा था और नीचेक जमीन ऐसी थी जैसेकई साल सेउस बगँलेम कोई सवार गाड़ न आयी हो। वह बरामदेम गया। दरवाजेब द थेऔर उन पर धूल जमी थी। एक जगह चौखट और दरवाजेकेबीच म मकड़ नेजाला बनु रखा था। 'यह बगँला खाली है या?' कपरूने सोचा। सबुह साढ़ेआठ बजेह वहाँऐसा स नाटा छाया था क दल घबरा जाय। आस-पास चार ओर आधी फलाग तक कोई बगँला नह ंथा। उसनेसोचा बगँलेकेपीछेक ओर शायद नौकर क झ प डय़ाँह । वह दाय बाजूसेमड़ुा और खुशबूका एक तजे झ का उसेचूमता हुआ िनकल गया। 'ता जुब है, यह स नाटा, यह मनहूसी और इतनी खुशब!ू' कपरूनेकहा और आगेबढ़ा तो देखा क बगँलेकेपछवाड़ेगुलाब का एक बहुत खूबसरूत बाग है। क ची र वश और बड़े-बड़ेगुलाब, हर रंग के। वह सचमचु 'रोजलान' था। वह बाग म पहुँचा। उधर सेभी बगँलेकेदरवाजेब द थे। उसनेखटखटाया लेकन कोई जवाब नह ंिमला। वह बाग म घसुा क शायद कोई माली काम कर रहा हो। बीच-बीच म ऊँचे-ऊँचेजंगली चमलेी केझाड़ थेऔर कह ं-कह ं लोहेक छड़ केकटघरे। बगेमबिेलया भी फूल रह थी लेकन चार ओर एक अजब-सा स नाटा था और हर फूल पर कसी खामोशी केफ र तेक छाँह थी। फूल म रंग था, हवा म ताजगी थी, पड़े म ह रयाली थी, झ क म खुशबूथी, लेकन फर भी सारा बाग एक ऐसेिसतार का गुलद ता लग रहा था जनक चमक, जनक रोशनी और जनक ऊँचाई लटुचुक हो। लगता था जैसेबाग का मािलक मौसमी रंगीनी भलू चुका हो, य क नैटिशयम या वीटपी या ला स, कोई भी मौसमी फूल न था, िसफ गुलाब थेऔर जंगली चमलेी थी और बगेमबिेलया थी जो साल पहलेबोये गयेथे। उसकेबाद उ ह ंक काट-छाँट पर बाग चल रहा था। बागबानी म कोई नवीनता और मौसम का उ लास न था। च दर फूल का बहेद शौक न था। सबुह घमूनेकेिलए उसनेद रया कनारेकेबजाय अ ेड पाक चुना था य क पानी क लहर केबजाय उसेफूल केबाग केरंग और सौरभ क लहर सेबहेद यार था। और उसेदसूरा शौक था क फूल केपौध केपास सेगुजरतेहुए हर फूल को समझनेक कोिशश करना। अपनी नाजुक टहिनय पर हँसत-े मसुकरातेहुए येफूल जैसेअपनेरंग क बोली म आदमी सेजंदगी का जानेकौन-सा राज कहना चाहतेह। और ऐसा लगता हैक जैसेहर फूल केपास अपना य गत स देश हैजसेवह अपनेदल क पाँखुरय म आ ह तेसेसहेज कर रखेहुए ह क कोई सनुनेवाला िमलेऔर वह अपनी दा ताँकह जाए। पौधेक ऊपर फुनगी पर मसुकराता हुआ आसमान क तरफ महँु कयेहुए यह गुलाब जो रात-भर िसतार क मसुकराहट चुपचाप पीता रहा है, यह अपने मोितय -पाँखुरय केहोठ सेजाने य खल खलाता ह जा रहा है। जानेइसेकौन-सा रह य िमल गया है। और वह एक नीचेवाली टहनी म आधा झुका हुआ गुलाब, झुक हुई पलक -सी पाँखुरयाँऔर दोहरेमखमली तार-सी उसक डंड , यह गुलाब जाने य उदास है? और यह दबुली-पतली ल बी-सी नाजुक कली जो बहुत सावधानी सेहरा आँचल लपटेेहैऔर थम ात-यौवना क तरह लाज म जो िसमट तो िसमट ह चली जा रह है, लेकन जसकेयौवन क गुलाबी लपट सात हरेपरद म सेझलक ह पड़ती ह, झलक ह पड़ती ह। और फारस केशाहजादेजैसा शान से
खला हुआ पीला गुलाब! उस पीलेगुलाब केपास आकर च दर क गया और झुककर देखनेलगा। काितक पनूो के चाँद सेझरनेवालेअमतृ को पीनेकेिलए याकुल कसी सकुुमार, भावकु पर क फैली हुई अंजिल केबराबर बड़ा-सा वह फूल जैसेरोशनी बखेर रहा था। बगेमबिेलया केकंुज सेछनकर आनवेाली तोतापखंी धूप नेजैसेउस पर धान-पान क तरह खुशनमुा ह रयाली बखेर द थी। च दर नेसोचा, उसेतोड़ ल लेकन ह मत न पड़ । वह झुका क उसेसघँू ह ल। सघँूनेकेइरादेसेउसनेहाथ बढ़ाया ह था क कसी नेपीछेसेगरजकर कहा, ''ह यर यूआर, आई हैव काट रेड-हैडेड टुडे!'' (यह तमु हो; आज तुह मौकेपर पकड़ पाया हूँ) और उसकेबाद कसी नेअपनेदोन हाथ म जकड़ िलया और उसक गरदन पर सवार हो गया। वह उछल पड़ा और अपनेको छुड़ानेक कोिशश करनेलगा। पहलेतो वह कुछ समझ नह ंपाया। अजब रह यमय हैयह बगँला। एक अ य भय और एक िसहरन म उसकेहाथ-पाँव ढ लेहो गय।ेलेकन उसनेह मत करकेअपना एक हाथ छुड़ा िलया और मडुक़र देखा तो एक बहुत कमजोर, बीमार-सा, पीली आँख वाला गोरा उसेपकड़ेहुए था। च दर केदसूरेहाथ को फर पकडऩेक कोिशश करता हुआ वह हाँफता हुआ बोला (अँेजी म), ''रोज-रोज यहाँसेफूल गायब होतेथे। म कहता था, कहता था, कौन लेजाता है। हो...हो...,'' वह हाँफता जा रहा था, ''आज मनेपकड़ा तुह। रोज चुपकेसे चलेजातेथे...'' वह च दर को कसकर पकड़ेथा लेकन उस बीमार गोरेक साँस जैसेछूट जा रह थी। च दर नेउसे झटका देकर धकेल दया और डाँटकर बोला, '' या मतलब हैतुहारा! पागल है या! खबरदार जो हाथ बढ़ाया, अभी ढेर कर दँगूा तझुे! गोरा सअुर!'' और उसनेअपनी आ तीन चढ़ायीं। वह ध केसेिगर गया था, धूल झाड़तेउठ बठैा और बड़ ह रोनी आवाज म बोला, '' कतना जुम है, कतना जुम है! मरेेफूल भी तमु चुरा लेगयेऔर मझुेइतना हक भी नह ंक तुह धमकाऊँ! अब तमु मझुसेलड़ोगे! तमु जवान हो, म बढ़ूा हूँ। हाय रेम!'' और सचमचु वह जैसेरोनेलगा हो। च दर नेउसका रोना देखा और उसका सारा गुसा हवा हो गया और हँसी रोककर बोला, ''गलतफहमी है, जनाब! म बहुत दरूरहता हूँ। म िच ठ लकेर िमस ड ूज सेिमलनेआया था।'' उसका रोना नह ं का, ''तमु बहाना बनातेहो, बहाना बनातेहो और अगर म व ास नह ंकरता तो तमु मारने क धमक देतेहो? अगर म कमजोर न होता...तो तुह पीसकर खा जाता और तुहार खोपड़ कुचलकर फक देता जैसेतमुनेमरेेफूल फकेह गे?'' '' फर तमुनेगाली द ! म उठाकर तुह अभी नालेम फक दँगूा!'' ''अरेबाप रे! दौड़ो, दौड़ो, मझुेमार डाला...पॉपी...टॉमी...अरेदोन कुेमर गय.े..।'' उसनेडर केमारेचीखना शु कया। '' या है, बट ? य िच ला रहेहो?'' बाथ म केअ दर सेकसी नेिच लाकर कहा। ''अरेमार डाला इसन.े..दौड़ो-दौड़ो!'' झटकेसेबाथ म का दरवाजा खुला बेद -गाउन पहनेहुए एक लड़क दौड़ती हुई आयी और च दर को देखकर क गयी।
'' या है?'' उसनेडाँटकर पछूा। ''कुछ नह ं, शायद पागल मालमू देता है!'' ''जबान सभँालकर बोलो, वह मरेा भाई है!'' ''ओह! कोई भी हो। म िमस ड ूज सेिमलनेआया था। मनेआवाज द तो कोई नह ंबोला। म बाग म घमूने लगा। इतनेम इसनेमरे गरदन पकड़ ली। यह बीमार और कमजोर हैवरना अभी गरदन दबा देता।'' गोरा उस लड़क केआतेह फर तनकर खड़ा हो गया और दाँत पीसकर बोला, ''अरेम तुहारेदाँत तोड़ दँगूा। बदमाश कह ंका, चुपके-चुपकेआया और गुलाब तोडऩेलगा। म चमलेी केझाड़ केपीछेिछपा देख रहा था।'' ''अभी म पिुलस बलुाती हूँ, तमु देखतेरहो बट इस।ेम फोन करती हूँ।'' लड़क नेडाँटतेहुए कहा। ''अरेभाई, म िमस ड ूज सेिमलनेआया हूँ।'' ''म तुह नह ंजानती, झूठा कह ंका। म िमस ड ूज हूँ।'' ''देखए तो यह खत!'' लड़क नेखत खोला और पढ़ा और एकदम उसनेआवाज बदल द । ''िछह बट , तमु कसी दन पागलखानेजाओगे। आपको डॉ. शुला नेभजेा है। तमु तो मझुेबदनाम करा डालोगे!'' उसक श ल और भी रोनी हो गयी , ''म नह ंजानता था, म जानता नह ंथा।'' उसनेऔर भी घबराकर कहा। ''माफ क जएगा!'' लड़क नेबड़ेमीठे वर म साफ ह दुतानी म कहा, ''मरेेभाई का दमाग ज़रा ठ क नह ं रहता, जब सेइनक प ी क मौत हो गयी।'' ''इसका मतलब येनह ंक येकसी भलेआदमी क इ जत उतार ल।'' च दर नेबगडक़र कहा। ''देखए, बरुा मत मािनए। म इनक ओर सेमाफ माँगती हूँ। आइए, अ दर चिलए।'' उसनेच दर का हाथ पकड़ िलया। उसका हाथ बहेद ठ डा था। वह नहाकर आ रह थी। उसकेहाथ केउस तषुार पश सेच दर िसहर उठा और उसनेहाथ झटककर कहा, ''अफसोस, आपका हाथ तो बफ है?'' लड़क च क गयी। वह स : नाता सहसा सचेत हो गयी और बोली, ''अरेशतैान तुह लेजाए, बट ! तुहारेपीछे म बेद गाउन म भाग आयी।'' और बेद गाउन केदोन कालर पकडक़र उसनेअपनी खुली गरदन ढँकनेका यास कया और फर अपनी पोशाक पर ल जत होकर भागी। अभी तक गुसेकेमारेच दर नेउस पर यान ह नह ंदया था। लेकन उसनेदेखा क वह तईेस बरस क दबुली-पतली त णी है। लहराता हुआ बदन, गलेतक कटेहुए बाल। एंलो-इंडयन होनेकेबावजूद गोर नह ंहै। चाय
क तरह वह ह क , पतली, भरू और तशु थी। भागतेव ऐसी लग रह थी जैसेछलकती हुई चाय। इतनेम वह गोरा उठा और च दर का क धा छूकर बोला, ''माफ करना, भाई! उससेमरे िशकायत मत करना। असल म येगुलाब मरे मतृ प ी क यादगार ह। जब इनका पहला पड़े आया था तब म इतना ह जवान था जतने तमु, और मरे प ी उतनी ह अ छ थी जतनी प मी।'' ''कौन प मी?'' ''यह मरे बहन िमला ड ूज!'' ''ओह! कब मर आपक प ी?ï माफ क जएगा मझुेभी मालमू नह ंथा!'' ''हाँ, म बड़ा अभागा हूँ। मरेा दमाग कुछ खराब है; देखए!'' कहकर उसनेझुककर अपनी खोपड़ च दर केसामने कर द और बहुत िगड़िगड़ाकर बोला, ''पता नह ंकौन मरेेफूल चुरा लेजाता है! अपनी प ी क मृयुकेबाद पाँच साल सेम इन फूल को सभँाल रहा हूँ। हाय रेम! जाइए, प मी बलुा रह है।'' पछवाड़ेकेसहन का बीच का दरवाजा खुल गया था और प मी कपड़ेपहनकर बाहर झाँक रह थी। च दर आगे बढ़ा और गोरा मडुक़र अपनेगुलाब और चमलेी क झाड़ म खो गया। च दर गया और कमरेम पड़ेहुए एक सोफा पर बठै गया। प मी वायलटे कर चुक थी और एक ह क ा सीसी खुशबूसेमहक रह थी। शैपूसेधुलेहुए खे बाल जो मचलेपड़ रहेथे, खुशनमुा आसमानी रंग का एक पतला िचपका हुआ झीना लाउज और लाउज पर एक लनैले का फुलपट जसकेदो गेिलस कमर, छाती और क धेपर िचपकेहुए थे। होठ पर एक ह क िलप टक क झलक मा थी, और गलेतक बहुत ह का पाउडर, जो बहुत नजद क सेह मालमू होता था। ल बेनाखून पर ह क गुलाबी पट। वह आयी, िन सकंोच भाव सेउसी सोफेपर कपरू केबगल म बठै गयी और बड़ मलुायम आवाज म बोली, ''मझुेबड़ा द:ुख है, िम टर कपरू! आपको बहुत तवालत उठानी पड़ । चोट तो नह ंआयी?'' ''नह ं, नह ं, कोई बात नह ं!'' कपरू का सारा गुसा हवा हो गया। कोई भी लड़क िन:सकंोच भाव स,ेइतनी अपनायत सेसहानभुिूत दखायेऔर माफ माँगे, तो उसकेसामनेकौन पानी-पानी नह ंहो जाएगा, और फर वह भी तब जब क उसकेहोठ पर न केवल बोली अ छ लगती हो, वरन िलप टक भी इतनी यार हो। लेकन च दर क एक आदत थी। और चाहेकुछ न हो, कम-स-ेकम वह यह अ छ तरह जानता था क नार जाित सेयवहार करतेसमय कहाँपर कतनी ढ ल देनी चा हए, कतना कसना चा हए, कब सहानभुिूत सेउ ह झुकाया जा सकता है, कब अकड़कर। इस व जानता था क इस लड़क सेवह जतनी सहानभुिूत चाहे, लेसकता है, अपनेअपमान केहजानेकेतौर पर। इसिलए कपरूसाहब बोल,े''लेकन िमस ड ूज, आपकेभाई बीमार होनेकेबावजूद बहुत मजबतू ह। उफ! गरदन पर जैसेअभी तक जलन हो रह है।'' ''ओहो! सचमचु म बहुत शिम दा हूँ। देखँू!'' और कालर हटाकर उसनेगरदन पर अपनी बफ ली अँगुिलयाँरख द ं, ''लाइए, लोशन मल दँूम!'' ''ध यवाद, ध यवाद, इतना क न क जए। आपक अँगुिलयाँग द हो जाएगँी!'' कपरूनेबड़ शालीनता सेकहा।
प मी केहोठ पर एक ह क -सी मुकराहट, आँख म ह क -सी लाज और व म एक ह का-सा क पन दौड़ गया। यह वा य कपरूनेचाहेशरारत म ह कहा हो, लेकन कहा इतनेशा त और सयंत वर म क प मी कुछ ितवाद भी न कर सक और फर छह बरस सेसाठ बरस तक क कौन ऐसी ी हैजो अपने प क शसंा पर बहेोश न हो जाए। ''अ छा लाइए, वह पीच कहाँहैजो मझुेटाइप करनी है।'' उसनेवषय बदलतेहुए कहा। ''यह ली जए।'' कपरूनेदेद । ''यह तो मुकल सेतीन-चार घ टेका काम है?'' और प मी पीच को उलट-पलुटकर देखनेलगी। ''माफ क जएगा, अगर म कुछ य गत सवाल पछूूँ; या आप टाइ प ट ह?'' कपरूनेबहुत िश ता सेपछूा। ''जी नह ं!'' प मी नेउ ह ंकागज पर नजर गड़ातेहुए कहा, ''मनेकभी टाइ पगं और शाटहड सीखी थी, और तब म सीिनयर के ज पास करकेयिूनविसट गयी थी। यिूनविसट मझुेछोडऩी पड़ य क मनेअपनी शाद कर ली।'' ''अ छा, आपकेपित कहाँह?'' ''रावल पडं म, आम म।'' ''लेकन फर आप ड ूज य िलखती ह, और फर िमस?'' '' य क हमलोग अलग हो गयेह।'' और पीच केकागज को फर तह करती हुई बोली- ''िम टर कपरू, आप अ ववा हत ह?'' ''जी हाँ?'' ''और ववाह करनेका इरादा तो नह ंरखत?े'' ''नह ं।'' ''बहुत अ छे। तब तो हम लोग म िनभ जाएगी। म शाद सेबहुत नफरत करती हूँ। शाद अपनेको दया जानवेाला सबसेबड़ा धोखा है। देखए, येमरेेभाई ह न, कैसेपीलेऔर बीमार-सेह। येपहलेबड़ेत दुत और टेिनस म ा त केअ छेखला डय़ म सेथे। एक बशप क दबुली-पतली भावकु लड़क सेइ ह नेशाद कर ली, और उसे बहेद यार करतेथे। सबुह-शाम, दोपहर, रात कभी उसेअलग नह ंहोनेदेतेथे। हनीमनू केिलए उसेलकेर सीलोन गये थे। वह लड़क बहुत कला य थी। बहुत अ छा नाचती थी, बहुत अ छा गाती थी और खुद गीत िलखती थी। यह गुलाब का बाग उसी नेबनवाया था और इ ह ंकेबीच म दोन बठैकर घटं गुजार देतेथे। ''कुछ दन बाद दोन म झगड़ा हुआ। लब म बॉल डा स था और उस दन वह लड़क बहुत अ छ लग रह थी। बहुत अ छ । डा स केव इनका यान डा स क तरफ कम था, अपनी प ी क तरफ यादा। इ ह नेआवशे म उसक अँगुिलयाँजोर सेदबा द ं। वह चीख पड़ और सभी इन लोग क ओर देखकर हँस पड़े।
