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Gunahon Ka Devta

Published by THE MANTHAN SCHOOL, 2021-05-12 08:51:01

Description: Gunahon Ka Devta

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लड़ कयाँकतनी आजाद और व छ द होती ह गी! जब प मी, जो ईसाई है, इतनी आजाद है, उसनेसोचा और प मी कतनी अ छ हैउसक बतेक लफु म भोलापन तो नह ंहै, पर सरलता बहेद है। बड़ा साफ दल है, कुछ िछपाना नह ं जानती। और सधुा सेिसफ पाँच-छह साल बड़ है, लेकन सधुा उसकेसामनेब ची लगती है। कतना जानती हैप मी और कतनी अ छ समझ हैउसक । और च दर क तार फ करतेनह ंथकती। च दर केिलए उसनेिसगरेट छोड़ द । च दर उसका दो त है, इतनी पढ़ -िलखी लड़क केिलए रोशनी का देवदतूहै। सचमचु च दर पर सधुा को गव है। और उसी च दर सेवह लड़-झगड़ लतेी है, इतनी मान-मनहुार कर लतेी हैऔर च दर सब बदा त कर लतेा हैवरना च दर केइतनेबड़े-बड़ेदो त ह और च दर क इतनी इ जत है। अगर च दर चाहेतो सधुा क र ी भर परवाह न करे लेकन च दर सधुा क भली-बरु बात बदा त कर लतेा है। और वह कतना परेशान करती रहती हैच दर को। कभी अगर सचमचु च दर बहुत नाराज हो गया और सचमचु हमशेा केिलए बोलना छोड़ देतब या होगा? या च दर यहाँसेकह ंचला जाए तब या होगा? खैर, च दर जाएगा तो नह ंइलाहाबाद छोडक़र, लेकन अगर वह खुद कह ंचली गयी तब या होगा? वह कहाँजाएगी! अरेपापा को मनाना तो बाय हाथ का खेल है, और ऐसा यार वह करेगी नह ंक शाद करनी पड़े। लेकन यह सब तो ठ क है। पर च दर नेिच ठ य नह ंभजेी? या नाराज होकर गया है? जातेव सधुा ने परेशान तो बहुत कया था। होलडॉल क पटे का ब सआु खोल दया था और उठातेह च दर केहाथ सेसब कपड़े बखर गय।ेच दर कुछ बोला नह ंलेकन जातेसमय उसनेसधुा को डाँटा भी नह ंऔर न यह समझाया क घर का खयाल रखना, अकेलेघमूना मत, महरा जन सेलड़ना मत, पढ़ती रहना। इससेसधुा समझ तो गयी थी क वह नाराज है, लेकन कुछ कहा नह ं। लेकन च दर को खत तो भजेना चा हए था। चाहेगुसेका ह खत य न होता? बना खत केमन उसका कतना घबरा रहा है। और या च दर को मालमू नह ंहोगा। यह कैसेहो सकता है? जब इतनी दरूबठैेहुए सधुा को मालमू हो गया क च दर नाखुश हैतो या च दर को नह ंमालमू होगा क सधुा का मन उदास हो गया है। ज र मालमू होगा। सोचत-ेसोचतेउसेजानेकब नींद आ गयी और नींद म उसेपापा या च दर क िच ठ िमली या नह ं, यह तो नह ंमालमू, लेकन इतना ज र हैक जैसेयह सार सृ एक ब दुसेबनी और एक ब दुम समा गयी, उसी तरह सधुा क यह भाद क घटाओंजैसी फैली हुई बचेैनी और गीली उदासी एक च दर के यान सेउठ और उसी म समा गयी। दसूरेदन सबुह सधुा आँगन म बठै हुई आलूछ ल रह थी और च दर का इ तजार कर रह थी। उसी दन रात को पापा आ गयेथेऔर दसूरेदन सबुह बआुजी और बनती। ''सधुी!'' कसी नेइतनेयार सेपकुारा क हवाओंम रस भर गया। ''अ छा! आ गयेच दर!'' सधुा आलूछोडक़र उठ बठै, '' या लायेहमारेिलए लखनऊ स?े'' ''बहुत कुछ, सधुा!'' ''केहैसधुा!'' सहसा कमरेम सेकोई बोला।

''च दर ह।'' सधुा नेकहा, ''च दर, बआु आ गयीं।'' और कमरेसेबआुजी बाहर आयीं। '' णाम, बआुजी!'' च दर बोला और परैछूनेकेिलए झुका। ''हाँ, हाँ, हाँ!'' बआुजी तीन कदम पीछेहट गयीं। ''देख य न हम पजूा क धोती पहनेह। ई केहै, सधुा!'' सधुा नेबआु क बात का कुछ जवाब नह ंदया-''च दर, चलो अपनेकमरेम; यहाँबआु पजूा करगी।'' च दर अलग हटा। बआु नेहाथ केपचंपा सेवहाँपानी िछडक़ा और जमीन फँूकनेलगीं। ''सधुा, बनती को भजे देव।'' बआुजी नेधूपदानी म महरा जन सेकोयला लतेेहुए कहा। सधुा अपनेकमरेम पहुँचकर च दर को खाट पर बठाकर नीचेबठै गयी। ''अरे, ऊपर बठैो।'' ''नह ं, हम यह ंठ क ह।'' कहकर वह बठै गयी और च दर क पट पर पेसल सेलक र खींचनेलगीं। ''अरेयह या कर रह हो?'' च दर नेपरैउठातेहुए कहा। ''तो तमुनेइतनेदन य लगाय?े'' सधुा नेदसूरेपाँयचेपर पेसल लगातेहुए कहा। ''अरे, बड़ आफत म फँस गयेथे, सधुा। लखनऊ सेहम लोग गयेबरेली। वहाँएक उ सव म हम लोग भी गये और एक िमिन टर भी पहुँचे। कुछ सोशिल ट, क यिुन ट, और मजदरू नेवरोध दशन कया। फर तो पिुलसवाल और मजदरू म जमकर लड़ाई हुई। वह तो कहो एक बचेारा सोशिल ट लड़का था कैलाश िम ा, उसनेहम लोग क जान बचायी, वरना पापा और हम, दोन ह अ पताल म होत.े..'' ''अ छा! पापा नेहम कुछ बताया नह ं!'' सधुा घबराकर बोली और बड़ देर तक बरेली, उप व और कैलाश िम ा क बात करती रह । ''अरेयेबाहर गा कौन रहा है?'' च दर नेसहसा पछूा। बाहर कोई गाता हुआ आ रहा था, ''आँचल म य बाँध िलया मझु परदेशी का यार....आँचल म य ...'' और च दर को देखतेह उस लड़क नेच ककर कहा, ''अरे?'' ण-भर त ध, और फर शरम सेलाल होकर भागी बाहर। ''अरे, भागती य है? यह तो ह च दर।'' सधुा नेकहा। लड़क बाहर क गयी और गरदन हलाकर इशारेसेकहा, ''म नह ंआऊँगी। मझुेशरम लगती है।'' ''अरेचली आ, देखो हम अभी पकड़ लातेह, बड़ झ क हैयह।'' कहकर सधुा उठ , वह फर भागी। सधुा पीछे- पीछेभागी। थोड़ देर बाद सधुा अ दर आयी तो सधुा केहाथ म उस लड़क क चोट और वह बचेार बरु तरह अ त- य त थी। दाँत सेअपनेआँचल का छोर दबायेहुए थी बाल क तीन-चार लट महँुपर झुक रह थींऔर लाज केमारे िसमट जा रह थी और आँख थींक मुकायेया रोय,ेयह तय ह नह ंकर पायी थीं।

''देखो...च दर...देखो।'' सधुा हाँफ रह थी-''यह हैबनती मोटक कह ंक , इतनी मोट हैक दम िनकल गया हमारा।'' सधुा बरु तरह हाँफ रह थी। च दर नेदेखा-बचेार क बरु हालत थी। मोट तो बहुत नह ंथी पर हाँ, गाँव क त दुती थी, लाल चेहरा, जसेशरम नेतो दनूा बना दया था। एक हाथ सेअपनी चोट पकड़ेथी, दसूरेसेअपनेकपड़ेठ क कर रह थी और दाँत सेआँचल पकड़े। ''छोड़ दो उस,ेयह या हैसधुा! बड़ जंगली हो तमु।'' च दर नेडाँटकर कहा। ''जंगली म हूँया यह?'' चोट छोड़कर सधुा बोली-''यह देखो, दाँत काट िलया हैइसन।े'' सचमचु सधुा केक धेपर दाँत केिनशान बनेहुए थे। च दर इस स भावना पर बतेहाशा हँसनेलगा क इतनी बड़ लड़क दाँत काट सकती है-'' य जी, इतनी बड़ हो गयी और दाँत काटती हो?'' उसक हँसी क नह ंरह थी। ''सचमचु यह तो बड़ेमजेक लड़क है। बनती हैइसका नाम? य रे, महुआ बीनती थी या वहाँ, जो बआुजी नेबनती नाम रखा है?'' वह प ला ठ क सेओढ़ चुक थी। बोली, ''नम त।े'' च दर और सधुा दोन हँस पड़े। ''अब इतनी देर बाद याद आयी।'' च दर और भी हँसनेलगा। '' बनती! ए बनती!'' बआु क आवाज आयी। बनती नेसधुा क ओर देखा और चली गयी। ''और कहो सधुी,'' च दर बोला-'' या हाल-चाल रहा यहाँ?'' '' फर भी एक िच ठ भी तो नह ंिलखी तमुन।े'' सधुा बड़ िशकायत के वर म बोली, ''हम रोज लाई आती थी। और तुहार वो आयी थी।'' ''हमार वो?'' च दर नेच ककर पछूा। ''अरेहाँ, तुहार प मी रानी।'' ''अ छा वो आयी थीं। या बात हुई?'' ''कुछ नह ं; तुहार तसवीर देख-देखकर रो रह थीं।'' सधुा नेउँगिलयाँनचातेहुए कहा। ''मरे तसवीर देखकर! अ छा, और थी कहाँमरे तसवीर?'' ''अब तमु तो बहस करनेलगे, हम कोई वक ल ह! तमु कोई नयी बात बताओ।'' सधुा बोली। ''हम तो तुह बहुत-बहुत बात बताएगँे। परू कहानी है।'' इतनेम बनती आयी। उसकेहाथ म एक त तर थी और एक िगलास। त तर म कुछ िमठाई थी, और िगलास म शरबत। उसनेलाकर त तर च दर केसामनेरख द ।

''ना भई, हम नह ंखाएगँे।'' च दर नेइनकार कया। बनती नेसधुा क ओर देखा। ''खा लो। लगेनखरा करन।ेलखनऊ सेआ रहेह न, तक लफु न कर तो मालमू कैसेहो?'' सधुा नेमहँु िचढ़ाते हुए कहा। च दर मसुकराकर खानेलगा। ''द द केकहनेपर खानेलगेआप!'' बनती नेअपनेहाथ क अँगूठ क ओर देखतेहुए कहा। च दर हँस दया, कुछ बोला नह ं। बनती चली गयी। ''बड़ अ छ लड़क मालमू पड़ती हैयह।'' च दर बोला। ''बहुत यार है। और पढऩेम हमार तरह नह ंहै, बहुत तजे है।'' ''अ छा! तुहार पढ़ाई कैसी चल रह है?'' ''मा टर साहब बहुत अ छा पढ़ातेह। और च दर, अब हम खूब बात करतेह उनसेदिुनया-भर क और वेबस हमशेा िसर नीचेकयेरहतेह। एक दन पढ़तेव हम गर पास म रखकर खातेगय,ेउ ह मालमू ह नह ंहुआ। उनसेएक दन क वता सनुवा दो।'' सधुा बोली। च दर नेकुछ जवाब नह ंदया और डॉ. साहब केकमरेम जाकर कताब उलटनेलगा। इतनेम बआुजी का तजे वर आया-''हम मालमू होता क ई महँु-झ सी हमकेऐसी नाच नचइहैतौ हम पदैा होतै गला घ ट देइत। हरेराम! अ काश िसर पर उठायेहै। कैघटंेसेन रयात-न रयात गटई फट गयी। ई बोलतैनाह ंजैसे साँप सघँू गवा होय।'' ोफेसर शुला केघर म वह नया सांकृितक त व था। कतनी शालीनता और िश ता सेवह रहतेथे। कभी इस तरह क भाषा भी उनकेघर म सनुनेको िमलगेी, इसक च दर को जरा भी उ मीद न थी। च दर च ककर उधर देखने लगा। डॉ. शुला समझ गय।ेकुछ ल जत-सेऔर मसुकराकर लािन िछपातेहुए-सेबोल,े''मरे वधवा बहन है, कल गाँव सेआयी हैलड़क को पहुँचान।े'' उसकेबाद कुछ पटकनेका वर आया, शायद कसी बरतन के। इतनेम सधुा आयी, गुसेसेलाल-''सनुा पापा तमुन,ेबआु बनती को मार डालगी।'' '' या हुआ आ खर?'' डॉ. शुला नेपछूा। ''कुछ नह ं, बनती नेपजूा का पचंपा उठाकर ठाकुरजी केिसहंासन केपीछेरख दया था। उ ह दखाई नह ं पड़ा, तो गुसा बनती पर उतार रह ह।'' इतनेम फर उनक आवाज आयी-''पदैा करतेबखत बहुत अ छा लाग रहा, पालत बखत ट बोल गय।ेमर गये र ो तो आपन स तानौ अपनेसाथ लैजा यौ। हमारेमड़ू पर ई ह या काहेडाल गयौ। ऐसी कुल छनी हैक पदैा

होतेहन बाप को खाय गयी।'' ''सनुा पापा तमुन?े'' ''चलो हम चलतेह।'' डॉ. शुला नेकहा। सधुा वह ंरह गयी। च दर सेबोली, ''ऐसा बरुा वभाव हैबआु का क बस। बनती ऐसी हैक इतना बदा त कर लतेी है।'' बआु नेठाकुरजी का िसहंासन साफ करतेहुए कहा, ''रोवत काहेहो, कौन तुहारेमाई-बाप को ग रयावा हैक ई अँसआु ढरकाय रह हो। ई सब चोचला अपनेओ को दखाओ जायके। दईु मह ना और ह-अब हन सेउिधयानी न जाओ।'' अब अभ ता सीमा पार कर चुक थी। '' बनती, चलो कमरेकेअ दर, हटो सामनेस।े'' डॉ. शुला नेडाँटकर कहा, ''अब येचरखा ब द होगा या नह ं। कुछ शरम-हया हैया नह ंतमुम?'' बनती िससकतेहुए अ दर गयी। टड म म देखा क च दर हैतो उलटेपाँव लौट आयी सधुा केकमरेम और फूट-फूटकर रोनेलगी। डॉ. शुला लौट आय-े''अब हम येसब कर क अपना काम कर! अ छा कल सेघर म महाभारत मचा रखा है। कब जाएगँी य,ेसधुा?'' ''कल जाएगँी। पापा अब बनती को कभी मत भजेना इनकेपास।'' सधुा नेगुसा-भरे वर म कहा। ''अ छा-जाओ, हमारा खाना परसो। च दर, तमु अपना काम यहाँकरो। यहाँशोर यादा हो तो तमु लाइ रे म चलेजाना। आज भर क तकलीफ है।'' च दर नेअपनी कुछ कताब उठायींऔर उसनेचला जाना ह ठ क समझा। सधुा खाना परोसनेचली गयी। बनती रो-रोकर और त कयेपर िसर पटककर अपनी कंुठा और द:ुख उतार रह थी। बआु घटं बजा रह थीं, दबी जबान जाने या बकती जा रह थीं, यह घटं केभ -भावना-भरेमधुर वर म सनुायी नह ंदेता था। लेकन बआुजी दसूरेदन गयींनह ं। जब तीन-चार दन बाद च दर गया तो देखा बाहर केसहेन म डॉ. शुला बठैेहुए ह और दरवाजा पकडक़र बआुजी खड़ बात कर रह ह। लेकन इस व बआुजी काफ ग भीर थींऔर कसी वषय पर म णा कर रह थीं। च दर केपास पहुँचनेपर फौरन वेचुप हो गयींऔर च दर क ओर सशंकत ने से देखनेलगीं। डॉ. शुला बोल,े''आओ च दर, बठैो।'' च दर बगल क कुस खींचकर बठै गया तो डॉ. साहब बआुजी से बोल,े''हाँ, हाँ, बात करो, अरेयेतो घर केआदमी ह। इनकेबारेम सधुा नेनह ंबताया तुह? येच दर ह हमारे िश य, बहुत अ छा लड़का है।'' ''अ छा, अ छा, भइया बइठो, तूतो एक दन अउर आयेर ो, बी. ए. म पढ़त हौ सधुा केसगंे।'' ''नह ंबआुजी, म रसच कर रहा हूँ।''

''वाह, बहुत खुशी भई तोको देख के-हाँतो सकुुल!'' वेअपनेभाई सेबोलीं, '' फर यह ठ क होई। बनती का बयाह टाल देव और अगर ई लड़का ठ क हुई जाय तो सधुा का बयाह अषाढ़-भर म िनपटाय देव। अब अ छा नाह ं लागत। ठूँठ ऐसी ब टया, सनूी माँग िलयेछररावा करत हैएहर-ओहर!'' बआु बोलीं। ''हाँ, येतो ठ क है।'' डॉ. शुला बोल,े''म खुद सधुा का याह अब टालना नह ंचाहता। बी.ए. तक क िश ा काफ हैवरना फर हमार जाित म तो लड़केनह ंिमलत।ेलेकन येजो लड़कातमु बता रह हो तो घर वालेकुछ एतराज तो नह ंकरगे! और फर, लड़का तो हम अ छा लगा लेकन घरवालेपता नह ंकैसेह ?'' ''अरेतो घरवालन सेका करैका हैतोको। लड़कातो अलग है, अपन-ेआप पढ़ रहा हैऔर लड़क अलग र हए, न सास का डर, न ननद क ध स। हम प ी मगँवायेदेइत ह , िमलवाय लवे।'' डॉ. शुला नेवीकृित म िसर हला दया। ''तो फर बनती केबारेम का कहत हौ? अगहन तक टाल दया जाय न?'' बआुजी नेपछूा। ''हाँहाँ,'' डॉ. शुला नेवचार म डूबेहुए कहा। ''तो फर तमु ह इन जूता पटऊ, बड़न कूसेकह दयौ; आय केकल सेहमर छाती पर मगँू दलत ह।'' बआुजी नेच दर क ओर कसी को िनदिशत करतेहुए कहा और चली गयीं। च दर चुपचाप बठैा था। जाने या सोच रहा था। शायद कुछ भी नह ंसोच रहा था! मगर फर भी अपनी वचार- शूयता म ह खोया हुआ-सा था। जब डॉ. शुला उसक ओर मड़ुेऔर कहा, ''च दर!'' तो वह एकदम सेच क गया और जानेकस दिुनया सेलौट आया। डॉ. साहब नेकहा, ''अरे! तुहार तबीयत खराब है या?'' ''नह ंतो।'' एक फ क हँसी हँसकर च दर नेकहा। ''तो महेनत बहुत कर रहेहोगे। कतनेअ याय िलखेअपनी थीिसस के? अब माच ख म हो रहा हैऔर परूा अ लै तुह थीिसस टाइप करानेम लगेगा और मई म हर हालत म जमा हो जानी चा हए।'' ''जी, हाँ।'' बड़ेथके वर म च दर नेकहा, ''दस अ याय हो ह गयेह। तीन अ याय और होनेह और अनुम णका बनानी है। अ लै केपहलेस ाह तक ख म हो ह जायगेा। अब िसवा थीिसस केऔर करना ह या है?'' एक बहुत गहर साँस लतेेहुए च दर नेकहा और माथा थामकर बठै गया। ''कुछ तबीयत ठ क नह ंहैतुहार । चाय बनवा लो! लेकन सधुा तो हैनह ं, न महरा जन है।'' डॉ टर साहब बोल।े अरेसधुा, सधुा केनाम पर च दर च क गया। हाँ, अभी वह सधुा केह बारेम सोच रहा था, जब बआुजी बात कर रह थीं। या सोच रहा था। देखो...उसनेयाद करनेक कोिशश क पर कुछ याद ह नह ंआ रहा था, पता नह ं या सोच रहा था। पता नह ंथा...कुछ सधुा के याह क बात हो रह थी शायद। या बात हो रह थी...? ''कहाँगयी हैसधुा?'' च दर नेपछूा।