''वह घर आयी और बहुत बगड़ , बोली, 'आप नाच रहेथेया टेिनस का मचै खेल रहेथे, मरेा हाथ था या टेिनस का रैकट?' इस बात पर बट भी बगड़ गया, और उस दन सेजो इन लोग म खटक तो फर कभी न बनी। धीरे- धीरेवह लड़क एक साजट को यार करनेलगी। बट को इतना सदमा हुआ क वह बीमार पड़ गया। लेकन बट ने तलाक नह ंदया, उस लड़क सेकुछ कहा भी नह ं, और उस लड़क नेसाजट सेयार जार रखा लेकन बीमार म बट क बहुत सवेा क । बट अ छा हो गया। उसकेबाद उसको एक ब ची हुई और उसी म वह मर गयी। हालाँक हम लोग सब जानतेह क वह ब ची उस साजट क थी लेकन बट को यक न नह ंहोता क वह साजट को यार करती थी। वह कहता है, 'यह दसूरेको यार करती होती तो मरे इतनी सवेा कैसेकर सकती थी भला!' उस ब ची का नाम बट नेरोज रखा। और उसेलकेर दनभर उ ह ंगुलाब केपड़े केबीच म बठैा करता था जैसेअपनी प ी को लकेर बठैता था। दो साल बाद ब ची को साँप नेकाट िलया, वह मर गयी और तब सेबट का दमाग ठ क नह ंरहता। खैर, जानेद जए। आइए, अपना काम शु कर। चिलए, अ दर के टड - म म चल!'' ''चिलए!'' च दर बोला। और प मी केपीछे-पीछेचल दया। मकान बहुत बड़ा था और परुानेअँेज केढंग पर सजा हुआ था। बाहर सेजतना परुाना और ग दा नजर आता था, अ दर सेउतना ह आलीशान और सथुरा। ई ट इंडया क पनी केजमानेक छाप थी अ दर। यहाँतक क बजली लगनेकेबावजूद अ दर परुानेबड़े-बड़ेहाथ से खींचेजानेवालेपखंेलगेथे। दो कमर को पार कर वेलोग टड - म म पहुँचे। बड़ा-सा कमरा जसम चार तरफ आलमा रय म कताब सजी हुई थीं। चार कोनेम चार मजे लगी हुई थींजनम कुछ ब ट और कुछ त वीर टड के सहारेरखी हुई थीं। एक आलमार म नीचेखानेम टाइपराइटर रखा था। प मी नेबजली जला द और टाइपराइटर खोलकर साफ करनेलगी। च दर घमूकर कताब देखनेलगा। एक कोनेम कुछ मराठ क कताब रखी थीं। उसेबड़ा ता जुब हुआ-''अ छा प मी, ओह, माफ क जएगा, िमस ड ूज...'' ''नह ं, आप मझुेप मी पकुार सकतेह। मझुेयह नाम अ छा लगता है-हाँ, या पछू रहेथेआप?'' '' या आप मराठ भी जानती ह?'' ''नह ं, म तो नह ं, मरे नानीजी जानती थीं। या आपको डॉ टर शुला नेहमलोग केबारेम कुछ नह ंबताया?'' ''नह ं!'' कपरूनेकहा। ''अ छा! ता जुब है!'' प मी बोली, ''आपनेेनाली ड ूज का नाम सनुा हैन?'' ''हाँहाँ, ड ूज ज ह नेकौशा बी क खुदाई करवायी थी। वह तो बहुत बड़ेपरुात ववेा थे?'' कपरूनेकहा। ''हाँ, वह । वह मरेेसगेनाना थे। और वह अँेज नह ंथे, मराठा थेऔर उ ह नेमरे नानी सेशाद क थी जो एक क मीर ईसाई म हला थीं। उनकेकारण भारत म उ ह ईसाइयत अपनानी पड़ । यह मरेेनाना का ह मकान है और अब हम लोग को िमल गया है। डॉ. शुला केदो त िम टर ीवा तव बैर टर ह न, वेहमारेखानदान केऐटन थे। उ ह नेऔर डॉ. शुला नेह यह जायदाद हम दलवायी। ली जए, मशीन तो ठ क हो गयी।'' उसनेटाइपराइटर म काबन और कागज लगाकर कहा, ''लाइए िनब ध!'' इसकेबाद घटंे-भर तक टाइपराइटर का नह ं। कपरूनेदेखा क यह लड़क जो यवहार म इतनी सरल और
प है, फैशन म इतनी नाजुक और शौक न है, काम करनेम उतनी ह महेनती और तजे भी है। उसक अँगुिलयाँ मशीन क तरह चल रह थीं। और तजे इतनी क एक घटंेम उसनेलगभग आधी पांडुिल प टाइप कर डाली थी। ठ क एक घ टेकेबाद उसनेटाइपराइटर ब द कर दया, बगल म बठैेहुए कपरू क ओर झुककर कहा, ''अब थोड़ देर आराम।'' और अपनी अँगुिलयाँचटखानेकेबाद वह कुरसी खसकाकर उठ और एक भरपरूअँगड़ाई ली। उसका अंग- अंग धनषुक तरह झुक गया। उसकेबाद कपरूकेक धेपर बतेक लफु सेहाथ रखकर बोली, '' य , एक याला चाय मगँवायी जाय?'' ''म तो पी चुका हूँ।'' ''लेकन मझुसेतो काम होनेसेरहा अब बना चाय के।'' प मी एक अ हड़ ब ची क तरह बोली, और अ दर चली गयी। कपरू नेटाइप कयेहुए कागज उठायेऔर कलम िनकालकर उनक गलितयाँसधुारनेलगा। चाय पीकर थोड़ देर म प मी वापस आयी और बठै गयी। उसनेएक िसगरेट केस कपरूकेसामनेकया। ''ध यवाद, म िसगरेट नह ंपीता।'' ''अ छा, ता जुब है, आपक इजाजत हो तो म िसगरेट पी ल!ँू'' '' या आप िसगरेट पीती ह? िछह, पता नह ं य औरत का िसगरेट पीना मझुेबहुत ह नासप द है।'' ''मरे तो मजबरू हैिम टर कपरू, म यहाँकेसमाज म िमलती-जुलती नह ं, अपनेववाह और अपनेतलाक के बाद मझुेऐंलो-इंडयन समाज सेनफरत हो गयी है। म अपनेदल सेह दुतानी हूँ। लेकन ह दुतािनय सेघलुना- िमलना हमारेिलए स भव नह ं। घर म अकेलेरहती हूँ। िसगरेट और चाय सेतबीयत बदल जाती है। कताब का मझुे शौक नह ं।'' ''तलाक केबाद आपनेपढ़ाई जार य नह ंरखी?'' कपरूनेपछूा। ''मनेकहा न, क कताब का मझुेशौक नह ंब कुल!'' प मी बोली। ''और म अपनेको आदिमय म घलुन-ेिमलने केलायक नह ंपाती। तलाक केबाद साल-भर तक म अपनेघर म ब द रह । म और बट । िसफ बट सेबात करने का मौका िमला। बट मरेा भाई, वह भी बीमार और बढ़ूा। कह ंकोई तक लफु क गंुजाइश नह ं। अब म हरेक से बतेक लफु सेबात करती हूँतो कुछ लोग मझु पर हँसतेह, कुछ लोग मझुेस य समाज केलायक नह ंसमझत,ेकुछ लोग उसका गलत मतलब िनकालतेह। इसिलए मनेअपनेको अपनेबगँलेम ह कैद कर िलया है। अब आप ह ह, आज पहली बार मनेदेखा आपको। म समझी ह नह ंक आपसेकतना दरुाव रखना चा हए। अगर आप भलमेानस न ह तो आप इसका गलत मतलब िनकाल सकतेह।'' ''अगर यह बात हो तो...'' कपरू हँसकर बोला, ''स भव हैक म भलमेानस बननेकेबजाय गलत मतलब िनकालना यादा पस द क ँ।'' ''तो स भव हैम मजबरूहोकर आपसेभी न िमल!ँू'' प मी ग भीरता सेबोली। ''नह ं, िमस ड ूज...''
''नह ं, आप प मी क हए, ड ूज नह ं!'' ''प मी सह , आप गलत न समझ, म मजाक कर रहा था।'' कपरूबोला। उसनेइतनी देर म समझ िलया था क यह साधारण ईसाई छोकर नह ंहै। इतनेम बट लडख़ड़ाता हुआ, हाथ म धूल सना खुरपा िलयेआया और चुपचाप खड़ा हो गया और अपनी धँुधली पीली आँख सेएकटक कपरूको देखनेलगा। कपरूनेएक कुरसी खसका द और कहा, ''आइए!'' प मी उठ और बट केक धेपर एक हाथ रखकर उसेसहारा देकर कुरसी पर बठा दया। बट बठै गया और आँख ब द कर लीं। उसका बीमार कमजोर य व जानेकैसा लगता था क प मी और कपरू दोन चुप हो गय।ेथोड़ देर बाद बट नेआँख खोलींऔर बहुत क ण वर म बोला, ''प मी, तमु नाराज हो, मनेजान-बझूकर तुहारेिम का अपमान नह ंकया था?'' ''अरेनह ं!'' प मी नेउठकर बट का माथा सहलातेहुए कहा, ''म तो भलू गयी और कपरूभी भलू गय?े'' ''अ छा, ध यवाद! प मी, अपना हाथ इधर लाओ!'' और वह प मी केहाथ पर िसर रखकर पड़ रहा और बोला, ''म कतना अभागा हूँ! कतना अभागा! अ छा प मी, कल रात को तमुनेसनुा था, वह आयी थी और पछू रह थी, बट तुहार तबीयत अब ठ क है, मनेझट अपनी आँख ढँक लींक कह ंआँख का पीलापन देख न ल।ेमनेकहा, तबीयत अब ठ क है, म अ छा हूँतो उठ और जानेलगी। मनेपछूा, कहाँचली, तो बोली साजट केसाथ ज़रा लब जा रह हूँ। तमुनेसनुा था प मी?'' कपरू त ध-सा उन दोन क ओर देख रहा था। प मी नेकपरूको आँख का इशारा करतेहुए कहा, ''हाँ, हमसे िमली थी वह, लेकन बट , वह साजट केसाथ नह ंगयी थी!'' ''हाँ, तब?'' बट क आँख चमक उठ ंऔर उसनेउ लास-भरे वर म पछूा। ''वह बोली, बट केयेगुलाब साजट से यादा यारेह।'' प मी बोली। ''अ छा!'' मसुकराहट सेबट का चेहरा खल उठा, उसक पीली-पीली आँख और धँस गयींऔर दाँत बाहर झलकने लगे, ''हूँ! या कहा उसन,ेफर तो कहो!'' उसनेकहा, ''येगुलाब साजट से यादा यारेह, फर इ ह ंगुलाब पर नाचती रह और सबुह होतेह इ ह ंफूल म िछप गयी! तुह सबुह कसी फूल म तो नह ंिमली?'' ''उहूँ, तुह तो कसी फूल म नह ंिमली?'' बट नेब च के-सेभोलेव ास के वर म कपरूसेपछूा। च दर च क उठा। प मी और बट क इन बात पर उसका मन बहेद भर आया था। बट क मसुकराहट पर उसक नस थरथरा उठ थीं। ''नह ं; मनेतो नह ंदेखा था।'' च दर नेकहा। बट नेफर मायसूी सेिसर झुका िलया और आँख ब द कर लींऔर कराहती हुई आवाज म बोला, '' जस फूल म
वह िछप गयी थी, उसी को कसी नेचुरा िलया होगा!'' फर सहसा वह तनकर खड़ा हो गया और पचुकारतेहुए बोला, ''जानेकौन येफूल चुराता है! अगर मझुेएक बार िमल जाए तो म उसका खून ऐसेपी ल!ँू'' उसनेहाथ क अँगुली काटतेहुए कहा और उठकर लडख़ड़ाता हुआ चला गया। वातावरण इतना भार हो गया था क फर प मी और कपरूनेकोई बात नह ंक ं। प मी नेचुपचाप टाइप करना शु कया और कपरूचुपचाप बट क बात सोचता रहा। घटंा-भर बाद टाइपराइटर खामोश हुआ तो कपरूनेकहा- ''प मी, मनेजतनेलोग देखेह उनम शायद बट सबसेविच हैऔर शायद सबसेदयनीय!'' प मी खामोश रह । फर उसी लापरवाह सेअँगड़ाई लतेेहुए बोली, ''मझुेबट क बात पर ज़रा भी दया नह ं आती। म उसको दलासा देती हूँ य क वह मरेा भाई हैऔर ब चेक तरह नासमझ और लाचार है।'' कपरूच क गया। वह प मी क ओर आ य सेचुपचाप देखता रहा; कुछ बोला नह ं। '' य , तुह ता जुब य होता है?'' प मी नेकुछ मसुकराकर कहा, ''लेकन म सच कहती हूँ''-वह बहुत ग भीर हो गयी, ''मझुेजरा तरस नह ंआता इस पागलपन पर।'' ण-भर चुप रह , फर जैसेबहुत ह तजेी सेबोली, ''तमु जानतेहो उसकेफूल कौन चुराता है? म, म उसकेफूल तोडक़र फक देती हूँ। मझुेशाद सेनफरत है, शाद केबाद होनेवाली आपसी धोखेबाजी सेनफरत है, और उस धोखेबाजी केबाद इस झूठमठू क यादगार और बईेमानी के पागलपन सेनफरत है। और येगुलाब केफूल, ये य मूयवान ह, इसिलए न क इसकेसाथ बट क जंदगी क इतनी बड़ ेजेड गँुथी हुई है। अगर एक फूल केखूबसरूत होनेकेिलए आदमी क जंदगी म इतनी बड़ ेजेड आना ज र हैतो लानत हैउस फूल क खूबसरूती पर! म उससेनफरत करती हूँ। इसीिलए म कताब सेनफरत करती हूँ। एक कहानी िलखनेकेिलए कतनी कहािनय क ेजेड बदा त करनी होती है।'' प मी चुप हो गयी। उसका चेहरा सखु हो गया था। थोड़ देर बाद उसका तशै उतर गया और वह अपनेआवशे पर खुद शरमा गयी। उठकर वह कपरू केपास गयी और उसकेक ध पर हाथ रखकर बोली, ''बट सेमत कहना, अ छा?'' कपरूनेिसर हलाकर वीकृित द और कागज समटेकर खड़ा हुआ। प मी नेउसकेक ध पर हाथ रखकर उसे अपनी ओर घमुाकर कहा, ''देखो, पछलेचार साल सेम अकेली थी, और कसी दो त का इ तजार कर रह थी, तमु आयेऔर दो त बन गय।ेतो अब अ सर आना, ऐ?ं'' ''अ छा!'' कपरूनेग भीरता सेकहा। ''डॉ. शुला सेमरेा अिभवादन कहना, कभी यहाँज र आए।ँ'' ''आप कभी चिलए, वहाँउनक लड़क है। आप उससेिमलकर खुश ह गी।'' प मी उसकेसाथ फाटक तक पहुँचानेचली तो देखा बट एक चमलेी केझाड़ म टहिनयाँहटा-हटाकर कुछ ढूँढ़ रहा था। प मी को देखकर पछूा उसन-े''तुह याद है; वह चमलेी केझाड़ म तो नह ंिछपी थी?'' कपरू नेपता नह ं य ज द प मी को अिभवादन कया और चल दया। उसेबट को देखकर डर लगता था।
सधुा का कॉलजे बड़ा एका त और खूबसरूत जगह बना हुआ था। दोन ओर ऊँची-सी मड़े और बीच म सेकंकड़ क एक खूबसरूत घमुावदार सड़क। दायींओर चनेऔर गेहूँकेखेत, बरेऔर शहततू केझाड़ और बायींओर ऊँचे-ऊँचे ट लेऔर ताड़ केल ब-ेल बेपड़े। शहर सेकाफ बाहर देहात का-सा नजारा और इतना शा त वातावरण लगता था क यहाँकोई उथल-पथुल, कोई शोरगुल हैह नह ं। जगह इतनी हर -भर क दज केकमर केपीछेह महुआ चूता था और ल बी-ल बी घास क दपुह रया केनीलेफूल क जंगली लतर उलझी रहती थीं। और इस वातावरण नेअगर कसी पर सबसे यादा भाव डाला था तो वह थी गेस।ूउसेअ छ तरह मालमू था क बाँस केझाड़ केपीछेकस चीज केफूल ह। परुानेपीपल पर िगलोय क लतर चढ़ हैऔर कर देकेझाड़ केपीछे एक साह क माँद है। नागफनी क झाड़ केपास एक बार उसनेएक लोमड़ भी देखी थी। शहर केएक मशहूर रईस सा बर हुसनै काजमी क वह सबसेबड़ लड़क थी। उसक माँ, ज ह उसकेपता अदन सेयाह कर लायेथे, शहर क मशहूर शायरा थीं। हालाँक उनका द वान छपकर मशहूर हो चुका था, मगर वह कसी भी बाहर आदमी सेकभी नह ं िमलती-जुलती थीं, उनक सार दिुनया अपनेपित और अपनेब च तक सीिमत थी। उ ह शायराना नाम रखनेका बहुत शौक था। अपनी दोन लड़ कय का नाम उ ह नेगेसूऔर फूल रखा था और अपनेछोटेब चेका नाम हसरत। हाँ, अपनेपितदेव सा बर साहब केहुकेसेबहेद िचढ़ती थींऔर उनका नाम उ ह नेरखा था, 'आितश- फजाँ।' घास, फूल, लतर और शायर का शौक गेसूनेअपनी माँसेवरासत म पाया था। क मत सेउसका कॉलजे भी ऐसा िमला जसम दज क खड़ कय सेआम क शाख झाँका करती थींइसिलए हमशेा जब कभी मौका िमलता था, लास सेभाग कर गेसूघास पर लटेकर सपनेदेखनेक आद हो गयी थी। लास केइस महािभिन मण और उसके बाद लतर क छाँह म जाकर यान-योग क साधना म उसक एकमा सािथन थी सधुा। आम क घनी छाँह म हर - हर दबूम दोन िसर केनीचेहाथ रखकर लटेरहतींऔर दिुनया-भर क बात करतीं। बात म छोट सेछोट और बड़ सेबड़ कस तरह क बात करती थीं, यह वह समझ सकता हैजसनेकभी दो अिभ न सहेिलय क एका त वाता सनुी हो। गािलब क शायर सेलकेर, उनकेछोटेभाई हसरत नेएक कुेका प ला पाला है, यह गेसूसनुाया करती थी और शरत केउप यास सेलकेर यह क उसक मािलन नेिगलट का कड़ा बनवाया है, यह सधुा बताया करती थी। दोन अपन-ेअपनेमन क बात एक-दसूरेको बता डालती थींऔर जतना भावकु, यारा, अनजान और सकुुमार दोन का मन था, उतनी ह भावकु और सकुुमार दोन क बात। हाँभावकु, सकुुमार दोन ह थीं, लेकन दोन म एक अ तर था। गेसूशायर होतेहुए भी इस दिुनया क थी और सधुा शायर न होतेहुए भी क पनालोक क थी। गेसूअगर झा ड़य म सेकुछ फूल चुनती तो उ ह सघँूती, उ ह अपनी चोट म सजाती और उन पर च द श'ेर कहनेकेबाद भी उ ह माला म परोकर अपनी कलाई म लपटेलतेी। सधुा लतर केबीच म िसर रखकर लटेजाती और िनिनमषेपलक सेफूल को देखती रहती और आँख सेन जाने या पीकर उ ह उ ह ंक डाल पर फूलता हुआ छोड़ देती। गेसूहर चीज का उिचत इ तमेाल जानती थी, कसी भी चीज को पस द करनेया यार करनेकेबाद अब उसका या उपयोग है, या मक यथाथ जीवन म उसका या थान है, यह गेसूखूब समझती थी। लेकन सधुा कसी भी फूल केजादूम बधँ जाना चाहती थी, उसी क क पना म डूब जाना जानती थी, लेकन उसकेबाद सधुा को कुछ नह ंमालमू था। गेसू क क पना और भावकु सूमता शायर म य हो जाती थी, अत: उसक जंदगी म काफ यावहा रकता और यथाथ था, लेकन सधुा, जो शायर िलख नह ंसकती थी, अपने वभाव और गठन म खुद ह एक मासमू शायर बन गयी थी। वह भी पछलेदो साल म तो सचमचु ह इतनी ग भीर, सकुुमार और भावनामयी बन गयी थी क लगता था क सरूकेगीत सेउसके य व केरेशेबनु गयेह।
लड़ कयाँ, गेसूऔर सधुा केइस वभाव और उनक अिभ नता सेवा कफ थीं। और इसिलए जब आज सधुा क मोटर आकर सायबान म क और उसम सेसधुा और गेसूहाथ म फाइल िलयेउतर ंतो कािमनी नेहँसकर भा से कहा, ''लो, च दा-सरूज क जोड़ आ गयी!'' सधुा नेसनु िलया। मसुकराकर गेसूक ओर फर कािमनी और भा क ओर देखकर हँस द । सधुा बहुत कम बोलती थी, लेकन उसक हँसी नेउसेखुशिमजाज सा बत कर रखा था और वह सभी क यार थी। भा नेआकर सधुा केगलेम बाँह डालकर कहा, ''गेसूबानो, थोड़ देर केिलए सधुारानी को हम देदो। जरा कल केनो स उतारनेह इनसेपछूकर।'' गेसूहँसकर बोली, ''उसकेपापा सेतय कर ल,ेफर तूजंदगी भर सधुा को पाल-पोस, मझुे या करना है।'' जब सधुा भा केसाथ चली गयी तो गेसूनेकािमनी केक धेपर हाथ रखा और कहा, ''क मो रानी, अब तो तुह ंहमारेह सेम पड़ , आओ। चलो, देख लतर म कुद ह?'' ''कुद तो नह ं, अब चनेका खेत ह रया आया है।'' क मो बोली। गहृ- व ान का पी रयड था और िमस उमालकर पढ़ा रह थीं। बीच क कतार क एक बच पर कािमनी, भा, गेसू और सधुा बठै थीं। ह सा बाँट अभी तक कायम था, अत: कािमनी केबगल म गेस,ूगेसूकेबगल म भा और भा केबाद बच केकोनेपर सधुा बठै थी। िमस उमालकर रोिगय केखान-पान केबारेम समझा रह थीं। मजे केबगल म खड़ हुई, हाथ म एक कताब िलयेहुए, उसी पर िनगाह लगायेवह बोलती जा रह थीं। शायद अँगरेजी क कताब म जो कुछ िलखा हुआ था, उसी का ह द म उ था करतेहुए बोलती जा रह थीं, ''आलूएक नकुसानदेह तरकार है, रोग क हालत म। वह खुक होता है, गरम होता हैऔर हजम मुकल सेहोता है...।'' सहसा गेसूनेएकदम बीच सेपछूा, ''गुजी, गाँधी जी आलूखातेह या नह ं?'' सभी हँस पड़े। िमस उमालकर नेबहुत गुसेसेगेसूक ओर देखा और डाँटकर कहा, '' हाइ टॉक ऑव गाँधी? आई वा ट नो पोिल टकल ड शन इन लास। (गाँधी से या मतलब? म दज म राजनीितक बहस नह ंचाहती।)'' इस पर तो सभी लड़ कय क दबी हुई हँसी फूट पड़ । िमस उमालकर झ ला गयींऔर मजे पर कताब पटकतेहुए बोलीं, ''साइलेस (खामोश)!'' सभी चुप हो गय।ेउ ह नेफर पढ़ाना शु कया। '' जगर केरोिगय केिलए हर तरका रयाँबहुत फायदेम द होती ह। लौक , पालक और हर क म केहरेसाग त दुती केिलए बहुत फायदेम द होतेह।'' सहसा भा नेकुहनी मारकर गेसूसेकहा, ''ल,ेफर या है, िनकाल चनेका हरा साग, खा-खाकर मोटेह िमस उमालकर केघटंेम!'' गेसूनेअपनेकुरतेक जेब सेबहुत-सा साग िनकालकर कािमनी और भा को दया। िमस उमालकर अब श कर केहािन-लाभ बता रह थीं, ''ल बेरोग केबाद रोगी को श कर कम देनी चा हए। दधू या साबदूानेम ताड़ क िम ी िमला सकतेह। दधू तो लकूोज केसाथ बहुत वा द लगता है।'' इतनेम जब तक सधुा केपास साग पहुँचा क फौरन िमस उमालकर नेदेख िलया। वह समझ गयीं, यह शरारत
गेसूक होगी, ''िमस गेस,ूबीमार क हालत म दधू काहेकेसाथ वा द लगता है?'' इतनेम सधुा केमहँुसेिनकला, ''साग काहेकेसाथ खाए?ँ'' और गेसूनेकहा, ''नमक केसाथ!'' ''हूँ? नमक केसाथ?'' िमस उमालकर नेकहा, ''बीमार म दधू नमक केसाथ अ छा लगता है। खड़ हो! कहाँथा यान तुहारा?'' गेसूस न। िमस उमालकर का चेहरा मारेगुसेकेलाल हो रहा था। '' या बात कर रह थींतमु और सधुा?'' गेसूस न! ''अ छा, तमु लोग लास केबाहर जाओ, और आज हम तुहारेगा जयन को खत भजेगे। चलो, जाओ बाहर।'' सधुा नेकुछ मसुकरातेहुए भा क ओर देखा और भा हँस द । गेसूनेदेखा क िमस उमालकर का पारा और भी चढऩेवाला हैतो वह चुपचाप कताब उठाकर चल द । सधुा भी पीछे-पीछेचल द । कािमनी नेकहा, ''खत-वत भजेती रहना, सधुा!'' और लास ठठाकर हँस पड़ । िमस उमालकर गुसेसेनीली पड़ गयीं, '' लास अब ख म होगी।'' और र ज टर उठाकर चल द ं। गेसूअभी अ दर ह थी क वह बाहर चली गयींऔर उनकेजरा दरूपहुँचतेह गेसूने बड़ अदा सेकहा, ''बड़ेबआेब होकर तरेेकूचेसेहम िनकल!े'' और सार लास फर हँसी सेगँूज उठ । लड़ कयाँ िच ड़य क तरह फुर हो गयींऔर थोड़ ह देर म सधुा और गेसूबडैिमटंन फ ड केपास वालेछतनार पाकड़ केनीचे लटे हुई थीं। बड़ खुशनमुा दोपहर थी। खुशबूसेलदेह के-ह केझ केगेसूक ओढ़नी और गरारेक िसलवट सेआँखिमचौली खेल रहेथे। आसमान म कुछ ह के पहलेबादल उड़ रहेथेऔर जमीन पर बादल क साँवली छायाएँदौड़ रह थीं। घास केल ब-ेचौड़ेमदैान पर बादल क छायाओंका खेल बड़ा मासमू लग रहा था। जतनी दरूतक छाँह रहती थी, उतनी दरूतक घास का रंग गहरा काह हो जाता था, और जहाँ-जहाँबादल सेछनकर धूप बरसनेलगती थी वहाँ-वहाँ घास सनुहरेधानी रंग क हो जाती थी। दरूकह ंपर पानी बरसा था और बादल ह केहोकर खरगोश केमासमू व छ द ब च क तरह दौड़ रहेथे। सधुा आँख पर फाइल क छाँह कयेहुए बादल क ओर एकटक देख रह थी। गेसूनेउसक ओर करवट बदली और उसक वणेी म लगेहुए रेशमी फ तेको उँगली म उमठेतेहुए एक ल बी-सी साँस भरकर कहा- बादशाह क मअु र वाबगाह म कहाँ वह मजा जो भीगी-भीगी घास पर सोनेम है, मतुमइन बेफ लोग क हँसी म भी कहाँ लुफ जो एक-दसूरेको देखकर रोनेम है। सधुा नेबादल सेअपनी िनगाह नह ंहटायी, बस एक क ण सपनीली मसुकराहट बखेरकर रह गयी।
या देख रह है, सधुा?'' गेसूनेपछूा। ''बादल को देख रह हूँ।'' सधुा नेबहेोश आवाज म जवाब दया। गेसूउठ और सधुा क छाती पर िसर रखकर बोली- कैफ बरदोश, बादल को न देख, बखेबर, तून कुचल जाय कह ं! और सधुा केगाल म जोर क चुटक काट ली। ''हाय रे!'' सधुा नेचीखकर कहा और उठ बठै, ''वाह वाह! कतना अ छा शरेहै! कसका है?'' ''पता नह ंकसका है।'' गेसूबोली, ''लेकन बहुत सच हैसधुी, आ माँकेबादल केदामन म अपने वाब टाँक लनेा और उनकेसहारेजंदगी बसर करनेका खयाल हैतो बड़ा नाजुक, मगर रानी बड़ा खतरनाक भी है। आदमी बड़ ठोकर खाता है। इससेतो अ छा हैक आदमी को नाजुकखयाली सेसा बका ह न पड़े। खात-ेपीत,ेहँसत-ेबोलतेआदमी क जंदगी कट जाए।'' सधुा नेअपना आँचल ठ क कया, और लट म सेघास केितनकेिनकालतेहुए कहा, ''गेस,ूअगर हम लोग को भी शाद - याह केझंझट म न फँसना पड़ेऔर इसी तरह दन कटतेजाएँतो कतना मजा आए। हँसत-ेबोलत,ेपढ़त-े िलखत,ेघास म लटेकर बादल सेयार करतेहुए कतना अ छा लगता है, लेकन हम लड़ कय क जंदगी भी या! म तो सोचती हूँगेस;ूकभी याह ह न क ँ। हमारेपापा का यान कौन रखेगा?'' गेसूथोड़ देर तक सधुा क आँख म आँख डालकर शरारत-भर िनगाह सेदेखती रह और मसुकराकर बोली, ''अरे, अब ऐसी भोली नह ंहो रानी तमु! येशबाब, येउठान और याह नह ंकरगी, जोगन बनगी।'' ''अ छा, चल हट बशेरम कह ंक , खुद याह करनेक ठान चुक हैतो दिुनया-भर को य तोहमत लगाती है!'' ''म तो ठान ह चुक हूँ, मरेा या! क तो तमु लोग क हैक याह नह ंहोता तो लटेकर बादल देखती ह।'' गेसूनेमचलतेहुए कहा। ''अ छा अ छा,'' गेसूक ओढ़नी खींचकर िसर केनीचेरखकर सधुा नेकहा, '' या हाल हैतरेेअ तर िमयाँका? मगँनी कब होगी तरे?'' ''मगँनी या, कसी भी दन हो जाय, बस फूफ जान केयहाँआन-ेभर क कसर है। वसैेअ मी तो फूल क बात उनसेचला रह थीं, पर उ ह नेमरेेिलए इरादा जा हर कया। बड़ेअ छेह, आतेह तो घर-भर म रोशनी छा जाती है।'' गेसूनेबहुत भोलपेन सेगोद म सधुा का हाथ रखकर उसक उँगिलयाँिचटकातेहुए कहा। ''वेतो तरेेचचाजाद भाई ह न? तझुसेतो पहलेउनसेबोल-चाल रह होगी।'' सधुा नेपछूा। ''हाँ-हाँ, खूब अ छ तरह स।ेमौलवी साहब हम लोग को साथ-साथ पढ़ातेथेऔर जब हम दोन सबक भलू जाते थेतो एक-दसूरेका कान पकडक़र साथ-साथ उठत-ेबठैतेथे।'' गेसूकुछ झपतेहुए बोली।
सधुा हँस पड़ , ''वाह रे! मे क इतनी विच शुआत मनेकह ंनह ंसनुी थी। तब तो तमु लोग एक-दसूरेका कान पकडऩेकेिलए अपन-ेआप सबक भलू जातेह गे?'' ''नह ंजी, एक बार फर पढक़र कौन सबक भलूता हैऔर एक बार सबक याद होनेकेबाद जानती हो इ क म या होता है- मकतबेइ क म इक ढंग िनराला देखा, उसको छुट न िमली जसको सबक याद हुआ\" ''खैर, यह सब बात जानेदेसधुा, अब तूकब याह करेगी?'' ''ज द ह क ँगी।'' सधुा बोली। '' कसस?े'' ''तझुस।े'' और दोन खल खलाकर हँस पड़ ं। बादल हट गयेथेऔर पाकड़ क छाँह को चीरतेहुए एक सनुहली रोशनी का तार झलिमला उठा। हँसतेव गेसू केकान केटॉप चमक उठेऔर सधुा का यान उधर खंच गया। ''येकब बनवाया तनू?े'' ''बनवाया नह ं।'' ''तो उ ह नेदयेह गे, य ?'' गेसूनेशरमाकर िसर हला दया। सधुा नेउठकर हाथ सेछूतेहुए कहा, '' कतनेसुदर कमल ह! वाह! य , गेस!ूतनूेसचमचु केकमल देखेह?'' ''न।'' ''मनेदेखेह।'' ''कहाँ?'' ''असल म पाँच-छह साल पहलेतक तो म गाँव म रहती थी न! ऊँचाहार केपास एक गाँव म मरे बआु रहती ह न, बचपन सेम उ ह ंकेपास रहती थी। पढ़ाई क शुआत मनेवह ंक और सातवींतक वह ंपढ़ । तो वहाँमरेे कूल केपीछेकेपोखरेम बहुत-सेकमल थे। रोज शाम को म भाग जाती थी और तालाब म घसुकर कमल तोड़ती और घर सेबआु एक ल बा-सा स टा लकेर गािलयाँदेती हुई आती थींमझुेपकड़नेकेिलए। जहाँवह कनारेपर पहुँचतींतो म कहती, अभी डूब जाएगँेबआु, अभी डूब,ेतो बहुत रबड़ -मलाई क लालच देकर वह िम नत करतीं-िनकल आओ, तो म िनकलती थी। तमुनेतो कभी देखा नह ंहोगा हमार बआु को?'' ''न, तनूेकभी दखाया ह नह ं।''
''इधर बहुत दन सेआयींह नह ंव।ेआएगँी तो दखाऊँगी तझुे। और उनक एक लड़क है। बड़ यार , बहुत मजेक है। उसेदेखकर तो तमु उसेबहुत यार करोगी। वो तो अब यह ंआनेवाली है। अब यह ंपढ़ेगी।'' '' कस दज म पढ़ती है?'' '' ाइवटे वदषुी म बठैेगी इस साल। खूब गोल-मटोल और हँसमखु है।'' सधुा बोली। इतनेम घटंा बोला और गेसूनेसधुा केपरैकेनीचेदबी हुई अपनी ओढ़नी खींची। ''अरे, अब आ खर घटंेम जाकर या पढ़ोगी! हा जर कट ह गयी। अब बठैो यह ंबातचीत कर, आराम कर।'' सधुा नेअलसाये वर म कहा और खड़ होकर एक मदमाती हुई अँगड़ाई ली-गेसूनेहाथ पकडक़र उसेबठा िलया और बड़ ग भीरता सेकहा, ''देखो, ऐसी अरसौह ंअँगड़ाई न िलया करो, इससेलोग समझ जातेह क अब बचपन करवट बदल रहा है।'' ''धत!्'' बहेद झपकर और फाइल म महँुिछपाकर सधुा बोली। ''लो, तमु मजाक समझती हो, एक शायर नेतुहार अँगड़ाई केिलए कहा है- कौन येलेरहा हैअँगड़ाई आसमान को नींद आती है'' ''वाह!'' सधुा बोली, ''अ छा गेस,ूआज बहुत-सेशरेसनुाओ।'' ''सनुो- इक रदायतेीरगी हैऔर खाबकेायनात डूबतेजातेह तारे, भीगती जाती हैरात!'' ''पहली लाइन के या मतलब ह?'' सधुा नेपछूा। '' रदायतेीरगी केमानेह अँधेरेक चादर और खाबकेायनात केमानेह जंदगी का सपना-अब फर सनुो शरे- इक रदायतेीरगी हैऔर खाबकेायनात डूबतेजातेह तारे, भीगती जाती हैरात!'' ''वाह! कतना अ छा है-अ धकार क चादर है, जीवन का व न है, तारेडूबतेजातेह, रात भीगती जाती है...गेस,ू उदूक शायर बहुत अ छ है।'' ''तो तूखुद उदूय नह ंपढ़ लतेी?'' गेसूनेकहा। ''चाहती तो बहुत हूँ, पर िनभ नह ंपाता!''