''आज शायद सा बर साहब केयहाँगयी है। उनक लड़क उनकेसाथ पढ़ती हैन, वह ंगयी हैबनती केसाथ।'' ''अब इ तहान को कतनेदन रह गयेह, अभी घमूना ब द नह ंहुआ उनका?'' ''नह ं, दन-भर पढ़नेकेबाद उठ थी, उसकेभी िसर म दद था, चली गयी। घमू- फर लनेेदो बचेार को, अब तो जा ह रह है।'' डॉ. शुला बोल,ेएक हँसी केसाथ जसम आँसूछलकेपड़तेथे। ''कहाँतय हो रह हैसधुा क शाद ?'' ''बरेली म। अब उसक बआु नेबताया है। ज मप ी द हैिमलवा लो, फर तमु जरा सब बात देख लनेा। तमु तो थीिसस म य त रहोगे; म जाकर लड़का देख आऊँगा। फर मई केबाद जुलाई तक सधुा का याह कर दगे। तुह डॉ टरेट िमल जाए और यिूनविसट म जगह िमल जाए। बस हम तो लड़का-लड़क दोन सेफा रग।'' डॉ. शुला बहुत अजब-सेवर म बोल।े च दर चुप रहा। '' बनती को देखा तमुन?े'' थोड़ देर बाद डॉ टर नेपछूा। ''हाँ, वह न जनको डाँट रह थींयेउस दन?'' ''हाँ, वह । उसकेससरुआयेहुए ह; उनसेकहना हैक अब शाद अगहन-पसू केिलए टाल द। पहलेसधुा क हो जाए, वह बड़ हैऔर हम चाहतेह क बनती को तब तक वदषुी का दसूरा खंड भी दला द। आओ, उनसेबात कर ल अभी।'' डॉ. शुला उठे। च दर भी उठा। और उसनेअ दर जाकर बनती केससरुके द य दशन ा कय।ेवेएक पलगँ पर बठैेथे, लेकन वह अभागा पलगँ उनकेउदर केह िलए नाकाफ था। वेिचत पड़ेथेऔर साँस लतेेथेतो परुाण क उस कथा का दशन हो जाता था क धीरे-धीरेपृवी का गोला वाराह केमहँु पर कैसेऊपर उठा होगा। िसर पर छोटे-छोटेबाल और कमर म एक अँगोछेकेअलावा सारा शर र दग बर। सबुह शायद गंगा नहाकर आयेथे य क पटेतक म च दन, रोली लगी हुई थी। डॉ. शुला जाकर बगल म कुस पर बठै गय;े''क हए दबुजेी, कुछ जलपान कया आपन?े'' पलगँ चरमराया। उस वशाल मांस- पडंम एक भडूोल आया और दबुजेी जलपान क याद करकेग द होकर हँसने लगे। एक थलथलाहट हुई और कमरेक द वार िगरत-ेिगरतेबचीं। दबुजेी नेउठकर बठैनेक कोिशश क लेकन असफल होकर लटेे-ह -लटेेकहा, ''हो-हो! सब आपक कृपा है। खूब छककेिम ा न पाया। अब जरा सरबत-उरबत कुछ िमलैतो जो कुछ पटेम जलन है, सो शा त होय!'' उ ह नेपटेपर अपना हाथ फेरतेहुए कहा। ''अ छा, अरेभाई जरा शरबत बना देना।'' डॉ. शुला नेदरवाजेक ओट म खड़ हुई बआुजी सेकहा। बआुजी क आवाज सनुाई पड़ , ''बाप रे! ई ढाई मन क लहास कम-स-ेकम मसक-भर केशरबत तो उलीचैलैह।'' च दर को हँसी आ गयी, डॉ. शुला मसुकरानेलगेलेकन दबुजेी के द य मखुमडंल पर कह ं ोभ या उ लास क रेखा तक न

आयी। च दर मन-ह -मन सोचनेलगा, ाचीन काल के ान द िस महा मा ऐसेह होतेह गे। बआु एक िगलास म शरबत लेआयीं। दबुजेी काँख-काँखकर उठेऔर एक साँस म शरबत गलेसेनीचेउतारकर, िगलास नीचेरख दया। ''दबुजेी, एक ाथना हैआपस!े'' डॉ. शुला नेहाथ जोडक़र बड़ेवनीत वर म कहा। ''नह ं! नह ं!'' बात काटकर दबुजेी बोल,े''बस अब हम कुछ न खाव। आप बहुत स कार कय।ेहम एह सेछक गय।ेआपको देखकेतो हम बड़ स नता भई। आप सचमचु द य पुष हौ! और फर आप तो लड़क केमामा हो, और बयाह-शाद म जो हैसो मामा का प देखा जाता है। ई तो भगवान ्ऐसा जोड़ िमलाइन ह क वरप अउर क याप दइुन केमामा बड़े ानी ह। आप ह तौन कािलज म परुफेसर और ओहर हमार सार-लड़काकेर मामा जौन ह तौन डाकघर म मशंुी ह, आपक करपा स।े'' दबुजेी नेगव सेकहा। च दर मसुकरानेलगा। ''अरेसो तो आपक न ता हैलेकन म सोच रहा हूँक गरिमय म अगर याह न रखकर जाड़ेम रखा जाए तो यादा अ छा होगा। तब तक आपकेस कार क हम कुछ तयैार भी कर लगे।'' डॉ. शुला बोल।े दबुजेी इसकेिलए तयैार नह ंथे। वेबड़ेअचरज म भरकर उनक ओर देखनेलगे। लेकन बहुत कहन-ेसनुनेके बाद अ त म वेइस शत पर राजी हुए क अगहन तक हर तीज- यौहार पर लड़केकेिलए कुरता-धोती का कपड़ा और यारह-बारह पयेनजराना जाएगा और अगहन म अगर याह हो रहा हैतो सास-ननद और जठानी केिलए गरम साड़ जाएगी और जब-जब दबुजेी गंगा नहाने यागराज आएगँेतो उनका रोचना एक थाल, कपड़ेऔर एक वणम डत जौ सेहोगा। जब डॉ. शुला नेयह वीकार कर िलया तो दबुजेी नेउठकर अपना झालम-झोला कुरता गलेम अटकाया और अपनी गठर हाथ म उठाकर बोल-े ''अ छा तो अब आ ा देव, हम चली अब, और ई पया लड़क को दैदयो, अब बात प क है।'' और अपनी टट सेउ ह नेएक मड़ुा-मड़ुाया तले लगा हुआ पाँच पयेका नोट िनकाला और डॉ. साहब को देदया। ''च दर एक ताँगा कर दो, दबुजेी को। अ छा, आओ हम भी चल।'' जब येलोग लौटेतो बआुजी एक थैली सेकुछ धर-िनकाल रह थीं। डॉ. शुला नेनोट बआुजी को देतेहुए कहा, ''लो, येदेगयेतुहारेसमधी जी, लड़क को।'' पाँच का नोट देखा तो बआुजी सलुग उठ ं-''न गहना न गुरया, बयाह प का कर गयेई कागज केटुकड़ेस।े अपना-आप तो सोना और पया और कपड़ा सब लीलैको तयैार और देत केदाँई पटे पराता हैजूता- पटऊ का। अरे राम चाह तो जमदतूई लहास क बोट -बोट करकेरामजी केकुन को खलइह।'' च दर हँसी केमारेपागल हो गया। बआुजी नेथैली का महँुबाँधा और बोलीं, ''अब हन तक बनती का पता न,ैऔर ऊ तरुकन-मलेछन केहयाँकुछ खा-पी िल हस तो फर हमरेहयाँगुजारा ना ह ना ओका। बड़ आजाद हुई गयी हैसधुा क सह पाय के। आवैदेव, आज हम भ ा उता रत ह ।''

डॉ. शुला अपनेकमरेम चलेगय।ेच दर को यास लगी थी। उसनेबआुजी सेएक िगलास पानी माँगा। बआु ने एक िगलास म पानी दया और बोलीं, ''बठै केपयो बटेा; बठै के। कुछ खाय का देई?'' ''नह ं, बआुजी!'' बआु बठैकर हँिसया सेकटहल छ लनेलगींऔर च दर पानी पीता हुआ सोचनेलगा, बआुजी सभी सेइतनी मीठ बात करती ह तो आ खर बनती सेह इतनी कटु य ह? इतनेम अ दर च पल क आहट सनुाई पड़ । च दर नेदेखा, सधुा और बनती आ गयी थीं। सधुा अपनी च पल उतारकर अपनेकमरेम चली गयी और बनती आँगन म आयी। बआुजी केपास आकर बोली, ''लाओ, हम तरकार काट द।'' ''चल हट ओहर। प हलेनहाव जाय के। कुछ खाय तो नैरहयो। ए ी देर कहाँघमूित रहयो ? हम खूब अ छ तरह जािनत ह तँूहमार नाक कटाइन केरहबो। पतुरयन केढँग सीखेह!'' बनती चुप। एक तीखी वदेना का भाव उसकेमहँु पर आया। उसनेआँख झुका लीं। रोयी नह ंऔर चुपचाप िसर झुकायेहुए सधुा केकमरेम चली गयी। च दर ण-भर खड़ा रहा। फर सधुा केपास गया। सधुा केकमरेम अकेलेबनती खाट पर पड़ थी-औधंेमहँु, त कया म महँु िछपाय।ेच दर को जानेकैसा लगा। उसकेमन म बहेद तरस आ रहा था इस बचेार लड़क केिलए, जसके पता ह ह नह ंऔर जसे ताडऩा केिसवा कुछ नह ंिमला। च दर को बहुत ह ममता लग रह थी इस अभािगनी केिलए। वह सोचनेलगा, कतना अ तर हैदोन बहन म। एक बचपन सेह कतनेअसीम दलुार, वभैव और नहे म पली हैऔर दसूर ताड़ना और कतनेअपमान म पली और वह भी अपनी ह सगी माँसेजो दिुनया भर के ित नहेमयी है, अपनी लड़क को छोडक़र। वह कुस पर बठैकर चुपचाप यह सोचनेलगा-अब आगेभी इस बचेार को या सखु िमलगेा। ससरुाल कैसी है, यह तो ससरुको देखकर ह मालमू देता है। इतनेम सधुा कपड़ेबदलकर हाथ म कताब िलय,ेउसेपढ़ती हुई, उसी म डूबी हुई आयी और खाट पर बठै गयी। ''अरे! बनती! कैसेपड़ हो? अ छा तमु हो च दर! बनती! उठो!'' उसनेबनती क पीठ पर हाथ रखकर कहा। बनती, जो अभी तक िनचे पड़ थी, सधुा केममता-भरे पश पर फूट-फूटकर रो पड़ । तो सधुा नेच दर से कहा, '' या हुआ बनती रानी को।'' और बनती भी जोर सेिसस कयाँभरनेलगी तो सधुा नेच दर सेकहा, ''कुछ तमुनेकहा होगा। चौदह दन बाद आयेऔर आतेह लगे लानेउस।ेकुछ कहा होगा तमुन!ेसमझ गय।ेघमूनेके िलए उसेभी डाँटा होगा। हम साफ-साफ बतायेदेतेह च दर, हम तुहार डाँट सह लतेेह इसकेयेमतलब नह ंक अब तमु इस बचेार पर भी रोब झाडऩेलगो। इससेकभी कुछ कहा तो अ छ बात नह ंहोगी!'' ''तुहारेदमाग का कोई परुजा ढ ला हो गया है या? म य कहूँगा बनती को कुछ!'' ''बस फर यह बात तुहार बरु लगती है।'' सधुा बगड़कर बोली, '' य नह ंकहोगेबनती को कुछ? जब हम कहतेहो तो उसे य नह ंकहोगे? हम तुहारेअपनेह तो या वो तुहार अपनी नह ंहै?''

च दर हँस पड़ा-''सो य नह ंहै, लेकन तुहारेसाथ न ऐसेिनबाह, न वसैेिनबाह।'' ''येसब कुछ हम नह ंजानत!े य रो रह हैयह?'' सधुा बोली धमक के वर म। ''बआुजी नेकुछ कहा था।'' च दर बोला। ''अरेतो उसकेिलए या रोना! इतना समझाया तझुेक उनक तो आदत है। हँसकर टाल दया कर। चल उठ! हँसती हैक गुदगुदाऊँ।'' सधुा नेगुदगुदातेहुए कहा। बनती नेउसका हाथ पकडक़र झटक दया और फर िसस कयाँ भरनेलगी। ''नह ंमानगेी त?ू'' सधुा बोली, ''अभी ठ क करती हूँतझुेम। च दर, पकड़ो तो इसका हाथ।'' च दर चुप रहा। ''नह ंउठे। उठो, तमु इसका हाथ पकड़ लो तो हम अभी इसेहँसातेह।'' सधुा नेच दर का हाथ पकडक़र बनती क ओर बढ़तेहुए कहा। च दर नेअपना हाथ खींच िलया और बोला, ''वह तो रो रह हैऔर तमु बजाय समझानेके उसेपरेशान कर रह हो।'' ''अरेजानतेहो, य रो रह है? अभी इसकेससरुआयेथे, वो बहुत मोटेथेतो येसोच रह हैकह ं'वो' भी मोटे ह !'' सधुा नेफर उसक गरदन गुदगुदाकर कहा। बनती हँस पड़ । सधुा उछल पड़ -''लो, येतो हँस पड़ , अब रोओगी?'' अब फर सधुा नेगुदगुदाना शु कया। बनती पहलेतो हँसी सेलोट गयी फर प ला सभँालतेहुए बोली, ''िछह, द द ! वो बठैेह क नह ं!'' और उठकर बाहर जानेलगी। ''कहाँचली?'' सधुा नेपछूा। ''जा रह हूँनहान।े'' बनती प लूसेिसर ढँकतेहुए चल द । '' य , मनेतरेा बदन छूदया इसिलए?'' सधुा हँसकर बोली, ''ऐ च दर, वो गेसूका छोटा भाई हैन-हसरत, मने उसेछूिलया तो फौरन उसनेजाकर अपना महँु साबनु सेधोया और अ मीजान सेबोला, ''मरेा महँु जूठा हो गया।'' और आज हमनेगेसूकेअ तर िमयाँको देखा। बड़ेमजेकेह। म तो गेसूसेबात करती रह लेकन बनती और फूल नेबहुत छेड़ा उ ह। बचेारेघबरा गय।ेफूल बहुत चुलबलुी हैऔर बड़ नाजुक है। बड़ बोलनेवाली हैऔर बनती और फूल का खूब जोड़ िमला। दोन खूब गाती ह।'' '' बनती गाती भी है?'' च दर नेपछूा, ''हमनेतो रोतेह देखा।'' ''अरेबहुत अ छा गाती है। इसनेएक गाँव का गाना बहुत अ छा गाया था।...अरेदेखो वह सब बतानेम हम तमु पर गुसा होना तो भलू ह गय।ेकहाँरहेचार रोज? बोलो, बताओ ज द स।े'' '' य त थेसधुा, अब थीिसस तीन ह सा िलख गयी। इधर हम लगातार पाँच घटंेसेबठैकर िलखतेथे!'' च दर

बोला। ''पाँच घटंे!'' सधुा बोली, ''दधू आजकल पीतेहो क नह ं?'' ''हाँ-हाँ, तीन गाय खर द ली ह...।'' च दर बोला। ''नह ं, मजाक नह ं, कुछ खात-ेपीतेरहना, कह ंतबीयत खराब हुई तो अब हमारा इ तहान है, पड़े-पड़ेम खी मारोगेऔर अब हम देखनेभी नह ंआ सकगे।'' ''अब कतना कोस बाक हैतुहारा?'' ''कोस तो ख म था हमारा। कुछ क ठनाइयाँथींसो पछलेदो-तीन ह तेम मा टर साहब नेबता द थीं। अब दोहराना है। लेकन बनती का इ तहान मई म है, उसेभी तो पढ़ाना है।'' ''अ छा, अब चल हम।'' ''अरेबठैो! फर जानेकैदन बाद आओगे। आज बआु तो चली जाएगँी फर कल सेयह ंपढ़ो न। तमुनेबनती के ससरुको देखा था?'' ''हाँ, देखा था!'' च दर उनक परेखा याद करकेहँस पड़ा-''बाप रे! परूेटक थेवेतो।'' '' बनती क ननद सेतुहारा याह करवा द। करोगे?'' सधुा बोली, ''लड़क इतनी ह मोट है। उसेकभी डाँट लनेा तो देखगेतुहार ह मत।'' याह! एकदम सेच दर को याद आ गया। अभी बआु नेबात क थी सधुा के याह क । तब उसेकैसा लगा था? कैसा लगा था? उसका दमाग घमू गया था। लगा जैसेएक असहनीय दद था या या था-जो उसक नस-नस को तोड़ गया। एकदम...। '' या हुआ, च दर? अरेचुप य हो गय?े डर गयेमोट लड़क केनाम स?े'' सधुा नेच दर का क धा पकड़कर झकझोरतेहुए कहा। च दर एक फ क हँसी हँसकर रह गया और चुपचाप सधुा क ओर देखनेलगा। सधुा च दर क िनगाह सेसहम गयी। च दर क िनगाह म जाने या था, एक अजब-सा पथराया सनूापन, एक जानेकस दद क अमगंल छाया, एक जानेकस पीड़ा क मकू आवाज, एक जानेकैसी पघलती हुई-सी उदासी और वह भी गहर , जानेकतनी गहर ...और च दर था क एकटक देखता जा रहा था, एकटक अपलक...। सधुा को जानेकैसा लगा। येअपना च दर तो नह ं, येअपनेच दर क िनगाह तो नह ंहै। च दर तो ऐसी िनगाह स,ेइस तरह अपलक तो सधुा को कभी नह ंदेखता था। नह ं, यह च दर क िनगाह तो नह ं। इस िनगाह म न शरारत है, न डाँट न दलुार और न क णा। इसम कुछ ऐसा हैजससेसधुा ब कुल प रिचत नह ं, जो आज च दर म पहली बार दखाई पड़ रहा है। सधुा को जैसा डर लगनेलगा, जैसेवह काँप उठ । नह ं, यह कोई दसूरा च दर हैजो उसेइस तरह देख रहा है। यह कोई अप रिचत है, कोई अजनबी, कसी दसूरेदेश का कोई य जो सधुा को...

''च दर, च दर! तुह या हो गया!'' सधुा क आवाज मारेडर केकाँप रह थी, उसका महँुपीला पड़ गया, उसक साँस बठैनेलगी थी-''च दर...'' और जब उसका कुछ बस न चला तो उसक आँख म आँसूछलक आय।े हाथ पर एक गरम-गरम बदँू आकर पड़तेह च दर च क गया। ''अरेसधुी! रोओ मत। नह ंपगली। हमार तबीयत कुछ ठ क नह ंहै, एक िगलास पानी तो लेआओ।'' सधुा अब भी काँप रह थी। च दर क आवाज म अभी भी वह मलुायिमयत नह ंआ पायी थी। वह पानी लानेके िलए उठ । ''नह ं, तमु कह ंजाओ मत, तमु बठैो यह ं।'' उसनेउसक हथेली अपनेमाथेपर रखकर जोर सेअपनेहाथ म दबा ली और कहा, ''सधुा!...'' '' य , च दर!'' ''कुछ नह ं!'' च दर नेआवाज द लेकन लगता था वह आवाज च दर क नह ंथी। न जानेकहाँसेआ रह थी... '' या िसर म दद है? बनती, एक िगलास पानी लाओ ज द स।े'' सधुा नेआवाज द । च दर जैसेपहल-ेसा हो गया-''अरे! अभी मझुे या हो गया था? तमु या बात कर रह थीं सधुा?'' ''पता नह ंतुह अभी या हो गया था?'' सधुा नेघबरायी हुई गौरेया क तरह सहमकर कहा। च दर व थ हो गया-''कुछ नह ंसधुा! म ठ क हूँ। म तो यँूह तुह परेशान करनेकेिलए चुप था।'' उसने हँसकर कहा। ''हाँ, चलो रहनेदो। तुहारेिसर म दद हैज र स।े'' सधुा बोली। बनती पानी लकेर आ गयी थी। ''लो, पानी पयो!'' ''नह ं, हम कुछ नह ंचा हए।'' च दर बोला। '' बनती, जरा पनेबाम लेजाओ।'' सधुा नेिगलास जबद ती उसकेमहँु सेलगातेहुए कहा। बनती पनेबाम ले आयी थी-'' बनती, तूजरा लगा देइनके। अरेखड़ य है? कुस केपीछेखड़ होकर माथेपर जरा ह क उँगली से लगा दे।'' बनती आ ाकार लड़क क तरह आगेबढ़ , लेकन फर हचक गयी। कसी अजनबी लड़केकेमाथेपर कैसे पनेबाम लगा दे। ''चलती हैया अभी काट केगाड़ दगेयह ं। मोटक कह ंक ! खा-खाकर मटुानी है। जरा-सा काम नह ं होता।'' बनती नेहारकर पनेबाम लगाया। च दर नेउसका हाथ हटा दया तो सधुा नेबनती केहाथ सेपनेबाम लकेर कहा, ''आओ, हम लगा द।'' बनती पनेबाम देकर चली गयी तो च दर बोला, ''अब बताओ, या बात कर रह थीं? हाँ,