'' कसी दन शाम को आओ सधुा तो अ मीजान सेतझुेशरेसनुवाए।ँयह लेतरे मोटर तो आ गयी।'' सधुा उठ , अपनी फाइल उठायी। गेसूनेअपनी ओढऩी झाड़ और आगेचली। पास आकर उचककर उसने िंसपल का म देखा। वह खाली था। उसनेदाई को खबर द और मोटर पर बठै गयी। गेसूबाहर खड़ थी। ''चल तूभी न!'' ''नह ं, म गाड़ पर चली जाऊँगी।'' ''अरेचलो, गाड़ साढ़ेचार बजेजाएगी। अभी घटंा-भर है। घर पर चाय पएगँे, फर मोटर पहुँचा देगी। जब तक पापा नह ंह, तब तक जतना चाहो कार िघसो!'' गेसूभी आ बठै और कार चल द । दसूरेदन जब च दर डॉ. शुला केयहाँिनब ध क ितिल प लकेर पहुँचा तो आठ बज चुकेथे। सात बजेतो च दर क नींद ह खुली थी और ज द सेवह नहा-धोकर साइ कल दौड़ाता हुआ भागा था क कह ंभाषण क ितिल प पहुँचनेम देर न हो जाए। जब वह बगँलेपर पहुँचा तो धूप फैल चुक थी। अब धूप भली नह ंमालमू देती थी, धूप क तजेी बदा त केबाहर होनेलगी थी, लेकन सधुा नीलकाँटेकेऊँचे-ऊँचेझाड़ क छाँह म एक छोट -सी कुरसी डालेबठै थी। बगल म एक छोट -सी मजे थी जस पर कोई कताब खुली हुई रखी थी, हाथ म ोिशया थी और उँगिलयाँएक नाजुक तजेी सेडोरे सेउलझ-सलुझ रह थीं। ह केबादामी रंग क इकलाई क लहराती हुई धोती, नारंगी और काली ितरछ धा रय का कलफ कया चुत लाउज और एक क धेपर उभरा एक उसका पफ ऐसा लग रहा था जैसेक बाँह पर कोई रंगीन िततली आकर बठै हुई हो और उसका िसफ एक पखं उठा हो! अभी-अभी शायद नहाकर उठ थी य क शरद क खुशनमुा धूप क तरह हलकेसनुहलेबाल पीठ पर लहरा रहेथे। नीलकाँटेक टहिनयाँउनको सनुहली लहर समझकर अठखेिलयाँकर रह थीं। च दर क साइ कल जब अ दर दख पड़ तो सधुा नेउधर देखा लेकन कुछ भी न कहकर फर अपनी ोिशया बनुनेम लग गयी। च दर सीधा पो टको म गया और अपनी साइ कल रखकर भीतर चला गया डॉ. शुला केपास। टड - म म, बठैक म, सोनेकेकमरेम कह ंभी डॉ. शुला नजर नह ंआय।ेहारकर वह बाहर आया तो देखा मोटर अभी गैरज म है। तो वेजा कहाँसकत?ेऔर सधुा को तो देखए! या अकड़़ी हुई हैआज, जैसेच दर को जानती ह नह ं। च दर सधुा केपास गया। सधुा का महँुऔर भी लटक गया। ''डॉ टर साहब कहाँह?'' च दर नेपछूा। ''हम या मालमू?'' सधुा ने ोिशया पर सेबना िनगाह उठायेजवाब दया। ''तो कसेमालमू होगा?'' च दर नेडाँटतेहुए कहा, ''हर व का मजाक हम अ छा नह ंलगता। काम क बात का उसी तरह जवाब देना चा हए। उनकेिनब ध क िल प देनी हैया नह ं!''
''हाँ-हाँ, देनी हैतो म या क ँ? नहा रहेह गे। अभी कोई येतो हैनह ंक तमु िनब ध क िल प लायेहो तो कोई नहाय-ेधोयेन, बस सबुह सेबठैा रहेक अब िनब ध आ रहा है, अब आ रहा है!'' सधुा नेमहँु बनाकर आँख नचातेहुए कहा। ''तो सीधे य नह ंकहती क नहा रहेह।'' च दर नेसधुा केगुसेपर हँसकर कहा। च दर क हँसी पर तो सधुा का िमजाज और भी बगड़ गया और अपनी ोिशया उठाकर और कताब बगल म दबाकर, वह उठकर अ दर चल द । उसकेउठतेह च दर आराम सेउस कुरसी पर बठै गया और मजे पर टाँग फैलाकर बोला-''आज मझुेबहुत गुसा चढ़ा है, खबरदार कोई बोलना मत!'' सधुा जात-ेजातेमडुक़र खड़ हो गयी। ''हमनेकह दया च दर एक बार क हम येसब बात अ छ नह ंलगतीं। जब देखो तमु िचढ़ातेरहतेहो!'' सधुा ने गुसेसेकहा। ''नह ं! िचढ़ाएगँेनह ंतो पजूा करगे! तमु अपनेमौकेपर छोड़ देती हो!'' च दर नेउसी लापरवाह सेकहा। सधुा गयी नह ं। वह ंघास पर बठै गयी और कताब खोलकर पढऩेलगी। जब पाँच िमनट तक वह कुछ नह ंबोली तो च दर नेसोचा आज बात कुछ ग भीर है। ''सधुा!'' उसनेबड़ेदलुार सेपकुारा। ''सधुा!'' सधुा नेकुछ नह ंकहा मगर दो बड़े-बड़ेआँसूटप सेनीचेकताब पर िगर गय।े ''अरे या बात हैसधुा, नह ंबताओगी?'' ''कुछ नह ं।'' ''बता दो, तुह हमार कसम है।'' ''कल शाम को तमु आयेनह ं...'' सधुा रोनी आवाज म बोली। ''बस इस बात पर इतनी नाराज हो, पागल!'' ''हाँ, इस बात पर इतनी नाराज हूँ! तमु आओ चाहेहजार बार न आओ; इस पर हम य नाराज ह गे! बड़ेकह ं केआय,ेनह ंआएगँेतो जैसेहमारा घर-बार नह ंहै। अपनेको जाने या समझ िलया है!'' सधुा नेिचढक़र जवाब दया। ''अरेतो तुह ंतो कह रह थी, भाई।'' च दर नेहँसकर कहा। ''तो बात परू भी सनुो। शाम को गेसूका नौकर आया था। उसकेछोटेभाई हसरत क सालिगरह थी। सबुह 'कुरानखानी' होनेवाली थी और उसक माँनेबलुाया था।''
''तो गयी य नह ं?'' ''गयी य नह ं! कससेपछूकर जाती? आप तो इस व आ रहेह जब सब ख म हो गया!'' सधुा बोली। ''तो पापा सेपछू केचली जाती!'' च दर नेसमझाकर कहा, ''और फर गेसूकेयहाँतो य अकसर जाती हो तमु!'' ''तो? आज तो डा स भी करनेकेिलए कहा था उसन।े फर बाद म तमु कहत,े'सधुा, तुह येनह ंकरना चा हए, वो नह ंकरना चा हए। लड़ कय को ऐसेरहना चा हए, वसैेरहना चा हए।' और बठै केउपदेश पलातेऔर नाराज होत।े बना तमुसेपछूेहम कह ंिसनमेा, पकिनक, जलस म गयेह कभी?'' और फर आँसूटपक पड़े। ''पगली कह ंक ! इतनी-सी बात पर रोना या? कसी केहाथ कुछ उपहार भजे दो और फर कसी मौकेपर चली जाना।'' ''हाँ, चली जाना! तुह कहते या लगता है! गेसूनेकतना बरुा माना होगा!'' सधुा नेबगड़तेहुए ह कहा। ''इ तहान आ रहा है, फर कब जाएगँे?'' ''कब हैइ तहान तुहारा?'' ''चाहेजब हो! मझुेपढ़ानेकेिलए कहा कसी स?े'' ''अरेभलू गय!ेअ छा, आज देखो कहगे!'' ''कहगे-कहगेनह ं, आज दोपहर को आप बलुा लाइए, वरना हम सब कताब म लगायेदेतेह आग। समझेक नह ं!'' ''अ छा-अ छा, आज दोपहर को बलुा लाएगँे। ठ क, अ छा याद आया बस रया सेकहूँगा तुह पढ़ानेकेिलए। उसेपयेक ज रत भी है।'' च दर नेछुटकारेका कोई रा ता न पाकर कहा। ''आज दोपहर को ज र स।े'' सधुा नेफर आँख नचाकर कहा। ''लो, पापा आ गयेनहाकर, जाओ!'' च दर उठा और चल दया। सधुा उठ और अ दर चली गयी। डॉ. शुला ह के-साँवलेरंग केजरा थूलकाय-सेथे। बहुत ग भीर अ ययन और अ यापन और उ केसाथ-साथ ह उनक न ता और भी बढ़ती जा रह थी। लेकन वेलोग सेिमलत-ेजुलतेकम थे। य गत दो ती उनक कसी सेनह ंथी। लेकन उ र भारत के मखु व ान ्होनेकेनातेका ेस म, मौ खक पर ाओंम, सरकार कमेटय म वेबराबर बलुायेजातेथेऔर इसम मखु दलच पी सेह सा लतेेथे। ऐसी जगह म च दर अ सर उनका मखु सहायक रहता था और इसी नातेच दर भी ा त केबड़े-बड़ेलोग सेप रिचत हो गया था। जब वह एम. ए. पास हुआ था तब सेफाइनेस वभाग म उसेकई बार ऊँचे-ऊँचेपद का 'ऑफर' आ चुका था लेकन डॉ. शुला इसके खलाफ थे। वेचाहतेथेक पहलेवह रसच परू
कर ल।ेस भव हो तो वदेश हो आय,ेतब चाहेकुछ काम करे। अपनेय गत जीवन म डॉ. शुला अ त वरोध के य थे। पा टय म मसुलमान और ईसाइय केसाथ खानेम उ ह कोई एतराज नह ंथा लेकन क चा खाना वेचौके म आसन पर बठैकर, रेशमी धोती पहनकर खातेथे। सरकार को उ ह नेसलाह द क साधुओंऔर संयािसय को जबरद ती काम म लगाया जाए और म दर क जायदाद ज त कर ली जाए,ँलेकन सबुह घटंे-भर तक पजूा ज र करतेथे। पजूा-पाठ, खान-पान, जात-पाँत केप केहामी, लेकन य गत जीवन म कभी यह नह ंजाना क उनका कौन िश य ा ण है, कौन बिनया, कौन ख ी, कौन काय थ! नहाकर वेआ रहेथेऔर दगुास शती का कोई ोक गुनगुना रहेथे। कपरू को देखा तो क गयेऔर बोल,े ''हैलो, हो गया वह टाइप!'' ''जी हाँ।'' ''कहाँकराया टाइप?'' ''िमस ड ूज केयहाँ।'' ''अ छा! वह लड़क अ छ है। अब तो बहुत बड़ हुई होगी? अभी शाद नह ंहुई? मनेतो सोचा वह िमलेया न िमल!े'' ''नह ं, वह यह ंहै। शाद हुई। फर तलाक हो गया।'' ''अरे! तो अकेलेरहती है?'' ''नह ं, अपनेभाई केसाथ है, बट केसाथ!'' ''अ छा! और बट क प ी अ छ तरह है?'' ''वह मर गयी।'' ''राम-राम, तब तो घर ह बदल गया होगा।'' ''पापा, पजूा केिलए सब बछा दया है।'' सहसा सधुा बोली। ''अ छा बटे, अ छा च दर, म पजूा कर आऊँज द स।ेतमु चाय पी चुके?'' ''जी हाँ।'' ''अ छा तो मरे मजे पर एक चाट है, जरा इसको ठ क तो कर दो तब तक। म अभी आया।'' च दर टड - म म गया और मजे पर बठै गया। कोट उतारकर उसनेखँूट पर टाँग दया और न शा देखने लगा। पास म एक छोट -सी चीनी क याली म चाइना इंक रखी थी और मजे पर पानी। उसनेदो बदँू पानी डालकर चाइना इंक िघसनी शु क , इतनेम सधुा कमरेम दा खल, ''ऐ सनुो!'' उसनेचार ओर देखकर बड़ेसशंकत वर म
कहा और फर झुककर च दर केकान केपास महँुलगाकर कहा, ''चावल क नानखटाई खाओगे?'' ''ये या बला है?'' च दर नेइंक िघसत-ेिघसतेपछूा। ''बड़ अ छ चीज होती है; पापा को बहुत अ छ लगती है। आज हमनेसबुह अपनेहाथ सेबनायी थी। ऐ,ं खाओगे?'' सधुा नेबड़ेदलुार सेपछूा। ''लेआओ।'' च दर नेकहा। ''लेआयेहम, लो!'' और सधुा नेअपनेआँचल म िलपट हुई दो नानखटाई िनकालकर मजे पर रख द । ''अरेत तर म य नह ंलायी? सब धोती म घी लग गया। इतनी बड़ हो गयी, शऊर नह ंजरा-सा।'' च दर ने बगडक़र कहा। ''िछपा करकेलायेह, फर येसकर होती ह क नह ं? चौकेकेबाहर कैसेलात!ेतुहारेिलयेतो लायेह और तुह ंबगड़ रहेहो। अ धेको नोन दो, अ धा कहेमरे आँख फोड़ ं।'' सधुा नेमहँुबनाकर कहा, ''खाना हैक नह ं?'' ''हाथ म तो हमारे याह लगी है।'' च दर बोला। ''हम अपनेहाथ सेनह ंखलाएगँे, हमारा हाथ जूठा हो जाएगा और राम राम! पता नह ंतमु रेतराँम मसुलमान केहाथ का खातेहोगे। थू-थू!'' च दर हँस पड़ा सधुा क इस बात पर और उसनेपानी म हाथ डुबोकर बना पछूेसधुा केआँचल म हाथ प छ दयेयाह केऔर बतेक लफु सेनानखटाई उठाकर खानेलगा। ''बस, अब धोती का कनारा रंग दया और यह पहनना हैहम दनभर।'' सधुा नेबगडक़र कहा। ''खुद नानखटाई िछपाकर लायी और घी लग गया तो कुछ नह ंऔर हमने याह प छ द तो महँु बगड़ गया।'' च दर नेमैपगं पने म इंक लगातेहुए कहा। ''हाँ, अभी पापा देख तो और बगड़ क धोती म घी, याह सब लगायेरहती है। तुह या?'' और उसने याह लगा हुआ छोर कसकर कमर म ख स िलया। ''िछह, वह घी म तर छोर कमर म ख स िलया। ग द कह ंक !'' च दर नेचाट क लाइन ठ क करतेहुए कहा। ''ग द ह तो, तमुसेमतलब!'' और महँुिचढ़ातेहुए सधुा कमरेसेबाहर चली गयी। च दर चुपचाप बठैा चाट दुत करता रहा। उ र देश केपवू जला-बिलया, आजमगढ़, ब ती, बनारस आ द म ब च क मृय-ुसंया का ाफ बनाना था और एक ओर उनकेन शेपर ब दओुंक एक सघनता सेमृय-ुसंया का िनदश करना था। च दर क एक आदत थी वह काम म लगता था तो भतू क तरह लगता था। फर उसेद न-दिुनया, कसी क खबर नह ंरहती थी। खाना-पीना, तन-बदन, कसी का होश नह ंरहता था। इसका एक कारण था। च दर उन लड़क म सेथा जनक जंदगी बाहर सेबहुत ह क -फुक होतेहुए भी अ दर सेबहुत ग भीर और अथमयी
होती है, जनकेसामनेएक प उ ेय, एक ल य होता है। बाहर सेचाहेजैसेहोनेपर भी अपनेआ त रक स य के ित घोर ईमानदार यह इन लोग क वशषेता होती हैऔर सार दिुनया के ित अग भीर और उ छृंखल होनेपर भी जो चीज इनक ल यप रिध म आ जाती ह, उनके ित उनक ग भीरता, साधना और पजूा बन जाती है। इसिलए बाहर सेइतना य वाद और सार दिुनया के ित िनरपे और लापरवाह दख पडऩेपर भी वह अ तरतम सेसमाज और यगु और अपनेआसपास केजीवन और य य के ित अपनेको बहेद उ रदायी अनभुव करता था। वह देशभ भी था और शायद समाजवाद भी, पर अपनेतर केस।ेवह ख र नह ंपहनता था, कांेस का सद य नह ंथा, जेल नह ं गया था, फर भी वह अपनेदेश को यार करता था। बहेद यार। उसक देशभ , उसका समाजवाद, सभी उसके अ ययन और खोज म समा गया था। वह यह जानता था क समाज केसभी त भ का थान अपना अलग होता है। अगर सभी म दर केकंगूरेका फूल बननेक कोिशश करनेलग तो नींव क ट और सीढ़ का प थर कौन बनगेा? और वह जानता था क अथशा वह प थर हैजस पर समाज केसारेभवन का बोझ है। और उसनेिन य कया था क अपनेदेश, अपनेयगु केआिथक पहलूको वह खूब अ छ तरह सेअपनेढंग सेव ेषण करकेदेखेगा और उसे आशा थी क वह एक दन ऐसा समाधान खोज िनकालगेा क मानव क बहुत-सी सम याएँहल हो जाएगँी और आिथक और राजनीितक े म अगर आदमी खँूखार जानवर बन गया हैतो एक दन दिुनया उसक एक आवाज पर देवता बन सकेगी। इसिलए जब वह बठैकर कानपरु क िमल केमजदरू केवतेन का चाट बनाता था, या उपयु साधन केअभाव म मर जानेवाली गर ब औरत और ब च का लखेा-जोखा करता था तो उसकेसामनेअपना कैरयर, अपनी ित ा, अपनी ड ी का सपना नह ंहोता था। उसकेमन म उस व वसैा स तोष होता था जो कसी पजुार केमन म होता है, जब वह अपनेदेवता क अचना केिलए धूप, द प, नवैे सजाता है। ब क च दर थोड़ा भावकु था, एक बार तो जब च दर नेअपनेरसच केिसलिसलेम यह पढ़ा क अँगरेज नेअपनी पजँूी लगानेऔर अपना यापार फैलानेकेिलए कस तरह मिुशदाबाद सेलकेर रोहतक तक ह दुतान केगर ब सेगर ब और अमीर से अमीर बािश देको अमानुषकता सेलटूा, तब वह फूट-फूटकर रो पड़ा था लेकन इसकेबावजूद उसनेराजनीित म कभी डूबकर ह सा नह ंिलया य क उसनेदेखा क उसकेजो भी िम राजनीित म गय,ेवेथोड़ेदन बाद बहुत िस और ित ा पा गयेमगर आदमीयत खो बठैे। अपनेअथशा केबावजूद वह यह समझता था क आदमी क जंदगी िसफ आिथक पहलूतक सीिमत नह ंऔर वह यह भी समझता था क जीवन को सधुारनेकेिलए िसफ आिथक ढाँचा बदल देन-ेभर क ज रत नह ंहै। उसके िलए आदमी का सधुार करना होगा, य का सधुार करना होगा। वरना एक भरे-परूेऔर वभैवशाली समाज म भी आज के-सेअ व थ और पाश वक वृय वालेय रहगेतो दिुनया ऐसी ह लगेगी जैसेएक खूबसरूत सजा-सजाया महल जसम क ड़ेऔर रा स रहतेह । वह यह भी समझता था क वह जस तरह क दिुनया का सपना देखता, वह दिुनया आज कसी भी एक राजनीितक ा त या कसी भी वशषेपाट क सहायता मा सेनह ंबन सकती है। उसकेिलए आदमी को अपनेको बदलना होगा, कसी समाज को बदलनेसेकाम नह ंचलगेा। इसिलए वह अपनेय केससंार म िनर तर लगा रहता था और समाज केआिथक पहलूको समझनेक कोिशश करता रहता था। यह कारण हैक अपनेजीवन म आनवेाले य य के ित वह बहेद ईमानदार रहता था और अपनेअ ययन और काम के ित वह सचेत और जाग क रहता था और वह अ छ तरह समझता था क इस तरह वह दिुनया को उस ओर बढ़ानेम थोड़ -सी मदद कर रहा है। चँूक अपनेम भी वह स य क वह िचनगार पाता था इसिलए क व या दाशिनक न होतेहुए भी वह इतना भावकु, इतना
ढ़-च र , इतना सश और इतना ग भीर था और काम तो अपना वह इस तरह करता था जैसेवह कसी क एका उपासना कर रहा हो। इसिलए जब वह चाट केन शेपर कलम चला रहा था तो उसेमालमू नह ंहुआ क कतनी देर सेडॉ. शुला आकर उसकेपीछेखड़ेहो गय।े ''वाह, न शेपर तो तुहारा हाथ बहुत अ छा चलता है। बहुत अ छा! अब उसेरहनेदो। लाओ, देख, तुहारा काम कैसा चल रहा है। आज तो इतवार हैन?'' डॉ. शुला पास क कुरसी पर बठैकर बोल,े''च दर! आजकल म एक कताब िलखनेक सोच रहा हूँ। मनेसोचा क भारतवष क जाित- यव था का नयेवैािनक ढंग सेअ ययन और व ेषण कया जाए। तमु इसकेबारेम या सोचतेहो?'' '' यथ है! जो यव था आज नह ंतो कल चूर-चूर होनेजा रह है, उसकेबारेम तमूार बाँधना और समय बरबाद करना बकेार है।'' च दर नेबहुत आ म व ास सेकहा। ''यह तो तमु लोग म खराबी है। कुछ थोड़ -सी खरा बयाँजाित- यव था क देख लींऔर उसकेखलाफ हो गय।े एक रसच कॉलर का कोण ह दसूरा होना चा हए। फर हमारेभारत क ाचीन सांकृितक पर पराओंको तो बहुत ह सावधानी सेसमझनेक आव यकता है। यह समझ लो क मानव जाित दबुल नह ंहै। अपनेवकास- म म वह उ ह ंसंथाओं, र ित- रवाज और पर पराओंको रहनेदेती हैजो उसकेअ त व केिलए बहुत आव यक होती है। अगर वेआव यक न हु तो मानव उससेछुटकारा माँग लतेा है। यह जाित- यव था जानेकतनेसाल सेह दुतान म कायम है, या यह इस बात का माण नह ंक यह बहुत सश है, अपनेम बहुत ज र है?'' ''अरेह दुतान क भली चलायी।'' च दर बोला, '' ह दुतान म तो गुलामी कतनेदन सेकायम हैतो या वह भी ज र है।'' '' ब कुल ज र है।'' डॉ. शुला बोल,े''मझुेभी ह दुतान पर गव है। मनेकभी कांेस का काम कया, लेकन म इसेनतीजेपर पहुँचा हूँक जरा-सी आजाद अगर िमलती हैह दुतािनय को, तो वेउसका भरपरूदुपयोग करनेसे बाज नह ंआतेऔर कभी भी येलोग अ छेशासक नह ंिनकलगे।'' ''अरेनह ं! ऐसी बात नह ं। ह दुतािनय को ऐसा बना दया हैअँगरेज न।ेवरना ह दुतान नेह तो च गु और अशोक पदैा कयेथेऔर रह जाित- यव था क बात तो मझुेतो प दख रहा हैक जाित- यव था टूट रह है।'' कपरूबोला, ''रोट -बटे क कैद थी। रोट क कैद तो कर ब-कर ब टूट गयी, अब बटे क कैद भी... याह-शा दयाँ भी दो-एक पीढ़ केबाद व छ दता सेहोनेलगगी।'' ''अगर ऐसा होगा तो बहुत गलत होगा। इससेजाितगत पतन होता है। याह-शाद को कम-स-ेकम म भावना क सेनह ंदेखता। यह एक सामा जक त य हैऔर उसी कोण सेहम देखना चा हए। शाद म सबसेबड़ बात होती हैसांकृितक समानता। और जब अलग-अलग जाित म अलग-अलग र ित- रवाज ह तो एक जाित क लड़क दसूर जाित म जाकर कभी भी अपनेको ठ क सेस तिुलत नह ंकर सकती। और फर एक बिनया क यापा रक वृय क लड़क और एक ा ïण का अ ययन वृ का लड़का, इनक स तान न इधर वकास कर सकती हैन
उधर। यह तो सामा जक यव था को यथ केिलए अस तिुलत करना हुआ।'' ''हाँ, लेकन ववाह को आप केवल समाज के कोण से य देखतेह? य के कोण सेभी देखए। अगर दो विभ न जाित केलड़के-लड़क अपना मानिसक स तलुन यादा अ छा कर सकतेह तो य न ववाह क इजाजत द जाए!'' ''ओह, एक य केसझुाव केिलए हम समाज को य नकुसान पहुँचाए!ँऔर इसका या िन य क ववाह के समय य द दोन म मानिसक स तलुन हैतो ववाह केबाद भी रहेगा ह । मानिसक स तलुन और मे जतना अपने मन पर आधा रत होता हैउतना ह बाहर प र थितय पर। या जानेयाह केव क प र थित का दोन केमन पर कतना भाव हैऔर उसकेबाद स तलुन रह पाता हैया नह ं? और मनेतो लव-मैरजेज ( मे- ववाह) को असफल ह होतेदेखा है। बोलो हैया नह ं?'' डॉ. शुला नेकहा। ''हाँ, मे- ववाह अकसर असफल होतेह, लेकन स भव हैवह मे न होता हो। जहाँस चा मे होगा वहाँकभी असफल ववाह नह ंह गे।'' च दर नेबहुत साहस करकेकहा। ''ओह! येसब सा ह य क बात ह। समाजशा क सेया वैािनक सेदेखो! अ छा खैर, अभी मने उसक प-रेखा बनायी है। िलखँूगा तो तमु सनुतेचलना। लाओ, वह िनब ध कहाँहै!'' डॉ. शुला बोल।े च दर नेउ ह टाइप क हुई ितिल प देद । उलट-पलुटकर डॉ. शुला नेदेखा और कहा, ''ठ क है। अ छा च दर, अपना काम इधर ठ क-ठ क कर लो, अगलेइतवार को लखनऊ कॉ ेस म चलना है।'' ''अ छा! कार पर चलगेया ेन स?े'' '' ेन स।ेअ छा।'' घड़ देखतेहुए उ ह नेकहा, ''अब जरा म काम सेचल रहा हूँ। तमु यह चाट बना डालो और एक िनब ध िलख डालना - 'पवू जल म िशशुमृय।ु' ा त के वा य वभाग नेएक परुकार घो षत कया है।'' डॉ. शुला चलेगय।ेच दर नेफर चाट म हाथ लगाया। च दर केजानेकेजरा ह देर बाद पापा आयेऔर खानेबठैे। सधुा नेरसोई क रेशमी धोती पहनी और पापा को पखंा झलनेबठै गयी। सधुा अपनेपापा क िसरचढ़ दलुार बेटय म सेथी और इतनी बड़ हो जानेपर भी वह दलुार दखानेसेबाज नह ंआती थी। फर आज तो उसनेपापा क य नानखटाई अपनेहाथ सेबनायी थी। आज तो दलुार दखानेका उसका हक था और भली-बरु हर तरह क जद को मान लनेा करना, यह पापा क मजबरू थी। मुकल सेडॉ. साहब नेअभी दो कौर खायेह गेक सधुा नेकहा, ''नानखटाई खाओ, पापा!'' डॉ. शुला नेएक नानखटाई तोडक़र खातेहुए कहा, ''बहुत अ छ है!'' खात-ेखातेउ ह नेपछूा, ''सोमवार को कौन दन है, सधुा!'' ''सोमवार को कौन दन है? सोमवार को 'म डे' है।'' सधुा नेहँसकर कहा। डॉ. शुला भी अपनी भलू पर हँस पड़े। ''अरेदेख तो म कतना भलु कड़ हो गया हूँ। मरेा मतलब था क सोमवार को कौन तार ख है?''