बनती के याह क । येउनकेससरुतो बहुत ह भ ेमालमू पड़ रहेथे। या देखकर याह कर रह हो तमु लोग?'' ''पता नह ं या देखकर याह कर रह ह बआु। असल म बआु पता नह ं य बनती सेइतनी िचढ़ती ह, वह तो चाहती ह कसी तरह सेबोझ टलेिसर स।ेलेकन च दर, यह बनती बड़ खुश है। यह तो चाहती हैकसी तरह ज द सेयाह हो!'' सधुा मसुकराती हुई बोली। ''अ छा, यह खुद याह करना चाहती है!'' च दर नेता जुब सेपछूा। ''और या? अपनेससरुक खूब सवेा कर रह थी सबुह। ब क पापा तो कह रहेथेक अभी यह बी.ए. कर ले तब याह करो। हमसेपापा नेकहा इससेपछूनेको। हमनेपछूा तो कहनेलगी बी.ए. करकेभी वह करना होगा तो बकेार टालनेसे या फायदा। फर पापा हमसेबोलेक कुछ वजह सेअगहन म याह होगा, तो बड़ेता जुब सेबोली, ''अगहन म?'' ''सधुी, तमु जानती हो अगहन म उसका याह य टल रहा है? पहलेतुहारा याह होगा।'' च दर हँसकर बोला। वह पणूतया शा त था और उसके वर म कम-स-ेकम बाहर िसवा चुहल केऔर कुछ भी न था। ''मरेा याह, मरेा याह!'' आँख फाडक़र, महँुफैलाकर, हाथ नचाकर, कुतहूल-भरेआ य सेसधुा नेकहा और फर हँस पड़ , खूब हँसी-''कौन करेगा मरेा याह? बआु? पापा करनेह नह ंदगे। हमारेबना पापा का काम ह नह ंचलगेा और बाबसूाहब, तमु कस पर आकर रंग जमाओगे? याह मरेा। हूँ!'' सधुा नेमहँु बचकाकर उपेा सेकहा। ''नह ंसधुा, म ग भीरता सेकह रहा हूँ। तीन-चार मह नेकेअ दर तुहारा याह हो जाएगा।'' च दर उसेव ास दलातेहुए बोला। ''अरेजाओ!'' सधुा नेहँसतेहुए कहा, ''ऐसेहम तुहारेबनानेम आ जाएँतो हो चुका।'' ''अ छा जानेदो। तुहारेपास कोई पो टकाड है? लाओ जरा इस कॉमरेड को एक िच ठ तो िलख द।'' च दर बात बदलकर बोला। पता नह ं य इस वषय क बात केचलनेम उसेकैसा लगता था। ''कौन कामरेड?'' सधुा नेपछूा, ''तमु भी क यिुन ट हो गये या?'' ''नह ं, जी, वो बरेली का सोशिल ट लड़का कैलाश जसनेझगड़ेम हम लोग क जान बचायी थी। हमनेतुह बताया नह ंथा सब क सा उस झगड़ेका, जब हम और पापा बाहर गयेथे!'' ''हाँ-हाँ, बताया था। उसेज र खत िलख दो!'' सधुा नेपो टकाड देतेहुए कहा, ''तुह पता मालमू है?'' च दर जब पो टकाड िलख रहा था तो सधुा नेकहा, ''सनुो, उसेिलख देना क पापा क सधुा, पापा क जान बचानेकेएवज म आपक बहुत कृत हैऔर कभी अगर हो सकेतो आप इलाहाबाद ज र आए!ँ...िलख दया?'' ''हाँ!'' च दर नेपो टकाड जेब म रखतेहुए कहा। ''च दर, हम भी सोशिल ट पाट केमेबर ह गे!'' सधुा नेमचलतेहुए कहा।

''चलो, अब तुह नयी सनक सवार हुई। तमु या समझ रह हो सोशिल ट पाट को। राजनीितक पाट हैवह। यह मत करना क सोशिल ट पाट म जाओ और लौटकर आओ तो पापा सेकहो-अरेहम तो समझेपाट है, वहाँचाय- पानी िमलगेा। वहाँतो सब लोग लेचर देतेह।'' ''धत,्हम कोई बवेकूफ ह या?'' सधुा नेबगडक़र कहा। ''नह ं, सो तो तमु बुसागर हो, लेकन लड़ कय क राजनीितक बु कुछ ऐसी ह होती है!'' च दर बोला। ''अ छा रहनेदो। लड़ कयाँन ह तो काम ह न चल।े'' सधुा नेकहा। ''अ छा, सधुा! आज कुछ पयेदोगी। हमारेपास पसैेखतम ह। और िसनमेा देखना हैजरा।'' च दर नेबहुत दलुार सेकहा। ''हाँ-हाँ, ज र दगेतुह। मतलबी कह ंके!'' सधुा बोली, ''अभी-अभी तमु लड़ कय क बरुाई कर रहेथेन?'' ''तो तमु और लड़ कय म सेथोड़ेह हो। तमु तो हमार सधुा हो। सधुा महान।'' सधुा पघल गयी-''अ छा, कतना लोगे?'' अपनी पॉकेट म सेपाँच पयेका नोट िनकालकर बोली, ''इससेकाम चल जाएगा?'' ''हाँ-हाँ, आज जरा सोच रहेह प मी केयहाँजाए,ँतब सकेड शो जाए।ँ'' ''प मी रानी केयहाँजाओगे। समझ गय,ेतभी तमुनेचाचाजी सेयाह करनेसेइनकार कर दया। लेकन प मी तमुसेतीन साल बड़ है। लोग या कहगे?'' सधुा नेछेड़ा। ''ऊँह, तो या हुआ जी! सब य ह चलता है!'' च दर हँसकर टाल गया। ''तो फर खाना यह ंखायेजाओ और कार लतेेजाओ।'' सधुा नेकहा। ''मगँाओ!'' च दर नेपलगँ पर परैफैलातेहुए कहा। खाना आ गया। और जब तक च दर खाता रहा, सधुा सामने बठै रह और बनती दौड़-दौडक़र पड़ू लाती रह । जब च दर प मी केबगँलेपर पहुँचा तो शाम होनेम देर नह ंथी। लेकन अभी फ ट शो शु होनेम देर थी। प मी गुलाब केबीच म टहल रह थी और बट एक अ छा-सा सटूपहनेलॉन पर बठैा था और घटुन पर ठुड रखे कुछ सोच- वचार म पड़ा था। बट केचेहरेपर का पीलापन भी कुछ कम था। वह देखनेसेइतना भयकंर नह ंमालमू पड़ता था। लेकन उसक आँख का पागलपन अभी वसैा ह था और खूबसरूत सटू पहननेपर भी उसका हाल यह था क एक कालर अ दर था और एक बाहर। प मी नेच दर को आतेदेखा तो खल गयी। ''ह लो, कपरू! या हाल है। पता नह ं य आज सबुह सेमरेा मन कह रहा था क आज मरेेिम ज र आएगँे। और शाम केव तमु तो इतनेअ छेलगतेहो जैसेवह जगमग िसतारा जसेदेखकर क स नेअपनी आ खर सानटे िलखी थी।'' प मी नेएक गुलाब तोड़ा और च दर केकोट केबटन होल

म लगा दया। च दर नेबड़ेभय सेबट क ओर देखा क कह ंगुलाब को तोड़ेजानेपर वह फर च दर क गरदन पर सवार न हो जाए। लेकन बट कुछ बोला नह ं। बट नेिसफ हाथ उठाकर अिभवादन कया और फर बठैकर सोचने लगा। प मी नेकहा, ''आओ, अ दर चल।'' और च दर और प मी दोन ाइंग म म बठै गय।े च दर नेकहा, ''म तो डर रहा था क तमुनेगुलाब तोडक़र मझुेदया तो कह ंबट नाराज न हो जाए, लेकन वह कुछ बोला नह ं।'' प मी मसुकरायी, ''हाँ, अब वह कुछ कहता नह ंऔर पता नह ं य गुलाब सेउसक तबीयत भी इधर हट गयी। अब वह उतनी परवाह भी नह ंकरता।'' '' य ?'' च दर नेता जुब सेपछूा। ''पता नह ं य । मरे तो समझ म यह आता हैक उसका जतना व ास अपनी प ी पर था वह इधर धीरे-धीरे हट गया और इधर वह यह व ास करनेलगा हैक सचमचु वह साजट को यार करती थी। इसिलए उसनेफूल को यार करना छोड़ दया।'' ''अ छा! लेकन यह हुआ कैस?े उसनेतो अपनेमन म इतना गहरा व ास जमा रखा था क म समझता था क मरतेदम तक उसका पागलपन न छूटेगा।'' च दर नेकहा। ''नह ं, बात यह हुई क तुहारेजानेकेदो-तीन दन बाद मनेएक दन सोचा क मान िलया जाए अगर मरेेऔर बट के वचार म मतभदे हैतो इसका मतलब यह नह ंक म उसकेगुलाब चुराकर उसेमानिसक पीड़ा पहुँचाऊँऔर उसका पागलपन और बढ़ाऊँ। बु और तक केअलावा भावना और सहानभुिूत का भी एक मह व मझुेलगा और मने फूल चुराना छोड़ दया। दो-तीन दन वह बहेद खुश रहा, बहेद खुश और मझुेभी बड़ा स तोष हुआ क लो अब बट शायद ठ क हो जाए। लेकन तीसरेदन सहसा उसनेअपना खुरपा फक दया, कई गुलाब केपौधेउखाड़कर फक दये और मझुसेबोला, ''अब तो कोई फूल भी नह ंचुराता, अब भी वह इन फूल म नह ंिमलती। वह ज र साजट केसाथ जाती है। वह मझुेयार नह ंकरती, हरिगज नह ंकरती, और वह रोनेलगा।'' बस उसी दन सेवह गुलाब केपास नह ंजाता और आजकल बहुत अ छे-अ छेसटूपहनकर घमूता हैऔर कहता है- या म साजट सेकम सुदर हूँ! और इधर वह ब कुल पागल हो गया है। पता नह ंकससेअपन-ेआप लड़ता रहता है।'' च दर नेता जुब सेिसर हलाया। ''हाँ, मझुेबड़ा द:ुख हुआ!'' प मी बोली, ''मनेतो, हमदद क क फूल चुरानेब द कर दयेऔर उसका नतीजा यह हुआ। पता नह ं य कपरू, मझुेलगता हैक हमदद करना इस दिुनया म सबसेबड़ा पाप है। आदमी सेहमदद कभी नह ंकरनी चा हए।'' च दर नेसहसा अपनी घड़ देखी। '' य , अभी तमु नह ंजा सकत।ेबठैो और बात सनुो, इसिलए मनेतुह दो त बनाया है। आज दो-तीन साल हो

गय,ेमनेकसी सेबात ह नह ंक ह और तमुसेइसिलए मनैेिम ता क हैक बात क ँगी।'' च दर हँसा, ''आपनेमरेा अ छा उपयोग ढूँढ़ िनकाला।'' ''नह ं, उपयोग नह ं, कपरू! तमु मझुेगलत न समझना। जंदगी नेमझुेइतनी बात बतायी ह और यह कताब जो म इधर पढ़नेलगी हूँ, इ ह नेमझुेइतनी बात बतायी ह क म चाहती हूँक उन पर बातचीत करकेअपनेमन का बोझ ह का कर ल।ँूऔर तुह बठैकर सनुनी ह गी सभी बात!'' ''हाँ, म तयैार हूँलेकन कताब पढ़नी कब सेशु कर द ंतमुन?े'' च दर नेता जुब सेपछूा। ''अभी उस दन म डॉ. शुला केयहाँगयी। उनक लड़क सेमालमू हुआ क तुह क वता पस द है। मनेसोचा, उसी पर बात क ँऔर मनेक वताएँपढ़नी शु कर द ं।'' ''अ छा, तो देखता हूँक दो-तीन ह तेम भाई और बहन दोन म कुछ प रवतन आ गय।े'' प मी कुछ बोली नह ं, हँस द । ''म सोचता हूँप मी क आज िसनमेा देखनेजाऊँ। कार हैसाथ म, अभी प ह िमनट बाक है। चाहो तो चलो।'' ''िसनमेा! आज चार साल सेम कह ंनह ंगयी हूँ। िसनमेा, हौजी, बाल डांस-सभी जगह जाना ब द कर दया है मन।ेमरेा दम घटुेगा हॉल केअ दर लेकन चलो देख, अभी भी कतनेह लोग वसैेह खुशी सेिसनमेा देखतेह गे।'' एक गहर साँस लकेर प मी बोली, ''बट को लेचलोगे?'' ''हाँ, हाँ! तो चलो उठो, फर देर हो जाएगी!'' च दर नेघड़ देखतेहुए कहा। प मी फौरन अ दर केकमरेम गयी और एक जाजट का ह का भरूा गाउन पहनकर आयी। इस रंग सेवह जैसे िनखर आयी। च दर नेउसक ओर देखा, तो वह लजा गयी और बोली, ''इस तरह सेमत देखो। म जानती हूँयह मरेा सबसेअ छा गाउन है। इसम कुछ अ छ लगती होऊँगी। चलो!'' और आकर उसनेबतेक लफु सेउसकेक धेपर हाथ रख दया। दोन बाहर आयेतो बट लॉन पर घमू रहा था। उसकेपरैलडख़ड़ा रहेथे। लेकन वह बड़ शान सेसीना ताने था। ''बट , आज िम टर कपरूमझुेिसनमेा दखलानेजा रहेह। तमु भी चलोगे?'' ''हूँ!'' बट नेिसर हलाकर जोर सेकहा, ''िसनमेा जाऊँगा? कभी नह ं। भलूकर भी नह ं। तमुनेमझुे या समझा है? म िसनमेा जाऊँगा?'' धीरे-धीरेउसका वर म द पड़ गया...''अगर िसनमेा म वह साजट केसाथ िमल गयी तो! तो म उसका गला घ ट दँगूा।'' अपनेगलेको दबातेहुए बट बोला और इतनी जोर सेदबा दया अपना गला क आँख लाल हो गयींऔर खाँसनेलगा। खाँसी ब द हुई तो बोला, ''वह मझुेयार नह ंकरती। वह साजट को यार करती है। वह उसी केसाथ घमूती है। अगर वह िमल जाएगी िसनमेा म तो उसक ह या कर डालगँूा, तो पिुलस आएगी और खेल ख म हो जाएगा। तमु जानतेहो िम. कपरू, म उससेकतना नफरत करता हूँ...और...और लेकन नह ं, कौन जानता है म नफरत करता होऊँऔर वह मझुे...कुछ समझ म नह ंआता, म पागल हूँ, ओफ।'' और वह िसर थामकर बठै गया।

प मी नेच दर का हाथ पकडक़र कहा, ''चलो, यहाँरहनेसेउसका दमाग और खराब होगा। आओ!'' दोन जाकर कार म बठैे। च दर खुद ह ाइव कर रहा था। प मी बोली, ''बहुत दन सेमनेकार नह ं ाइव क है। लाओ, आज ाइव क ँ।'' प मी नेट य रंग अपनेहाथ म लेली। च दर इधर बठै गया। थोड़ देर म कार र जट केसामनेजा पहुँची। िच था-'सलेामी, ेयर शी डांड' ('सलेामी, जहाँवह नाची थी')। च दर नेटकट िलया और दोन ऊपर बठै गय।ेअभी यजू र ल चल रह थी। सहसा प मी नेकहा, ''कपरू, सलेामी क कहानी मालमू है?'' ''न! या यह कोई उप यास है!'' च दर नेपछूा। ''नह ं, यह बाइ बल क एक कहानी है। असल म एक राजा था हैराद। उसनेअपनेभाई को मारकर उसक प ी से अपनी शाद कर ली। उसक भतीजी थी सलेामी, जो बहुत सुदर थी और बहुत अ छा नाचती थी। हैराद उस पर मुध हो गया। लेकन सलेामी एक पगै बर पर मुध थी। पगै बर नेसलेामी के णय को ठुकरा दया। एक बार हैराद ने सलेामी सेकहा क य द तमु नाचो तो म तुह कुछ देसकता हूँ। सलेामी नाची और परुकार म उसनेअपना अपमान करनेवालेपगै बर का िसर माँगा! हैराद वचनब था। उसनेपगै बर का िसर तो देदया लेकन बाद म इस भय से क कह ंरा य पर कोई आप न आय,ेउसनेसलेामी को भी मरवा डाला।'' च दर को यह कहानी बहुत अ छ लगी। तब तो िच बहुत ह अ छा होगा, उसनेसोचा। सधुा क पर ा है वरना सधुा को भी दखला देता। लेकन या निैतकता हैइन पा ा य देश क क अपनी भतीजी पर ह हैराद मुध हो गया। उसनेकहा प मी स-े ''लेकन हैराद अपनी भतीजी पर ह मुध हो गया?'' ''तो या हुआ! यह तो सेस हैिम. कपरू। सेस कतनी भयकंर श शाली भावना है, यह भी शायद तमु नह ं समझत।ेअभी तुहार आँख म बड़ा भोलापन है। तमु प क आग केससंार सेदरूमालमू पड़तेहो, लेकन शायद दो-एक साल बाद तमु भी जानोगेक यह कतनी भयकंर चीज है। आदमी केसामनेव -बवे , नाता- र ता, मयादा- अमयादा कुछ भी नह ंरह जाता। वह अपनी भतीजी पर मो हत हुआ तो या? मनेतो तुहारेयहाँएक पौरा णक कहानी पढ़ थी क महादेव अपनी लड़क सर वती पर मुध हो गय।े'' ''महादेव नह ं, ा।'' च दर बोला। ''हाँ, हाँ, ाï। म भलू गयी थी। तो यह तो सेस है। आदमी को कहाँलेजाता है, यह अ दाज भी नह ंकया जा सकता। तमु तो अभी ब च क तरह भोलेहो और ई र न करेतमु कभी इस यालेका शरबत चखो। म भी तो तुहार इसी प व ता को यार करती हूँ।'' प मी नेच दर क ओर देखकर कहा, ''तमु जानतेहो, मनेतलाक य दया? मरेा पित मझुेबहुत चाहता था लेकन म ववा हत जीवन केवासना मक पहलूसेघबरा उठ ! मझुेलगनेलगा, म आदमी नह ंहूँबस मांस का लोथड़ा हूँजसेमरेा पित जब चाहेमसल दे, जब चाहे...ऊब गयी थी! एक गहर नफरत

थी मरेेमन म। तमु आयेतो तमु बड़ेप व लगे। तमुनेआतेह णय-याचना नह ंक । तुहार आँख म भखू नह ं थी। हमदद थी, नहे था, कोमलता थी, िन छलता थी। मझुेतमु काफ अ छेलगे। तमुनेमझुेअपनी प व ता देकर जला दया...।'' च दर को एक अजब-सा गौरव अनभुव हुआ और प मी के ित एक बहुत ऊँची आदर-भावना। उसनेप व ता देकर जला दया। सहसा च दर केमन म आया-लेकन यह उसके य व क प व ता कसक द हुई है। सधुा क ह न! उसी नेतो उसेिसखाया हैक पुष और नार म कतनेऊँचेस ब ध रह सकतेह। '' या सोच रहेहो?'' प मी नेअपना हाथ कपरूक गोद म रख दया। कपरूिसहर गया लेकन िश ाचारवश उसनेअपना हाथ प मी केक धेपर रख दया। प मी नेदो ण केबाद अपना हाथ हटा िलया और बोली, ''कपरू, म सोच रह हूँअगर यह ववाह संथा हट जाए तो कतना अ छा हो। पुष और नार म िम ता हो। बौ क िम ता और दल क हमदद । यह नह ंक आदमी औरत को वासना क यास बझुाने का याला समझेऔर औरत आदमी को अपना मािलक। असल म बधँनेकेबाद ह , पता नह ं य स ब ध म वकृित आ जाती है। म तो देखती हूँक णय ववाह भी होतेह तो वह असफल हो जातेह य क ववाह केपहलेआदमी औरत को ऊँची िनगाह सेदेखता है, हमदद और यार क चीज समझता हैऔर ववाह केबाद िसफ वासना क । म तो मे म भी ववाह-प म नह ंहूँऔर मे म भी वासना का वरोध करती हूँ।'' ''लेकन हर लड़क ऐसी थोड़ेह होती है!'' च दर बोला, ''तुह वासना सेनफरत हो लेकन हर एक को तो नह ं।'' ''हर एक को होती है। लड़ कयाँबस वासना क झलक, एक ह क िसहरन, एक गुदगुद पस द करती ह। बस, उसी केपीछेउन पर चाहेजो दोष लगाया जाय लेकन अिधकतर लड़ कयाँकम वासना य होती ह, लड़के यादा।'' िच शु हो गया। वह चुप हो गयी। लेकन थोड़ ह देर म मालमू हुआ क िच मा मक था। वह बाइ बल क सलेामी क कहानी नह ंथी। वह एक अमेरकन नतक और कुछ डाकुओंक कहानी थी। प मी ऊब गयी। अब जब डाकूपकडक़र सलेामी को एक जंगल म लेगयेतो इंटरवल हो गया और प मी नेकहा, ''अब चलो, आधेह िच से तबीयत ऊब गयी।'' दोन उठ खड़ेहुए और नीचेआय।े ''कपरू, अबक बार तमु ाइव करो!'' प मी बोली। ''नह ं, तुह ं ाइव करो'' कपरूबोला। ''कहाँचल,'' प मी नेटाट करतेहुए कहा। ''जहाँचाहो।'' कपरूनेवचार म डूबेहुए कहा। प मी नेगाड़ खूब तजे चला द । सड़क साफ थीं। प मी का कालर फहरानेलगा और उड़कर च दर केगाल पर थप कयाँलगानेलगा। च दर दरू खसक गया। प मी नेच दर क ओर देखा और बजाय कालर ठ क करनेके, गले

का एक बटन और खोल दया और च दर को पास खींच िलया। च दर चुपचाप बठै गया। प मी नेएक हाथ ट य रंग पर रखा और एक हाथ सेच दर का हाथ पकड़ेरह जैसेवह च दर को दरूनह ंजानेदेगी। च दर केबदन म एक ह क िसहरन नाच रह थी। य ? शायद इसिलए क हवा ठंड थी या शायद इसिलए क...उसनेप मी का हाथ अपने हाथ सेहटानेक कोिशश क । प मी नेहाथ खींच िलया और कार केअ दर क बजली जला द । कपरूचुपचाप ठाकुर साहब केबारेम सोचता रहा। कार चलती रह । जब च दर का यान टूटा तो उसनेदेखा कार मकैफसन लके केपास क है। दोन उतरे। बीच म सड़क थी, इधर नीचेउतरकर झील और उधर गंगा बह रह थी। आठ बजा होगा। रात हो गयी थी, चार तरफ स नाटा था। बस िसतार क ह क रोशनी थी। मकैफसन झील काफ सखू गयी थी। कनारे- कनारेमछली मारनेकेमचान बनेथे। ''इधर आओ!'' प मी बोली। और दोन नीचेउतरकर मचान पर जा बठैे। पानी का धरातल शा त था। िसफ कह ं- कह ंमछिलय केउछलनेया साँस लनेेसेपानी हल जाता था। पास ह केनीवाँगाँव म कसी केयहाँशायद शाद थी जो शहनाई का ह का वर हवाओंक तरंग पर हलता-डुलता हुआ आ रहा था। दोन चुपचाप थे। थोड़ देर बाद प मी नेकहा, ''कपरू, चुपचाप रहो, कुछ बात मत करना। उधर देखो पानी म। िसतार का ित ब ब देख रहेहो। चुपे सेसनुो, येिसतारे या बात कर रहेह।'' प मी िसतार क ओर देखनेलगी। कपरूचुपचाप प मी क ओर देखता रहा। थोड़ देर बाद सहसा प मी एक बाँस सेटककर बठै गयी। उसकेगलेकेदो बटन खुलेहुए थे। और उसम से प क चाँदनी फट पड़ती थी। प मी आँख ब द कयेबठै थी। च दर नेउसक ओर देखा और फर जाने य उससेदेखा नह ंगया। वह िसतार क ओर देखनेलगा। प मी केकालर केबीच सेिसतारेटूट-टूटकर बरस रहेथे। सहसा प मी नेआँख खोल द ंऔर च दर का क धा पकडक़र बोली, '' कतना अ छा हो अगर आदमी हमशेा स ब ध म एक दरू रखे। सेस न आनेदे। येिसतारेह, देखो कतनेनजद क ह। करोड़ बरस सेसाथ ह, लेकन कभी भी एक दसूरेको छूतेतक नह ं, तभी तो सगं िनभ जाता है।'' सहसा उसक आवाज म जाने या छलक आया क च दर जैसेमदहोश हो गया-बोली वह-''बस ऐसा हो क आदमी अपने मेा पद को िनकटतम लाकर छोड़ दे, उसको बाँधेन। कुछ ऐसा हो क होठ केपास खींचकर छोड़ दे।'' और प मी नेच दर का माथा होठ तक लाकर छोड़ दया। उसक गरम-गरम साँस च दर क पलक पर बरस गयीं...''कुछ ऐसा हो क आदमी उसेअपने दय तक खींचकर फर हटा दे।'' और च दर को प मी नेअपनी बाँह म घरेकर अपनेव तक खींचकर छोड़ दया। व क गरमाई च दर के रोम-रोम म सलुग उठ , वह बचेैन हो उठा। उसकेमन म आया क वह अभी यहाँसेचला जाए। जानेकैसा लग रहा था उस।ेसहसा प मी बोली, ''लेकन नह ं, हम लोग िम ह और कपरू, तमु बहुत प व हो, िन कलकं हो और तमु प व रहोगे। म जतनी दरू, जतना अ तर, जतनी प व ता पस द करती हूँ, वह तमुम हैऔर हम लोग म हमशेा िनभगेी जैसेइन िसतार म हमशेा िनभती आयी है।'' च दर चुपचाप सोचनेलगा, ''वह प व है। एकाएक उसका मन जैसेऊबनेलगा। जैसेएक वहग िशशुघबराकर अपनेनीड़ केिलए तड़प उठता है, वसैेह वह इस व तड़प उठा सधुा केपास जानेकेिलए- य ? पता नह ं य ? यहाँकुछ हैजो उसेजकड़ लनेा चाहता है। वह या करे?

प मी उठ , वह भी उठा। बाँस का मचान हला। लहर म हरकत हुई। करोड़ साल सेअलग और प व िसतारे हल,ेआपसेम टकरायेऔर चूर-चूर होकर बखर गय।े रात-भर च दर को ठ क सेनींद नह ंआयी। अब गरमी काफ पड़नेलगी थी। एक सतूी चादर से यादा नह ं ओढ़ा जाता था और च दर नेवह भी ओढ़ना छोड़ दया था, लेकन उस दन रात को अ सर एक अजब-सी कँपकँपी उसेझकझोर जाती थी और वह कसकर चादर लपटे लतेा था, फर जब उसक तबीयत घटुनेलगती तो वह उठ बठैता था। उसेरात-भर नींद नह ंआयी; बार-बार झपक आयी और लगा क खड़क केबाहर सनुसान अँधेरेम सेअजब-सी आवाज आती ह और नािगन बनकर उसक साँस म िलपट जाती ह। वह परेशान हो उठता है, इतनेम फर कह ंसे कोई मीठ सतरंगी सगंीत क लहर आती हैऔर उसेसचेत और सजग कर जाती है। एक बार उसनेदेखा क सधुा और गेसूकह ंचली जा रह ह। उसनेगेसूको कभी नह ंदेखा था लेकन उसनेसपनेम गेसूको पहचान िलया। लेकन गेसूतो प मी क तरह गाउन पहनेहुए थी! फर देखा बनती रो रह हैऔर इतना बलख- बलखकर रो रह हैक तबीयत घबरा जाए। घर म कोई नह ंहै। च दर समझ नह ंपाता क वह या करे! अकेलेघर म एक अप रिचत लड़क सेबोलनेका साहस भी नह ंहोता उसका। कसी तरह ह मत करकेवह समीप पहुँचा तो देखा अरे, यह तो सधुा है। सधुा लटु हुई-सी मालमू पड़ती है। वह बहुत ह मत करकेसधुा केपास बठै गया। उसनेसोचा, सधुा को आ ासन दे लेकन उसकेहाथ पर जानेकैसेसकुुमार जंजीर कसी हुई ह। उसकेमहँु पर कसी क साँस का भार है। वह िन े है। उसका मन अकुला उठा। वह च ककर जाग गया तो देखा वह पसीनेसेतर है। वह उठकर टहलनेलगा। वह जाग गया था लेकन फर भी उसका मन व थ नह ंथा। कमरेम ह टहलत-ेटहलतेवह फर लटे गया। लगा जैसेसामने क खुली खडक़ सेसकैड़ तारेटूट-टूटकर भयानक तजेी सेआ रहेह और उसकेमाथेसेटकरा-टकराकर चूर-चूर हो जातेह। एक ममा तक पीड़ा उसक नस म खौल उठ और लगा जैसेउसकेअंग-अंग म िचताएँधधक रह ह। जैस-ेतसैेरात कट और सबुह उठतेह वह यिूनविसट जानेसेपहलेसधुा केयहाँगया। सधुा लटे हुई पढ़ रह थी। डॉ. शुला पजूा कर रहेथे। बआुजी शायद रात को चली गयी थीं। य क बनती बठै तरकार काट रह थी और खुश नजर आ रह थी। च दर सधुा केकमरेम गया। देखतेह सधुा मसुकरा पड़ । बोली कुछ नह ंलेकन आतेह उसनेच दर केअंग-अंग को अपनी िनगाह के वागत म समटेिलया। च दर सधुा केपरै केपास बठै गया। ''कल रात को तमु कार लकेर वापस आयेतो चुपेसेचलेगय!े'' सधुा बोली, ''कहो, कल कौन-सा खेल देखा?'' ''कल बहुत बड़ा खेल देखा; बहुत बड़ा खेल, सधुी!'' च दर याकुलता सेबोला, ''अरेजानेकैसा मन हो गया क रात-भर नींद ह नह ंआयी।'' और उसकेबाद च दर सब बता गया। कैसेवह िसनमेा गया। उसनेप मी से या बात क । उसकेबाद कैसेकार पर उसनेच दर को पास खींच िलया। कैसेवेलोग मकैफसन झील गयेऔर वहाँप मी पागल हो गयी। फर कैसेच दर को एकदम सधुा क याद आनेलगी और फर रात-भर च दर को कैस-ेकैसेसपने आय।ेसधुा बहुत ग भीर होकर महँुम पेसल दबायेकुहनी टेकेबस चुपचाप सनुती रह और अ त म बोली, ''तो तमु इतनेपरेशान य हो गय,ेच दर! उसनेतो अ छ ह बात कह थी। यह तो अ छा ह हैक येसब जसेतमु सेस कहतेहो, यह स ब ध म न आए। उसम या बरुाई है? या तमु चाहतेहो क सेस आए?'' ''कभी नह ं, तमु मझुेअभी तक नह ंसमझ पायीं।'' ''तो ठ क है, तमु भी नह ंचाहतेक सेस आए और वह भी नह ंचाहती क सेस आए तो झगड़ा या है? य ,

तमु उदास य हो इतन?े'' सधुा बोली बड़ेअचरज स।े ''लेकन उसका यवहार कैसा है?'' च दर नेसधुा सेकहा। ''ठ क तो है। उसनेबता दया तुह क इतना अ तर होना चा हए। समझ गय।ेतमु लालची आदमी, चाहतेहोगे यह भी अ तर न रहे! इसीिलए तमु उदास हो गय,ेिछह!'' ह ठ म मसुकराहट और आँख म शरारत क झलक िछपाते हुए सधुा बोली। ''तमु तो मजाक करनेलगीं।'' च दर बोला। सधुा िसफ च दर क ओर देखकर मसुकराती रह । च दर सामनेलगी हुई तसवीर क ओर देखता रहा। फर उसनेसधुा केकबतूर -जैसेउजलेमासमू न हेपरैअपनेहाथ म लेिलयेऔर भरायी हुई आवाज म बोला, ''सधुा, तमु कभी हम पर व ास न हार बठैना।'' सधुा नेकताब ब द करकेरख द और उठकर बठै गयी। उसनेच दर केदोन हाथ अपनेहाथ म लकेर कहा, ''पागल कह ंके! हम कहतेहो, अभी सधुा म बचपन हैऔर तमुम या है! वाह रेछुईमईुकेफूल! कसी नेहाथ पकड़ िलया, कसी नेबदन छूिलया तो घबरा गय!ेतमुसेअ छ लड़ कयाँहोती ह।'' सधुा नेउसकेदोन हाथ झकझोरतेहुए कहा। ''नह ंसधुी, तमु नह ंसमझतीं। मरे जंदगी म एक ह व ास क च टान है। वह हो तमु। म जानता हूँक कतनेह जल- लय ह लेकन तुहारेसहारेम हमशेा ऊपर रहूँगा। तमु मझुेडूबनेनह ंदोगी। तुहारेह सहारेम लहर सेखेल भी सकता हूँ। लेकन तुहारा व ास अगर कभी हला तो म कन अँधेर गहराइय म डूब जाऊँगा, यह कभी म सोच नह ंपाता।'' च दर नेबड़ेकातर वर म कहा। सधुा बहुत ग भीर हो गयी। ण-भर वह च दर केचेहरेक ओर देखती रह , फर च दर केमाथेपर झूलती हुई एक लट को ठ क करती हुई बोली, ''च दर, और म कसके व ास पर चल रह हूँ, बोलो! लेकन मनेतो कभी नह ं कहा क च दर अपना व ास मत हारना! और या कहूँ। मझुेअपनेच दर पर परूा व ास है। मरतेदम तक व ास रहेगा। फर तुहारा मन इतना डगमगा य गया? बरु बात हैन?'' च दर नेसधुा केक धेपर अपना िसर रख दया। सधुा नेउसका हाथ लकेर कहा, ''लाओ, यहाँछुआ था प मी नेतुह!'' और उसका हाथ होठ तक लेगयी। च दर काँप गया, आज सधुा को यह या हो गया है। लेकन ह ठ तक हाथ लेजाकर झाड़न-ेफँूकनवेाल क तरह सधुा नेफँूककर कहा, ''जाओ, तुहारेहाथ सेप मी के पश का जहर उतर गया। अब तो ठ क हो गय!ेप व हो गय!ेछू-म तर!'' च दर हँस पड़ा। उसका मन शा त हो गया। सधुा म जादूथा। सचमचु जादूथा। बनती चाय लेआयी। दो याल।े सधुा बोली, ''अपनेिलए भी लाओ।'' बनती नेिसर हलाया। सधुा नेच दर क ओर देखकर कहा, ''येपगली जाने य तमुसेझपती है?'' ''झपती कहाँहूँ?'' बनती नेितवाद कया और याला भी लेआयी और जमीन पर बठै गयी। सधुा नेयाला महँु

सेलगाया और बोली, ''च दर, तमुनेप मी को गलत समझा है। प मी बहुत अ छ लड़क है। तमुसेबड़ भी हैऔर तमुसे यादा समझदार, और उसी तरह यवहार भी करती है। तमु अगर कुछ सोचतेहो तो गलत सोचतेहो। मरेा मतलब समझ गयेन।'' ''जी हाँ, गुआनीजी, अ छ तरह स!े'' च दर नेहाथ जोडक़र वन ता सेकहा। बनती हँस पड़ और उसक चाय छलक गयी। नीचेरखी हुई च दर क जर दार पशेावर स डल भीग गयी। बनती नेझुककर एक अँगोछेसेउसेप छना चाहा तो सधुा िच ला उठ -''हाँ-हाँ, छुओ मत। कह ंइनक स डल भी बाद म आकेन रोनेलगे। सनु बनती, एक लड़क नेकल इ ह छूिलया तो आप आज उदास थे। अभी तमु स डल छुओ तो कह ंजाकेकोतावली म रपट न कर द।'' च दर हँस पड़ा। और उसका मन धुलकर ऐसेिनखर गया जैसेशरद का नीलाभ आकाश। ''अब प मी केयहाँकब जाओगे?'' सधुा नेशरारत-भर मसुकराहट सेपछूा। ''कल जाऊँगा! ठाकुर साहब प मी केहाथ अपनी कार बचे रहेह तो कागज पर द तखत करना है।'' च दर ने कहा, ''अब म िनडर हूँ। कहो बनती, तुहारेससरुका या कोई खत नह ंआया।'' बनती झप गयी। च दर चल दया। थोड़ दरूजाकर फर मड़ुा और बोला, ''अ छा सधुा, आज तक जो काम हो बता दो फर एक मह नेतक मझुसे कोई मतलब नह ं। हम थीिसस परू करगे। समझीं?'' ''समझे!'' हाथ पटककर सधुा बोली। सचमचु डेढ़ मह नेतक च दर को होश नह ंरहा क कहाँ या हो रहा है। बस रया रोज सधुा और बनती को पढ़ानेआता रहा, सधुा और बनती दोन ह का इ तहान ख म हो गया। प मी दो बार सधुा और च दर सेिमलने आयी लेकन च दर एक बार भी उसकेयहाँनह ंगया। िम ा का एक खत बरेली सेआया लेकन च दर नेउसका भी जवाब नह ंदया। डॉ टर साहब नेअपनी पुतक केदो अ याय िलख डालेलेकन उसनेएक दन भी बहस नह ंक । बनती उसेबराबर चाय, दधू, ना ता, शरबत और खरबजूा देती रह लेकन च दर नेएक बार भी उसकेससरुका नाम लकेर नह ंिचढ़ाया। सधुा या करती है, कहाँजाती है, च दर से या कहती है, च दर को कोई होश नह ं, बस उसका पने, उसकेकागज, टड म क मजे और च दर हैक आ खर थीिसस परू करकेह माना। 7 मई को जब उसनेथीिसस का आ खर प ना िलखकर परूा कया और स तोष क साँस ली तो देखा क शाम केपाँच बजेह, सायबान म अभी परदा पड़ा हैलेकन धूप उतार पर हैऔर लूब द हो गयी है। उसक कुस केपीछे एक चटाई बछायेहुए सधुा बठै है। गूो का अधपढ़ा हुआ उप यास बगल म खुला हुआ औधंा पड़ा हैऔर आप च दर क एक मोट -सी इकनॉिम स क कताब खोलेउस पर कलम सेकुछ गोदा-गोद कर रह है। ''सधुा!'' एक गहर साँस लकेर अँगड़ाई लतेेहुए च दर नेकहा, ''लो, आज आ खरकार जान छूट । बस, अब दो- तीन मह नेम माबदौलत डॉ टर बन जाएगँे!''

सधुा अपनेकाय म य त। च दर ने या कहा, यह सनुकर भी गुम। च दर नेहाथ बढ़ाकर चोट झटक द । ''हाय रे! हम नह ंअ छा लगता, च दर!'' सधुा बगडक़र बोली, ''तुहारेकाम केबीच म कोई बोलता हैतो बगड़ जाते हो और हमारा काम थोड़ेह मह वपणू है!'' कहकर सधुा फर पने लकेर गोदनेलगी। ''आ खर कौन-सा उपिनषद िलख रह ह आप? जरा देख तो!'' च दर नेकताब खींच ली। टा जग क इकनॉिम स क कताब म एक परूेप नेपर सधुा नेएक ब ली बनायी थी और अगर िनगाह जरा चूक जाए तो आप कह नह ं सकतेथेयह चौरासी लाख योिनय म सेकस योिन का जीव है, लेकन चँूक सधुा कह रह हैक यह ब ली है, इसिलए मानना होगा क यह ब ली ह है। च दर नेसधुा क बाँह पकडक़र कहा, ''उठ! आलसी कह ंक , चल उठा येपोथा! चलकेपापा केपरैछूआए?ँ'' सधुा चुपचाप उठ और आ ाकार लड़क क तरह मोट फाइल उठा ली। दरवाजेतक पहुँचकर क गयी और च दर केक धेपर फाइल टकाकर बोली, ''ऐ च दर, तो स ची अब तमु डॉ टर हो जाओगे?'' ''और या?'' ''आहा!'' कहकर जो सधुा उछली तो फाइल हाथ सेखसक और सभी प नेजमीन पर। च दर झ ला गया। उसनेगुसेसेलाल होकर एक घसँूा सधुा को मार दया। ''अरेराम रे!'' सधुा नेपीठ सीधी करतेहुए कहा, ''बड़ेपरोपकार हो डॉ टर च दर कपरू! हम बना थीिसस िलखेड ी देद ! लेकन बहुत जोर क थी!'' च दर हँस पड़ा। खैर दोन पापा केपास गय।ेवेभी िलखकर ह उठेथेऔर शरबत पी रहेथे। च दर नेजाकर कहा, ''परू हो गयी।'' और झुककर परैछूिलय।ेउ ह नेच दर को सीनेसेलगाकर कहा, ''बस बटेा, अब तुहार तप या परू हो गयी। अब जुलाई सेयिूनविसट म ज र आ जाओगेतमु!'' सधुा नेपोथा कोच पर रख दया और अपनेपरैबढ़ाकर खड़ हो गयी। ''ये या?'' पापा नेपछूा। ''हमारेपरैनह ंछुएगँे या?'' सधुा नेग भीरता सेकहा। ''चल पगली! बहुत बदतमीज होती जा रह है!'' पापा नेकृम गुसेसेकहा, ''च दर! बहुत िसर चढ़ हो गयी है। जरा दबाकर रखा करो। तमुसेछोट हैक नह ं?'' ''अ छा पापा, अब आज िमठाई िमलनी चा हए।'' सधुा बोली, ''च दर नेथीिसस ख म क है?'' ''ज र, ज र बटे!'' डॉ टर शुला नेजेब सेदस का नोट िनकालकर देदया, ''जाओ, िमठाई मगँवाकर खाओ तमु लोग।'' सधुा हाथ म नोट िलयेउछलतेहुए टड म म आयी, पीछे-पीछेच दर। सधुा क गयी और अपनेमन म हसाब लगातेहुए बोली, ''दस पयेप ड ऊन। एक प ड म आठ ल छ । छह ल छ म एक शाल। बाक बची दो ल छ ।

दो ल छ म एक वटेर। बस एक बनती का वटेर, एक हमारा शाल।'' च दर का माथा ठनका। अब िमठाई क उ मीद नह ं। फर भी कोिशश करनी चा हए। ''सधुा, अभी सेशाल का या करोगी? अभी तो बहुत गरमी है!'' च दर बोला।

''अबक जाड़ेम तुहारा याह होगा तो आ खर हम लोग नयी-नयी चीज का इ तजाम कर न। अब डॉ टर हुए, अब डॉ टरनी आएगँी!'' सधुा बोली। खैर, बहुत मनान-ेबहलान-ेफुसलानेपर सधुा िमठाई मगँवानेको राजी हुई। जब नौकर िमठाई लनेेचला गया तो च दर नेचार ओर देखकर पछूा, ''कहाँगयी बनती? उसेभी बलुाओ क अकेल-ेअकेलेखा लोगी!'' ''वह पढ़ रह हैमा टर साहब स!े'' '' य ? इ तहान तो ख म हो गया, अब या पढ़ रह है?'' च दर नेपछूा। '' वदषुी का दसूरा ख ड तो देरह हैन िसत बर म!'' सधुा बोली। ''अ छा, बलुाओ बस रया को भी!'' च दर बोला। ''अ छा, िमठाई आनेदो।'' सधुा नेकहा और फाइल क ओर देखकर कहा, ''मझुेइस क ब त पर बहुत गुसा आ रहा है।'' '' य ?'' ''इसक वजह सेतमु डेढ़ मह नेसीधेसेबोलेतक नह ं। इ तहान वालेदन सबुह-सबुह तुह हाथ जोडऩेआयी तो तमुनेिसर पर हाथ भी नह ंरखा!'' सधुा नेिशकायत के वर म कहा। ''तो अब आशीवाद देद। अब तो ख म हुई थीिसस। अब जतना चाहो बात कर लो। थीिसस न िलखतेतो फर तुहारेच दर को उपािध कहाँसेिमलती?'' च दर नेदलुार सेकहा। ''तो फर क वोकेशन पर तुहार गाउन हम पहनकर फोटो खंचाएगँे!'' सधुा मचलकर बोली। इतनेम नौकर िमठाई लेआया। ''जाओ, बनतीजी को बलुा लाओ।'' च दर नेकहा। बनती आयी। ''तमु पढ़ चुक !'' च दर नेपछूा। ''अभी नह ं।'' बनती बोली। ''अ छा, अब आज पढ़ाई ब द करो, उ ह भी बलुा लाओ। िमठाई खाई जाए।'' च दर नेकहा। ''अ छा!'' कहकर बनती जो मड़ु तो सधुा बोली, ''अरेलालिचन! येतो पछू लेक िमठाई काहेक है?'' ''मझुेमालमू है!'' बनती मसुकराती हुई बोली, ''उनकेयहाँआज गयेह गे, प मी केयहाँफर आज कुछ उस दन जैसी बात हुई होगी।'' सधुा हँस पड़ । च दर झप गया। बनती चली गयी बस रया को बलुान।े