''11 तार ख।'' सधुा बोली, '' य ?'' ''कुछ नह ं, 10 को कॉ ेस हैऔर 14 को तुहार बआु आ रह ह।'' ''बआु आ रह ह, और बनती भी आएगी?'' ''हाँ, उसी को तो पहुँचानेआ रह ह। वदषुी का के यह ंतो है।'' ''आहा! अब तो बनती तीन मह नेयह ंरहेगी, पापा अब बनती को यह ंबलुा लो। म बहुत अकेली रहती हूँ।'' ''हाँ, अब तो जून तक यह ंरहेगी। फर जुलाई म उसक शाद होगी।'' डॉ. शुला नेकहा। ''अरे, अभी स?ेअभी उसक उ ह या है!'' सधुा बोली। '' य , तरेेबराबर है। अब तरेेिलए भी तरे बआु नेिलखा है।'' ''नह ंपापा, हम याह नह ंकरगे।'' सधुा नेमचलकर कहा। ''तब?'' ''बस हम पढ़गे। एफ.ए. कर लगे, फर बी.ए., फर एम.ए., फर रसच, फर बराबर पढ़तेजाएगँे, फर एक दन हम भी तुहारेबराबर हो जाएगँे। य , पापा?'' ''पागल नह ंतो, बात तो सनुो इसक ! ला, दो नानखटाई और दे।'' शुला हँसकर बोल।े ''नह ं, पहलेतो कबलू दो तब हम नानखटाई दगे। बताओ याह तो नह ंकरोगे।'' सधुा नेदो नानखटाइयाँहाथ म उठाकर कहा। ''ला, रख।'' ''नह ं, पहलेबता दो।'' ''अ छा-अ छा, नह ंकरगे।'' सधुा नेदोन नानखटाइयाँरखकर पखंा झलना शु कया। इतनेम फर नानखटाइयाँखातेहुए डॉ. शुला बोल,े ''तरे सास तझुेदेखनेआएगी तो यह नानखटाइयाँतमुसेबनवा कर खलाएगँे।'' '' फर वह बात!'' सधुा नेपखंा पटककर कहा, ''अभी तमु वादा कर चुकेहो क याह नह ंकरगे।'' ''हाँ-हाँ, याह नह ंक ँगा, यह तो कह दया मन।ेलेकन तरेा याह नह ंक ँगा, यह मनेकब कहा?'' ''हाँआँ, येतो फर झूठ बोल गयेतमु...'' सधुा बोली। ''अ छा, ए! चलो ओहर।'' महरा जन नेडाँटकर कहा, ''ए ी बड़ ब टया हो गयी, मारेदलुारेकेबररानी जात है।''
महरा जन परुानी थी और सधुा को डाँटनेका परूा हक था उस,ेऔर सधुा भी उसका बहुत िलहाज करती थी। वह उठ और चुपचाप जाकर अपनेकमरेम लटेगयी। बारह बज रहेथे। वह लटे-लटे कल रात क बात सोचनेलगी। लास म या मजा आया था कल; गेसूकतनी अ छ लड़क है! इस व गेसूकेयहाँखाना-पीना हो रहा होगा और फर सब लोग िमलकर गाएगँे। कौन जानेशायद दोपहर को क वाली भी हो। इन लोग केयहाँक वाली इतनी अ छ होती है। सधुा सनु नह ंपाएगी और गेसूनेभी कतना बरुा माना होगा। और यह सब च दर क वजह स।ेच दर हमशेा उसकेआन-ेजान,ेउठन-ेबठैनेम कतर- य त करता रहता है। एक बार वह अपनेमन सेलड़ कय केसाथ पकिनक म चली गयी। वह ंच दर केबहुत-सेदो त भी थे। एक दो त नेजाकर च दर सेजाने या कह दया क च दर उस पर बहुत बगड़ा। और सधुा कतनी रोयी थी उस दन। यह च दर बहुत खराब है। सच पछूो तो अगर कभी-कभी वह सधुा का कहना मान लतेा हैतो उससेदगुुना सधुा पर रोब जमाता हैऔर सधुा को ला- लाकर मार डालता है। और खुद अपन-ेआप दिुनयाभर म घमूगे। अपना काम होगा तो 'चलो सधुा, अभी करो, फौरन।' और सधुा का काम होगा तो-'अरेभाई, या कर, भलू गय।े' अब आज ह देखो, सबुह आठ बजेआयेऔर अब देखो दो बजेभी जनाब आतेह या नह ं? और कह गयेह दो बजेतक केिलए तो दो बजेतक सधुा को चैन नह ंपड़ेगी। न नींद आएगी, न कसी काम म तबीयत लगेगी। लेकन अब ऐसेकाम कैसे चलगेा। इ तहान को कतनेथोड़ेदन रह गयेह। और सधुा क तबीयत िसवा पोय (क वता) केऔर कुछ पढऩेम लगती ह नह ं। कब सेवह च दर सेकह रह हैथोड़ा-सा इकनािम स पढ़ा दो, लेकन ऐसा वाथ हैक बस चाय पी ली, नानखटाई खा ली, ला िलया और फर अपनेम त साइ कल पर घमू रहेह। यह सब सोचत-ेसोचतेसधुा को नींद आ गयी। और तीन बजेजब गेसूआयी तो भी सधुा सो रह थी। पलगं केनीचेड .एम.सी. का गोला खुला हुआ था और त कयेकेपास ोिशया पड़ थी। सधुा थी बड़ यार । बड़ खूबसरूत। और खासतौर सेउसक पलक तो अपरा जता के फूल को मात करती थीं। और थी इतनी गोर गुदकार क कह ंपर दबा दो तो फूल खल जाए। मिँूगया ह ठ पर जानेकैसा अछूता गुलाब मसुकराता था और बाँह तो जैसेबलेेक पाँखुरय क बनी ह । गेसूआयी। उसकेहाथ म िमठाई थी जो उसक माँनेसधुा केिलए भजेी थी। वह पल-भर खड़ रह और फर उसनेमजे पर िमठाई रख द और ोिशया सेसधुा क गदन गुदगुदानेलगी। सधुा नेकरवट बदल ली। गेसूनेनीचेपड़ा हुआ डोरा उठाया और आ ह तेसेउसका चुट ला डोरेकेएक छोर सेबाँधकर दसूरा छोर मजे केपायेसेबाँध दया। और उसकेबाद बोली, ''सधुा, सधुा उठो।'' सधुा च ककर उठ गयी और आँख मलत-ेमलतेबोली, ''अब दो बजेह? लायेउ ह या नह ं?'' ''ओहो! उ ह लायेया नह ंकसेबलुाया था रानी, दो बजे; जरा हम भी तो मालमू हो?'' गेसूनेबाँह म चुटक काटतेहुए पछूा। ''उ फोह!'' सधुा बाँह झटककर बोली, ''मार डाला! बदेद कह ंक ! येसब अपनेउ ह ंअ तर िमयाँको दखाया कर!'' और य ह सधुा नेिसर ढँकनेकेिलए प ला उठाया तो देखा क चोट डोर म बधँी हुई है। इसकेपहलेक सधुा कुछ कहे, गेसूबोली, ''या सनम! जरा पढ़ाई तो देखो, मनेतो सनुा था क नींद न आयेइसिलए लड़केअपनी चोट खँूट म बाँध लतेेह पर यह नह ंमालमू था क लड़ कयाँभी अब वह करनेलगी ह।''
सधुा नेचोट सेडोर खोलतेहुए कहा, ''म ह सतानेको रह गयी हूँ। अ तर िमयाँक चोट बाँधकर नचाना उ ह। अभी सेबतेाब य हुई जाती है?'' ''अरेरानी, उनकेचोट कहाँ? िमयाँह िमयाँ?'' ''चोट न सह , दाढ़ सह ।'' ''दाढ़ , खुदा खैर करे, मगर वो दाढ़ रख ल तो म उनसेमोह बत तोड़ ल।ँू'' सधुा हँसनेलगी। ''ल,ेअ मी नेतरेेिलए िमठाई भजेी है। तूआयी य नह ं?'' '' या बताऊँ?'' ''बताऊँ-वताऊँकुछ नह ं। अब कब आएगी त?ू'' ''गेस,ूसनुो, इसी मगंल, नह ं-नह ंबहृपित को बआु आ रह ह। वो चली जाएगँी तब आऊँगी म।'' ''अ छा, अब म चल।ँूअभी कािमनी और भा केयहाँिमठाई पहुँचानी है।'' गेसूमड़ुतेहुए बोली। ''अरेबठैो भी।'' सधुा नेगेसूक ओढऩी पकडक़र उसेखींचकर बठलातेहुए कहा, ''अभी आयेहो, बठैेहो, दामन सभँाला है।'' ''आहा। अब तो तूभी उदूशायर कहनेलगी।'' गेसूनेबठैतेहुए कहा। ''तरेा ह मज लग गया।'' सधुा नेहँसकर कहा। ''देख कह ंऔर भी मज न लग जाए, वरना फर तरेेिलए भी इ तजाम करना होगा!'' गेसूनेपलगं पर लटेतेहुए कहा। ''अरेयेवो गुड़ नह ंक चींटेखाए।ँ'' ''देखँूगी, और देखँूगी या, देख रह हूँ। इधर पछलेदो साल सेकतनी बदल गयी हैत।ूपहलेकतना हँसती- बोलती थी, कतनी लड़ती-झगड़ती थी और अब कतना हँसन-ेबोलनेपर भी गुमसमु हो गयी हैत।ूऔर वसैेहमशेा हँसती रहेचाहेलेकन जानेकस खयाल म डूबी रहती हैहमशेा।'' गेसूनेसधुा क ओर देखतेहुए कहा। ''धत ्पगली कह ंक ।'' सधुा नेगेसूकेएक ह क -सी चपत मारकर कहा, ''यह सब तरेेअपनेखयाली-पलुाव ह। म कसी के यान म डूबगँूी, येहमारेगुनेनह ंिसखाया।'' ''गु तो कसी केनह ंिसखातेसधुा रानी, ब कुल सच-सच, या कभी तुहारेमन म कसी केिलए मोह बत
नह ंजागी?'' गेसूनेबहुत ग भीरता सेपछूा। ''देख गेस,ूतझुसेमनेआज तक तो कभी कुछ नह ंिछपाया, न शायद कभी िछपाऊँगी। अगर कभी कोई बात होती तो तझुसेिछपी न रहती और रहा महुबत का, तो सच पछू तो मनेजो कुछ कहािनय म पढ़ा हैक कसी को देखकर म रोनेलगँू, गानेलगँू, पागल हो जाऊँयह सब कभी मझुेनह ंहुआ। और रह ंक वताएँतो उनम क बात मझुे बहुत अ छ लगती ह। क स क क वताएँपढक़र ऐसा लगा हैअ सर क मरे नस का कतरा-कतरा आँसूबनकर छलकनेवाला है। लेकन वह महज क वता का असर होता है।'' ''महज क वता का असर,'' गेसूनेपछूा, ''कभी कसी खास आदमी केिलए तरेेमन म हँसी या आँसूनह ंउमड़त!े कभी अपनेमन को जाँचकर तो देख, कह ंतरे नाजुक-खयाली केपरदेम कसी एक क सरूत तो नह ंिछपी है।'' ''नह ंगेसूबानो, नह ं, इसम मन को जाँचनेक या बात है। ऐसी बात होती और मन कसी केिलए झुकता तो या खुद मझुेनह ंमालमू होता?'' सधुा बोली, ''लेकन तमु ऐसा य सोचती हो?'' ''बात यह है, सधुी!'' गेसूनेसधुा को अपनी गोद म खींचतेहुए कहा, ''देखो, तमु मझुसेइ म म ऊँची हो, तमुने अँेजी शायर छान डाली हैलेकन जंदगी सेजतना मझुेसा बका पड़ चुका है, अभी तुह नह ंपड़ा। अ सर कब, कहाँऔर कैसेमन अपनेको हार बठैता है, यह खुद हम पता नह ंलगता। मालमू तब होता हैजब जसकेकदम पर हमनेिसर रखा है, वह झटकेसेअपनेकदम घसीट ल।ेउस व हमार नींद टूट जाती हैऔर तब हम जाकर देखतेह क अरेहमारा िसर तो कसी केकदम पर रखा हुआ था और उनकेसहारेआराम सेसोतेहुए हम सपना देख रहेथे क हमारा िसर कह ंझुका ह नह ं। और मझुेजानेतरे आँख म इधर या द ख रहा हैक म बचेैन हो उठ हूँ। तनूे कभी कुछ नह ंकहा, लेकन मनेदेखा क नाजुक अशआर तरेेदल को उस जगह छूलतेेह जस जगह उसी को छू सकतेह जो अपना दल कसी केकदम पर चढ़ा चुका हो। और म यह नह ंकहती क तनूेमझुसेिछपाया है। कौन जानता हैतरेेदल नेखुद तझुसेयह राज िछपा रखा हो।'' और सधुा केगाल थपथपातेहुए गेसूबोली, ''लेकन मरे एक बात मानगेी त?ूतूकभी इस दद को मोल न लनेा, बहुत तकलीफ होती है।'' सधुा हँसनेलगी, ''तकलीफ क या बात? तूतो हैह । तझुसेपछू लगँूी उसका इलाज।'' ''मझुसेपछूकर या कर लगेी- दद दल या बाँटनेक चीज है? बाँट ल अपनेपरायेदद दल? नह ं, तूबड़ सकुुवाँर है। तूइन तकलीफ केिलए बनी नह ंमरे च पा!'' और गेसूनेउसका िसर अपनी छाती म िछपा िलया। टन सेघड़ नेसाढ़ेतीन बजाय।े सधुा नेअपना िसर उठाया और घड़ क ओर देखकर कहा-
''ओ फोह, साढ़ेतीन बजेगयेऔर अभी तक गायब!'' '' कसकेइ तजार म बतेाब हैत?ू'' गेसूनेउठकर पछूा। ''बस दद दल, महुबत, इ तजार, बतेाबी, तरेेदमाग म तो यह सब भरा रहता हैआज कल, वह तूसबको समझती है। इ तजार- व तजार नह ं, च दर अभी मा टर लकेर आएगँे। अब इ तहान कतना नजद क है।'' ''हाँ, येतो सच हैऔर अभी तक मझुसेपछू, या पढ़ाई हुई है। असल बात तो यह हैक कॉलजे म पढ़ाई हो तो घर म पढऩेम मन लगेऔर राजा कॉलजे म पढ़ाई नह ंहोती। इससेअ छा सीधेयिूनविसट म बी.ए. करतेतो अ छा था। मरे तो अ मी नेकहा क वहाँलड़केपढ़तेह, वहाँनह ंभजेँूगी, लेकन तू य नह ंगयी, सधुा?'' ''मझुेभी च दर नेमना कर दया था।'' सधुा बोली। सहसा गेसूनेएक ण को सधुा क ओर देखा और कहा, ''सधुी, तझुसेएक बात पछूूँ!'' ''हाँ!'' ''अ छा जानेदे!'' ''पछूो न!'' ''नह ं, पछूना या, खुद जा हर है।'' '' या?'' ''कुछ नह ं।'' ''पछूो न!'' ''अ छा, फर कभी पछू लगे! अब देर हो रह है। आधा घटंा हो गया। कोचवान बाहर खड़ा है।'' सधुा गेसूको पहुँचानेबाहर तक आयी। ''कभी हसरत को लकेर आओ।'' सधुा बोली। ''अब पहलेतमु आओ।'' गेसूनेचलत-ेचलतेकहा। ''हाँ, हम तो बनती को लकेर आएगँे। और हसरत सेकह देना तभी उसकेिलए तोहफा लाएगँे!'' ''अ छा, सलाम...'' और गेसूक गाड़ मुकल सेफाटक केबाहर गयी होगी क साइ कल पर च दर आतेहुए द ख पड़ा। सधुा ने बहुत गौर सेदेखा क उसकेसाथ कौन है, मगर वह अकेला था।