''अब तो येतमुसेबोलनेलगी!'' सधुा नेकहा। ''हाँ, यह हैबड़ सशुील लड़क और बहुत शा त। हम बहुत अ छ लगती है। बोलना तो जैसेआता ह नह ंइस।े'' ''हाँ, लेकन अब खूब सीख रह है। इसक गु िमली हैगेस।ूहमसेभी यादा गेसूसेपटनेलगी हैइसक । दोन याह करनेजा रह ह और दोन उसी क बात करती ह जब िमलती ह तब।'' सधुा बोली। ''और क वता भी करती हैयह, तमु एक बार कह रह थीं?'' च दर नेपछूा। ''नह ंजी, असल म एक बड़ सुदर-सी नोट-बकु थी, उसम यह जाने या िलखती थी? हम नह ंदखाती थी। बाद म हमनेदेखा क एक डायर है। उसम धोबी का हसाब िलखती थी।'' ''तो क वता नह ंिलखतीं! ता जुब है, वरना सोलह बरस केबाद मे करकेक वता करना तो लड़ कय का फैशन हो गया है, उतना ह यापक जतना उलटा प ला ओढ़ना।'' च दर बोला। ''चला तुहारा नार -परुाण!'' सधुा बगड़ । िमठाई खानेवालेआय।ेआगे-आगेबनती, पीछे-पीछे बस रया। अिभवादन केबाद बस रया बठै गया। ''कहो बस रया, तुहार िश या कैसी है?'' ''बस अ तीय।'' क व बस रया नेिसर हलाकर कहा। सधुा मसुकरा द , च दर क ओर देखकर। ''और येसधुा कैसी थी?'' ''बस अ तीय।'' बस रया नेउसी तरह कहा। ''दोन अ तीय ह? साथ ह !'' च दर नेपछूा। सधुा और बनती दोन हँस द ं। बस रया नह ंसमझ पाया क उसनेकौन-सी हँसनेक बात क थी और जब नह ं समझ पाया तो पहलेिसर खुजलानेलगा फर खुद भी हँस पड़ा। उसक हँसी पर तीन और हँस पड़े। ''च दर, मा टर साहब भी खूब ह। एक दन बनती को महादेवी क वह क वता पढ़ा रहेथे, ' वरह का जलजात जीवन,' तो पढ़त-ेपढ़तेबड़ गहर साँस भरनेलगे।'' च दर और बनती दोन हँस पड़े। बस रया पहलेतो खुद हँसा फर बोला, ''हाँभाई, या कर, कपरू! तमु तो जानतेह हो, म बहुत भावकु हूँ। मझुसेबदा त नह ंहोता। एक बार तो ऐसा हुआ क पच म एक क ण रस का गीत आ गया अथ िलखनेको। म उसेपढ़तेह इतना यिथत हो गया क उठकर टहलनेलगा। ोफेसर समझेम दसूरे लड़केक कॉपी देखनेउठा हूँ, तो उ ह नेिनकाल दया। मझुेिनकालेजानेका अफसोस नह ंहुआ लेकन क वता पढक़र मझुेबहुत लाई आयी।'' सधुा हँसी तो च दर नेआँख केइशारेसेमना कया और ग भीरता सेबोला, ''हाँभाई बस रया, सो तो सह है ह । तमु इतनेभावकु न हो तो इतना अ छा कैसेिलख सकतेहो? तो तमुनेपचा छोड़ दया?''

''हाँ, म पच वगैरह क या परवाह करता हूँ? मरेेिलए इन सभी व तओुंका कुछ भी अथ नह ं। म भावना क उपासना करता हूँ। उस समय पर ा देनेक भावना से यादा सबल उस क वता क क ण भावना थी। और इस तरह म कतनी बार फेल हो चुका हूँ। मरेेसाथ वह पढ़ता था न ह रहर टंडन, वह अब ब ती कॉलजे का सपल है। एक मरेा सहपाठ था, वह रेडयो का ो ाम ए जी यूटव है...'' ''और एक तुहारा सहपाठ तो हमनेसनुा क असेबली का पीकर भी है!'' च दर बात काटकर बोला। सधुा फर हँस पड़ । बनती भी हँस पड़ । खैर िमठाई का भोग ार भ हुआ। बस रया कुछ तक लफु कर रहा था तो बनती बोली, ''खाइए, िमठाई तो वरह-रोग और भावकुता म बहुत वा य द होती है!'' ''अ छा, अब तो बनती का कंठ फूट िनकला! अपनेगुजी को बना रह है।'' च दर बोला। बस रया थोड़ देर बाद चला गया। ''अब मझुेएक पाट म जाना है।'' उसनेकहा। जब आ खर म एक रसगुला बच रहा तो बनती हाथ म लकेर बोली, ''कौन लगेा?'' आज पता नह ं य बनती बहुत खुश थी और बहुत बोल रह थी। च दर बोला, ''हम दो!'' सधुा बोली, ''हम!'' बनती नेएक बार च दर क ओर देखा, एक बार सधुा क ओर। च दर बोला, ''देख बनती हमार हैया सधुा क है।'' बनती नेझट रसगुला सधुा केमखु म रख दया और सधुा केिसर पर िसर रखकर बोली- ''हम अपनी द द केह!'' सधुा नेआधा रसगुला बनती को देदया तो बनती च दर को दखलाकर खातेहुए सधुा सेबोली, ''द द , येहम बहुत बनातेह, अब हम भी तुहार तरह बोलगेतो इनका दमाग ठ क हो जाएगा।'' ''हम-तमु दोन िमलकेइनका दमाग ठ क करगे?'' सधुा नेयार सेबनती को थपथपातेहुए कहा, ''अब हम त त रयाँधोकर रख द।'' और त त रयाँउठाकर चल द । ''पानी नह ंदोगी?'' च दर बोला। बनती पानी लेआयी और बोली, ''हम तो आपका इतना काम करतेह और आप जब देखो तब हम बनातेरहते ह। आपको या आन द आता हैहम बनानेम?'' च दर नेपल-भर बनती क ओर देखा और बोला, ''असल म बननेकेबाद जब तमु झप जाती हो तो...हाँऐसे ह ।'' बनती नेफर झपकर महँु िछपा िलया और लाज सेसकुचाकर इ वधूबन गयी। बनती देखन-ेसनुनेम बड़

अ छ थी। उसक गठन तो सधुा क तरह नह ंथी लेकन उसकेचेहरेपर एक फरोजी आभा थी जसम गुलाल के डोरेथे। आँख उसक बड़ -बड़ और पलक म इस तरह डोलती थींजैसेकसी सकुुमार सीपी म कोई बहुत बड़ा मोती डोल।ेझपती थी तो महँु पर साँझ मसुकरा उठती थी और गाल म फूल केकटोर जैसेदो छोटे-छोटेग ढो। और बनती केअंग-अंग म एक प क लहर थी जो नािगन क तरह लहराती थी और उसक आदत थी क बात करते समय अपनी गरदन जरा टेढ़ कर लतेी थी और अँगुिलय सेअपनेआँचल का छोर उमठेनेलगती थी। इस व च दर क बात पर झप गयी और उसी तरह आँचल केछोर को उमठेती हुई, मसुकान िछपाकर उसने ऐसी िनगाह सेच दर क ओर देखा जसम थोड़ लाज, थोड़ा गुसा, थोड़ स नता और थोड़ शरारत थी। च दर एकदम बोला उठा, ''अरेसधुा, सधुा, जरा बनती क आँख देखो इस व !'' ''आयी अभी।'' बगल केकमरेम त तर रखतेहुए सधुा बोली। ''बड़ेखराब ह आप?'' बनती बोली। ''हाँ, बनाओगी न आज सेहम? हमारा दमाग ठ क करोगी न? बहुत बोल रह थी, अब बताओ!'' ''बताएँ या? अभी तक हम बोलतेनह ंथेतभी न?'' ''अब अपनी ससरुाल म बोलना टुइयाँऐसी! वह ंतुहारेबोल पर र झगेलोग।'' च दर नेफर छेड़ा। ''िछह, राम-राम! येसब मजाक हमसेमत कया क जए। द द से य नह ंकहतेजनक अभी शाद होनेजा रह है।'' ''अभी उनक कहाँ, अभी तो तय भी नह ंहुई।'' ''तय ह सम झए, फोटो इनक उन लोग नेपस द कर ली। अ छा एक बात कह, मािनएगा!'' बनती बड़ेआ ह और द नता के वर म बोली। '' या?'' च दर नेआ य सेपछूा। बनती आज सहसा कतना बोलनेलगी है। बनती बोली, नीचेजमीन क ओर देखती हुई-''आप हमसेयाह केबारेम मजाक न कया क जए, हम अ छा नह ंलगता।'' ''ओहो, याह अ छा लगता हैलेकन उसकेबारेम मजाक नह ं। गुड़ खाया गुलगुलेसेपरहेज!'' ''हाँ, यह तो बात है।'' बनती सहसा ग भीर हो गयी-''आप समझतेह गेक म याह केिलए उ सकु हूँ, द द भी समझती ह; लेकन मरेा ह दल जानता हैक याह क बात सनुकर मझुेकैसा लगनेलगता है। लेकन फर भी मने याह करनेसेइनकार नह ंकया। खुद दौड़-दौडक़र उस दन दबुजेी क सवेा म लगी रह , इसिलए क आप देख चुके ह क माँका यवहार मझुसेकैसा है? आप यहाँइस प रवार को देखकर समझ नह ंसकतेक म वहाँकैसेरहती हूँ, कैसेमाँजी क बात बदा त करती हूँ, वह नरक हैमरेेिलए, माँक गोद नरक हैऔर म कसी तरह िनकल भागना चाहती हूँ। कुछ चैन तो िमलगेा!'' बनती क आँख म आँसूआ गयेऔर िससकती हुई बोली, ''लेकन आप या द द जब यह कहतेह, तो मझुेलगता हैक म कतनी नीच हूँ, कतनी पितत हूँक खुद अपनेयाह केिलए याकुल हूँ,

लेकन आप न कहा कर तो अ छा है!'' बनती को आँसओुंका तार बधँ गया था। सधुा बगल केकमरेसेसब कुछ सनु रह थी। आयी और च दर सेबोली, ''बहुत बरु बात है, च दर! बनती, य रो रह हो, रानी? बआु का वभाव ह ऐसा है, उससेहमशेा अपना दल दखुानेसे या लाभ?'' और पास जाकर उसको छाती सेलगाकर सधुा बोली, ''मरे राजदलुार ! अब रोना मत, ऐ!ंअ छा, हम लोग कभी मजाक नह ंकरगे! बस अब चुप हो जाओ, रानी ब टया क तरह जाओ महँुधो आओ।'' बनती चली गयी। च दर ल जत-सा बठैा था। ''लो, अब तुह भी लाई आ रह है या?'' सधुा नेबहुत दलुार सेकहा, ''तमु उससेससरुाल का मजाक मत कया करो। वह बहुत द:ुखी हैऔर बहुत कदर करती हैतुहार । और कसी क मजाक क बात और है। हम या तमु कहतेह तो उसेलग जाता है।'' ''अ छा, वो कह रह थी, तुहार फोटो उन लोग नेपस द कर ली है''-च दर नेबात बदलनेकेखयाल सेकहा। ''और या, कोई हमार श ल तुहार तरह हैक लोग नापस द कर द।'' सधुा अकड़कर बोली। ''नह ं, सच-सच बताओ?'' च दर नेपछूा। ''अरेजी,'' लापरवाह सेमहँु बचकाकर सधुा बोली, ''उनकेपस द करनेसे या होता है? म याह-उआह नह ं क ँगी। तमु इस फेर म न रहना क हम िनकाल दोगेयहाँस।े'' इतनेम बनती आ गयी। वह भी उदास थी। सधुा उठ और बनती को पकड़ लायी और ढकेलकर च दर केबगल म बठा दया। ''लो, च दर! अब इसेदलुार कर लो तो अभी गुरगुरानेलगे। ब ली कह ंक !'' सधुा नेउसेह क -सी चपत मारकर कहा। बनती का महँु अपनी हथेिलय म लकेर अपनेमहँु केपास लाकर आँख म आँख डालकर कहा, ''पगली कह ंक , आँसूका खजाना लटुाती फरती है।'' ''च दर!'' डॉ. शुला नेपकुारा और च दर उठकर चला गया। सधुा पर इन दन घमूना सवार था। सबुह हुई क च पल पहनी और गायब। गेस,ूकािमनी, भा, लीला शायद ह कोई लड़क बची होगी जसकेयहाँजाकर सधुा ऊधम न मचा आती हो, और चार सखु-द:ुख क बात न कर आती हो। बनती को घमूना कम पस द था, हाँजब कभी सधुा गेसूकेयहाँजाती थी तो बनती ज र जाती थी, उसेसधुा क सभी िम म गेसूसबसे यादा पस द थी। डॉ टर शुला के यरूो म छुट हो चुक थी पर वेसधुा का याह तय करनेक कोिशश कर रहेथे। इसिलए वह बाहर भी नह ंगयेथे। च दर डेढ़ मह नेतक लगातार महेनत करनेकेबाद पढ़ाई-िलखाई क ओर सेआराम कर रहा था और उसनेिन त कर िलया था क अब बरसात केपहलेवह कताब छुएगा नह ं। बड़ेआराम के दन कटतेथेउसके। सबुह उठकर साइ कल पर गंगा नहानेजाता था और वहाँअ सर ठाकुर साहब सेभी मलुाकात हो जाती थी। डॉ टर शुला नेभी कई दफेइरादा कया क वेगंगाजी चला कर लेकन एक तो उनसेदन म काम नह ंहोता था, शाम को वेघमूतेऔर सबुह उठकर कताब िलखतेथे।

एक दन सबुह िलख रहेथेक च दर आया और उनकेपरैछूकर बोला, '' ा तीय सरकार का वह परुकार कल शाम को आ गया!'' ''कौन-सा?'' ''वह जो उ र ा त म माता और िशशओुंक मृय-ुसंया पर मनेिनब ध िलखा था, उसी पर।'' ''तो या पदक आ गया?'' डॉ टर शुला नेकहा। ''जी,'' अपनी जेब म सेएक मखमली ड बा िनकालकर च दर नेदया। पदक बहुत सुदर था। जगमगाता हुआ वणपदक जसम ा तीय राजमुा अंकत थी। ''ई र तुह बहुत यश वी करेजीवन म।'' डॉ टर शुला नेपदक उसक कमीज म अपनेहाथ सेलगा दया, ''जाओ, अ दर सधुा को दखा आओ।'' च दर जानेलगा तो डॉ टर साहब नेबलुाया, ''अ छा, अब सधुा क शाद का इ तजाम करना है। हमसेतो कुछ होनेसेरहा, तुह ंको सब करना होगा। और सनुो, जेठ दशहरा को लड़केका भाई और माँदेखनेआ रह ह। और बहन भी आएगँी गाँव स।े'' ''अ छा?'' च दर बठै गया कुस पर और बोला, ''कहाँहैलड़का? या करता है?'' ''लड़का शाहजहाँपरुम है। घर केजमींदार ह येलोग। लड़का एम. ए. है। और अ छेवचार का है। उसनेिलखा हैक िसफ दस आदमी बारात म आएगँे, एक दन कगे। संकार केबाद चलेजाएगँे। िसवा लड़क केगहन-ेकपड़े और लड़केकेगहन-ेकपड़ केऔर कुछ भी नह ं वीकार करगे।'' ''अ छा, ा ण म तो ऐसा कुल नह ंिमलगेा।'' ''तभी तो! सधुा क क मत है, वरना तमु बनती केससरुको तो देख ह चुकेहो। अ छा जाओ, सधुा सेिमल आओ।'' वह सधुा केकमरेम आ गया। सधुा थी ह नह ं। वह आँगन म आया। देखा महरा जन खाना बना रह हैऔर बनती बरामदेम बरुादेक अँगीठ पर पको ड़याँबना रह है। ''आइए,'' बनती बोली, ''द द तो गयी ह गेसूको बलुान।ेआज गेसूक दावत है।...पीढ़ेपर बैठएगा, ली जए।'' एक पीढ़ा च दर क ओर बनती नेखसका दया। च दर बठै गया। बनती नेउसकेहाथ म मखमली ड बा देखा तो पछूा, ''यह या लाय?ेकुछ द द केिलए है या? यह तो अँगूठ मालमू पड़ती है।'' ''अँगूठ , वह या दाल म िमला केखाएगी! जंगली कह ंक ! उसे या तमीज हैअँगूठ पहननेक !'' ''हमार द द केिलए ऐसी बात क तो अ छा नह ंहोगा, हाँ!'' उसेबनती नेउसी तरह गरदन टेढ़ कर आँख डुलातेहुए धमकाया-''उ ह नह ंअँगूठ पहननी आएगी तो या आपको आएगी? अब याह म सोलह िसगंार करगी!

अ छा, द द कैसी लगगी घघँूट काढ़ के? अभी तक तो िसर खोलेचकई क तरह घमूती- फरती ह।'' ''तमुनेतो डाल ली आदत, ससरुाल म रहनेक !'' च दर नेबनती सेकहा। ''अरेहमारा या!'' एक गहर साँस लतेेहुए बनती नेकहा, ''हम तो उसी केिलए बनेथे। लेकन सधुा द द को याह-शाद म न फँसना पड़ता तो अ छा था। द द इन सबकेिलए नह ंबनी थीं। आप मामाजी सेकहते य नह ं?'' च दर नेकुछ जवाब नह ंदया। चुपचाप बठैा हुआ सोचता रहा। बनती भी कड़ाह म सेपकौ ड़याँिनकाल- िनकालकर थाली म रखनेलगी। थोड़ देर बाद जब वह घी म पकौ ड़याँडाल चुक तब भी वह वसैेह गुमसमु बठैा सोच रहा था। '' या सोच रहेह आप? नह ंबताइएगा। फर अभी हम द द सेकह दगेक बठै-बठैेसोच रहेथे।'' बनती बोली। '' या तुहार द द का डर पड़ा है?'' च दर नेकहा। ''अपनेदल सेपिूछए। हमसेनह ंबन सकतेआप!'' बनती नेमसुकराकर कहा और उसकेगाल म फूल केकटोरे खल गय-े''अ छा, इस ड बेम या है, कुछ ाइवटे!'' ''नह ंजी, ाइवटे या होगा, और वह भी तमुस?ेसोनेका मडेल है। िमला हैमझुेएक लखे पर।'' और च दर ने ड बा खोलकर दखला दया। ''आहा! येतो बहुत अ छा है। हम देद जए।'' बनती बोली। '' या करेगी त?ू'' च दर नेहँसकर पछूा। ''अपनेआनवेालेजीजाजी केिलए कान केबुदेबनवा लगे।'' बनती बोली, ''अरेहाँ, आपको एक चीज दखाएगँे।'' '' या?'' ''यह नह ंबतात।ेदेखएगा तो उछल प ड़एगा।'' ''तो दखाओ न!'' ''अभी तो द द आ रह ह गी। द द केसामनेनह ंदखाएगँे।'' ''सधुा सेिछपाकर हम कुछ नह ंकर सकत,ेयह तमु जानती हो।'' च दर बोला। ''िछपानेक बात थोड़ेह है। देखकर तब उ ह बता द जएगा। वसैेवह खुद ह सधुा द द से या िछपातेह? लो, सधुा द द तो आ गयीं...'' च दर नेपीछेमडुक़र देखा। सधुा केहाथ म एक ल बा-सा सरकंडा था और उसेझंडेक तरह फहराती हुई चली आ रह थी। च दर हँस पड़ा।

'' खल गयेद द को देखतेह !'' बनती बोली और एक गरम पकौड़ च दर केऊपर फक द । ''अरे, बड़ शतैान हो गयी हो तमु इधर! पाजी कह ंक !'' च दर बोला। सधुा च पल उतारकर अ दर आयी। झूमती-इठलाती हुई चली आ रह थी। ''कहो, सठे वाथ मल!'' उसनेच दर को देखतेह कहा, ''सबुह हुई और पकौड़ क महक लग गयी तुह!'' पीढ़ा खींचकर उसकेबगल म बठै गयी और सरकंडा च दर केहाथ पर रखतेहुए बोली, ''लो, यह ग ना। घर म बो देना। और गँडेर खाना! अ छा!'' और हाथ बढ़ाकर वह ड बया उठा ली और बोली, ''इसम या है? खोल या न खोल?'' ''अ छा, खत तक तो हमारेबना पछूेखोल लतेी हो। इसेपछू केखोलोगी!'' ''अरेहमनेसोचा शायद इस ड बया म प मी का दल ब द हो। तुहार िम है, शायद मिृत-िच ï म वह दे दया हो।'' और सधुा नेड बया खोली तो उछल पड़ , ''यह तो उसी िनब ध पर िमला हैजसका चाट तमु बनायेथे!'' ''हाँ!'' ''तब तो येहमारा है।'' ड बया अपनेव म िछपाकर सधुा बोली। ''तुहारा तो हैह । म अपना कब कहता हूँ?'' च दर नेकहा। ''लगाकर देख!'' और उठकर सधुा चल द । '' बनती, दो पकौड़ तो दो।'' और दो पकौ ड़याँलकेर खातेहुए च दर सधुा केकमरेम गया। देखा, सधुा शीशेके सामनेखड़ हैऔर मडेल अपनी साड़ म लगा रह है। वह चुपचाप खड़ा होकर देखनेलगा। सधुा नेमडेल लगाया और ण-भर तनकर देखती रह फर उसेएक हाथ सेव पर िचपका िलया और महँुझुकाकर उसेचूम िलया। ''बस, कर दया न ग दा उस!े'' च दर मौका नह ंचूका। और सधुा तो जैसेपानी-पानी। गाल सेलाज क रतनार लपट फूट ंऔर एड़ तक धधक उठ ं। फौरन शीशेके पास सेहट गयी और बगड़कर बोली, ''चोर कह ंके! या देख रहेथे?'' बनती इतनेम त तर म पकौड़ रखकर लेआयी। सधुा नेझट सेमडेल उतार दया और बोली, ''लो, रखो सहेजकर।'' '' य , पहनेरहो न!'' ''ना बाबा, परायी चीज, अभी खो जायेतो डाँड़ भरना पड़े।'' और मडेल च दर क गोद म रख दया। बनती नेधीमेसेकहा, ''या मरुली मरुलीधर क अधरा न धर अधरा न धर गी।'' च दर और सधुा दोन झप गय।े''लो, गेसूआ गयी।''