सधुा सचमचु झ ला गयी। आ खर लापरवाह क हद होती है। च दर को दिुनया भर केकाम याद रहतेह, एक सधुा सेजाने या खार खायेबठैा हैक सधुा का काम कभी नह ंकरेगा। इस बात पर सधुा कभी-कभी द:ुखी हो जाती हैऔर घर म कससेवह कहेकाम केिलए। खुद कभी बाजार नह ंजाती। नतीजा यह होता हैक वह छोट -स-ेछोट चीज केिलए मोहताज होकर बठै जाती है। और काम नौकर सेकरवा भी ल,ेपर अब मा टर तो नौकर सेनह ं ढुँढ़वाया जा सकता? ऊन तो नौकर नह ंपस द कर सकता? कताब तो नौकर नह ंला सकता? और च दर का यह हाल है। इसी बात पर कभी-कभी उसेलाई आ जाती है। च दर नेआकर बरामदेम साइ कल रखी और सधुा का चेहरा देखतेह वह समझ गया। ''काहेमहँु बना रखा है, पाँच बजेमा टर साहब आएगँेतुहारे। अभी उ ह ंकेयहाँसेआ रहेह। बस रया को जानती हो, वह आएगँे।'' और उसकेबाद च दर सीधा टड - म म पहुँच गया। वहाँजाकर देखा तो आराम-कुस पर बठैे-ह -बठैेडॉ. शुला सो रहे ह, अत: उसनेअपना चाट और पने उठाया और ाइंग म म आकर चुपचाप काम करनेलगा। बड़ा ग भीर था वह। जब इंक घोलनेकेिलए उसनेसधुा सेपानी नह ंमाँगा और खुद िगलास लाकर आँगन म पानी लनेेलगा, तब सधुा समझ गयी क आज दमाग कुछ बगड़ा है। वह एकदम तड़प उठ । या करेवह! वसैेचाहे वह च दर सेकतना ह ढ ठ य न हो पर च दर गुसा रहता था तब सधुा क ह काँप उठती थी। उसक ह मत नह ंपड़ती थी क वह कुछ भी कहे। लेकन अ दर-ह -अ दर वह इतनी परेशान हो उठती थी क बस। कई बार वह कसी-न- कसी बहानेसे ाइंग म म आयी, कभी गुलद ता बदलन,ेकभी मजेपोश बदलन,ेकभी आलमार म कुछ रखन,ेकभी आलमार म सेकुछ िनकालन,ेलेकन च दर अपनेचाट म िनगाह गड़ायेरहा। उसने सधुा क ओर देखा तक नह ं। सधुा क आँख म आँसूछलक आयेऔर वह चुपचाप अपनेकमरेम चली गयी और लटे गयी। थोड़ देर वह पड़ रह , पता नह ं य वह फूट-फूटकर रो पड़ । खूब रोयी, खूब रोयी और फर महँुधोकर आकर पढऩेक कोिशश करनेलगी। जब हर अ र म उसेच दर का उदास चेहरा नजर आनेलगा तो उसनेकताब ब द करकेरख द और ाइंग म म गयी। च दर नेचाट बनाना भी ब द कर दया था और कुरसी पर िसर टेकेछत क ओर देखता हुआ जाने या सोच रहा था। वह जाकर सामनेबठै गयी तो च दर नेच ककर िसर उठाया और फर चाट को सामनेखसका िलया। सधुा ने बड़ ह मत करकेकहा- ''च दर!'' '' या!'' बड़ेभरायेगलेसेच दर बोला। ''इधर देखो!'' सधुा नेबहुत दलुार सेकहा। '' या है!'' च दर नेउधर देखतेहुए कहा, ''अरेसधुा! तमु रो य रह हो?'' ''हमार बात पर नाराज हो गयेतमु। हम या कर, हमारा वभाव ह ऐसा हो गया। पता नह ं य तमु पर इतना गुसा आ जाता है।'' सधुा केगाल पर दो बड़े-बड़ेमोती ढलक आय।े
''अरेपगली! मालमू होता हैतुहारा तो दमाग बहुत ज द खराब हो जाएगा, हमनेतमुसेकुछ कहा है?'' ''कह लतेेतो हम स तोष हो जाता। हमनेकभी कहा तमुसेक तमु कहा मत करो। गुसा मत हुआ करो। मगर तमु तो फर गुसा मन-ह -मन म िछपानेलगतेहो। इसी पर हम लाई आ जाती है।'' ''नह ंसधुी, तुहार बात नह ंथी और हम गुसा भी नह ंथे। पता नह ं य मन बड़ा भार -सा था।'' '' या बात है, अगर बता सको तो बताओ, वरना हम कौन ह तमुसेपछूनेवाल।े'' सधुा नेबड़़ेक ण वर म कहा। ''तो तुहारा दमाग खराब हुआ। हमनेकभी तमुसेकोई बात िछपायी? जाओ, अ छ लड़क क तरह महँु धो आओ।'' सधुा उठ और महँुधोकर आकर बठै गयी। ''अब बताओ, या बात थी?'' ''कोई एक बात हो तो बताए।ँपता नह ंतुहारेघर सेगयेतो एक-न-एक ऐसी बात होती गयी क मन बड़ा उदास हो गया।'' ''आ खर फर भी कोई बात तो हुई ह होगी!'' ''बात यह हुई क तुहारेयहाँसेम घर गया खाना खान।ेवहाँदेखा चाचाजी आयेहुए ह, उनकेसाथ एक कोई साहब और ह। खैर बड़ खुशी हुई। खाना-वाना खाकर जब बठैेतब मालमू हुआ क चाचाजी मरेा याह तय करनेके िलए आयेह और साथ वालेसाहब मरेेहोनवेालेससरुह। जब मनेइनकार कर दया तो बहुत बगडक़र चलेगयेऔर बोलेहम आज सेतुहारेिलए मर गयेऔर तमु हमारेिलए मर गय।े'' ''तुहार माताजी कहाँह?'' '' तापगढ़ म, लेकन वो तो सौतलेी ह और वेतो चाहती ह नह ंक म घर लौटूँ, लेकन चाचाजी ज र आज तक मझुसेकुछ महुबत करतेथे। आज वह भी नाराज होकर चलेगय।े'' सधुा कुछ देर तक सोचती रह , फर बोली, ''तो च दर, तमु शाद कर य नह ंलते?े'' ''नह ंसधुा, शाद नह ंकरनी हैमझुे। मनेदेखा क जसक शाद हुई, कोई भी सखुी नह ंहुआ। सभी का भ व य बगड़ गया। और य एक तवालत पाली जाए? जानेकैसी लड़क हो, या हो?'' ''तो उसम या? पापा सेकहो उस लड़क को जाकर देख ल। हम भी पापा केसाथ चलेजाएगँे। अ छ हो तो कर लो न, च दर। फर यह ंरहना। हम अकेला भी नह ंलगेगा। य ?'' ''नह ंजी, तमु तो समझती नह ंहो। जंदगी िनभानी हैक कोई गाय-भस खर दना है!'' च दर नेहँसकर कहा, ''आदमी एक-दसूरेको समझे, बझूे, यार करे, तब याह केभी कोई मानेह।''
''तो उसी सेकर लो जससेयार करतेहो!'' च दर नेकुछ जवाब नह ंदया। ''बोलो! चुप य हो गय!ेअ छा, तमुनेकसी को यार कया, च दर!'' '' य ?'' ''बताओ न!'' ''शायद नह ं!'' '' ब कुल ठ क, हम भी यह सोच रहेथेअभी।'' सधुा बोली। '' य , ये य सोच रह थी?'' ''इसिलए क तमुनेकया होता तो तमु हमसेथोड़े़ह िछपात,ेहम ज र बतात,ेऔर नह ंबताया तो हम समझ गयेक अभी तमुनेकसी सेयार नह ंकया।'' ''लेकन तमुनेयह पछूा य , सधुा! यह बात तुहारेमन म उठ कैस?े'' ''कुछ नह ं, अभी गेसूआयी थी। वह बोली-सधुा, तमुनेकसी सेकभी यार कया है, असल म वह अ तर को यार करती है। उससेउसका ववाह होनवेाला है। हाँ, तो उसनेपछूा क तनूेकसी सेयार कया है, हमनेकहा, नह ं। बोली, तूअपनेसेिछपाती है। तो हम मन-ह -मन म सोचतेरहेक तमु आओगेतो तमुसेपछूगेक हमनेकभी यार तो नह ंकया है। य क तुह ंएक हो जससेहमारा मन कभी कोई बात नह ंिछपाता, अगर कोई बात िछपाई भी होती हमन,ेतो तुह ज र बता देती। फर हमनेसोचा, शायद कभी हमनेयार कया हो और तुह बताया हो, फर हम भलू गयेह । अभी उसी दन देखो, हम पापा क दवाई का नाम भलू गयेऔर तुह याद रहा। शायद हम भलू गये ह और तुह मालमू हो। कभी हमनेयार तो नह ंकया न?'' ''नह ं, हम तो कभी नह ंबताया।'' च दर बोला। ''तब तो हमनेयार-वार नह ंकया। गेसूयँूह ग प उड़ा रह थी।'' सधुा नेस तोष क साँस लकेर कहा, ''लेकन बस! चाचाजी केनाराज होनेपर तमु इतनेद:ुखी हो गयेहो! हो जानेदो नाराज। पापा तो ह अभी, या पापा महुबत नह ंकरतेतमुस?े'' ''सो य नह ंकरत,ेतमुसे यादा मझुसेकरतेह लेकन उनक बात सेमन तो भार हो ह गया। उसकेबाद गये बस रया केयहाँ। बस रया नेकुछ बड़ अ छ क वताएँसनुायीं। और भी मन भार हो गया।'' च दर नेकहा। ''लो, तब तो च दर, तमु यार करतेहोगे! ज र स?े'' सधुा नेहाथ पटककर कहा। '' य ?''
''गेसूकह रह थी-शायर पर जो उदास हो जाता हैवह ज र महुबत-वहुबत करता है।'' सधुा नेकहा, ''अरेयह पो टको म कौन है?'' च दर नेदेखा, ''लो बस रया आ गया!'' च दर उसेबलुानेउठा तो सधुा नेकहा, ''अभी बाहर बठलाना उ ह, म तब तक कमरा ठ क कर ल।ँू'' बस रया को बाहर बठाकर च दर भीतर आया, अपना चाट वगैरह समटेनेकेिलए, तो सधुा नेकहा, ''सनुो!'' च दर क गया। सधुा नेपास आकर कहा, ''तो अब तो उदास नह ंहो तमु। नह ंचाहतेमत करो शाद , इसम उदास या होना। और क वता-व वता पर महँुबनाकर बठैेतो अ छ बात नह ंहोगी।'' ''अ छा!'' च दर नेकहा। ''अ छा-व छा नह ं, बताओ, तुह मरे कसम है, उदास मत हुआ करो फर हमसेकोई काम नह ंहोता।'' ''अ छा, उदास नह ंह गे, पगली!'' च दर नेह क -सी चपत मारकर कहा और बरबस उसकेमहँु सेएक ठ ड साँस िनकली। उसनेचाट उठाकर टड म म रखा। देखा डॉ टर साहब अभी सो ह रहेह। सधुा कमरा ठ क कर रह थी। वह आकर बस रया केपास बठै गया। थोड़ देर म कमरा ठ क करकेसधुा आकर कमरेकेदरवाजेपर खड़ हो गयी। च दर नेपछूा-'' य , सब ठ क है?'' उसनेिसर हला दया, कुछ बोली नह ं। ''यह ह आपक िश या। सुी सधुा शुला। इस साल बी.ए. फाइनल का इ तहान दगी।'' बस रया नेबना आँख उठायेह हाथ जोड़ िलय।ेसधुा नेहाथ जोड़ेफर बहुत सकुचा-सी गयी। च दर उठा और बस रया को लाकर उसनेअ दर बठा दया। बस रया केसामनेसधुा और उसक बगल म च दर। चुप। सभी चुप। अ त म च दर बोला-''लो, तुहारेमा टर साहब आ गय।ेअब बताओ न, तुह या- या पढऩा है?'' सधुा चुप। बस रया कभी यह पुतक उलटता, कभी वह। थोड़ देर बाद वह बोला-''आपके या वषय ह?'' ''जी!'' बड़ कोिशश सेबोलतेहुए सधुा नेकहा-'' ह द , इकनॉिम स और गहृ- व ान।'' और उसकेमाथेपर पसीना झलक आया। ''आपको ह द कौन पढ़ाता है?'' बस रया नेकताब म ह िनगाह गड़ायेहुए कहा।
सधुा नेच दर क ओर देखा और मुकराकर फर महँुझुका िलया। ''बोलो न तमु खुद, येराजा ग स कॉलजे म ह। शायद िमस पवार ह द पढ़ाती ह।'' च दर नेकहा-''अ छा, अब आप पढ़ाइए, म अपना काम क ँ।'' च दर उठकर चल दया। टड म म मुकल सेच दर दरवाजेतक पहुँचा होगा क सधुा नेबस रया सेकहा- ''जी, म पने लेआऊँ!'' और लपकती हुई च दर केपास पहुँची। ''ए सनुो, च दर!'' च दर क गया और उसका कुरता पकडक़र छोटेब च क तरह मचलतेहुए सधुा बोली-''तमु चलकर बठैो तो हम पढ़गे। ऐसेशरम लगती है।'' ''जाओ, चलो! हर व वह बचपना!'' च दर नेडाँटकर कहा-''चलो, पढ़ो सीधेस।ेइतनी बड़ हो गयी, अभी तक वह आदत!'' सधुा चुपचाप महँु लटकाकर खड़ हो गयी और फर धीरे-धीरेपढ़नेलग गयी। च दर डट म म जाकर चाट बनानेलगा। डॉ टर साहब अभी तक सो रहेथे। एक म खी उडक़र उनकेगलेपर बठै गयी और उ ह नेबाय हाथ से म खी मारतेहुए नींद म कहा-''म इस मामलेम सरकार क नीित का वरोध करता हूँ।'' च दर नेच ककर पीछेदेखा। डॉ टर साहब जग गयेथेऔर जमहुाई लेरहेथे। ''जी, आपनेमझुसेकुछ कहा?'' च दर नेपछूा। ''नह ं, या मनेकुछ कहा था? ओह! म सपना देख रहा था कैबज गय?े'' ''साढ़ेपाँच।'' ''अरेब कुल शाम हो गयी!'' डॉ टर साहब नेबाहर देखकर कहा-''अब रहनेदो कपरू, आज काफ काम कया है तमुन।ेचाय मगँवाओ। सधुा कहाँहै?'' ''पढ़ रह है। आज सेउसकेमा टर साहब आनेलगेह।'' ''अ छा-अ छा, जाओ उ ह भी बलुा लाओ, और चाय भी मगँवा लो। उसेभी बलुा लो-सधुा को।'' च दर जब ाइंग म म पहुँचा तो देखा सधुा कताब समटे रह हैऔर बस रया जा चुका है। उसनेसधुा से कहना चाहा लेकन सधुा का महँुदेखतेह उसनेअनमुान कया क सधुा लड़नेकेमडूम है, अत: वह वयंह जाकर महरा जन सेकह आया क तीन याला चाय पढ़नेकेकमरेम भजे दो। जब वह लौटनेलगा तो खुद सधुा ह उसके रा तेम खड़ हो गयी और धमक के वर म बोली-''अगर कल सेसाथ नह ंबठैोगेतमु, तो हम नह ंपढ़गे।'' ''हम साथ नह ंबठै सकत,ेचाहेतमु पढ़ो या न पढ़ो।'' च दर नेठंडे वर म कहा और आगेबढ़ा। ''तो फर हम नह ंपढ़गे।'' सधुा नेजोर सेकहा।
'' या बात है? य लड़ रहेहो तमु लोग?'' डॉ. शुला अपनेकमरेसेबोल।ेच दर कमरेम जाकर बोला, ''कुछ नह ं, येकह रह ह क...'' ''पहलेहम कहगे,'' बात काटकर सधुा बोली-''पापा, हमनेइनसेकहा क तमु पढ़ातेव बठैा करो, हम बहुत शरम लगती है, येकहतेह पढ़ो चाहेन पढ़ो, हम नह ंबठैगे।'' ''अ छा-अ छा, जाओ चाय लाओ।'' जब सधुा चाय लानेगयी तो डॉ टर साहब बोल-े''कोई व ासपा लड़का है? अपनेघर क लड़क समझकर सधुा को स पना पढ़नेकेिलए। सधुा अब ब ची नह ंहै।'' ''हाँ-हाँ, अरेयह भी कोई कहनेक बात है!'' ''हाँ, वसैेअभी तक सधुा तुहार ह िनगहबानी म रह है। तमु खुद ह अपनी ज मवेार समझतेहो। लड़का ह द म एम.ए. है?'' ''हाँ, एम.ए. कर रहा है।'' ''अ छा है, तब तो बनती आ रह है, उसेभी पढ़ा देगा।'' सधुा चाय लकेर आ गयी थी। ''पापा, तमु लखनऊ कब जाओगे?'' ''शुवार को, य ?'' ''और येभी जाएगँे?'' ''हाँ।'' ''और हम अकेलेरहगे?'' '' य , महरा जन यह ंसोएगी और अगलेसोमवार को हम लौट आएगँे।'' डॉ. शुला नेचाय का याला महँुसेलगातेहुए कहा। एक गमकदेक शाम, मन उदास, तबीयत उचट -सी, िसतार क रोशनी फ क लग रह थी। माच क शुआत थी और फर भी जानेशाम इतनी गरम थी, या सधुा को ह इतनी बचेैनी लग रह थी। पहलेवह जाकर सामनेकेलॉन म बठै लेकन सामनेकेमौलिसर केपड़े म छोट -छोट गौरैय नेिमलकर इतनी जोर सेचहचहाना शु कया क उसक तबीयत घबरा उठ । वह इस व एका त चाहती थी और सबसेबढ़कर स नाटा चाहती थी जहाँकोई न बोल,े कोई बात न करे, सभी खामोशी म डूबेहुए ह । वह उठकर टहलनेलगी और जब लगा क परै म ताकत ह नह ंरह तो फर लटे गयी, हर -हर घास पर।