सधुा क जान म जान आ गयी। च दर नेबनती का कान पकडक़र कहा, ''बहुत उलटा-सीधा बोलनेलगी है!'' बनती नेकान छुड़ातेहुए कहा, ''कोई झूठ थोड़ेह कहती हूँ!'' च दर चुपचाप सधुा केकमरेम पकौ डय़ाँखाता रहा। बगल केकमरेम सधुा, गेस,ूफूल और हसरत बठैेबात करतेरहे। बनती उन लोग को ना ता देती रह । उस कमरेम ना ता पहुँचाकर बनती एक िगलास म पानी लकेर च दर केपास आयी और पानी रखकर बोली, ''अभी हलआु ला रह हूँ, जाना मत!'' और पल-भर म त तर म हलआु रखकर लेआयी। ''अब म चल रहा हूँ!'' च दर नेकहा। ''बठैो, अभी हम एक चीज दखाएगँे। जरा गेसूसेबात कर आए।ँ'' बनती बड़ेभोले वर म बोली, ''आइए, हसरत िमयाँ।'' और पल-भर म न ह-मुन-ेसेछह वष केहसरत िमयाँतनजेब का कुरता और चूड़ दार पायजामेपर पीलेरेशम क जाकेट पहनेकमरेम खरगोश क तरह उछल आय।े ''आदाबज।'' बड़ेतमीज सेउ ह नेच दर को सलाम कया। च दर नेउसेगोद म उठाकर पास बठा दया। ''लो, हलआु खाओ, हसरत!'' हसरत नेिसर हला दया और बोला, ''गेसूनेकहा था, जाकर च दर भाई सेहमारा आदाब कहना और कुछ खाना मत! हम खाएगँेनह ं।'' च दर बोला, ''हमारा भी नम तेकह दो उनसेजाकर।'' हसरत उठ खड़ा हुआ-''हम कह आए।ँ'' फर मडुक़र बोला, ''आप तब तक हलआु ख म कर दगे?'' च दर हँस पड़ा, ''नह ं, हम तुहारा इ तजार करगे, जाओ।'' हसरत िसर हलाता हुआ चला गया। इतनेम सधुा आयी और बोली, ''गेसूक गजल सनुो यहाँबठैकर। आवाज आ रह हैन! फूल भी आयी है इसिलए गेसूतुहारेसामनेनह ंआएगी वरना फूल अ मीजान सेिशकायत कर देगी। लेकन वह तमुसेिमलनेको बहुत इ छुक है, अ छा यह ंसेसनुना बठैे-बठैे...'' सधुा चली गयी। गेसूनेगाना शु कया बहुत मह न, पतली लेकन बहेद मीठ आवाज म जसम कसक और नशा दोन घलु-ेिमलेथे। च दर एक त कया टेककर बठै गया और उनींदा-सा सनुनेलगा। गजल ख म होतेह सधुा भागकर आयी-''कहो, सनु िलया न!'' और उसकेपीछे-पीछेआया हसरत और सधुा केपरै म िलपटकर बोला, ''सधुा, हम हलआु नह ंखाएगँे!'' सधुा हँस पड़ , ''पागल कह ंका। लेखा।'' और उसकेमहँु म हलआु ठूँस दया। हसरत को गोद म लकेर वह च दर केपास बठै गयी और गेसूकेबारेम बतानेलगी, ''गेसूगिमयाँबतानेननैीताल जा रह है। वह ंअ तर क

अ मी भी आएगँी और मगँनी क र म वह ंपरू करगी। अब वह पढ़ेगी नह ं। जुलाई तक उसका िनकाह हो जाएगा। कल रात क गाड़ सेजा रहेह येलोग। वगैरह-वगैरह।'' बनती बठै-बठै गेसूऔर फूल सेबात करती रह । थोड़ देर बाद सधुा उठकर चली गयी। तमु जाना मत, आज खाना यह ंखाना, म बनती को तुहारेपास भजे रह हूँ, उससेबात करतेरहना।'' थोड़ देर बाद बनती आयी। उसकेहाथ म कुछ था जसेवह अपनेआँचल सेिछपायेहुई थी। आयी और बोली, ''अब द द नह ंह, ज द सेदेख ली जए।'' '' या है?'' च दर नेता जुब सेपछूा। ''जीजाजी क फोटो।'' बनती नेमसुकराकर कहा और एक छोट -सी बहुत कला मक फोटो च दर केहाथ म रख द। ''अरेयह तो िम है। कॉमरेड कैलाश िम ।'' और च दर केदमाग म बरेली क बात, लाठ चाज...सभी कुछ घमू गया। च दर केमन म इस व जानेकैसा-सा लग रहा था। कभी बड़ा अचरज होता, कभी एक स तोष होता क चलो सधुा केभा य क रेखा उसेअ छ जगह लेगयी, फर कभी सोचता क िम इतना विच वभाव का है, सधुा क उससेिनभगेी या नह ं? फर सोचता, नह ंसधुा भा यवान है। इतना अ छा लड़का िमलना मुकल था। ''आप इ ह जानतेह?'' बनती नेपछूा। ''हाँ, सधुा भी उ ह नाम सेजानती हैश ल सेनह ं। लेकन अ छा लड़का है, बहुत अ छा लड़का।'' च दर नेएक गहर साँस लकेर कहा और फर चुप हो गया। बनती बोली, '' या सोच रहेह आप?'' ''कुछ नह ं।'' पलक म आयेहुए आँसूरोककर और होठ पर मसुकान लानेक कोिशश करतेहुए बोला, ''म सोच रहा हूँ, आज कतना स तोष हैमझुे, कतनी खुशी हैमझुे, क सधुा एक ऐसेघर जा रह हैजो इतना अ छा है, ऐसे लड़केकेसाथ जा रह हैजो इतना ऊँचा''...कहत-ेकहतेच दर क आँख भर आयीं। बनती च दर केपास खड़ होकर बोली, ''िछह, च दर बाब!ूआपक आँख म आँस!ूयह तो अ छा नह ंलगता। जतनी प व ता और ऊँचाई सेआपनेसधुा केसाथ िनबाह कया है, यह तो शायद देवता भी नह ंकर पातेऔर द द नेआपको जैसा िन छल यार दया हैउसको पाकर तो आदमी वग सेभी ऊँचा उठ जाता है, फौलाद सेभी यादा ताकतवर हो जाता है, फर आज इतनेशभु अवसर पर आप म कमजोर कहाँस?ेहम तो बड़ शरम लग रह है। आज तक द द तो दरू, हम तक को आप पर गव था। अ छा, म फोटो रख तो आऊँवरना द द आ जाएगँी!'' बनती ने फोटो ली और चली गयी। बनती जब लौट तो च दर व थ था। बनती क ओर ण भर च दर नेदेखा और कहा, ''म इसिलए नह ंरोया था बनती, मझुेयह लगा क यहाँकैसा लगेगा। खैर जानेदो।'' ''एक दन तो ऐसा होता ह हैन, सहना पड़ेगा!'' बनती बोली।

''हाँ, सो तो है; अ छा बनती, सधुा नेयह फोटो देखी है?'' च दर नेपछूा। ''अभी नह ं, असल म मामाजी नेमझुसेकहा था क यह फोटो दखा देसधुा को; लेकन मरे ह मत नह ंपड़ । मनेउनसेकह दया क च दर आएगँेतो दखा दगे। आप जब ठ क समझ तो दखा द। जेठ दशहरा अगलेह मगंल को है।'' बनती नेकहा। ''अ छा।'' एक गहर साँस लकेर च दर बोला। बनती थोड़ देर तक च दर क ओर एकटक देखती रह । च दर नेउसक िनगाह चुरा ली और बोला, '' या देख रह हो, बनती?'' ''देख रह हूँक आपक पलक झपकती ह या नह ं?'' बनती बहुत ग भीरता सेबोली। '' य ?'' ''इसिलए क मनेसनुा था, देवताओंक पलक कभी नह ंिगरतीं।'' च दर एक फ क हँसी हँसकर रह गया। ''नह ं, आप मजाक न समझ। मनेअपनी जंदगी म जतनेलोग देखे, उनम आप-जैसा कोई भी नह ंिमला। कतनेऊँचेह आप, कतना वशाल दय हैआपका! द द कतनी भा यशाली ह।'' च दर नेकुछ जवाब नह ंदया। ''जाओ, फोटो लेआओ।'' उसनेकहा, ''आज ह दखा दँ।ूजाओ, खाना भी ले आओ। अब घर जाकर या करना है।'' पापा को खाना खलानेकेबाद च दर और सधुा खानेबठैे। महरा जन चली गयी थी। इसिलए बनती सक-सककर रोट देरह थी। सधुा एक रेशमी सिनया पहनेचौकेकेअ दर खा रह थी। और च दर चौकेकेबाहर। सबुह केक चे खानेम डॉ टर शुला बहुत छूत-छात का वचार रखतेथे। ''देखो, आज बनती नेरोट बनायी हैतो कतनी मीठ लग रह है, एक तमु बनाती हो क मालमू ह नह ंपड़ता रोट हैक सो ता!'' च दर नेसधुा को िचढ़ातेहुए कहा। सधुा नेहँसकर कहा, ''हम बनती सेलड़ानेक कोिशश कर रहेहो! बनती क हमसेजंदगी-भर लड़ाई नह ंहो सकती!'' ''अरेहम सब समझतेह इनक बात!'' बनती नेरोट पटकतेहुए कहा और जब सधुा िसर झुकाकर खानेलगी तो बनती नेआँख केइशारेसेपछूा, ''कब दखाओगे?'' च दर नेिसर हलाया और फर सधुा सेबोला, ''तमु उ ह िच ठ िलखोगी?'' '' क ह?''

''कैलाश िम ा को, वह बरेली वाल?ेउ ह नेहम खत िलखा था उसम तुह णाम िलखा था।'' च दर बोला। ''नह ं, खत-वत नह ंिलखत।ेउ ह एक दफेबलुाओ तो यहाँ।'' ''हाँ, बलुाएगँेअब मह न-ेदो मह नेबाद, तब तमुसेखूब प रचय करा दगेऔर तुह उसक पाट म भी भरती करा दगे।'' च दर नेकहा। '' या? हम मजाक नह ंकरत?े हम सचमचु समाजवाद दल म शािमल ह गे।'' सधुा बोली, ''अब हम सोचतेह कुछ काम करना चा हए, बहुत खेल-कूद िलय,ेबचपन िनभा िलया।'' ''उ ह नेअपना िच भजेा है। देखोगी?'' च दर नेजेब म हाथ डालतेहुए पछूा। ''कहाँ?'' सधुा नेबहुत उ सकुता सेपछूा, ''िनकालो देख।'' ''पहलेबताओ, हम या इनाम दोगी? बहुत मुकल सेभजेा उ ह नेिच !'' च दर नेकहा। ''इनाम दगेइ ह!'' सधुा बोली और झट सेझपटकर िच छ न िलया। ''अरे, छूिलया चौकेम स?े'' बनती नेदबी जबान सेकहा। सधुा नेथाली छोड़ द । अब छूगयी थी वह; अब खा नह ंसकती थी। ''अ छ फोटो देखी द द । सामनेक थाली छूट गयी!'' बनती नेकहा। सधुा नेहाथ धोकर आँचल केछोर सेपकडक़र फोटो देखी और बोली, ''च दर, सचमचु देखो! कतनेअ छेलग रहेह। कतना तजे हैचेहरेपर, और माथा देखो कतना ऊँचा है।'' सधुा फोटो देखती हुई बोली। ''अ छ लगी फोटो? पस द है?'' च दर नेबहुत ग भीरता सेपछूा। ''हाँ, हाँ, और समाजवा दय क तरह नह ंलगतेय।े'' सधुा बोली। ''अ छा सधुा, यहाँआओ।'' और च दर केसाथ सधुा अपनेकमरेम जाकर पलगँ पर बठै गयी। च दर उसके पास बठै गया और उसका हाथ अपनेहाथ म लकेर उसक अँगूठ घमुातेहुए बोला, ''सधुा, एक बात कह, मानोगी?'' '' या?'' सधुा नेबहुत दलुार और भोलपेन सेपछूा। ''पहलेबता दो क मानोगी?'' च दर नेउसक अँगूठ क ओर एकटक देखतेहुए कहा। '' फर, हमनेकभी कोई बात तुहार टाली है! या बात है?'' ''तमु मानोगी चाहेकुछ भी हो?'' च दर नेपछूा। ''हाँ-हाँ, कह तो दया। अब कौन-सी तुहार ऐसी बात हैजो तुहार सधुा नह ंमान सकती!'' आँख म, वाणी म, अंग-अंग सेसधुा केआ मसमपण छलक रहा था।

'' फर अपनी बात पर कायम रहना, सधुा! देखो!'' उसनेसधुा क उँगिलयाँअपनी पलक सेलगातेहुए कहा, ''सधुी मरे! तमु उस लड़केसेयाह कर लो!'' '' या?'' सधुा चोट खायी नािगन क तरह तड़प उठ -''इस लड़केस?ेयह शकल हैइसक हमसेयाह करनेक ! च दर, हम ऐसा मजाक नापस द करतेह, समझेक नह ं! इसिलए बड़ेयार सेबलुा लाय,ेबड़ा दलुार कर रहेथे!'' ''तमु अभी वायदा कर चुक हो!'' च दर नेबहुत आ जजी सेकहा। ''वायदा कैसा? तमु कब अपनेवायदेिनभातेहो? और फर यह धोखा देकर वायदा कराना या? ह मत थी तो साफ-साफ कहतेहमस!ेहमारेमन म आता सो कहत।ेहम इस तरह सेबाँध कर य बिलदान चढ़ा रहेहो!'' और सधुा मारेगुसेकेरोनेलगी। च दर त ध। उसनेइस य क क पना ह नह ंक थी। वह ण भर खड़ा रहा। वह या कहेसधुा स,ेकुछ समझ ह म नह ंआता था। वह गया और रोती हुई सधुा केकंधेपर हाथ रख दया। ''हटो उधर!'' सधुा नेबहुत खाई सेहाथ हटा दया और आँचल सेिसर ढकती हुई बोली, ''म याह नह ंक ँगी, कभी नह ंक ँगी। कसी सेनह ं क ँगी। तमु सभी लोग नेिमलकर मझुेमार डालनेक ठानी है। तो म अभी िसर पटककर मर जाऊँगी।'' और मारे तशै केसचमचु सधुा नेअपना िसर द वार पर पटक दया। ''अरे!'' दौडक़र च दर, नेसधुा को पकड़ िलया। मगर सधुा नेगरजकर कहा, ''दरूहटो च दर, छूना मत मझुे।'' और जैसेउसम जानेकहाँक ताकत आ गयी है, उसनेअपनेको छुड़ा िलया। च दर नेदबी जबान सेकहा, ''िछह सधुा! यह तमुसेउ मीद नह ंथी मझुे। यह भावकुता तुह शोभा नह ंदेती। बात कैसी कर रह हो तमु! हम वह च दर ह न!'' ''हाँ, वह च दर हो! और तभी तो! इस सार दिुनया म तुह ंएक रह गयेहो मझुेफोटो दखाकर पस द कराने को।'' सधुा िससक-िससककर रोनेलगी-''पापा नेभी धोखा देदया। हम पापा सेयह उ मीद नह ंथी।'' ''पगली! कौन अपनी लड़क को हमशेा अपनेपास रख पाया है!'' च दर बोला। ''तमु चुप रहो, च दर। हम तुहार बोली जहर लगती है। 'सधुा, यह फोटो तुह पस द है?' तुहार जबान हली कैस?ेशरम नह ंआयी तुह। हम कतना मानतेथेपापा को, कतना मानतेथेतुह? हम यह नह ंमालमू था क तमु लोग ऐसा करोगे।'' थोड़ देर चुपचाप िससकती रह सधुा और फर धधककर उठ -''कहाँहैवह फोटो? लाओ, अभी म जाऊँगी पापा केपास! म कहूँगी उनसेहाँ, म इस लड़केको पस द करती हूँ। वह बहुत अ छा है, बहुत सुदर है। लेकन म उससेशाद नह ंक ँगी, म कसी सेशाद नह ंक ँगी! झूठ बात है...'' और उठकर पापा केकमरेक ओर जानेलगी। ''खबरदार, जो कदम बढ़ाया!'' च दर नेडाँटकर कहा, ''बठैो इधर।'' ''म नह ं कँूगी!'' सधुा नेअकडक़र कहा। ''नह ं कोगी?''

''नह ं कँूगी।'' और च दर का हाथ तशै म उठा और एक भरपरूतमाचा सधुा केगाल पर पड़ा। सधुा केगाल पर नीली उँगिलयाँ उपट आयीं। वह त ध! जैसेप थर बन गयी हो। आँख म आँसूजम गय।ेपलक म िनगाह जम गयीं। होठ म आवाज जम गयींऔर सीनेम िसस कयाँजम गयीं। च दर नेएक बार सधुा क ओर देखा और कुस पर जैसेिगर पड़ा और िसर पटककर बठै गया। सधुा कुस के पास जमीन पर बठै गयी। च दर केघटुन पर िसर रख दया। बड़ भार आवाज म बोली, ''च दर, देख तुहारेहाथ म चोट तो नह ंआयी।'' च दर नेसधुा क ओर देखा, एक ऐसी िनगाह सेजसम क महँुफाड़कर जमहुाई लेरह थी। सधुा एकाएक फर िससक पड़ और च दर केपरै पर िसर रखकर बोली, ''च दर, सचमचु मझुेअपनेआ य सेिनकालकर ह मानोगे! च दर, मजाक क बात दसूर है, जंदगी म तो दुमनी मत िनकाला करो।'' च दर एक गहर साँस लकेर चुप हो गया। और िसर थामकर बठै गया। पाँच िमनट बीत गय।ेकमरेम स नाटा, गहन खामोशी। सधुा च दर केपाँव को छाती सेिचपकायेसनूी-सनूी िनगाह सेजानेकुछ देख रह थी द वार केपार, दशाओंकेपार, ितज सेपरे...द वार पर घड़ चल रह थी टक... टक... च दर नेिसर उठाया और कहा, ''सधुा, हमार तरफ देखो-'' सधुा नेिसर ऊपर उठाया। च दर बोला, ''सधुा, तमु हम जाने या समझ रह होगी, लेकन अगर तमु समझ पाती क म या सोचता हूँ! या समझता हूँ।'' सधुा कुछ नह ंबोली, च दर कहता गया, ''म तुहारेमन को समझता हूँ, सधुा! तुहारेमन नेजो तमुसेनह ंकहा, वह मझुसे कह दया था-लेकन सधुा, हम दोन एक-दसूरेक जंदगी म या इसीिलए आयेक एक-दसूरेको कमजोर बना द या हम लोग ने वग क ऊँचाइय पर साथ बठैकर आ मा का सगंीत सनुा िसफ इसीिलए क उसेअपनेयाह क शहनाई म बदल द?'' ''गलत मत समझो च दर, म गेसूनह ंक अ तर सेयाह केसपनेदेखँूऔर न तुह ंअ तर हो, च दर! म जानती हूँक म तुहारेिलए राखी केसतू सेभी यादा प व रह हूँलेकन म जैसी हूँ, मझुेवसैी ह य नह ंरहने देत!ेम कसी सेशाद नह ंक ँगी। म पापा केपास रहूँगी। शाद को मरेा मन नह ंकहता, म य क ँ? तमु गुसा मत हो, दखुी मत हो, तमु आ ा दोगेतो म कुछ भी कर सकती हूँ, लेकन ह या करनेसेपहलेयह तो देख लो क मरेे दय म या है?'' सधुा नेच दर केपाँव को अपनेदय सेऔर भी दबाकर कहा। ''सधुा, तमु एक बात सोचो। अगर तमु सबका यार बटोरती चलती हो तो कुछ तुहार ज मदेार हैया नह ं? पापा नेआज तक तुह कस तरह पाला। अब या तुहारा यह फज हैक तमु उनक बात को ठुकराओ? और एक बात और सोचो-हम पर कुछ व ास करकेह उ ह नेकहा हैक म तमुसेफोटो पस द कराऊँ? अगर अब तमु इनकार कर देती हो तो एक तरफ पापा को तमुसेध का पहुँचेगा, दसूर ओर मरेे ित उनकेव ास को कतनी चोट लगेगी। हम उ ह या महँु दखानेलायक रहगेभला! तो तमु या चाहती हो? महज अपनी थोड़ -सी भावकुता केपीछेतमु सभी क जंदगी चौपट करनेकेिलए तयैार हो? यह तुह शोभा नह ंदेता है। या कहगेपापा, क च दर नेअभी तक तुह यह िसखाया था? हम लोग या कहगे? बताओ। आज तमु शाद न करो। उसकेबाद पापा हमशेा केिलए द:ुखी

रहा कर और दिुनया हम कहा करे, तब तुह अ छा लगेगा?'' ''नह ं।'' सधुा नेभरायेहुए गलेसेकहा। ''तब, और फर एक बात और हैन सधुी! सोनेक पहचान आग म होती हैन! लपट म अगर उसम और िनखार आयेतभी वह स चा सोना है। सचमचु मनेतुहारेय व को बनाया हैया तमुनेमरेेय व को बनाया है, यह तो तभी मालमू होगा जब क हम लोग क ठनाइय स,ेवदेनाओंस,ेसघंष सेखेल और बाद म वजयी ह और तभी मालमू होगा क सचमचु मनेतुहारेजीवन म काश और बल दया था। अगर सदा तमु मरे बाँह क सीमा म रह ंऔर म तुहार पलक क छाँव म रहा और बाहर केसघंष सेहम लोग डरतेरहेतो कायरता है। और मझुेअ छा लगेगा क दिुनया कहेक मरे सधुा, जस पर मझुेनाज था, वह कायर है? बोलो। तमु कायर कहलाना पस द करोगी?'' ''हाँ!'' सधुा नेफर च दर केघटुन म महँुिछपा िलया। '' या? यह म सधुा केमहँुसेसनु रहा हूँ! िछह पगली! अभी तक तरे िनगाह नेमरेे ाण म अमतृभरा हैऔर मरे साँस नेतरेेपखं म तफूान क तजेी। और हम-तुह तो आज खुश होना चा हए क अब सामनेजो रा ता है उसम हम लोग को यह िस करनेका अवसर िमलगेा क सचमचु हम लोग नेएक-दसूरेको ऊँचाई और प व ता द है। मनेआज तक तुहार सहायता पर व ास कया था। आज या तमु मरेा व ास तोड़ दोगी? सधुा, इतनी ूर य हो रह हो आज तमु? तमु साधारण लड़क नह ंहो। तमु ुवतारा से यादा काशमान हो। तमु यह य चाहती हो क दिुनया कहे, सधुा भी एक साधारण-सी भावकु लड़क थी और आज म अपनेकान सेसनु!ँूबोलो सधुी?'' च दर नेसधुा केिसर पर हाथ रखकर कहा। सधुा नेआँख उठायीं, बड़ कातर िनगाह सेच दर क ओर देखा और िसर झुका िलया। सधुा केिसर पर हाथ फेरतेहुए च दर बोला- ''सधुा, म जानता हूँम तमु पर शायद बहुत स ती कर रहा हूँ, लेकन तुहारेिसवा और कौन हैमरेा? बताओ। तुह ंपर अपना अिधकार भी आजमा सकता हूँ। व ास करो मझु पर सधुा, जीवन म अलगाव, दरू, दखु और पीड़ा आदमी को महान बना सकती है। भावकुता और सखु हम ऊँचेनह ंउठात।ेबताओ सधुा, तुह या पस द है? म ऊँचा उठूँतुहारेव ास केसहारे, तमु ऊँची उठो मरेेव ास केसहारे, इससेअ छा और या हैसधुा! चाहो तो मरेेजीवन को एक प व साधन बना दो, चाहो तो एक िछछली अनभुिूत।'' सधुा नेएक गहर साँस ली, ण-भर घड़ क ओर देखा और बोली, ''इतनी ज द या हैअभी, च दर? तमु जो कहोगेम कर लगँूी!'' और फर वह िससकनेलगी-''लेकन इतनी ज द या हैï? अभी मझुेपढ़ लनेेदो!'' ''नह ं, इतना अ छा लड़का फर िमलगेा नह ं। और इस लड़केकेसाथ तमु वहाँपढ़ भी सकती हो। म जानता हूँ उस।ेवह देवताओं-सा िन छल है। बोलो, म पापा सेकह दँूक तुह पस द है?'' सधुा कुछ नह ंबोली। ''मौन का मतलब हाँहैन?'' च दर नेपछूा।

सधुा नेकुछ नह ंकहा। झुककर च दर केपरै को अपनेहोठ सेछूिलया और पलक सेदो आँसूचूपड़े। च दर नेसधुा को उठा िलया और उसकेमाथेपर हाथ रखकर कहा, ''ई र तुहार आ मा को सदा ऊँचा बनाएगा, सधुा!'' उसनेएक गहर साँस लकेर कहा, ''मझुेतमु पर गव है,'' और फोटो उठाकर बाहर चलनेलगा। ''कहाँजा रहेहो! जाओ मत!'' सधुा नेउसका कुरता पकडक़र बड़ आ जजी सेकहा, ''मरेेपास रहो, तबीयत घबराती है?'' च दर पलगँ पर बठै गया। सधुा त कयेपर िसर रखकर लटे गयी और फट -फट पथराई आँख सेजाने या देखनेलगी। च दर भी चुप था, ब कुल खामोश। कमरेम िसफ घड़ चल रह थी, टक... टक... थोड़ देर बाद सधुा नेच दर केपरै को अपनेत कयेकेपास खींच िलया और उसकेतलव पर होठ रखकर उसम महँु िछपाकर चुपचाप लटे रह । बनती आयी। सधुा हली भी नह ं! च दर नेदेखा वह सो गयी थी। बनती ने फोटो उठाकर इशारेसेपछूा, ''मजंूर?'' ''हाँ।'' बनती नेबजाय खुश होनेकेच दर क ओर देखकर िसर झुका िलया और चली गयी। सधुा सो रह थी और च दर केतलव म उसक नरम वाँर साँस गँूज रह थीं। च दर बठैा रहा चुपचाप। उसक ह मत न पड़ क वह हलेऔर सधुा क नींद तोड़ दे। थोड़ देर बाद सधुा नेकरवट बदली तो वह उठकर आँगन के सोफेपर जाकर लटेरहा और जाने या सोचता रहा। जब उठा तो देखा धूप ढल गयी हैऔर सधुा उसकेिसरहानेबठै उसेपखंा झल रह है। उसनेसधुा क ओर एक अपराधी जैसी कातर िनगाह सेदेखा और सधुा नेबहुत दद सेआँख फेर लींऔर ऊँचाइय पर आ खर साँस लतेी हुई मरणास न धूप क ओर देखनेलगी। च दर उठा और सोचनेलगा तो सधुा बोली, ''कल आओगेक नह ं?'' '' य नह ंआऊँगा?'' च दर बोला। ''मनेसोचा शायद अभी सेदरूहोना चाहतेहो।'' एक गहर साँस लकेर सधुा बोली और पखंेक ओट म आँसू प छ िलय।े च दर दसूरेदन सबुह नह ंगया। उसक थीिसस का बहुत-सा भाग टाइप होकर आ गया था और उसेबठैा वह सधुार रहा था। लेकन साथ ह पता नह ं य उसका साहस नह ंहो रहा था वहाँजानेका। लेकन मन म एक िच ता थी सधुा क । वह कल सेब कुल मरुझा गयी थी। च दर को अपनेऊपर कभी-कभी ोध आता था। लेकन वह जानता था क यह तकलीफ का ह रा ता ठ क रा ता है। वह अपनी जंदगी म स तपेन केखलाफ था। लेकन उसके िलए सधुा क पलक का एक आँसूभी देवता क तरह था और सधुा केफूल -जैसेचेहरेपर उदासी क एक रेखा भी उसेपागल बना देती थी। सबुह पहलेतो वह नह ंगया, बाद म वयंउसेपछतावा होनेलगा और वह अधीरता सेपाँच बजनेका इ तजार करनेलगा। पाँच बजे, और वह साइ कल लकेर पहुँचा। देखा, सधुा और बनती दोन नह ंह। अकेलेडॉ टर शुला अपनेकमरे

म बठैेह। च दर गया। ''आओ, सधुा नेतमुसेकह दया, उसेपस द है?'' डॉ टर शुला नेपछूा। ''हाँ, उसेकोई एतराज नह ं।'' च दर नेकहा। ''म पहलेसेजानता था। सधुा मरे इतनी अ छ है, इतनी सशुील हैक वह मरे इ छा का उ लघंन तो कर ह नह ंसकती। लेकन च दर, कल सेउसनेखाना-पीना छोड़ दया है। बताओ, इससे या फायदा? मरेेबस म या है? म उसेहमशेा तो रख नह ंसकता। लेकन, लेकन आज सबुह खातेव वह बठै भी नह ंमरेेपास बताओ...'' उनका गला भर आया-''बताओ, मरेा या कसरूहै?'' च दर चुप था। ''कहाँहैसधुा?'' च दर नेपछूा। ''गैरेज म मोटर ठ क कर रह है। म इतना मना कया क धूप म तप जाओगी, लूलग जाएगी-लेकन मानी ह नह ं! बताओ, इस झ लाहट सेमझुेकैसा लगता है?'' वृ पता केकातर वर म डॉ टर नेकहा, ''जाओ च दर, तुह ं समझाओ! म या कहूँ?'' च दर उठकर गया। मोटर गैरेज म काफ गरमी थी, लेकन बनती वह ंएक चटाई बछायेपड़ सो रह थी और सधुा इंजन का कवर उठायेमोटर साफ करनेम लगी हुई थी। बनती बहेोश सो रह थी। त कया चटाई सेहटकर जमीन पर चला गया था और चोट फश पर सोयी हुई नािगन क तरह पड़ थी। बनती का एक हाथ छाती पर था और एक हाथ जमीन पर। आँचल, आँचल न रहकर चादर बन गया था। च दर केजातेह सधुा नेमहँुफेरकर देखा- ''च दर, आओ।'' ीण मसुकराहट उसकेहोठ पर दौड़ गयी। लेकन इस मसुकराहट म उ लास लटु चुका था, रेखाएँ बाक थीं। सहसा उसनेमडुक़र देखा-'' बनती! अरे, कैसेघोड़ा बचेकर सो रह है! उठ! च दर आयेह!'' बनती नेआँख खोलीं, च दर क ओर देखा, लटेे-ह -लटेेनम तेकया और आँचल सभँालकर फर करवट बदलकर सो गयी। ''बहुत सोती हैक ब त!'' सधुा बोली, ''इतना कहा इससेकमरेम जाकर पखंेम सो! लेकन नह ं, जहाँद द रहेगी, वह ंयह भी रहेगी। म गैरेज म हूँतो यह कैसेकमरेम रहे। वह ंमरेगी जहाँम म ँगी।'' ''तो तुह ं य गैरेज म थीं! ऐसी या ज रत थी अभी ठ क करनेक !'' च दर नेकहा, लेकन कोिशश करनेपर भी सधुा को आज डाँट नह ंपा रहा था। पता नह ंकहाँपर या टूट गया था। ''नह ंच दर, तबीयत ह नह ंलग रह थी। या करती! ोिसया उठायी, वह भी रख दया। क वता उठायी, वह भी रख द । क वता वगैरह म तबीयत नह ंलगी। मन म आया, कोई कठोर काम हो, कोई नीरस काम हो लोहे-ल कड़, पीतल-फौलाद का, तो मन लग जाए। तो चली आयी मोटर ठ क करन।े'' '' य , क वता म भी तबीयत नह ंलगी? ता जुब है, गेसूकेसाथ बठैकर तमु तो क वता म घटं गुजार देती थीं!'' च दर बोला। ''उन दन शायद कसी को यार करती रह होऊँतभी क वता म मन लगता था!'' सधुा उस दन क परुानी बात याद करकेबहुत उदास हँसी हँसी-''अब यार नह ंकरती होऊँगी, अब तबीयत नह ंलगती। बड़ फ क , बड़ बजेार, बड़

बनावट लगती ह येक वताए,ँमन केदद केआगेसभी फ क ह।'' और फर वह उ ह ंपरुज म डूब गयी। च दर भी चुपचाप मोटर क खडक़ सेटककर खड़ा हो गया। और चुपचाप कुछ सोचनेलगा। सधुा नेबना िसर उठाय,ेझुके-ह -झुके, एक हाथ सेएक तार लपटेतेहुए कहा- ''च दर, तुहारेिम का प रवार आ रहा है, इसी मगंल को। तयैार करो ज द ।'' ''कौन प रवार, सधुा?'' ''हमारेजेठ और सास आ रह ह, इसी बसैाखी को हम देखन।ेउ ह नेितिथ बदल द है। तो अब छह ह दन रह गयेह।'' च दर कुछ नह ंबोला। थोड़ देर बाद सधुा फर बोली- ''अगर उिचत समझो तो कुछ पाउडर- म लेआना, लगाकर जरा गोरेहो जाएँतो शायद पस द आ जाए!ँ य , ठ क हैन!'' सधुा नेबड़ विच -सी हँसी हँस द और िसर उठाकर च दर क ओर देखा। च दर चुप था लेकन उसक आँख म अजीब-सी पीड़ा थी और उसकेमाथेपर बहुत ह क ण छाँह। सधुा नेकवर िगरा दया और च दर केपास जाकर बोली, '' य च दर, बरुा मान गयेहमार बात का? या कर च दर, कल सेहम मजाक करना भी भलू गय।ेमजाक करतेह तो यंय बन जाता है। लेकन हम तमुको कुछ कह नह ंरहेथे, च दर। उदास न होओ।'' बड़ेह दलुार सेसधुा बोली, ''अ छा, हम कुछ नह ंकहगे।'' और उसनेअपना आँचल सभँालनेकेिलए हाथ उठाया। हाथ म काल च लग गयी थी। च दर समझा मरेेक धेपर हाथ रख रह है सधुा। वह अलग हटा तो सधुा अपनेहाथ देखकर बोली, ''घबराओ न देवता, तुहार उ वल साधना म कािलख नह ं लगाऊँगी। अपनेआँचल म प छ लगँूी।'' और सचमचु आँचल म हाथ प छकर बोली, ''चलो, अ दर चल, उठ बनती! बलयैा कह ंक !'' च दर को सोफेपर बठाकर उसी क बगल म सधुा बठै गयी और अँगुिलयाँतोड़तेहुए कहा, ''च दर, िसर म बहुत दद हो रहा हैमरेे।'' ''िसर म दद नह ंहोगा तो या? इतनी त पश म मोटर बना रह थीं! पापा कतनेदखुी हो रहेथेआज? तुह इस तरह करना चा हए? फर फायदा या हुआ? न ऐसेद:ुखी कया, वसैेद:ुखी कर िलया। बात तो वह रह न? तार फ तो तब थी क तमु अपनी दिुनया म अपनेहाथ सेआग लगा देती और चेहरेपर िशकन न आती। अभी तक दिुनया क सभी ऊँचाई समटेकर भी बाहर सेवह बचपन कायम रखा था तमुन,ेअब दिुनया का सारा सखु अपनेहाथ सेलटुानेपर भी वह बचपन, वह उ लास य नह ंकायम रखती!'' ''बचपन!'' सधुा हँसी-''बचपन अब ख म हो गया, च दर! अब म बड़ हो गयी।'' ''बड़ हो गयी! कब स?े'' ''कल दोपहर स,ेच दर!''

च दर चुप। थोड़ देर बाद फर वयंसधुा ह बोली, ''नह ंच दर, दो-तीन दन म ठ क हो जाऊँगी! तमु घबराओ मत। म मृय-ुशैया पर भी होऊँगी तो तुहारेआदेश पर हँस सकती हूँ।'' और फर सधुा गुमसमु बठै गयी। च दर चुपचाप सोचता रहा और बोला, ''सधुी! मरेा तुह कुछ भी यान नह ंहै?'' ''और कसका है, च दर! तुहारा यान न होता तो देखती मझुेकौन झुका सकता था। आज सेसाल पहलेजब म पापा केपास आयी थी तो मनेकभी न सोचा था क कोई भी होगा जसकेसामनेम इतना झुक जाऊँगी।...अ छा च दर, मन बहुत उचट रहा है! चलो, कह ंघमू आए!ँचलोगे?'' ''चलो!'' च दर नेकहा। ''जाएँबनती को जगा लाए।ँवह कमब त अभी पड़ सो रह है।'' सधुा उठकर चली गयी। थोड़ देर म बनती आँख मलतेबगल म चटाई दाबेआयी और फर बरामदेम बठैकर ऊँघनेलगी। पीछे-पीछेसधुा आयी और चोट खींचकर बोली, ''चल तयैार हो! चलगेघमून।े'' थोड़ देर म तयैार हो गय।ेसधुा नेजाकर मोटर िनकाली और बोली च दर स-े''तमु चलाओगेया हम? आज हमीं चलाए।ँचलो, कसी पड़ेसेलड़ा द मोटर आज!'' ''अरेबाप रे।'' पीछेबनती िच लायी, ''तब हम नह ंजाएगँे।'' सधुा और च दर दोन नेमडुक़र उसेदेखा और उसक घबराहट देखकर दंग रह गय।े ''नह ं। मरेगी नह ंत!ू'' सधुा नेकहा। और आगेबठै गयी। '' बनती, तूपीछेबठैेगी?'' सधुा नेपछूा। ''न भइया, मोटर चलगेी तो म िगर जाऊँगी।'' ''अरेकोई मोटर केपीछेबठैनेकेिलए थोड़ कह रह हूँ। पीछेक सीट पर बठैेगी?'' सधुा नेपछूा। ''ओ! म समझी तमु कह रह हो पीछेबठैनेकेिलए जैसी ब घी म साईस बठैतेह! हम तुहारेपास बठैगे।'' बनती नेमचलकर कहा। ''अब तरेा बचपन इठला रहा है, ब ली कह ंक , चल आ मरेेपास!'' बनती मसुकराती हुई जाकर सधुा केबगल म बठै गयी। सधुा नेउसेदलुार सेपास खींच िलया। च दर पीछेबठैा तो सधुा बोली, ''अगर कुछ हज न समझो तो तमु भी आगेआ जाओ या दरू रखनी हो तो पीछेह बठैो।'' च दर आगेबठै गया। बीच म बनती, इधर च दर उधर सधुा। मोटर चली तो बनती चीखी, ''अरेमरेेमा टर साहब!'' च दर नेदेखा, बस रया चला जा रहा था, ''आज नह ंपढ़गे...'' च दर नेिच लाकर कहा। सधुा नेमोटर रोक नह ं।

च दर को बहेद अचरज हुआ जब उसनेदेखा क मोटर प मी केबगँलेपर क । ''अरेयहाँ य ?'' च दर ने पछूा। ''य ह ।'' सधुा नेकहा। ''आज मन हुआ क िमस प मी सेअँगरेजी क वता सनु।'' '' य , अभी तो तमु कह रह थींक क वता पढऩेम आज तुहारा मन ह नह ंलग रहा है!'' ''कुछ कहो मत च दर, आज मझुेजो मन म आय,ेकर लनेेदो। मरेा िसर बहेद दद कर रहा है। और म कुछ समझ नह ंपाती या क ँ। च दर तमुनेअ छा नह ंकया?'' च दर कुछ नह ंबोला। चुपचाप आगेचल दया। सधुा केपीछे-पीछेकुछ सकंोच करती हुई-सी बनती आ रह थी। प मी बठै कुछ िलख रह थी। उसनेउठकर सब का वागत कया। वह कोच पर बठै गयी। दसूर पर सधुा, च दर और बनती। सधुा नेबनती का प रचय प मी सेकराया और प मी नेबनती सेहाथ िमलाया तो बनती जाने य च दर क ओर देखकर हँस पड़ । शायद उस दन क घटना क याद म। सहसा सधुा को जाने या खयाल आ गया, बनती क शरारत-भर हँसी देखकर क उसनेफौरन कहा च दर स-े ''च दर, तमु प मी केपास बठैो, दो िम को साथ बठैना चा हए।'' ''हाँ, और खास तौर सेजब वह कभी-कभी िमलतेह ।''- बनती नेमसुकरातेहुए जोड़ दया। प मी नेमजाक समझ िलया और बना शरमायेबोली- ''हम लोग को म य थ क ज रत नह ं, ध यवाद! आओ च दर, यहाँआओ।'' प मी नेच दर को बलुाया। च दर उठकर प मी केपास बठै गया। थोड़ देर तक बात होती रह ं। मालमू हुआ, बट अपनेएक दो त केसाथ तराई के पास िशकार खेलनेगया है। आजकल वह दल क श ल का एक पाननमुा द ती का टुकड़ा काटकर उसम गोली मारा करता हैऔर जब कसी िच ड़या वगैरह को मारता हैतो िशकार को उठाकर देखता हैक गोली दय म लगी हैया नह ं। वा य उसका सधुर रहा है। सधुा कोच पर िसर टेकेउदास बठै थी। सहसा प मी नेबनती सेकहा, ''आपको पहली दफेदेखा मन।ेआप बात य नह ंकरतीं?'' बनती नेझपकर महँु झुका िलया। बड़ विच लड़क थी। हमशेा चुप रहती थी और कभी-कभी बोलनेक लहर आती तो गुटरगँूकरकेघर गँुजा देती थी और जन दन चुप रहती थी उन दन यादातर आँख क िनगाह, कपोल क आशनाई या अधर क मसुकान के ारा बात करती थी। प मी बोली, ''आपको फूल सेशौक है?'' ''हाँ, हाँ'' बनती िसर हलाकर बोली। ''च दर, इ ह जाकर गुलाब दखा लाओ। इधर फर खूब खलेह!'' बनती नेसधुा सेकहा, ''चलो द द ।'' और च दर केसाथ बढ़ गयी। फूल केबीच म पहुँचकर, बनती नेच दर सेकहा, ''सिुनए, द द को तो जाने या होता जा रहा है। बताइए, ऐसे