मगंलवार क शाम थी और अभी तक पापा नह ंआयेथे। आना तो दरू, पापा या च दर केहाथ केएक परुजेकेिलए तरस गयी थी। कसी नेयह भी नह ंिलखा क वेलोग कहाँरह गयेह, या कब तक आएगँे। कसी को भी सधुा का खयाल नह ं। शिनवार या इतवार को तो वह हर रोज खाना खातेव रोयी, चाय पीना तो उसनेउसी दन सेछोड़ दया था और सोमवार को सबुह पापा नह ंआयेतो वह इतना फूट-फूटकर रोयी क महरा जन को िसकंती हुई रोट छोड़कर चूहेक आँच िनकालकर सधुा को समझानेआना पड़ा। और सधुा क लाई देखकर तो महरा जन केहाथ- पाँव ढ लेहो गयेथे। उसक सार डाँट हवा हो गयी थी और वह सधुा का महँु-ह -महँुदेखती थी। कल सेकॉलजे भी नह ंगयी थी। और दोन दन इ तजार करती रह क कह ंदोपहर को पापा न आ जाए।ँगेसूसेभी दो दन से मलुाकात नह ंहुई थी। लेकन मगंल को दोपहर तक जब कोई खबर न आयी तो उसक घबराहट बकेाबूहो गयी। इस व उसनेबस रया सेकोई भी बात नह ंक । आधा घटंा पढऩेकेबाद उसनेकहा क उसकेिसर म दद हो रहा हैऔर उसकेबाद खूब रोयी, खूब रोयी। उसकेबाद उठ , चाय पी, महँु-हाथ धोया और सामनेकेलॉन म टहलनेलगी। और फर लटे गयी हर -हर घास पर। बड़ ह उदास शाम थी। और ितज क लाली केहोठ भी याह पड़ गयेथे। बादल साँस रोकेपड़ेथेऔर खामोश िसतारेटम टमा रहेथे। बगुल क धँुधली-धँुधली कतार पर मारती हुई गुजर रह थीं। सधुा नेएक ल बी साँस लकेर सोचा क अगर वह िच डय़ा होती तो एक ण म उडक़र जहाँचाहती वहाँक खबर लेआती। पापा इस व घमूनेगयेह गे। च दर अपनेदो त क टोली म बठैा रँगरेिलयाँकर रहा होगा। वहाँभी दो त बना ह िलयेह गे उसन।ेबड़ा बातनूी हैच दर और बड़ा मीठे वभाव का। आज तक कसी सेसधुा नेउसक बरुाई नह ंसनुी। सभी उसको यार करतेथे। यहाँतक क महरा जन, जो सधुा को हमशेा डाँटती रहती थी, च दर का हमशेा प लतेी थी। और सधुा हरेक सेपछू लतेी थी क च दर केबारेम उसक या राय है? लेकन सब लोग जतनी च दर क तार फ करतेवह उतना अ छा उसेनह ंसमझती थी। आदमी क परख तब होती हैजब दन-रात बरत।ेच दर उसका ऊन कभी नह ंलाकर देता था, बादामी रंग का रेशम मगँाओ तो केस रया रंग का ला देता था। इतनेन शेबनाता रहता था, और सधुा नेहमशेा उससेकहा क मजेपोश क कोई डजाइन बना दो तो उसनेकभी नह ंबनायी। एक बार सधुा नेबहुत अ छ वायल कानपरुसेमगँवायी और च दर नेकहा, ''लाओ, यह बहुत अ छ है, इस पर हम कनारेक डजाइन बना दगे।'' और उसकेबाद उसनेउसम तमाम पान-जैसा जाने या बना दया और जब सधुा नेपछूा, ''यह या है?'' तो बोला, ''लकंा का न शा है।'' जब सधुा बगड़ तो बोला, ''लड़़कय के दय म रावण सेमघेनाद तक करोड़ रा स का वास होता है, इसिलए उनक पोशाक म लकंा का न शा यादा सशुोिभत होता है।'' मारेगुसेके सधुा नेवह धोती अपनी मािलन को देडाली थी। यह सब बात तो कसी को मालमू नह ं। उनकेसामनेतो जरा-सा कपरूसाहब हँस दय,ेचार मजाक क बात कर द ं, छोटे-मोटेउनकेकाम कर दय,ेमीठ बात कर लींऔर सब समझे कपरूसाहब तो ब कुल गुलाब केफूल ह। लेकन कपरूसाहब एक तीखेकाँटेह जो दन-रात सधुा केमन म चुभते रहतेह, यह तो दिुनया को नह ंमालमू। दिुनया या जानेक सधुा कतनी परेशानी रहती हैच दर क आदत स!े अगर दिुनया को मालमू हो जाए तो कोई च दर क जरा भी तार फ न करे, सब सधुा को ह यादा अ छा कह, लेकन सधुा कभी कसी सेकुछ नह ंकहती, मगर आज उसका मन हो रहा था क कसी सेच दर क जी भरकर बरुाई कर लेतो उसका मन बहुत ह का हो जाए।
''चलो ब टया रानी, तई खाय लवे, फर भीतर लटेो। अब हन लटेेका बखत नह ंआवा!'' सहसा महरा जन ने आकर सधुा क व न-शखंृला तोड़तेहुए कहा। ''अब हम नह ंखाएगँे, भखू नह ं।'' सधुा नेअपनेसनुहलेसपन म ह डूबी हुई बहेोश आवाज म जवाब दया। ''खाय लवे ब टया, खाय- पयैछोड़ैसेकसस काम चली, आव उठौ!'' महरा जन नेबड़ेदलुार सेकहा। सधुा पीछा छूटनेक कोई आशा न देखकर उठ गयी और चल द खान।ेकौर उठातेह उसक आँख म आँसूछलक आय,ेलेकन अपनेको रोक िलया उसन।ेदसूर केसामनेअपनेको बहुत शा त रखना आता था। उस।ेदो कौर खानेकेबाद वह महरा जन सेबोली, ''आज कोई िच ठ तो नह ंआयी?'' ''नह ंब टया, आज तो दन भर घरैम र ो!'' महरा जन नेपराठेउलटतेहुए जवाब दया-''काहेब टया, बाबजूी कुछौ नाह िल खन तो छोटेबाबूतो िलख देत।े'' ''अरेमहरा जन, यह तो हमार जान का रोना है। हम चाहेरो-रोकर मर जाएँमगर न पापा को खयाल, न पापा केिश य को। और च दर तो ऐसेखराब ह क हम या कर। ऐसेवाथ ह, अपनेमतलब के क बस! सबुह-शाम आएँ और हम या पापा न िमल तो आफत ढा दगे-बहुत घमूनेलगी हो तमु, बहुत बाहर कदम िनकल गया हैतुहारा-और सच पछूो तो च दर क वजह सेहमनेसब जगह आना-जाना ब द कर दया और खुद ह क आज लखनऊ, कल कलक ा और एक िच ठ भजेनेतक का व नह ंिमलता! अभी हम ऐसा करतेतो हमार जान नोच खात!ेऔर पापा को देखो, उनकेदलुारेउनकेसाथ ह तो बस और कसी क फ ह नह ं। अब तमु महरा जन, च दर को तो कभी कुछ चाय-वाय बना केमत देना।'' ''काहेब टया, काहेकोसत हो। कैसा चाँद-सेतो ह छोटेबाब,ूऔर कैसा हँस केबात करत ह। माई का जानेकैसे हयाव पड़ा क उ ह अलग कैद हस। बचेारा होटल म जानेकैसेरोट खात होई। उ ह हंयई बलुाय लवेतो अपनेहाथ क खलाय केदईुमह ना माँमोटा कैदे। हम तोसे यादा उसक ममता लगत है।'' ''बीबीजी, बाहर एक ममे पछूत ह- हंया कोनो डाकदर रहत ह? हम कहा, नाह ं, हंया तो बाबजूी रहत ह तो कहत ह, नह ंयह मकान आय।'' मािलन नेसहसा आकर बहुत वतं वर म कहा। ''बठैाओ उ ह, हम आतेह।'' सधुा नेकहा और ज द -ज द खाना शु कया और ज द -ज द ख म कर दया। बाहर जाकर उसनेदेखा तो नीलकाँटेकेझाड़ सेटक हुई एक बाइिस कल रखी थी और एक ईसाई लड़क लॉन पर टहल रह है। होगी कर ब चौबीस-प चीस बरस क , लेकन बहुत अ छ लग रह थी। ''क हए, आप कसेपछू रह ह?'' सधुा नेअँेजी म पछूा। ''म डॉ टर शुला सेिमलनेआयी हूँ।'' उसनेशु ह दुतानी म कहा। ''वेतो बाहर गयेह और कब आएगँे, कुछ पता नह ं। कोई खास काम हैआपको?'' सधुा नेपछूा। ''नह ं, यँूह िमलनेआ गयी। आप उनक लड़क ह?'' उसनेसाइ कल उठातेहुए कहा।
''जी हाँ, लेकन अपना नाम तो बताती जाइए।'' ''मरेा नाम कोई मह वपणू नह ं। म उनसेिमल लगँूी। और हाँ, आप उसेजानती ह, िम टर कपरूको?'' ''आहा! आप प मी ह, िमस ड ूज!'' सधुा को एकदम खयाल आ गया-''आइए, आइए; हम आपको ऐसेनह ंजाने दगे। चिलए, बैठए।'' सधुा नेबड़ बतेक लफु सेउसक साइ कल पकड़ ली। ''अ छा-अ छा, चलो!'' कहकर प मी जाकर ाइंग म म बठै गयी। ''िम टर कपरूरहतेकहाँह?'' प मी नेबठैनेसेपहलेपछूा। ''रहतेतो वेचौक म ह, लेकन आजकल तो वेभी पापा केसाथ बाहर गयेह। वेतो आपक एक दन बहुत तार फ कर रहेथे, बहुत तार फ। इतनी तार फ कसी लड़क क करतेतो हमनेसनुा नह ं।'' ''सचमचु!'' प मी का चेहरा लाल हो गया। ''वह बहुत अ छेह, बहुत अ छेह!'' थोड़ देर प मी चुप रह , फर बोली-'' या बताया था उ ह नेहमारेबारेम?'' ''ओह तमाम! एक दन शाम को तो हम लोग आप ह केबारेम बात करतेरहे। आपकेभाई केबारेम बताते रहे। फर आपकेकाम केबारेम बताया क आप कतना तजे टाइप करती ह, फर आपक िचय केबारेम बताया क आपको सा ह य सेबहुत शौक नह ंहैऔर आप शाद सेबहेद नफरत करती ह और आप यादा िमलती-जुलती नह ं, बाहर आती-जाती नह ंऔर िमस ड ूज...'' ''न, आप प मी क हए मझुे?'' ''हाँ, तो िमस प मी, शायद इसीिलए आप उसेइतनी अ छ लगींक आप कह ंआती-जाती नह ं, वह लड़ कय का आना-जाना और आजाद बहुत नापस द करता है।'' सधुा बोली। ''नह ं, वह ठ क सोचता है।'' प मी बोली-''म शाद और तलाक केबाद इसी नतीजेपर पहुँची हूँक चौदह बरस से च तीस बरस तक लड़ कय को बहुत शासन म रखना चा हए।'' प मी नेग भीरता सेकहा। एक ईसाई ममे केमहँुसेयह बात सनुकर सधुा दंग रह गयी। '' य ?'' उसनेपछूा। ''इसिलए क इस उ म लड़ कयाँबहुत नादान होती ह और जो कोई भी चार मीठ बात करता है, तो लड़ कयाँ समझती ह क इससे यादा यार उ ह कोई नह ंकरता। और इस उ म जो कोई भी ऐरा-गैरा उनकेससंग म आ जाता है, उसेवेयार का देवता समझनेलगती ह और नतीजा यह होता हैक वेऐसेजाल म फँस जाती ह क जंदगी भर उससेछुटकारा नह ंिमलता। मरेा तो यह वचार हैक या तो लड़ कयाँच तीस बरस केबाद शा दयाँकर जब वेअ छा-बरुा समझनेकेलायक हो जाए,ँनह ंतो मझुेतो ह दओुंका कायदा सबसे यादा पस द आता हैक चौदह वष केपहलेह लड़क क शाद कर द जाए और उसकेबाद उसका ससंग उसी आदमी सेरहेजससेउसे
जंदगी भर िनबाह करना हैऔर अपनेवकास- म सेदोन ह एक-दसूरेको समझतेचल। लेकन यह तो सबसेभ ा तर का हैक चौदह और च तीस बरस केबीच म लड़क क शाद हो, या उसेआजाद द जाए। मनेतो वयंअपने ऊपर ब धन बाँध िलयेथे।....तुहार तो शाद अभी नह ंहुई?'' ''नह ं।'' ''बहुत ठ क, तमु च तीस बरस केपहलेशाद मत करना, अ छा हाँ, और या बताया च दर नेमरेेबारेम?'' ''और तो कुछ खास नह ं; हाँ, यह कह रहा था, आपको चाय और िसगरेट बहुत अ छ लगती है। ओहो, देखए म भलू ह गयी, ली जए िसगरेट मगँवाती हूँ।'' और सधुा नेघटं बजायी। ''रहनेद जए, म िसगरेट छोड़ रह हूँ।'' '' य ?'' ''इसिलए क कपरूको अ छा नह ंलगता और अब वह मरेा दो त बन गया है, और दो ती म एक-दसूरेसेिनबाह ह करना पड़ता है। उसनेआपसेयह नह ंबताया क मनेउसेदो त मान िलया है?'' प मी नेपछूा। ''जी हाँ, बताया था, अ छा तो चाय ली जए!'' ''हाँ-हाँ, चाय मगँवा ली जए। आपका कपरूसे या स ब ध है?'' प मी नेपछूा। ''कुछ नह ं। मझुसेभला या स ब ध होगा उनका, जब देखए तब बगड़तेरहतेह मझु पर; और बाहर गयेह और आज तक कोई खत नह ंभजेा। येकह ंस ब ध ह?'' ''नह ं, मरेा मतलब आप उनसेघिन ह!'' ''हाँ, कभी वह िछपातेतो नह ंमझुसेकुछ! य ?'' ''तब तो ठ क है, स चेदल केआदमी मालमू पड़तेह। आप तो यह बता सकती ह क उ ह या- या चीज पस द ह?'' ''हाँ...उ ह क वता पस द है। बस क वता केबारेम बात न क जए, क वता सनुा द जए उ ह या क वता क कताब देद जए उ ह और उनको सबुह घमूना पस द है। रात को गंगाजी क सरैकरना पस द है। िसनमेा तो बहेद पस द है। और, और या, चाय क प ी का हलआु पस द है।'' ''यह या होता है?'' ''मरेा मतलब बना दधू क चाय उ ह पस द है।'' ''अ छा, अ छा। देखए आप सोचगी क म इस तरह सेिम. कपरूकेबारेम पछू रह हूँजैसेम कोई जाससू होऊँ, लेकन असल बात म आपको बता दँ।ूम पछलेदो-तीन साल सेअकेली रहती रह । कसी सेभी नह ंिमलती-
जुलती थी। उस दन िम टर कपरूगयेतो पता नह ं य मझु पर भाव पड़ा। उनको देखकर ऐसा लगा क यह आदमी हैजसम दल क स चाई है, जो आदिमय म ब कुल नह ंहोती। तभी मनेसोचा, इनसेदो ती कर ल।ँूलेकन चँूक एक बार दो ती करके ववाह, और ववाह केबाद अलगाव, म भोग चुक हूँइसिलए इनकेबारेम परू जाँच-पड़ताल कर लनेा चाहती हूँ। लेकन दो त तो अब बना ह चुक हूँ।'' चाय आ गयी थी और प मी नेसधुा के यालेम चाय ढाली। ''न, म तो अभी खाना खा चुक हूँ।'' सधुा बोली। ''प मी नेदो-तीन चुकय केबाद कहा-''आपकेबारेम च दर नेमझुसेकहा था।'' ''कहा होगा!'' सधुा महँु बगाडक़र बोली-''मरे बरुाई कर रहेह गेऔर या?'' प मी चाय के यालेसेउठतेहुए धुएँको देखती हुई अपनेह खयाल म डूबी थी। थोड़ देर बाद बोली, ''मरेा अनमुान गलत नह ंहोता। मनेकपरूको देखतेह समझ िलया था क यह मरेेिलए उपयु िम ह। मनेक वता पढऩी बहुत दन सेछोड़ द लेकन कसी कविय ी न,ेशायद िमसजे ाउिनगं नेकह ंिलखा था, क वह मरे जंदगी म रोशनी बनकर आया, उसेदेखतेह म समझ गयी क यह वह आदमी हैजसकेहाथ म मरेेदल केसभी राज सरु त रहगे। वह खेल नह ंकरेगा, और यार भी नह ंकरेगा। जंदगी म आकर भी जंदगी सेदरूऔर सपन म बधँकर भी सपन सेअलग...यह बात कपरूपर बहुत लागूहोती है। माफ करना िमस सधुा, म आपसेइसिलए कह रह हूँक आप इनक घिन ह और आप उ ह बतला दगी क मरेा या खयाल हैउनकेबारेम। अ छा, अब म चलगँूी।'' ''बैठए न!'' सधुा बोली। ''नह ं, मरेा भाई अकेला खानेकेिलए इ तजार कर रहा होगा।'' उठतेहुए प मी नेकहा। ''आप बहुत अ छ ह। इस व आप आयींतो म थोड़ -सी िच ता भलू गयी वरना म तीन दन सेउदास थी। बैठए, कुछ और च दर केबारेम बताइए न!'' ''अब नह ं। वह अपनेढंग का अकेला आदमी है, यह म कह सकती हूँ...ओह तुहार आँख बड़ सुदर ह। देखँू।'' और छोटेब चेक तरह उसकेमहँु को हथेिलय सेऊपर उठाकर प मी नेकहा, ''बहुत सुदर आँख ह। माफ करना, म कपरूसेभी इतनी ह बतेक लफु हूँ!'' सधुा झप गयी। उसनेआँख नीची कर लीं। प मी नेअपनी साइ कल उठातेहुए कहा-''कपरू केसाथ आप आइएगा। और आपनेकहा था कपरूको क वता पस द है।'' ''जी हाँ, गुडनाइट।'' जब प मी बगँलेपर पहुँची तो उसक साइ कल केकैरयर म अँगरेजी क वता केपाँच-छह थ बधँेथे। आठ बज चुकेथे। सधुा जाकर अपनेब तरेपर लटेकर पढऩेलगी। अँगरेजी क वता पढ़ रह थी। अँगरेजी
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