या होगा?'' ''म खुद परेशान हूँ, बनती! लेकन पता नह ंकहाँमन म कौन-सा व ास हैजो कहता हैक नह ं, सधुा अपने को सभँालना जानती है, अपनेमन को स तिुलत करना जानती हैऔर सधुा सचमचु ह याग म यादा गौरवमयी हो सकती है।'' इसकेबाद च दर नेबात टाल द । वह बनती से यादा बात करना नह ंचाहता था, सधुा केबारेम। बनती नेच दर को मौन देखा तो बोली, ''एक बात कह आपस?ेमािनएगा!'' '' या?'' ''अगर हमसेकभी कोई अनिधकार चेा हो जाए तो मा कर द जएगा, लेकन आप और द द दोन मझुेइतना चाहतेह क हम समझ नह ंपातेक यवहार को कहाँसीिमत रखँू!'' बनती नेिसर झुकायेएक फूल को नोचतेहुए कहा। च दर नेउसक ओर देखा, ण-भर चुप रहा, फर बोला, ''नह ंबनती, जब सधुा तुह इतना चाहती हैतो तमु हमशेा मझु पर उतना ह अिधकार समझना जतना सधुा पर।'' उधर प मी नेच दर केजातेह सधुा सेकहा, '' या आपक तबीयत खराब है?'' ''नह ंतो।'' ''आज आप बहुत पीली नजर आती ह!'' प मी नेपछूा। ''हाँ, कुछ मन नह ंलग रहा था तो म आपकेपास चली आयी क आपसेकुछ क वताएँसनु,ँूअँगरेजी क । दोपहर को मनेक वता पढऩेक कोिशश क तो तबीयत नह ंलगी और शाम को लगा क अगर क वता नह ंसनुगँूी तो िसर फट जाएगा।'' सधुा बोली। ''आपकेमन म कुछ सघंष मालमू पड़ता है, या शायद...एक बात पछूूँआपस?े'' '' या, पिूछए?'' ''आप बरुा तो नह ंमानगी?'' ''नह ं, बरुा य मानगँूी?'' ''आप कपरूको यार तो नह ंकरतीं? उससेववाह तो नह ंकरना चाहतीं?'' ''िछह, िमस प मी, आप कैसी बात कर रह ह। उसका मरेेजीवन म कोई ऐसा थान नह ं। िछह, आपक बात सनुकर शर र म काँटेउठ आतेह। म और च दर सेववाह क ँगी! इतनी िघनौनी बात तो मनेकभी नह ंसनुी!'' ''माफ क जएगा, मनेय ह पछूा था। या च दर कसी को यार करता है?'' ''नह ं, ब कुल नह ं!'' सधुा नेउतनेह व ास सेकहा जतनेव ास सेउसनेअपनेबारेम कहा था।

इतनेम च दर और बनती आ गय।ेसधुा बोली अधीरता स,े''मरेा एक-एक ण कटना मुकल हो रहा है, आप शु क जए कुछ गाना!'' ''कपरू, या सनुोगे?'' प मी नेकहा। ''अपनेमन सेसनुाओ! चलो, सधुा नेकहा तो क वता सनुनेको िमली!'' प मी नेआलमार सेएक कताब उठायी और एक क वता गाना शु क -अपनी हेयर पन िनकालकर मजे पर रख द और उसकेबाल मचलनेलगे। च दर केक धेसेवह टककर बठै गयी और कताब च दर क गोद म रख द । बनती मसुकरायी तो सधुा नेआँख केइशारेसेमना कर दया। प मी नेगाना शु कया, लडे नाटन का एक गीत- म तुह यार नह ंकरती हूँन! म तुह यार नह ंकरती हूँ। फर भी म उदास रहती हूँजब तमु पास नह ंहोतेहो! और म उस चमकदार नीलेआकाश सेभी ई या करती हूँ जसकेनीचेतमु खड़ेहोगेऔर जसकेिसतारेतुह देख सकतेह...'' च दर नेप मी क ओर देखा। सधुा नेअपनेह व म अपना िसर छुपा िलया। प मी नेएक पद समा कर एक गहर साँस ली और फर शु कया- ''म तुह यार नह ंकरती हूँ- फर भी तुहार बोलती हुई आँख; जनक नीिलमा म गहराई, चमक और अिभ य है- मरे िनिनमषेपलक और जागतेअधरा केआकाश म नाच जाती ह! और कसी क आँख केबारेम ऐसा नह ंहोता...'' सधुा नेबनती को अपनेपास खींच िलया और उसकेक धेपर िसर टेककर बठै गयी। प मी गाती गयी- ''न मझुेमालमू हैक म तुह यार नह ंकरती हूँ, लेकन फर भी, कोई शायद मरेेसाफ दल पर व ास नह ंकरेगा। और अकसर मनेदेखा है, क लोग मझुेदेखकर मसुकरा देतेह य क म उधर एकटक देखती हूँ, जधर सेतमु आया करतेहो!'' गीत का वर बड़े वाभा वक ढंग सेउठा, लहरानेलगा, काँप उठा और फर धीरे-धीरेएक क ण िससकती हुई लय म डूब गया। गीत ख म हुआ तो सधुा का िसर बनती केकंधेपर था और च दर का हाथ प मी केक धेपर। च दर थोड़ देर सधुा क ओर देखता रहा फर प मी क एक ह क सनुहर लट सेखेलतेहुए बोला, ''प मी, तमु बहुत

अ छा गाती हो!'' ''अ छा? आ यजनक! कहो च दर, प मी इतनी अ छ हैयह तमुनेकभी नह ंबताया था, हम फर कभी सनुाइएगा?'' ''हाँ, हाँिमस शुला! काश क बजाय लडे नाटन केयह गीत आपनेिलखा होता!'' सधुा घबरा गयी, ''चलो। च दर, चल अब! चलो।'' उसनेच दर का हाथ पकडक़र खींच िलया-''िमस प मी, अब फर कभी आएगँे। आज मरेा मन ठ क नह ंहै।'' च दर ाइव करनेलगा। बनती बोली, ''हम आगेहवा लगती है, हम पीछेबठैगे।'' कार चली तो सधुा बोली, ''अब मन कुछ शा त है, च दर। इसकेपहलेतो मन म कैसेतफूान आपस म लड़ रहे थे, कुछ समझ म नह ंआता। अब तफूान बीत गय।ेतफूान केबाद क खामोश उदासी है।'' सधुा नेगहर साँस ली, ''आज जाने य बदन टूट रहा है।'' बठैेह बठैेबदन उमठेतेहुए कहा। दसूरेदन च दर गया तो सधुा को बखुार आ गया था। अंग-अंग जैसेटूट रहा हो और आँख म ऐसी तीखी जलन क मानो कसी नेअंगारेभर दयेह । रात-भर वह बचेैन रह , आधी पागल-सी रह । उसनेत कया, चादर, पानी का िगलास सभी उठाकर फक दया, बनती को कभी बलुाकर पास बठा लतेी, कभी उसेदरूढकेल देती। डॉ टर साहब परेशान, रात-भर सधुा केपास बठैे, कभी उसका माथा, कभी उसकेतलव म बफ मलतेरहे। डॉ टर घोष नेबताया यह कल क गरमी का असर है। बनती नेएक बार पछूा, ''च दर को बलुवा द?'' तो सधुा नेकहा, ''नह ं, म मर जाऊँतो! मरेेजीतेजी नह ं!'' बनती ने ाइवर सेकहा, ''च दर को बलुा लाओ।'' तो सधुा नेबगडक़र कहा, '' य तमु सब लोग मरे जान लनेेपर तलुेहो?'' और उसकेबाद कमजोर सेहाँफनेलगी। ाइवर च दर को बलुानेनह ंगया। जब च दर पहुँचा तो डॉ टर साहब रात-भर केजागरण केबाद उठकर नहान-ेधोनेजा रहेथे। ''पता नह ंसधुा को या हो गया कल स!ेइस व तो कुछ शा त हैपर रात-भर बखुार और बहेद बचेैनी रह है। और एक ह दन म इतनी िचड़िचड़ हो गयी हैक बस...'' डॉ टर साहब नेच दर को देखतेह कहा। च दर जब कमरेम पहुँचा तो देखा क सधुा आँख ब द कयेहुए लटे हैऔर बनती उसकेिसर पर आइस-बगै रखेहुए है। सधुा का चेहरा पीला पड़ गया हैऔर महँुपर जानेकतनी ह रेखाओंक उलझन है, आँख ब द ह और पलक केनीचेसेअँगार क आँच छनकर आ रह है। च दर क आहट पातेह सधुा नेआँख खोलीं। अजब-सी आ नये िनगाह सेच दर क ओर देखा और बनती सेबोली, '' बनती, इनसेकह दो जाएँयहाँस।े'' बनती त ध, च दर नह ंसमझा, पास आकर बठै गया, बोला, ''सधुा, य , पड़ गयी न, मनेकहा था क गैरेज म मोटर साफ मत करो। परस इतना रोयी, िसर पटका, कल धूप खायी। आज पड़ रह ! कैसी तबीयत है?'' सधुा उधर खसक गयी और अपनेकपड़ेसमटेिलय,ेजैसेच दर क छाँह सेभी बचना चाहती हैऔर तजे, कड़वी और हाँफती हुई आवाज म बोली, '' बनती, इनसेकह दो जाएँयहाँस।े'' च दर चुप हो गया और एकटक सधुा क ओर देखनेलगा और सधुा क बात नेजैसेच दर का मन मरोड़ दया।

कतनी गैरयत सेबात कर रह हैसधुा! सधुा, जो उसकेअपनेय व से यादा अपनी थी, आज कस वर म बोल रह है! ''सधुी, या हुआ तुह?'' च दर नेबहुत आहत हो बहुत दलुार-भर आवाज म पछूा। ''म कहती हूँजाओगेनह ंतमु?'' फुफकारकर सधुा बोली, ''कौन हो तमु मरे बीमार पर सहानभुिूत कट करने वाल?े मरे कुशल पछूनेवाल?े म बीमार हूँ, म मर रह हूँ, तमुसेमतलब? तमु कौन हो? मरेेभाई हो? मरेेपता हो? कल अपनेिम केयहाँमरेा अपमान करानेलेगयेथे!'' सधुा हाँफनेलगी। ''अपमान! कसनेतुहारा अपमान कया, सधुा? प मी नेतो कुछ भी नह ंकहा? तमु पागल तो नह ंहो गयीं?'' च दर नेसधुा केपरै पर हाथ रखतेहुए कहा। ''पागल हो नह ंगयी तो हो जाऊँगी!'' उसनेपरैहटा िलय,े''तमु, प मी, गेस,ूपापा डॉ टर सब लोग िमलकर मझुे पागल कर दोगे। पापा कहतेहैयाह करो, प मी कहती हैमत करो, गेसूकहती हैतमु यार करती हो और तमु...तमु कुछ भी नह ंकहत।ेतमु मझुेइस नरक म बरस सेसलुगतेदेख रहेहो और बजाय इसके क तमु कुछ कहो, तमुने मझुेखुद इस भ ट म ढकेल दया!...च दर, म पागल हूँ, म या क ँ?'' सधुा बड़ेकातर वर म बोली। च दर चुप था। िसफ िसर झुकाय,ेहाथ पर माथा रखेबठैा था। सधुा थोड़ देर हाँफती रह । फर बोली- ''तुह या हक था कल प मी केयहाँलेजानेका? उसने य कल गीत म कहा क म तुह यार करती हूँ?'' सधुा बोली। च दर नेबनती क ओर देखा-'' य बनती? बनती सेम कुछ नह ंिछपाता!'' '' य प मी नेकल कहा, म तुह यार नह ंकरती! मरेा मन मझुेधोखा नह ंदेसकता। म तमुसेिसफ जाने या करती हूँ... फर प मी नेकल ऐसी बात य कह ? मरेेरोम-रोम म जानेकौन-सा वालामखुी धधक उठता हैऐसी बात सनुकर? तमु य प मी के यहाँलेगय?े'' ''तमु खुद गयी थीं, सधुा!'' च दर बोला। ''तो तमु रोक नह ंसकतेथे! तमु कह देतेमत जाओ तो म कभी जा सकती थी? तमुने य नह ंरोका? तमु हाथ पकड़ लते।ेतमु डाँट देत।ेतमुने य नह ंडाँटा? एक ह दन म म तुहार गैर हो गयी? गैर हूँतो फर य आयेहो? जाओ यहाँस।ेम कहती हूँ; जाओ यहाँस?े'' दाँत पीसकर सधुा बोली। ''सधुा...'' ''म तुहार बोली नह ंसनुना चाहती। जातेहो क नह ं...'' और सधुा नेअपनेमाथेपर सेउठाकर आइस-बगै फक दया। बनती च क उठ । च दर च क उठा। उसनेमडुक़र सधुा क ओर देखा। सधुा का चेहरा डरावना लग रहा था। उसका मन रो आया। वह उठा, ण-भर सधुा क ओर देखता रहा और धीरे-धीरेकमरेसेबाहर चला गया। बरामदेकेसोफेपर आकर िसर झुकाकर बठै गया और सोचनेलगा, यह सधुा को या हो गया? परस शाम को वह इसी सोफेपर सोया था, सधुा बठै पखंा झल रह थी। कल शाम को वह हँस रह थी, लगता था तफूान शा त हो गया पर यह या? अ त नेयह प कैसेलेिलया? और य लेिलया? जब वह अपनेमन को शा त रख सकता है, जब वह सभी कुछ हँसत-ेहँसतेबरदा त कर

सकता हैतो सधुा य नह ंकर सकती? उसनेआज तक अपनी साँस सेसधुा का िनमाण कया है। सधुा को ितल- ितल बनाया, सजाया, सवँारा हैफर सधुा म यह कमजोर य ? या उसनेयह रा ता अ तयार करकेभलू क ? या सधुा भी एक साधारण-सी लड़क हैजसके मे और घणृा का तर उतना ह साधारण है? माना उसनेअपनेदोन केिलए एक ऐसा रा ता अपनाया हैजो वल ण हैलेकन इससे या! सधुा और वह दोन ह या वल ण नह ंह? फर सधुा य बखर रह है? लड़ कयाँभावना क ह बनी होती ह? साधना उ ह आती ह नह ं या? उसनेसधुा का गलत मूयांकन कया था? या सधुा इस 'तलवार क धार' पर चलनेम असमथ सा बत होगी? यह तो च दर क हार थी। और फर सधुा ऐसी ह रह तो च दर? सधुा च दर क आ मा है; इसेअब च दर खूब अ छ तरह पहचान गया। तो या अपनी ह आ मा को घ ट डालनेक ह या का पाप च दर केिसर पर है? तो या याग मा नाम ह है? या पुष और नार केस ब ध का एक ह रा ता है- णय, ववाह और तिृ! प व ता, याग और दरू या स ब ध को, व ास को ज दा नह ंरहनेदेसकत?ेतो फर सधुा और प मी म या अ तर है? या सधुा के दय केइतनेसमीप रहकर, सधुा के य व म घलु-िमलकर और आज सधुा को इतने अ तर पर डालकर च दर पाप कर रहा है? तो या फूल को तोड़कर अपनेह बटन होल म लगा लनेा ह पुय हैऔर दसूरा रा ता ग हत है? वनाशकार है? य उसनेसधुा का य व तोड़ दया है? कसी नेउसकेक धेपर हाथ रखा। वचार-शखंृला टूट गयी... बनती थी। '' या सोच रहेह आप?'' बनती ने पछूा, बहुत नहेस।े ''कुछ नह ं!'' ''नह ंबताइएगा? हम नह ंजान सकत?े'' बनती के वर म ऐसा आ ह, ऐसा अपनापन, ऐसी िन छलता रहती थी क च दर अपनेको कभी नह ंरोक पाता था। िछपा नह ंपाता था। ''कुछ नह ंबनती! तमु कहती हो, सधुा को इतनेअ तर पर मनेरखा तो म देवता हूँ! सधुा कहती है, मनेअ तर पर रखा, मनेपाप कया! जाने या कया हैमन?े या मझुेकम तकलीफ है? मरेा जीवन आजकल कस तरह घायल हो गया है, म जानता हूँ। एक पल मझुेआराम नह ंिमलता। या उतनी सजा काफ नह ंथी जो सधुा को भी क मत यह द ड देरह है? मझुी को सभी बचैनी और द:ुख िमल जाता। सधुा को मरेेपाप का द ड य िमल रहा है? बनती, तमुसेअब कुछ नह ंिछपा। जसको म अपनी साँस म दबुकाकर इ धनषुकेलोक तक लेगया, आज हवा के झ केउसेबादल क ऊँचाई से य ढकेल देना चाहतेह? और म कुछ भी नह ंकर सकता?'' इतनी देर बाद बनती के ममता-भरे पश म च दर क आँख छलछला आयीं। ''िछह, आप समझदार ह! द द ठ क हो जाएगँी! घबरानेसेकाम नह ंचलगेा न! आपको हमार कसम है। उदास मत होइए। कुछ सोिचए मत। द द बीमार ह, आप इस तरह सेकरगेतो कैसेकाम चलगेा! उ ठए, द द बलुा रह ह।'' च दर गया। सधुा नेइशारेसेपास बलुाकर बठा िलया। ''च दर, हमारा दमाग ठ क नह ंहै। बठै जाओ लेकन कुछ बोलना मत, बठैेरहो।''

उसकेबाद दन भर अजब-सा गुजरा। जब-जब च दर नेउठनेक कोिशश क , सधुा नेउसेखींचकर बठा िलया। घर तो उसेजानेह नह ंदया। बनती वह ंखाना लेआयी। सधुा कभी च दर क ओर देख लतेी। फर त कयेम महँु गड़ा लतेी। बोली एक श द भी नह ं, लेकन उसक आँख म अजब-सी कातरता थी। पापा आय,ेघटं बठैेरहे; पापा चले गयेतो उसनेच दर का हाथ अपनेहाथ म लेिलया, करवट बदली और त कयेपर अपनेकपोल सेच दर क हथेली दबाकर लटे रह । पलक सेकतनेह गरम-गरम आँसूछलककर गाल पर फसलकर च दर क हथेली िभगोतेरहे। च दर चुप रहा। लेकन सधुा केआँसूजैसेनस केसहारेउसके दय म उतर गयेऔर जब दय डूबनेलगा तो उसक पलक पर उतर आय।ेसधुा नेदेखा लेकन कुछ भी नह ंबोली। घटंा-भर बहुत गहर साँस ली; बहेद उदासी से मसुकराकर कहा, ''हम दोन पागल हो गयेह, य च दर? अ छा, अब शाम हो गयी। जरा लॉन पर चल।'' सधुा च दर केक धेपर हाथ रखकर खड़ हो गयी। बनती नेदवा द , थमामीटर सेबखुार देखा। बखुार नह ं था। च दर नेसधुा केिलए कुरसी उठायी। सधुा नेहँसकर कहा, ''च दर, आज बीमार हूँतो कुरसी उठा रहेहो, मर जाऊँगी तो अरथी उठानेभी आना, वरना नरक िमलगेा! समझेन!'' ''िछह, ऐसा कुबोल न बोला करो, द द ?'' सधुा लॉन म कुरसी पर बठै गयी। बगल म नीचेच दर बठै गया। सधुा नेच दर का िसर अपनी कुरसी म टका िलया और अपनी उँगिलय सेच दर केसखूेहोठ को छूतेहुए कहा, ''च दर, आज मनेतुह बहुत द:ुखी कया, य ? लेकन जाने य , द:ुखी न करती तो आज मझुेवह ताकत न िमलती जो िमल गयी।'' और सहसा च दर केिसर को अपनी गोद म खींचती हुई-सी सधुा नेकहा, ''आरा य मरेे! आज तुह बहुत-सी बात बताऊँगी। बहुत-सी।'' बनती उठकर जानेलगी तो सधुा नेकहा, ''कहाँचली? बठै तूयहाँ। तूगवाह रहेगी ता क बाद म च दर यह न कहेक सधुा कमजोर िनकल गयी।'' बनती बठै गयी। सधुा ने ण-भर आँख ब द कर लींऔर अपनी वणेी पीठ पर सेखींचकर गोद म ढाल ली और बोली, ''च दर, आज कतनेह साल हुए, जबसेमनेतुह जाना है, तब सेअ छे-बरुे सभी काम का फैसला तुह करतेरहेहो। आज भी तुह ंबताओ च दर क अगर म अपनेको बहुत सभँालनेक कोिशश करती हूँऔर नह ंसभँाल पाती हूँ, तो यह कोई पाप तो नह ं? तमु जानतेहो च दर, तमु जतनेमजबतू हो उस पर मझुेघमडंहैक तमु कतनी ऊँचाई पर हो, म भी उतना ह मजबतू बननेक कोिशश करती हूँ, उतनेह ऊँचे उठनेक कोिशश करती हूँ, अगर कभी-कभी फसल जाती हूँतो यह अपराध तो नह ं?'' ''नह ं।'' च दर बोला। ''और अगर अपनेउस अ त के ण म तमु पर कठोर हो जाती हूँ, तो तमु सह लतेेहो। म जानती हूँ, तमु मझुेजतना नहेकरतेहो, उसम मरे सभी दबुलताएँधुल जाती ह। लेकन आज म तुह व ास दलाती हूँच दर क मझुेखुद अपनी दबुलताओंपर शरम आती हैऔर आगेसेम वसैी ह बनगँूी जैसा तमुनेसोचा है, च दर।'' च दर कुछ नह ंबोला िसफ घास पर रखेहुए सधुा केपाँव पर अपनी काँपती उँगिलयाँरख द ं। सधुा कहती गयी, ''च दर, आज सेकुछ ह मह नेपहलेजब गेसूनेमझुसेपछूा था क तुहारा दल कह ंझुका था तो मनेइनकार कर दया था, कल प मी नेपछूा, तमु च दर को यार करती हो तो मनेइनकार कर दया था, म आज भी इनकार करती


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